क्या वी.सतीश और अशोक परनामी भी देवनानी और भदेल में एका नहीं करवा सके?

भाजपा के राष्ट्रीय सहसंगठन मंत्री वी.सतीश और प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी 15,16 व 17 अप्रैल तक अजमेर में रहे। इन दोनों वरिष्ठ नेताओं ने विधानसभा बार बूथ स्तरीय कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद कर संगठन की नब्ज को टटोला। कई विधानसभा क्षेत्रों में विधायकों के प्रति कार्यकर्ताओं की नाराजगी सामने आई, लेकिन वहीं अजमेर शहर के दोनों विधानसभा क्षेत्रों में विधायकों के बीच दरार देखी गई। उम्मीद थी कि दो बड़े नेताओं की मौजूदगी में तो एकता दिखाने का अभिनय किया ही जाएगा लेकिन उत्तर क्षेत्र के भाजपा विधायक व स्कूली शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी और दक्षिण क्षेत्र की विधायक महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री अनिता भदेल के तेवरों को देखते हुए बड़े नेताओं ने भी कोई जोखिम नहीं उठाया। यही वजह रही कि 17 अप्रैल को जब दक्षिण क्षेत्र का समारोह हुआ तो उत्तर के विधायक देवनानी तथा उत्तर के समारोह में दक्षिण की विधायक भदेल अनुपस्थित रही। भाजपा का आम कार्यकर्ता पहले ही जिन हालातों से परेशान था वैसा ही वी.सतीश और परनामी की मौजूदगी में भी हुआ। यह माना कि दोनों नेताओं ने विधानसभा वार कार्यकर्ताओं से संवाद किया, लेकिन अजमेर के संगठन के हालातों को देखकर यदि दोनों विधायक एक-दूसरे के समारोह में जाते तो सराहनीय होता। इससे कार्यकर्ताओं में भी सकारात्मक संदेश जाता।
शक्ति प्रदर्शन :
भले ही समारोह बूथ स्तरीय कार्यकर्ताओं का रहा हो, लेकिन भदेल और देवनानी ने अपना-अपना शक्ति प्रदर्शन करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। यही वजह रही कि बूथ स्तरीय प्रतिनिधि के अलावा दोनों के समर्थक भी बड़ी संख्या में आ गए। दक्षिण क्षेत्र में भदेल और उत्तर क्षेत्र में देवनानी जिन्दाबाद के ही नारे लगे।
सांवरलाल जाट का फोटो गायब :
देवनानी और भदेल ने अपने-अपने समारोह के मंच पर जो बैनर लगाया उसमें अजमेर के सांसद और केन्द्रीय जल संसाधन राज्यमंत्री सांवरलाल जाट का फोटो नहीं था। यह बात अलग है कि जाट स्वयं दोनों समारोह में उपस्थित रहे।
यादव का बढ़ाया रूतबा :
केन्द्रीय सहसंगठन मंत्री वी.सतीश और प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी ने अपने तीन दिवसीय अजमेर दौरे के अंतिम दिन शहर अध्यक्ष अरविंद यादव का रूतबा बढ़ा दिया। यादव को हटाने की अटकलों के बीच 17 अप्रैल को वी.सतीश और परनामी ने यादव के ब्रह्मपुरी स्थित निवास पर दोपहर का भोजन किया। इस मौके पर यादव ने दोनों बड़े नेताओं को संगठन की असली हकीकत से अवगत करवाया।
एकता का प्रयास करेंगे:
देवनानी और भदेल के विवाद का मामला जब मीडिया ने वी.सतीश व परनामी के सामने रखा तो दोनों नेताओं ने कहा कि राजनीतिक दलों में ऐसा होता ही रहता है। हमारा यह प्रयास होगा कि अजमेर के दोनों मंत्री एक दूसरे के निर्वाचन क्षेत्रों में होने वाले कार्यक्रमों में भाग लें। उन्होंने कहाकि मंत्री सिर्फ अपने निर्वाचन क्षेत्र का मंत्री नहीं होता। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं की भावनाओं के अनुरूप दोनों में एकता करवाने की कोशिश की जाएगी। परनामी ने कहा कि अजमेर शहर के अध्यक्ष की घोषणा भी जल्द होगी।

