तो अब सपा-बसपा ने भी बनारस में मोदी के सामने हार मान ली है।

तो अब सपा-बसपा ने भी बनारस में मोदी के सामने हार मान ली है। 
तेज बहादुर को इतनी ही चिंता है तो सुरक्षा बलों पर आरोप लगाने वाले नेताओं के खिलाफ चुनाव लडऩा चाहिए।
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यूपी में सपा-बसपा और आरएलडी के महा गठबंधन ने बनारस से बीएसएफ के बर्खास्त सिपाही तेज बहादुर यादव को उम्मीदवार घोषित किया है। यानि मायावती, अखिलेश यादव और अजीत सिंह तेज बहादुर के जरिए बनारस में देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को हराने का काम करेंगे। कांग्रेस ने भी पहले राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी का नाम उछाला था, लेकिन बाद में उन्हीं अजय राव को उम्मीदवार बना दिया, जिनकी 2014 में जमानत जब्त हुई थी। उम्मीद थी कि सपा-बसपा का गठबंधन कोई मजबूत उम्मीदवार बनारस से उतारेगा, लेकिन तेज बहादुर की उम्मीदवारी बताती है कि माया-अखिलेश ने मतदान से पहले हार मान ली है। तेज बहादुर यादव बीएसएफ के वो ही जवान है जिन्होंने मैस के खराब भोजन का वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट कर देशभर में सुर्खियां बंटोरी थी। तेज बहादुर की उम्मीदवारी के पीछे यह तर्क दिया जा रहा है कि इससे मोदी के राष्ट्रवाद का मुकाबला किया जाएगा। तेज बहादुर को सामने रखकर मोदी से किस तरह से मुकाबला होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। मोदी ने पांच वर्ष में बनारस में जो विकास के कार्य करवाए हैं उससे बनारस के लोग खुश है, इसलिए मोदी इस बार सिर्फ बनारस से ही चुनाव लड़ रहे हैं। 2014 में मोदी ने गुजरात के बड़ौदा से भी चुनाव लड़ा था। यानि मोदी बनारस में अपनी जीत के प्रति आश्वस्त हैं। राहुल गांधी से लेकर मायावती और अखिलेश यादव तक कह रहे हैं कि 23 मई के बाद देश को नया प्रधानमंत्री मिलेगा, लेकिन वहीं बनारस में मोदी के खिलाफ एक उम्मीदवार खड़ा नहीं कर रहे। कांग्रेस और सपा-बसपा अपना अपना उम्मीदवार खड़ा करेंगे तो फिर मोदी को कैसे हराएंगे? पहले प्रियंका गांधी ने मैदान छोड़ दिया और अब सपा-बसपा ने राजनीति के किसी बड़े चेहरे को मोदी के सामने नहीं उतारा। यहां तक अखिलेश यादव ने भी अपने कुनबे से उम्मीदवार नहीं बनाया। यदि मोदी से मुकाबला करने की मंशा होती तो अखिलेश स्वयं या अपनी पत्नी डिंपल को चुनाव लड़वाते। आखिर भाजपा भी दो बार से केन्द्रीय मंत्री श्रीमती स्मृति ईरानी को अमेठी से राहुल गांधी के सामने उतार रही है।
सेना विरोधियों के सामने लड़े चुनाव:
इसमें कोई दो राय नहीं कि बीएसएफ  के बर्खास्त सिपाही तेज बहादुर यादव को अब देश भर में ख्याति मिल जाएगी, लेकिन तेज बहादुर को यदि चुनाव लडऩे का इतना ही शौक है तो उन्हें कांग्रेस के दिग्विजय सिंह, सीपीआई के कन्हैया कुमार, पीडीपी की महबूबा मुफ्ती, नेशनल कॉन्फ्रेंस के फारुख अब्दुल्ला जैसे नेताओं के खिलाफ चुनाव लडऩा चाहिए, क्योंकि यही नेता हमारे सुरक्षा बलों को बदनाम करने वाले बयान देते हैं। नरेन्द्र मोदी तो हमेशा सेना और सुरक्षा बलों को मजबूती देने की बात करते हैं, जबकि विपक्षी नेता सुरक्षा बलों के अधिकारों में कटौती के वायदे कर रहे हैं। यदि तेज बहादुर को अपने बीएसएफ के जवानों की चिंता है तो उसे भोपाल में जाकर दिग्विजय सिंह हरवाने का काम करना चाहिए। दिग्विजय सिंह जैसे नेता संसद में जाएंगे तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि सुरक्षा बलों के बारे में क्या निर्णय लेंगे।
एस.पी.मित्तल) (30-04-19)
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