जयपुर में जस्टिस माहेश्वरी ने राजस्थान पुलिस को लगाई लताड़ तो जोधपुर में जस्टिस लोढ़ा ने काले कानून पर सरकार की आपत्ति को खारिज किया।

#3310
जयपुर में जस्टिस माहेश्वरी ने राजस्थान पुलिस को लगाई लताड़ तो जोधपुर में जस्टिस लोढ़ा ने काले कानून पर सरकार की आपत्ति को खारिज किया।
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24 नवम्बर को राजस्थान हाईकोर्ट में सरकार और पुलिस के लिए सकंट का दिन रहा। हाईकोर्ट की जयपुर खंडपीठ के जस्टिस महेन्द्र माहेश्वरी ने सिरसा स्थित रामरहीम के डेरे से जयपुर की एक महिला के गायब हो जाने के मामले में राजस्थान पुलिस को जमकर लताड़ लगाई। जस्टिस माहेश्वरी ने यहां तक कहा कि क्या अब पुलिस को जांच करने का काम भी सिखाना पड़ेगा? कोर्ट ने इस बात पर अफसोस जताया कि सिरसा स्थित रामरहीम के डेेरे से महिला के गायब होने पर राजस्थान पुलिस ने गंभीरता के साथ जांच नहीं की है। जब पुलिस के पास महिला के पति का बयान और सबूत हैं कि महिला डेरे में ही गई थी और उसके बाद आज तक भी नहीं लौटी है। ऐसे में पुलिस को डेरे के अधिकारियों से सम्पर्क कर लापता महिला का पता लगाना चाहिए। जस्टिस माहेश्वरी ने कहा कि यदि पुलिस ने सही तरीके से काम नहीं किया तो संबंधित अधिकारी को नौकरी से भी हटाया जा सकता है। इस मामले में आगामी सात दिसम्बर को फिर सुनवाई होगी। जस्टिस माहेश्वरी का कहना रहा कि अगली सुनवाई पर पुलिस विस्तृत जांच पड़ताल कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करें नहीं तो कोर्ट को सख्त निर्णय देना पड़ेगा। यहां यह उल्लेखनीय है कि जयपुर के कमलेश नामक व्यक्ति ने जवाहर नगर पुलिस स्टेशन पर उसकी पत्नी के गायब होने की शिकायत दी है। पति का कहना है कि वह स्वयं अपनी पत्नी को सिरसा स्थित राम रहीम के डेरे में छोड़कर आया था, लेकिन इसके बाद से उसकी पत्नी लौटी नहीं है। पति को अपनी पत्नी की हत्या की आशंका भी है।
जोधपुर में भी नाराजगीः
हाईकोर्ट की जोधपुर खंडपीठ में भी 24 नवम्बर को सरकार को नाराजगी का सामना करना पड़ा। हुआ यूं कि सीआरपीसी में संशोधन के मामले में एक जनहित याचिका पर जस्टिस संगीतराज लोढ़ा सुनवाई कर रहे थे कि तभी अतिरिक्त महाधिवक्ता का कहना रहा कि इससे याचिकाकर्ता का कोई हित प्रभावित नहीं हो रहा है, इसलिए यचिका को खारिज कर दिया जाए। इस पर जस्टिस लोढ़ा ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यह जनहित का मामला है और इससे पूरा प्रदेश प्रभावित है। सरकार की ओर से इस तरह की आपत्तियां शोभा नहीं देती हैं। इसी दौरान याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट नीलकमल बोहरा ने कहा कि सीआरपीसी में संशोधन के बिल से न्यायिक कार्य में तो हस्तक्षेप होगा ही, साथ ही प्रेस की आजादी भी खतरे में पड़ जाएगी। सरकार को इस काले कानून को रद्द किया जाना चाहिए। अब इस मामले में 28 नवम्बर को सुनवाई होगी।
एस.पी.मित्तल) (24-11-17)
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अजमेर के जनसंवाद में मिली शिकायतों के निराकरण को लेकर सीएम राजे बेहद गंभीर। प्रमुख शासन सचिवों, कलेक्टर, विधायकों और भाजपा के पदाधिकारियों के साथ की बैठक।

#3309
अजमेर के जनसंवाद में मिली शिकायतों के निराकरण को लेकर सीएम राजे बेहद गंभीर। प्रमुख शासन सचिवों, कलेक्टर, विधायकों और भाजपा के पदाधिकारियों के साथ की बैठक।
