नाहरगढ़ किले का मामला आपराधिक है। असल में पुलिस का सूचना तंत्र पूरी तरह फेल हो गया है। 22 पत्थरों पर लिखे की भनक तक नहीं लगी।

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नाहरगढ़ किले का मामला आपराधिक है। असल में पुलिस का सूचना तंत्र पूरी तरह फेल हो गया है। 22 पत्थरों पर लिखे की भनक तक नहीं लगी।
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जयपुर के ऐतिहासिक नाहरगढ़ किले की दीवार पर लटके मिले चेतन सैनी के शव की चर्चा इस समय पूरे देश में हो रही है। कुछ लोग इसे साम्प्रदायिक रंग देने की कोशिश भी कर रहे हैं। लेकिन सही में यह घटना एक आपराधिक घटना है। इसे फिल्म पद्मावती के विवाद से जोड़ कर नहीं देखा जाना चाहिए। 25 नवम्बर को चेतन सैनी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चलता है कि मौत दम घुटने से हुई है। चेतन सैनी के परिजनों ने भी हत्या की आशंका जताई है। ऐसे में पुलिस को आपराधिक घटना मानकर जांच करनी चाहिए। लेकिन इतना जरूर है कि अब पुलिस का सूचना तंत्र पूरी तरह फेल हो चुका है। यूं कहने को तो राजस्थान पुलिस में गुप्तचार शाखा भी बनी हुई है, लेकिन यह शाखा कैसे काम करती है सब को पता है। नाहरगढ़ का किला जयपुर शहर की सीमा में ही आता है। 22 पत्थरों पर लिखने का मतलब कोई व्यक्ति घंटों तक यह कृत्य करता रहा। चेतन सैनी ने भी इसी किले पर खड़े होकर अपनी सेल्फी भी ली। यानि इस पूरे घटनाक्रम में एक से अधिक लोग शामिल थे और उन्हें लम्बा वक्ता भी लगा। यदि पुलिस का सूचना तंत्र मजबूत होता तो कोई न कोई व्यक्ति पुलिस को सूचना दे देता। लेकिन अब तो गुप्तचर शाखा में तैनात अधिकारियों की रुचि भी अपने मुखबीर बनाने में नहीं होती है। पुलिस के अधिकारी और कर्मचारी कथित तौर पर भ्रष्टाचार में लगे रहते हैं। थानों पर तो जांच और सूचना एकत्रित करने का काम खत्म सा हो गया है, क्योंकि थाने पर तैनात पुलिस कार्मिक या तो वीआईपी ड्यूटी में या फिर चैराहे पर खड़ा होकर वसूली में लगा रहता है। यह माना कि अब पुलिस से ज्यादा साधन और तकनीक अपराधियों के पास हो गए हैं, लेकिन यदि पुलिस का सूचना तंत्र मजबूत हो तो ऐसे अपराधों पर काबू पाया जा सकता है। चेतन सैनी के किले की दीवार पर लटकने से जयपुर पुलिस की सक्रियता पर भी सवाल उठता है। जयपुर में आए दिन आपराधिक घटनाएं हो रही हैं। लेकिन उन पर कोई अंकुश नहीं लग रहा। जयपुर ही नहीं बल्कि राजस्थान भर में आपराधिक घटनाओं की संख्याएं लगातार बढ़ रही है। गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया का बार-बार यह कहना होता है कि मैं हर स्थान पर पुलिस वाले को तैनात नहीं कर सकता हंू। यह बात कटारिया की काफी हद तक सही भी है, क्योंकि आबादी के लिहाज से राजस्थान पुलिस में कार्मिकों की संख्या बहुत कम है। लेकिन यदि कटारिया पुलिस के सूचना तंत्र को मजबूत करें तो नाहरगढ़ के किले जैसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सकती है।
एस.पी.मित्तल) (25-11-17)
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