S.P. MITTAL Blog

अजमेर के निकट ऊंटड़ा में होगा मुस्लिम सामूहिक निकाह सम्मेलन। पंजीयन 15 जुलाई से। सामाजिक संस्था इदरा-ए- दावातुल हक की ओर से 65 हजार रुपए का घरेलू सामान और 21 हजार रुपए का सरकारी अनुदान प्रत्येक जोड़े को मिलेगा। ================ अजमेर के निकट ऊंटड़ा गांव में अगले वर्ष 6 जनवरी 2027 को मुस्लिम सामूहिक निकाह सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इसके लिए 15 जुलाई से 15 अगस्त 2026 तक पंजीयन किया जाएगा। सामाजिक संस्था इदारा-ए-दावातुल हक के मौलाना अयूम कासमी ने बताया कि संस्था की ओर से पिछले सात वर्षों से प्रति वर्ष मुस्लिम सामूहिक निकाह सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इस वर्ष भी 6 जनवरी 2027 को यह सम्मेलन होगा। सम्मेलन में पंजीयन करवाने वाले जोड़ों को संस्था की ओर से करीब 65 हजार रुपए का घरेलू सामान भी दिया जाएगा। इसके साथ ही दोनों पक्षों की ओर से आए मेहमानों के भोजन की भी निशुल्क व्यवस्था संस्था की ओर से की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस सामूहिक निकाह वाले दिन ही निकाह का सर्टिफिकेट भी उपलब्ध करवा दिया जाएगा। इस सर्टिफिकेट के आधार पर ही सरकार से 21 हजार रुपए का अनुदान भी लिया जा सकेगा। सरकारी अनुदान दिलवाने में संस्था का पूरा सहयोग रहेगा। उन्होंने बताया कि समाज में निकाह पर अधिक खर्च होने लगा है, इसलिए संस्था प्रतिपक्ष मुस्लिम समाज के जरूरतमंद परिवारों के लिए सामूहिक निकाह का आयोजन कर रहा है। सामूहिक निकाह वाले दिन देश भर के मुस्लिम विद्वान भी अपने विचारों को रखते हैं। मौलाना कासमी ने जरूरतमंद परिवारों से अपील की है कि वे 15 अगस्त तक पंजीयन करवा ले क्योंकि 15 अगस्त के बाद पंजीयन करना संभव नहीं होगा। इस सामूहिक निकाह के बारे में और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9950578600 पर मौलाना अयूब कासमी तथा 9636434373 पर मोहम्मद अलताफ से ली जा सकती है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 12-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

आलोचनाओं का स्वयं मौका देते हैं राहुल गांधी। भारत में थोड़ी राजनीतिक गतिविधियां करने के बाद विश्राम के लिए विदेश चले जाते हैं। ================ कांग्रेस के सर्वोच्च नेता और लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी एक बार फिर विदेश दौरे पर है। आमतौर पर विदेश में राहुल गांधी की गतिविधियां सार्वजनिक नहीं होती। राहुल गांधी के बार बार विदेश दौरों को लेकर भाजपा और अन्य दलों के नेता विरोध करते हैं। असल में आलोचनाओं का अवसर राहुल गांधी स्वयं देते हैं। बार बार विदेश चले जाने से ऐसा प्रदर्शित होता है कि राहुल गांधी भारत में पार्ट टाइम राजनीति करते हैं। राहुल गांधी सिर्फ कांग्रेस के नेता ही नहीं है, बल्कि लोकसभा में पूरे विपक्ष के नेता भी है। ऐसे में राहुल गांधी की जिम्मेदारी है कि वे सरकार की नीतियों को लेकर विपक्ष के साथ आंदोलन करे। यह बताए कि मोदी सरकार की नीतियों कैसे जन विरोधी है, लेकिन राहुल गांधी बार बार जिस तरह विदेश यात्रा पर चले जाते हैं, उस विपक्षी दल भी एकजुट नहीं हो पाते। राहुल गांधी के प्रतिपक्ष का नेता होते हुए ही पश्चिम बंगाल की टीएमसी के 28 में से 20 लोकसभा के सांसदों ने अलग दल बना लिया। इसी प्रकार महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने भी दूसरी बार बड़ी बगावत हो गई। सवाल उठता है कि क्या प्रतिपक्ष के नेता के नाते विपक्ष को एकजुट रखने की जिम्मेदारी राहुल गांधी की नहीं है? पंजाब में भी जिस तरह आम आदमी पार्टी में बगावत हुई उससे राहुल गांधी के प्रतिपक्ष के नेता होने पर सवाल उठते हैं। आमतौर पर देखा गया है कि राहुल गांधी भारत में थोड़ी राजनीतिक गतिविधियां करने के बाद विश्राम के लिए विदेश चले जाते हैं। भारत में 20 जुलाई से संसद का मानसून सत्र शुरू हो रहा है। अच्छा होता कि राहुल गांधी प्रतिपक्ष के नेता के नाते विपक्षी दलों के साथ बैठकर सरकार के विरुद्ध कोई रणनीति बनाते, लेकिन मानसून सत्र शुरू होने से पहले राहुल गांधी विदेश चले गए। देश के युवा वर्ग को मोदी सरकार के विरुद्ध जगाने के लिए राहुल गांधी ने छात्रों की गूंज अभियान शुरू किया था। कोटा के बाद राहुल को बिहार के पटना में दूसरा कार्यक्रम करना था, लेकिन राहुल गांधी का अब पटना वाला कार्यक्रम