S.P. MITTAL Blog

रिश्ते सुधारने के लिए भारत और पाकिस्तान की 117 हस्तियों ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखे। लेकिन पहलगाम में जब 26 हिंदू पर्यटकों को धर्म पूछकर मौत के घाट उतार दिया जाता है, जब इन हस्तियों का मुंह बंद क्यों हो जाता है? सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस जैसी संस्थाओं से सावधान रहने की जरुरत। ============== भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते सुधारने के लिए दोनों देशों की 117 हस्तियों ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को पत्र लिखे हैं। पत्र में दोनों प्रधानमंत्रियों से आग्रह किया गया है कि दोनों देश सीमाओं से आपस में जुड़े हुए है, इसलिए दोनों देशों के बीच अच्छे संबंध होने चाहिए। पत्र में राजनीतिक संबंधों के साथ साथ कारोबार संबंधों को भी सुधारने पर जोर दिया गया है। यह पत्र सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस नाम की संस्था की पहल पर लिखा गया है। इसमें कोई दो राय नहीं कि भारत और पाकिस्तान के रिश्ते सुधरने चाहिए, लेकिन सवाल उठता है, जब 22 अप्रैल 2025 को जम्मू कश्मीर के पहलगाम में बैसरन घाटी में धर्म पूछकर 26 हिंदू पर्यटकें को मौत के घाट उतार दिया जाता है और हत्यारे मुस्लिम आतंकी पाकिस्तान में शरण ले लेते हैं, तब इन हस्तियों का मुंह बंद क्यों हो जाता है? तब यह हस्तियां पाकिस्तान और आतंकियों की आलोचना क्यों नहीं करते? इतना ही नहीं जब पहलगाम के आतंकियों को भारत की सेना ऑपरेशन सिंदूर के अंतर्गत पाकिस्तान में घुसकर मारती है, तब इन्हीं हस्तियों को पाकिस्तान बेचारा नजर आता है। ऐसी हस्तियां ही भारतीय सेना से ऑपरेशन सिंदूर के सबूत मांगती है। ऐसी हस्तियां धर्मनिरपेक्षता का चोला ओढ़कर सांप्रदायिक सौहार्द की दुहाई भी देती है। धर्मनिरपेक्षता के एक तरफा चेहरे की वजह से ही भारत को काफी नुकसान हो चुका है। धर्म निरपेक्षता तभी सफल होती है, जब दूसरा पक्ष भी सौहार्द दिखाए। पहलगाम में 26 हिंदुओं की हत्या करने और फिर धर्मनिरपेक्षता वादियों के चुप रहने से भारत और पाकिस्तान के रिश्ते कभी नहीं सुधर सकते हैं। सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस नाम की संस्था ने भारत में जिन हस्तियों के हस्ताक्षर करवाए हैं, उनमें जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती के साथ साथ राजद के सांसद मनोज झा के भी हस्ताक्षर है। ऐसी हस्तियां तो शुरू से ही पाकिस्तान की समर्थक रही है। देखा जाए तो फारुख अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती की वजह से ही कश्मीर घाटी से चार लाख हिंदुओं को पलायन करना पड़ा। आज भी ये कश्मीरी हिंदू अपने ही देश में शरणार्थी बन कर रह रहे हैं ,भारत की सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस जैसी संस्थाओं से भी सावधान रहने की जरूरत है। असल में जब तक पाकिस्तान में कट्टरपंथी संगठनों पर नियंत्रण नहीं होगा, तब तक भारत के साथ रिश्ते नहीं सुधर सकते। पाकिस्तान में बैठे कट्टरपंथी नेता ही आज भी भारत में आतंकी गतिविधियां करवा रहे हैं। अब तो नशीले पदार्थ भिजवा कर युवा पीढ़ी को खराब किया जा रहा है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 02-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

श्री गंगानगर में दुष्कर्म के अड्डे बनी तीन होटलों को मिट्टी में मिलाया। ऐसी कार्यवाही राजस्थान भर में होनी चाहिए। ============== एक जुलाई को राजस्थान के श्रीगंगानगर में होटल जॉय इन, होटल ड्रीम और होटल सफायर पर जेसीबी चलाकर मिट्टी में मिला दिया गया।