135 करोड़ की येाजना के शिलान्यास पर भी ब्यावर में भाजपा की फूट चैराहे पर। विधायक शंकर सिंह रावत की वजह से कोई मंत्री भी नहीं आया।

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135 करोड़ की येाजना के शिलान्यास पर भी ब्यावर में भाजपा की फूट चैराहे पर। विधायक शंकर सिंह रावत की वजह से कोई मंत्री भी नहीं आया।
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आमतौर पर लाख दो लाख की योजना के शिलान्यास या उद्घाटन के मौके पर सत्तारुढ़ राजनीतिक दल के नेता श्रेय लेने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं, लेकिन 26 सितम्बर को अजमेर जिले के ब्यावर उपखंड में जब 135 करोड़ की सीवरेज योजना का शिलान्यास समारोह हुआ तो क्षेत्रीय भाजपा विधायक शंकर सिंह रावत ही सर्वेसर्वा बने रहे। विधायक ने अपनी समर्थक नगर परिषद के सभापति श्रीमती बबीता चैहान को बुलाकर शिलान्यास समारोह सम्पन्न करवा लिया। संगठन पदाधिकारी के नाम पर मंडल अध्यक्ष जय किशन बल्दुआ और दिनेश कटारा ही उपस्थित रहे। सवाल उठता है कि जब 135 करोड़ की सीवरेज योजना का शिलान्यास हो रहा था तो राज्य की भाजपा सरकार का कोई मंत्री क्यों नहीं आया ? हालांकि इसमें केन्द्र सरकार अमृत योजना में धनराशि देगी, लेकिन राज्य सरकार की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। इतनी बड़ी योजना के शिलान्यास के अवसर पर मुख्यमंत्री नहीं तो कम से कम नगरीय विकास मंत्री श्रीचंद कृपलानी को तो आना ही चाहिए था। लेकिन अजमेर जिले के मंत्री वासुदेव देवनानी और अनिता भदेल तक उपस्थित नहीं रहीं। भाजपा विधायक शत्रुघ्न गौतम और सुरेश रावत संसदीय सचिव भी हैं, लेकिन इन्हें भी आमंत्रित नहीं किया गया। इतना ही नहीं भाजपा के जिलाध्यक्ष बीपी. सारस्वत भी अनुपस्थित रहे। सारस्वत तो हर विधायक के कार्यक्रम में उपस्थित रहते हैं। यदि सारस्वत को सम्मान पूर्वक बुलाया जाता तो वे जरूर अपनी उपस्थिति दर्ज करवाते। भाजपा के अग्रिम संगठनों के पदाधिकारी भी समारोह में उपस्थित नहीं थे।
विधायक रावत का रवैयाः
असल में भाजपा के विधायक रावत के रवैए की वजह से मंत्री और संगठन के पदाधिकारी ब्यावर आने से कतराते हैं। रावत ब्यावर से लगातार दूसरी बार विधायक बने हैं। लेकिन फिर मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने पहली बार विधायक बने पुष्कर के सुरेश रावत को संसदीय सचिव बना दिया। इससे भी शंकर सिंह रावत असंतुष्ट बताए जाते हैं। इसलिए ब्यावर में जो भी सरकारी कार्य होता है उसमें विधायक ही सर्वेसर्वा होते हैं। अपने रवैए की वजह से ही रावत ने दोनों मंडल अध्यक्ष पद पर अपने चेहतों को बैठा दिया है। ऐसे में जिला संगठन अथवा अग्रिम संगठनों की भी परवाह विधायक को नहीं है। भले ही ऐसे समारोहों में आम लोग व कार्यकर्ता न आए। हाल ही में पंडित दीनदयाल उपाध्याय जन्म शताब्दी के समारोह में पूर्व विधायक देवीशंकर भूतड़ा ने जो कार्यक्रम किए उसमें ज्यादा भीड़ देखी गई। लेकिन विधायक रावत भूतड़ा को भाजपा का बागी बता कर मेहनत पर पानी फेर देते हैं। भले ही भूतड़ा ने पिछला चुनाव बागी उम्मीदवार के तौर पर लड़ा हो, लेकिन आज भी भूतड़ा और उनके हजारों समर्थक पंडित दीनदयाल उपाध्याय के सिद्धांत पर चलते हैं। विधायक रावत को इससे भी कोई फर्क नहीं पड़ता कि नगर परिषद में भ्रष्टाचार की शिकायतें आम हैं। उनके समर्थकों को कहना है कि रावत तो तीसरी बार भी रावत मतों के दम पर जीतेंगे। चूंकि ब्यावर में ग्रामीण क्षेत्रों में रावत मतदाता अधिक हैं, इसलिए चुनाव की रणनीति में शंकर सिंह का पलड़ा भारी रहता है। इसमें कोई दो राय नहीं अपने विधानसभा क्षेत्र के रावत मतदाताओं पर विधायक की पकड़ मजबूत है। इसलिए वे ब्यावर के शहरी मतदाताओं की परेशानियों को दूर करने में कोई रुचि नहीं रखते हैं। सीवरेज का फायदा भी सिर्फ ब्यावर शहर के लोगों को होगा।
एस.पी.मित्तल) (27-09-17)
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