अब दिल्ली में फंस गई फिल्म पद्मावती। ====

#3337
अब दिल्ली में फंस गई फिल्म पद्मावती।
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निर्माता निर्देशक संजय लीला भंसाली की विवादित फिल्म अब दिल्ली में फंस गई है। 30 नवम्बर को इस फिल्म को लेकर दिल्ली में संसदीय समिति और पिटीशन कमेटी की बैठकें हुई। इन दोनों ही बैठकों में यह माना गया कि पहले फिल्म की समीक्षा की जाएगी और समीक्षा इतिहासकार करेगें। अब फिल्म की समीक्षा कब होगी यह भगवान ही जानता है। पिटीशन कमेटी की बैठक में सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष प्रसून जोशी, चित्तौड़ के सांसद सीपी जोशी, कोटा के सांसद ओम बिड़ला के साथ-साथ सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। सांसद सीपी जोशी का बैठक में साफ-साफ कहना रहा कि इस फिल्म को लेकर पूरे राजस्थान में राजपूत समाज आंदोलन कर रहा है। ऐसे में फिल्म में ऐसा कोई दृश्य नहीं होना चाहिए जो वीरांगना पद्मावती के सम्मान को कम करता हो। जोशी ने कहा कि हमें लोगों की भावनाओं का ख्याल भी रखना चाहिए। बैठक में सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष प्रसून जोशी ने कहा कि अभी इस फिल्म को अनुमति ही नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि सेंसर बोर्ड विस्तृत समीक्षा के बाद ही अनुमति देगा। बैठक में जोशी ने सेंसर बोर्ड की अनुमति से पहले ही मीडिया के एक वर्ग को फिल्म दिखाए जाने पर नाराजगी जताई। इस बैठक के बाद सांसद अनुराग ठाकुर की अध्यक्षता में संसदीय समिति की बैठक हुई। इस बैठक में ठाकुर का कहना रहा कि किसी भी निर्माता को इतिहास के साथ छेड़छाड़ की अनुमति नहीं दी जाएगी। इस बैठक में निर्माता-निर्देशक भंसाली भी उपस्थित रहे।
हालांकि उन्होंने बार-बार कहा कि उनकी फिल्म में अलाउद्दीन खिलजी और पद्मावती के प्रेस प्रसंग के दृश्य नहीं है और पूरी फिल्म रानी पद्मावती के शौर्य और वीरता पर फिल्माई गई है। इसके विपरीत अलाउद्दीन खिलजी को एक आक्रमणकारी और स्त्री लोलुप दिखाई गया है। लेकिन भंसाली के कथन पर किसी ने भी विश्वास नहीं किया और सर्वसम्मिति से यह तय किया गया कि इतिहासकारों की समीक्षा के बाद ही फिल्म के प्रदर्शन पर कोई निर्णय होगा। यानि जो पद्मावती फिल्म पहले मुम्बई के सेंसर बोर्ड में फंसी हुई मानी जा रही थी वह अब दिल्ली में सांसद के बीच फंस गई है।
एस.पी.मित्तल) (30-11-17)
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आखिर सीएम राजे ने विधानसभा और लोकसभा चुनाव तक का डीजीपी बना दिया। तीन आईपीएस की वरिष्ठता को दरकिनार कर ओपी गल्होत्रा को सौंपी राजस्थान पुलिस की कमान।

#3336
आखिर सीएम राजे ने विधानसभा और लोकसभा चुनाव तक का डीजीपी बना दिया। तीन आईपीएस की वरिष्ठता को दरकिनार कर ओपी गल्होत्रा को सौंपी राजस्थान पुलिस की कमान।
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30 नवम्बर को राजस्थान के तीन आईपीएस अधिकारियों की वरिष्ठता को दरकिनार कर जूनियर आईपीएस ओपी गल्होत्रा को नया डीजीपी नियुक्त कर दिया गया है। गल्होत्रा को अजीत सिंह के स्थान पर नियुक्ति दी गई है। अजीत सिंह चार माह डीजीपी रहने के बाद तीस नवम्बर को सेवानिवृत हो गए। हालांकि नवदीप सिंह, कपिल गर्ग और सुनील कुमार मेहरोत्रा सीनियर थे, लेकिन सीएम वसुंधरा राजे की पसंद होने की वजह से जूनियर गल्होत्रा को डीजीपी बनाया