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एमडीएस यूनिवर्सिटी का सफर 38 वर्ष पहले दयानंद कॉलेज के हॉस्टल से शुरू हुआ था। प्रो. रामवली उपाध्याय प्रथम कुलपति थे। वर्तमान कुलगुरु सुरेश अग्रवाल के नवाचारों की प्रदेशभर में गूंज। एक अगस्त को 39वें स्थापना दिवस समारोह में राज्यपाल बागड़े शामिल होंगे। ============== अजमेर स्थित महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय (एमडीएसयू) एक अगस्त को अपना 39वां स्थापना दिवस धूमधाम से मना रहा है। इस विश्वविद्यालय के पास आज भले ही विशालतम संसाधन और संपत्तियां हो, लेकिन इसकी शुरुआत अजमेर के निजी क्षेत्र के दयानंद कॉलेज के हॉस्टल से हुई थी। तब सरकार के पास अजमेर में ऐसा कोई भवन नहीं था, जिसमें विश्वविद्यालय को संचालित किया जा सके। ऐसी स्थिति में सरकार को दयानंद कॉलेज के हॉस्टल को किराये पर लेना पड़ा। हास्टल के जिन कमरों में कभी विद्यार्थी रहते थे, उन्हीं कमरों में विश्वविद्यालय का संचालन किया गया। यह विश्वविद्यालय करीब कुछ वर्षों तक किराये के परिसर में ही चला। वर्ष 1990 में निकटवर्ती कायड़ ग्राम में विश्वविद्यालय को आवंटित भूमि पर दो तीन भवन निर्मित हुए और फिर इस विश्वविद्यालय को स्थानांतरित किया गया। आवंटित भूमि पर सबसे ज्यादा भवनों का निर्माण पीएल चतुर्वेदी के कुलपति रहते हुए हुआ। प्रो. चतुर्वेदी 12 जनवरी 1995 से 2 दिसंबर 1999 तक कुलपति रहे। यहां उल्लेखनीय है कि प्रो. पीएल चतुर्वेदी वर्तमान राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी के पिता थे। पहले इस विश्वविद्यालय का नाम अजमेर विश्वविद्यालय रखा गया, चूंकि अजमेर में स्वामी दयानंद का निर्वाण हुआ, इसलिए विश्वविद्यालय का नाम आगे चलकर महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय रखा गया। आज गर्व के साथ कहा जा सकता है कि प्रदेश के उच्च शिक्षा के क्षेत्र में यह विश्वविद्यालय महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। जब विश्वविद्यालय की शुरुआत हुई, तब प्रो. रामवली उपाध्याय प्रथम कुलपति बने। मौजूदा समय में प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल कुलगुरु के तौर पर कार्य कर रहे हैं। यह संयोग ही है कि प्रो. अग्रवाल का एक वर्ष का कार्यकाल हाल ही में पूरा हुआ है। प्रो. अग्रवाल ने अल्प अवधि में ही विश्वविद्यालय में जो नवाचार किए हैं, उसकी गूंज पूरे प्रदेश में है। कुलाधिपति और राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े भी प्रो. अग्रवाल की कार्यशैली की प्रशंसा कर चुके है। यदि सरकार ने प्रो. अग्रवाल के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया तो आने वाले दिनों प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों की प्रवेश प्रक्रिया एक समान ही होगी। प्रो. अग्रवाल ने बताया कि 39वें स्थापना दिवस का मुख्य समारोह एक अगस्त को विश्वविद्यालय परिसर स्थित बृहस्पति भवन में प्रात: साढ़े 11 बजे होगा। इस समारोह के मुख्य अतिथि कुलाधिपति और राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े होंगे। जबकि विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी और कैबिनेट मंत्री सुरेश सिंह रावत विशिष्ट अतिथि के तौर पर मौजूद रहेंगे। इस समारोह में विश्वविद्यालय के अब तक के सफर की विस्तृत जानकारी दी जाएगी। प्रो. अग्रवाल ने बताया कि स्थापना दिवस के समारोह की शुरुआत 31 जुलाई से ही हो रही है। इस दिन 108 दीपों से दीप यज्ञ और स्काई नॉर्टन के आयोजन होंगे। 3 अगस्त को आत्ममंथन दिवस, 4 अगस्त को विभागीय उपलब्धियों की प्रदर्शनी, पांच अगस्त को सांस्कृतिक एवं गुरु वंदन का कार्यक्रम, 6 अगस्त को विश्वविद्यालय की भावी कार्य योजना और विकास पर मंथन होगा। 7 अगस्त को समापन समारोह आयोजित होगा। S.P.MITTAL BLOGGER ( 31-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही आरएसएस के है तो फिर कुलपतियों के होने से क्या फर्क पड़ता है। मनुस्मृति की आलोचना करते करते पचास वर्षों से सत्ता का सुख भोग रहे हैं खरगे। ============== कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्य सभा में प्रतिपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खडग़े ने आरोप लगाया कि देश की शिक्षा व्यवस्था पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) की विचारधारा हावी है। देश की अधिकांश यूनिवर्सिटीज पर आरएसएस के कुलपतियों की नियुक्ति कर दी गई है। खडग़े ने आरएसएस को मनुस्मृति के विचारों से भी जोड़ दिया। खडग़े के आरोप अपनी जगह