S.P. MITTAL Blog

आखिर अशोक गहलोत को किसने बताया कि सुखजिंदर सिंह रंधावा कांग्रेस से बगावत कर रहे हैं? क्या ऐसा बयान राजस्थान की राजनीति कमेटी को लेकर दबाव बनाने के लिए दिया गया? पूर्व उपराष्ट्रपति धनखड़ से भले ही भाजपा के नेता न मिले, लेकिन पूर्व सीएम गहलोत मिलते हैं। ================= 3 जुलाई को राजस्थान के कांग्रेस प्रभारी और पंजाब से लोकसभा के सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद रंधावा ने कहा कि पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार के दौरान बिगड़ती कानून व्यवस्था को लेकर उन्होंने अमित शाह से मुलाकात की। इस मुलाकात में पंजाब के बिगड़ते हालातों की जानकारी दी। लेकिन इस मुलाकात को तब तूल मिला, जब राजस्थान के पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया पर बयान जारी किया। गहलोत ने लिखा कि अमित शाह और रंधावा की मुलाकात के कोई सियासी मायने नहीं निकाले जाने चाहिए। रंधावा कांग्रेस के वफादार नेता है। वे कोई गलत कदम नहीं उठाएंगे। गहलोत का आशय रहा कि रंधावा कांग्रेस से बगावत नहीं कर रहे हैं। सवाल उठता है कि आखिर गहलोत को किसने कहा कि रंधावा कांग्रेस से बगावत नहीं कर रहे हैं? किसी भी बड़े नेता अथवा मीडिया घराने ने अमित शाह और रंधावा की मुलाकात के सियासी मायने नहीं निकाले, लेकिन फिर भ गहलोत ने रंधावा को कटघरे में खड़ा करने के लिए अपना बयान जारी कर दिया। जबकि सच्चाई यह है कि रंधावा दिल्ली में राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के साथ मिलकर प्रदेश की राजनैतिक कमेटी बनाने में व्यस्त हैं। डोटासरा दो दिन से दिल्ली में रंधावा के साथ ही कमेटी के सदस्यों के नाम पर विचार कर रहे हैं। राहुल गांधी के निर्देश पर बनने वाली इस राजनैतिक कमेटी की देखरेख में ही ढाई वर्ष बाद होने वाले विधानसभा के चुनाव कराए जाएंगे। उम्मीदवारों के चयन में भी इस कमेटी की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। जो रंधावा प्रदेश प्रभारी की हैसियत से राजनैतिक कमेटी बनाने में व्यस्त है वो रंधावा कांग्रेस के साथ कैसे बगावत कर सकते हैं? लेकिन गहलोत बिना किसी आधार के बयान जारी कर रंधावा की विश्वसनीयता और वफादारी पर सवाल खड़े कर दिए। जानकार सूत्रों की माने तो राजनैतिक कमेटी में स्वयं और अपने समर्थकों को शामिल करने को लेकर ही गहलोत ने बयान जारी किया। देखना होगा कि गहलोत के इस दबाव वाले बयान का रंधावा पर कितना असर पड़ता है। कांग्रेस की राजनीति में रंधावा को सख्त मिजाज का नेता माना जाता है। धनखड़ से गहलोत ही मिले: पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ इन दिनों जयपुर में एक निजी अस्पताल में भर्ती है। 2 जुलाई को धनखड़ की एंजियोप्लास्टी हुई। धनखड़ के स्वास्थ्य को देखते हुए किसी भी व्यक्ति को मिलने नहीं दिया जा रहा। यहां तक की भाजपा के बड़े नेता भी धनखड़ से नहीं मिल पा रहे हैं? लेकिन 3 जुलाई को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने धनखड़ से मुलाकात कर उनकी कुशलक्षेम पूछी। गहलोत को प्रदेश प्रभारी रंधावा के केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मिलने पर तो सियासत नजर आती है, लेकिन जब स्वयं पूर्व उपराष्ट्रपति धनखड़ से मिलते हैं तो सियासत नहीं होती। मालूम हो कि धनखड़ को उपराष्ट्रपति के पद से अचानक इस्तीफा देना पड़ा था, जबकि उनका दो वर्ष का कार्यकाल शेष था। राजस्थान की राजनीति में सक्रिय रहे धनखड़ जब भी दिल्ली से जयपुर आते हैं, तब अशोक गहलोत मुलाकात करते हैं। गत बार तो धनखड़ ने मुलाकात के लिए गहलोत को राजभवन में आमंत्रित किया। स्वाभाविक है कि एंजियोप्लास्टी के बाद अनेक भाजपा नेताओं ने भी धनखड़ से मुलाकात की अनुमति मांगी, लेकिन धनखड़ ने 3 जुलाई को अशोक गहलोत को ही मिलने की अनुमति दी। धनखड़ के अचानक इस्तीफे के बाद गहलोत ने कहा था कि धनखड़ के पास अनेक राज हैं। S.P.MITTAL BLOGGER ( 04-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

