नेशनल हेराल्ड और महरोली के फार्म हाउस में व्यक्तिगत तौर पर उलझे राहुल गांधी क्या नरेन्द्र मोदी पर चोरी का आरोप चस्पा कर पाएंगे?

नेशनल हेराल्ड और महरोली के फार्म हाउस में व्यक्तिगत तौर पर उलझे राहुल गांधी क्या नरेन्द्र मोदी पर चोरी का आरोप चस्पा कर पाएंगे? तीन राज्यों की जीत से उत्साहित हैं।
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27 मार्च को कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली में कांग्रेस के ओबीसी प्रकोष्ठ के सम्मेलन को संबोधित किया। राहुल ने राफेल विमान सौदे में एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को कटघरे में खड़ा किया। राहुल पिछले एक वर्ष से दोहरा रहे हैं कि मोदी ने तीस हजार करोड़ रुपए की चोरी कर कर्जदार अनिल अंबानी की जेब में डाले दिए हैं। चूंकि ऐसे ही आरोपों के चलते कांग्रेस को तीन राज्यों में सरकार बनाने में सफलता मिल गई, इसलिए लोकसभा चुनाव में भी इसी तरह के आरोप राहुल गांधी जोरशोर से लगा रहे हैं। हालांकि पीएम मोदी पर व्यक्तिगत तोर पर भ्रष्टाचार अथवा कोई जमीन की खरीद फरोख्त का मामला नहीं, लेकिन राफेल के मामले में मोदी को बक्शना नहीं चाहते। सवाल उठता है कि जिन राहुल गांधी पर दिल्ली में दो हजार करोड़ के नेशनल हेराल्ड भवन और महरोली में फार्म हाउस को खरीदने को लेकर वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप है क्या वे पीएम को राफेल के मुद्दे पर चोर साबित कर पाएंगे। सब जानते हैं कि नेशनल हेराल्ड भवन को खाली करवाने के आदेश हाईकोर्ट ने भी दे दिए हैं। राहुल गांधी और उनकी माताजी श्रीमती सोनिया गांधी ने दस्तावेजों में हेराफेरी कर दो हजार करोड़ के नेशनल हेराल्ड भवन को अपने नाम करवा लिया। इसी प्रकार महरोली में राहुल ने अपने बहन प्रियंका गांधी के साथ जो फार्म हाउस खरीदा उसमें भी भाई-बहन पर वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप है। जब राहुल गांधी ऐसे मामलो में व्यक्तिगत तौर पर उलझे हुए तब राफेल के आरोप कितने मायने रखते हैं यह लोकसभा चुनाव का परिणाम बताएगा। राहुल गांधी अपने जीजा राॅबर्ट वाड्रा से हो रही पूछताछ को लेकर भी खफा हैं। राजस्थान और हरियाणा में जमीने तथा लंदन में सम्पत्तियां खरीदने को लेकर वाड्रा से प्रवर्तन निदेशालय लगातार पूछताछ कर रहा है। जिस तरह राहुल गांधी के परिवार के सदस्यों से पूछताछ हो रही है, इस तरह की पूछताछ नरेन्द्र मोदी के किसी भी परिजन से नहीं हो रही। मोदी अथवा निकट परिजनों के द्वारा करोड़ों रुपए की जमीन खरीदने का मामला भी सामने नहीं आया है। मोदी के परिजनों ने किसानों की जमीन सस्ते में खरीद कर महंगी भी नहीं बेची है। यूपीए एक और दो के कार्यकाल में जिस तरह सरकारी सम्पत्तियों और प्राकृतिक संसाधनों की लूट हुई वह भी किसी से छिपी नहीं है। यह बात अलग है कि जो अरविंद केजरीवाल उस समय कांग्रेस पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे थे, वो ही केजरीवाल आज दिल्ली में कांगे्रस के साथ मिलकर चुनाव लड़ना चाहते हैं।
एस.पी.मित्तल) (27-03-19)
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