आरोप है कि होटलें दुष्कर्म के अड्डे बनी हुई थी। हाल ही में एक मामला एक नाबालिग का सामने आया। इन होटलों के संचालकों ने नाबालिग को अपने होटल में रखा और फिर कई युवकों से गैंग रेप करवाया। एक जुलाई को प्रशासन ने सख्त रवैया अपनाते हुए इन होटलों पर जो कार्यवाही की उसकी अब सर्वत्र प्रशंसा हो रही है। राजस्थान में संभवत: अब यह पहला अवसर होगा, जब दुष्कर्म के आरोप के मद्देनजर एक साथ तीन होटलों पर जेसीबी चलाई गई। स्वाभाविक है कि इतनी बड़ी कार्यवाही से पहले मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से सहमति ली होगी। श्रीगंगानगर में होटलों पर जो कार्यवाही हुई वैसी कार्यवाही राजस्थान भर में होना चाहिए। असल में राजस्थान के शहरों में अनेक होटलों में महिलाओं के साथ दुष्कर्म होते हैं। कई बार तो क्षेत्रीय नागरिक भी शिकायत करते हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई कार्यवाही नहीं की जाती। अनेक बार बलात्कार की शिकार युवती होटल का नाम भी बताती है, लेकिन फिर भी कार्यवाही नहीं होती। श्रीगंगानगर के प्रशासन ने तीन होटलों पर जेसीबी चलाकर सराहनीय काम किया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को चाहिए कि श्रीगंगानगर जैसी कार्यवाही राजस्थान भर में करवाई जाए। तभी होटल संचालकों में भय होगा। बलात्कार की घटना के बाद कोई होटल संचालक अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता है। जिस होटल में दुष्कर्म हुआ, उसके लिए होटल का मालिक भी जिम्मेदार है। कई बार देखा गया है कि मोटे किराये के लालच में संदिग्ध व्यक्तिों को होटल का कमरा दे दिया जाता है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 02-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

राजस्थान में कार्मिकों को सेवानिवृत्ति पर नहीं मिल रही राशि। चिकित्सा विभाग में तो पांच माह तक का विलंब। ============== सरकार का नियम तो यही है कि राज्य कर्मचारी को सेवानिवृत्ति के साथ ही भविष्य निधि (ईपीएफ), ग्रेच्युटी, अवकाश नगदीकरण आदि की राशि मिल जाए। ताकि सेवानिवृत्ति के बाद संबंधित कार्मिक अपने भविष्य की योजना बना सके,लेकिन इसे दुर्भाग्यपूर्ण ही कहा जाएगा कि राजस्थान में राज्य कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के साथ पीएफ, ग्रेच्युटी आदि का भुगतान नहीं हो रहा है। इसके लिए कार्मिकों को सेवानिवृत्ति के बाद चार-पांच माह तक का इंतजार करना पड़ रहा है। चिकित्सा विभाग के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को तो पांच माह का इंतजार है। जिन कर्मचारियों ने 30 से लेकर 36 वर्ष तक अपनी सेवाएं दी, उन्हें अपने ही पैसों के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। इनमें सरकार के बड़े अधिकारी भी शामिल हैं। सेवानिवृत्ति के समय कर्मियों को भुगतान होने के संबंध में कहा जा रहा है कि सरकार के खजाने में पैसा नहीं है। सरकार के पास जब पैसों का जुगाड़ हो जाता है, तब सेवानिवृत्त कर्मियों को बकाया राशि का भुगतान किया जाता है। खजाने में पैसा नहीं होने के कारण ही कर्मियों को पांच-पांच माह इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसे अनेक कार्मिक हैं जिन्होंने सेवानिवृत्ति के समय मिलने वाली राशि को लेकर योजना बनाई, लेकिन राशि नहीं मिलने के कारण ऐसी योजना सफल नहीं हो पा रही। कार्मिकों का कहना है कि ऐसी सरकार को काम से कमस सेवानिवृत्ति के एक माह के अंदर अंदर बकाया राशि का भुगतान करना चाहिए। बकाया राशि का भुगतान नहीं होने से कर्मियों को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसके साथ ही भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार की छवि भी खराब हो रही है7 मुख्यमंत्री शर्मा स्वयं शिकायत विवरण सेंटर पर जाकर लोगों की समस्याओं का समाधान करते हैं। लेकिन कर्मियों की सेवानिवृत्ति के समय भुगतान न होने पर मुख्यमंत्री शर्मा भी चुप हैं। S.P.MITTAL BLOGGER ( 02-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