है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मादेी गर्व से कहते हैं कि वे संघ के स्वयं सेवक है। सवाल उठता है कि कुलपतियों के संघ का होने से क्या फर्क पड़ता है। संघ के बारे में खडग़े के विचार कुछ भी हो, लेकिन संघ की विचारधारा देश के स्वाभिमान से जुड़ी है। संघ की विचारधारा मे ंभारत के स्वय को प्राथमिकता दी जाती है। यानी आज भारत को गुलामी की परंपराओं की जरुरत नहीं है, इसलिए संघ की ओर से रानी अहिल्या बांध, संत कवि रविदास की जयंती वर्ष भर मनाई जा रही है। खडग़े मनुस्मृति की आलोचना करते है तो संघ की विचारधारा संत रविदास के विचारों को आगे बढ़ाती है। आज भारत को राजनी अहिल्या बाई और संत रविदास के विचारों की ही जरुरत है। मनुस्मृति की आलोचना करते करते खडग़े गत पचास वर्षों से सत्ता का सुख भोग रहे है। खडग़े पहले लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता थे, लेकिन लोकसभा का चुनाव हार गए तो उन्हें राज्यसभा का सांसद बनाया गया और मौजूदा समय में खडग़े राज्यसभा में प्रतिपक्ष के नेता है। प्रतिपक्ष के नेता को कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिलता है। सनातन धर्म को लेकर खडग़े के कुछ भी विचार हो, लेकिन कांग्रेस ने खडग़े को राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बना रखा है। गंभीर बात तो यह है कि मनुस्मृति के तथ्य भी खडग़े गलत प्रस्तुत करते हैं। खगड़े का उद्देश्य समाज में विद्वेष की भावना पैदा करना है। अच्छा हो कि खडग़े भी राजनी अहिल्या बाई और संत रविदास के विचारों को आगे बढ़ाए। S.P.MITTAL BLOGGER ( 31-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

डोटासरा, सचिन पायलट की तरह शालीन नहीं जो अशोक गहलोत की हर करतूत को बर्दाश्त कर लें। 6 साल में पहला अवसर जब डोटासरा ने गहलोत पर सीधा हमला किया। मालवीय को भी राजनीतिक हैसियत दिखाई। चौथी बार गहलोत सरकार के नारों को क्यों नहीं रुकवाते पूर्व मुख्यमंत्री? ============== राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सार्वजनिक तौर पर अनेक बार पूर्व डिप्टी सीएम और वर्तमान में कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट के विरुद्ध अपशब्दों का प्रयोग किया, लेकिन हर बार पायलट ने शालीनता दिखाई और कहा कि गहलोत उनके पिता के समान है। पायलट ने कभी भी गहलोत को लेकर अभद्र टिप्पणी नहीं की। लेकिन गहलोत को प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा से पायलट जैसी उम्मीद नहीं करनी चाहिए। 30 जुलाई को जब कांग्रेस नेता महेंद्र जीत सिंह मालवीय अपने समर्थकों को लेकर पहले अशोक गहलोत के जयपुर आवास पर चले गए तो डोटासरा ने मीडिया के कैमरों के सामने गहलोत पर सीधा हमला किया। इतना ही नहीं गहलोत समर्थक मालवीय को उनकी राजनीतिक हैसियत भी दिखा दी। डोटासरा गत 6 वर्षों से प्रदेशाध्यक्ष है, लेकिन यह पहला अवसर है, जब डोटासरा ने गहलोत के कृत्य पर नाराजगी जताई। असल में मालवीय अपने गृह क्षेत्र बांसवाड़ा डूंगरपुर से 300 कार्यकर्ताओं को लेकर जयपुर आए और वादा किया कि यह सभी भारत आदिवासी पार्टी के कार्यकर्ता है और आम कांग्रेस में शामिल हो रहे हैं। प्रदेशाध्यक्ष डोटासरा को उम्मीद थी कि मालवीय कार्यकर्ताओं को सीधे प्रदेश कार्यालय में लाएंगे और फिर कांग्रेस की सदस्यता दिलाई जाएगी, लेकिन मालवीय कार्यकर्ताओं को लेकर पहले पूर्व सीएम गहलोत के सिविल लाइन स्थित सरकारी आवास पर पहुंच गए। यहां सभी कार्यकर्ताओं को कांग्रेस का दुपट्टा पहनाया गया। मालवीय ने कहा कि हम सब अशोक गहलोत के साथ है। इसके साथ ही कार्यकर्ताओं ने अशोक गहलोत की मौजूदगी में ही चौथी बार गहलोत सरकार के नारे लगाए। मालवीय की इस कार्यवाही से जाहिर था कि उनका समर्पण जब चौथी बार गहलोत सरकार के नो लगा रहे है, तब कांग्रेस के प्रदेश मुख्यालय में अध्यक्ष डोटासरा इंतजार कर रहे थे। डोटासरा को मालवीय का यह व्यवहार गलत लगा कि वे प्रदेश कार्यालय आने के बजाए पहले गहलोत के आवास पर चले गए। मालवीय जब अपने समर्थकों के साथ प्रदेश कार्यालय आए तो डोटासरा ने मीडिया के कैमरों के सामने नाराजगी जताई। डोटासरा ने मालवीय से कहा कि आप तो किसी नेता की ब्रांडिंग करने आए हैं, जबकि आपको पता है कि कांग्रेस को मजबूत करने का काम करना चाहिए। डोटासरा ने कहा कि व्यक्तिवादी राजनीति के कारण कांग्रेस को पहले ही काफी नुकसान हो चुका है। डोटासरा ने अशोक गहलोत और सचिन पायलट का नाम लेते हुए कहा कि मैं हमेशा कांग्रेस को मजबूत करने का करता हूं, मैंने कभी भी अपने नाम की ब्रांडिंग नहीं करवाई। डोटासरा ने मालवीय से कहा कि कांग्रेस में आ मुझसे वरिष्ठ है, लेकिन आज आम मेरे पीछे खड़े है। मालवीय को यह नहीं भुलना चाहिए कि जब उन्होंने वर्ष 2024 में बांसवाड़ा डूंगरपुर संसदीय क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था, तब मैंने चुनौती देकर मालवीय को हरवाया। आज मालवीय न सांसद है और न विधायक। यानी डोटासरा ने गहलोत पर हमला करने के साथ साथ मालवीय को भी राजनीतिक हैसियत दिखा दी। डोटासरा ने 30 जुलाई को जिस अंदाज में अपनी नाराजगी जताई, उसको लेकर अब राजस्थान में कांग्रेस का माहौल गर्म हो गया है। एक ओर कांग्रेस शहरी निकाय और पंचायती राज के चुनावों की तैयारियां कर रही है, तो वहीं प्रदेशाध्यक्ष डोटासरा और पूर्व सीएम गहलोत के बीच मतभेद खुलकर सामने आए हैं। हालांकि डोटासरा की नाराजगी पर गहलोत ने अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन गहलोत को भी एहसास हो गया है कि डोटासरा, पायलट की तरह शालीनता नहीं दिखाएंगे। डोटासरा ने जो नाराजगी दिखाई उसे देखते हुए भविष्य में कांग्रेस का कोई नेता शायद ही अशोक गहलोत से इस तरह मुलाकात करे। नारों को रोकते क्यों नहीं?: मालूम हो कि गहलोत तीन बार राजस्थान के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। चूंकि राजस्थान में गत पांच बार से एक बार भाजपा और एक बार कांग्रेस की सरकार बन रही है। इसलिए गहलोत की लालसा है कि वर्ष 2028 में जब कांग्रेस सरकार बने तो वे चौथी बार मुख्यमंत्री बन जाए। यही वजह है कि गहलोत के समर्थक चौथी बार गहलोत सरकार के नारे लगाते हैं। यदि गहलोत की लालसा न हो तो वे अपने समर्थकों को ऐसे नारे लगाने से मना कर रोक सकते हैं। जानकारों की मानें तो कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व पर दबाव डालने के लिए गहलोत चौथी बार के बारे लगाते हैं। 30 जुलाई को भी मालवीय के समर्थकों ने गहलोत के घर पर चौथी बार के नारे लगाए तो साफ प्रदर्शित हो रहा था कि इन नारों में गहलोत की सहमति है। सत्ता के बगैर छटपटाहट: महेंद्र जीत सिंह मालवीय लाखों रुपया खर्च कर 300 कार्यकर्ताओं को जयपुर इसलिए लाए ताकि कांग्रेस में उनका प्रभाव बढ़ सके, लेकिन मालवीय का यह दांव उल्टा पड़ गया। असल में मालवीय सत्ता के बगैर छटपटा रहे हैं। मालवीय ने कांग्रेस में रहते हुए बरसो तक सत्ता का सुख भोगा। वे स्वयं सांसद, विधायक और मंत्री रहे। जब वे कांग्रेस की गहलोत सरकार में मंत्री थे, तो अपनी पत्नी रेशमा मालवीय को जिला प्रमुख बनवा दिया। कांग्रेस में इतना सुख भोगने के बाद मालवीय ने वर्ष 2024 में भाजपा का दामन थाम लिया। लेकिन भाजपा उम्मीदवार के तौर पर मालवीय लोकसभा का चुनाव हार गए। इतना नहीं मालवीय बागीदौरा उप चुनाव में अपने साले को भाजपा का उम्मीदवार बनवाया। साला भी चुनाव हार गया। इसी वर्ष जनवरी माह में मालवीय ने भाजपा छोड़कर फिर से कांग्रेस जॉइन कर ली। मौजूदा समय में मालवीय और उनके परिवार का कोई भी सदस्य सांसद, विधायक, जिला प्रमुख नहीं है। पंचायती राज के चुनाव को देखते हुए मालवीय की नजर डूंगरपुर के जिला प्रमुख के पद पर लगी हुई है। वहीं भारत आदिवासी पार्टी की ओर से दावा किया गया है कि मालवीय के साथ जो 300 कार्यकर्ता जयपुर गए है उनका हमारी पार्टी से कोई संबंध नहीं है। ये वे ही लोग है जिने मालवीय भाजपा में ले गए थे। S.P.MITTAL BLOGGER ( 31-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

अजमेर में साम्प्रदायिक सौहार्द की भावना से निकलेगा ईद मिलादुन्नबी का जुलूस। 25 अगस्त को निकलने वाले जुलूस में सभी धर्मों के प्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे। ================ प्रतिवर्ष निकलने वाले ईद मिलादुन्नबी का जुलूस इस बार 25 अगस्त को साम्प्रदायिक सौहार्द की भावना से निकाला जाएगा। जुलूस की तैयारियों को सूफी इंटरनेशनल संस्था की ओर से 26 जुलाई को ख्वाजा साहब की दरगाह स्थित अकबरी मस्जिद में एक बैठक हुई। इस बैठक की अध्यक्ष खादिमों की संस्था अंजुमन मोइनिया फखरिया चिश्तिया के सचिव सैय्यद कलीमुद्दीन चिश्ती ने की। बैठक में जुलूस के सफल संचालन, मार्ग व्यवस्था, अनुशासन, स्वच्छता, सुरक्षा तथा सामाजिक समरसता जैसे विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। सूफी इंटरनेशनल के सचिव नवाब हिदायतउल्ला ने बताया कि जुलूस में शामिल होने वाले सभी लोग प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन करेंगे। जुलूस के दौरान स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाएगा, यातायात व्यवस्था में सहयोग किया जाएगा तथा यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी नागरिक