S.P. MITTAL Blog

अनिल मित्तल को कांग्रेस में शामिल कर रघु शर्मा ने केकड़ी में अपनी जीत की नींव रखी। भाजपा कार्यकर्ताओं की भीड़ और उत्साह को देखते हुए देवनानी भावुक हुए। शेखावत ने वार्ड पार्षद के पद के दावेदारों को अनुशासन का पाठ पढ़ाया। अजमेर के वार्ड 4 में हेमा गहलोत का मुकाबला मोनिका जैन से। ================= अजमेर जिले के उपखंड केकड़ी नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष और भाजपा के कद्दावर नेता अनिल मित्तल ने 25 अगस्त को कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली। मित्तल के कांग्रेस में आने के साथ ही पूर्व कैबिनेट मंत्री रघु शर्मा ने केकड़ी में अपनी जीत की नींव रख ली। रघु गत बार 7 हजार मतों से विधानसभा चुनाव हारे थे, लेकिन अब 2 वर्ष बाद होने वाले चुनाव की तैयारी रघु ने अभी से ही कर ली है। 25 अगस्त को जब रघु शर्मा की उपस्थिति में अनिल मित्तल ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की तो रघु ने कहा,मित्तल का प्रभाव शहरी क्षेत्र में ही नहीं बल्कि केकड़ी के ग्रामीण क्षेत्रों में भी है। मित्तल सामाजिक गतिविधियों से भी जुड़े हैं। इसलिए संपूर्ण केकड़ी क्षेत्र में प्रभाव है। उन्होंने माना कि मित्तल के साथ राजनीतिक मतभेद रहे, लेकिन मित्तल ने कभी भी मुझ पर व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं की। रघु ने कहा कि जब अनिल मित्तल जैसे नेता का भाजपा में सम्मान नहीं है, तो भाजपा के हालातों का अंदाजा लगाया जा सकता है। रघु ने कहा कि मित्तल के कांग्रेस में शामिल होने से केकड़ी क्षेत्र के चारों शहरी निकायों और ग्रामीण क्षेत्रों में कांग्रेस मजबूत होगी। मित्तल के शामिल होने के बाद केकड़ी नगर पालिका में कांग्रेस का बोर्ड बनकर रहेगा। अभी भी कांग्रेस का ही बोर्ड है। गत विधानसभा के चुनाव में भी केकड़ी शहर से कांग्रेस की ीत हुई थी। कांग्रेस में शामिल होने पर मित्तल ने रघु शर्मा का आभार जताया। उन्होंने कहा कि रघु शर्मा के विधायक रहते हुए ही गत कांग्रेस के शासन में केकड़ी को जिला बनाया गया था। केकड़ी में कलेक्टर और एसपी बैठने भी लगे थे। जिला बनने पर केकड़ी का विकास तेजी से हो रहा था। तत्कालीन जिला कलेक्टर श्वेता चौहान ने औद्योगिक क्षेत्र को स्वीकृत भी दे दी थी, लेकिन भाजपा के शासन में केकड़ी के जिले के दर्जे को समाप्त कर दिया गया। इससे केकड़ी में निराशा का माहौल है। मित्तल ने भाजपा के विधायक शत्रुघ्न गौतम का नाम लिए बगैर कहा कि मेरे लिए अब भाजपा में काम करना मुश्किल हो रहा था। अब मैं रघु शर्मा को पुनः विधायक बनवाने के लिए मेहनत करुंगा। रघु शर्मा के नेतृत्व में ही केकड़ी के साथ साथ सरवाड़, सावर और टांटोटी नगर पालिका में कांग्रेस के बोर्ड बनाए जाएंगे। रघु शर्मा जब विधायक बनेंगे तो केकड़ी को फिर से जिले का दर्जा मिल जाएगा। मित्तल के कांग्रेस में शामिल होने के समारोह में केकड़ी कांग्रेस के सभी बड़े नेता शामिल रहे। हेमंत जैन,समरवीर सिंह, शैलेंद्र सिंह शेखावत, श्यामलाल बैरवा, कमल साहू, सीमा चौधरी, कन्हैयालाल माली, हाजी साहब के साथ साथ रघु शर्मा के पुत्र सागर शर्मा ने भी मित्तल का माला पहनाकर स्वागत किया। समारोह में बड़ी संख्या में कांग्रेस के कार्यकर्ता मौजूद रहे। देवनानी भावुक हुए: अजमेर नगर निगम के 80 वार्डों के लिए 11 सितंबर को मतदान होना है। अजमेर उत्तर क्षेत्र के 38 वार्डों में भाजपा के दावेदारों का एक सम्मेलन 25 अगस्त को विजय लक्ष्मी पार्क में हुआ। इसमें क्षेत्रीय भाजपा विधायक और विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी भी उपस्थित रहे। देवनानी ने कहा कि इस समय में संवैधानिक पद पर हूं और मेरी अपनी सीमाएं हैं, लेकिन कार्यकर्ताओं की भीड़ और उत्साह को देखते हुए मैं स्वयं को रोक नहीं पा रहा। भरे हुए गले से देवनानी ने कहा कि मेरे कार्यकर्ताओं की वजह से ही मैं गत पांच बार से इस क्षेत्र से चुनाव जीत रहा हं। विपरीत परिस्थितियों में भी इन्हीं कार्यकर्ताओं ने मुझे जितवाया। मैं क्षेत्र के भाजपा कार्यकर्ताओं का ऋणी हूं। देवनानी ने कहा कि एक वार्ड से अनेक दावेदार हैं, जिन्हें टिकट न मिले वे निराश न हो। आने वाले दिनों में अधिकांश कार्यकर्ताओं को निगम में मनोनीत पार्षद और अन्य सरकारी संस्थाओं में सदस्य के तौर पर नियुक्ति मिलेगी। मैं स्वयं एक एक कार्यकर्ता की मेहनत को देख रहा हूं। देवनानी ने कहा कि