रद्द हो गया है। कहा जा रहा है कि पटना की जगह देहरादून में कार्यक्रम होगा। असल में राहुल गांधी के बार बार विदेश चले जाने के कारण कांग्रेस संगठन में भी असमंजस की स्थिति रहती है। लोकतंत्र में विपक्ष का मजबूत होना जरूरी है, लेकिन इसके लिए विपक्षी नेताओं को जन आंदोलन करने पड़ेंगे। जन आंदोलन तभी सफल हो सकते हैं, जब विरोधी दल के नेता वर्षभर सक्रिय रहे। बार बार विदेश जाने से भारत में मोदी सरकार के विरुद्ध मजबूत विपक्षी दल खड़े नहीं हो सकते। राहुल गांधी को इस मामले में उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव से सीख लेनी चाहिए। यादव वर्ष भर अपने ही उत्तर प्रदेश में रहकर विपक्षी नेता की भूमिका निभाते हैं। S.P.MITTAL BLOGGER ( 12-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

चढ़ावा चोरी प्रकरण को लेकर अयोध्या के राम मंदिर की छवि खराब करने वाले नेता और मीडिया अब खाड़ी के मुस्लिम देशों और कट्टरपंथी इस्लामिक देश ईरान के भीषण युद्ध को देख लें। ================ अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जो युद्ध चल रहा है, उसमें 11 जुलाई को एक नया मोड़ तब आ गया, जब खाड़ी के मुस्लिम देश कुवैत, बहरीन आदि से भी कट्टरपंथी इस्लामिक देश ईरान पर भीषण हमले शुरू हो गए है। यह सही है कि खाड़ी देशों में अमेरिका के सैन्य ठिकाने हैं, लेकिन अब तक खाड़ी देशों से ईरान पर बड़े हमले नहीं किए जा रहे थे। रणनीति के तहत अरब सागर में खड़े अमेरिकी जहाजों और इजरायल से मिसाइलों के जरिए ही ईरान पर हमले किए जा रहे थे। लेकिन अब अमेरिका ने अपने समर्थक खाड़ी के मुस्लिम देशों को भी युद्ध करने के लिए मैदान में खड़ा कर दिया है। 11 जुलाई से अधिकांश खाड़ी देशों से ईरान पर ताबड़तोड़ हमले किए जा रहे है। ईरान पर खाड़ी देशों से हमले होने के बाद अमेरिका को युद्ध में मजबूती मिली है। खाड़ी देशों से हमला करना अमेरिका के लिए आसान काम है। हालांकि ईरान ने भी खाड़ी के मुस्लिम देशों पर जवाबी कार्यवाही की है। जो नेता और मीडिया भारत में चढ़ावा चोरी के प्रकरण में अयोध्या के राम मंदिर की छवि खराब कर रहे हैं, उन्हें अब खाड़ी के मुस्लिम देशों और कट्टरपंथी इस्लामिक देश ईरान के बीच भीषण युद्ध को देख लेना चाहिए। चढ़ावा चोरी की आड़ में सुनियोजित तरीके से भारत की सनातन संस्कृति को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। जबकि अयोध्या में मंदिर का निर्माण पांच सौ वर्ष के संघर्ष के बाद हो पाया है। अयोध्या का राम मंदिर सीमेंट कंक्रीट की इमारत नहीं बल्कि भारत के सौ करोड़ से ज्यादा हिंदुओं की आस्था का केंद्र है। भगवान राम के जन्मस्थान पर मंदिर बनने से हर सनातनी गौरवान्ति है। जो नेता और मीडिया चढ़ावा चोरी की आड़ में राम मंदिर की छवि खराब कर रहे हैं, उन्हें अपनी हरकतों से बाज आना चाहिए। दुनिया में सनातन धर्म ही एक ऐसा धर्म है जो सभी धर्मों और विचारों को साथ लेकर चलता है। जबकि वहीं अन्य धर्मों में एक ही धर्म के लोगों में जबरदस्त विरोधाभास है और इसका उदाहरण खाड़ी के देशों और ईरान के बीच हो रहा युद्ध है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 12-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

कांग्रेस की तरह भाजपा के शासन में भी शिक्षकों के तबादले हो रहे हैं। यदि नेताओं की सिफारिशों से ही तबादले होने हैं तो फिर शिक्षकों को भी राजनीति में आने की छूट दी जाए-विजय सोनी शिक्षक नेता। ================ राजस्थान में स्कूली शिक्षा के शिक्षकों के तबादले बड़ी संख्या में हुए है। ये तबादले किसी नीति के बगैर हुए है। तबादलों में भाजपा के नेताओं की सिफारिशों को प्राथमिकता दी गई है। यहां तक कि भाजपा के जयपुर स्थित मुख्यालय में शिक्षकों ने अपने तबादले का प्रार्थना पत्र जमा करवाया है। सरकार में बैठे मंत्रियों ने भी माना है कि हजारों शिक्षक डिजायर के लिए उनके पास आ रहे हैं। यानी शिक्षकों के तबादले जिस प्रकार कांग्रेस के शासन में होते थे, उसी प्रकार भाजपा के शासन में भी हो रहे हैं। कांग्रेस के शासन में भाजपा के नेता तबादले में राजनीतिक द्वेषता के आरोप लगाते थे। वही अब कांग्रेस के नेता राजनीतिक द्वेषता से तबादला करने के आरोप लगा रहे हैं। कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा का तो कहना है कि संघ और भाजपा की विचारधारा वाले शिक्षकों को उनकी