आखिर आतंकी के एनकाउंटर पर क्यों बिगड़ते हैं कश्मीर के हालात। आईजी मुनीर खान ने कहा कि अबू दुजाना की मौत से लड़कियों को मिलेगी राहत। ============

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1 अगस्त को कश्मीर घाटी के पुलवामा क्षेत्र में सुरक्षा बलों के साथ एनकाउंटर में तीस लाख का ईनामी आतंकी अबु दुजाना और उसका एक साथी मारा गया। जम्मू कश्मीर पुलिस के डीजी मुनीर खान ने कहा है कि आतंकी दुजाना के मारे जाने से कश्मीर की लड़कियों को भी राहत मिलेगी। लेकिन वहीं हर बार की तरह इस बार भी आतंकी के मारे जाने पर कश्मीर घाटी के हालात बिगड़ गए हैं। विरोध प्रदर्शन को देखते हुए घाटी के स्कूल कॉलेज के साथ-साथ इंटरनेट सेवाओं को भी बंद कर दिया गया है। सवाल उठता है कि जब कोई आतंकी मारा जाता है तो घाटी में उसके प्रति इतनी हमदर्दी क्यों दिखाई जाती है। अबु दुजांना जैसे आतंकी हमारे सुरक्षा बलों के जवानों को आए दिन मौत के घाट उतार देते हैं। जो लोग आतंकी के मारे जाने पर विरोध प्रदर्शन करते हैं उन्हें एक बार शहीद जवानों के घरों के हालात भी देखने चाहिए। नव विवाहिता विधवा हो जाती है तो बुजुर्ग माता-पिता का सहारा छिन जाता है। मासूम बच्चे अनाथ हो जाते हैं। यह माना कि किसी भी मौत पर दर्द होता है, लेकिन कश्मीर के नागरिकों को यह समझना चाहिए कि दुश्मन देश पाकिस्तान हमारे युवाओं को गुमराह कर आतंकी बना रहा है और अब तो अलगाववादियों के संगठन हुर्रियत के नेता पाकिस्तान से पैसा लेकर अपने बच्चों को तो विदेशों मंे पढ़ाते हैं, वहीं कश्मीरी युवाओं को सुरक्षा बलों पर पत्थर फेंकने के लिए उकसाते हैं। कश्मीरियों को कम से कम अपने नेताओं की असलियत को समझना चाहिए। कश्मीरी माने या नहीं, लेकिन हुर्रियत के नेता उनका शोषण कर रहे हैं। कश्मीरियों को चाहिए कि वे अपने स्तर पर पहल कर चार लाख हिन्दुओं को वापस अपने घरों में बसाएं और हिन्दू-मुस्लिम भाईचारे का प्रदर्शन करते हुए कश्मीर को फिर से स्वर्ग बनाए। हुर्रियत के नेताओं के इशारों पर सुरक्षा बलों पर पत्थर फेंकने से कोई हल निकलने वाला नहीं है। कश्मीर के लोगों को राष्ट्र की मुख्यधारा से जुड़ना चाहिए। जो लोग यह समझते हैं कि एक दिन कश्मीर भारत से अलग हो जाएगा, उन्हें पाक अधिकृत कश्मीर के हालात देख लेने चाहिए। पाकिस्तान ने अपने कश्मीर को चीन को सौंप दिया है। यह वही चीन है जो अपने देश के मुसलमानों पर जुल्म ढाहाता है। यहां तक कि किसी भी मुसलमानों को उसके धर्म के अनुरूप जीवन यापन करने की अनुमति नहीं दी जाती है। जबकि हमारे कश्मीर में अनुच्छेद 370 की वजह से कश्मीरियों को विशेषाधिकार मिले हुए हैं।
एस.पी.मित्तल) (01-08-17)
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