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प्रतिबंधित रक्त संबंधों के बीच विवाह पर रोक के नियम को मुस्लिम विरोधी न माना जाए। ब्लड रिलेशन में शादी होने से जनरेटिक (आनुवांशिक) बीमारियां भी साथ आती है। इसलिए सनातन संस्कृति में भाई-बहन के साथ साथ मौसी, चाची, मामा, बुआ आदि के बच्चों के बीच विवाह पर रोक है। ============== मध्यप्रदेश में विधानसभा का पांच दिवसीय सत्र 20 जुलाई से शुरू हो रहा है। इस सत्र में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक भी प्रस्तुत किया जाएगा। 19 जुलाई को मंत्रिमंडल की बैठक में यूसीसी विधेयक को मंजूरी दे दी गई। इस विधेयक में विवाह, तलाक, दत्तक ग्रहण जैसे मामलों में एक कानून लागू करने का प्रस्ताव है। विवाह के लिए लड़की की उम्र 18 और लड़के के लिए 21 वर्ष अनिवार्य की गई है। इसके साथ ही प्रतिबंधित रक्त संबंधों के बीच विवाह पर रोक लगाने का प्रावधान भी रखा गया है, लेकिन इस प्रावधान को लेकर मध्यप्रदेश में राजनीति भी शुरू हो गई है। प्रतिबंधित रक्त संबंधों के बीच विवाह को रोक लगाने के नियम को मुस्लिम विरोधी माना जा रहा है। कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों के नेता वोट की राजनीति के चलते कुछ भी कहे, लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञ भी मानते हैं कि ब्लड रिलेशन में विवाह होने से जनरेटिक यानी आनुवांशिक बीमारियां भी साथ आ जाती है। यानी विवाहित जोड़े के बच्चों को बीमारियां स्वत: ही मिल जाती है। आमतौर पर देखा गया है कि यदि किसी पिता को दम, शुगर बीपी आदि का रोग होता है तो उसके बच्चों को भी यह रोग हो ही जाता है। अब यदि ब्लड रिलेशन में ही विवाह होते हैं तो विवाहित जोड़े के बच्चों को भी स्वत: ही बीमारियों के गुण मिल जाते हैं। इस समस्या को देखते हुए ही मध्यप्रदेश सरकार ने समान नागरिक संहिता के विधेयक में प्रतिबंधित रक्त संबंधों के बीच विवाह को रोकने का प्रावधान किया है। इसलिए इसे मुस्लिम विरोध नहीं मानना चाहिए। देखा जाए तो यह नियम मुसलमानों के हित में ही है। हर धर्म के माता पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे स्वस्थ और निरोगी हो। कोई भी माता पिता यह नहीं चाहेगा कि उनके ब्लड की वजह से बच्चे संक्रमित हो। सनातन संस्कृति में रोक: भले ही चिकित्सा विज्ञान ने अब बताया हो कि ब्लड रिलेशन में विवाह हानिकारक है, लेकिन सनातन संस्कृति में तो पहले ही भाई बहन के साथ साथ मौसी, चाची, मामा बुआ आदि के बच्चों के बीच विवाह पर रोक है। चूंकि इन रिश्तों वाले लड़के-लड़की को भाई-बहन माना जाता है, इसलिए सनातन संस्कृति में भाई-बहन के बीच विवाह नहीं हो सकता। भले ही आधुनिक दौर में सनातन संस्कृति में भी अनेक परंपराओं को तोड़ा जा रहा है। लेकिन अधिकांश मामलों में ऐसे विवाह नहीं होते हैं। सनातन संस्कृति में तो एक ही गोत्र के बच्चों को भी भाई बहन माना गया है। इसलिए एक गोत्र में विवाह निषेध है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 20-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