गया है। गल्होत्रा की सेवानिवृत्ति 2019 में होगी यानि वे अगले वर्ष होने वाले विधानसभा तथा फिर मई 2019 में होने वाले लोकसभा के चुनाव तक डीजीपी रहेंगे। हालांकि गल्होत्रा अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक के पद पर कार्यरत थे, लेकिन 30 नवम्बर को गल्होत्रा की पदोन्नति डीजीपी के पद पर कर दी गई इसके साथ ही उनके सीनियर सुनील मेहरोत्रा को भी डीजी के पद पर पदोन्नत किया गया है। पहले यह माना जा रहा था कि अजीत सिंह के कार्यकाल को विस्तार दिया जाएगा, लेकिन केन्द्र सरकार की ओर से हरी झंडी नहीं मिलने की वजह से अजीत को निर्धारित समय पर ही सेवानिवृति देनी पड़ी।
साप्ताहिक अवकाश पर विचार-गल्होत्रा
नई डीजीपी गल्होत्रा ने मीडिया से कहा कि पुलिस के जवानों के वेलफेयर के लिए अपने कार्यकाल में जो कुछ भी कर सकते हैं करेंगे। जवानों को साप्ताहिक अवकाश के सवाल पर गल्होत्रा ने कहा कि इस संबंध में आवश्यकता होने पर राज्य सरकार से भी वार्ता की जाएगी। उन्होंने माना कि जवानों का काम बेहद कठिन होता है इसलिए उन्हें पर्याप्त सुविधाएं मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता प्रदेश में कानून व्यवस्था बनाए रखने की होगी। गल्होत्रा ने 30 नवम्बर की शाम को ही डीजीपी का पद संभाल लिया। इससे पहले अजीत सिंह को शानदार विदाई दी गई।
एस.पी.मित्तल) (30-11-17)
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आखिर कांग्रेसियों ने लगा दी इंदिरा गांधी की प्रतिमा। फोटो खिंचवाई और कपड़े से ढक दिया। अब पायलट करेंगे अनावरण।

#3335
आखिर कांग्रेसियों ने लगा दी इंदिरा गांधी की प्रतिमा। फोटो खिंचवाई और कपड़े से ढक दिया। अब पायलट करेंगे अनावरण।
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30 नवम्बर को आखिरकार अजमेर में स्टेशन रोड स्थित स्मारक पर पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी की प्रतिमा स्थापित कर ही दी गई। प्रतिमा को लगाने के साथ ही अजमेर के कांग्रेसियों ने प्रतिमा के साथ फोटो खिंचवाया और कपड़े से प्रतिमा को ढक दिया। अब इस प्रतिमा का अनावरण जल्द ही प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट करेंगे। शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विजय जैन ने बताया कि प्रतिमा लगाने के लिए कांग्रेस को लम्बा संघर्ष करना पड़ा है। इस प्रतिमा को अजमेर विकास प्राधिकरण से शुल्क देकर खरीदा गया है। प्रतिमा लगने से शहर भर के कार्यकर्ताओं में उत्साह है। प्रतिमा लगाने की जानकारी प्रदेश अध्यक्ष पायलट को दे दी गई है और अब जल्द ही पायलट अजमेर आकर इस प्रतिमा का अनावरण करेंगे।
एस.पी.मित्तल) (30-11-17)
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किशनगढ़-उदयपुर के हवाई टिकिट पर राज्य सरकार देगी ढाई हजार रुपए का अनुदान। ढाई हजार रुपए यात्री से लेने के बाद भी सुप्रीम आॅर्गेनाइजेशन को एक हजार रुपए का घाटा। आखिर कैसे सफल होगा किशनगढ़ का एयरपोर्ट। =

#3334
किशनगढ़-उदयपुर के हवाई टिकिट पर राज्य सरकार देगी ढाई हजार रुपए का अनुदान। ढाई हजार रुपए यात्री से लेने के बाद भी सुप्रीम आॅर्गेनाइजेशन को एक हजार रुपए का घाटा। आखिर कैसे सफल होगा किशनगढ़ का एयरपोर्ट।
