शिरडी के सांई बाबा को भगवान मानने पर ही महाराष्ट्र में सूखे के हालात।

शंकराचार्य स्वरूपानंद महाराज का बयान कितना उचित।
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द्वारका पीठ और बद्रिका आश्रम के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद महाराज ने 11 अप्रैल को हरिद्वार में कहा है कि महाराष्ट्र में सूखे का कारण शिरडी के सांई बाबा मंदिर का होना है। महाराष्ट्र में हजारों लोग शिरडी के सांई बाबा को भगवान मानते हैं। इस मंदिर के प्रबंधकों ने हमारे देवता शिवजी, हनुमानजी आदि को सांई बाबा के साथ विराजमान कर रखा है। यह सब हमारी सनातन संस्कृति और धार्मिक मान्यता के खिलाफ है। शिरडी के सांई बाबा को किसी भी स्थिति में भगवान नहीं माना जा सकता है। महाराष्ट्र के लोगों को यह समझना चाहिए कि आखिर हर बार महाराष्ट्र में ही अकाल क्यों पड़ता है। मेरा मानना है कि महाराष्ट्र के लोग धर्म के विरुद्ध काम कर रहे हैं, इसलिए ऐसा हो रहा है।
स्वामी स्वरूपानंद शिरडी के सांई बाबा को लेकर पहले भी ऐसे बयान दे चुके हैं। इसको लेकर देशभर में विवाद भी हुआ है। सवाल उठता है कि महाराष्ट्र की वर्तमान परिस्थितियों में स्वामी स्वरूपानंद महाराज का बयान कितना उचित है? स्वामी स्वरूपानंद इस समय देश की चार में से दो शंकराचार्य की पीठ के प्रमुख है। ऐसे में देश में उनके करोड़ों अनुयायी है। लेकिन वहीं शिरडी के सांई बाबा के मंदिर के प्रति भी हजारों लोगों की आस्था है। सांई भक्त सिर्फ महाराष्ट्र में ही नहीं है, बल्कि देशभर में फैले हुए हैं। हो सकता है कि देश के अन्य प्रांतों के मुकाबले महाराष्ट्र में सांई भक्तों की संख्या ज्यादा हो, सांई बाबा को एक चमत्कारी पुरुष माना गया है, जबकि हिन्दू देवी देवताओं को भगवान का दर्जा मिला हुआ है। हालांकि किसे भगवान माना जाए या न माना जाए, यह आस्था पर निर्भर करता है। ऐसे बहुत से लोग मिल जाएंगे जो मूर्ति पूजा के खिलाफ हैं। इसके लिए देश में बाकायदा अभियान भी चलाया गया है, लेकिन फिर भी आज तक देश के किसी भी मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या कम नहीं हुई है। अनेक मंदिरों में तो मोटा शुल्क लेकर वीआईपी दर्शन की व्यवस्था है।
मेरा मानना है कि आज किसी को भगवान मानने और न मानने से पहले महाराष्ट्र में अकाल पीडि़तों की मदद करना जरूरी है। अच्छा हो कि शिरडी के सांई बाबा के मंदिर और शंकराचार्य स्वरूपानंद से जुड़े मंदिरों में जो चढ़ावा आता है, उससे महाराष्ट्र सहित देशभर में अकाल पीडि़तों की मदद की जाए ताकि किसान आत्महत्या करने से बचे सके। यदि आस्थावान लोग रहेंगे, तभी किसी धर्म का महत्त्व भी होगा।
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