भाजपा की ओर से तीसरी आंख भी लगी हुई है, जो हर कार्यकर्ता की गतिविधि पर निगरानी कर रहे हैं। देवनानी ने माना कि इन दिनों भाजपा के कुछ नेता पार्टी विरोधी काम कर रहे हे। पूर्व मेयर धर्मेन्द्र गहलोत का नाम लिए बगैर देवनानी ने कहा, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस नीति है। किसी भी भ्रष्टाचारी को बक्शा नहीं जाएगा। मालूम हो कि धर्मेन्द्र गहलोत के मेयर के कार्यकाल में 13 कमर्शियल नक्शों के भ्रष्टाचार के प्रकरण में राज्य सरकार ने गत 18 अगस्त को अभियोजन की स्वीकृति दी है। गहलोत ने सरकार के इस कदम के लिए देवनानी को जिम्मेदार ठहराते हुए भाजपा से इस्तीफा दे दिया था। कहा जा रहा है कि अब राजनीतिक दृष्टि से देवनानी को मात देने के लिए धर्मेन्द्र गहलोत चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवारों को खड़ा करेंगे। गहलोत ने कहा भी है कि उनका भाजपा से कोई विवाद नहीं है, लेकिन वे देवनानी को सबक जरूर सिखाएंगे। अनुशासन का पाठ: 25 अगस्त को ही अजमेर दक्षिण क्षेत्र के भाजपा के दावेदारों का एक समारोह मनुहार गार्डन में हुआ। भाजपा विधायक अनिता भदेल ने कहा, हमें फिर से नगर निगम में भाजपा का बोर्ड बनवाना है। वहीं दावेदारों को भाजपा के वरिष्ठ नेता सुरेंद्र सिंह शेखावत ने अनुशासन का पाठ पढ़ाया। शेखावत ने कहा कि दक्षिण क्षेत्र के 42 वार्डों में पार्षद पद का टिकट मांगने के लिए लंबी कतार है। पार्टी की ओर से एक ही व्यक्ति को टिकट मिलेगा। जिन्हें टिकट न मिले, वे पार्टी के अनुशासन में रहकर अधिकृत उम्मीदवार को जितवाने का काम करे। शेखावत ने कार्यकर्ताओं से हाथ खड़े करवा कर संकल्प कराया कि पार्टी जिसे उम्मीदवार बनाएगी, उसे जितवाएंगे। शेखावत ने पूछा कि कोई दावेदार बगावत तो नहीं करेगा। मालूम हो कि शेखावत ने पूर्व में मेयर पद का चुनाव कांग्रेस के समर्थन से लड़ा था। इस बार नगर निगम के मेयर का पद सामान्य वर्ग की महिला के लिए है। शेखावत का प्रयास है कि उनकी पत्नी को मेय बनवाया जाए। हेमा का मुकाबला मोनिका से: अजमेर नगर निगम के 80 वार्डों में से सबसे दिलचस्प मुकाबला उत्तर क्षेत्र में आने वाले वार्ड संख्या 4 में होगा। इसी वार्ड के मतदाता क्षेत्रीय भाजपा विधायक और विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी भी है। यानी यह वार्ड देवनानी का है। प्रशासन द्वारा निकाली गई लॉटरी में यह वार्ड ओबीसी वर्ग की महिला के लिए आरक्षित हुआ है। यही वजह है कि भाजपा के बागी पूर्व मेयर धर्मेन्द्र गहलोत ने अपनी पत्नी हेमा गहलोत को इस वार्ड से चुनाव लड़ने की योजना बनाई है। इसके लिए गहलोत ने वार्ड में आने वाली महावीर कॉलोनी, रामनगर संत कंवरराम कॉलोनी आदि में जनसंपर्क भी शुरू कर दिया है। वही भाजपा ने इस वार्ड से सामाजिक कार्यकर्ता दीपक जैन की पत्नी मोनिका जैन को उम्मीदवार बनाने की रणनीति बना ली है। देवनानी की उपस्थिति में ही 25 अगस्त को दीपक जैन और उनकी पत्नी मोनिका को भाजपा की सदस्यता ग्रहण करवाई गई। जैन दम्पत्ति ने कहा कि देवनानी जो निर्देश देंगे उसका पालन किया जाएगा। मालूम हो कि मोनिका ने गत बार कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर इसी वार्ड से चुनाव लड़ा था। तब इस वार्ड से भाजपा के रमेश सोनी की जीत हुई थी। मोनिका ओबीसी वर्ग में इसलिए वे ओबीसी वर्ग की महिला के लिए आरक्षित इस वार्ड से चुनाव लड़ने के लिए पात्र है। महावीर कॉलोनी में अधिकांश परिवार जैन धर्म को मानने वाले है। दीपक जैन का जैन समुदाय में खास प्रभाव है। वही संत कंवरराम कॉलोनी में सभी परिवार सिंधी समुदाय के है, जो देवनानी को ही अपना नेता मानते हैं। S.P.MITTAL BLOGGER ( 26-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

पत्नी यदि सास-ससुर की सेवा न करे और बिना बताए पीहर चली जाए तो यह उसका अधिकार है। पत्नी से ससुराल में सेवा की अपेक्षा क्यों की जाती है? पति के माता-पिता की सेवा का दायित्व बहु का नहीं, पुत्र-पुत्री का है। कर्नाटक हाईकोर्ट का आदेश भारत की परिवार व्यवस्था में सीधा दखल। ================= कर्नाटक हाईकोर्ट के न्यायाधीश चिलकुर सुमालया का एक आदेश भारत की परिवार व्यवस्था में सीधा दखल माना जा रहा है। न्यायाधीश सुमालया के समक्ष एक युवक ने याचिका दायर की कि वह अपनी पत्नी को भरण पोषण की राशि नहीं दे सकता क्योंकि उसकी पत्नी उसके माता पिता की सेवा नहीं करती और बिना बताए पीहर चली जाती