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गत 11 अक्टूबर को राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे ने अजमेर में किशनगढ़ एयरपोर्ट का उद्घाटन तो कर दिया, लेकिन अब इस एयरपोर्ट से विमान सेवाएं शुरू करने में सरकार को पसीने आ रहे हैं। यदि यात्रियों से वास्तविक किराया वसूला जाए तो शायद किशनगढ़ एयरपोर्ट चालू ही नहीं हो सके। इसलिए राज्य सरकार ने सुप्रीम आर्गेनाइजेशन से प्रदेशभर में हवाई सेवाओं के लिए एक समौता किया है। इस समझौते के तहत ही एक दिसम्बर से किशनगढ़ और उदयपुर के बीच हवाई सेवा शुरू हो रही है। सुप्रीम आर्गेनाजेशन के सीईओ अमित अग्रवाल ने बताया कि किशनगढ़-उदयपुर के बीच का किराया 6 हजार 500 रुपए होता है, लेकिन फिलहाल यात्रियों से मात्र ढाई हजार रुपए ही लिए जाएंगे। समझौते के अनुरूप प्रति यात्री सरकार ढाई हजार रुपए का अनुदान देगी। यही वजह है कि एक हजार रुपए का घाटा हमारी कंपनी को फिलहाल उठाना पड़ेगा। अग्रवाल ने कहा कि सीएम वसंुधरा राजे चाहती हैं कि मध्यमवर्गीय परिवार के सदस्य भी हवाई यात्रा का आनंद ले सकें। सरकार ने जो सुविधा दी है उसका लाभ अधिक से अधिक लोगों को उठाना चाहिए। फिलहाल उनकी कंपनी 9 सीटर वाला विमान शुरू कर रही हैं। भविष्य में ट्रैफिक बढ़ेगा तो बड़ा विमान काम में लिया जाएगा। अग्रवाल ने बताया कि उनकी कंपनी ही समझौते के तहत जयपुर, उदयपुर, बीकानेर, जोधपुर, जैसलमेर आदि में हवाई सेवाएं दे रही हैं। किशनगढ़-उदयपुर की नई सेवा का समय उदयपुर से प्रातः11ः15 पर उड़ान का रखा गया है जो 12ः15 पर किशनगढ़ पहुंचेगी। किशनगढ़ से ही विमान 12ः30 पर उदयपुर के लिए रवाना होगा।
दिल्ली हवाई सेवा के लिए नहीं मिली अनुमतिः
किशनगढ़ एयरपोर्ट के निदेशक अशोक कपूर ने बताया कि दिल्ली हवाई सेवा के लिए अभी अनुमति नहीं मिली है। हालांकि जूम एयरलाइंस किशनगढ़ से दिल्ली के बीच अपनी सेवाएं देने को तैयार हैं, लेकिन अभी दिल्ली के एयरपोर्ट पर विमान के उतरने और उड़ान भरने की व्यवस्था नहीं हो रही है। उन्होंने माना कि दिल्ली सेवाओं में विलंब हो रहा है। उन्होंने बताया कि 1 दिसम्बर से उदयपुर के लिए शुरू होने वाली सेवा की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है।
आखिर किसे मिलेगा लाभ?ः
हवाई जहाज में हवाई चप्पल वाला भी यात्रा करे, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस सपने को पूरा करने के लिए राजस्थान की सीएम वसंुधरा राजे प्रति यात्री भारी भरकम अनुदान दे रही हैं, लेकिन सवाल उठता है कि सरकार के अनुदान का लाभ किसे मिलेगा? क्या वाकई किशनगढ़ या उदयपुर का कोई ठेलेवाला हवाई चप्पल पहनकर सुप्रीम आॅर्गेनाइजेशन के विमान में यात्रा करेगा? फिलहाल तो ऐसा संभव नहीं लगता। इसलिए माना जा रहा है कि सरकार के अनुदान का लाभ धनाढ्य व्यक्ति ही उठाएंगें।
50 दिन बाद भी सिर्फ उदयपुरः
सीएम राजे ने किशनगढ़ एयरपोर्ट का उद्घाटन 11 अक्टूबर को किया था। 50 दिन गुजर जाने के बाद भी सिर्फ उदयपुर के लिए सेवाएं शुरू हुई हैं। यह सेवा भी 24 घंटे में मात्र एक बार के लिए हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि किशनगढ़ का एयरपोर्ट कितना सफल होगा। एक ओर सरकार यात्रियों के टिकिट पर हजारों रुपए का अनुदान दे रही है, वहीं एयरपोर्ट के संचालन पर प्रतिघंटे करोड़ों रुपए खर्च हो रहा है।
एस.पी.मित्तल) (30-11-17)
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अजमेर की जिला प्रमुख के तौर पर अब याद आती हैं सुशील कंवर पलाड़ा। आखिर वंदना नोगिया की बैठकों में क्यों नहीं आते अफसर?