अजमेर देहात भाजपा की कार्यकारिणी घोषित, शहर में अध्यक्ष तय नहीं।

प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष अशोक परनामी और राष्ट्रीय सहसंगठन मंत्री वी.सतीश के तीन दिवसीय दौरे के अंतिम दिन 17 अप्रैल को अजमेर देहात भाजपा की कार्यकारिणी की तो घोषणा हो गई, लेकिन भाजपा के शहर अध्यक्ष का फैसला अभी तक भी नहीं हुआ है।
भाजपा के देहात जिला अध्यक्ष प्रो. बी.पी.सारस्वत ने राजनीतिक सूझ-बूझ दिखाते हुए परनामी और वी.सतीश की उपस्थिति में ही कार्यकारिणी की घोषणा कर दी। ऐसा इसलिए किया गया ताकि किसी विवाद की गुंजाइश नहीं रहे। देहात की कार्यकारिणी में आठ उपाध्यक्ष, तीन महामंत्री और आठ मंत्री बनाए गए हैं। इसके अतिक्ति 9 कार्यकारिणी के सदस्य हैं, जबकि 14 बजे नेताओं को स्थायी आमंत्रित तथा 11 को विशेष आमंत्रित सदस्य बनाया गया है। इसके साथ ही मंडलों के अध्यक्ष मोर्चों एवं प्रकोष्ठों के जिलाध्यक्ष, प्रदेश के पदाधिकारी पंचायत समितियों के प्रधान, नगर निकायों में सभापति, पदेन स्थायी आमंत्रित सदस्य होंगे।
शहर अध्यक्ष तय नहीं:
प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय सहसंगठन मंत्री के तीन दिनों के प्रवास के बाद भी अजमेर शहर भाजपा अध्यक्ष का निर्णय नहीं हो सका है। अजमेर शहर प्रदेश के उन चार शहरों में शामिल है, जहां अभी तक भी अध्यक्ष का चुनाव नहीं हो पाया है और न ही प्रदेश नेतृत्व ने किसी का मनोनयन किया है। इसीलिए पूर्व में मनोनीत अरविंद यादव ही अध्यक्ष की भूमिका निभा रहे हैं। अजमेर उत्तर क्षेत्र के भाजपा विधायक और स्कूली शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी का समर्थन यादव कको ही है, लेकिन दक्षिण क्षेत्र की भाजपा विधायक और महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री अनिता भदेल यादव के विरोध में हैं। हाल ही में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े आनंद सिंह राजावत को शहर अध्यक्ष नियुक्त किया जा रहा था, लेकिन देवनानी के कड़े विरोध के चलते राजावत की नियुक्ति टल गई।
देहात के पदाधिकारी:
उपाध्यक्ष शम्भु शर्मा किशनगढ़, भगवान शर्मा नसीराबाद, विरेन्द्र सिंह कानावत मसूदा, निर्मल भंडया अरांई, नारायण सिंह पुष्कर, कन्हैयालाल जेतवाल केकड़ी, भैरूलाल गुर्जर पुष्कर व पवन जैन ब्यावर को मनोनीत किया गया। महामंत्री राधेश्याम पोरवाल केकड़ी, ओम प्रकाश भड़ाणा पुष्कर व समरथ सिंह राठौड़ किशनगढ़ तीनों को ही पुन: महामंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मंत्री मोहन सिंह रावत पुष्कर, जयराम चौधरी रूपनगढ़, मुरली तिलोकानी ब्यावर, मि_ूलाल रांका बिजयनगर, ताराचंद रावत नसीराबाद, कैलाश गुर्जर बिजयनगर, जेठू सिंह रावत जवाजा व सत्यनारायण चौधरी केकड़ी तथा कोषाध्यक्ष पवन माहेश्वरी पीसांगन को मनोनीत किया गया। इसी प्रकार कार्यालय मंत्री श्रवणसिंह पुष्कर, प्रचार मंत्री मुंसीफ अली खान पुष्कर, आजीवन निधिक संयोजक दिनेश तोतला सरवाड़ को मनोनीत किया गया।
कार्यकारिणी सदस्य:
श्रीमती कौशल्यादेवी, रामस्वच्प पचार, उदाराम कुमावत, हेमराज सोनी, कानाराम जाट, बिरदीचंद कुमावत, लक्ष्मीनारायण गहलोत, बजरंगलाल माली, मदन पोसवाल, पांचूराम थांकण, ओम प्रकाश पाराशर, रामपाल गुर्जर, पप्पू सारस्वत, विष्णु शर्मा, भंवर सिंह बुजारोल, चैनसुख हेड़ा, बलवीर सिंह दग्दी, राकेश मोयल, भोम सिंह रावत, अशोक कुमावत, नरेन्द्र सिंह बनजारी, गंगासिंह बड़कोचरा, गोपी सिंह रावत, भंवरलाल चौहान, प्रेमराज राठी, रमेश दाधीच, श्रीमती मंजू जोधा, गिरधारी सिंह, वेद प्रकाश पाराशर, अशोक वैष्णव, लक्ष्मण सिंह राव,त धर्मराज भटियाणी, विरेन्द्र सिंह नयागांव, प्रदीप सिंह भदोरिया, गंगासिंह शेखावत, भंवर सिंह रावत, टीकमचदं चौहान, श्रीमती मंजू दग्दी, हरिमोहन शर्मा, पप्पू सिंह भींचर, श्रीमती चित्रा व्यास, जसवंत सिंह गोदियाना, भागीरथ सिंह एडवोकेट, जवाहर लाल खरवड़, रतन लाल घासल, हनुमान प्रसाद शर्मा, सूरजनारायण पाराशर, फरीद खां, सुवा सिंह रावत, नेमीचंद दामौर, विक्रम सिंह रावत, गोर्धन मेघवंशी, राजू गुर्जर, भंवर सिंह राठौड़, रामस्वरूप मेवाड़ा, कैलाश जाट, श्रीमती निहाली देवी प्रजापति, भगवान दत्त शर्मा, भागचदं सोनी, गोपाल किशन मालानी, रामेश्वर गोस्वामी, हगामी लाल चौधरी, दूधाराम कीर, विष्णु प्रसाद शर्मा, राजेन्द्र सिंह रावत, सूरजकरण मेघवंशी, शम्भु सिंह रावत, सुरेश शर्मा, मदन लाल भींचर, घीसालाल गुर्जर, बालचंद लोढ़ा, नटवर सिंह शेखावत, शिवराज सिंह पलाड़ा, मांगीलाल देवड़ा, चांदमल प्रजापत, गोविंद धूत, संजीव भटेवड़ा, श्रीमती निर्मल कंवर, राजेन्द्र विनायका,श्रवण चौधरी, श्रीमती अर्चना बोहरा, अनिरुद्ध खंडेलवाल, किशनपुरी, अनिल भाटी हरकांत सरवाडिय़ा, मेघाराम देवासी मेवाडिय़ा, करण रावत राजगढ़, शरीफ कुरैशी रामसर तथा दशरथ सिंह साम्प्रोदा को मनोनीत किया गया।
स्थायी आमंत्रित सदस्य:
प्रो. सांवरलाल जाट सांसद, भूपेन्द्र सिंह यादव राज्यसभा सांसद, भागीरथ चौधरी विधायक किशनगढ़, शंकर सिंह रावत विधायक ब्यावर, श्रीमती सुशील कंवर पलाड़ा विधायक मसूदा, सुरेश सिंह रावत विधायक पुष्कर, शत्रुघ्न गौतम विधायक केकड़ी, सुश्री वंदना नोगिया जिला प्रमुख अजमेर, शंभुदयाल बडग़ुर्जर पूर्व विधायक केकड़ी, किशन गोपाल कोगटा पूर्व विधायक मसूदा, गोपाल लाल धोबी पूर्व विधायक केकड़ी, पुखराज पहाडिय़ा पूर्व जिला प्रमुख अजमेर, श्रीमती सरिगा गेना पूर्व जिला प्रमुख अजमेर, सीमा माहेश्वरी पूर्व जिला प्रमुख अजमेर है।
विशेष आमंत्रित सदस्य:
औंकार सिंह लखावत, रासा सिंह रावत, मांगीलाल अग्रवाल, ताराचंद अजमेरा, शिवराज चौधरी, भंवर सिंह पलाड़ा, मदन सिंह रावत, डी.सी.वी.किरण, महेन्द्र पाटनी, अब्दुल वहीद खान व टीकम चौधरी उपजिला प्रमुख अजमेर हैं।

आखिर कश्मीर में कौन कर रहा है सेना के खिलाफ साजिश ?