राष्ट्रगान की तरह वंदे मातरम गीत को भी मिलेगा कानून संरक्षण। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह राज्यसभा में विधेयक प्रस्तुत करेंगे। सरकारी शिक्षण संस्थाओं में अनिवार्य रूप से गाया जाएगा वंदे मातरम। ============== 20 जुलाई से संसद का मानसूत्र सत्र शुरू हो रहा है। इस सत्र में हंगामा करने के लिए विपक्ष ने योजना बनाई है, लेकिन वहीं नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए की सरकार ने भी अपने नजरिए से देश हित में संसद में विधेयक प्रस्तुत करने की योजना बनाई है। जानकार सूत्रों के अनुसार केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह इसी सत्र में वंदे मातरम गीत को कानून संरक्षण देने के लिए विधेयक प्रस्तुत करेंगे। इस विधेयक की मंजूरी के बाद वंदे मातरम गीत को भी राष्ट्रगान की तरह कानूनी संरक्षण मिल जाएगा। यानी जिस प्रकार राष्ट्रगान गाना अनिवार्य है, उसी प्रकार वंदे मातरम गीत को गाना भी अनिवार्य होगा। यदि कोई व्यक्ति अपनी मान्यताओं के चलते वंदे मातरम गीत को नहीं गाता है तो उसके विरुद्ध कानूनी कार्यवाही हो सकती है। सरकार ने पहले से ही घोषणा कर रखी है कि देश भर के शिक्षण संस्थानों में वंदे मातरम गीत को गाना अनिवार्य है। चूंकि अभी वंदे मातरम को कानूनी संरक्षण नहीं मिला हुआ है, इसलिए अनेक शिक्षण संस्थानों में वंदे मातरम का गायन नहीं हो पा रहा है। सरकार ने इस स्थिति को देखते हुए ही मानसून सत्र में विधेयक प्रस्तुत करने का फैसला किया है। इसके लिए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने व्यापक तैयारियां की है। माना जा रहा है कि 20 जुलाई को मानसून सत्र के पहले दिन ही वंदे मातरम से जुड़े विधेयक को प्रस्तुत कर दिया जाएगा। विधेयक को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पेश करेंगे। वहीं विपक्ष के सूत्रों का कहना है कि वंदे मातरम की कानूनी अनिवार्यता का संसद के दोनों सदनों में विरोध किया जाएगा। असल में वंदे मातरम गीत के कुछ शब्दों पर मुस्लिम संगठनों को ऐतराज है। यही वजह है कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेता इस विधेयक का लगातार विरोध कर रहे हैं। जबकि सरकार का मानना है कि स्वतंत्रता आंदोलन में वंदे मातरम गीत की महत्वपूर्ण भूमिका रही। S.P.MITTAL BLOGGER ( 20-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

भारत के लोकतंत्र को खतरा होता तो अवकाश के दिन रविवार को सोनम वांगचुक की पत्नी की याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई नहीं होती। आखिर वांगचुक को सरकारी से प्राइवेट अस्पताल में क्यों शिफ्ट करवाना चाहती है पत्नी गीतांजलि? ============== विपक्ष खासकर कांग्रेस बार बार कहती है कि देश में लोकतंत्र खतरे में है। यदि विपक्ष का यह आरोप सही होता तो 19 जुलाई को रविवार के अवकाश के दिन भी सोनम वांगचुक की पत्नी डॉ. गीतांजलि की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट सुनवाई नहीं करता। डॉ. गीतांजलि चाहती थी कि उनके पति सोनम वांगचुक को दिल्ली के सरकारी सफदरजंग अस्पताल से प्राइवेट वेदांता में शिफ्ट कर दिया जाए। इसके लिए गीतांजलि ने रविवार को ही दिल्ली हाईकोर्ट को सूचित किया। डॉ. गीतांजलि के आग्रह को स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने अवकाश के दिन सुनवाई की। यह प्रदर्शित करता है कि देश में संवैधानिक संस्थाएं बिना किसी दबाव में काम कर रही है। देश के आम नागरिक को भी विशेष अधिकार मिले हुए हैं, जिसके अंतर्गत अवकाश वाले दिन भी हाईकोर्ट खुलता है। सवाल यह भी है कि आखिर डॉ. गीतांजलि अपने पति सोनम वांगचुक को सरकारी से प्राइवेट अस्पताल में क्यों शिफ्ट करना चाहती है? सब जानते हैं कि किसी भी प्राइवेट अस्पताल से ज्यादा सुविधाएं सरकारी अस्पताल में होती है। दिल्ली का सफदरजंग अस्पताल तो सरकार की शान है। यही वजह है कि कांग्रेस की शीर्ष नेता श्रीमती सोनिया गांधी भी जरुरत पडऩे पर इलाज के लिए सफदरजंग अस्पताल ही आती है। मालूम हो कि सोनम वांगचुक को 18 जुलाई को ही अनशन स्थल