तो क्या अजमेर के व्यापारियों के साथ हथियार सप्लायर उस्मान और जुबेर ने धोखाधड़ी की? एटीएस की पूछताछ में व्यापारियों ने स्वयं को निर्दोष बताया। =====

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तो क्या अजमेर के व्यापारियों के साथ हथियार सप्लायर उस्मान और जुबेर ने धोखाधड़ी की? एटीएस की पूछताछ में व्यापारियों ने स्वयं को निर्दोष बताया।
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जम्मू-कश्मीर के फर्जी लाइसेंस के आधार पर हथियार खरीदने के प्रकरण में राजस्थान की एटीएस ने अब तक अजमेर के कई प्रमुख व्यापारियों को गिरफ्तार किया है। एटीएस का आरोप है कि इन व्यापारियों ने अजमेर के हथयारों के कारोबारी उस्मान और उसके पुत्र जुबेर से जम्मू-कश्मीर में बने फर्जी लाइसेंस के आधार पर हथियार खरीदे हैं। इन व्यापारियों ने अपने दस्तावेज देकर जम्मू-कश्मीर से लाइसेंस बनवाए। एटीएस के अफसरों का मानना है कि उस्मान और जुबेर से डील करते हुए इन व्यापारियों को फर्जीवाड़े के बारे में पता था। वहीं वयापारियों का कहना रहा कि उस्मान और जुबेर ने उनके साथ धोखा किया है। पीड़ित व्यापारियों का माल और माजना (इज्जत) दोनों गए हैं। अजमेर के बिल्डर राजीव मालू ने भी पूछताछ में बताया कि एक रिवाल्वर के लिए जुबेर को चार लाख रुपए दिए थे, तब जुबेर ने कहा था कि अजमेर के जिला मजिस्ट्रेट का लाइसेंस दिलवा देगा, लेकिन रिवाल्वर देते समय जुबेर ने जम्मू-कश्मीर में बना लाइसेंस दे दिया। जुबेर ने जम्मू-कश्मीर में उसके नाम का लाइसेंस कैसे बनवाया, जिसकी जानकारी उसे नहीं है। उसने लाइसेंस के लिए कोई दस्तावेज भी जुबेर को नहीं दिए थे। जुबेर से तब भी साफ-साफ कहा गया कि अजमेर का लाइसेंस चाहिए। जुबेर ने भरोसा दिलाया था कि वह जम्मू-कश्मीर के लाइसेंस का रजिस्ट्रेशन अजमेर में करवा देगा। मालू ने एटीएस को बताया कि जम्मू-कश्मीर वाला लाइसेंस भी जुबेर को लौटा दिया था तथा चार लाख रुपए में खरीदा रिवाल्वर भी पूर्ण ईमानदारी के साथ संबंधित पुलिस स्टेशन पर जमा करवा दिया। मालू का कहना रहा कि धोखाधड़ी तो हमारे साथ हुई है। हमारा तो इतना ही कसरू है कि हमने जुबेर जैसे चालक व्यक्ति से हथियार खरीदा। पूछताछ के बाद मालू को जमानत पर छोड़ दिया गया। हालांकि एटीएस का मानना है कि व्यापारियों को उस्मान और जुबेर की गतिविधियों के बारे में सब पता था, लेकिन हथियार रखने के शौक की वजह से जुबेर से डील की। अब जांच पड़ताल में वह भी यह पता चल रहा है कि उस्मान और जुबेर के तार कश्मीर के आतंकवादियों से भी जुड़े हुए हैं। एटीएस यह भी पता लगा रही है कि जुबेर ने कश्मीर में किन सरकारी कर्मचारियों एवं अधिकारियों की मिली भगत से लाइसेंस बनवाए। अभी अजमेर के अनेक व्यापारी एटीएस के निशाने पर हैं।
एस.पी.मित्तल) (24-11-17)
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