आखिर सोनिया गांधी के साथ मिमलकर शरद पवार राजनीति की कौन सी खिचड़ी पका रहे हैं

आखिर सोनिया गांधी के साथ मिमलकर शरद पवार राजनीति की कौन सी खिचड़ी पका रहे हैं? महाराष्ट्र में शिवसेना के साथ सरकार बनाने पर अभी असमंजस। क्या नरेन्द्र मोदी और सोनिया गांधी के बीच तल्खी को कम करवाएंगे पवार?

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महाराष्ट्र में शिवसेना के साथ सरकार बनाने को लेकर 19 नवम्बर को मुम्बई में कांग्रेस और शरद पवार की एनसीपी के नेताओं की बैठक होनी थी, लेकिन ऐन मौके पर इस बैठक को टाल दिया गया। इससे पहले 18 नवम्बर को पवार ने कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की थी। मुलाकात के बाद पवार ने मीडिया से कहा कि महाराष्ट्र में सरकार बनााने को लेकर सोनिया गांधी से कोई बात नहीं हुई। पवार ने यह बात तब कही है जब शिवसेना के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के लिए सूट सिलवा लिया है। यानि मुम्बई में शिवसेना शपथ के लिए तैयार है और उधर दिल्ली में शरद पवार कह  रहे हैं कि सरकार गठन को लेकर सोनिया गांधी से कोई बात नहीं हुई। पवार की यह भी कहना रहा कि सरकार तो भाजपा और शिवसेना को बनानी है। जाहिर है कि शरद पवार को शिवसेना के साथ सरकार बनने की कोई जल्दी नहीं है।  ऐसे में सवाल उठता है कि 18 नवम्बर को पवार ने आखिर सोनिया गांधी से क्या बात की होगी?
यह सही है कि इस सवाल का सही जवाब शरद पवार और सोनिया गांधी ही दे सकते हैं। अब चूंकि दोनों नेताओं ने चुप्पी साध ली है, इसलिए मुलाकात के बारे में आंकलन ही किया जा सकता है। पवार की सोनिया गांधी से मुलाकात से पहले राज्यसभा के 250वेंं सत्र को संबोधित करते हुए प्रभानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शरद पवार की पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस (एनसीपी) के सांसदों की जमकर प्रशंसा की। इससे पहले 9 नवम्बर को शरद पवार ने महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को दोपहर 12 बजे ही पत्र भिजवा कर सरकार बनाने में असमर्थता जता दी थी। इस पत्र के बाद ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ब्राजील यात्रा की बाधाएं दूर हो सकी। ब्राजील रवाना होने से पहले मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में राष्ट्रपति शासन को मंजूरी दे दी गई? असल में महाराष्ट्र में क्या होना है। इसका पता संभवत: नरेन्द्र मोदी और शरद पवार को ही है। यही वजह है कि भाजपा के बड़े नेता अब महाराष्ट्र के मुद्द्े पर चुप है। यहां तक टीवी डिबेट में भी भाजपा के प्रवक्ता शामिल नहीं हो रहे हैं। हो सकता है कि 18 नवम्बर को शरद पवार की जो मुलाकात हुई, उसमें नरेन्द्र मोदी और सोनिया गांधी के बीच तल्खी को कम करने में भी विमर्श हुआ हो। सब जानते हैं कि श्रीमती गांधी का पूरा परिवार कानूनी पेचीदिगियों में उलझा हुआ है। अब कांग्रेस महाराष्ट्र में शिवसेना के साथ सरकार बनाने को तैयार है तो शरद पवार जैसे सफल राजनेता नरेन्द्र मोदी और सोनिया गांधी के बीच तल्खी को कम भी करवा सकते हैं। राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं है। वैसे भी जब देश में लोकतंत्र है, तब राजनीतिक दुश्मनी कोई मायने नहीं रखती है। लोकतंत्र में जनता ही सत्ता सौंपती और छीनती है। सोनिया गांधी के लिए भी महाराष्ट्र में सरकार बनाने से ज्यादा जरूरी तल्खी को कम करना है। श्रीमती गांधी कई मोर्चों पर अकेले ही संघर्ष कर रही है। यदि शरद पवार संघर्ष को कम करने में कोई मदद करते हैं तो श्रीमती गांधी को कोई ऐतराज नहीं होगा। शरद पवार और सोनिया गांधी के लिए शिव सेना कोई खास मायने नहीं रखती है।
एस.पी.मित्तल) (19-11-19)
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