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सीएम वसुंधरा राजे ने अजमेर में होने वाले लोकसभा उपचुनाव के मद्देनजर पिछले दिनों जिले के सात विधानसभा क्षेत्रों में जो जनसंवाद किया उसमें मिली शिकायतों के निराकरण को लेकर 23 नवम्बर को जयपुर में एक उच्चस्तरीय बैठक हुई। इस बैठक में प्रमुख विभागों के शासन सचिव, विधानसभा क्षेत्रों के प्रभारी मंत्री, अजमेर के विधायक, कलेक्टर गौरव गोयल, देहात एवं शहर भाजपा के जिला अध्यक्ष उपस्थित रहे। सीएम राजे ने बैठक में स्पष्ट तौर पर कहा कि जनसंवाद में प्राप्त शिकायतों का निराकरण पूरी तरह होना चाहिए। बैठक में कलेक्टर गौरव गोयल ने बताया अब तक कितनी शिकायतों का निपटारा कर दिया गया है तथा कितनी शिकायतें लम्बित हैं। कलेक्टर ने सीएम को विधानसभा वार जानकारी दी। सीएम की गंभीरता को इसी से समझा जा सकता है कि बैठक में प्रमुख शासन सचिव भी उपस्थित रहे। सीएम ने कलेक्टर गोयल से कहा कि उन्हें राज्य सरकार के स्तर पर जिन समस्याओं का समाधान करवाना है उन्हें अभी बता दिया जावे। ऐसा न हो कि कलेक्टर जयपुर में पत्र ही लिखते रहे। उन्होंने कहा कि लोगों ने बड़ी उम्मीद के साथ शिकायतें दी है ऐसे में सभी शिकायतों का समाधान होना चाहिए। बैठक में विधायक वासुदेव देवनानी, श्रीमती अनिता भदेल, शत्रुघ्न गौतम, सुरेश सिंह रावत, भागीरथ चैधरी आदि ने अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों की शिकायतों का फीडबैक भी लिया। सीएम ने विधायकों से कहा कि वे भी शिकायतों के समाधान में सहयोग करें तथा निगरानी भी रखें। सीएम ने इस बात पर संतोष जताया कि कलेक्टर गोयल ने शिकायतों के निराकरण के लिए जो विस्तृत ब्यौरा तैयार किया है। उन्होंने कलेक्टर के काम काज की प्रशंसा भी की।
एस.पी.मित्तल) (24-11-17)
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जब राजस्थान में ही गुर्जर को पांच प्रतिशत विशेष आरक्षण नहीं मिल सका तो गुजरात में कांग्रेस पाटीदारों को कैसे दिलवा देगी। वायदे के बाद हार्दिक पटेल ने दिया कांग्रेस को समर्थन।

#3303
जब राजस्थान में ही गुर्जर को पांच प्रतिशत विशेष आरक्षण नहीं मिल सका तो गुजरात में कांग्रेस पाटीदारों को कैसे दिलवा देगी। वायदे के बाद हार्दिक पटेल ने दिया कांग्रेस को समर्थन।
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22 नवम्बर को हार्दिक पटेल ने गुजरात चुनाव में कांग्रेस को समर्थन देने की घोषणा की है। पिछले एक वर्ष से गुजरात के पाटीदार समुदाय को आरक्षण का लाभ दिलाने के लिए आंदोलन कर रहे हार्दिक पटेल ने कहा कि कांग्रेस ने वायदा किया है कि गुजरात में सरकार बनते ही विधानसभा में प्रस्ताव लाकर पाटीदारों को आरक्षण का लाभ दे दिया जाएगा। कांग्रेस के इस वायदे पर ही पाटीदार समुदाय भाजपा को हराने और कांग्रेस को जिताने का काम करेगा। मेरा मकसद सिर्फ पाटीदारों को आरक्षण का लाभ दिलवाना है। इसलिए मैंने चुनाव में कांग्रेस से सीटों की कोई सौदेबाजी नहीं की। अब जब कांग्रेस के वायदे पर हार्दिक पटेल ने समर्थन की घोषणा कर दी है तब यह सवाल उठा है कि जो कांग्रेस राजस्थान में गुर्जर समुदाय को पांच प्रतिशत का विशेष आरक्षण नहीं दिवा सकी वह गुजरात में पाटीदारों को आरक्षण का लाभ कैसे दिलवाएगी। गुजरात में भी राजस्थान की तरह 50 प्रतिशत आरक्षण विभिन्न जातियों को दिया जा चुका है। पार्टियों ने राजनीतिक स्वार्थ के जब-जब भी आरक्षण की सीमा को बढ़ाया तब तब सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी। राजस्थान में कांग्रेस और भाजपा के शासन में तीन बार गुर्जर समुदाय को पांच प्रतिशत विशेष आरक्षण देने का बिल विधानसभा में पास किया गया, लेकिन तीनों ही बार सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे बिल को अवैध घोषित कर दिया। गुर्जरों ने भी राजस्थान में संघर्ष किया है। लेकिन अभी तक भी सफलता नहीं मिली है। अब देखना है कि जो कांग्रेस राजस्थान में गुर्जर समुदाय को पांच प्रतिशत विशेष आरक्षण नहीं दिलवा सकी, वह गुजरात में पाटीदारों को गुजरात में कैसे दिलाएगी? कांग्रेस को यह अच्छी तरह पता है कि 50 प्रतिशत से ज्यादा आरक्षण नहीं दिया जा सकता। हालांकि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सुप्रीम कोर्ट के वकील कपिल सिब्बल ऐसी कोई धारा बता रहे है जिसके अंतर्गत पचास प्रतिशत से अधिक आरक्षण दिया जा सकता है। अच्छा हो कि कांग्रेस सिब्बल की इस धारा के अनुरूप पहले राजस्थान में गुर्जरों को लाभ दिलवाए। इस पर भाजपा को भी कोई एतराज नहीं है।
एस.पी.मित्तल) (22-11-17)
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आखिर कांग्रेस का कौन नेता खड़ा होगा राहुल गांधी के सामने। तो गुजरात चुनाव से पहले ही अध्यक्ष बन जाएंगे। ======

#3295
आखिर कांग्रेस का कौन नेता खड़ा होगा राहुल गांधी के सामने। तो गुजरात चुनाव से पहले ही अध्यक्ष बन जाएंगे।
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20 नवम्बर को दिल्ली में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक हुई। इस बैठक में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव का कार्यक्रम निर्धारित किया गया। सब जानते हैं कि सोनिया गांधी के बाद उनके पुत्र राहुल गांधी ही कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनेंगे। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर राहुल गांधी के सामने कौनसा नेता उम्मीदवारी जता सकता है? साफ जाहिर है कि कांग्रेस के किसी भी नेता में इतनी हिम्मत नहीं कि वे राहुल गांधी की उम्मीदवारी को चुनौती दे सके। इसीलिए यह माना जा रहा है कि 4 दिसम्बर को जब नामांकन की अंतिम तिथि होगी, तभी राहुल गांधी के नाम पर मोहर लग जाएगी। राहुल गांधी अपनी सुविधा के अनुसार 1 से लेकर 4 दिसम्बर तक के बीच नामांकन दाखिल कर सकते हैं। हालांकि घोषित कार्यक्रम के अनुसार 16 दिसम्बर को मतदान और 19 दिसम्बर को मतगणना निर्धारित की गई है। लेकिन जब 4 दिसम्बर तक कोई दूसरा नेता नामांकन दाखिल ही नहीं करेगा तो फिर गुजरात चुनाव से पहले ही राहुल गांधी की ताजपोशी हो जाएगी। यहां यह उल्लेखनीय है कि गुजरात में प्रथम चरण का मतदान 9 दिसम्बर को होगा। दूसरे चरण में 14 दिसम्बर को मतदान तथा 18 दिसम्बर को मतगणना होगी। यानि हिमाचल और गुजरात के चुनाव परिणाम कुछ भी रहे, लेकिन इससे पहले ही राहुल गांधी कांग्रेस के अध्यक्ष बन जाएंगे।
एस.पी.मित्तल) (20-11-17)
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पद्मावती फिल्म पर रोक लगाने के मामले में एमपी, पंजाब और जम्मू-कश्मीर भी राजस्थान से आगे निकल गए। शिवराज सिंह ने तो पद्मावती को राष्ट्रमाता बताया। आखिर राजस्थान में कब लगेगी रोक? ======

#3296
पद्मावती फिल्म पर रोक लगाने के मामले में एमपी, पंजाब और जम्मू-कश्मीर भी राजस्थान से आगे निकल गए। शिवराज सिंह ने तो पद्मावती को राष्ट्रमाता बताया। आखिर राजस्थान में कब लगेगी रोक?