इच्छानुसार पोस्टिंग दी गई है। जबकि कांग्रेस विचारधारा वाले शिक्षकों का तबादला दूर कर दिया गया है। डोटासरा ने अपने निर्वाचन क्षेत्र लक्ष्मणगढ़ (सीकर) के तबादलों के आंकड़े भी प्रस्तुत किए हैं। राजनीति में आने की छूट मिले: राजस्थान शिक्षक संघ (राधाकृष्ण) के प्रदेश अध्यक्ष विजय सोनी ने कहा कि यदि नेताओं की सिफारिश से ही तबादले हो रहे हैं तो फिर शिक्षकों को भी राजनीति करने की छूट दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि एक ओर सेवा नियमों में उल्लेख है कि कोई भी सरकारी कर्मचारी राजनीतिक गतिविधियों में भाग नहीं लेगा, लेकिन अब जब नेताओं की सिफारिशों से ही तबादले हो रहे हैं तो फिर शिक्षकों को भी राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेने की छूट मिलनी चाहिए। वैसे भी शिक्षक सभी प्रकार के कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार यूनिवर्सिटी के शिक्षकों को राजनीति में भाग लेने की छूट है, उसी प्रकार स्कूली शिक्षकों को भी छूट मिलनी चाहिए। विजय ने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार ने भी बगैर कोई नीति बनाए शिक्षकों के तबादले किए और अब भाजपा के शासन में भी बगैर नीति के ही तबादले हो रहे है। एक ओर कहा जा रहा है कि तृतीय श्रेणी के शिक्षकों के तबादले पर रोक है, लेकिन वही इस श्रेणी के कंप्यूटर अनुदेशकों के तबादले धड़ल्ले से किए जा रहे है। तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादला न करने के पीछे तर्क दिया जाता है कि इन शिक्षकों की वरिष्ठता जिला स्तर पर निर्धारित होती है। यदि एक जिले से दूर जिले में तबादला किया गया तो वरिष्ठता प्रभावित होगी, लेकिन इसके उलट वरिष्ठ अध्यापकों के तबादले किए गए है। जबकि वरिष्ठ अध्यापकों की वरिष्ठता संभाग स्तर पर निर्धारित होती है। वरिष्ठ अध्यापकों के तबादले एक संभाग से दूसरे संभाग में किए गए है। सोनी ने कहा कि चूंकि तबादला नीति नहीं है, इसलिए तबादलों में अनेक विसंगतियां हो रही है। विजय सोनी ने प्रदेश भर में शिक्षकों को राजनीति करने को लेकर अभियान चला रखा है। इस संबंध में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को भी पत्र दिया गया है। मोबाइल नंबर 9829087912 पर इस अभियान की जानकारी विजय सोनी से ली जा सकती है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 10-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

मोदी के नेतृत्व वाला एनडीए अब राज्यसभा में दो तिहाई बहुमत से मात्र 13 सीट दूर, लेकिन साधारण बहुमत से 28 सीटें ज्यादा। राज्यसभा से इस्तीफा देने वाले टीएमसी के तीनों सांसद अब पश्चिम बंगाल से भाजपा के उम्मीदवार। ममता बनर्जी का सफाया। ================ पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद टीएमसी के राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक ने इस्तीफा दे दिया था। लेकिन अब इन तीनों को भाजपा ने पश्चिम बंगाल से ही अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। बंगाल में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए 24 जुलाई को उप-चुनाव होना है। चूंकि विधानसभा में भाजपा के 208 विधायक है, इसलिए इन तीनों उम्मीदवारों की जीत तय है। यानी टीएमसी के इन नेताओं ने भाजपा के प्रति जो वफादारी दिखाई थी, उसका पुरस्कार अब इन तीनों को मिल गया है। राज्यसभा में मौजूदा समय में भाजपा के 113 सांसद हैं। इन तीनों की जीत के बाद संख्या 16 हो जाएगी। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए के राज्यसभा में सांसदों की संख्या 148 से बढ़कर 151 हो जाएगी। साधारण बहुमत के लिए 123 सदस्यों की जरूरत होती है यानी अब एनडीए के पास साधारण बहुमत से 28 सीटें ज्यादा है। राज्यसभा में दो तिहाई बहुमत के लिए 1645 सांसद चाहिए, जबकि एनडीए के पास 24 जुलाई के बाद 151 सांसद हो जाएंगे। यानी अब राज्यसभा में एनडीए दो तिहाई बहुमत से मात्र 13 सीट दूर है। कहा जा रहा है कि कई क्षेत्रीय दलों के सांसद एनडीए को समर्थन देने को तैयार है। जिस तरह एनडीए राज्यसभा में दो तिहाई बहुमत की ओर बढ़ रहा है,उससे भाजपा बेहद उत्साहित है। लोकसभा में भी एनडीए दो तिहाई बहुमत की ओर बढ़ रहे है। हाल ही में टीएमसी और आम आदमी पार्टी के सांसदों ने जिस तरह दल बदल किया है, उससे एनडीए की स्थिति और मजबूत हुई है। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी के लोकसभा के 27 सांसदों में से 20 ने अलग दल बना लिया है। अब ये सांसद लोकसभा में एनडीए को ही समर्थन दे रहे है। ममता बनर्जी को लोकसभा और राज्यसभा में ही झटका नहीं लगा है बल्कि विधानसभा में भी झटका लगा है। हाल ही में चुनाव में ममता बनर्जी के 80 विधायक बने, लेकिन इसमें से 60 विधायकों ने अलग दल बना लिया। यानी अब ममता बनर्जी के पास 20 विधायक रह गए है। देखा जाए तो पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी का पूरा सफाया हो गया है। जो ममता बनर्जी मुख्यमंत्री रहते हुए देश की संवैधानिक संस्थाओं का मजाक उड़ा रही थी, वही ममता बनर्जी अब बेहद कमजोर हो गई है। एक तरह से ममता बनर्जी को टीएमसी का पश्चिम बंगाल में कोई वजूद ही नहीं रहा है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 10-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

अजमेर की सबसे बड़ी समस्या सीवरेज और आनासागर के पानी की है। अजमेर में 2050 के विजन को लेकर स्वामी न्यूज की सकारात्मक पहल। ================ अजमेर के लोकप्रिय स्वामी न्यूज़ चैनल पर इन दिनों अजमेर 2050 के विजन को लेकर सकारात्मक पहल हो रही है। इसके अंतर्गत स्वामी न्यूज समूह के निदेशक कंवल प्रकाश किशनानी और जाने माने वरिष्ठ पत्रकार गिरधर तेजवानी अजमेर के प्रमुख व्यक्तियों और संस्थाओं के प्रतिनिधियों से सवाल जवाब कर रहे हैं। इसी क्रम में पत्रकारों के भी इंटरव्यू लिए जा रहे हैं। किशनानी और तेजवानी ने 7 जुलाई को मुझसे भी संवाद किया। चूंकि तेजवानी पत्रकारिता के क्षेत्र में मुझसे वरिष्ठ है, इसलिए उन्होंने मेरी पत्रकारिता के संबंध में भी सवाल पूछे। मैंने बताया कि मैंने पत्रकारिता तब शुरू की जब शब्द के लिए शीशे का उपयोग किया जाता था। तब शीशे के शब्दों को जमा कर अखबार का पेज तैयार होता था और फिर मशीन पर अखबार छपता था। फोटो के लिए ब्लॉक बनवाना पड़ता था, लेकिन अब जिस तकनीक के साथ अखबार छप रहे है, वह एक चमत्कारही है। प्रिंट मीडिया के साथ जब इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया भी आ गया है। मैंने बताया कि मेरे पिता कृष्ण गोपाल जी गुप्ता (अब स्वर्गीय) ने किन विपरीत परिस्थितियों में भभक पाक्षिक का प्रकाश किया। आज भी मुझे उन संघर्षों का स्मरण है। अजमेर की समस्या पर पूछे गए सवाल के जवाब में मेरा कहना रहा कि आज सबसे बड़ी समस्या सीवरेज और आनासागर के पानी की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महत्वाकांक्षी स्मार्ट सिटी के प्रोजेक्ट में भले ही अजमेर शहर को 2 हजार करोड़ रुपए खर्च किए गए हो, लेकिन सीवरेज की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ है। इंजीनियरों ने मुख्य सड़कों के बीच में सीवरेज की लाइन डाल दी। इसे दुर्भाग्यपूर्ण ही कहा जाएगा कि अजमेर की मुख्य सड़कों के बीच में सीवरेज के मैनहोल है। जब कभी पाइपों में पानी जाम हो जाता है तो सीवरेज का गंदा पानी उफन कर सड़कों में आ जाता है। बरसात के दिनों में तो सीवरेज का पानी सड़कों पर आना आम बात हे। जिस शहर की सड़कों पर सीवरेज का गंदा पानी बहता हो उस शहर की स्मार्टनेस का अंदाजा लगाया जा सकता है। सड़कों पर सीवरेज के मैनहोल होने से आए दिन दुर्घटनाएं भी होती है। सीवरेज के साथ साथ अजमेर की प्रमुख समस्या आनासागर की भी है। एक समय था, जब यह झील प्राकृतिक सौंदर्य में चार चांद लगाती थी, लेकिन आज यह झील मल मूत्र के कुंड में तब्दील हो गई है। आनासागर झील के चारों तरफ बसी कॉलोनियों से जुड़े 13 नालों का गंदा पानी इसी झील में गिरता है। नालों के गंदे पानी को रोकने के लिए स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में कोई ठोस उपाय नहीं किए गए। हालांकि आनासागर में ट्रीटमेंट प्लांट बनाया गया, लेकिन आमतौर पर यह प्लांट बंद रहता है। जिसकी वजह से पानी को शुरू किए बिना ही आनासागर में डाला जाता ाहै। चूंकि वर्ष भर गंदा पानी आनासागर में आता है, इसलिए थोड़ी सी ही बरसात में आनासागर ओवरफ्लो हो जाता है। ओवरफ्लो पानी से निलची बस्तियों के लोगों को कोई परेशानी न हो इसके लिए बरसात से पहले ही पानी की निकासी कर दी जाती है। अभी भी जलस्तर 10 फीट रखा हुआ है, जबकि भराव क्षमता 13 फीट की है। सकारात्मक प्रयास: विजन 2050 की शुरुआत कर स्वामी न्यूज चैनल ने सकारात्मक पहल की है। उम्मीद है कि इस पहल में जो सुझाव सामने