पीडि़त लड़की ने अदालत में दिए बयान
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17 अप्रैल को कश्मीर के हंदवाड़ा में उस पीडि़त लड़की ने मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान दर्ज करा दिए, जिसको लेकर पिछले एक सप्ताह से कश्मीर घाटी में तनावपूर्ण हालात हैं। अलगावादी नेता आरोप लगा रहे हंै कि इस लड़की के साथ सेना के दो जवानों ने छेड़छाड़ की है। इसको लेकर घाटी में 17 अप्रैल को भी बंद के हालत रहे और कई स्थानों पर कफ्र्यु जैसी स्थिति है। लड़की ने तीन दिन पहले भी मीडिया में कहा था कि सेना के जवानों ने छेड़छाड़ नहीं की है। बल्कि दो कश्मीरी युवकों ने ही उसका बेग छीना और छेड़छाड़ की। 17 अप्रैल को लड़की ने अपने पिता की उपस्थिति में मजिस्ट्रेट से भी कहा कि सेना के जवानों ने छेड़छाड़ नहीं की। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कौन से तत्व सेना के खिलाफ साजिश कर रहे हंै? कुछ अलगाववादियों ने जब लड़की के साथ सेना के जवानों द्वारा छेड़छाड़ का आरोप सामने रखा तो कश्मीर घाटी में सेना के खिलाफ सड़कों पर विरोध  प्रदर्शन हुआ। प्रदर्शनों के ताकत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सेना के एक बंकर में आग लगा दी गई। यदि सेना अपना बचाव नहीं करती तो जवान बंकर के अंदर जलकर मर जाते। जवाब में फायरिंग हुई तो तीन कश्मीरी नागरिक मर गए। अब लड़की के साथ छेड़छाड़ का मामला तो पीछे रह गया और तीन नागरिकों की मौत से माहौल गर्म हो गया। क्या अलगाववादियों ने लड़की के साथ छेड़छाड़ का मामला एक साजिश के तहत उठाया था? कश्मीर में इस समय भाजपा और पीडीपी की संयुक्त सरकार है। यदि लड़की के साथ छेड़छाड़ की बात सही होती तो अब तक मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती भी सेना को कठघरे में खड़ा कर देती, कश्मीर में पिछले कई दिनों से हालात खराब हैं। श्रीनगर में एनआईटी कैम्पस में जो घटना हुई उसके बाद से ही घाटी में इंटरनेट सेवा ठप पड़ी हुई हैं। हालात इतने खराब है कि एनआईटी के कैम्पस से गैर कश्मीरी विद्यार्थियों को भागना पड़ा। असल में अलगाववादी चाहते है कि कश्मीर की आबादी क्षेत्र से सेना को हटा लिया जाए। लेकिन अहम सवाल यह है कि जब सेना की मौजूदगी में गैर कश्मीरी विद्यार्थियों को पीटा जा रहा है और बंकर में आग लगाई जा रही है, तब सेना के हटने के बाद हालातों का अंदाजा लगाया जा सकता है। सब जानते है कि घाटी में पाकिस्तान का दखल है। सीमा पार से आए युवक ही आतंकवादी वारदातें करते हैं। इससे सेना को भारी नुकसान हो रहा है।

भैरवधाम पर मेले के साथ हुआ नवरात्र का समापन

अजमेर के निकटतम राजगढ़ गांव स्थित श्री मसाणिया भैरवधाम पर 16 अप्रैल को भव्य मेले के साथ नवरात्र महोत्सव का समापन हुआ। इस अवसर पर भैरवधाम के उपासक चम्पालाल महाराज ने सभी श्रद्धालुओं को अपने हाथ से चमत्कारिक चिमटी (भभूत) दी। इस मौके पर महाराज ने श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देते हुए कहा कि यह चिमटी लगातार नौ दिनों की अखंड ज्योति से तैयार हुई है। यह कोई साधारण राख नहीं है बल्कि भरोसे और विश्वास की चिमटी है। इसके लिए अखंड ज्योति में हजारों नारियल, सैकड़ों पीपे तेल, धूप एवं हवन सामग्री का उपयोग हुआ है। इन नौ दिनों में जिन श्रद्धालुओं  ने अखंड ज्योति के दर्शन किए हैं उनके सारे कष्ट और रोग अपने आप दूर हो जाएंगे। इस अवसर पर महाराज ने बेटी बचाओ और नशे की प्रवृत्ति को छोडऩे की सीख भी दी है। समारोह में स्कूली शिक्षा राज्यमंत्री वासुदेव देवनानी, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिता भदेल, मेयर धर्मेन्द्र गहलोत, जयपुर के अति. पुलिस आयुक्त महेन्द्र चौधरी, प्रदेश कांग्रेस के सचिव महेन्द्र सिंह रलावता, बगरू विधायक कैलाश वर्मा, प्रतापगढ़ डेयरी के अध्यक्ष बद्री जाट, पूर्व विधायक डॉ. श्रीगोपाल बाहेती, स्वामी न्यूज चैनल के एमडी कंवलप्रकाश किशनानी आदि ने महाराज चम्पालाल जी से आशीर्वाद प्राप्त किया।

श्रीनगर मेंं फहराना चाहिए तिरंगा। ख्वाजा साहब की दरगाह के सज्जादानशीन जैनुअल आबेदीन नेतृत्व करने को तैयार। आतंकियों को सुनाई खरी-खरी।