को असुविधा का सामना न करना पड़े। साथ ही सभी से अपील की गई कि जुलूस की गरिमा बनाए रखें और ऐसा कोई कार्य न करें जिससे समाज में गलत संदेश जाए। बैठक में इस बात पर भी विशेष जोर दिया गया कि अजमेर हमेशा से गंगा-जमुनी तहज़ीब और कौमी एकता की मिसाल रहा है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए जुलूस में विभिन्न धर्मों एवं समाजों के प्रतिनिधियों को भी सम्मान आमंत्रित किया जाएगा, ताकि पैगंबर-ए-इस्लाम के अमन और इंसानियत के संदेश को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाया जा सके। बैठक में मौजूद प्रतिनिधियों ने विश्वास जताया कि इस वर्ष का 1501 वां जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी पूरी शान, अकीदत और शहरवासियों के लिए भाईचारे सद्भाव और राष्ट्रीय एकता का संदेश लेकर निकलेगा। अंत में सभी समाजों, संगठनों और शहरवासियों से अधिक से अधिक संख्या में जुलूस में शामिल होकर पैगंबर ए इस्लाम की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाने तथा प्रेम, शांति और इंसानियत के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया गया। बैठक में सूफी इंटरनेशनल के अध्यक्ष हाजी सरवर सिद्दीकी,मौलाना अय्यूब कासमी, दरगाह कमेटी के सहायक नाजिम शादाब अहमद, काजी मुनव्वर अली, अनजुमन सदस्य गफ्फार काजमी,एहतेशाम चिश्ती, अब्दुल नईम खान, सैय्यद फ़ज़ले अमीन चिश्ती, हाजी इफ्तेखार चिश्ती,पूर्व पार्षद मुख्तार अहमद नवाब, मोहम्मद शाकिर खान, अहसान सुलतानी, सैय्यद अनवर चिश्ती,सैय्यद मसूद मोईनी, अहसान मिर्ज़ा, हुमायूं खान, सलीम कुरैशी, हाजी रईस कुरैशी, आरिफ हुसैन, बशीर खान कायम खानी , सैय्यद सलीम बना,सैय्यद गुलज़ार चिश्ती, अब्दुल जब्बार अब्बासी, अकबर घोसी,शेखजादा ज़ीशान चिश्ती,उमरदीन अब्बासी, अब्दुल शाहिद, अब्दुल हमीद, एस एम अकबर,बदरुद्दीन कुरैशी , हाफिज खान,अब्दुल सलाम,सुब्हानी, मोहम्मद इस्लाम, अशरफ अली, अब्दुल अजीज मुल्तानी,आइन हुसैन घोसी, साहिल घोसी, इकबाल कुरैशी, अस्नान कुरैशी,गयासुद्दीन चिश्ती, अल्ताफ ऊंटडा, जाहिद खान ,उस्मान घड़ियाली बिलाल, हाफिज रमजान शेरानी, अल्ताफ हुसैन अंसारी, आदि मौजूद रहे जुलूस के बारे में और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9413383786 पर नवाब हिदायतउल्ला से ली जा सकती है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 27-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

विवाह जीवन में अनुशासन लाता है-मोहन भागवत, संघ प्रमुख। पुत्री हो तो परिवार में अनुशासन और बढ़ जाता है। सनातन संस्कृति में तो कन्यादान करने वाले माता-पिता को मोक्ष मिलने की मान्यता है। ================ 26 जुलाई को हैदराबाद में आयोजित विश्व मंगल्य सभा के समकालीन मातृत्व कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि विवाह जीवन में अनुशासन लाता है और धर्म व जिम्मेदारी का भाव पैदा करता है। इसके विपरीत लिव इन रिश्तों में लोग जिम्मेदारी से बचकर केवल सुख चाहते हैं। लिव इन रिश्तों के दुष्परिणाम आज पूरी दुनिया देख रही है। पश्चिमी संस्कृति की अंधी नकल आधुनिकता नहीं बल्कि समाज का पतन है। संघ प्रमुख ने भारत की सनातन संस्कृति में विवाह पद्धति के महत्व के बारे में विस्तार से बताया। इसमें कोई दो राय नहीं कि आज पश्चिम संस्कृति के पक्षधर लोग भी भारत की विवाह पद्धति की सराहना करने लगे है। यही वजह है कि रोजगार के लिए विदेश में गई भारतीय युवतियों को पश्चिमी देशों के युवा सनातन संस्कृति के अनुरूप विवाह कर रहे है। यानी भारत की विवाह पद्धति को दुनिया में स्वीकारा जा रहा है। सनातन संस्कृति के अनुरूप संपन्न विवाह के बाद जिस परिवार में पुत्री का जन्म होता है, वह परिवार और अनुशासित हो जाता है। पुत्री को देखते हुए माता पिता को भी अपनी जिम्मेदारी का ज्यादा अहसास होता है। हालांकि पुत्री के जन्म का फैसला सनातन संस्कृति में ईश्वर का माना जाता है। लेकिन हम यदि सिर्फ पुत्रों वाले परिवारों की तुलना पुत्री वाले परिवार से करे तो दोनों में फर्क नजर आएगा। यह भी देखा गया है कि पुत्री वाला परिवार ज्यादा सफलता और सरलता के साथ जीवन व्यतीत कर रहा है। सनातन संस्कृति में तो मान्यता है कि कन्यादान करने वाले माता पिता को मोक्ष की प्राप्ति होती है। हमारी संस्कृति में मोक्ष का बहुत महत्व है। कई बार मोक्ष प्राप्ति के लिए मनुष्य को अनेक जतन करने होते है, जबकि कन्यादान करने वाले माता पिता को सरलता के साथ मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। वो परिवार वाकई भाग्यशाली है जिनके यहां पुत्री का जन्म हुआ है । S.P.MITTAL BLOGGER ( 27-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