राजस्थान में भजनलाल शर्मा ही भाजपा के सबसे बड़े चेहरे। ऐसा अभिनंदन समारोह भी प्रदर्शित हुआ। यमुना जल पर हरियाणा के साथ एग्रीमेंट होने से राजनीति में कद और बढ़ा। =============================== 29 जून को दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की उपस्थिति में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने यमुना नदी के पानी को शेखावाटी क्षेत्र में लाने को लेकर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ एग्रीमेंट किया। इस ऐतिहासिक एग्रीमेंट को करने के बाद 30 जून को जब सीएम शर्मा जयपुर एयरपोर्ट पहुंचे तो उनका जबरदस्त स्वागत किया। मंत्रिमंडल के अधिकांश सदस्य एयरपोर्ट पर मौजूद थे। भाजपा के दिग्गज नेता माने जाने वाले सतीश पूनिया, राजेंद्र राठौड़ भी स्वागत के लिए आतुर थे। एयरपोर्ट से मुख्यमंत्री आवास तक भजनलाल शर्मा और मंत्रियों ने बस में सफर किया। मार्ग में जगह जगह खड़े लोगों ने भजनलाल शर्मा के समर्थन में नारे लगाए। मुख्यमंत्री आवास पर हुए अभिनंदन समारोह में भी भाजपा के नेताओं ने एक स्वर से सीएम शर्मा की प्रशंसा की। यमुना का पानी राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र में लाने का जो प्रयास भजनलाल शर्मा ने किया उसे नेताओं ने प्रदेश के विकास में मील का पत्थर बताया। अभिनंदन समारोह में ऐसा प्रदर्शित किया गया कि राजस्थान में अब भजनलाल शर्मा ही भाजपा के सबसे बड़े चेहरे हैं। एक तरफ से ऐतिहासिक एग्रीमेंट का पूरा श्रेय सीएम शर्मा को ही दिया गया। खुद सीएम शर्मा ने कहा कि मेरे लिए यह भावुक क्षण है। मुझे आज यह कहते हुए गर्व हो रहा है कि जल्द ही शेखावाटी के लोगों को यमुना का पानी पीने और सिंचाई के लिए मिलेगा। जो काम 32 वर्ष से लंबित था उसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सहयोग से पूरा किया जा हा है। समारोह में भाजपा के दिग्गज नेता राजेंद्र राठौड़ ने अपने गृह जिले चूरू से आए लोगों को मुख्यमंत्री के सामने खड़ा किया और यह बताया कि उनके समर्थन में चूरू से कितने लोग आए हैं। इस समारोह में सीएम शर्मा पूरे आत्मविश्वास से भरे नजर आए। उन्होंने कहा कि मैं जब ढाई वर्ष पूर्व मुख्यमंत्री बना था, तब पहली प्राथमिकता पानी को दी थी। आज मैं कह सकता हंू कि ईआरसीपी, यमुना जल जैसी परियोजनाओं पर आम सहमति बनने के बाद राजस्थानी पानी के क्षेत्र में मजबूत स्थिति में होगा। प्रदेश के प्रत्येक गांव में नजल से जल पहुंचेगा। S.P.MITTAL BLOGGER ( 01-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

मृतक डकैत जगन गुर्जर के प्रकरण में अजमेर कांग्रेस के नेताओं ने सकारात्मक भूमिका निभाई। ============= राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में चंबल नदी के किनारे के जंगलों में कभी आतंक मचाने वाले कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की हत्या 29 जून को अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में कर दी गई। इस हत्या के बाद अजमेर में जो हालात उत्पन्न हुए उसमें प्रशासन के समक्ष कानून व्यवस्था की स्थिति खड़ी हो गई। 30 जून को अजमेर के जेएलएन अस्पताल के मुर्दाघर के बाहर बड़ी संख्या में जगन गुर्जर के परिजन और गुर्जर समुदाय के लोग एकत्रित हो गए। ऐसे तनावपूर्ण माहौल में ही जगन गुर्जर के पुत्र आसाराम ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों को नहीं माना गया तो कानून व्यवस्था बिगड़ जाएगी। आसाराम ने कहा कि वह जगन गुर्जर का खून है और उसे हत्यारों को जेल के अंदर और बाहर भी मारना आता है। ऐसे तनावपूर्ण माहौल में ही अजमेर के कांग्रेस नेता शिव प्रकाश गुर्जर, एडवोकेट हरिसिंह गुर्जर, पार्षद नौरत गुर्जर, हरचंद खटाणा आदि ने सकारात्मक भूमिका निभाई। इन कांग्रेसियों ने जगन गुर्जर के परिजन और प्रशासन के बीच मध्यस्थ का काम किया। कांग्रेस नेताओं की भूमिका से ही आम सहमति बनी कि हत्या की न्यायिक जांच करवाई जाएगी। साथ ही मृतक जगन गुर्जर के भाई पप्पू गुर्जर को अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल से दूसरी जेल में शिफ्ट किया जाएगा। जगन गुर्जर के अंतिम संस्कार में भाग लेने