#3333
अजमेर की जिला प्रमुख के तौर पर अब याद आती हैं सुशील कंवर पलाड़ा। आखिर वंदना नोगिया की बैठकों में क्यों नहीं आते अफसर?
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29 नवम्बर को अजमेर जिला परिषद की आयोजना समिति की बैठक ऐन मौके पर इसलिए रद्द करनी पड़ी कि संबंध्ंिात विभागों के अधिकारी आए ही नहीं। जबकि जिला प्रमुख वंदना नोगिया और सीईओ अरुण गर्ग तय समय पर पहुंच गए थे। जिन अफसरों को बैठक में आना था उनका कहना है कि जिला परिषद बैठक की सूचना मिली ही नहीं, जबकि सीईओ गर्ग का दावा है कि सूचना इनको भिजवाई गई थी। असल में किसी भी निर्वाचित संस्था में मुखिया का असर सबसे ज्यादा होता है। यदि मुखिया असरदार हो तो अफसरशाही हर हुक्म मानती है। जिला परिषद की बैठकों में अफसरों के नहीं पहुंचने की शिकायत आम है। कई बार बैठकों को रद्द किया जाता है। अब जब अजमेर में लोकसभा के उपचुनाव होने हैं, तब यदि जिला परिषद जैसी महत्वपूर्ण संस्था में आयोजना समिति की बैठक भी नहीं हो सके तो यह सत्तारुढ़ भाजपा की स्थिति पर सवालिया निशान लगाती है। यह जिला प्रमुख के लिए भी अच्छी बात नहीं है। और जब बार-बार ऐसी घटनाएं होती हैं तो राजनीतिक सूझबूझ पर भी प्रश्न चिन्ह लगता है। इन दिनों जिला परिषद के जो हालात सामने आए हैं उनमें पूर्व जिला प्रमुख सुशील कंवर पलाड़ा की याद अब सभी को आ रही है। पलाड़ा की अध्यक्षता में होने वाली बैठकों में अफसर ही नहीं विधायक एवं अन्य जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहते थे। पलाड़ा के कार्यकाल में सभी विभागों के अधिकारी बैठकों के प्रति जागरुक रहते थे। यहां तक कि जिला परिषद का स्टाफ भी जागरुक और सतर्क रहता था। पलाड़ा जब जिला प्रमुख थीं तब प्रदेश में कांग्रेस का शासन था, लेकिन इसके बावजूद भी पलाड़ा ने पंचायत समिति स्तर पर समस्या समाधान शिविर लगवाए। भले ही पलाड़ा भाजपा की जिला प्रमुख थीं, लेकिन सभी विभागों के अधिकारियों की उपस्थिति रहती थी। विपरीत राजनीतिक परिस्थितियों में भी पलाड़ा ने जिला परिषद को सक्रिय बनाए रखा। अब जबकि प्रदेश में भाजपा की सरकार है, तब भी भाजपा की जिला प्रमुख की बैठक में अफसरों का नहीं आना अपने आप में विचित्र बात हैं। यह माना कि वंदना नोगिया राजनीति में नई हैं, लेकिन अब तो जिला प्रमुंख बने ढाई वर्ष से ज्यादा का समय हो गया है, ऐसे में कुछ तो प्रभाव बनना ही चाहिए। जबकि नोगिया को प्रदेश के स्कूली शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी का भी समर्थन रहता है। देवनानी के प्रयासों से ही नोगिया जिला प्रमुख बन पाई थीं। देवनानी भी नोगिया को आगे बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं, लेकिन नोगिया को अपनी भी राजनीतिक सूझबूझ दिखानी होीग। नोगिया पढ़ी लिखी युवा हैं, इसलिए जिले भर के लोगों खास कर ग्रामीणों को बहुत उम्मीदें हैं। अब जब सभी राजनीतिक परिस्थितियां अनुकूल हैं तो नोगिया को भी कार्य कुशलता दिखानी होगी। अफसरशाही उसे ही नमस्कार करती हैं, जिसके पास खुद का चमत्कार होता है।

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आसान नहीं है अध्यात्म और धर्म की राह पर चलना। पूरा जीवन खप जाता है मानव मात्र की सेवा में। अजमेर के सेंट एंसलम और बिजयनगर के सेंट पाॅल स्कूल के प्राचार्यों के धर्म की राह के 25 वर्ष पूरे होने पर विशेष।

#3329
आसान नहीं है अध्यात्म और धर्म की राह पर चलना। पूरा जीवन खप जाता है मानव मात्र की सेवा में। अजमेर के सेंट एंसलम और बिजयनगर के सेंट पाॅल स्कूल के प्राचार्यों के धर्म की राह के 25 वर्ष पूरे होने पर विशेष।