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सब जानते हैं कि फिल्म पद्मावती का विरोध सबसे ज्यादा राजस्थान में ही हो रहा है। और यहां की सीएम वसुंधरा राजे एमपी के ग्वालियर घराने के साथ-साथ राजस्थान के धौलपुर घराने से भी जुड़ी हुई हंै, लेकिन इसे अफसोसनाक ही कहा जाएगा कि राजस्थान सरकार ने अभी तक भी इस विवादित फिल्म पर रोक लगाने की घोषणा नहीं की है। जबकि 20 नवम्बर को कांग्रेस शासित पंजाब, भाजपा व पीडीपी शासित जम्मू-कश्मीर तथा पड़ौसी राज्य मध्यप्रदेश ने फिल्म के प्रदर्शन रोक लगा दी है। यानि संजय लीला भंसाली जब भी अपनी यह फिल्म रिलीज करेंगे तो इन तीनों राज्यों के सिनेमाघरों में फिल्म नहीं चलेगी। पंजाब के कांग्रेसी सीएम कैप्टन अमरेन्द्र सिंह ने कहा कि यह फिल्म आम लोगों की भावनाओं के खिलाफ है। इसलिए इसे पंजाब में नहीं चलने दिया जाएगा। शिवराज सिंह चैहान ने तो फिल्म पर रोक लगाते हुए रानी पद्मावती को राष्ट्रमाता बताया। उन्होंने कहा कि मैं एक देशभक्त हंू तो अपनी राष्ट्रमाता का अपमान कैसे होने दूंगा। अब सवाल उठता है कि जब देश के तीन राज्यों ने इस विवादित फिल्म पर रोक लगा दी है तो ऐसी रोक राजस्थान में कब लगेगी? सब जानते हैं कि इस फिल्म का विरोध भी सबसे पहले राजस्थान से ही शुरू हुआ था। सरकार में बैठे लोगों को अच्छी तरह पता है कि राजपूत समाज में कितना गुस्सा है। इस गुस्से की वजह से निर्माता-निर्देशक संजय लीला भंसाली जयपुर में बुरी तरह पिट भी चुके हैं। राजस्थान में जगह-जगह धरना प्रदर्शन बंद हो रहे हैं। कानून व्यवस्था की स्थिति भी बिगड़ने लगी हैं, लेकिन सरकार ने रोेक की घोषणा अभी तक भी नहीं की है। राज्य सरकार ने अभी सिर्फ केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को पत्र लिखने का कार्य किया हैं, जबकि पंजाब, जम्मू-कश्मीर और एमपी ने तो पत्र लिखे बगैर ही फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगा दी। इससे किसी घटना पर सरकारों की गंभीरता का भी पता चलता है। राजस्थान में करणी सेना से जुड़े नेता ही देशभर में आंदोलन खड़ा कर रहे हैं। 20 नवम्बर को भी मुम्बई में लोकेन्द्र सिंह कालवी की अगुवाई में प्रदर्शन हुआ।
एस.पी.मित्तल) (20-11-17)
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जावेद अख्तर का बयान राजपूत समाज को चिढ़ाने और अपमानित करने वाला है। अंग्रेजों ने मुगलों से ही छीनी थी हुकूमत और कई नवाब भी रहे गुलाम।

#3294
जावेद अख्तर का बयान राजपूत समाज को चिढ़ाने और अपमानित करने वाला है। अंग्रेजों ने मुगलों से ही छीनी थी हुकूमत और कई नवाब भी रहे गुलाम।
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अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब यह नहीं कि आप किसी भी समाज के लिए कुछ भी बोल दें। 19 नवम्बर को एक टीवी चैनल के कार्यक्रम में पूर्व सांसद और फिल्म लेखक जावेद अख्तर ने फिल्म पद्मावती को लेकर जो जहरीला बयान दिया है वह राजपूत समाज को चिढ़ाने और अपमानित करने वाला ही है। जावेद ने कहा कि जिन राजपूत घरानों ने अंगे्रजों की गुलामी स्वीकार की वे पद्मावती के लिए क्या लड़ेंगे? यदि हिम्मत होती तो ऐसे लोग अंग्रेजों से लड़ते? पद्मावती फिल्म के खिलाफ कौन आंदोलन चला रहा है, इसकी बात तो बाद में, लेकिन पहले जावेद को यह समझना चाहिए कि अंग्रेेजों ने भारत में हुकूमत किसी हिन्दू राजा से नहीं बल्कि मुगल शासकों से छीनी थी। जब