अशोक गहलोत ने तो रिफाइनरी का शिलान्यास प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से नहीं, बल्कि सोनिया गांधी से करवाया था। लेकिन गहलोत को अब युवाओं को नियुक्ति पत्र देने पर ही ऐतराज है। ================= प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 4 जुलाई को बाड़मेर के पचपदरा में स्थापित एचपीसीएल की रिफाइनरी का उद्घाटन किया। तय कार्यक्रम के अनुसार पीएम मोदी करीब 50 हजार युवाओं को सरकारी नौकरी का नियुक्ति पत्र भी देंगे। चूंकि एक साथ इतने युवाओं को एक ही स्थान पर नियुक्ति पत्र नहीं दिए जा सकते हैं, इसलिए सरकार की ओर से जिला मुख्यालयों पर कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। यानी जिला मुख्यालय पर भी नियुक्ति पत्र लेने के लिए युवा उपस्थित रहेंगे। यह एक सामान्य प्रक्रिया हैं, लेकिन इस पर भी कांग्रेस के नेता पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को ऐतराज है। गहलोत का कहना है कि पीएम की सभा और जिला मुख्यालयों पर भीड़ जुटाने के लिए नियुक्ति पत्र के बहाने युवाओं को बुलाया जा रहा है। गहलोत इसे युवाओं के साथ भद्दा मजाक मानते हैं। आज जिन अशोक गहलोत को युवाओं को प्रधानमंत्री के द्वारा नियुक्ति पत्र देने पर ऐतराज है, उन्हीं अशोक गहलोत ने वर्ष 2013 में पचपदरा में एचपीसीएल की रिफाइनरी का शिलान्यास कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी से करवाया था। हालांकि तब देश के प्रधानमंत्री की भूमिका में डॉ. मनमोहन सिंह थे, लेकिन प्रधानमंत्री को दरकिनार कर गहलोत ने रिफाइनरी का शिलान्यास अपने राजनीतिक स्वार्थों के खातिर सोनिया गांधी से करवाया। तब गहलोत राजस्थान के मुख्यमंत्री थे। गहलोत बताएं कि तब रिफाइनरी का शिलान्यास प्रधानमंत्री से क्यों नहीं करवाया गया। आज गहलोत को रिफाइनरी के शुरू होने पर भी अनेक आशंकाएं हैं, लेकिन सब जानते हैं कि वर्ष 2013 में जब कांग्रेस सरकार का कार्यकाल पूरा हो रहा था, तब आनन-फानन में गहलोत ने रिफाइनरी का शिलान्यास करवा दिया। चूंकि इस अनुबंध से कई खामियां थी, इसलिए प्रदेश में वसुंधरा राजे के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनने पर सोनिया गांधी और अशोक गहलोत वाले अनुबंध और शिलान्यास को रद्द कर दिया गया। यह सही है कि जिस रिफाइनरी का शिलान्यास सोनिया गांधी ने किया उस रिफाइनरी का काम वसुंधरा राजे के मुख्यमंत्री रहते हुए कुछ भी नहीं हुआ। राजे ने भी अपनी सरकार के एक वर्ष शेष रहने पर 17 जनवरी 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से रिफाइनरी का शिलान्यास करवाया। यह बात अलग है कि दिसंबर 2018 में ही राजस्थान में अशोक गहलोत के नेतृत्व में फिर से कांग्रेस की सरकार बन गई। अब 4 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही इस रिफाइनरी का उद्घाटन कर रहे हैं। अशोक गहलोत माने या नहीं, लेकिन राजस्थान के विकास में यह रिफाइनरी मील का पत्थर साबित होगी। आज राजस्थान पर 7 लाख 25 हजार करोड़ रुपए का कर्जा है। अर्थशज्ञसत्री मानते हैं कि अकेले इस रिफाइनरी से राजस्थान को प्रति वर्ष 6 हजार करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त होगा। इस रिफाइनरी का महत्व इसी से पता चलता है कि इसमें प्रतिवर्ष 9 मिलियन टन क्रूड ऑयल रिफाइंड होगा। करीब 2 मिलियन टन ऑयल स्वदेशी जबकि 7 मिलियन टन क्रूड ऑयल खाड़ी देशों से आएगा। रिफाइंड ऑयल को यूरोप के देशों में बेचा जाएगा। रिफाइनरी की वजह से ही पेंट, फाइबर, केमिकल, प्लास्टिक, पैकेजिंग, फार्मा जैसे पांच सहायक उद्योग भी लगेंगे। करीब एक लाख लोगों को सीधे तौर पर रोजगार मिलेगा। S.P.MITTAL BLOGGER ( 04-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

