आखिर अजमेर क्यों नहीं आते प्रभारी मंत्री प्रमोद जैन?

आखिर अजमेर क्यों नहीं आते प्रभारी मंत्री प्रमोद जैन?
रघु शर्मा तो हार की वजह से पहले ही रुठे हुए हैं।
अब प्रभारी सचिन हेमंत गेरा पर आस।

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45 डिग्री के तापमान में अजमेर के शहरी क्षेत्र में तीन दिन तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 7 दिन में एक बार मात्र 45 मिनट के लिए पेयजल की सप्लाई। पानी के अभाव में पुष्कर का पवित्र सरोवर सूखने के कगार पर है। ऐलीवेटेड रोड के निर्माण से बिगड़ी ट्रेफिक व्यवस्था। पुलिस के सुस्त रवैए से अपराधों में वृद्धि, सरकारी विभागों में फैले भ्रष्टाचार आदि की समस्याओं को लेकर अजमेर में त्राहि त्राहि मची हुई है। लोगों को पीने के पानी के लिए एक टेंकर की कीमत एक हजार रुपए तक चुकानी पड़ रही है, लेकिन अजमेर में लोगों की समस्याओं का समाधान करने वाला कोई नहीं है। पांच माह पहले अशोक गहलोत के नेतृत्व में बनी कांग्रेस सरकार ने खान मंत्री प्रमोद जैन को अजमेर का प्रभारी मंत्री बनाया था। प्रभारी मंत्री इसलिए बनाया जाता है कि वह सरकार के कार्यों की समीक्षा कर लोगों को राहत पहुंचाए, लेकिन मंत्री जैन लम्बे अर्से से अजमेर नहीं आए हैं। प्रभारी मंत्री के नहीं आने से प्रशासन पर कोई नियंत्रण नहीं है। हालांकि प्रमोद जैन अपने खान विभाग को लेकर दु:खी और परेशान चल रहे हैं। खान विभाग के अफसर जैन की सुनते नहीं है। यह आरोप खुद जैन ने ही लगाया है। लेकिन फिर भी अजमेर की जनता अपने प्रभारी मंत्री का इंतजार कर रही है। लोगों को भरोसा है कि प्रभारी मंत्री के आने से कम से कम पेयजल सप्लाई में तो थोड़ा सुधार होगा। फिलहाल अजमेर के लोग जलदाय विभाग के इंजीनियरों के रहमो करम पर हैं। यूं अजमेर के लोगों की समस्याओं के समाधान की जिम्मेदारी केकड़ी के विधायक और प्रदेश के चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा की भी है, लेकिन रघु शर्मा अब अजमेर के लोगों से खफा बताए जाते हैं। अजमेर खास कर अपने विधानसभा क्षेत्र के केकड़ी के नागरिकों को देखते ही रघु शर्मा चिढ़ जाते हैं। हाल के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को अजमेर संसदीय क्षेत्र की सभी आठ विधानसभा सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। रघु शर्मा के केकड़ी क्षेत्र से 39 हजार मतों की हार हो गई, जबकि रघु ने पांच माह पहले केकड़ी से 17 हजार मतों से जीत हासिल की थी। हालांकि लोकतंत्र में हार जीत चलती रहती है, लेकिन रघु शर्मा कुछ ज्यादा ही खफा है। केकड़ी में तो राजनीतिक द्वेषता से काम कर रहे हैं। जानकार सूत्रों के अनुसार रघु के रुखे व्यवहार से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी परेशान है। चिकित्सा विभाग में आए दिन हो रहे विवादों की वजह से कांग्रेस की सरकार पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। चूंकि रघु को प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट का संरक्षण है, इसलिए मुख्यमंत्री भी कुछ कहने की स्थिति में नहीं है। यही वजह है कि रघु शर्मा खुले तौर पर राजनीतिक दादागिरी कर रहे हैं। लोग अब कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के सक्रिय होने का इंतजार कर रहे हैं ताकि रघु की राजनीतिक गतिविधियों के बारे में जानकार दी जा सके। सूत्रों की माने तो प्रभारी मंत्री प्रमोद जैन भी रघु के व्यवहार की वजह से ही अजमेर नहीं आ रहे हैं। रघु के रुखे व्यवहार के विरोध में गत तीन जून को केकड़ी भी बंद रहा। लोकसभा चुनाव में बुरी हार और बढ़ते विरोध के बाद भी रघु शर्मा अपने व्यवहार में सुधार नहीं कर रहे हैं।
प्रभारी सचिव पर आस :
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 7 जून को ही वरिष्ठ आईएएस को जिला प्रभारी सचिव नियुक्त किया है। इससे प्रदेश के चिकित्सा (शिक्षा) सचिव हेमंत गेरा को अजमेर का प्रभारी सचिव बनाया है। गेरा अजमेर में डिस्कॉम के एमडी के पद पर कार्य कर चुके हैं। गेरा का कार्यकाल उल्लेखनीय रहा। गेरा कुछ दिनों के लिए अजमेर विकास प्राधिकरण के आयुक्त भी रहे। गेरा न ही प्राधिकरण और डिस्कॉम में जनसुनवाई की शुरुआत की थी। हो सकता है कि गेरा अजमेर में प्रभारी सचिव की हैसियत से जनसुनवाई करें, यदि गेरा ऐसा करते हैं तो लोगों को राहत मिलेगी।
एस.पी.मित्तल) (09-06-19)
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