के लिए पप्पू गुर्जर को पैरोल भी दी जाएगी। इस सहमति के बाद ही 30 जून की शाम को जगन गुर्जर के शव का पोस्टमार्टम हुआ और रात को ही शव को धौलपुर स्थित पैतृक गांव ले जाया गया। तय कार्यक्रम के अनुसार 1 जुलाई को पैतृक गांव में ही जगन गुर्जर का अंतिम संस्कार किया जा रहा है। यहां उल्लेखनीय है कि जिन परिस्थितियों में 29 जून को अजमेर की जेल में जगन गुर्जर की हत्या हुई उसको लेकर अब अनेक सवाल उठ रहे हैं। हाई सिक्योरिटी जेल में ीाी यदि कैदी सुरक्षित नहीं है तो फिर जेल की सुरक्षा व्यवस्थाओं पर सवाल उठते ही हैं। गंभीर बात तो यह है कि जेल की जिस बैरक में जगन गुर्जर बंद था, उसमें कैमरा भी लगा हुआ है, लेकिन इसके बाद भी एक मामूली अपराधी विष्णु ने जगन गुर्जर जैसे कुख्यात डकैत की गमछे से गला दबाकर हत्या कर दी। यही वजह है कि परिजन को हत्या के पीछे बड़ी साजिश नजर आ रही है। परिजन का कहना है कि मामूली अपराधी विष्णु इतने बड़े हत्याकांड को अंजाम नहीं दे सकता। S.P.MITTAL BLOGGER ( 01-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

मात्र ढाई वर्ष में अजमेर कांग्रेस के सबसे बड़े और मजबूत नेता बन गए विधायक विकास चौधरी। प्रदेशाध्यक्ष डोटासरा ने राहुल गांधी के समक्ष खूब प्रशंसा की। अपनी राजनीतिक सफलता से उत्साहित विकास चौधरी 2 जुलाई को जन्मदिन पर शक्ति प्रदर्शन करेंगे। ================================ ढाई वर्ष पहले भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए विकास चौधरी को लेकर किसी को भी उम्मीद नहीं थी कि वे कांग्रेस की राजनीति में इतने सफल हो जाएंगे। कांग्रेस में शामिल होते ही विकास चौधरी को अजमेर जिले के किशनगढ़ से विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार घोषित कर दिया गया। विकास चौधरी भले ही 2018 में भाजपा उम्मीदवार के तौर पर किशनगढ़ से चुनाव हार गए हो, लेकिन 2023 में कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर जीत हासिल की। विधायक बनने के बाद चौधरी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और कांग्रेस की राजनीति में तेजी से दौड़ लगा दी। चूंकि विकास चौधरी अजमेर जिले में कांग्रेस के एक मात्र विधायक थे, इसलिए पूरी कांग्रेस चौधरी पर ही निर्भर हो गइ्र। यही वजह रही कि चौधरी को अजमेर देहात कांग्रेस का जिला अध्यक्ष भी बना दिया गया। राजनीति में चौधरी को तेजी से आगे बढ़ाने में कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। भले ही डोटासरा, चौधरी को आगे बढ़ा रहे हों, लेकिन विकास चौधरी के संबंध पूर्व सीएम अशोक गहलोत और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट से भी है। इन ढाई वर्षों में विकास चौधरी अजमेर जिले में कांग्रेस के सबसे बड़े और मजबूत चेहरा बनकर उभरे हैं। मौजूदा समय में विकास चौधरी के मुकाबले अजमेर में कांग्रेस का कोई नेता नहीं है। राहुल के समक्ष प्रशंसा: हाल ही में पुष्कर के एक रिसोर्ट में राजस्थान और दिल्ली के कांग्रेस के जिलाध्यक्षों का दस दिवसीय शिविर हुआ। शिविर के अंतिम दिन लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी भी आए। राहुल गांधी के समक्ष प्रदेशाध्यक्ष डोटासरा ने विधायक चौधरी की खूब प्रशंसा की। डोटासरा ने कहा कि पूरे अजमेर जिले में कांग्रेस को संगठन की दृष्टि से मजबूत करने में विकास चौधरी अहम भूमिका निभा रहे हैं। जिलाध्यक्षों के 10 दिवसीय शिविर को सफल बनाने में भी विधायक चौधरी की महत्वपूर्ण भूमिका है। खुद राहुल गांधी ने भी विकास चौधरी से कांग्रेस संगठन के बारे में विमर्श किया। राहुल गांधी का कहना रहा कि मुझे विकास चौधरी जैसे नेता ही चाहिए। कहा जा सकता है कि अब विकास चौधरी का राहुल गांधी के साथ सीधा संवाद हो गया है। शक्ति प्रदर्शन: कांग्रेस में सफलता से उत्साहित विकास चौधरी 2 जुलाई को अपना जन्मदिन धूमधाम से मना रहे हैं। सोशल मीडिया पर तो 10 दिन पहले से प्रचार प्रसार शुरू हो गया। साथ ही तीन दिनों से सेवा और विकास का उत्सव मनाया जा रहा है। इसके अंतर्गत विकास चौधरी अनेक योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास कर रहे हैं। 