प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना में खोले गए ट्रेनिंग सेंटर अब राजस्थान में बंद होने के कगार पर।

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना में खोले गए ट्रेनिंग सेंटर अब राजस्थान में बंद होने के कगार पर। तो क्या सिर्फ दिखावा हो रहा है?
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7 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी राजस्थान की एक दिवसीय यात्रा पर आ रहे हैं, इस दिन जयपुर में कोई तीन लाख लोगों की भीड़ जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। कलेक्टरों को पाबंद किया गया है कि वे केन्द्र और राज्य की योजनाओं में लाभार्थियों को पीएम की सभा में लाए। लेकिन वहीं राजस्थान में प्रधानमंत्री से जुड़ी योजनाओं की हकीकत देखी जाए तो उल्ट है। कोई 18 माह पहले प्रधानमंत्री स्कील डवलपमेंट योजना में राजस्थान में निजी क्षेत्र में 600 सेंटर खोले गए। सेंटर संचालकों से कहा गया कि उन्हें प्रति युवक राशि दी जाएगी। योजना के निर्धारित मापदंडों के अनुरूप संचालकों ने अपने अपने सेंटरों पर हेल्थ केयर, आईटी, ब्यूटीपार्लर, सिलाई कृषि आॅटोमोबाइल आदि व्यवसाय से जुड़े उपकरण भी लगा लिए ताकि युवाओं को रोजगार का प्रशिक्षण दिया जा सके। इन सेंटरों पर दस लाख रुपए तक की राशि खर्च की गई, जिला स्तर पर इन्हीं सेंटर संचालकों से स्कील डवलपमेंट मेले भी लगवाए गए। प्रदेश की जनता को याद होगा कि इन मेलों में नरेन्द्र मोदी की तस्वीर भी लगाई गई। जिसके जरिए मोबाइल से सेल्फी लेना का प्रचार भी किया, लेकिन आज ऐसे सेंटर वाले स्वयं दिवालिया हो गए हैं। सेंटरों के संचालकों के दस रुपए तक के कोर्स डिजाइन किए थे। केन्द्र सरकार की ओर से सिर्फ एक बार 60 युवाओं की ट्रेनिंग के लिए राशि दी गई, इसके बाद आज तक भी इन सेंटरों को स्कील डवलपमेंट के लिए कोई सहयोग नहीं किया गया है। यानि जिला स्कील डवलपमेंट योजना का ंिढंढोरा पीटा गया, वह अब राजस्थान में बंद होने के कागार पर है। सेंटरों के संचालकों ने कई बार दिल्ली जाकर इस विभाग के मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान से मुलाकात की, लेकिन आज तक भी कोई राहत नहीं मिल पाई है। संचालकों के अब यह समझ में नहीं आ रहा है कि 7 जुलाई को प्रधानमंत्री के सामने कौन से लाभार्थियों को प्रस्तुत किया जाएगा। अच्छा हो कि सरकार में बैठे लोग राजस्थान में प्रधानमंत्री स्कील डवलपमेंट योजना की हकीकत देख लें। यदि स्कील डवलपमेंट में सरकार की रुचि नहीं थी तो फिर राजस्थान में 600 सेंटरों को मान्यता क्यों दी गई? जाहिर है कि सरकार की कथनी और करनी में फर्क है।
वेतन तक नहीं मिला हैः
प्रधानमंत्री स्कील डवलपमेंट येाजना में ही राजस्थान की सरकारी स्कूलों में प्रशिक्षक नियुक्ति किए गए थे। इन प्रशिक्षकों को भी दो माह से लेकर 8 माह तक का वेतन नहीं मिला है। प्रशिक्षकों की परेशानी को लेकर मैंने 29 जून को ब्लाॅक लिखा है।
एस.पी.मित्तल) (30-06-18)
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