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आज भले ही धर्म की राह पर चल कर अनेक धर्मगुरु ऐशोआराम की जिन्दगी जी रहे हों, लेकिन जो व्यक्ति सही मायने में धर्म की राह पर चल कर मानवमात्र की सेवा करता है, उसका धर्म की राह पर चलना आसान नहीं होता है। इसी भावना से अजमेर के सेंट एंसलम स्कूल के प्राचार्य फादर सुसई मणिक्कम और अजमेर के बिजयनगर स्थित सेंटपाॅल स्कूल के प्राचार्य केन्टियस लिगोरी ने 25 वर्ष पूर्व ईसाई धर्म के अनुरूप पुरोहित बनने की शपथ ली थी। जब युवा मन आसमान की ऊंचाईयों छूने और धन कमाने के लिए तत्पर होता है, तब इन दोनों युवाओं ने चर्च में प्रभु यीशु की मूर्ति के सामने शपथ ली कि अब अपना पूरा जीवन मानव सेवा में खपा देंगे। इस शपथ के बाद कैथोलिक धर्मगुरुओं ने जो निर्देश दिए, उसकी पालना आज तक की जा रही है। काम को कभी छोटा-बड़ा नहीं माना। दोनों ने अपने धर्म की शिक्षाओं पर चल कर लोगों की सेवा की। इन दोनों को पता है कि एक दिन धर्म की इसी मिट्टी में मिल जाना पड़ेगा, लेकिन किसी भी पद पर रहने पर इन्हें घमंड नहीं होता। ईसाई धर्म की परंपराओं के अनुरूप पुरोहित बनने वाले व्यक्ति को अपना घर-परिवार छोड़ना होता है। अंतिम सांस तक चर्च के अधीन काम करने वाली संस्था में रहना होता है। कोई पुरोहित सम्पत्ति का संचय नहीं करता। शिक्षण, चिकित्सा आदि संस्थाओं में काम करने की एवज में जो पारिश्रमिक मिलता है उसे भी चर्च में ही देना होता है। जो पुरोहित अजमेर के सेंट एंसलम स्कूल जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के मुखिया बन जाते हैं, उन्हें कई बार एडमिशन को लेकर आलोचना भी सहनी होती है। कई बार स्कूल में हंगामा भी होता है। ऐसे मौकों पर अध्यात्मिक की शिक्षा ही काम आती है। लाख आलोचनाओं के बाद भी हर अभिभावक चाहता है कि उनके बच्चों का प्रवेश ईसाई शिक्षण संस्थाओं में ही हो। राजनीतिक दलों के नेता कई बार ईसाई शिक्षण संस्थाओं की आलोचना करते हैं, लेकिन ऐसे अधिकांश नेताओं के बच्चे इन्हीं संस्थाओं में पढ़ते हैं। आज ईसाई शिक्षण संस्थाओं का महत्व इसलिए है कि यहां के प्राचार्य धर्म के अनुरूप जीवन यापन करते हैं। हालांकि अब पब्लिक सेक्टर में अन्य निजी स्कूलें भी आ गई हैं, लेकिन देश में कैथोलिक शिक्षण संस्थाओं का अपना महत्व है। यहां अध्ययन करने वाले बच्चे स्वयं को गौरवांवित समझते हैं। अजमेर के सेंट एंसलम स्कूल के प्राचार्य फादर सुसई मणिक्कम ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा तमिलनाडु में ली और धर्मिक शिक्षा अजमेर में ग्रहण की। पुरोहित बनने के बाद फादर मणिक्कम ने राजस्थान कैथोलिक डायसिस के प्रबंधन का कार्य भी किया। राजस्थान के फालना में नई स्कूल खोलने का श्रेय भी फादर मणिक्कम को ही जाता है। पुरोहित बनने के 25 वर्ष पूरे होने पर फादर मणिक्कम का कहना है कि उनकी परमपिता परमेश्वर से यही इच्छा है कि अंतिम सांस तक सेवा कार्य करुं। उन्होंने कहा कि जब आप मुसीबत में होते हैं तो प्रभु यीशु आपके साथ खड़े होते हैं। उनके जीवन में ऐसे कई मौके आए हैं जब उन्होंने अपने साथ प्रभु यीशु को खड़े देखा है। अध्यात्मिक शक्ति से आप प्रभु के दर्शन भी कर सकते हैं। प्रत्येक मनुष्य में वो ताकत है जिससे प्रभु के दर्शन हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य को हमेशा अच्छे कर्म करने चाहिए। जो व्यक्ति अपने धर्म की राह पर चलता है उसे कभी तकलीफ नहीं होती।