कॉकरोच पार्टी के प्रदर्शन में पीएम मोदी को गालियां। भद्दी गालियां बकने में लड़कियां भी शामिल। गालियों वाले वीडियो को सोशल मीडिया के प्लेट फार्मों से हटाने के निर्देश। सवाल-आखिर यह कौन सा मीडिया है? क्या राहुल-अखिलेश ऐसे मीडिया की निंदा करेंगे। ================ नीट पेपर लीक के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी ने एक से 25 जुलाई तक दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया उसमें अनेक प्रदर्शनकारियों ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गालियां दी। गालियां बकने में लड़कियां भी शामिल रही। अश्लील और भद्दी गालियों को देखते हुए केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्मों से ऐसे वीडियो को हटाने के निर्देश संबंधित संस्थाओं को दिए हैं। अब भी गालियों वाले वीडियो सोशल मीडिया से हट जाए, लेकिन यह वीडियो देश भर में घर घर तक पहुंच गए है। हर व्यक्ति के मोबाइल में गालियों वाला वीडियो है। चिंताजनक बात तो यह है कि जिन व्यक्तियों ने वीडियो नहीं देखा उसे भी ऐसे वीडियो दिखाए जा रहे है। मर्यादाओं के कारण प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ऐसी गालियां का उल्लेख न हुआ हो, लेकिन सोशल मीडिया के माध्यम से देश के 140 करोड़ लोगों तक यह वीडियो पहुंच चुका है। सवाल उठता है कि आखिर यह कौन सा मीडिया है जो देश के प्रधानमंत्री के लिए बकी गालियों को लोगों तक पहुंचा रहा है? सवाल ऐसे मीडिया पर नियंत्रण का नहीं है, बल्कि मर्यादा और नैतिकता का है। कोई लड़की मां बहन की गालियां बकने और फिर उस लड़की का वीडियो देशभर में वायरल हो तो यह हमारी सनातन संस्कृति के विरुद्ध भी है। सनातन संस्कृति में तो लड़की को देवी का स्वरूप माना गया है। नवरात्र में तो कन्या पूजन की परंपरा है। सनातन धर्म को मानने वाले नवरात्र में कन्याओं की पूजा करते हैं और उन्हें देवी का स्वरूप मानकर आशीर्वाद लेते है। सवाल उठता है कि कॉकरोच पार्टी के प्रदर्शन में शामिल जिन लड़कियों ने पीएम मोदी को गालियां दी उन्हें सनातन संस्कृति में क्या माना जाए? भले ही देश विरोधी विचारधारा वाले लोग ऐसी गालियों को विचारों की स्वतंत्रता माने, लेकिन भारत की सनातन संस्कृति में गालियां बकने वाली लड़कियों का कोई स्थान नहीं है। सवाल यह भी है कि क्या कॉकरोच पार्टी की समर्थक कांग्रेस के नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव गालियां बकने वाली लड़कियों और वीडियो को प्रसारित करने वाले मीडिया की निंदा करेंगे? राहुल गांधी प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस की कार्यवाही को तो प्रस्तुत करते हैं, लेकिन उन तत्वों की निंदा नहीं करते जो देश के प्रधानमंत्री को गालियां दे रहे है। राहुल गांधी और अखिलेश यादव माने या नहीं, लेकिन देश के प्रधानमंत्री को गालियां देना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। सरकार को ऐसे मीडिया को नियंत्रित करने की जरूरत है जो देश विरोधी ताकतों के उद्देश्य को आगे बढ़ाता है। कॉकरोच पार्टी के नेताओं को भी उन तत्वों के खिलाफ कार्यवाही करनी चाहिए, जिन्होंने देश के प्रधानमंत्री को गालियां दी है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 27-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

मोदी जी! आखिर कब तक देश विरोधी तत्वों से भारत को बचाओगे? सवाल छात्र आंदोलन का नहीं, बल्कि हर ऐसे आंदोलन में देश विरोधी तत्वों की सक्रियता का है। नीट पेपर लीक पर इस्तीफा देना था तो 10 मई को ही दे देना चाहिए था। री-नीट के रिजल्ट के बाद आंदोलन का क्या तुक था? जसवंत दारा का सटीक और प्रभावी कार्टून। ================ 25 जुलाई को दोपहर बाद जब धर्मेन्द्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया, तभी से मीडिया में प्रसारित हो रहा है, यह छात्रों और देश के युवाओं की जीत है। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने घमंड के साथ कहा, हमने मोदी सरकार को झुका दिया। इसमें कोई दो राय नहीं कि छात्रों और युवाओं के देशव्यापी आंदोलन के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धर्मेन्द्र प्रधान से इस्तीफा लेना पड़ा। लेकिन सवाल उठता है कि क्या यह आंदोलन सिर्फ छात्रों और युवाओं का था? दिल्ली पुलिस की रिपोर्ट बताती है कि जंतर मंतर के आंदोलन में देश विरोधी तत्व भी शामिल हो गए थे। आदतन अपराधियों ने भी स्टूडेंट का चोला ओढ़ लिया था। यही वजह रही कि 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान जबरदस्त हिंसा हुई। दिल्ली की तरह यह आंदोलन देश भर में फैल गया और जगह जगह हिंसा होने लगी। सरकार भी मानती है कि इस हिंसा में युवाओं का कोई योगदान नहीं है, लेकिन आंदोलन में देश विरोधी तत्वों की सक्रियता से आंदोलन हिंसक हुआ। यह पहला मौका नहीं है, जब ऐसे आंदोलन में हिंसा हुई। इससे पहले सीएए (नागरिकता संशोधन कानून), किसान आंदोलन आदि के दौरान भी देश विरोधी तत्वों की सक्रियता देखने को मिली थी। किसान आंदोलन में तो सरकार को संसद में पारित कानूनों को वापस लेना पड़ा था। ताजा छात्र आंदोलन को देखते हुए धर्मेन्द्र प्रधान ने जो इस्तीफा दिया उसमें भी यह लिखा है कि राष्ट्र विरोधी ताकतें लाभ न उठाएं, देश की एकता बनी रहे और बच्चे अपनी पढ़ाई और करियर पर फोकस करें, इसलिए मैं इस्तीफा दे रहा हंू। धर्मेन्द्र प्रधान का यह कथन बताता है कि छात्र आंदोलन के नाम पर देश के हालात बिगाड़ने की साजिश हो रही थी। इसलिए सवाल उठता है कि आखिर देश विरोधी ताकतों से भारत को कब तक बचाया जाएगा। हर बार देश विरोधी ताकतें ज्यादा शक्ति के साथ भारत पर हमला करती हैं। यह कहा जा सकता है कि भारत में देश विरोधी ताकतें लगातार मजबूत हो रही है। ऐसी ताकतें सिर्फ मौके का इंतजार करती है। ऐसे आंदोलनों में जिस तरह पीएम मोदी को गालियां दी जाती है उससे भी जाहिर है कि देश विरोधी ताकतें अपने मंसूबों में मोदी को सबसे बड़ा बाधक मानती है। यानी जब तक मोदी की सत्ता रहेगी, तब तक देश विरोधी ताकतों को भारत को तोडऩे का अवसर नहीं मिलेगा। यही वजह है कि ऐसे आंदोलनों में सीधे मोदी को ही टारगेट किया जाता है। धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा करवाकर पीएम मोदी ने सिर्फ अराजकता के माहौल को टाला है। देश में राष्ट्रविरोधी ताकतें कभी भी हालातों को बिगाड़ सकती है। यदि धर्मेन्द्र प्रधान को नीट पेपर लीक पर इस्तीफा देना था तो 10 मई को ही दे देना चाहिए था। नीट यूजी की परीक्षा 3 मई 2026 को हुई थी। परीक्षा होने के साथ ही पेपर लीक की खबरें आ गई थी, लेकिन तब प्रधान ने इस्तीफा नहीं दिा। प्रधान के शिक्षा मंत्री रहते हुए ही 21 जून को दुबारा से परीक्षा हुई और 16 जुलाई को परिणाम भी घोषित कर दिया गया। यानी कॉकरोच जनता पार्टी ने जुलाई माह में जो आंदोलन शुरू किया उसमें नीट यूजी पेपर लीक का तो कोई मुद्दा नहीं था। विपक्ष के नेता अब भले ही धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे का श्रेय ले, लेकिन मई में पेपर लीक के समय कोई भी राजनीतिक दल सरकार के खिलाफ आंदोलन को खड़ा नहीं कर सका। जुलाई में आंदोलन तब शुरू हुआ, जब कॉकरोच पार्टी के संस्थापक दीपके अमेरिका से भारत आए। यानी विदेश से आकर एक व्यक्ति ने देशभर में आंदोलन को खड़ा किया। जिस तरह से नीट पेपर लीक पर अब आंदोलन किया गया उसकी जांच होगी तो देश विरोधी ताकतों के चेहरे पर से नकाब भी उतर जाएगी। संसद में चर्चा हो: नीट पेपर लीक और कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन पर संसद में चर्चा होनी चाहिए। ताकि देशवासियों को आंदोलन की हकीकत का पता चल सके। अच्छा हो कि इस चर्चा में विपक्ष भी भाग लें। सरकार की ओर से सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली 2024 के कानून में संशोधन का प्रस्ताव रखा जाएगा। इस संशोधित प्रस्ताव में ही आंदोलन पर चर्चा होनी चाहिए। दारा का कार्टून: शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा और छात्रों के आंदोलन में देश विरोधी ताकतों की भूमिका को लेकर कार्टूनिस्ट जसवंत दारा ने सटीक और प्रभावी कार्टून बनाया है। इस कार्टून को मेरे फेसबुक पेज www.facebook.com/SPMittalblog पर देखा जा सकता है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 26-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

भारत में सही मायने में लोकतंत्र है, इसलिए कीटों की श्रेणी वाले कॉकरोचों (दीमक) से भी सरकार को वार्ता करनी पड़ रही है। यह दुखद है कि राजनीतिक स्वार्थों के खातिर विपक्ष भी कॉकरोच बन गया है। भारत के युवाओं को स्वयं को कॉकरोच नहीं बनने देना चाहिए। ================ जीव विज्ञान में कॉकरोच को तिलचट्टा भी कहा गया है। वैज्ञानिकों के अनुसार विश्व में तिलचट्टा प्रजातियों की 4600 किस्म है। इनमें से 30 प्रजातियां मानव बसेरों में पाई जाती है। कॉकरोच यानी तिलचट्टा की श्रेणी में दीमक भी शामिल है। दीमक से होने वाले नुकसान के बारे में हर इंसान अच्छी तरह जनता है। जिस घर में एक बार दीमक लग जाए उस घर को सुरक्षित रखना