2 जुलाई को किशनगढ़ स्थित आरके कम्युनिटी सेंटर में स्वागत का कार्यक्रम दिन भर चलेगा। इस अवसर पर किशनगढ़ के अलावा जिले भर के कार्यकर्ता चौधरी को जन्मदिन की बधाई देने पहुंचेंगे। यहां खासतौर से उल्लेखनीय है कि विकास चौधरी प्रतिदिन अपने किशनगढ़ आवास पर जनसुनवाई करते हैं। इसमें लोगों खासकर ग्रामीणों की समस्या का समाधान हाथों हाथ किया जाता है। चूंकि राजनीति में चौधरी का खासा दबदबा है, इसलिए प्रशासनिक अधिकारी भी चौधरी के फोन पर समस्या का समाधान करते हैं। चौधरी की यह कार्यशैली ग्रामीणों को बहुत पसंद आ रही है। अपने जन्मदिन के अवसर पर चौधरी ने कहा कि वे ढाई वर्ष पहले विपरीत परिस्थितियों में विधायक बने थे। उन्हें किशनगढ़ के लोगों ने जो समर्थन दिया, उसका अब मैं सेवा भावना से कर्ज उतार रहा हंू। यदि किशनगढ़ के मतदाता मुझे विधायक नहीं बनाते तो मुझे राजनीति में इस मुकाम तक पहुंचने का अवसर भी नहीं मिलता। आज में जो कुछ भी हूँ उसका श्रेय किशनगढ़ के मतदाताओं को जाता है। विधायक विकास चौधरी को मोबाइल नंबर 9460784100 पर जन्मदिन की बधाई दी जा सकती है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 01-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

राजनीति में बड़े बड़े नेताओं को पानी पिलाने के बाद राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा अब फलदायिनी यमुना नदी का पानी शेखावाटी में लाएंगे। सीकर, झुंझुनूं व चुरू से पहले हरियाणा के यमुनानगर, करनाल, कुरुक्षेत्र, कैथल व हिसार की प्यास बुझाई जाएगी। जो काम पीएम मोदी को करना था वो अमित शाह ने किया। 1994 के समझौते के अनुरूप ही हरियाणा को पानी मिलेगा-भजनलाल शर्मा, सीएम राजस्थान। ================================ 29 जून को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री की उपस्थिति में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने यमुना नदी के पानी को लेकर मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर कर दिए। अमित शाह की उपस्थिति में ही दोनों नेताओं ने इस एग्रीमेंट का एक्सचेंज भी कर लिया। पहले एग्रीमेंट एक्सचेंज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में होना था, लेकिन बदले हुए निर्णय में एग्रीमेंट का एक्सचेंज गृहमंत्री अमित शाह की उपस्थिति में हुआ। राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र के सीकर, झुंझुनूं और चुरू जिले की प्यास बुझाने के लिए यह एग्रीमेंट बहुत महत्वपूर्ण हे। इस एग्रीमेंट को करने में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के विशेष प्रयास रहे हैं। भारत की सनातन संस्कृति में यमुना नदी को फलदायिनी और गंगा नदी को मोक्षदायिनी माना जाता है। यानी सीएम शर्मा राजस्थान में अब युमना का पानी ला रहे है जो फलदायिनी मानी जाती है। इसमें कोई दो राय नहीं कि भजनलाल शर्मा पर ईश्वर की असीम का है। दिसंबर 2023 में पहली बार विधायक बने शर्मा को राजस्थान का मुख्यमंत्री बनाया गया, तब उनकी सफलता को लेकर अनेक शंकाए थी, लेकिन मुख्यमंत्री बनने के बाद शर्मा ने वसुंधरा राजे जैसे दिग्गज भाजपाइयों को ठंडा पानी पिलाया और गत ढाई वर्षों से अपनी स्थिति को मजबूत कर लिया। आज भजनलाल शर्मा के नेतृत्व को चुनौती देने वाला कोई नहीं है। पिछले ढाई वर्षों से कहा जा रहा है कि प्रदेश के मंत्रिमंडल के 6 रिक्त पदों पर नियुक्तियां होंगी, लेकिन सरकार के ढाई वर्ष गुजर जाने के बाद भी मंत्री पद खाली पड़े हैं। अब जब यमुना के पानी पर हरियाणा के साथ एग्रीमेंट हो गया है, तब राजनीति में भजनलाल शर्मा का कद और बढ़ेगा। यमुना का पानी लाने के लिए गत 32 वर्षों से कांग्रेस और भाजपा के नेता प्रयास कर रहे हैं, लेकिन सफलता भजनलाल शर्मा को मिली