है। चूंकि पत्नी ससुराल में अपने कर्तव्यों का निर्वहन नहीं कर रही है, इसलिए उसे अलग होने का भरण पोषण राशि का अधिकार नहीं है। इस याचिका पर न्यायाधीश सुमाया ने कहा कि पत्नी से ससुराल में यह अपेक्षा क्यों की जाती है कि वह सास-ससुर की सेवा करें? पत्नी को अपने पीहर जाने के लिए पति या ससुराल के किसी अन्य सदस्य से अनुमति लेने की जरूरत भी नहीं है। पत्नी जब चाहे तब अपने पीहर जा सकती है। जस्टिस सुमायला ने कहा कि माता पिता की सेवा का दायित्व पुत्र-पुत्री का है। सेवा के लिए बहु से अपेक्षा नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विवाह के बाद ससुराल में आने वाली युवती को अपने निर्णय लेने का स्वतंत्र अधिकार है। पत्नी का यह मतलब नहीं है कि वह किसी के नियंत्रण में काम करे। न्यायाधीश सुमालया ने अपने आदेश में पीहर में रह रही पत्नी को भरण पोषण की राशि देने का आदेश भी दिया। न्यायाधीश सुमालया का आदेश अपनी जगह है। हो सकता है कि उन्होंने महिला की स्वतंत्रता के अधिकारों को देखते हुए आदेश दिया हो, लेकिन कोर्ट का यह आदेश भारत की परिवार व्यवस्था में सीधा दखल हैै। भले ही कोई कानून न माने लेकिन जो भारतीय परिवार व्यवस्था है उसमें ससुराल में सास-ससुर ही माता पिता की भूमिका में होते हैं। यह सही है कि एक युवती 20-15 वर्ष अपने माता पिता के साथ रहने के बाद दूसरे परिवार में बहुत की भूमिका में आ जाती है, इसलिए उसे भी ससुराल में मान सम्मान मिलना ही चाहिए। वैसे भी अब परिवारों की सोच में बदलाव हो रहा है। पीहर जाने के लिए कोई बहुत वाकई अनुमति नहीं लेती है। सास-ससुर को तो सिर्फ यह बताया जाता है कि बहु कितने दिन के लिए पीहर जा रही है। इसके साथ ही अधिकांश सास ससुर या तो अपने बैअे और बहुत से अलग रह रहे हैं या फिर सेवा की अपेक्षा नहीं रखते। हर सास-ससुर यही चाहता है कि उसका बेटा और बहुत स्वतंत्रता के साथ आराम से रहे। कोई भी सास-ससुर अपनी बहुत से सेवा की अपेक्षा नहीं रखता। जब बेटे में ही सेवाभाव नहीं है तो फिर बहुत से अपेक्षा कैसे की जा सकती है। जस्टिस सुमालया माने या नहीं, लेकिन अब परिवार व्यवस्था में भी बहुत बदलाव आ गया है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 25-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

नगरीय चुनाव में शपथ पत्र की शर्त से उम्मीदवारों के नामांकन रद्द होने की आशंका। जब बताए अनुसार बकाया राशि जमा करवाई जा रही है तो शपथ पत्र क्यों? निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह को ध्यान देने की जरुरत। ================= राजस्थान में शहरी निकायों के 10 हजार 245 वार्डों के पार्षद पद के चुनाव के लिए 27 अगस्त से नामांकन शुरू हो रहा है। यही वजह है कि इन दिनों नगर पालिका, नगर परिषद और नगर निगम के दफ्तरों में एनओसी लेने के लिए भीड़ लगी हुई है। निकाय के अधिकारी जो राशि बकाया बता रहे है उसे चुनाव लडऩे के इच्छुक व्यक्ति हाथों हाथ जमा करवा रहे हैं। यह राशि 300 वर्ग गज से अधिक भूखंड पर लगने वाले शुल्क की है। अधिकारियों द्वारा बताई गई बकाया राशि का भुगतान कर दिए जाने के बाद भी शहरी निकायों में पार्षद पद के दावेदारों से एक शपथ पत्र लिया जा रहा है। इस शपथ पत्र में एक शर्त यह भी है कि अब उस पर किसी भी प्रकार की बकाया राशि नहीं है। सवाल उठता है कि जब बकाया राशि जमा करवा दी गई है तो शपथ पत्र क्यों लिया जा रहा है? क्या निकायों के अधिकारियों को अपने रिकॉर्ड पर भरोसा नहीं है? यदि कोई राशि बकाया है तो फिर एनओसी क्यों दी जा रही है? एनओसी देने का मतलब यही है कि संबंधित व्यक्ति पर कोई राशि बकाया नहीं है। यदि राशि बकाया है और फिर भी एनओसी दी जा रही है तो यह त्रुटि निकायों के अधिकारियों की है। अब जब बकाया राशि जमा कराने के बाद भी शपथ पत्र लिया जा रहा है तो यह आशंका हो रही है कि किसी भी उम्मीदवार का नामांकन रद्द किया जा सकता है। यदि निकाय के अधिकारी किन्हीं कारणों से बकाया राशि नहीं बताते और एनओसी जारी कर देते हैं और जांच में अब बकाया राशि का पता चलता है तो निर्वाचन अधिकारी नामांकन को रद्द कर देगा। यानी निकाय अधिकारियों की गलती का खामियाजा उम्मीदवार को भुगतना होगा। इस मामले में राज्य के निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह को ध्यान देने की जरूरत है। यदि बेवजह कोई शपथ लिया जा रहा है तो उस पर निर्वाचन आयुक्त को न्यायपूर्ण कार्यवाही करनी चाहिए। S.P.MITTAL BLOGGER ( 25-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

