अब अजमेर के डिप्टी मेयर सम्पत सांखला पर तलवार लटकी। 

अब अजमेर के डिप्टी मेयर सम्पत सांखला पर तलवार लटकी। 
2010 में प्रस्तुत चुनावी दस्तावेेजों की जांच के आदेश।
नहीं होने पर भी स्वयं को दसवीं पास बताया था।
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21 जून को अजमेर के कार्यवाहक सीजेएम राजेश मीणा ने अजमेर नगर निगम के डिप्टी मेयर सम्पत सांखला के एक मामले में जांच के आदेश दिए हैं। सिविल लाइन थाना अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं कि सांखला ने वर्ष 2010 में पार्षद का चुनाव लड़ते समय अपनी शैक्षणिक योग्यता को लेकर जो भी दस्तावेज प्रस्तुत किए हैं उनकी सत्यता की जांच कर एक माह में रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। कोर्ट ने यह आदेश पट्टी कटला निवासी सत्यनारायण गर्ग द्वारा प्रस्तुत याचिका पर दिए हैं। एडवोकेट विवेक पाराशर के माध्यम से प्रस्तुत इस याचिका में कहा गया है कि सांखला ने जब वर्ष 2010 में पार्षद का चुनाव लड़ा था, तब स्वयं को कचहरी रोड स्थित गुजराती सीनियर उच्च माध्यमिक विद्यालय से दसवीं कक्षा उत्तीर्ण बताया था। इसके लिए बकाया एक शपथ पत्र दिया था। इस शपथ पत्र में कहा गया कि उन्होंने राजस्था माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से दसवीं की परीक्षा उत्तीर्ण की है, लेकिन वहीं वर्ष 2015 में जब पार्षद का चुनाव लड़ा तो राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान से दसवीं के समक्ष परीक्षा उत्तीर्ण करने का प्रमाण पत्र लगाया। याचिका में कहा गया कि इन दोनों दस्तावेजों की जांच करवाई जावे। ऐसा प्रतीत होता है कि वर्ष 2010 में दसवीं कक्षा उत्तीर्ण नहीं होने के बाद भी सम्पत सांखला ने शपथ पात्र प्रस्तुत किया यह आपराधिक प्रवृत्ति का कृत्य है।
तलवार लटकीः
अदालत की ताजा कार्यवाही से सम्पत सांखला के डिप्टी मेयर के पद पर तलवार लटक गई है। इस संबंध में सांखला का कहना है कि वर्ष 2010 में पार्षद का चुनाव लड़ने के लिए 10वीं परीक्षा उत्तीण करने की कोई अनिवार्यता नहीं थी। मैंने अपने आवेदन के साथ निर्वाचन विभाग में न तो दसवीं उत्तीर्ण की कोई मार्कशीट लगाई और न ही माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का प्रमाण पत्र, जहां तक शपथ पत्र का सवाल है तो इसकी मुझे कोई जानकारी नहीं है। सांखला ने कहा कि दसवीं उत्तीर्ण नहीं होने की वजह से ही मैंने वर्ष 2010 के बाद राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय शिक्षण संस्थान से परीक्षा उत्तीर्ण की थी। मैं पुलिस की जांच को पूरा सहयोग करुंगा। कुछ आदतन शिकायतकर्ता बेवजह मामले को तूल दे रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मैं अनुसूचित जाति वर्ग का हंू इसलिए राजनीतिक कारणों से परेशान किया जा रहा है।
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