मुश्किल हो जाता है। कई घरों में तो दीमक को मारने के लिए हर वर्ष जहरीली दवाई का छिड़काव करना पड़ता है। कॉकरोच और दीमक इतनी घातक होने के बाद भी विदेशी मानसिकता वाले कुछ भारतीय युवकां ने अपने राजनीतिक दल का नाम कॉकरोच जनता पार्टी रख लिया है। भारत के लिए यह चिंताजनक बात है कि कॉकरोच की मानसिकता वाले युवकों के बहकावे में देश के अनेक युवा भी आ गए है। चूंकि भारत में सही मायने में लोकतंत्र है, इसलिए सरकार को कॉकरोचों से भी वार्ता करनी पड़ रही है। इसे दुखद ही कहा जाएगा कि राजनीतिक स्वार्थों की खातिर विपक्ष भी कॉकरोच बन गया है। बड़ी अजीब बात है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में कॉकरोच पार्टी पेपर लीक के मुद्दे पर आंदोलन कर रही है। वह भी तब जब लीक हुआ नीट का पेपर दोबारा से शांतिपूर्ण तरीके से हो गया है और परिणाम घोषित होने के बाद सफल अभ्यर्थी देशभर के मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश की तैयारियां कर रहे हैं। यानी नीट का जो मुद्दा समाप्त हो गया उसे कॉकरोच की मानसिकता वाले कुछ युवा अब उठा रहे हैं। सब जानते हैं कि कॉकरोच पार्टी का संस्थापक अमेरिका में रह रहा भारतीय मूल का अभिजीत दीपके है। अमेरिका में समय समय पर भारत विरोधी गतिविधियां संचालित होती है। जग जाहिर है कि अभिजीत दीपके को भी अमेरिकी भारत विरोधी संस्थाओं का सहयोग है, लेकिन इसके बाद भी भारत में कॉकरोच पार्टी ने आंदोलन शुरू कर दिया। गंभीर बात तो यह है कि इस पार्टी के प्रतिनिधि सरकार से आदेशात्मक भाषा में वार्ता कर रहे हैं। 24 जुलाई को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र प्रसाद से जो वार्ता हुई उसमें दो कॉकरोच सौरभ दास और आशुतोष रांका ने आदेश दिया कि सरकार सबसे पहले धर्मेन्द्र प्रधान से शिक्षा मंत्री के पद से हटाए। प्रधान को मंत्री पद से हटाने की मांग विपक्षी दल लंबे समय से कर रहे हैं, लेकिन विपक्ष के दबाव के बाद भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधान को शिक्षा मंत्री के पद से नहीं हटाया। सवाल उठता है कि क्या कुछ कॉकरोचों की मांग पर प्रधान को शिक्षा मंत्री के पद से हटा दिया जाएगा? असल में नीट पेपर लीक तो बहाना है। असल मकसद धर्मेन्द्र प्रधान की आड़ में भारत की नई शिक्षा नीति को कमजोर करना है। प्रधान के शिक्षा मंत्री रहते हुए ही नई नीति को प्रभावी तरीके से लागू किया गया है। जो इतिहास भारत को कमजोर दिखता था, उस इतिहास में भी प्रधान के शिक्षा मंत्री रहते ऐतिहासिक बदलाव किए गए। भारत के स्व: को पुनर्जागरण करने में प्रधान की महत्वपूर्ण भूमिका है। विदेशी मानसिकता वाले कॉकरोच नहीं चाहते कि भारत में स्व: को पुनर्जीवित किया जाए। युवा बचे: भारत के युवाओं को कॉकरोच मानसिकता से बचना चाहिए। भारत के युवाओं को यह समझना चाहिए कि मौजूदा समय में युद्ध की विभीषिका से दुनिया भर के देश परेशान है। इतने बुरे दौर में भी भारत मजबूती के साथ खड़ा है। ऐसे में युवाओं को ऐसा कोई कृत्य नहीं करना चाहिए जिससे देश कमजोर हो। युवाओं को लेकर पीएम मोदी कितने संवेदनशील है, इसका ताजा उदाहरण 23 जुलाई की रात 12 बजे वीडियो संदेश जारी करना पड़ा। युवाओं को प्रधानमंत्री के इस वीडियो संदेश के सार को समझना चाहिए। पीएम मोदी की नीतियों की वजह से ही भारत के युवाओं को विदेशों में रोजगार के अच्छे अवसर मिले हैं, वहीं भारत में भी स्टार्ट एप के माध्यम से लाखों युवाओं को रोजगार मिला है। आज लाखों युवक वर्क फार्म होम सिस्टम से घर बैठे प्रतिमाह लाखों रुपए का वेतन ले रहे हैं। S.P.MITTAL BLOGGER ( 25-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

अशोक गहलोत और गोविंद सिंह डोटासरा की वजह से पेपर लीक पर पोल खुल जाएगी, इसलिए कांग्रेस संसद में चर्चा नहीं होने दे रही। राजस्थान में रीट का पेपर लीक होने पर डोटासरा ने कहा था कि शिक्षा मंत्री इस्तीफा क्यों दें? ================ नीट पेपर लीक के मुद्दे को लेकर कांग्रेस के नेतृत्व वाला विपक्ष 20 जुलाई से संसद में हंगामा कर रहा है। सरकार की ओर से बार बार आग्रह किया जा रहा है कि पेपर लीक पर चर्चा के लिए तैयार है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राजस्थान के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने भी कहा है कि विपक्ष के नेता जितने समय के लिए चाहे उतने समय तक पेपर लीक पर चर्चा करवाने को तैयार है। लेकिन इसके बाद भी संसद के दोनों सदनों में पेपर लीक पर चर्चा नहीं हो रही है। असल में कांग्रेस को पता है कि यदि पेपर लीक पर चर्चा हुई तो राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा की वजह से पोल खुल जाएगी। कांग्रेस ने खासकर राहुल गांधी ने पेपर लीक को लेकर जो मांगे सरकार के समक्ष रखी है, उनकी हवा चर्चा के दौरान निकल जाएगी। असल में राजस्थान में अशोक गहलोत के मुख्यमंत्री रहते हुए वर्ष 2018 से 2023 के बीच 19 परीक्षाओं के पेपर आउट हुए। बार बार पेपर लीक की घटनाओं पर गहलोत ने कहा था कि पेपर लीक को रोकना अकेले किसी सरकार के बस में नहीं है, क्योंकि इसमें संगठित गिरोह शामिल है। तब गहलोत ने इसे देशव्यापी समस्या बताया था। पेपर लीक पर गहलोत ने जो कुछ कहा उसे भाजपा के सांसद संसद में चर्चा के दौरान बताएंगे और जब गहलोत के कथन एक एक कर बताए जाएंगे तो कांग्रेस की मौजूदा मांगों की हवा निकल जाएगी। कांग्रेस अभी नीट पेपर लीक पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा भी मांग रही है। लेकिन राजस्थान में गोविंद सिंह डोटासरा जब कांग्रेस सरकार में शिक्षा मंत्री थे, तब शिक्षक पात्रता परीक्षा रीट का पेपर लीक हुआ। तब 20 लाख से ज्यादा युवाओं को दोबारा से परीक्षा देनी पड़ी थी। तब शिक्षा मंत्री के नाते डोटासरा से इस्तीफे की मांग की गई, लेकिन तब डोटासरा ने कहा कि रीट का पेपर लीक होने पर शिक्षा मंत्री इस्तीफा क्यों दे? परीक्षा करवाने की जिम्मेदारी राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की है। यानी तब कांग्रेस ही शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को खारिज कर चुकी है। ऐसे में सवाल उठता है कि आज नीट पेपर लीक पर कांग्रेस किस मुंह से शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांग रही है? संसद में चर्चा के दौरान भाजपा के सांसद डोटासरा के कथन का भी उल्लेख करेंगे। इतना ही नहीं संसद में चर्चा के दौरान कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट के बयानों को भी पढ़ा जाएगा। पायलट, गहलोत सरकार में डिप्टी सीएम थे और तब उन्होंने पेपर लीक पर अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा किया था। पायलट ने राजस्थान लोक सेवा आयोग में सीएम गहलोत द्वारा की गई सदस्यों की नियुक्ति पर भी ऐतराज जताया था। इतना ही नहीं अपनी ही सरकार के खिलाफ पायलट ने अजमेर से जयपुर तक पद यात्रा भी निकाली। संसद को यह भी बताया जाएगा कि कि गहलोत द्वारा आयोग में नियुक्त सदस्य बाबूलाल कटारा तो स्वयं ही परीक्षा के प्रश्न पत्रों को बेचने का काम कर रहा था। कटारा अभी जेल में है तथा गहलोत द्वारा नियुक्त दो महिला सदस्य श्रीमती संगीता आर्य और श्रीमती मंजू शर्मा आरोपों के बाद इस्तीफा दे चुकी है। संसद को यह भी बताया जाएगा कि आयोग में एक सदस्य की नियुक्ति के बाद अशोक गहलोत को सार्वजनिक तौर पर माफी मांगनी पड़ी थी। तब गहलोत ने कहा था कि मुझे इस सदस्य की पृष्ठभूमि पता होती तो मैं नियुक्ति नहीं करता। कांग्रेस को पता है कि पेपर लीक पर चर्चा हुई तो गहलोत और डोटासरा की वजह से पोल खुल जाएगी। S.P.MITTAL BLOGGER ( 25-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

कांग्रेस के बंद और भाजपा के सफाई अभियान से क्या अजमेर के आनासागर के हालात सुधर जाएंगे? ================ अजमेर में कांग्रेस के नेता गौरवान्वित है कि उन्होंने आनासागर की दुर्दशा के मुद्दे पर 23 जुलाई को अजमेर बंद करवा दिया। वहीं भाजपा के नेता इसलिए गौरवान्वित है कि उन्होंने 22 से 24 जुलाई तक तीन दिवसीय सफाई अभियान चलाकर आनासागर को स्वच्छ बना दिया। यानी दोनों ही राजनीतिक दलों ने स्वयं को आनासागर का सबसे बड़ा हमदर्द बताया। लेकिन सवाल उता है कि क्या अजमेर बंद और सफाई अभियान के बाद आनासागर के हालात सुधर जाएंगे? आनासागर की दुर्दशा के लिए भाजपा और कांग्रेस एक दूसरे को जिम्मेदार ठहराती है। यह तब है जब स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में आनासागर के संरक्षण पर करीब 50 करोड़ रुपए खर्च हो गया। इतनी राशि खर्च होने के बाद भी आनासागर अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। जिस आनासागर की भराव क्षमता 16 फीट थी, उसे घटाकर 13 फीट कर दिया गया। और बरसात से पूर्व आनासागर का जलस्तर प्रतिवर्ष 10 फीट कर दिया जाता है। प्रतिवर्ष आनासागर में मछलियां मरती है। गत तीन वर्षों से मछली निकालने का ठेका भी नहीं दिया जा रहा। लाख कोशिश के बाद भी कुछ नालों का गंदा पानी आनासागर में गिर रहा है, जिसकी वजह से चारों तरफ दुर्गंध का माहौल है। अजमेर की जनता यह सवाल कर रही है कि आखिर आनासागर के हालात कब सुधरेंगे। S.P.MITTAL BLOGGER ( 25-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511