अजमेर के एक भाजपा विधायक वासुदेव देवनानी कोलकाता में तो दूसरी विधायक अनिता भदेल दिल्ली में सक्रिय। दोनों का उद्देश्य राजस्थान का विकास। बीसलपुर बांध में पानी की आवक शुरू। ===================== 2 जुलाई को अजमेर उत्तर के विधायक वासुदेव देवनानी (राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष) कोलकाता में प्रवासी राजस्थानियों के साथ रहे तो अजमेर दक्षिण की भाजपा विधायक श्रीमती अनिता भदेल (पूर्व मंत्री) दिल्ली में केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल व केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के साथ सक्रिय दिखी। देवनानी से कोलकाता में प्रवासी राजस्थानियों से आग्रह किया कि वह अपनी मातृभूमि राजस्थान में भी निवेश करे। कोलकाता में देवनानी का 15 से भी ज्यादा सामाजिक संगठनों ने शानदार स्वागत किया। इनमें ब्यावर स्थित श्री सीमेंट के चेयरमैन हरिमोहन बांगड भी शामिल रहे। इसी दिन देवनानी ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से भी मुलाकात की। वही भाजपा विधायक श्रीमती अनिता भदेल ने केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल से मुलाकात कर जनहित से जुड़े मुद्दों पर विमर्श किया। भदेल ने केंद्रीय मंत्री से राजस्थान के विकास में सहयोग की अपेक्षा जताई। भदेल ने दिल्ली प्रवास के दौरान केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात कर दिल्ली कैंट से वाया रींगस जंक्शन (श्री खाटूश्याम जी) से अजमेर तक प्रतिदिन वंदे भारत ट्रेन चलाने की मांग की। इसके साथ ही अजमेर ब्यावर, सोजत मारवाड़ और जोधपुर से पाली के बीच प्रतिदिन सुबह शाम डेम ट्रेन संचालित करने की मांग रखी। यानी अजमेर के दोनों भाजपा विधायक राजस्थान के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। अजमेर में इन दोनों विधायकों की लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि देवनानी और भदेल लगातार 5वीं बार विधायक चुने गए हैं। बांध में पानी की आवक: अजमेर जयपुर, टोंक, दौसा जिले के एक करोड़ से भी ज्यादा लोगों की प्यास बुझाने वाले बीसलपुर बांध में बरसात के पानी की आवक शुरू हो गई है। बांध के पानी की निगरानी रखने वाले इंजीनियरों के अनुसार तीन जुलाई को सुबह 8 बजे बांध का जलस्तर 313.57 मीटर माप गया। गर्मी के दिनों में बांध का जल स्तर 313.50 मीटर तक चला गया था। यानी बांध में करीब 7 सेंटीमीटर पानी की आवक हुई है। बांध की कुल भराव क्षमता 315.50 मीटर है। बांध में पानी की आवक से चार जिलों के लोगों ने राहत महसूस की है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 03-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

राजस्थान सरकार में बैठे भाजपा नेताओं को संघ प्रचारक दुर्गादास जी की पुस्तक अपने घुमंतू पढ़नी चाहिए। अपराधी नहीं बल्कि क्रांतिकारियों के मददगार थी घुमंतू जातियां। 10 प्रतिशत आरक्षण अलग से नहीं बल्कि अपने कोटे में से ही मांग रहे हैं। ===================== एक जुलाई को जयपुर में जब विमुक्त समुदाय के लोग अपनी मांगों को लेकर जेडीए ग्राउंड पर धरना प्रदर्शन कर रहे थे, तब उनका पुलिस के साथ टकराव हो गया। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया जिसकी वजह से हालात बिगड़े। वहीं प्रदर्शनकारियों का कहना रहा कि एक ओर सरकार के प्रतिनिधि वार्ता का प्रस्ताव दे रहे थे, तो दूसरी ओर पुलिस ने जेडीए ग्राउंड से जबरन खदेडऩे के लिए लाठी चार्ज किया। अभी भी विमुक्त समुदाय के अनेक लोग पुलिस की हिरासत में है। विमुक्त संघर्ष समिति के प्रतिनिधि भीखू सिंह धाबाई ने आरोप लगाया कि सरकार में बैठे लोग हमारे साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं कर रहे हैं। पुलिस के साथ टकराव के कुछ भी कारण रहे हो, लेकिन राजस्थान में मौजूदा सरकार में बैठे भाजपा नेताओं को विमुक्त समुदाय से संवाद करने से पहले संघ प्रचारक दुर्गादास जी की पुस्तक अपने घुमंतू पढ़ लेनी चाहिए। पुलिस जिन घुमंतू, अद्र्धघुमंतू और विमुक्त समुदाय के लोगों पर लाठियां बरसा रही है, वे डीएनटी समुदाय के लोगों का देश की आजादी