30 नवम्बर को स्कूल परिसर में होगा कार्यक्रमः
फादर सुसई मणिक्कम और फादर केन्टियस लिगोरी के पुरोहित बनने के 25 वर्ष पूरे होने पर 30 नवम्बर को अजमेर के केसरगंज स्थित सेंट एंसलम चर्च परिसर में शाम पांच बजे से आध्यात्मिक धार्मिक आयोजन रखा गया है। इस अवसर पर अजमेर धर्म प्रांत के बिशप पायस थाॅमस डीसूजा, पूर्व बिशप इंगनेशियस मैनेजस, नासिक प्रांत के बिशप लांरडू डेनियल आदि धर्मगुरु उपस्थित रहेंगे। फादर मणिक्कम को मोबाइल नम्बर 9414006022 तथा फादर लिगोरी को 7014178857 पर शुभकामनएं दी जा सकती है। मेरी प्रभु यीशु से प्रार्थना है कि इन दोनों धर्मगुरुओं पर अपनी कृपा बनाए रखें।
एस.पी.मित्तल) (29-11-17)
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जस्टिस क्लाॅक साॅफ्टवेयर के विरोध में अजमेर के वकीलों का प्रदर्शन।

#3330
जस्टिस क्लाॅक साॅफ्टवेयर के विरोध में अजमेर के वकीलों का प्रदर्शन।
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29 नवम्बर को अजमेर के वकीलों ने केन्द्र सरकार के जस्टि क्लाॅक साॅफ्टवेयर के विरोध में प्रदर्शन किया। शहर कांग्रेस कमेटी के महासचिव वैभव जैन के नेतृत्व में एकत्रित हुए वकीलों ने आरोप लगाया कि इस साॅफ्टवेयर के माध्यम से केन्द्र सरकार न्याय पालिका पर दबाव बनाना चाहती है। असल में इस साॅफ्टवेयर के माध्यम से केन्द्र सरकार देशभर की अदालतों में चल रहे मुकदमों का ब्योरा एकत्रित करेगी। वकीलों ने आशंका जताई कि इस साॅफ्टवेयर के माध्यम से जो डेटा एकत्रित होगा उसके जरिए हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट पर दबाव बनाया जाएगा। हो सकता है कि सरकार इस डेटाबेस के आधार पर न्यायाधीशों की रेकिंग भी तय करे जो आगे चलकर पदोन्नति में बाधक हो सकती है। वकीलों ने कहा कि पूर्व में नेशनल ज्यूडिशियल अपाॅइंमेंट कमीशन को भी लाया गया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस कमीशन पर रोक लगा दी। यह कमीशन केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के कोलेजियम के असर को कम करने के लिए बनाया था। असल में केन्द्र सरकार बार बार न्याय पालिका को कमजोर करना चाहती है। वकीलों ने चेतावनी दी कि यदि जस्टिस क्लाॅक साॅफ्टवेयर को बंद नहीं किया गया तो देशभर में आंदोलन किया जाएगा।
एस.पी.मित्तल) (29-11-17)
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नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार मुसलमानों की तरक्की के लिए काम कर रही है। देश के मुस्लिम धर्मगुरुओं ने ख्वाजा साहब की दरगाह में चादर पेश की।

#3331
नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार मुसलमानों की तरक्की के लिए काम कर रही है। देश के मुस्लिम धर्मगुरुओं ने ख्वाजा साहब की दरगाह में चादर पेश की।
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29 नवम्बर को अजमेर स्थित संसार प्रसिद्ध सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में गरीब नवाज एज्युकेशनल एंड डवलपमेंट कौंसिल की ओर से मुस्लिम धर्मगुरुओं ने सूफी परंपरा के अनुरूप चादर पेश की। चादर पेश करने का मकसद नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार का शुक्रिया अदा करना रहा। कौंसिल के अध्यक्ष पूर्व सांसद साबिर अली, कारी मजहरी मियां आदि ने बताया कि देश के आम मुसलमान की तरक्की के लिए भाजपा की सरकार बहुत कुछ कर रही है। आजादी के बाद यह पहला अवसर है