विधायक शत्रुघ्न गौतम से तंग आकर केकड़ी के पूर्व पालिका अध्यक्ष अनिल मित्तल ने भाजपा छोड़ी। अब कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर पार्षद का चुनाव लड़ेंगे। ================= अजमेर जिले में अभी अजमेर नगर निगम के पूर्व मेयर धर्मेन्द्र गहलोत का भाजपा से इस्तीफा देने का मामला शांत भी नहीं हुआ था कि निकाय चुनाव के शोर के बीच जिले के सबसे बड़े उपखंड केकड़ी के नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष अनिल मित्तल ने भी 25 अगस्त को भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। 24 अगस्त को जब मित्तल के इस्तीफे की भनक लगी तो देहात जिला अध्यक्ष जीतमल प्रजापत और अन्य नेता मित्तल से मिलने पहुंचे। तब मित्तल ने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में क्षेत्रीय भाजपा विधायक शत्रुघ्न गौतम ने किस प्रकार का व्यवहार उनके साथ किया। वे गत 36 वर्षों से भाजपा में सक्रिय हैं। लेकिन ढाई वर्षो से विधायक गौतम ने भाजपा छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया। मित्तल की नाराजगी को दूर करने के लिए चुनाव में संभाग प्रभारी और राज्य वित्तीय आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी ने भी फोन पर बात की। लेकिन भाजपा के नेता मित्तल की नाराजगी को दूर नहीं कर सके। मित्तल अब कांग्रेस के उम्मीदवार के तौर पर पार्षद का चुनाव लड़ेंगे। कांग्रेस में शामिल होने के लिए मित्तल की वार्ता केकड़ी के पूर्व विधायक और मंत्री रहे रघु शर्मा से हो गई है। मित्तल ने अपने इस्तीफे में बताया है कि उनकी राजनीति में शुरुआत विद्यार्थी परिषद से हुई थी। 1995 में वे विद्यार्थी परिषद के उम्मीदवार के तौर पर ही राजकीय महाविद्यालय के अध्यक्ष भी बने। बाद में युवा मोर्चे से लेकर भाजपा संगठन तक में विभिन्न पदों पर रहे। वर्ष 2015 से 2020 तक मित्तल केकड़ी नगर पालिका के अध्यक्ष भी रहे। उन्होंने हमेशा भाजपा में समर्पण भाव से काम किया। मित्तल ने अपने इस्तीफे में भाजपा का आभार जताते हुए आगे भाजपा के साथ काम करने में असमर्थता जताई। केकड़ी की राजनीति में बदलाव: मित्तल के भाजपा छोड़ने के बाद ही केकड़ी की राजनीति में बड़ा बदलाव हो गया। अब तक मित्तल केकड़ी में भाजपा के प्रमुख स्तंभ थे। लेकिन अब वे कांग्रेस में शामिल हो रहे हैं। इसमें कोई दो राय नहीं कि केकड़ी में मित्तल का मान सम्मान है। अग्रवालों की चौरासी गांवों की संस्था के अध्यक्ष भी मौजूदा समय में मित्तल ही है। चूंकि मित्तल ने जैन धर्म स्वीकार कर रखा है, इसलिए जैन समाज में भी मित्तल की प्रतिष्ठा है। विधायक शत्रुघ्न गौतम भले ही न माने लेकिन मित्तल के भाजपा छोड़ने का असर नगर पालिका के चुनाव परिणाम पर पड़ेगा। मित्तल के भाजपा छोड़ने और कांग्रेस में शामिल होने से कांग्रेसियों में उत्साह है। पूर्व विधायक रघु शर्मा ने भी मित्तल का कांग्रेस में स्वागत किया है। इस्तीफे के बारे में और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9928021482 पर अनिल मित्तल से ली जा सकती है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 25-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे से किसी को भी मिलने नहीं दिया जा रहा। प्रतिपक्ष के नेता टीकाराम जूली के इस कथन में कितनी सच्चाई है? ================ राजस्थान विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता टीकाराम जूली का आरोप है कि इन दिनों भाजपा में जबरदस्त रोष है। मंत्री किरोड़ी लाल मीणा और संजय शर्मा अपनी ही सरकार पर आरोप लगा रहे हैं। वन राज्यमंत्री संजय शर्मा ने तो अलवर की जिला कलेक्टर श्रीमती अर्तिका शुक्ला पर लूट कर खाने का आरोप लगाया है। दोनों मंत्रियों के बयानों से प्रतीत होता है कि सरकार में भी असंतोष है। जूली ने कहा कि पूर्व सीएम और भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसुंधरा राजे से भी किसी को मिलने नहीं दिया जा रहा है। जूली का कहना है कि राजे के जयपुर के सिविल लाइन स्थित सरकारी आवास पर कड़ा पहरा है। सवाल उठता है कि जूली ने वसुंधरा राजे को लेकर जो बयान दिया है, उसमें कितनी सच्चाई है? क्या वाकई पूर्व सीएम को किसी से मिलने नहीं दिया जा रहा है? चौबीस घंटे गुजर जाने के बाद भी वसुंधरा राजे की ओर से जूली के बयान पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। इस से अटकलों का बाजार और गर्म हो गया है। मालूम हो कि हाल ही में राजे को भाजपा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। राजे लंबे समय से राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद पर आसीन हे। लेकिन उन्होंने कभी भी भाजपा की राष्ट्रीय राजनीति में सक्रियता नहीं दिखाई माना जा रहा है कि वसुंधरा राजे अपनी भूमिका से संतुष्ट नहीं है। हालांकि अभी तक राजे ने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर नहीं की है। अब प्रतिपक्ष के नेता जूली के बयान से राजे का मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। देखना होगा कि जूली के बयान पर वसुंधरा राजे क्या प्रतिक्रिया देती हैं। S.P.MITTAL BLOGGER ( 20-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

जिन शहरी निकायों में 11 सितंबर को मतदान होगा, उनके उम्मीदवारों को प्रचार के लिए दो दिन अधिक मिलेंगे। निर्वाचन आयोग हाईकोई की अवमानना के दायरे में नहीं। पंचायतीराज में आरक्षण की लॉटरी नहीं निकालने वाला सवाल राजस्थान सरकार से पूछा जाए-राजेश्वर सिंह आयुक्त। ================ राजस्थान में शहरी निकायों की 309 संस्थाओं के चुनाव 9 व 11 सितंबर को होंगे। राज्य के निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने 19 अगस्त को चुनाव की जो घोषणा की उसके अनुसार दो चरणों में होने वाले मतदान के नामांकन की प्रक्रिया 27 अगस्त से शुरू हो जाएगी। यानी वार्ड पार्षद का चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवार 27 अगस्त से नामांकन शुरू कर देंगे। प्रदेश में भले ही दो चरणों में चुनाव हो रहे हो, लेकिन नामांकन की प्रक्रिया को एक समान रखा गया है। ऐसे में जिन निकायों में 11 सितंबर को मतदान होगा उनके उम्मीदवारों को प्रचार के लिए दो दिन अधिक मिलेंगे। जबकि जिन निकायों में 9 सितंबर को मतदान होगा उनके उम्मीदवारों को प्रचार के लिए दो दिन कम मिलेंगे। आमतौर पर मतदान से दो दिन पहले चुनावी सभाओं जैसा प्रचार बंद हो जाता है। निर्वाचन आयोग के अनुसार पहले चरण के मतदान में पांच हजार 550 और दूसरे चरण के मतदान में 4 हजार 695 पार्षद चुने जाएंगे। कुल 10 हजार 245 पार्षदों का निर्वाचन होना है। 14 सितंबर को परिणाम आने के बाद निकाय प्रमुखों के पद के लिए नामांकन 15 और 16 सितंबर को होगा तथा 21 सिंतबर को मतदान और उसी दिन परिणाम घोषित होगा। आयोग अवमानना के दायरे में नहीं: राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने माना कि हाईकोर्ट ने 15 अगस्त तक शहरी निकाय और पंचायती राज संस्थाओं में आरक्षण की लॉटरी निकालने के आदेश दिए थे। लेकिन राज्य सरकार ने सिर्फ शहरी निकायों की लॉटरी ही निकाली है, इसलिए आयोग ने शहरी निकायों के चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। आयुक्त ने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं में आरक्षण की लॉटरी क्यों नहीं निकाली यह सवाल राज्य सरकार से पूछा जाना चाहिए, क्योंकि लॉटरी निकालने का काम राज्य सरकार का है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि लॉटरी नहीं निकलने पर हाई कोर्ट की अवमानना के दायरे में निर्वाचन आयोग नहीं आता है। आयोग तो चुनावों की घोषणा तभी कर सकता है, जब आरक्षण की रिपोर्ट आयोग को दी जाए। बगैर आरक्षण के आयोग चुनावों की घोषणा नहीं कर सकता। मालूम हो कि राज्य सरकार ने पंचायती राज चुनाव में आरक्षण की लॉटरी निकालने के लिए 17 अगस्त की तारीख निर्धारित की थी, लेकिन एक दिन पहले इस से एक माह के लिए टाल दिया गया। सरकार का कहना है कि अब 17 सितंबर को लॉटरी निकाल कर आरक्षण का निर्धारण किया जाएगा। सवाल उठता है कि हाईकोर्ट ने शहरी निकायों और पंचायती राज चुनाव के लिए 15 अगस्त तक आरक्षण का निर्धारण करने का आदेश दिया था, तब सरकार ने कोर्ट के आदेशों की पालना क्यों नहीं की। कहा जा रहा है कि अब हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की जाएगी। संभावित याचिका को ध्यान में रखते हुए निर्वाचन आयुक्त ने पहले ही सरकार पर जिम्मेदारी डाल दी है। आचार संहिता पर असमंजस: निर्वाचन आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि आचार संहिता उन्हीं क्षेत्रों में प्रभावी होगी, जहां शहरी निकायों के चुनाव होने हैं। यानी ग्राम पंचायतों वाले क्षेत्रों में आचार संहिता लागू नहीं है। यही वजह है कि आचार संहिता के क्षेत्र को लेकर असमंजस रहेगा। हाल ही में जो परिसीमन हुआ उसमें ग्राम पंचायतों की कुछ सीमा शहरी निकायों में शामिल हुई है, ऐसे में आचार संहिता को प्रभावी बनाना निर्वाचन विभाग के लिए भी परेशानी का सबब बनेगा। S.P.MITTAL BLOGGER ( 20-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