में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। दुर्गादास जी की पुस्तक के बारे में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य भैया जी जोशी ने लिखा है कि सामान्य सुविधाओं से वंचित शासन प्रशासन द्वारा प्राप्त होने वाले अधिकारों से कोसो दूर और समाज द्वारा उपेक्षित इस समुदाय के करोड़ों लोग देश में है। ये समुदाय किसी षडय़ंत्र का शिकार हुआ हे। आवश्यकता है कि सारा समाज ऐसे समूहों को समझे, अपना माने, इतिहास में उनके किए पुरुषार्थ का स्मरण करें। उनकी समस्याओं को समझ कर समाधान करे। वहीं इस पुस्तक में दुर्गादास जी ने इस समुदाय के बारे में अनेक खोजपूर्ण और महत्वपूर्ण जानकारियां भी दी है। जिससे पता चलता है कि घुंतू, विमुक्त जनजाति माने जाने वाले सपेरे भाट, भोपा, नट, बाजीगर, भांड भारोडा, दमामी, बंजारा, रेबारी, गडरिया, सांसी, कंजर, नायक, बाबरी, जोगी, कुचबंधा, ओड, सिंगीवाल, गाडिय़ा लुहार, सिकलीगर, खुर पल्टस आदि के लोग न केवल बहादुर रहे बल्कि देश की आाजदी में जुटे क्रांतिकारियों की मदद की। क्रांतिकारियों की मदद करने के कारण ही 1871 में अंग्रेजों ने इन जातियों को अधिसूचित (नोटिफाइड) कर दिया। इतना ही नहीं इन जातियों को अपराधी प्रवृत्ति का मानते हुए अंग्रेजों ने गांव के बाहर पिंजरे बनवाए और इन जातियों के लोगों को इन पिंजरों में रखा। खुले मैदान में बने पिंजरों में कोई सुविधा नहीं थी। अंग्रेजों की ज्यादतियों के बाद भी इस समुदाय के लोगों ने क्रांातिकारियों को हथियार उपलब्ध करवाने में मदद की। चूंकि अंगे्रजों ने इन जातियों को अपराधी घोषित कर दिया था, इसलिए इतिहास में इन जातियों की बहादुरी का उल्लेख बहुत कम हुआ। गंभीर बात तो हय है कि आजादी के पांच वर्षों तक ये जातियां नोटिफाइड ही रही। 1952 में जब इन जातियों को डीनोटिफाइड किया गया, तब समाज में थोड़ा सम्मान मिला। चूंकि इन जातियों के लोगों की प्रवृत्ति घुमंतू रही, इसलिए सरकार की सुविधाओं का लाभ भी नहीं मिल सका। दुर्गादास जी ने अपने घुमंतू पुस्तक में डीएनटी जातियों की विस्तार से जानकारी दी है। सरकार में बैठे भाजपा के नेता यदि दुर्गादास जी की पुस्तक को पढ़ेंगे तो उन्हें पता चलेगा कि इन जातियों का देश की आजादी में कितना बड़ा योगदान है। चिंताजनक बात तो यह है कि देश की आजादी के 80 वर्ष बाद भी इन जातियों के लोग अपने अधिकारों से वंचित हैं। इन जातियों में अनुसूचित जाति के साथ साथ जनजाति के लोग भी शामिल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनजाति समुदाय के लिए हमेशा चिंतित रहते हैं। लेकिन राजस्थान में भाजपा सरकार की पुलिस इन जनजाति के लोगों पर ही लाठियां बरसा रही है। अपने आरक्षण में ही मांग: 1 जुलाई को जयपुर में हुए संघर्ष और डीएनटी समुदाय की समस्याओं को लेकर 2 जुलाई को एनडीटीवी राजस्थान चैनल पर लाइव डिबेट हुई। सायं पांच बजे प्रसारित इस डिबेट में मेरे साथ विमुक्त संघर्ष समिति के संयोजक भीखू सिंह धाबाई भी शामिल हुए। धाबाई ने कहा कि हमारी 10 प्रतिशत की आरक्षण की मांग को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जाहा है। हमें भी पता है कि संविधान के मुताबिम 50 प्रतिशत से ज्यादा आरक्षण नहीं दिया जा सकता। हम अलग से आरक्षण की मांग नहीं कर रहे है। विमुक्त समुदाय की जातियां एससी और एसटी वर्ग में भी आती है। हमारी मांग है कि एससी-एसटी के लिए जो निर्धारित आरक्षण है उसी में से हमारी जातियों के लिए दस प्रतिशत आरक्षण अनिवार्य किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि एससी एसटी वर्ग में जिन जातियों को अभी तक आरक्षण नहीं मिला है, उन्हें विशेषतौर पर आरक्षण का लाभ दिया जाए। धाबाई ने कहा कि एससीएसटी वर्ग की प्रभावशाली जातियां ही पूरा आरक्षण ले लेती हैं और हमारी अति पिछड़ा जातियों को आरक्षण का लाभ नहीं मिल पाता। विमुक्त समाज की एससी एसटी की अनेक जातियां ऐसी हैं जिन्हें चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तक