महाराष्ट्र की राजनीति में राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट से ज्यादा सक्रिय है मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत।

महाराष्ट्र की राजनीति में राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट से ज्यादा सक्रिय है मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत। महाराष्ट्र के कांग्रेस विधायकों का जयपुर में डेरा। 

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महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए भले ही मुम्बई में माथा पच्ची हो रही हो, लेकिन राजनीति का केन्द्र बिन्दु राजस्थान का जयपुर बना हुआ है। महाराष्ट्र के 44 विधायक जयपुर में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के हाथों में सुरक्षित है। 11 नवम्बर की रात को भी गहलोत ने महाराष्ट्र के कांग्रेस विधायकों को अपने सरकारी आवास पर डिनर दिया। गहलोत ने अपने पुत्र और राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (आरसीए) के अध्यक्ष वैभव गहलोत को भी सक्रिय कर रखा है। वैभव गहलोत 12 नवम्बर को भी महाराष्ट्र के कांग्रेस विधायकों के सम्पर्क में रहे। सूत्रों की माने तो 12 नवम्बर को सीएम गहलोत जब गुरु नानकदेव के 550वें प्रकाशोत्सव में भाग लेने के लिए करतारपुरलोधी गुरुद्वारा में मौजूद थे, तब पीछे से महाराष्ट्र के कांग्रेस विधायकों की कमान वैभव ने ही संभाली। वैभव की सक्रियता बढ़ाने में राजस्थान के प्रभारी महासचिव अविनाश पांडे भी रुचि ले रहे हैें। पांडे महाराष्ट्र की राजनीति के सूत्रधार है। पांडे भी जयपुर, दिल्ली और मुम्बई के बीच चक्कर लगा रहे हैं। हालांकि प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष होने के नाते सचिन पायलट की भूमिका ज्यादा प्रभावी होनी चाहिए, लेकिन प्रदेश में चल रहे राजनीतिक समीकरणों के तहत सीएम गहलोत के पुत्र वैभव की सक्रियता ज्यादा नजर आ रही है। वैभव गहलोत को तो जयपुर के रिसोर्ट में महाराष्ट्र के विधायकों से चर्चा करते देखा गया, लेकिन पायलट की ऐसी सक्रियता देखने को नहीं मिली। 11 नवम्बर की रात सीएम गहलोत ने जो डिनर दिया, उसमें राज्य सरकार के कुछ मंत्रियों को भी आमंत्रित किया गया था। चूंकि पायलट डिप्टी सीएम हैं, इसलिए सीएम हाउस से उन्हें भी डिनर में शामिल होने का न्यौता मिला। जहां महाराष्ट्र की राजनीति में सरकार के मंत्रियों की सक्रियता है वहीं पायलट के नेतृत्व वाले संगठन के किसी पदाधिकारी की कोई भूमिका नहीं है। सरकार की ओर से चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा, मुख्य सचेतक महेश जोशी और तकनीकी शिक्षा मंत्री सुभाष गर्ग सक्रिय हैं। महाराष्ट्र के विधायकों का डेरा जयपुर में होने की वजह से इन दिनों जयपुर के तार सीधे 10 जनपथ नई दिल्ली से (सोनिया गांधी का आवास) से जुड़े हुए है। मालूम हो कि पायलट ने निकाय चुनाव में सरकार के हाईब्रिड फैसले का खुला विरोध किया था, तभी सत्ता और संगठन में खींचतान कुछ ज्यादा ही नजर आ रही है। पायलट का सरकार पर लगातार दबाव है कि कांग्रेस के जिन कर्यकर्ताओं ने भाजपा के गत पांच वर्षों के शासन में संघर्ष किया, उन्हें अब सरकार में सम्मान मिलना चाहिए।
एस.पी.मित्तल) (12-11-19)
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