पुष्कर में भाजपा के कमल पाठक दूसरी बार पालिका अध्यक्ष बने।

पुष्कर में भाजपा के कमल पाठक दूसरी बार पालिका अध्यक्ष बने।
ब्यावर में भाजपा के नरेश कनौजिया सभापति बने।
नसीराबाद में कांग्रेस की शारदा मित्तलवाल की लॉटरी निकली। 

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26 नवम्बर को अजमेर जिले के निकाय चुनावों में भाजपा का पलड़ा भारी रहा है। पुष्कर में भाजपा के कमल पाठक लगातार दूसरी बार नगर पालिका के अध्यक्ष बनने में सफल रहे हैं। इसी प्रकार ब्यावर में भाजपा के नरेश कनौजिया नगर परिषद के सभापति बनी हैं। जबकि नसीराबाद नगर पालिका के अध्यक्ष का फैसला लॉटरी से हुआ, जिसमें कांग्रेस की शारदा मित्तलवाल को सफलता मिली है।
पुष्कर नगर पालिका:
25 पार्षदों वाली पुष्कर नगर पालिका में भाजपा के कमल पाठक को 13 तथा कांग्रेस के रवि पाराशर उर्फ रवि बाबा को 12 मत प्राप्त हुए। वार्ड चुनाव में भाजपा के 14 पार्षद जीते थे, लेकिन रवि बाबा ने बगावत कर कांग्रेस के समर्थन से अध्यक्ष का चुनाव लड़ा। भाजपा की फूट का लाभ उठाने के लिए कांग्रेस ने अपने 9 पार्षदों में से किसी को भी उम्मीदवार नहीं बनाया। लेकिन कांग्रेस की लाख कोशिश के बाद भी रवि बाबा की जीत नहीं हो सकी। कांग्रेस को जो 12 मत मिले, उस पर भी अब चर्चा हो रही है। माना जा रहा है कि कांग्रेस भाजपा का एक वोट तोडऩे में सफल रही है। दो निर्दलीय पार्षद में से एक कैलाश पहले दिन से ही भाजपा के खेमे में थे। ऐसे में भाजपा को 14 मत मिलने चाहिए थे। भाजपा को मात देने के लिए पूर्व मंत्री श्रीमती नसीम अख्तर और उनके पति इंसाफ अली ने पूरी मेहनत की। हालांकि देहात भाजपा अध्यक्ष बीपी सारस्वत और क्षेत्रीय विधायक सुरेश सिंह रावत ने पाठक को जिताने में कोई कसर नहीं छोड़ी। लेकिन पुष्कर की जीत का श्रेय स्वयं कमल पाठक को जाता है। कमल पाठक की जगह यदि ओर कोई पार्षद उम्मीदवार होता तो भाजपा के पार्षदों का एकजुट रहना मुश्किल था। पाठक ने अपनी राजनीतिक कुशलता दिखाई है। पाठक की रणनीति से ही पूर्व मंत्री अख्तर को राजनीतिक मात मिली है। लेकिन इस बार पाठक के लिए नगर पालिका का संचालन कठिन होगा, क्योंकि कांगे्रस के 9 पार्षद हैं, जबकि पहले के कार्यकाल में कांग्रेस का मात्र एक पार्षद था।
ब्यावर नगर परिषद:
अजमेर जिले की ब्यावर नगर परिषद में भाजपा के नरेश कनौजिया सभापति बने हैं। 60 पार्षदों में से कनौजिया को 40 मत प्राप्त हुए जबकि उनके प्रतिद्वंदी कांग्रेस के गोविंद पंडित को 20 मत प्राप्त हुए। पार्षद चुनाव में ब्यावर में भाजपा को 29 वार्डों में जीत हासिल हुई थी, लेकिन चुनाव के बाद दस निर्दलीय पार्षद भाजपा में शामिल हो गए। कांग्रेस ने निर्दलीय पार्षद गोविंद पंडित को अपना उम्मीदवार बनाया। लेकिन सभापति के चुनाव में पंडित मात्र 20 मत ही हासिल कर सके। असल में ब्यावर में भाजपा शुरू से ही एकजुट रही। क्षेत्रीय विधायक शंकर सिंह रावत, पूर्व विधायक देवीशंकर भूतड़ा और देहात अध्यक्ष बीपी सारस्वत ने मिलकर रणनीति बनाई। सर्वसम्मिति से कनौजिया को उम्मीदवार बनाया। चूंकि ये तीनों ही बड़े नेता एकजुट रहे इसलिए कनौजिया भारी मतों से चुनाव जीत गए हैं। कांग्रेस की ओर से ब्यावर की कमान मसूदा के विधायक राकेश पारीक ने संभाल रखी थी, लेकिन निर्दलीय पार्षद गोविंद पंडित को सभापति का उम्मीदवार बनाए जाने के बाद भी विधायक पारीक ब्यावर के निर्दलीय विधायकों को कांग्रेस के पक्ष में नहीं कर सके। कांग्रेस के स्थानीय नेताओं का भी मानना है कि एकजुटता नहीं होने की वजह से ब्यावर में इतनी बुरी हार हुई है।
नसीराबाद में लॉटरी:
नसीराबाद नगर पालिका में कांग्रेस की शारदा मित्तलवाल लॉटरी के जरिए अध्यक्ष बनी हैं। यहां भाजपा की उम्मीदवार अनिता मित्तल और कांग्रेस की उम्मीदवार शारदा मित्तलवाल को दस-दस वोट मिले। ऐसे में लॉटरी के जरिए परिणाम घोषित किया गया। वार्ड चुनाव में भाजपा के दस पार्षद जीते थे, जबकि कांग्रेस के आठ। लेकिन कांग्रेस ने निर्दलीय पार्षद शारदा मित्तलवाल को अपना उम्मीदवार बनाकर भाजपा को मात दे दी।
कार्यकर्ताओं की जीत-सारस्वत:
भाजपा के देहात जिलाध्यक्ष प्रो. बी.पी सारस्वत ने कहा कि जिले के निकाय चुनाव में भाजपा के आम कार्यकर्ता की जीत हुई है। सभी स्थानों पर भाजपा के पार्षद एकजुट रहे हैं। नसीराबाद में लॉटरी की वजह से कांग्रेस को सफलता मिली है। उन्होंने कहा कि अब ब्यावर और पुष्कर निकायों में जनहित में कार्य किए जाएंगे।
एस.पी.मित्तल) (26-11-19)
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