की नौकरी नहीं मिली है। विमुक्त जातियों के नायक: विमुक्त जातियों के नायकों में क्रांतिवीर उमाजी नायक, भीमाजी नायक, लक्खी शाह बंजारा, गोविंद गुरु, संत सेवालालजी महाराज, क्रांतिकारी डाकू सुल्ताना, अनगढ़ बाबाजी (अमराभक्त) शामिल हैं। इसके साथ ही जाहरवीर, गोगा देव, बाबा रामदेव, देवी अहिल्या बाई होल्कर आदि को आराध्य देव माना जाता है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 03-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा 2 जुलाई को जब भ्रष्टाचार के मगरमच्छों को जेल में रखने की बात कह रहे थे, तभी भिवाड़ी में कृषि अधिकारी खाद व कीटनाशक दवाओं के निर्माताओं से वसूली कर रहे थे। भ्रष्टाचार के मगरमच्छों को किसी का भी डर नहीं है। ===================== 2 जुलाई को राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मसूदा के देवमाली से वीबी जी रामजी योजना का शुभारंभ किया। इस अवसर पर आयोजित एक सभा को संबोधित करते हुए सीएम शर्मा ने कहा कि भ्रष्टाचार के मगरमच्छ जेल में ही रहेंगे। उन्होंने कांग्रेस सरकार में जलदाय मंत्री रहे महेश जोशी और जल जीवन मिशन के प्रभारी आईएएस सुबोध अग्रवाल की तुलना भ्रष्टाचार के मगरमच्छों से की। सीएम शर्मा ने सीना ठोक कर कहा कि राजस्थान में किसी भी स्थिति में भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। 2 जुलाई को सीएम शर्मा जब मसूदा में भ्रष्टाचार के खिलाफ बोल रहे थे, तभी अलवर के भिवाड़ी में कृषि विभाग के अधिकारी खाद और कीटनाशक दवाओं के निर्माताओं से जांच का डर दिखाकर लाखों रुपए की वसूली कर रहे थे। एसीबी ने कृषि अधिकारी महेश मीणा के बैग से एक लाख 48 हजार और चंदा राम गुर्जर के बैग से 1 लाख 15 हजार रुपए की राशि बरामद की। इन दोनों के साथ ही अन्य कृषि अधिकारी भगवान सहाय यादव और कार के ड्राइवर रमेश चंद मीणा को भी गिरफ़्तार किया। असल में कृषि विभाग की इस टीम ने भिवाड़ी कोटपुतली, बहरोड की 20 फैक्ट्रियों का निरीक्षण किया। बाद में इन अधिकारियों ने जांच का डर दिखाकर फैक्ट्री मालिकों से वसूली की। कृषि विभाग के अधिकारी खुले आम वसूली तब कर रहे थे, जब राजस्थान के कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा है। मीणा ने नकली खाद और घटिया कीटनाशक बनाने वाली फैक्ट्रियों के खिलाफ अभियान चला रखा है। अधिकारियों को पता है कि उनके मंत्री भ्रष्टाचार के खिलाफ हैं, लेकिन तीन कृषि अधिकारियों के भ्रष्टाचार से पता चलता है कि भ्रष्टाचारियों को किसी का भी डर नहीं है। इसे कृषि अधिकारियों की दिलेरी ही कहा जाएगा कि मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री के सख्त रवैये के बाद भी खुलेआम वसूली हो रही है। इससे भ्रष्टाचार की जड़ों अंदाजा लगाया जा सकता है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 03-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

रिश्ते सुधारने के लिए भारत और पाकिस्तान की 117 हस्तियों ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखे। लेकिन पहलगाम में जब 26 हिंदू पर्यटकों को धर्म पूछकर मौत के घाट उतार दिया जाता है, जब इन हस्तियों का मुंह बंद क्यों हो जाता है? सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस जैसी संस्थाओं से सावधान रहने की जरुरत। ============== भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते सुधारने के लिए दोनों देशों की 117 हस्तियों ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को पत्र लिखे हैं। पत्र में दोनों प्रधानमंत्रियों से आग्रह किया गया है कि दोनों देश सीमाओं से आपस में जुड़े हुए है, इसलिए दोनों देशों के बीच अच्छे संबंध होने चाहिए। पत्र में राजनीतिक संबंधों के साथ साथ कारोबार संबंधों को भी सुधारने पर जोर दिया गया है। यह पत्र सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस नाम की संस्था की पहल पर लिखा गया है। इसमें कोई दो राय