आएंगे, उन्हें सरकार और प्रशासन गंभीरता से लेगा। समूह के निदेशक किशनानी ने बताया कि प्राप्त सुझावों को सरकार में उच्च स्तर तक भेजा जाएगा ताकि अजमेर का सही तरह से विकास हो सके। स्वामी न्यूज के इस प्रयास के बारे में और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9829070059 पर कंवल प्रकाश किशनानी से ली जा सकती है। मेरे इस इंटरव्यू को Facebook https://www.facebook.com/share/v/1DL4rKFnFR/ or YouTube :- https://youtube.com/live/o-9aTY1Aggs?feature=share पर देखा जा सकता है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 10-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

क्या बाड़मेर रिफाइनरी से जुड़ा है, केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के निजी स्टाफ को बदलने तथा बर्खास्त करने का मामला? 20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद सत्र में हंगामे के आसार। राजस्थान के मुख्यमंत्री से लगातार मुलाकातें। अलवर में कराई एनटीसीए की कार्यशाला पर 20 लाख का खर्च। ================ केंद्रीय वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव का देश की राजनीति में जबरदस्त दखल है। हाल ही में पश्चिम बंगाल में भाजपा को जो अभूतपूर्व सफलता मिली, उसके पीछे भी भूपेंद्र यादव की रणनीति रही। भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने चुनाव से एक वर्ष पहले ही यादव को बंगाल का प्रभारी नियुक्त कर दिया था। गुजरात सहित कई राज्यों में भाजपा की सरकार रिपीट करवाने में यादव का विशेष योगदान रहा। भूपेंद्र यादव भाजपा के उन नेताओं में शामिल हैं जो मीडिया से दूर रहकर प्रभावी भूमिका निभाते हैं। स्वाभाविक है कि जब ऐसे ताकतवर केंद्रीय मंत्री के निजी स्टाफ के चार सदस्यों को एक ही दिन में हटाया जाएगा तो फिर देशव्यापी चर्चा तो होगी ही। 3 जुलाई को जिन चार सदस्यों को हटाया गया उनमें भूपेंद्र यादव के निजी सचिव और आईआरएस कैडर के अमर सिंह तथा अतिरिक्त निजी सचिव शैलेश सिंह को अपने मूल कैडर में भेजा गया, जबकि अतिरिक्त निजी सचिव आयुष शरण तथा सहायक निजी सचिव सिद्धार्थ यादव को तो बर्खास्त ही कर दिया गया। हालांकि निजी स्टाफ को बदलने और बर्खास्त करने की कार्यवाही भूपेंद्र यादव के निर्देश पर ही हुई, लेकिन इस तरह एक ही दिन में निजी स्टाफ के अधिकांश सदस्यों को हटाने से इन दिनों राजनीति का माहौल गर्म है। मीडिया में प्रसारित हो रही खबरों के अनुसार सिद्धार्थ यादव भले ही सहायक निजी सचिव हो, लेकिन सिद्धार्थ यादव ही भूपेंद्र यादव की ओर से प्रदेश के मुख्यमंत्रियों, केंद्रीय मंत्रियों और भाजपा के प्रभावशाली नेताओं से संवाद करते थे। यानी किसी नेता को मिलना है तो सिद्धार्थ यादव ही तारीख और समय तय करते थे। मंत्रालय में तैनात सीनियर आईएएस भी सिद्धार्थ यादव के निर्देशों का पालन करते थे। किसी भी आईएएस में इतनी हिम्मत नहीं थी कि वे सिद्धार्थ यादव द्वारा दिए गए निर्देशों की पुष्टि केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से कर सके। चूंकि भूपेंद्र यादव का देश की राजनीति में दखल है, इसलिए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, राज्यसभा सांसद और सुप्रीम कोर्ट के प्रसिद्ध वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने भी ट्वीट किया है। सिंघवी ने कहा है कि केंद्रीय मंत्री के निजी स्टाफ में इतना बड़ा बदलाव अनेक आशंकाएं प्रकट करता है ।माना जा रहा है कि भूपेंद्र यादव से जुड़े इस प्रकरण को 20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद सत्र में भी उठाया जाएगा। विपक्ष यह मांग करेगा कि आखिर किन कारणों से भूपेंद्र यादव के पूरे निजी स्टाफ को हटाया गया है? बाड़मेर रिफाइनरी से जुड़े होने के कयास: बताया जा रहा है कि राजस्थान के बाड़मेर स्थित रिफाइनरी के निर्माण में पर्यावरण से जुड़ी स्वीकृतियों को लेकर जो विलंब और गड़बडिय़ां हुई। उन्हें देखते हुए भूपेंद्र यादव के निजी स्टाफ को हटाया और बर्खास्त किया गया। सूत्रों की माने तो रिफाइनरी का मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मादेी के संज्ञान में भी लाया गया और तब भूपेंद्र यादव से उच्च स्तर पर जवाब तलब किया गया। जो गड़बडिय़ां उजागर हुई उनकी जिम्मेदारी भूपेंद्र यादव ने अपने निजी स्टाफ पर डाल दी। यही वजह रही कि बाद में केंद्रीय