मुगल शासकों ने अंग्रेजों के सामने घुटने टेक दिए तो पहले से ही गुलाम घराने कैसे विरोध करते। फिर इतिहास गवाह है कि अंग्रेजों से किस प्रकार हमारे क्रांतिकारियों ने लोहा लिया। यह सही है कि आजादी के आंदोलन में मुसलमानों का भी साथ मिला। लेकिन अब जावेद अख्तर जो एक तरफा जहरीला बयान दे रहे है वे किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। इससे जावेद की मानसिकता भी छलकती है। जावेद पहले भी ऐसे बयान दे चुके हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब वे किसी फिल्म की कहानी लिखते होंगे तो वह फिल्म कैसी होगी। शायद इसी मानसिकता के चलते जावेद फिल्म पद्मावती का समर्थन कर रहे हैं। जावेद को यह समझना चाहिए कि पद्मावती फिल्म के खिलाफ राजपूत घराने नहीं, बल्कि राजपूत समाज के साथ सर्व समाज शामिल हैं। इतना ही नहीं सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के दीवान और मुस्लिम धर्मगुरु जैनुल आबेदीन ने भी फिल्म पद्मावती का विरोध किया। दीवान आबेदीन ने भी मुसलमानों से भी विरोध करने की अपील की है। जब फिल्म का विरोध सर्वसमाज का रहा हो, तब सिर्फ राजपूत घरानों को लेकर पूरे आंदेालन को निशाना बनाना पूरी तरह गलत हैं। अच्छा होता कि जावेद अख्तर पहले आंदोलन की हकीकत समझ लेते। बल्कि राजस्थान में आम राजपूत के मन में यह पीड़ा है कि पूर्व राजघराने पूरी ताकत के साथ सहयोग नहीं कर रहे हैं। आज भी ऐसे घरानों को अपनी अकूत सम्पत्तियों की चिंता है। वैसे भी जब कभी कोई आंदोलन होता है तो गरीब और आम व्यक्ति ही ताकत दिखाता है। आवेद अख्तर और संजय लीला भंसाली जैसे निर्माता-निर्देशक यह अच्छी तरह समझ लें कि पद्मावती जैसी वीर और स्वाभिमानी महिला किसी फिल्म में मनोरंजन का पात्र नहीं हो सकती? जिस पद्मावती ने अलाउद्दीन खिलजी से अपनी इज्जत बचाने के लिए अग्निकुंड में कूद कर जान दे दी हो, उस बलिदानी महिला पर जावेद और भंसाली जैसे व्यक्तियों को तो बात करने तक का अधिकार नहीं है। कोई कल्पना कर सकता है कि चित्तौड की 16 हजार स्त्रियों के साथ जौहर हुआ हो। ऐसे बलिदान और वीरता का हर देशभक्त कायल है, लेकिन जावेद और भंसाली को तो अपने ही देश को बदनाम और लांछित करने में मजा आ रहा है। शर्मनाक बात तो यह है कि ऐसे लोग अभिव्यक्ति की आजादी के पैरोकार बने हुए हैं।
एस.पी.मित्तल) (20-11-17)
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अयोध्या में श्रद्धा का मंदिर और लखनऊ में अमन की मस्जिद के प्रस्ताव पर क्या मुसलमानों में सहमति हो जाएगी? 5 दिसम्बर से सुनवाई होनी है सुप्रीम कोर्ट में।

#3293
अयोध्या में श्रद्धा का मंदिर और लखनऊ में अमन की मस्जिद के प्रस्ताव पर क्या मुसलमानों में सहमति हो जाएगी? 5 दिसम्बर से सुनवाई होनी है सुप्रीम कोर्ट में।
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20 नवम्बर को उत्तर प्रदेश के शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामे के साथ बीस पृष्ठ का एक प्रस्ताव प्रस्तुत किया है। इस प्रस्ताव में अयोध्या के मंदिर-मस्जिद विवाद को हल करने के सुझाव दिए गए हैं। हालांकि शिया बोर्ड इस विवाद में पक्षकार नहीं है, लेकिन मामले की सुनवाई से पहले सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस विवाद का हल आपस में बैठकर निकाला जाए। सुप्रीम कोर्ट की इस सलाह पर ही शिया मुसलमानों का नेतृत्व करने वाले वक्फ बोर्ड के पदाधिकारियों ने विश्व