नहीं कि भारत और पाकिस्तान के रिश्ते सुधरने चाहिए, लेकिन सवाल उठता है, जब 22 अप्रैल 2025 को जम्मू कश्मीर के पहलगाम में बैसरन घाटी में धर्म पूछकर 26 हिंदू पर्यटकें को मौत के घाट उतार दिया जाता है और हत्यारे मुस्लिम आतंकी पाकिस्तान में शरण ले लेते हैं, तब इन हस्तियों का मुंह बंद क्यों हो जाता है? तब यह हस्तियां पाकिस्तान और आतंकियों की आलोचना क्यों नहीं करते? इतना ही नहीं जब पहलगाम के आतंकियों को भारत की सेना ऑपरेशन सिंदूर के अंतर्गत पाकिस्तान में घुसकर मारती है, तब इन्हीं हस्तियों को पाकिस्तान बेचारा नजर आता है। ऐसी हस्तियां ही भारतीय सेना से ऑपरेशन सिंदूर के सबूत मांगती है। ऐसी हस्तियां धर्मनिरपेक्षता का चोला ओढ़कर सांप्रदायिक सौहार्द की दुहाई भी देती है। धर्मनिरपेक्षता के एक तरफा चेहरे की वजह से ही भारत को काफी नुकसान हो चुका है। धर्म निरपेक्षता तभी सफल होती है, जब दूसरा पक्ष भी सौहार्द दिखाए। पहलगाम में 26 हिंदुओं की हत्या करने और फिर धर्मनिरपेक्षता वादियों के चुप रहने से भारत और पाकिस्तान के रिश्ते कभी नहीं सुधर सकते हैं। सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस नाम की संस्था ने भारत में जिन हस्तियों के हस्ताक्षर करवाए हैं, उनमें जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती के साथ साथ राजद के सांसद मनोज झा के भी हस्ताक्षर है। ऐसी हस्तियां तो शुरू से ही पाकिस्तान की समर्थक रही है। देखा जाए तो फारुख अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती की वजह से ही कश्मीर घाटी से चार लाख हिंदुओं को पलायन करना पड़ा। आज भी ये कश्मीरी हिंदू अपने ही देश में शरणार्थी बन कर रह रहे हैं ,भारत की सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस जैसी संस्थाओं से भी सावधान रहने की जरूरत है। असल में जब तक पाकिस्तान में कट्टरपंथी संगठनों पर नियंत्रण नहीं होगा, तब तक भारत के साथ रिश्ते नहीं सुधर सकते। पाकिस्तान में बैठे कट्टरपंथी नेता ही आज भी भारत में आतंकी गतिविधियां करवा रहे हैं। अब तो नशीले पदार्थ भिजवा कर युवा पीढ़ी को खराब किया जा रहा है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 02-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

श्री गंगानगर में दुष्कर्म के अड्डे बनी तीन होटलों को मिट्टी में मिलाया। ऐसी कार्यवाही राजस्थान भर में होनी चाहिए। ============== एक जुलाई को राजस्थान के श्रीगंगानगर में होटल जॉय इन, होटल ड्रीम और होटल सफायर पर जेसीबी चलाकर मिट्टी में मिला दिया गया।आरोप है कि होटलें दुष्कर्म के अड्डे बनी हुई थी। हाल ही में एक मामला एक नाबालिग का सामने आया। इन होटलों के संचालकों ने नाबालिग को अपने होटल में रखा और फिर कई युवकों से गैंग रेप करवाया। एक जुलाई को प्रशासन ने सख्त रवैया अपनाते हुए इन होटलों पर जो कार्यवाही की उसकी अब सर्वत्र प्रशंसा हो रही है। राजस्थान में संभवत: अब यह पहला अवसर होगा, जब दुष्कर्म के आरोप के मद्देनजर एक साथ तीन होटलों पर जेसीबी चलाई गई। स्वाभाविक है कि इतनी बड़ी कार्यवाही से पहले मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से सहमति ली होगी। श्रीगंगानगर में होटलों पर जो कार्यवाही हुई वैसी कार्यवाही राजस्थान भर में होना चाहिए। असल में राजस्थान के शहरों में अनेक होटलों में महिलाओं के साथ दुष्कर्म होते हैं। कई बार तो क्षेत्रीय नागरिक भी शिकायत करते हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई कार्यवाही नहीं की जाती। अनेक बार बलात्कार की शिकार युवती होटल का नाम भी बताती है, लेकिन फिर भी कार्यवाही नहीं होती। श्रीगंगानगर के प्रशासन ने तीन होटलों पर जेसीबी चलाकर सराहनीय काम किया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को चाहिए कि श्रीगंगानगर जैसी कार्यवाही राजस्थान भर में करवाई जाए। तभी होटल संचालकों में भय होगा। बलात्कार की घटना के बाद कोई होटल संचालक अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता है। जिस होटल में दुष्कर्म हुआ, उसके लिए होटल का मालिक भी जिम्मेदार है। कई बार देखा गया है कि मोटे किराये के लालच में संदिग्ध व्यक्तिों को होटल का कमरा दे दिया जाता है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 02-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