विश्वविख्यात सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के सज्जादानशीन और दीवान सैय्यद जैनुअल आबेदीन ने कहा है कि कश्मीर के श्रीनगर में तिरंगा झण्डा फहरना ही चाहिए। मैं तिरंगा फहराने वाले देशभक्तों का नेतृत्व करने को तैयार हूं। 16 अप्रैल को अजमेर के होटल मेरवाड़ा स्टेट में डिवाइन अबोर्ड फाउंडेशन एवं कमालुद्दीन चेरिटेबल ट्रस्ट व वल्र्ड मेटा फिजिक्स रिसर्च फाउण्डेशन के सहयोग से एक ग्लोबल पीस सेमिनार आयोजित हुई। इस सेमिनार में मुख्य वक्ता के तौर पर बोलते हुए दरगाह दीवान आबेदीन ने कहा कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और भारत के हर नागरिक का यह दायित्व है कि वह अपने कश्मीर की रक्षा हर स्थिति में करे। उन्होंने कहा कि आज कश्मीर के जो हालात हैं, उसके लिए अनुच्छेद (धारा) 370 जिम्मेदार हैं। जो लोग धारा 370 हटाने का वायदा कर सत्ता में आए हैं उनका यह दायित्व है कि वे कश्मीर से धारा 370 को हटाए और देश के आम नागरिक को कश्मीर में बसने दें। सरकार को उन अलगाववादी तत्वों में डरने की जरूरत नहीं है जो कश्मीर को आजाद करने अथवा पाकिस्तान में मिलाने की मांग करते हैं। दीवान आबेदीन ने कहा कि मैं पूरी जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूं कि कुछ दिनों के लिए कश्मीर को सेना के हवाले कर दिया जाए और आतंकियों के साथ सख्ती से पेश आया जाए। जो लोग कुरान की दुहाई देकर कश्मीर में आतंक फैला रहे हैं उन्हें फिर सऊदी अरब के कानून से सबक लेना चाहिए। सऊदी अरब में इस्लामिक कानून के अन्तर्गत चोर के हाथ काटे जाते हैं तो हत्या के आरोपी को जमीन में गाड़ कर मौत के घाट उतार दिया जाता है। उन्होंने कहा कि कश्मीर में ख्वाजा साहब के संदेश को ज्यादा से ज्यादा फैलाना चाहिए। ख्वाजा साहब ने सूफीवाद के माध्यम से भाईचारे का जो पैगाम दिया, उसकी आज सख्त जरूरत है। आतंकी संगठन आईएस के प्रतीक चिन्ह पर हजरत मोहम्मद साहब का फोटो लगाने पर अफसोस जताते हुए सज्जादानशीन आबेदीन ने कहा कि मोहम्मद साहब ने तो युद्ध में पकड़े गए बुजुर्ग, महिलाओं, बच्चों और बीमार व्यक्तियों पर रहम करने का संदेश दिया था। लेकिन आईएस तो इसके विपरीत पकड़े गए निर्दोष और मजबूर लोगों को मौत केघाट उतार रहा है। उन्होंने कहा कि राजनेताओं की वजह से ही कश्मीर में तिरंगे के बजाए आईएस और पाकिस्तान के झंडे लहरा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि मुझे अवसर मिलेगा तो मैं अपने समर्थकों और चाहने वालों के साथ श्रीनगर में जाकर तिरंगा फहराउंगा। तब मैं यह देखूंगा कि मुझे श्रीनगर में तिरंगा फहराने से कौन रोकता है?
सेमीनार में जम्मू-कश्मीर रूरल डवलपमेन्ट सोसाइटी की अध्यक्ष और टीवी पत्रकार कोमल सिंह ने कहा कि आज कश्मीर के हालात बद से बदतर हो गए हैं। एनआईटी के ताजा प्रकरण के बाद पिछले 3 दिनों से कश्मीर में इन्टरनेट की सेवाएं बंद हैं। धारा 370 के प्रावधानों की वजह से ही कश्मीर में आईएस और पाकिस्तान के झंडे फहराने पर कोई कार्यवाही नहीं की जा सकती और जब कोई देशभक्त तिरंगा फहराता है तो कश्मीर की पुलिस उसे पीटती है। अलगाववादियों ने अपने स्तर पर अनन्तनाग का नाम पाकिस्तान के इस्लामाबाद के शहर पर कर दिया है। जो लोग कश्मीर को आजाद करने की मांग कर रहे हैं उन्हें यह समझना चाहिए कि कश्मीर में जो खाद्य सामग्री पहुंचती है वह जम्मू से ही होकर जाती है। यदि जम्मू वालों ने खाद्य सामग्री कश्मीर में नहीं भेजी तो कश्मीर के लोग भूखे मर जाएंगे। मैंने कश्मीर में रिपोर्टिंग करते समय यह भी देखा कि कश्मीरी युवकों को सेना पर पत्थर फैंकने के लिए रुपए दिए जाते हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि कश्मीर में निदेशी ताकतें किस हद तक काम कर रही हैं।
सेमीनार में एक ब्लॉगर के तौर पर मुझे भी अपने विचार रखने का अवसर मिला। मैंने कहा कि ख्वाजा साहब की दरगाह के सज्जादानशीन और दीवान आबेदीन ने देशभक्ति का जो जज्बा दिखाया है यदि ऐसा जज्बा देश का काम नागरिक प्रकट कर दे तो कश्मीर की समस्या का समाधान तत्काल हो जाएगा। भारतीय संविधान के अनु्छेद 370 को कश्मीर से हटाए जाने पर देश के आम मुसलमान और नागरिक की स्थिति पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। लेकिन राजनेताओं ने अनुच्छेद 370 और कश्मीर को वोट बैंक मान लिया है। यानि अब अनुच्छेद 370 का समर्थन और विरोध करने पर भी देश के दूसरे हिस्सों में वोट की प्राप्ति होती है। जो लोग कश्मीर को भारत से अलग करना चाहते हैं उन्हें एक बार पाक अधिकृत कश्मीर का जायजा ले लेना चाहिए। वहां पाकिस्तान की सरकार मुसलमानों पर बेवजह जुल्म करती है और यहां हमारे कश्मीर में स्थानीय नागरिकों को हर चीज रियायती दर पर मिलती है। अनुच्छेद 370 की वजह से ही भारत के सुप्रीम कोर्ट के आदेश कश्मीर पर लागू नहीं होते। कश्मीर की कोई महिला यदि भारत के अन्य राज्य के व्यक्ति से विवाह कर ले तो उसकी नागरिकता समाप्त हो जाती है। इसके विपरीत यदि कश्मीर की महिला किसी पाकिस्तानी से निकाह कर ले तो पाकिस्तानी को भी कश्मीर की नागरिकता मिल जाती है। आरटीआई, आरटीई, केग जैसे कानून कश्मीर पर लागू नहीं होते हैं। जहां देश के अन्य हिस्सों में महिलाओं को बराबर के अधिकार मिले हुए हैं वहीं कश्मीरी महिलाओं को शरियत के अनुसार जीवन व्यतीत करना होता है। सेमीनार में एमडीएस यूनिवर्सिटी के इतिहास विभाग के अध्यक्ष रहे प्रो. टी.के. माथुर ने कहा कि 1037 ईस्वी में कल्हन की राजतरंगी नामक एक पुस्तक प्रकाश में आई थी। इस पुस्तक में कश्मीर की संस्कृति, सभ्यता, रिवाज आदि का जो चित्रण किया गया है वह काबिले तारीफ है। देश के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल यदि थोड़े समय और जीवित रह जाते तो कश्मीर समस्या का समाधान हो जाता। प्रो. माथुर ने ऐतिहासिक तथ्यों के बारे में बताया कि प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पटेल में आपसी सहमति हो गई थी, लेकिन यह देश का दुर्भाग्य रहा कि सरदार पटेल की अचानक मौत हो गई। पटेल के बाद उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री गोविन्द वल्लभ पंथ को गृहमंत्री बनाया गया। चूंकि पंथ को बेमन से गृहमंत्री बनाया इसलिए पटेल की योजना पर अमल नहीं हो सका।