अजमेर विकास प्राधिकरण के जिस नवनिर्मित भवन का लोकार्पण केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने किया उस पर ठेकेदार ने ताला लगा दिया। बिना राजनीतिक संरक्षण के ऐसी हिमाकत नहीं हो सकती। यह कृत्य डबल इंजन की सरकार को धमकाने वाला है। ================ 16 अगस्त को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने राजस्थान के निंबाहेड़ा और अलवर से प्रदेश के 11 हजार 953 करोड़ कार्यों के लोकार्पण और शिलान्यास भी किए। अपने संबोधन में अमित शाह ने इन परियोजनाओं को डबल इंजन की उपलब्धि बताया। अमित शाह के साथ दोनों स्थानों पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी मौजूद रहे। केंद्रीय गृहमंत्री ने जिन योजनाओं का लोकार्पण किया उनमें अजमेर के करीब 68 करोड़ के कार्य भी शामिल रहे। लोकार्पण वाली सूची में अजमेर विकास प्राधिकरण का नवनिर्मित भवन भी है। इस भवन की लागत 25 करोड़ 98 लाख बताई जा रही है। चूंकि नए भवन का लोकार्पण 16 अगस्त को हो गया था, इसलिए उच्च स्तर पर निर्णय लिया गया कि मौजूदा पुराने भवन से नए भवन में शिफ्टिंग का काम 19 अगस्त से शुरू किया जाएगा। लेकिन 19 अगस्त को कुछ विभाग शिफ्ट होते इससे पहले ही भवन का निर्माण करने वाले ठेकेदार अरिहंत ने मुख्य द्वार पर ताला लगा दिया। ठेकेदार ने कहा कि उसका दो करोड़ रुपया बकाया है, जब तक बकाया भुगतान नहीं हो जाता तब तक मुख्य द्वार पर ताला लगा रहेगा। ठेकेदार का आरोप रहा कि उसने एक वर्ष पहले ही नया भवन प्राधिकरण को सौंप दिया, लेकिन इसके बाद भी भुगतान नहीं हो रहा। 19 अगस्त को जब कुछ अधिकारी जयपुर रोड स्थित नए भवन पर पहुंचे तो दोनों मुख्य द्वारों पर ताला लगा हुआ था। गंभीर बात तो यह है थी कि मौके पर सुरक्षा गार्ड भी नहीं था। ऐसी स्थिति में अधिकारियों को ताले तुड़वाने पड़े। नवनिर्मित भवन पर ठेकेदार द्वारा ताले लगाने की घटना से पूरे प्रशासन में हड़कंप मच गया है। राजनीतिक संरक्षण: आमतौर पर ठेकेदारों का बकाया रहता ही है। अजमेर विकास प्राधिकरण के मामले में बताया जा रहा है कि फाइनल बिल के मात्र 2 करोड़ रुपए बकाया है। इंजीनियरों का तर्क है कि फाइनल बिल की राशि इसलिए रोकी गई है ताकि शिफ्टिंग के बाद कोई खामी हो तो उसी ठेकेदार से दूर करवाया जाए। प्राधिकरण के अधिकारी भी ठेकेदार के ताला लगाने के कृत्य को गलत माना हैं। माना जा रहा है कि ठेकेदार को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है, इसलिए उसने नवनिर्मित भवन पर ताला लगाने जैसी हिमाकत की है। ठेकेदार का यह कृत्य डबल इंजन की सरकार को धमकाने वाला भी है। यदि ठेकेदार ही सरकारी भवनों पर ताला लगाने लगेंगे तो फिर व्यवस्था चौपट हो जाएगी। अजमेर प्राधिकरण का मामला इसलिए भी गंभीर है कि नवनिर्मित भवन का लोकार्पण केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने किया था। S.P.MITTAL BLOGGER ( 20-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

पवन अरोड़ा अब सच बेधड़क अखबार और न्यूज चैनल को चमकाएंगे। फर्स्ट इंडिया न्यूज ग्रुप से शानदार विदाई। राजस्थान के मीडिया क्षेत्र में बड़ा बदलाव। ============== आईएएस की स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के बाद राजस्थान में मीडिया क्षेत्र में कदम रखने वाले पवन अरोड़ा अब सच बेधड़क अखबार और न्यूज चैनल को चमकाने का काम करेंगे। 18 अगस्त को अरोड़ा ने सच बेधड़क ग्रुप के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक का पद ग्रहण कर लिया। इससे पहले अरोड़ा को फर्स्ट इंडिया न्यूज चैनल ग्रुप की ओर से शानदार विदाई दी गई। इस ग्रुप के निदेशक वीरेंद्र चौधरी ने कहा कि गत तीन वर्षों में पवन अरोड़ा ने ग्रुप के सीईओ और मैनेजिंग एडिटर के पद पर रहते हुए ग्रुप को लोकप्रियता दिलवाने में काई कसर नहीं छोड़ी। वे भारी मन से पवन अरोड़ा को विदा कर रहे है, लेकिन साथ ही अरोड़ा के उज्ज्वल भविष्य की कामना कर रहे हैं। पवन अरोड़ा जहां भी रहेंगे, वहां उन्हें सफलता मिलेगा। अपने विदाई समारोह में अरोड़ा