राजस्थान में कार्मिकों को सेवानिवृत्ति पर नहीं मिल रही राशि। चिकित्सा विभाग में तो पांच माह तक का विलंब। ============== सरकार का नियम तो यही है कि राज्य कर्मचारी को सेवानिवृत्ति के साथ ही भविष्य निधि (ईपीएफ), ग्रेच्युटी, अवकाश नगदीकरण आदि की राशि मिल जाए। ताकि सेवानिवृत्ति के बाद संबंधित कार्मिक अपने भविष्य की योजना बना सके,लेकिन इसे दुर्भाग्यपूर्ण ही कहा जाएगा कि राजस्थान में राज्य कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के साथ पीएफ, ग्रेच्युटी आदि का भुगतान नहीं हो रहा है। इसके लिए कार्मिकों को सेवानिवृत्ति के बाद चार-पांच माह तक का इंतजार करना पड़ रहा है। चिकित्सा विभाग के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को तो पांच माह का इंतजार है। जिन कर्मचारियों ने 30 से लेकर 36 वर्ष तक अपनी सेवाएं दी, उन्हें अपने ही पैसों के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। इनमें सरकार के बड़े अधिकारी भी शामिल हैं। सेवानिवृत्ति के समय कर्मियों को भुगतान होने के संबंध में कहा जा रहा है कि सरकार के खजाने में पैसा नहीं है। सरकार के पास जब पैसों का जुगाड़ हो जाता है, तब सेवानिवृत्त कर्मियों को बकाया राशि का भुगतान किया जाता है। खजाने में पैसा नहीं होने के कारण ही कर्मियों को पांच-पांच माह इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसे अनेक कार्मिक हैं जिन्होंने सेवानिवृत्ति के समय मिलने वाली राशि को लेकर योजना बनाई, लेकिन राशि नहीं मिलने के कारण ऐसी योजना सफल नहीं हो पा रही। कार्मिकों का कहना है कि ऐसी सरकार को काम से कमस सेवानिवृत्ति के एक माह के अंदर अंदर बकाया राशि का भुगतान करना चाहिए। बकाया राशि का भुगतान नहीं होने से कर्मियों को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसके साथ ही भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार की छवि भी खराब हो रही है7 मुख्यमंत्री शर्मा स्वयं शिकायत विवरण सेंटर पर जाकर लोगों की समस्याओं का समाधान करते हैं। लेकिन कर्मियों की सेवानिवृत्ति के समय भुगतान न होने पर मुख्यमंत्री शर्मा भी चुप हैं। S.P.MITTAL BLOGGER ( 02-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

राजस्थान में भजनलाल शर्मा ही भाजपा के सबसे बड़े चेहरे। ऐसा अभिनंदन समारोह भी प्रदर्शित हुआ। यमुना जल पर हरियाणा के साथ एग्रीमेंट होने से राजनीति में कद और बढ़ा। =============================== 29 जून को दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की उपस्थिति में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने यमुना नदी के पानी को शेखावाटी क्षेत्र में लाने को लेकर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ एग्रीमेंट किया। इस ऐतिहासिक एग्रीमेंट को करने के बाद 30 जून को जब सीएम शर्मा जयपुर एयरपोर्ट पहुंचे तो उनका जबरदस्त स्वागत किया। मंत्रिमंडल के अधिकांश सदस्य एयरपोर्ट पर मौजूद थे। भाजपा के दिग्गज नेता माने जाने वाले सतीश पूनिया, राजेंद्र राठौड़ भी स्वागत के लिए आतुर थे। एयरपोर्ट से मुख्यमंत्री आवास तक भजनलाल शर्मा और मंत्रियों ने बस में सफर किया। मार्ग में जगह जगह खड़े लोगों ने भजनलाल शर्मा के समर्थन में नारे लगाए। मुख्यमंत्री आवास पर हुए अभिनंदन समारोह में भी भाजपा के नेताओं ने एक स्वर से सीएम शर्मा की प्रशंसा की। यमुना का पानी राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र में लाने का जो प्रयास भजनलाल शर्मा ने किया उसे नेताओं ने प्रदेश के विकास