मंत्री यादव को अपने निजी स्टाफ से एक साथ चार सदस्यों का हटाना पड़ा। हालांकि अभी निजी स्टाफ को हटाने को लेकर भूपेंद्र यादव की कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन इस प्रकरण से वन एवं पर्यावरण मंत्रालय में खलबली मची हुई है। राजस्थान के सीएम से लगातार मुलाकात: निजी स्टाफ को बदलने का मामला रिफाइनरी से जुड़े होने की खबरों को इसलिए भी बल मिल रहा है कि भूपेंद्र यादव राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से लगातार मिल रहे हैं। हालांकि केंद्रीय मंत्री का किसी मुख्यमंत्री से मिलना सामान्य बात है, लेकिन जब एक पखवाड़े में चार-पांच मुलाकात हो तो फिर चर्चा तो होती ही है। भूपेंद्र यादव ने गत माह 26 जून को सीएम शर्मा से जयपुर में अनेक सरकारी निवास पर मुलाकात की। 7 जुलाई को भी भूपेंद्र यादव सीएम शर्मा से मिलने के लिए दिल्ली स्थित राजस्थान के बीकानेर हाउस में जाकर मिले। आमतौर पर मुख्यमंत्री ही भूपेंद्र यादव से मिलने जाते हैं, लेकिन राजस्थान के सीएम से मिलने के लिए भूपेंद्र यादव स्वयं जा रहे हैं। अलवर से है लोकसभा के सांसद: भूपेंद्र यादव राजस्थान के अलवर से लोकसभा के सांसद हैं। कुछ मीडिया खबरों में यादव के निजी स्टाफ को हटाने के मामले को पश्चिम बंगाल की राजनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है। भले ही निजी स्टाफ को हटाने और बर्खास्त करने का मामला प्रशासनिक बताया जा रहा हो, लेकिन किसी मंत्री के एक साथ चार निजी स्टाफ को हटाना बेहद गंभीर है। चूंकि यह मामला भूपेंद्र यादव से जुड़ा है, इसलिए आने वाले समय में देश की राजनीति में और उछलेगा। अभी राष्ट्रीय मीडिया में सुर्खियां बना हुआ है। इंडियन एक्सप्रेस न्यूज़ समूह इस मामले में जहां खोजबीन कर रहा है। अलवर की सेमिनार पर 20 लाख खर्च: केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव की कार्यशैली त माह तब भी चर्चा में आई थी, जब यादव ने अपने संसदीय क्षेत्र अलवर में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण एनटीसीए की एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला करवाई। पांच सितारा होटल में हुई इस एक दिवसीय कार्यशाला पर 20 लाख रुपए खर्च किए गए। इस कार्यशाला में भूपेंद्र यादव भी उपस्थित रहे। यह कार्यशाला 28 जून 2026 को आयोजित की गई। इसमें देशभर से आए वन विभाग के 40 अधिकारियों ने भाग लिया। राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित खबर में कहा गया कि इतनी महंगी कार्यशाला तब की गई है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका ईरान के युद्ध को देखते हुए ईंधन बचत और मितव्ययिता की अपील की है। यानी केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने प्रधानमंत्री के निर्देशों की भी धज्जियां उड़ाई। S.P.MITTAL BLOGGER ( 09-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

एक ईरान है, जहां अपने दिवंगत नेता खामनेई के साथ सभी ईरानी खड़े हैं। यही ताकत सुपुर्द-ए-खाक की रस्म के दौरान भी ईरान को अमेरिका से जंग लड़ने की ताकत देती है। एक भारत है, जहां अपने ही लोग आराध्य देव राम के मंदिर को भी नहीं बख्श रहे। जबकि 25 करोड़ की मुस्लिम आबादी वाले इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुबियांटो तो स्वयं में भारत का डीएनए बताते हैं। ================ मुस्लिम देश ईरान में अपने दिवंगत नेता अयातुल्ला खामेनेई के सुपुर्द-ए-खाक की रस्म 9 जुलाई को संपन्न हो रही है। गत चार जुलाई से शुरू हुई जनाजे की रस्म में करोड़ों ईरान भाग ले रहे हैं। इसी बीच ईरान अपने दुश्मन अमेरिका के साथ जंग भी लड़ रहा है। यानी एक ओर ईरान अमेरिका की मिसाइलों का सामना कर रहा है। तो दूसरी ओर अपने दिवंगत नेता के साथ पूरी ताकत के साथ खड़ा है। ईरानियों की यह ताकत ही उन्हें अमेरिका के साथ लड़ने की शक्ति प्रदर्शन करता है। ये खामनेई वो ही नेता है, जिनकी कट्टरपंथी नीतियों के विरोध में गत वर्ष लाखों ईरानियों ने खासकर महिलाओं ने सड़कों पर प्रदर्शन किया था। लेकिन जब अमेरिका ने हमला किया तो सारे ईरानी एकजुट हो गए। आज इसी एकता के कारण ईरान की सेना खाड़ी देशों में अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर हमला कर रही है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भले ही ईरान को तबाह करने की धमकी दे, लेकिन ईरान ने जता