ने भी स्वीकार किया कि फर्स्ट इंडिया ग्रुप में उन्हें अपार स्नेह और सम्मान मिला। टीम भावना के कारण ही वे फर्स्ट इंडिया न्यूज चैनल को सर्वश्रेष्ठ बना सके। फर्स्ट इंडिया न्यूज चैनल को सर्वश्रेष्ठ बना सके। फर्स्ट इंडिया ग्रुप से विदाई के तुरंत बाद पवन अरोड़ा ने सच बेधड़क ग्रुप के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक का पद संभाल लिया। पद संभालते ही सच बेधड़क समूह से जुड़े पत्रकारों और प्रबंधन स्टाफ से अरोड़ा ने कहा कि बदलाव ही जीवन है। तीन वर्ष पहले जब उन्होंने आईएएस जैसे प्रतिष्ठित पद से स्वेच्छिक सेवानिवृत्ति ली, तब यह कल्पना भी नहीं की थी कि मीडिया के क्षेत्र में इतनी सफलता मिलेगी, लेकिन उनके बड़े भाई और मीडिया क्षेत्र की प्रमुख हस्ती डॉ. जगदीश चंद्र के मार्गनिर्देशन में जो काम किया उसकी वजह से अपार सफलता मिली। अब नए समूह का चेयरमैन बनने के बाद मुझे उम्मीद है कि बड़े भाई साहब का आशीर्वाद मिलता रहेगा। पवन अरोड़ा ने कहा कि अब मीडिया के क्षेत्र में आर्टिफिशियल टेक्नोलॉजी का प्रभाव बढ़ता जा रहा है। इससे मीडिया कर्मियों का काम आसान हुआ है। सच बेधड़क दैनिक समाचार पत्र और न्यूज़ चैनल में भी एआई का उपयोग किया जाएगा। राजस्थान के पाठकों और दर्शकों को मीडिया के क्षेत्र में अब सच बेधड़क के माध्यम से टेक्नोलॉजी के बदलाव देखने को मिलेंगे। सच बेधड़क न्यूज चैनल जल्द ही सैटेलाइट के सभी प्लेटफार्म पर जल्द देखने को मिलेगा। इसी प्रकार अखबार भी प्रदेश के हर पाठक को उपलब्ध होगा। अरोड़ा ने कहा कि उन्होंने विगत दिनों राजस्थानी भाषा का जो गणगौर न्यूज चैनल रि-लांच किया, वह भी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इस चैनल में भी एआई टेक्नोलॉजी का समावेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब हर पाठक और दर्शक नए अंदाज में अखबार और चैनल देखना चाहता है। हम पाठक और दर्शकों की उम्मीद पर खरा उतरेंगे। मेरा प्रयास रहेगा कि राजस्थान की जनता और सरकार के बीच सेतु बनकर काम करें। S.P.MITTAL BLOGGER ( 19-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

राजस्थान में शहरी निकाय और पंचायती राज का चुनाव कांग्रेस ठेके पर लड़ेगी? चार उम्मीदवारों को जिताने की गारंटी देने वाले नेता को टिकट दिया जाए-रंधावा, प्रदेश प्रभारी। ============== राजनीति में अब तक तो यह सुना जाता था कि जिताऊ व्यक्ति को उम्मीदवार बनाया जाए। इस कथन में कोई बुराई भी नहीं है लेकिन 17 अगस्त को राजस्थान में कांग्रेस के प्रभारी महासचिव सुखजिंदर सिंह रंधावा ने शहरी निकाय और पंचायती राज चुनाव के मद्देनजर जीत का नया फॉर्मूला प्रस्तुत किया है। रंधावा ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा से कहा कि चुनाव में ऐसे व्यक्ति को टिकट दिया जाए तो चार अन्य उम्मीदवार को जिताने की गारंटी दे। यदि एक नेता अपने साथ चार अन्य उम्मीदवारों को जीत दिलवाएगा तो कांग्रेस को कोई हरा नहीं सकता। यदि प्रदेश में रंधावा का यह फार्मूला लागू होता है तो फिर शहरी निकायों में ऐसे नेता को पार्षद का टिकट दिया जाएगा जो अपने आस पास के चार अन्य उम्मीदवारों को भी जितवाने की गारंटी देगा। हो सकता है कि ऐसा नेता चार वार्डों में अपने पसंद के व्यक्ति को उम्मीदवार बनाए। यही फार्मूला जिला परिषद और पंचायत समितियों के वार्डों में भी लागू हो सकता है। हालांकि डोटासरा ने रंधावा के फार्मूले पर कोई टिप्पणी नहीं की है, क्योंकि राजस्थान की राजनीति में दोनों प्रमुख दलों में ऐसी कोई परंपरा नहीं है कि जीत का ठेका एक व्यक्ति को दे दिया जाए। मालूम हो कि रंधावा पंजाब में कांग्रेस के नेता है और अगले वर्ष पंजाब में विधानसभा के चुनाव होने हैं। पंजाब में कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व ने जो रणनीति बनाई है उससे रंधावा खुश नहीं है। पंजाब में खुद रंधावा असंतुष्ट नेता की भूमिका में है। सवाल उठता है कि जो नेता अपने गृह प्रदेश में असंतुष्ट हो, वह राजस्थान में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में एकजुटता की बात कैसे कर सकता है? S.P.MITTAL BLOGGER ( 18-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