में मील का पत्थर बताया। अभिनंदन समारोह में ऐसा प्रदर्शित किया गया कि राजस्थान में अब भजनलाल शर्मा ही भाजपा के सबसे बड़े चेहरे हैं। एक तरफ से ऐतिहासिक एग्रीमेंट का पूरा श्रेय सीएम शर्मा को ही दिया गया। खुद सीएम शर्मा ने कहा कि मेरे लिए यह भावुक क्षण है। मुझे आज यह कहते हुए गर्व हो रहा है कि जल्द ही शेखावाटी के लोगों को यमुना का पानी पीने और सिंचाई के लिए मिलेगा। जो काम 32 वर्ष से लंबित था उसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सहयोग से पूरा किया जा हा है। समारोह में भाजपा के दिग्गज नेता राजेंद्र राठौड़ ने अपने गृह जिले चूरू से आए लोगों को मुख्यमंत्री के सामने खड़ा किया और यह बताया कि उनके समर्थन में चूरू से कितने लोग आए हैं। इस समारोह में सीएम शर्मा पूरे आत्मविश्वास से भरे नजर आए। उन्होंने कहा कि मैं जब ढाई वर्ष पूर्व मुख्यमंत्री बना था, तब पहली प्राथमिकता पानी को दी थी। आज मैं कह सकता हंू कि ईआरसीपी, यमुना जल जैसी परियोजनाओं पर आम सहमति बनने के बाद राजस्थानी पानी के क्षेत्र में मजबूत स्थिति में होगा। प्रदेश के प्रत्येक गांव में नजल से जल पहुंचेगा। S.P.MITTAL BLOGGER ( 01-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

मृतक डकैत जगन गुर्जर के प्रकरण में अजमेर कांग्रेस के नेताओं ने सकारात्मक भूमिका निभाई। ============= राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में चंबल नदी के किनारे के जंगलों में कभी आतंक मचाने वाले कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की हत्या 29 जून को अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में कर दी गई। इस हत्या के बाद अजमेर में जो हालात उत्पन्न हुए उसमें प्रशासन के समक्ष कानून व्यवस्था की स्थिति खड़ी हो गई। 30 जून को अजमेर के जेएलएन अस्पताल के मुर्दाघर के बाहर बड़ी संख्या में जगन गुर्जर के परिजन और गुर्जर समुदाय के लोग एकत्रित हो गए। ऐसे तनावपूर्ण माहौल में ही जगन गुर्जर के पुत्र आसाराम ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों को नहीं माना गया तो कानून व्यवस्था बिगड़ जाएगी। आसाराम ने कहा कि वह जगन गुर्जर का खून है और उसे हत्यारों को जेल के अंदर और बाहर भी मारना आता है। ऐसे तनावपूर्ण माहौल में ही अजमेर के कांग्रेस नेता शिव प्रकाश गुर्जर, एडवोकेट हरिसिंह गुर्जर, पार्षद नौरत गुर्जर, हरचंद खटाणा आदि ने सकारात्मक भूमिका निभाई। इन कांग्रेसियों ने जगन गुर्जर के परिजन और प्रशासन के बीच मध्यस्थ का काम किया। कांग्रेस नेताओं की भूमिका से ही आम सहमति बनी कि हत्या की न्यायिक जांच करवाई जाएगी। साथ ही मृतक जगन गुर्जर के भाई पप्पू गुर्जर को अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल से दूसरी जेल में शिफ्ट किया जाएगा। जगन गुर्जर के अंतिम संस्कार में भाग लेने के लिए पप्पू गुर्जर को पैरोल भी दी जाएगी। इस सहमति के बाद ही 30 जून की शाम को जगन गुर्जर के शव का पोस्टमार्टम हुआ और रात को ही शव को धौलपुर स्थित पैतृक गांव ले जाया गया। तय कार्यक्रम के अनुसार 1 जुलाई को पैतृक गांव में ही जगन गुर्जर का अंतिम संस्कार किया जा रहा है। यहां उल्लेखनीय है कि जिन परिस्थितियों में 29 जून को अजमेर की जेल में जगन गुर्जर की हत्या हुई उसको लेकर अब अनेक सवाल उठ रहे हैं। हाई सिक्योरिटी जेल में ीाी यदि कैदी सुरक्षित नहीं है तो फिर जेल की सुरक्षा व्यवस्थाओं पर सवाल उठते ही हैं। गंभीर बात तो यह है कि जेल की जिस बैरक में जगन गुर्जर बंद था, उसमें कैमरा भी लगा हुआ है, लेकिन इसके बाद भी एक मामूली अपराधी विष्णु ने जगन गुर्जर जैसे कुख्यात डकैत की गमछे से गला दबाकर हत्या कर दी। यही वजह है कि परिजन को हत्या के पीछे बड़ी साजिश नजर आ रही है। परिजन का कहना है कि मामूली अपराधी विष्णु इतने बड़े हत्याकांड को अंजाम नहीं दे सकता। S.P.MITTAL BLOGGER ( 01-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511