है। इससे पहले ईआरसीपी (राम सेतु लिंक परियोजना) को भी क्रियांवित करने में शर्मा की भूमिका रही। अब जब फलदायिनी यमुना स्वयं राजस्थान आ रही है तो भजनलाल शर्मा को राजनीति में अनेक कामों के फल मिलने शुरू हो गए है। राजस्थान के किसी भी नेता को मुगालते में नहीं रहना चाहिए। कोई माने या नहीं लेकिन 2028 का विधानसभा का चुनाव भी भाजपा भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में ही लड़ेगी। पहले हरियाणा को: हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से शेखावाटी के चूरू जिले तक पाइप लाइन बिछाई जाएगी। इन पाइप लाइनों के जरिए ही यमुना नदी का पानी शेखावाटी में लाया जाएगा। हथिनी कुंड बैराज से चुरू तक पानी लाने से पहले हरियाणा के यमुनानगर, करनाल, कुरुक्षेत्र, कैथल व हिसार जिलों की प्यास को बुझाया जाएगा। यानी इस एग्रीमेंट में राजस्थान के साथ साथ हरियाणा को भी प्राथमिकता दी गई है। चूंकि बरसात के दिनों में यमुना नदी उफान पर रहती है, इसलिए हरियाणा के जिलों को पानी देने से राजस्थान के हितों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। 32 वर्ष पहले 1994 में चार राज्यों के बीच जो समझौता हुआ उस में राजस्थान को 577 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम)पानी का प्रावधान किया गया था। कहा जा सकता है कि 29 जून को हुए एग्रीमेंट में इतना पानी राजस्थान को मिल ही जाएगा। यमुना का पानी राजस्थान को देने से हरियाणा में कोई विरोध न हो इसके लिए ही पहले हरियाणा के तीन चार जिलों में पेयजल की सप्लाई की जाएगी, इसलिए तीन पाइप लाइन डालने का प्रावधान किया गया है। वैसे ही 300 किलोमीटर के मार्ग का 95 प्रतिशत भाग हरियाणा में ही आता है। समझौते के अनुरूप हरियाणा को पानी: यमुना जल समझौते को लेकर 30 जून को दिल्ली में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस कॉन्फ्रेंस में जब यह पूछा गया, राजस्थान से पहले हरियाणा को पानी मिलेगा, तब सीएम शर्मा ने कहा 1994 में चार राज्यों के बीच जो समझौता हुआ था, उसमें हरियाणा को भी पानी दिए जाने का प्रावधान है। 1994 के समझौते के तहत ही हरियाणा को उसके हिस्से का पानी दिया जाएगा। सीएम ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यमुना का पानी शेखावाटी के जिलों को मिलेगा। इस से एक बड़ी आबादी की प्यास बुझेगी। समझौते के लिए सीएम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार भी जताया। 29 जून के समझौते पर पूर्व सीएम अशोक गहलोत की आशंकाओं के सवाल पर सीएम शर्मा ने कहा, जब एग्रीमेंट हुआ है, तो कोई भी तथ्य छिपाया नहीं जा रहा है। एग्रीमेंट भी सार्वजनिक किया जा रहा है। हमारे पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है। गहलोत के मुख्यमंत्री रहते हुए राजस्थान की पहचान पेपर लीक, बिगड़ी कानून व्यवस्था, विधायकों के बंधक रहने जैसे समाचारों से होती थी। लेकिन आज राजस्थान की पहचान विकास को लेकर हो रही है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 30-06-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

धौलपुर में महिलाओं को निवस्त्र घुमाने के आरोपी कुख्यात अपराधी जगन गुर्जर की अजमेर में हाई सिक्योरिटी जेल में हत्या। बुरे काम का बुरा नतीजा। ================ करीब 20 वर्षों तक राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में चंबल नदी के सीमावर्ती जंगलों में आतंक मचाने वाले डकैत जगन गुर्जर की 29 जून को अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में हत्या कर दी गई। जगन गुर्जर को मारने का काम कुलदीप जघीना हत्याकांड के आरोपी विष्णु ने किया। विष्णु ने स्वीकार किया कि उसने गमछे से जगन गुर्जर का गला दबा दिया। विष्णु को अपने कृत्य पर कोई अफसोस नहीं है। जगन गुर्जर पर तीन राज्यों में 125 से भी ज्यादा मुकदमे दर्ज है। हत्या, अपहरण रंगदारी के साथ साथ जगन गुर्जर पर एक गंभीर आरोप वर्ष 2019 का