दिया है कि जो नीति दिवंगत नेता खामनेई ने निर्धारित की है, उस पर ही ईरान चलेगा। यानी ईरान अमेरिका के सामने झुकेगा नहीं। एक और दुनिया के सामने ईरानियों की एकता है, तो वहीं भारत में अपने ही लोग आराध्य देव राम के मंदिर की छवि खराब करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे है। जबकि अयोध्या में जन्म स्थल वाली भूमि पर राम का मंदिर बनवाने में पांच सौ वर्ष लगे और लाखों राम भक्तों ने अपना बलिदान दिया। लंबे संघर्ष के बाद अयोध्या में राम मंदिर बन पाया। लेकिन अब मंदिर के चढ़ावा चोरी की आड़ में संपूर्ण सनातन संस्कृति और भगवान राम पर सवाल उठाए जा रहे हैं। उन लोगों को भी कटघरे में खड़ा किया जा रहा है जिन्होंने मंदिर निर्माण में अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया। यह सही है कि जिन लोगों ने चढ़ावा चोरी किया उन्हें सजा मिलनी चाहिए। लेकिन चढ़ावा चोरी की आड़ में सनातन संस्कृति को बदनाम नहीं किया जा सकता। गंभीर बात तो यह है कि जिन लोगों ने मंदिर निर्माण में बाधाएं खड़ी की आज वे ही स्वयं को राम भक्त बताकर चढ़ावा चोरी के मामले में बयानबाजी कर रहे हैं। उन लोगों के बलिदान पर पानी फेरने की कोशिश की जा रही है जिन्होंने अयोध्या में मंदिर का निर्माण करवाया। अयोध्या का मंदिर कोई साधारण भवन नहीं है बल्कि यह सौ करोड़ से ज्यादा हिंदुओं की आस्था का केंद्र है। जो चढ़ावा चोरी का मामला उजागर हुआ है, उसमें सभी सनातनियों को एकजुटता दिखानी चाहिए। लेकिन अपने ही लोग राजनीतिक स्वार्थों की खातिर सनातन संस्कृति को बदनाम कर रहे हैं। ऐसे लोगों को ईरानियों की एकता से सबक लेना चाहिए। भारत का डीएनए: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 6 और 7 जुलाई को इंडोनेशिया का दौरा किया। इंडोनेशिया में मुस्लिम आबादी 25 करोड़ है। इंडोनेशिया को मुस्लिम देश ही माना जाता है। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुबियांटो ने मोदी से मुलाकात के दौरान कहा, मुझ में भी भारत का डीएनए है। असल में भारत और इंडोनेशिया के बीच सभ्यता और संस्कृति जुड़ी हुई है। एक और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति है जो स्वयं में भारत का डीएनए बताते हैं, दूसरी ओर भारत में अपने ही लोग सनातन संस्कृति पर हमला करने से बाज नहीं आते। S.P.MITTAL BLOGGER ( 09-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामनेई के जनाजे और सुपुर्दे-ए-खाक की रस्म को अभूतपूर्व बनाने की योजना। शिया समुदाय में जनाजा अंतिम सफर नहीं, बल्कि इबादत माना जाता है। पहले सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खुमैनी के जनाजे में भगदड़ मचने से 10 ईरानियों की मौत हो गई थी। जनाजे में शामिल होने ईरान पहुंची जम्मू कश्मीर की पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती ने तेहरान में रील बनाई। ================ सब जानते हैं कि गत 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर जो हमला किया उसमें ईरान के सर्वोच्च धार्मिक लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई और उनके परिवार के 10 सदस्यों की मौत हो गई। तभी से खामेनेई के शव को सुरक्षित रखा गया और अब खामनेई के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया ईरान में बड़े पैमाने पर शुरू हो गई है। हालांकि खामनेई को 9 जुलाई को उनके पैतृक शहर मशहद में सुपुर्दे-ए-खाक किया जाएगा, लेकिन इससे पहले 4 जुलाई से ही खामेनेई को श्रद्धांजलि देने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके अंतर्गत 6 जुलाई को ख़ामेनई का जनाजा तेहरान से निकलेगा और 7 जुलाई को शिया समुदाय के धार्मिक स्थल कौम पहुंचेगा। इसके बाद नजफ शहर और कर्बला होते हुए जनाजे का जुलूस मशहद पहुंचेगा। जिस भी शहर से खामेनेई का जनाजा निकल रहा है, वहां लाखों शिया मुसलमानों की भीड़ है। हर ईरान एक बार अपने नेता के दर्शन करना चाहता है, इसके लिए होड़ मची हुई है। असल में शिया समुदाय में जनाजा अंतिम सफर नहीं बल्कि इबादत है। चूंकि जनाजा भी धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा हुआ है, इसलिए बड़ी संख्या में ईरानी नागरिक भाग ले रहे हैं। मौजूदा समय में दिवंगत खामनेई के पुत्र मुस्तबा खामनेई ईरान के सुप्रीम लीडर है, इसलिए दुनिया के 100 से भी ज्यादा प्रतिनिधि जनाजे की रस्म में भाग लेने पहुंचे हैं। भले