हिन्दू परिषद सहित अयोध्या के तमाम साधु-संतों से संवाद किया। इस संवाद में ही यह हल निकाला गया कि अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर बने तथा लखनऊ के हुसैनाबाद क्षेत्र के घंटा घर परिसर में अमन की मस्जिद बनाई जाए। सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत इस प्रस्ताव पर विवाद से जुड़े हिन्दू पक्षकारों ने भी हस्ताक्षर किए हैं। इस प्रस्ताव को पेश करने के बाद बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी ने कहा कि अयोध्या में बावरी मस्जिद का निर्माण शिया समुदाय के मीरबाकी ने करवाया था, इसलिए मुस्लिम पर्सनल लाॅ बोर्ड आदि संस्थाओं को इस विवाद में दखल नहीं करना चाहिए। जब शिया समुदाय लखनऊ में मस्जिद बनवाने को तैयार है तो फिर किसी को भी आपत्ति नहीं होनी चाहिए। लखनऊ के घंटाघर की सम्पत्ति भी शिया वक्फ बोर्ड की ही है। सरकार इस परिसर में मस्जिद निर्माण की अनुमति देकर अयोध्या का विवाद समाप्त करवा सकती है। लेकिन सवाल उठता है कि क्या शिया वक्फ बोर्ड के इस प्रस्ताव पर मुसमानों में सहमति हो पाएगी? क्या सुन्नी समुदाय अयोध्या में सिर्फ मंदिर बने, इस पर सहमत होगा? देखा जाए तो अब यह मामला शिया और सुन्नी समुदाय के बीच का रह गया है। शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी का कहना है कि वे देश में अमन चैन चाहते हैं, इसलिए यह प्रस्ताव रखा है। वैसे भी जिस स्थान पर पूजा हो रही हो, वहां मुसलमानों की मस्जिद नहीं बन सकती। आज भारत में आम हिन्दू और मुसलमान सुकून के साथ रहना चाहता है। लेकिन अयोध्या विवाद की वजह से कई बार देश के भाईचारे को खतरा हो जाता है।
विरोध शुरूः
श्रद्धा का मंदिर और अमन की मस्जिद के शिया वक्फ बोर्ड के प्रस्ताव का विरोध भी शुरू हो गया है। मुस्लिम पसर्नल लाॅ बोर्ड के मौलाना फिरंगी ने कहा कि शिया बोर्ड का प्रस्ताव कोई मायने नहीं रखता है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट में वह बोर्ड पक्षकार नहीं है और जब यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है तो फिर कोर्ट के फैसले का इंतजार करना चाहिए। अयोध्या विवाद के प्रमुख पक्षकार इकबाल अंसारी ने भी इस प्रस्ताव पर असहमति जताई है। सुप्रीम कोर्ट में 5 दिसम्बर में इस मामले में सुनवाई होगी।
एस.पी.मित्तल) (20-11-17)
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तो क्या पाकिस्तान हमारा कश्मीर ले सकता है? फारुख अब्दुल्ला को यह भी बताना चाहिए।

#3292
तो क्या पाकिस्तान हमारा कश्मीर ले सकता है? फारुख अब्दुल्ला को यह भी बताना चाहिए।
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जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम फारुख अब्दुल्ला बार-बार राग आलप रहे हैं कि पाक अधिकृत वाले कश्मीर को भारत कभी नहीं ले सकता। फारुख यहां तक कह रहे है ंकि किसी के बाप में भी दम नहीं है जो पाक कब्जे वाले कश्मीर को ले सके। यह माना कि वर्तमान हालातों में पाकिस्तान से कश्मीर को छीना नहीं जा सकता, लेकिन फारुख अब्दुल्ला को इस सवाल का भी जवाब देना चाहिए कि क्या हमारे कश्मीर को पाकिस्तान ले सकता है? सब जानते हैं कि हमारे कश्मीर की दुर्दशा करवाने में फारुख अब्दुल्ला की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। आज कश्मीर घाटी जो हिन्दू विहीन हुई है उसमें भी फारुख अब्दुल्ला और उनके पुत्र उमर अब्दुल्ला की सरकारों का योगदान