कश्मीर में शांति बहाली के लिए पुष्कर के चित्रकूट धाम के उपासक पाठक महाराज सूफी संतों के साथ सक्रिय। गृहमंत्री राजनाथ सिंह से भी की मुलाकात।

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कश्मीर में शांति बहाली के लिए पुष्कर के चित्रकूट धाम के उपासक पाठक महाराज सूफी संतों के साथ सक्रिय। गृहमंत्री राजनाथ सिंह से भी की मुलाकात।
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इसे शुभ संकेत ही माना जाना चाहिए कि हिन्दुओं के तीर्थ गुरु पुष्कर स्थित सुप्रसिद्ध चित्रकूट धाम के उपासक पाठक जी महाराज इन दिनों मुस्लिम सूफी संतों के साथ कश्मीर घाटी में शांति बहाली के लिए सक्रिय हैं। 14 नवम्बर को ही पाठक जी महाराज ने सूफी संतों के साथ दिल्ली में केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की। राजनाथ ने पाठक जी महाराज के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए उम्मीद जताई कि कश्मीर में जल्द ही शांति होगी। राजनाथ सिंह का कहना रहा कि कश्मीर का युवा भी अमन-चैन चाहता है तथा उसे भी रोजगार चाहिए। लेकिन कुछ अलगाववादी तत्व युवाओं को गुमराह करते हैं। यदि सूफी संतों के माध्यम से प्रयास किए जाएं तो युवाओं को अलगाववादियों के चंगुल से निकाला जा सकता है। पाठक जी महाराज और सूफी संतों ने राजनाथ सिंह को भरोसा दिलाया कि शांति बहाली के प्रयासों के तहत वे शीघ्र ही कश्मीर घाटी का दौरा करेंगे। इसके लिए कश्मीरी लीडर पीरजादा अकबर हुसैन की भी मदद ली जाएगी। अकबर हुसैन कश्मीर घाटी में ही रहकर युवाओं को जागरुक कर रहे हैं। अकबर की सभाओं में बड़ी संख्या में युवा आने लगे हैं।
पीएम और वार्ताकार से भी हो सकती है मुलाकातः
पाठक जी महाराज ने बताया कि अब उनकी मुलाकात प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्र सरकार द्वारा नियुक्त वार्ताकार दिनेश्वर शर्मा से होगी। उनका प्रयास है कि कश्मीर घाटी में जाने से पहले हालातों का अध्ययन कर लिया जाए। उन्होंने इस बात पर संतोष जताया कि देश की प्रमुख दरगाहों से जुड़े सूफी संत उनके अभियान में सक्रिय हैं। सूफीवाद ही एक ऐसा माध्यम है जिसके जरिए कश्मीर के गुमराह युवकों को देश की मुख्य धारा से जोड़ा जा सकता हैं। सूफी विचारधारा की वजह से दरगाहों पर हिन्दू भी जियारत के लिए जाता है। उन्होंने बताया कि उनके प्रयासों में अजमेर स्थित ख्वाजा साहब की दरगाह से जुड़े फखर काजमी, दिल्ली स्थिति निजामुद्दीन औलिया की दरगाह के सैयद नियाजी इलाहीजानी, महरौली के सैयद जुबिन नियाजी आदि शामिल हैं।
राजनीति से प्रेरित नहीं है अभियानः
पाठक जी महाराज ने स्पष्ट किया कि उनका अभियान किसी राजनीति से प्रेरित नहीं है। चूंकि उनका अध्यात्म में विश्वास है इसलिए वे चाहते है कि दोनों धर्मों की शक्तियां मिलकर कश्मीर में शांतिबहाली करवाएं। हमें कश्मीरी युवकों की तकलीफों को भी समझना होगा। बंदूक की नोक पर आज तक किसी समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। अलगाववाद की वजह से कश्मीर का बहुत नुकसान हो चुका है।
श्रीश्री से भी मुलाकातः
14 नवम्बर को पाठक जी महाराज ने दिल्ली में आर्ट आॅफ लिविंग के प्रणेता श्रीश्री रविशंकर से भी मुलाकात की। पूर्व में श्रीश्री भी कश्मीर में शांति प्रयास कर चुके हैं। पाठक जी महाराज ने श्रीश्री के अनुभवों को भी साझा किया। श्रीश्री ने अभियान के प्रति अपनी शुभकामनाएं दी हैं। पाठक जी महाराज ने कहा कि इस संबध्ंा में कोई सूफी संत अपने सुझाव देना चाहते हैं तो उनके मोबाइल नम्बर 9772255376 व 9772798482 पर दे सकते हैं।
एस.पी.मित्तल) (15-11-17)
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