साइकिल अभियान में अजमेर के यायिक अधिकारियों ने दिखाई ईमानदारी। वकीलों की साइकिल चुनावी राजनीति की भेंट चढ़ी।

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अजमेर की बार और बैंच ने प्रत्येक बुधवार को साइकिल पर कोर्ट आने का जो आह्वान किया था, उसमें 27 जुलाई बुधवार को न्यायिक अधिकारियों ने तो काफी हद तक ईमानदारी दिखाई, लेकिन वहीं वकीलों की साइकिल चुनावी राजनीति की भेंट चढ़ गई। गत 23 जुलाई को हाईकोर्ट के न्यायाधीश महेश चंद शर्मा और महेन्द्र माहेश्वरी की उपस्थिति में हुए एक समारोह में डीजे सुरेन्द्र कुमार जैन और बार अध्यक्ष मोहन सिंह राठौड़ ने प्रत्येक बुधवार को साइकिल पर आने पर सहमति जताई थी। डीजे जैन तो प्रात: 9 बजे ही साइकिल पर कोर्ट परिसर में आ गए। इस प्रकार अधिकांश न्यायिक अधिकारी साइकिल पर आए या फिर पैदल ही न्यायालय परिसर में प्रवेश किया। यानि बैंच ने जो आह्वान किया था कि उसका काफी हद तक पालन भी हुआ, लेकिन करीब 1500 वकीलों में से मुश्किल से 25 वकील ही साइकिल पर आए। इनमें भी वे वकील शामिल हैं, जिन्हें बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अथवा अन्य किसी पद का चुनाव लडऩा है। अध्यक्ष पद के दावेदार वकील मीडिया के सामने साइकिल चलाकर फोटो खींचवाने में मशगूल रहे। बताया जा रहा है कि श्रेय लेने की होड़ में साइकिल अभियान का मकसद ही गुम हो गया। पर्यावरण, संरक्षण, स्वास्थ्य आदि ध्यान में रखते हुए प्रत्येक बुधवार को साइकिल पर आने का निर्णय लिया गया था।

(एस.पी. मित्तल) (27-07-2016)
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