सेमीनार में सूफी और वेदान्ता स्कॉलर डॉ. संदीप अवस्थी ने कहा कि कश्मीर की कुल आबादी एक करोड़ 15 लाख की है, जबकि कश्मीर पर प्रतिवर्ष करोड़ों रुपया खर्च किया जाता है। एक अनुमान के मुताबिक भारत सरकार एक कश्मीरी नागरिक पर प्रतिवर्ष 20 लाख रुपए खर्च करती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान केन्द्र सरकार कश्मीर की परिस्थितयों से सही प्रकार से मुकाबला कर रही है। अगले वर्ष जब राज्यसभा में भी भाजपा का बहुमत हो जाएगा, तब अनुच्छेद 370 को हटाने का प्रयास हो सकता है। कश्मीर में अशांति का सबसे बड़ा कारण 370 ही है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार धर्मगुरुओं की उपस्थिति में यह सेमीनार हुई, वैसी ही सेमीनार कश्मीर में आयोजित की जाए।
देश के प्रमुख स्वतंत्रता सैनानी स्व. ज्वाला प्रसाद के पौत्र कर्नल राकेश शर्मा भी कश्मीर में लम्बे समय तक तैनात रहे। कर्नल शर्मा ने कहा कि गत वर्ष बाढ़ के दौरान यदि सेना मदद नहीं करती तो हजारों कश्मीरी मर जाते। उन्होंने कहा कि कश्मीर में राजनेताओं को हटाकर सेना, धर्मगुरुओं और शिक्षाविदें के सहयोग से काम किया जाए। कश्मीरियों में योग्यता की कोई कमी नहीं है लेकिन देशविरोधी ताकतों ने कश्मीर के युवाओं को गुमराह कर दिया है।
अजमेर के डीएवी कॉलेज के प्रिंसिपल रहे डॉ. सुधीर भार्गव ने कहा कि 12वीं शताब्दी के ग्रन्थों से पता चलता है कि कश्मीर में सिर्फ हिन्दू ही रहते थे। इसलिए अधिकांश समय कश्मीर में हिन्दू राजा ही रहे। उन्होंने सुझाव दिया कि जम्मू कश्मीर राज्य को जम्मू, कश्मीर और लद्दाख में विभाजित कर दिया जाए। साथ ही एलओसी को अन्र्तराष्ट्रीय सीमा बनाया जाए। आज भी पाकिस्तान के राजनेता कश्मीर को टेडीबियर के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। कभी पाकिस्तान के नेता तो कभी भारत के नेता टेडीबियर समझकर कश्मीर से खेलते हैं।
सेमीनार में संसार प्रसिद्ध ब्रह्मा मंदिर के महन्त सोमपुरी की ओर से उनके प्रचार अधिकारी अरुण पाराशर ने कहा कि कश्मीर की समस्या का समाधान आध्यात्म और सूफीवाद से हो सकता है। विदेशी ताकतें अपने स्वार्थों की वजह से कश्मीर के हालात बिगाड़ती है। कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और हमेशा रहेगा। कश्मीर के वर्तमान हालातों के लिए राजनेता जिम्मेदार हैं। ब्रह्मकुमारीज संस्थान की बहन योगिनी ने कहाकि आत्म से परमात्मा का जब मिलन होता है तभी सुख और शांति की प्राप्ति होती है। कश्मीर के नागरिकों के मन को जागृत करना होगा जिसके माध्यम से सुख और शांति की प्राप्ति होगी।
सेमीनार में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव महेन्द्र सिंह रलावता ने कहा कि अनुच्छेद 370 को हटाने से कश्मीर में एक नई समस्या खड़ी हो जाएगी। यूएन में जो समझौता हो रखा है उसके अनुसार यदि अनुच्छेद 370 को हटाया जाता है तो फिर कश्मीर में जनमत संग्रह करवाना होगा और यदि आज की परिस्थितियों में कश्मीर में जनमत संग्रह होता है तो अधिकांश नागरिक भारत से अलग होना चाहेंगे। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 की वजह से ही कश्मीर आज भारत के साथ जुड़ा हुआ है। सेमीनार में सुप्रसिद्ध कवि रासबिहारी गौड़ ने कहा कि कश्मीर में आज रोजगार और शिक्षा की सख्त जरूरत है, यदि हम कश्मीरी युवकों को रोजगार उपलब्ध करवा दें तो फिर आतंकवादी उनका इस्तेमाल नहीं कर सकते। इसके लिए जरूरी है कि सम्पूर्ण कश्मीर में शिक्षा का जाल बिछाया जाए। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 को हटाने से कश्मीर की स्थिति पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। पीयूसीएल के उपाध्यक्ष कामरेड डीएल त्रिपाठी ने कहा कि अनुच्छेद 370 जैसे प्रावधान देश के दूसरे प्रान्तों में भी लागू हैं लेकिन हर बार कश्मीर को ही निशाना बनाया जाता है। आज कश्मीर में मानवाधिकारों की रक्षा करने की सख्त जरूरत है। हमें कश्मीरियों का दिल जीतना चाहिए। सेमीनार में सर्वधर्म मैत्री संघ के प्रमुख प्रकाश जैन ने कहा कि कश्मीर में हिन्दू और मुसलमान का सवाल नहीं है। कश्मीर में एक ऐसा रास्ता निकालना चाहिए, जिसमें सभी विचारधारा के लोग अमन-चैन के साथ रह सकें। इसके लिए धर्मगुरुओं को आगे आना चाहिए। सेमीनार में श्रीमती सबा खान, मेजर मारफतिया, नितिन शर्मा, डॉ. मेघना शर्मा, डॉ. बृजेश माथुर, डॉ. संदीप रॉय, सैय्यद कमरुद्दीन चिश्ती आदि ने भी अपने विचार प्रकट किए।
केन्द्र सरकार को भेजा जाएगा प्रस्ताव:
सेमीनार की आयोजक गुलशा बेगम ने कहा कि अजमेर अन्र्तराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त शहर है यदि अजमेर में कोई सेमीनार होती है तो उसके संदेश पूरी दुनिया में जाता है। इसलिए यह सेमीनार अजमेर में की गई है। उनकी ख्वाहिश है कि ऐसी सेमीनार अगली बार जम्मू अथवा कश्मीर में हो। इसके लिए वे निरन्तर प्रयास करती रहेंगी। उन्होंने बताया कि इस सेमीनार में प्राप्त सुझावों के अनुसार कश्मीर में शांति के लिए एक प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजा जाएगा। इस प्रस्ताव में कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने, युवाओं को रोजगार देने, शिक्षा उपलब्ध करवाने, केन्द्र सरकार के शिक्षण संस्थाओं में देशभर के विद्यार्थियों को भयमुक्त वातावरण देने आदि की मांग की जाएगी।