भी है। आरोप है कि धौलपुर के करणपुर में जगन गुर्जर ने दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाया। तब पूरे देश में जगन गुर्जर की चर्चा हुई। चूंकि जगन गुर्जर का आतंक चंबल नदी के जंगलों में था, इसलिए उसने वर्ष 2008 में भाजपा की नेता वसुंधरा राजे के धौलपुर के महल को भी बम से उड़ाने की धमकी दी। जगन गुर्जर का इतना आतंक था कि पुलिस भी मुकाबला करने से डरती थी। पुलिस ने अपने प्रयासों से कभी भी जगन गुर्जर को गिरफ्तार नहीं किया। जगन गुर्जर ने तीन बार अपनी मर्जी से पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया। अंतिम बार फरवरी 2022 में जगन ने आत्मसमर्पण किया था, तभी से वह विभिन्न जेलों में बंद रहा। इन दिनों जगन गुर्जर अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में बंद था। तभी उसकी मुलाकात कुलदीप जघीना हत्याकांड के आरोपी विष्णु से हुई। विष्णु ने पहले जगन से दोस्ती की और फिर विश्वास में लेकर जगन को मौत के घाट उतार दिया। बुरे काम का बुरा नतीजा: पुलिस अब जगन हत्याकांड की विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है। पुलिस को यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर विष्णु ने जगन की हत्या क्यों की? क्या विष्णु के के पीछे किसी अपराधी गैंग का हाथ है? पुलिस की जांच अपनी जगह है, लेकिन जगह गुर्जर की हत्या ने एक बार फिर यह प्रदर्शित किया है कि बुरे काम का नतीजा भी बुरा ही होता है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 30-06-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

खड़गे राज्यसभा में फिर प्रतिपक्ष के नेता बने। कांग्रसे के राष्ट्रीय अध्यक्ष तो रहेंगे ही। अशोक गहलोत को सीखनी चाहिए वफादारी। ================ 29 जून को मल्लिाकर्जुन खडग़े ने राज्यसभा में कांग्रेस सांसद के तौर पर शपथ ली। शपथ लेने के साथ ही राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णान ने खडग़े को प्रतिपक्ष का नेता भी घोषित कर दिया। यानी सभापति को कांग्रेस की ओर से पहले ही सूचित कर दिया गया था कि खडग़े ही कांग्रेस सांसदों के नेता है और राज्यसभा में विपक्ष में कांग्रेस सांसदों की संख्या सबसे ज्यादा है, इसलिए खडग़े ही प्रतिपक्ष के नेता होंगे। आमतौर पर कांग्रेस में एक व्यक्ति एक पद के सिद्धांत पर अमल किया जाता है, लेकिन खडग़े कांग्रेस के उरन चुनिंदा नेताओं में से एक है जिन पर कोई नियम लाू नहीं होता। खडग़े मौजूदा समय में भी कांग्रसे के राष्ट्रीय अध्यक्ष है। यानी खरगे के पास दो महत्वपूर्ण पद है। राज्यसभा में प्रतिपक्ष के नेता का पद होने के कारण खडग़े को केबिनेट मंत्री का दर्जा मिला हुआ है। कांग्रेस का राष्ट्रीय नेतृत्व खासकर गांधी परिवार खडग़े पर कितना भरोसा करता है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2019 से पहले खडग़े लोकसभा में प्रतिपख के नेता थे। 2019 में खडग़े जब लोकसभा का चुनाव हार गए, तब गांधी परिवार ने खडग़े को कर्नाटक से राज्यसभा में भेज दिया। इतना ही नहीं तब गुलाम नबी आजाद जैसे नेता को राज्यसभा से विदा कर खडग़े को प्रतिपक्ष का नेता बना दिया। खडग़े को हाल ही में दुबारा से राज्यसभा का सांसद बनाया गया और उनहें एक बार फिर प्रतिपक्ष का नेता घोषित किया गया।यानी अब खडग़े के पास पूर्व की तरह दो पद रहेंगे। गांधी परिवा रने स्पष्ट कर दिया है कि खडग़े पर एक व्यक्ति एक पद का सिद्धांत लागू नहीं होगा। गहलोत वफादारी की सीख लें: सितंबर 2022 से पहले तक अशोक गहलोत भी कांग्रेस के वफादार नेताओं में शामिल थे, लेकिन गहलोत ने जिस तरह 25 सितंबर 2022 को राजस्थान के मुख्यमंत्री के पद के लालच में कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व से बगावत की उसी का परिणाम है कि आज गहलोत पर हाईकमान का भरोसा नहीं रहा। जहां खडग़े के पास दो-दो महत्वपूर्ण पद है, वहां गहलोत के पास कोई पद नहीं है। एक समय था, जब गहलोत