जब मुसलमानों की तरक्की के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाओं को लागू किया है। पूर्व की सरकारें मुसलमानों को वोट बैंक मानती रही, जबकि नरेन्द्र मोदी ने हकीकत में तरक्की के काम करवाए। मदरसों के मोर्डनाइजेशन से लेकर सस्ती दर पर लोन देने का काम मोदी सरकार ने ही किया है। कुछ लोग नरेन्द्र मोदी का नाम लेकर मुसलमानों को गुमराह कर रहे हैं। जबकि मोदी बार-बार कह रहे हैं कि सबका साथ सबका विकास सरकार जब कोई योजना लागू करती है तो उसका लाभ आम मुसलमान को भी मिलता है। उन्होंने बताया कि कौंसिल की एक महत्वपूर्ण बैठक केन्द्रीय अल्पसंख्यक मामलात मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी की अध्यक्षता में हुई थी, इस बैठक में 200 से भी ज्यादा मुस्लिम धर्म गुरुओं, विद्वानों आदि ने भाग लिया। इस बैठक में ही यह तय किया गया कि कौंसिल की ओर से देश की प्रमुख दरगाहों में चादर पेश की जाएग और सरकार ने मुसलमानों की तरक्की के लिए जो योजनाएं दी है उसकी जानकारी भी दी जाएगी। चूंकि ख्वाजा साहब की दरगाह प्रमुख दरगाहों में से एक है इसलिए चादर पेश करने की शुरुआत अजमेर से ही की गई है। चादर पेश करने के अवसर पर दरगाह नाजिम आईबी पीरजादा, अंजुमन शेखजादगान के सचिव डाॅ. अब्दुल माजिद चिश्ती, अंजुमन सैयद जादगान के सचिव वाहिद हुसैन अंगाराशाह, शेखजादा जुल्फीकार चिश्ती, आलेबदर चिश्ती, मुसव्वीर चिश्ती, उपाध्यक्ष इकबाल चिश्ती आदि शामिल थे।
एस.पी.मित्तल) (29-11-17)
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एक माह से बंद पड़े हैं राजस्थान लोक सेवा आयोग के फोन। प्रदेशभर के युवा परेशान। सचिव गिरिराज सिंह कुशवाह भी लाचार हैं। ======

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एक माह से बंद पड़े हैं राजस्थान लोक सेवा आयोग के फोन। प्रदेशभर के युवा परेशान। सचिव गिरिराज सिंह कुशवाह भी लाचार हैं।
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इसे बेहद ही अफसोसनाक कहा जाएगा कि अजमेर स्थित राजस्थान लोक सेवा आयोग के टेलीफोन पिछले एक माह से बंद पड़े हैं। चूंकि दो माह से आयोग के अध्यक्ष का पद खाली पड़ा हैं इसलिए फोन को चालू करवाने का निर्णय नहीं हो पा रहा है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि आयोग के फोन बंद होने से प्रदेशभर के युवाओं को कितनी परेशानी हो रही होगी। प्रदेश की सीएम वसुंधरा राजे बार-बार यह दावा करती हैं कि आयोग के माध्यम से युवाओं को नौकरी दिलवाने का काम हो रहा है। जो सरकार आयोग के फोन चालू नहीं करवा सकती है उसके दावों का अंदाजा लगाया जा सकता है। असल में आयोग में एमटीएस कंपनी के फोन लगे हुए थे। अब इस कंपनी ने अपना कारोबार बंद कर दिया, इसलिए आयोग में लगे फोन भी बंद हो गए। हालांकि बीएसएनएल जैसी दूसरी कंपनियां फोनदेने को तैयार हैं, लेकिन इस समय आयोग में छोटे-छोटे निर्णय लेने वाला भी कोई नहीं है। जहां आयोग के अध्यक्ष का पद दो माह से रिक्त है, वहीं आयोग के सचिव गिरिराज सिंह कुशवाह के सीने पर आईएएस का बिल्ला लगा होने के बाद भी वे कोई निर्णय लेने में समक्ष नहीं है। यदि कुशवाह थोड़े से भी समक्ष होते तो कम से कम फोन तो चालू करवा ही सकते थे। इससे राजस्थान के आईएएस अफसरों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