अब दूरबीन से देखा जा सकेगा अजमेर शहर। सिटीजन्स कॉउंसिल की सकारात्मक पहल।

अजमेर शहर कब स्मार्ट बनेगा यह तो राजनेता ही बता सकते हैं, लेकिन सिटीजंस कॉउंसिल के महासचिव और दैनिक नवज्योति के प्रधान सम्पादक दीनबंधु चौधरी के प्रयासों से 15 अप्रैल को ऐतिहासिक आनासागर झील के किनारे बनी चौपाटी पर एक दूरबीन का शुभारंभ हुआ है। इस दूरबीन से अब अजमेर शहर को आसानी के साथ देखा जा सकेगा। 15 अप्रैल को प्रात: 9 बजे हुए समारोह में जिला कलेक्टर डॉ. आरुषि मलिक ने इस दूरबीन का उद्घाटन किया। कलेक्टर ने दूरबीन के माध्यम से जब अपने शहर को देखा तो उन्हें बेहद खूबसूरत नजर आया। कलेक्टर ने आनासागर के दूसरे छोर पर बने रामप्रसाद घाट पर उर्स में आने वाले जायरीन को नहाते हुए देखा तो वहीं पुष्कर की घाटी से गुजरते हुए वाहनों का नजारा भी निकट से देख लिया। इतना ही नहीं तारागढ़ पर बनी मीरा दातार की दरगाह के दृश्यों को भी देखा। कलेक्टर ने इसके लिए सिटीजन कॉउंसिल के महासचिव चौधरी का शुक्रिया अदा किया। चौधरी ने बताया कि दूरबीन अजमेर में हुंडई कार के डीलर राजेन्द्र गोयल ने उपहार स्वरूप दी है। इस दूरबीन का रख रखाव अब सिटीजंस कॉउंसिल के माध्यम से ही किया जाएगा। इस अवसर पर अजमेर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष शिवशंकर हेड़ा, मेयर धर्मेन्द्र गहलोत, एडवोकेट एस.के. सक्सेना, समाजसेवी एस.एस. छापरवाल, दीपक हासानी, जे.पी. दाधीच, भगवान चंदीराम, डी.एल. त्रिपाठी, दिनेश गर्ग, कोसिनोक जैन आदि के साथ-साथ विभागों के अधिकारी भी उपस्थित थे।

काश! अशोक परनामी अजमेर के दो मंत्रियों की दुश्मनी खत्म कर पाते।

विधानसभा वार बूथ स्तरीय सम्मेलन के क्या फायदे?
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राजस्थान प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष अशोक परनामी 15 अप्रैल से 3 दिवसीय अजमेर जिले के दौरे पर हैं। तीन दिनों में जिले की 8 विधानसभा क्षेत्रों में बूथस्तरीय कार्यकर्ताओं से परनामी सीधा संवाद करेंगे। एक राजनीतिक दल की यह कवायद अच्छी है। यदि प्रदेश अध्यक्ष सीधे बूथ लेवल के कार्यकर्ता से संवाद करेगा तो कार्यकर्ता के मनोबल में वृद्धि होगी, लेकिन भाजपा के लिए अजमेर कार्यकर्ता के बजाए बड़े नेता चुनौती बने हुए हैं। परनामी माने या नहीं, लेकिन संगठन पर क्षेत्रीय विधायक पूरी तरह हावी हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण अजमेर शहर में भाजपा की स्थिति है। अजमेर शहर भाजपा अब प्रदेश के उन मात्र चार शहरों में शामिल हैं, जहां अध्यक्ष का चुनाव नहीं हो पाया है और न ही प्रदेश ने नए अध्यक्ष की नियुक्ति की है। इसलिए पुराने मनोनीत अध्यक्ष अरविंद यादव से ही काम चलाया जा रहा है। यादव की शराफत में कोई कमी नहीं है, लेकिन यादव भी इस हकीकत को जानते हैं कि अजमेर भाजपा उत्तर और दक्षिण में विभाजित है। उत्तर के तीनों मंडल अध्यक्षों का चुनाव क्षेत्रीय विधायक और स्कूली शिक्षा राज्यमंत्री वासुदेव देवनानी के इशारे पर और दक्षिण के तीनों मंडल अध्यक्षों का निर्णय भी क्षेत्रीय विधायक व महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री अनिता भदेल के कहने पर हुआ है। अब बूथ स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन भी 17 अप्रैल को उत्तर और दक्षिण में अलग-अलग हो रहा है। 18 अप्रैल को सुबह 11 बजे नौ नम्बर पेट्रोल पम्प स्थित टोरेंटो समारोह स्थल पर तथा दक्षिण क्षेत्र में दोपहर 3 बजे जवाहर रंगमंच पर उत्तर क्षेत्र के कार्यकर्ताओं का सम्मेलन होगा। यानि टोरेंटो में अनिता भदेल और जवाहर रंगमंच में देवनानी का शक्ति परीक्षण होगा। भाजपा शासन के गत दो वर्षों में न तो देवनानी ने भदेल के निर्वाचन क्षेत्र में और न भदेल ने देवनानी के निर्वाचन क्षेत्र में अपने विभाग का कोई कार्यक्रम आयोजित किया। इतना ही नहीं दोनों मंत्री एक दूसरे के विभागों के कार्यक्रमों में भी नहीं जाते हैं। इन दोनों मंत्रियों की आपसी दुश्मनी का खामियाजा भाजपा के साधारण कार्यकर्ता को उठाना पड़ रहा है। यदि कोई कार्यकर्ता भदेल के साथ नजर आ जाए तो देवनानी नाराज और यदि कोई कार्यकर्ता देवनानी के साथ खड़ा हो तो भदेल के माथे पर सल पड़ जाते हैं। मुझे यह लिखने में कोई ऐतराज नहीं कि ये दोनों मंत्री अपने-अपने क्षेत्र की समस्याओं के प्रति जागरुक रहते हैं। जब कभी अजमेर में होते हैं तो दोनों अपने-अपने निवास पर जनता दरबार लगाकर समस्याओं का समाधान भी करते हैं। लेकिन यह समाधान भी उत्तर और दक्षिण में बंटा हुआ है। समझ में नहीं आता कि किन राजनीतिक मुद्दों पर देवनानी और भदेल में इतनी दुश्मनी है, जबकि भदेल का दक्षिण क्षेत्र उन्हीं की जाति के लिए आरक्षित है और देवनानी का उत्तर क्षेत्र राजनीतिक नजरिए से सिंधी समुदाय के लिए रखा गया है। यानि भदेल उत्तर में और देवनानी दक्षिण में जाकर चुनाव नहीं लड़ सकते हैं।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के अजमेर आगमन पर कार्यकर्ताओं को यह उम्मीद थी कि दोनों मंत्रियों में कोई समझौता होगा। लेकिन जिस तरह से बूथ स्तरीय सम्मेलन अलग-अलग हो रहे हैं, उससे प्रतीत होता है कि परनामी के सामने भी देवनानी और भदेल का शक्ति परीक्षण ही होगा। अच्छा होता कि अजमेर शहर में संयुक्त रूप से बूथ स्तरीय सम्मेलन कर प्रदेश अध्यक्ष कार्यकर्ता की पीड़ा को समझने का प्रयास करते। अजमेर शहर में बूथ स्तरीय सम्मेलन तभी सफल माना जाएगा, जब परनामी दोनों मंत्रियों की राजनीतिक दुश्मनी को खत्म करवाएंगे। अन्यथा परनामी के 17 अप्रैल को अजमेर शहर की सीमा लगने के साथ ही फिर से विवाद की स्थित उत्पन्न हो जाएगी। परनामी ने 15 अप्रैल को किशनगढ़, केकड़ी और ब्यावर के विधानसभा क्षेत्र के बूथ स्तरीय कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद किया तो 16 अप्रैल को प्रात:11 बजे पुष्कर, 2 बजे नसीराबाद तथा सायं 5 बजे मसूदा में संवाद करेंगे। इसी प्रकार 17 अप्रैल को अजमेर शहर के दोनों विधानसभा क्षेत्रों में संवाद करने के साथ-साथ प्रात: 10 बजे अजमेर शहर और देहात भाजपा की कोर कमेटी की संयुक्त बैठक लेंगे।