रहा है। अब्दुल्ला परिवार की सरकारों में ही चार लाख हिन्दुओं को कश्मीर घाटी से पीट पीट कर भगा दिया। आज कश्मीर घाटी पाकिस्तान में प्रशिक्षित आतंकवादियों के कब्जे में हैं। घाटी में सरेआम पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगते हैं। आए दिन हमारे जवान शहीद हो रहे हैं। फारुख अब्दुल्ला जितनी वकालत पाक के कब्जे वाले कश्मीर की कर रहे हैं, उसकी आधी भी यदि हमारे कश्मीर के लिए करें तो कश्मीर की समस्या का समाधान हो सकता है। फारुख अब्दुल्ला को कश्मीर के अलगाववादियों को यह समझना चाहिए कि पाकिस्तान कभी कश्मीर को भारत से छीन नहीं सकता है। इससे उन आतंकियों के हौंसले पस्त होंगे जो पाकिस्तान में बैठ कर कश्मीर को भारत से छीनने की बात करते हैं। जब फारुख अब्दुल्ला कश्मीर के लिए पाकिस्तान की मदद वाला बयान दे सकते हैं तो फिर हमारे कश्मीर के लिए क्यों नहीं? पूर्व केन्द्रीय मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री की हैसियत से फारुख ने भारत सरकार से अनेक सुविधाएं ले रखी हैं इसलिए भी उनका दायित्व बनता है कि वे कश्मीर को भारत का हिस्सा बनाए रखे। आज जितनी सुविधाएं हमारे कश्मीर में कश्मीरियों को मिल रही है उसकी चैथाई सुविधा भी पाक के कब्जे वाले कश्मीर में मुसलमानों को नहीं मिल रही है। आए दिन वहां के कश्मीरी पाकिस्तान की सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसे प्रदर्शनकारी पाकिस्तान के सुरक्षा बलों पर जुल्म करने का आरोप भी लगाते हैं।
एस.पी.मित्तल) (19-11-17)
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तो क्या इंदिरा गांधी की प्रतिमा लगाने के लिए अजमेर कांग्रेस को अनुमति लेनी पड़ेगी? शहर अध्यक्ष विजय जैन ने कहा कि इसी माह लग जाएगी प्रतिमा।

#3291
तो क्या इंदिरा गांधी की प्रतिमा लगाने के लिए अजमेर कांग्रेस को अनुमति लेनी पड़ेगी? शहर अध्यक्ष विजय जैन ने कहा कि इसी माह लग जाएगी प्रतिमा।
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19 नवम्बर को पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी की जयंती पर आयोजित समारोह में अजमेर शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विजय जैन ने घोषणा की कि नवम्बर माह के अंत तक श्रीमती इंदिरा गांधी की प्रतिमा स्टेशन रोड स्थित स्मारक पर स्थापित कर दी जाएगी। प्रतिमा लगाने के अवसर पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट भी उपस्थित रहेंगे। जैन की इस घोषणा का कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया। श्रीमती इंदिरा गांधी की प्रतिमा स्मारक पर लगाने को लेकर लम्बा इंतजार रहा है, लेकिन जैन की घोषणा के साथ ही यह सवाल भी उठा है कि क्या कांगे्रस को प्रतिमा लगाने के लिए अनुमति लेनी होगी? हाल ही में अजमेर विकास प्राधिकरण ने इंदिरा गांधी की प्रतिमा को कांग्रेस के अध्यक्ष को सौंपा है। इसके साथ ही जो पत्र दिया है, उसमें साफ-साफ लिखा है कि प्रतिमा लगाने से पहले संबंधित विभागों की अनुमति ली जावे। साथ ही प्रतिमा लगाने के बाद रख रखाव और सुरक्षा की जिम्मेदारी भी कांग्रेस की होगी। इस संबंध में शहर अध्यक्ष जैन का कहना है कि अब कोई अनुमति की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि पूर्व में ही संभागीय स्तर पर बनी कमेटी ने प्रतिमा लगाने की अनुमति दे रखी है। इसके साथ ही नगर निगम ने भी अनुमति दी है। स्मारक नगर निगम की सम्पत्ति पर