सीएए के खिलाफ अब राजस्थान सरकार सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेगी।

सीएए के खिलाफ अब राजस्थान सरकार सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेगी।
लागू नहीं करने का प्रस्ताव विधानसभा में भी स्वीकृत हो चुका है।
सबसे ज्यादा प्रताडि़त हिन्दू शरणार्थी राजस्थान में हैं।

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राजस्थान में अशोक गहलोत के नेतृत्व में चल रही कांग्रेस की सरकार संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के विरोध में अब सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेगी। सूत्रों के अनुसार अतिरिक्त महाधिवक्ता मनीष सिंघवी 16 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में याचिका प्रस्तुत करेंगे। गहलोत सरकार सुप्रीम कोर्ट में तब याचिका दायर कर रही है, जब विधानसभा में पहले ही कानून को लागू नहीं करने का प्रस्ताव स्वीकृत करवाया जा चुका है। असल में राज्य सरकार विधानसभा में जो प्रस्ताव स्वीकृत करवाया है, वह वैधानिक दृष्टि से कोई मायने नहीं रखता है, क्योंकि किसी भी व्यक्ति को नागरिकता देने या नहीं देने का अधिकार केन्द्र सरकार के पास है। इस वैधानिक स्थिति के बाद ही गहलोत सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने का फैसला किया है। मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट में सीएए के विरोध में पहले से ही कई याचिकाएं लम्बित हैं। राजस्थान सरकार की याचिका भी पूर्व में लम्बित याचिकाओं के साथ ही सुनी जाएगी। कांग्रेस का राष्ट्रीय नेतृत्व भी सीएए के विरोध में विचार रख चुका है। राज्य की कांग्रेस सरकार ने राष्ट्रीय नेतृत्व के विचार के मद्देनजर ही सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने का निर्णय लिया है। हो सकता है कि सभी कांगे्रस शासित राज्य सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करें।
सबसे ज्यादा शरणार्थी राजस्थान में :
राजस्थान सरकार भले ही सीएए कानून को लागू नहीं करने का दावा करें, लेकिन देश में सबसे ज्यादा शरणार्थी राजस्थान में रह रहे हैं। ये वो हिन्दू शरणार्थी हैं जो पाकिस्तान से धर्म के आधार पर प्रताडि़त होकर आए हैं। पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर रोजाना जुल्म होते हैं, इसलिए परेशान अल्पसंख्यक भारत में आ जाते हैं। राजस्थान में रह रहे प्रताडि़त शरणार्थियों को नागरिकता देने के लिए पूर्व में अशोक गहलोत ने भी तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को पत्र लिखा था। नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार ने शरणार्थियों को नागरिकता देने के लिए नागरिक कानून में संशोधन किया, ताकि पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से धर्म के आधार पर प्रताडि़त अल्पसंख्यकों को भारत की नागरिकता मिल सके। नागरिकता नहीं होने से हिन्दू, सिक्ख, जैन, ईसाई बौद्ध और पारसी समुदाय के लाखों लोग अपने ही देश में शरणार्थी बन कर रह रहे हैं। केन्द्र सरकार की ओर से कई बार स्पष्ट किया जा चुका है कि सीएए से देश के किसी भी नागरिक खास कर मुसलमानों पर कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन राजनीतिक कारणों से सीएए का लगातार विरोध किया जा रहा है। देखना होगा कि जो कानून संसद के दोनों सदनों से पास होकर राष्ट्रपति के आदेश से लागू हो चुका है, उस पर सुप्रीम कोर्ट क्या निर्णय लेता है?
(एस.पी.मित्तल) (14-03-2020)
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