सोनिया की चादर में शामिल हुए दिग्गज कांग्रेसी

ख्वाजा साहब के सालाना उर्स में 14 अप्रैल को कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी की ओर से ख्वाजा साहब के पवित्र मजार पर पेश की गई। इस मौके पर प्रदेश कांग्रेस से जुड़े सभी दिग्गज नेता उपस्थित थे। सोनिया गांधी की चादर की रस्म में शरीक होने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत गत रात्रि से ही अजमेर पहुंच गए जबकि प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट प्रतिपक्ष के नेता रामेश्वर डूडी, प्रदेश के प्रभारी मिर्जा ईरशाद बेग, कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष सैयद खुर्शीद अहमद, सांसद अश्क अली टांक आदि जयपुर से अजमेर आए। दिग्गज कांग्रेसियों ने अपने सिर पर सोनिया गांधी की चादर को रखा और फिर पवित्र मजार पर पेश किया। सोनिया गांधी के पारीवारिक खादिम गनी गुर्देजी, जकरिया गुर्देजी, यासिर गुर्देजी ने सभी को जियारत कराई व सोनिया गांधी व राहुल गांधी के लिए ख्वाजा साहब की दरगाह में विशेष दुआ की व तबर्रूक पायलट को सौंपा। गुर्देजी ने सभी नेताओं की दस्तारबंदी की। सोनिया गांधी की चादर के रस्म के दौरान पूर्व शिक्षा राज्यमंत्री नसीम अख्तर इंसाफ,ं शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विजय जैन, देहात अध्यक्ष भूपेन्द्र सिंह राठौड़, प्रदेश सचिव कुलदीप सिंह राजावत, महेन्द्र सिंह रलावता, पूर्व विधायक हाजी कय्यूम खान, डॉ गोपाल बाहेती, सेवादल प्रदेश अध्यक्ष राकेश पारीक,पूर्व विधायक डॉ राजकुमार जयपाल, पूर्व महापौर कमल बाकोलिया, ब्लॉक अध्यक्ष विजय नागौरा, आरीफ  हुसैन, शैलेंद्र अग्रवाल, पूर्व पार्षद श्याम प्रजापति, बिपिन बेसिल, अंकुर त्यागी, सौरभ बजाड,़ सुनील चैधरी, सुनिल मोतियानी, सबा खान, यासिर चिश्ती, मुजफ़्फर भारती, सर्वेश पारीक, इमरान सिद्दीकी, द्विवेन्द्र सिंह जादौन, वैभव जैन, मुख्तार नवाब, कमल गंगवाल, राकेश धाबाई, रज़्जाक भाटी सहित सैकड़ो कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल थे।