ढाई वर्ष में ही जमीन से आसमान में पहुंच गए सतीश पूनिया। वसुंधरा राजे का मान सम्मान बरकरार रखा। मन्नालाल रावत अब आदिवासियों के बीच भाजपा की पैठ जमाएंगे। साफ सुथरी छवि का लाभ मिला सीए राजेश मंगल को। भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में राजस्थान पर फोकस। ============== भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने 17 अगस्त को जो कार्यकारिणी घोषित की है इसमें राजस्थान पर विशेष फोकस किया गया है। चूंकि राजस्थान में गत पांच बार से भाजपा और कांग्रेस के बीच सत्ता की अदला बदली हो रही है, इसलिए इस बार भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व का प्रयास है कि वर्ष 2028 में होने वाले विधानसभा चुनाव में सत्ता भाजपा के पास ही रहे। यही वजह है कि राजस्थान से केंद्र सरकार में चार मंत्रियों की मौजूदगी के बाद संगठन में भी प्रदेश के नेताओं को भी महत्व दिया गया है। इसका असर इसी वर्ष होने वाले शहरी निकाय और पंचायती राज चुनाव पर भी पड़ेगा। जमीन से आसमान पर: राष्ट्रीय कार्यकारिणी में राज्यसभा सांसद सतीश पूनिया को महामंत्री बनाया गया है। सब जानते हैं कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे पूनिया ढाई वर्ष पहले विधानसभा का चुनाव हार गए थे। तब पूनिया जमीन पर आ गए थे। पूनिया का दर्द और बढ़ गया, जब भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार में भी कोई पद नहीं मिला, लेकिन पूनिया ने धैर्य नहीं खाया और एक वर्ष बाद ही पूनिया को राजनीति में जमीन से थोड़ा उठने का मौका मिल गया। पूनिया को हरियाणा का प्रभारी बनाया और हरियाणा में भाजपा की फिर से सरकार बन गई। भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व की नजर में आने के बाद पूनिया को राजस्थान से राज्यसभा का सांसद बनाया गया। सांसद बनने के बाद अटकले लगाई गई कि पूनिया को केंद्र में मंत्री बनाया जाएगा। ऐसे अटकलों पर पूनिया ने स्वयं सख्ती से विराम लगाया। पूनिया को पता था कि राष्ट्रीय नेतृत्व उनका संगठन में ही उपयोग करेगा। जो पूनिया ढाई वर्ष पहले विधानसभा का चुनाव हार कर जमीन पर आ गए थे, वो ही पूनिया 17 अगस्त को भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री बनकर राजनीति के आसमान पर पहुंच गए है। इसमें कोई दो राय नहीं कि पूनिया का भाजपा की राजनीति में दबदबा बढ़ा है। पूनिया की इस नियुक्ति से भाजपा को शहरी निकाय और पंचायती राज चुनाव में खासा फायदा होगा। मान सम्मान बरकरार: भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने पूर्व सीएम वसुंधरा राजे का मान सम्मान बरकरार रखा है। नई कार्यकारिणी में राजे को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए रखा है। अमित शाह जब भाजपा के अध्यक्ष थे, तब से ही राजे उपाध्यक्ष है। भले ही राजे ने उपाध्यक्ष पद पर रहते हुए राष्ट्रीय राजनीति में कभी भी सक्रियता न दिखाई हो, लेकिन राजे के मान सम्मान को बरकरार रखा गया है। उपाध्यक्ष पद बरकरार रखने पर राजे ने अध्यक्ष नितिन नवीन का आभार जताया है। राजे के समर्थकों को अब इसी बात में खुश रहना होगा कि राजे राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनी हुई है। आदिवासियों में पैठ: नई कार्यकारिणी में उदयपुर के भाजपा सांसद मन्नालाल रावत को एसटी मोर्चे का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है। सांसद बनने से पहले रावत राजस्थान के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में सक्रिय थे। एसटी मोर्चे का अध्यक्ष बनने के बाद अब रावत पर आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में भाजपा की पैठ जमाने की जिम्मेदारी आ गई है। प्रदेश में आदिवासी बाहुल्य बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ आदि क्षेत्रों में भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) का खासा प्रभाव है। इस पार्टी का एक सांसद और चार विधायक है। देखना होगा कि रावत के नेतृत्व में अब प्रदेश में भाजपा का प्रभाव कैसे बढ़ता है। साफ सुथरी छवि: नई कार्यकारिणी में जयपुर के सीए राजेश मंगल को सह कोषाध्यक्ष बनाया गया है। कोषाध्यक्ष की जिम्मेदार केंद्रीय उद्योग और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के पास है। मंग लकी नियुक्ति के पीछे उनकी साफ सुथरी छवि है। मंगल की नियुक्ति कर भाजपा ने वैश्य समाज को प्रतिनिधित्व देने का काम किया है। पूर्व में रामदास अग्रवाल भाजपा के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष रह चुके हैं। S.P.MITTAL BLOGGER ( 18-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511