तो फिर राजनेताओं के इशारे पर क्यों नाचते हैं आईएएस। बिहार के अफसरों का सड़कों पर उतरने का मामला। =

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तो फिर राजनेताओं के इशारे पर क्यों नाचते हैं आईएएस। बिहार के अफसरों का सड़कों पर उतरने का मामला।
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किसी ने सही कहा है कि जब खुद पर बीतती है तो हकीकत का पता चलता है। ऐसा ही कुछ इन दिनों बिहार के आईएएस अफसरों के साथ हो रहा है। जो आईएएस स्वयं को देश का असली शासक समझते हैं, वे ही बिहार में सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। बिहार के आईएएस अफसरों का आरोप है कि पुलिस ने राज्य चयन आयोग के अध्यक्ष सुधीर कुमार (आईएएस) की जो गिरफ्तारी की है, वह सही नहीं है। अफसरों ने अब धमकी दी है कि वे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का कोई मौखिक आदेश नहीं मानेंगे। असल में यह अकेले बिहार का मामला नहीं है। राजनेताओं के इशारे पर नाचने की आदत देश भर के आईएएस अफसरों में है। यूं आईएएस सर्वोच्च स्तर की प्रशासनिक सेवा कहलाती है। लेकिन ये अधिकारी राज्य में सत्तारूढ़ दल की सरकार के मुख्यमंत्री और मंत्रियों के ईशारे पर नाचने में कोई कसर नहीं छोड़ते। कई बार तो जब किसी राज्य के मुख्यमंत्री की कोई कठपुतली बन जाता है तो केन्द्र को दखल करना पड़ता है। जब नेताओं और आईएएस अफसरों में सब कुछ ठीक होते है तो जनता बेहद परेशान होती है। सवाल उठता है कि आखिर बिहार के अफसरों को यह क्यों करना पड़ा कि अब हम सीएम के मौखिक आदेश नहीं मानेंगे? इससे यह जाहिर होता है कि आईएएस अच्छी पोस्टिंग के लिए सीएम को खुश रखते हैं ओर मौखिक आदेश भी मानते हैं। सब जानते हैं कि हमारे देश में नेताओं का ईमानदारी का चरित्र कैसा है। यदि आईएएस नियमों के अनुरूप काम करे तो राजनेता भी भ्रष्टाचार नहीं कर सकते हैं। देश भर के आईएएस अफसरों को बिहार के अफसरों से सबक लेना चाहिए क्योंकि हर राज्य मे कमोबेश ऐसे ही हालात है। हमारे देश में जो लोकतांत्रिक व्यवस्था है, उससे आईएएस को सबसे ज्यादा अधिकार दिए गए हैं। सरकार के फैसलों की क्रियान्वित का अधिकार भी इन्हीं अफसरों के जिम्मे हैं। यदि नेताओं और अफसरों को गठजोड़ खत्म होगा तो इसका सीधा फायदा आम जनता को होगा। आईएएस अफसरों को भी अब यह पता चल गया होगा कि पुलिस कैसी होती है, जब बिहार पुलिस ने एक आईएएस को गिरफ्तार किया तो सभी आईएएस एकजुट हो गए। न जाने पुलिस रोजाना कितने व्यक्तियों को बेवजह गिरफ्तार अथवा प्रताडि़त करती है। अच्छा हो कि अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर आईएएस अफसर पुलिस को भी नियंत्रित करे।
(एस.पी.मित्तल) (27-02-17)
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