क्या मोनिका के फोन की कॉल डिटेल से केकड़ी में मचेगा हंगामा।

14 अप्रैल को अजमेर के गेगल पुलिस स्टेशन पर केकड़ी के निकटवर्ती गांव बघेरा निवासी कार्तिक सांखला ने एक रिपोर्ट दर्ज करवाई है। इस रिपोर्ट में बताया गया कि उसके 23 वर्षीय भाई शुभम सांखला ने गत रात्रि को ट्रेन के सामने कूदकर आत्महत्या कर ली। इस आत्महत्या के लिए गांव के ही रामरतन खारोल को दोषी ठहराया गया है। रिपोर्ट में कहा गया कि रामरतन की 20 वर्षीय पुत्री मोनिका ने 11 अप्रैल को गांव के घर में ही आत्महत्या की थी। मोनिका ने कथित आत्महत्या से पहले किसी को भी जिम्मेदार नहीं ठहराया। लेकिन इसके बाद भी उसके पिता रामरतन ने मेरे भाई शुभम सांखला के विरुद्ध पुलिस में रिपोर्ट लिखवाई। इस रिपोर्ट से मेरा भाई अवसाद में आ गया और उसने आत्महत्या कर ली। कार्तिक ने पुलिस से आग्रह किया कि मोनिका खारोल के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल निकाल कर जांच की जाए। यह पता लगाया जाए कि मोनिका केकड़ी के किन किन प्रभावशाली लोगों के सम्पर्क में थी। इससे यह भी पता चलेगा कि मरने से पहले मोनिका ने किन-किन व्यक्तियों से मोबाइल फोन पर बात की थी। रिपोर्ट में पुलिस को यह भी बताया गया कि गत वर्ष मोनिका ने उसके भाई शुभम के विरुद्ध बलात्कार का मुकदमा दर्ज करवाया था, लेकिन बाद में मोनिका ने शुभम के पक्ष में बयान देकर आरोप वापस ले लिया। रिपोर्ट में इस मामले की भी जांच की मांग की गई है। माना जा रहा है कि यदि मोनिका के मोबाइल की कॉल डिटेल सामने आती है तो केकडी में इन दोनों आत्महत्याओं के मामले में हंगामा मचेगा।

ख्वाजा साहब के उर्स के लिए न मेला मजिस्ट्रेट मिला और न स्मारिका।

ख्वाजा साहब के भरोसे रहे जायरीन।
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14 अप्रैल को सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती का 6 दिवसीय सालाना उर्स धार्मिक दृष्टि से सम्पन्न हो गया। 13 अप्रैल की रात 12 बजे बाद से ही दरगाह में गुसल की रस्म शुरू हो गई थी। सुबह होते होते जायरीन ने अजमेर से लौटना भी शुरू कर दिया। इसी के साथ छठी की रस्म भी पूरी हो गई। हालांकि 15 अप्रैल को जुम्मे की नमाज का महत्त्व बना हुआ है। इसके बाद बड़े कुल की रस्म भी होगी। दरगाह से जुड़े खादिम समुदाय इस बात से संतुट है कि 6 दिवसीय उर्स में कोई अप्रिय वारदात नहीं हुई। इसके लिए ख्वाजा साहब का शुक्रिया अदा किया जा रहा है। जहां तक राज्य सरकार और जिला प्रशासन की जिम्मेदारियों का सवाल है तो शुरू से ही गैर जिम्मेदाराना रवैया सामने आया है। सरकार ने अजमेर के सिटी मजिस्ट्रेट के पद पर स्थाई नियुक्ति नहीं की, इसलिए ख्वाजा साहब के उर्स में मेला मजिस्ट्रेट नियुक्त नहीं हो पाया। इसे घोर लापरवाही और गैर जिम्मेदाराना रवैया ही कहा जाएगा कि इस बार मेला मजिस्टे्रट के बिना ही ख्वाजा साहब का उर्स सम्पन्न हो गया। हालांकि जिला कलेक्टर डॉ. आरुषि मलिक ने अपने स्तर पर आरएएस सेवा के जूनियर अधिकारी राधेश्याम मीणा को अतिरिक्त मेला मजिस्ट्रेट नियुक्त कर दिया था। कलेक्टर के इस फरमान की भी जिला प्रशासन में चर्चा है।
अब चूंकि उर्स शांतिपूर्ण सम्पन्न हो गया, इसलिए जूनियर और सीनियर सभी अधिकारी अपनी पीठ थपथपाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। प्रतिवर्ष उर्स के मौके पर जिला प्रशासन की ओर से एक स्मारिका प्रकाशित की जाती है। इस स्मारिका में उर्स के इंतजामों में लगे सभी विभागों के अधिकारियों के नाम और मोबाइल नम्बर अंकित होते हैं। साथ ही उर्स की धार्मिक रस्मों की जानकारियां एवं जायरीन के लिए आवश्यक सूचनाएं भी होती हैं। यहां तक कि विभिन्न मस्जिदों में पढ़ी जाने वाली नवाज की जानकारी भी होती है। पूरे उर्स में यह स्मारिका महत्त्वपूर्ण होती है। विभागों के अस्थाई कैम्प में यह स्मारिका बहुत काम आती है। लेकिन इस बार जिला प्रशासन की ओर से स्मारिका का प्रकाश नहीं हुआ। इससे प्रतीत होता है कि जिला प्रशासन उर्स के इंतजामों को लेकर कितना गंभीर रहा। प्रतिवर्ष उर्स के दौरान दरगाह के अंदर बुलंद दरवाजे के चबूतरे पर जिला प्रशासन का अस्थाई कैम्प लगता है, लेकिन इस बार बुलंद दरवाजे के कैम्प को लेकर भी प्रशासन ने कोई गंभीरता नहीं दिखाई। अधिकारियों के अभाव में यह कैम्प सूना ही पड़ा रहा। प्रशासन की बेरुखी के चलते कायड़ स्थित विश्राम स्थली पर भी जायरीन को अनेक परेशानी का सामना करना पड़ा। यहां तक कि उर्स मेले की पहचान कलंदरों ने पीने के पानी को लेकर प्रदर्शन तक किया। जायरीन सुविधाओं को लेकर शिकायत करते ही रहे, लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं। सवाल मेला मजिस्ट्रेट का ही नहीं है, बल्कि प्रशासन के अन्य बड़े अधिकारियों का भी है। चूंकि जिला कलेक्टर की ओर से सीनियर अधिकारियों को कोई जिम्मेमदारी नहीं दी गई, इसलिए सीनियर अधिकारी भी बचते नजर आए। इन अधिकारियों ने उस दायरे में ही काम किया जिसका दायित्व दिया गया था। 6 दिवसीय उर्स में प्रशासन में सामूहिक जिम्मेदारी का अभाव पूरी तरह देखा गया।
बिजली से परेशानी:
उर्स के दौरान दिन में कई बार बिजली गुल होने से जायरीन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। बिजली निगम हर वर्ष उर्स से पहले मेंटीनेंस का कार्य करता है,तब दिन भर मेला क्षेत्र की लाईटों को बंद रखा जाता है, लेकिन उर्स के दौरान बार-बार बिजली गुल होने से प्रतीत होता है कि बिजली इंजीनियरों ने भी लापरवाही बरती है।