गांधी परिवार के सबसे भरोसेमंद नेता थे, इसलिए वर्ष 2022 में श्रीमती सोनिया गांधी के स्थान पर अशोक गहलोत को कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का फैसला किया गया। तब गहलोत को अधिकृत तौर पर उम्मीदवार भी घोषित कर दिया गया था। लेकिन गहलोत ने राजस्थान के मुख्यमंत्री पद के लालच में कांग्रेस हाईकमान के समक्ष बगावत कर दी। गहलोत नहीं चाहते थे कि सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाया जाए। जबकि गांधी परिवार पायलट को मुख्यमंत्री बनाने का प्रयास कर रहा था, इसलिए तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मल्लिकार्जुन खडग़े और अजय माकन को पर्यवेक्षक बनाकर राजस्थान भेजा। लेकिन अशोक गहलोत ने तब खडग़े और माकन के साथ कांग्रेस विधायकों की बैठक ही नहीं होने दी। तब इन दोनों पर्यवेक्षकों को अपमानित होरक जयपुर से लौटना पड़ा। इधर गहलोत को मुख्यमंत्री बनाए रखने की मांग पर कांग्रेस के 80 विधायकों ने अपना सामूहिक इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष को दे दिया, तब गहलोत मुख्यमंत्र का पद बचाने में तो सफल रहे, लेकिन गांधी परिवार का भरोसा खो दिया। वफदारी कैसेी होती है यह अशोक गहलोत को खडग़े से सीखनी चाहिए। S.P.MITTAL BLOGGER ( 30-06-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

जो शिक्षक अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में नहीं पढ़ाते, वे निकम्मापन कर रहे हैं। राजस्थान के स्कूली शिक्षा मंत्री मदन दिलावर का यह बयान सरकारी कार्मिकों और सांसद, विधायक, पार्षद आदि जनप्रतिनिधियों पर भी लागू होता है। ================= 28 जून को टोंक में खटीक समाज के अधिकारियों और कर्मचारियों के सम्मान समारोह में राजस्थान के स्कूली शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को लेकर बड़ी बातें कही। दिलावर ने कहा कि शिक्षकों को अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में ही पढ़ाना चाहिए। जो शिक्षक ऐसा नहीं करते हैं, वे निकम्मे हैं। ऐसा लगता है कि शिक्षकों को अपने ही शिक्षण कार्य पर भरोसा नहीं है। प्राइवेट स्कूलों के मुकाबले सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को वेतन और सुविधाएं भी ज्यादा मिलती है। ऐसे में सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर ऊंचा होना चाहिए। यदि शिक्षक अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाएंगे तो इसका असर समाज पर पड़ेगा। अब यदि शिक्षक ही अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में पढ़ा रहे हैं तो आम अभिभावक अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में क्यों पढ़ाएंगे? दिलावर ने शिक्षकों के समक्ष एक महत्वपूर्ण सवाल रखा है। यह सही है कि सरकार से मोटा वेतन लेने वाले शिक्षकों को अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाना चाहिए, लेकिन दिलावर ने शिक्षकों के समक्ष जो सवाल खड़ा किया है, वह सरकार के अधिकारियों और सभी कर्मियों के साथ साथ सांसद, विधायक, पार्षद, जिला प्रमुख, प्रधान सरपंच आदि सभी जनप्रतिनिधियों पर उठता है। अधिकारी और जनप्रतिनिधि भी सरकार से वेतन और अनेक सुविधाएं प्राप्त करते हैं। ऐसे में कार्मिकों और जनप्रतिनिधियों को भी चाहिए कि वे अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ाए। यदि सांसद, विधायकों, आईएएस आईपीएस अधिकारियों के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ेंगे तो स्कूलों की गुणवत्ता भी सुधर जाएगी। अच्छा हो कि मदन दिलावर एक अभियान चलाकर सभी सरकारी कर्मियों और जनप्रतिनिधियों के बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ने के लिए प्रेरित करें। अकेले शिक्षकों के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ाने से व्यवस्था में सुधार नहीं होगा। S.P.MITTAL BLOGGER ( 29-06-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511