ही अभी भी अमेरिका और इजरायल की नजरे ईरान पर टेड़ी हो, लेकिन जनाजे और सुपुर्दे-ए-खाक को ईरान में अभूतपूर्व मनाने की योजना है। माना जा रहा है कि जनाजे के जुलूस और सुपुर्दे-ए-खाक की रस्म तक दो करोड़ लोग शामिल होंगे। यही वजह है कि ईरान के सुरक्षा बल भी सतर्कता बरत रहे हैं। कड़ी सुरक्षा के बाद भी ईरान के अधिकारियों को आशंका है कि जनाजे और सुपुर्दे-ए-खा के अवसरों पर अप्रिय घटना हो सकती है। इसमें अनेक लोग मारे भी जा सकते हैं। असल में 1998 में जब ईरान के पहले सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खुमैनी के जनाजे के समय भी भगदड़ मच गई थी। लोग खुमैनी के दर्शन के लिए इतने उतावले थे कि कफन बॉक्स ही क्षतिग्रस्त हो गया। पुलिस को हालातों को नियंत्रण में करने के लिए गोली चलानी पड़ी, जिसमें 10 ईरानी मारे गए। बाद में खुमैनी के शव को हेलीकॉप्टर से ले जाना पड़ा। खुमैनी के समय के हालातों को देखते हुए ही खामनेई के अंतिम संस्कार को लेकर विशेष सुरक्षा बरती जा रही है। ईरान जब युद्ध की वजह से लहूलुहान है, तब अपने नेता को श्रद्धांजलि देने के लिए शिया समुदाय के दो करोड़ लोगों का जुटना यह बताता है कि दिवंगत खामनेई कितने लोकप्रिय थे। असल में खामनेई के जनाजे को अभूतपूर्व बनाने के पीछे अमेरिका और इजरायल को यह दिखाना है कि भले ही खामनेई को मार डाला हो, लेकिन ईरान में उनका विचार जिंदा है। ईरान के नेताओं ने कहा कि भी है कि खामनेई की मौत का बदला तो अमेरिका और इजरायल से लिया ही जाएगा। महबूबा ने रील बनाई: खामनेई के अंतिम संस्कार की रस्म में भाग लेने के लिए भारत की ओर से जो प्रतिनिधिमंडल ईरान पहुंचा है, उसमें जम्मू कश्मीर की पूर्व सीएम और पीडीपी की नेता महबूबा मुफ्ती भी शामिल हैं। तेहरान पहुंचने के बाद महबूबा उस स्थान पर गई जहां 28 फरवरी को खामनेई और उनके परिवार के सदस्यों की मौत हुई थी। महबूबा ने इस परिसर में घूमते हुए अपना एक वीडियो (रील) भी बनाया। महबूबा का यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

61 वर्षीय अभिनेता आमिर खान भले ही तीसरी शादी करे, लेकिन कम से कम सामाजिक मर्यादाओं का तो पालन करें। तीसरी शादी के रजिस्ट्रेशन के समय पहली और दूसरी पत्नियों तथा उनके बच्चों को उपस्थित रखने का क्या तुक है? जो लोग आमिर को अपना हीरो मानते हैं उन्हें आमिर खान की इस बेहयाई को भी समझना चाहिए। ================ मुंबइया हिन्दी फिल्मों के अभिनेता 61 वर्षीय आमिर खान ने 5 जुलाई को 47 वर्षीय गौरी स्प्रैट से तीसरी शादी कर ली। आमिर खान गौरी के साथ पिछले कुछ वर्षों से लिवइन में रह रहे थे। आमिर और गौरी ने जब भारतीय विवाह कानून के अंतर्गत अपने विवाह का रजिस्ट्रेशन करवाया तब आमिर की पहली पत्नी रीना दत्त और दूसरी पत्नी किरण राव के साथ साथ उनके बच्चे भी उपस्थित रहे। तीसरी पत्नी गौरी के पहले विवाह से उत्पन्न बेटा भी उपस्थित रहा। आमिर खान तीसरी के बाद भले ही चौथी शादी भी करें, लेकिन उन्हें सामाजिक मर्यादाओं का तो ख्याल रखना ही चाहिए। तीसरी शादी के रजिस्ट्रेशन के समय उपस्थित पहली और दूसरी पत्नी और उनके बच्चों के फोटो और वीडियो न्यूज़ चैनलों और अखबारों में प्रसारित हो रहे हैं। सवाल उठता है कि तीसरी शादी के समय पहली और दूसरी पत्नी को उपस्थित रख आमिर खान भारत के सभ्य समाज को क्या संदेश देना चाहते हैं? भारत सनातन संस्कृति वाला देश है, जहां भगवान राम को मर्यादा पुरुष माना जाता है जो लोग आमिर खान को अपना हीरो मानते हैं, उन्हें आमिर खान की इस बेहयाई को भी समझना चाहिए। क्या भारत के सभ्य समाज में यह संभव है कि एक व्यक्ति जब तीसरी शादी करे तो उसकी पहली व दूसरी पत्नी व बच्चे भी उपस्थित रहे? समझ में नहीं आता कि पहली पत्नी रीना दत्त और दूसरी पत्नी किरण राव आमिर की तीसरी शादी के समय क्यों उपस्थित रही? यहां अभिनेता सलमान खान का हाल ही में दिए गए बयान का उल्लेख करना जरूरी है। सलमान खान की उम्र भी 60 वर्ष हो गई है, लेकिन उन्होंने कहा कि वे विवाह इसलिए नहीं कर रहे हैं उन्हें तलाक से डर लगता है, बीवी जब तलाक लेती है तो बड़ी मात्रा में पैसा भी ले जाती है, एक और सलमान खान तलाक के डर से विवाह नहीं कर रहे तो दूसरी ओर आमिर खान तीसरे विवाह के अवसर पर पहली और दूसरी बीवी को उपस्थित रख रहे हैँ। S.P.MITTAL BLOGGER ( 06-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511