कुशवाह ने टेलीफोन बंद होने की जानकारी राज्य सरकार को लिखित में दे दी हैं, लेकिन सरकार ने कुशवाह के पत्र को गंभीरता के साथ नहीं लिया जा रहा है। इन दिनों आयोग की स्थिति बद से बदत्तर हो गई है। दो माह पहले जब श्याम सुंदर शर्मा अध्यक्ष के पद से रिटायर हुए थे तब सरकार ने आयोग में कार्यवाहक अध्यक्ष भी नहीं बनाया। कहने को तो आयोग एक स्वायत्तशासी संस्था है, लेकिन आयोग के पास वित्तीय अधिकार नहीं है। ऐसे में छोटे-छोटे खर्चे के लिए सरकार से अनुमति लेनी होती है। हालांकि कुछ अधिकार अध्यक्ष को दिए हैं, लेकिन अध्यक्ष के नहीं होने की वजह से टेलीफोन जैसे मामलों भी निर्णय नहीं हो रहा है। आठ लाख अभ्यर्थी द्वितीय श्रेणी अध्यापक परीक्षा के परिणाम का इंतजार कर रहे हैं जो सरकार युवाओं को रोजगार देने का दावा कर रही है उसी सरकार ने बेरोजगारों को नौकरी देने वाले संस्थान का भट्टा बैठा रखा है।
एस.पी.मित्तल) (29-11-17)
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आखिर बुजुर्ग नागरिक एसएन गर्ग को मिला दस हजार रुपए का मुआवजा। आईएएस आरुषि मलिक ने अजमेर के कलेक्टर के पद पर रहते हुए किया था दुव्र्यवहार। गर्ग ने सीएम सहायता कोष में जमा कराई राशि।

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आखिर बुजुर्ग नागरिक एसएन गर्ग को मिला दस हजार रुपए का मुआवजा। आईएएस आरुषि मलिक ने अजमेर के कलेक्टर के पद पर रहते हुए किया था दुव्र्यवहार। गर्ग ने सीएम सहायता कोष में जमा कराई राशि।
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राजस्थान की सीनियर आईएएस डाॅ. आरुषि मलिक ने अजमेर के कलेक्टर के पद पर रहते हुए वरिष्ठ नागरिक सत्यनारायण गर्ग के साथ जो दुव्र्यवहार किया उसकी एवज में अब सरकार ने गर्ग को दस हजार रुपए का मुआवजा दिया है। अजमेर के जिला कलेक्टर गौरव गोयल ने राज्य सरकार के निर्देशों पर यह राशि गर्ग के आईसीआईसीआई बैंक खाते में जमा करवा दी है। लेकिन गर्ग ने इस प्राप्त राशि को मुख्यमंत्री सहायता कोष में जमा करवाने के लिए कलेक्टर गोयल को चैक सौंप दिया है। गर्ग का कहना है कि उनका मकसद आईएएस आरुषि मलिक को सबक सिखाना था, ताकि भविष्य में कोई भी अधिकारी किसी बुजुर्ग नागरिक के साथ दुव्र्यवहार नहीं करे। उन्होंने कहा कि दस हजार रुपए की राशि जरुरतमंदों के काम आएगी।
यह थी शिकायतः
अजमेर के पट्टी कटला निवासी गर्ग ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग नई दिल्ली को एक शिकायत की थी। इस शिकायत में कहा गया कि वे 23 अक्टूबर 2015 को भ्रष्टाचार के दो मामलों में पत्र देने के लिए कलेक्टर आरुषि मलिक से मिलने गए थे, लेकिन पहले तो कलेक्टर ने डेढ़ घंटे तक अपने दरवाजे के बाहर खड़े रखा और जब मुलाकात के लिए बुलाया तो दोनों पत्रों को फेंकते हुए बाहर चले जाने के आदेश दिए। गर्ग ने कहा कि एक आईएएस का यह कृत्य शोभनीय नहीं है। इसलिए उन्होंने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के समक्ष पूरे प्रकरण को रखा। आयोग ने इस संबंध में राजस्थान के मुख्य सचिव और आईएएस मलिक से भी जवाब तलब किया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद आयोग ने आईएएस मलिक के व्यवहार को गैर जिम्मेदाराना माना। आयोग ने मुख्य सचिव को निर्देश दिए कि बुजुर्ग नागरिक गर्ग के मौलिक अधिकारों का सम्मान करते हुए दस हजार रुपए का मुआवजा दिया जाए। इसमें कोई दो राय नहीं कि गर्ग ने अपने अधिकारों के लिए जो संघर्ष किया वह सभी के लिए प्रेरणादायक है। इस संघर्ष के लिए गर्ग को मोबाइल नम्बर 9829260826 पर बधाई दी जा सकती है।
एस.पी.मित्तल) (28-11-17)
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