बना हुआ है। ऐसे में अब किसी भी विभाग से अनुमति की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने इस बात पर अफसोस जताया कि पूर्व प्रधानमंत्री की प्रतिमा लेने से पहले तत्कालीन नगर सुधार न्यास को दो लाख तीस हजार रुपए का भुगतान किया गया था, जबकि महापुरुषों की प्रतिमाओं को स्थानीय निकाय संस्थाएं अपने खर्चे से ही लगवाती हैं। उन्होंने कहा कि प्रतिमा को लगाने के लिए जो खर्च हो रहा है उसे भी कांग्रेस कमेटी वहन कर रही है। इस बात का ध्यान रखा गया है कि प्रतिमा पूरी तरह सुरक्षित रहे।
एस.पी.मित्तल) (19-11-17)
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सीएम के आभार प्रदर्शन में भी किशनगढ़ में गुटबाजी नजर आई। मार्बल एसोसिएशन के समारोह के बाद पहुंचे विधायक चैधरी।

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सीएम के आभार प्रदर्शन में भी किशनगढ़ में गुटबाजी नजर आई। मार्बल एसोसिएशन के समारोह के बाद पहुंचे विधायक चैधरी।
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राजस्थान की मार्बल नगरी किशनगढ़ में सत्तारुढ़ भाजपा के नेताओं में जो खींचतान चल रही है वह 18 नवम्बर को सीएम वसुंधरा राजे के आभार प्रदर्शन में भी देखने को मिली। हुआ यूं कि मार्बल और ग्रेनाइट पत्थर पर जीएसटी में 10 प्रतिशत की कटौती किए जाने पर किशनगढ़ मार्बल एसोसिएशन की ओर से 18 नवम्बर को जयपुर में सीएम का जोरदार स्वागत किया गया। आरके मार्बल के अध्यक्ष अशोक पाटनी और मार्बल एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेश टांक के नेतृत्व में कोई पांच सौ मार्बल कारोबारी सीएम का स्वागत करने के लिए जयपुर पहुंचे थे, लेकिन इस काफिले में किशनगढ़ के भाजपा विधायक भागीरथ चैधरी शामिल नहीं थे। असल में एसोसिएशन की ओर से विधायक चैधरी को आमंत्रित ही नहीं किया गया। चैधरी को जब यह पाता चला कि उनके निर्वाचन क्षेत्र के सैकड़ों लोग सीएम का आभार प्रदर्शन करने जा रहे हैं तो चैधरी भी अपने कुछ समर्थकों को लेकर जयपुर पहुंच गए, लेकिन चैधरी सीएम आवास पहुंचते, इससे पहले ही अशोक पाटनी और सुरेश टांक के नेतृत्व में वसुंधरा राजे का स्वागत हो चुका था। स्वागत और आभार प्रदर्शन का कार्यक्रम समाप्त होने के बाद विधायक चैधरी ने भी सीएम राजे को चुनरी ओढ़ाकर अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। अलग-अलग हुए सम्मान समारोह की खास बात यह थी कि सीएम राजे ने अशोक पाटनी और सुरेश टांक से राज्य सरकार द्वारा ली जा रही राॅयल्टी पर भी चर्चा की। इस चर्चा का नतीजा रहा कि सरकार ने मार्बल पर 30 प्रतिशत राॅयल्टी की कटौती कर दी। अब दोनों ही पक्ष सीएम का स्वागत करने का श्रेय ले रहे हैं। विधायक चैधरी के समर्थकों ने भी सीएम को चुनरी ओढ़ाने वाला फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेश टांक ने विधायक चैधरी को साथ नहीं ले जाने पर तो कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन कहा कि सीएम राजे की वजह से मार्बल कारोबार को नया जीवन मिला है। क्योंकि 28 प्रतिशत जीएसटी की वजह से यह कारोबार मृत प्राय हो गया था। राज्य सरकार ने भी राॅयल्टी कम कर इस कारोबार को राहत दी है। यह उल्लेखनीय है कि सुरेश टांक भाजपा की प्रदेश कार्य समिति के सदस्य भी हैं और पूर्व में किशनगढ़ नगर परिषद के सभापति भी रह चुके हैं।
एस.पी.मित्तल) (19-11-17)
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