जंतर मंतर से उठाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चूंकि वांगचुक गत 20 दिनों से अनशन पर थे, इसलिए उनके स्वास्थ्य को देखते हुए पुलिस को कार्यवाही करनी पड़ी। सोनम वांगचुक स्वस्थ रहे, इसकी जिम्मेदारी अब सफदरजंग अस्पताल और सरकार की है। लेकिन यदि वांगचुक किसी प्राइवेट अस्पताल में भर्ती रहते हैं तो फिर उनके जीवन की जिम्मेदारी पत्नी गीतांजलि की होगी। वांगचुक के जीवन को अमूल्य मानते हुए ही हाईकोर्ट ने भी प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट करने की अनुमति नहीं दी है। यह बात अलग है कि कि डॉ. गीतांजलि हाईकोर्ट के फैसले से संतुष्ट नहीं है और अब सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर रही है। डॉ. गीतांजलि की न्यायिक सक्रियता भी दिखाती है कि उन्हें लोकंत्र के हर स्तर पर अपनी बात रखने का अधिकार है। एक और डॉ. गीतांजलि अपने पति को प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट करने की जिद पर अड़ी हुई है तो वहीं सरकार के विरुद्ध मोर्चा भी खोल रखा है। डॉ. गीतांजलि ने कहा कि 20 जुलाई को जंतर मंतर से संसद तक होने वाले मार्च का नेतृत्व वे स्वयं करेंगी। उल्लेखनीय है कि नीट परीक्षा में गड़बड़ी होने के विरोध में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर ही वांगचुक ने आमरण अनशन शुरू किया था। S.P.MITTAL BLOGGER ( 20-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

वर्ष 2024 से आनासागर में मछलियों को निकालने का ठेका ही नहीं हुआ, इसलिए क्षमता से ज्यादा मछलियां। एसटीपी बनने से पहले विश्राम स्थली में प्रति वर्ष उर्स में 20 हजार जायरीन ठहरते थे। गत वर्ष 1250 एफटीएफ पानी की निकासी हुई, इस से चार आनासागर भर जाते। कांग्रेस के शासन में पूर्व विधायक डॉ. बाहेती और डॉ. जयपाल स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के डायरेक्टर बने थे। ============== अजमेर के बीचों बीच बने आनासागर में इन दिनों रोजाना बड़ी संख्या में मछलियां मर रही है, मछलियों के मरने की खबरें मीडिया में छाई हुई है। मरी मछलियों की दुर्गंध से आसपास के लोगों का रहना मुश्किल हो रहा है। असल में मछलियों के मरने का एक प्रमुख कारण आनासागर में क्षमता से अधिक मछलियों का होना है। वर्ष 2024 में आनासागर में मछलियों को निकालने का ठेका ही नहीं दिया गया। वर्ष 2024 से पहले प्रतिवर्ष मत्स्य विभाग आनासागर का ठेेका देता था। इससे सरकार को राजस्व की प्राप्ति होने के साथ साथ मछलियों को भी निकाल लिया जाता था। संबंधित ठेकेदार ही काफी हद तक आनासागर में साफ सफाई का काम भी करता था। प्रतिवर्ष मछलियां निकालने से मछलियों और आनासागर के पानी के बीच संतुलन भी बना रहता था। अब जब 2024 मछली निकालने का काम हो ही नहीं रहा है, तब मछलियों की बढ़ती संख्या का अंदाजा लगाया जा सकता है। इसमें कोई दो राय नहीं कि मानसून को देखते हुए आनासागर से करीब डेढ़ दो फीट पानी की निकासी की गई। उम्मीद थी कि जुलाई माह में ही मानसून की बरसात हो जाएगी, लेकिन बरसात न होने और आनासागर की क्षमता से ज्यादा मछलियों की संख्या होने के कारण इन दिनों प्रतिदिन मछलियां मर रही है। अच्छा हो कि पूर्व की तरह आनासागर से मछलियों के निकालने का ठेका दिया जाए। जहां तक आनासागर से डेढ़ फीट पानी की निकासी का सवाल है तो गत वर्ष अच्छी बरसात के कारण आनासागर से 1250 एफटीएफ पानी की निकासी की गई। इस पानी से चार आनासागर भरे जा सकते थे। आनासागर का जल स्तर 13 फीट है और भराव क्षमता 250 एफटीएफ पानी की है। सब जानते हैं कि जब आनासागर से एस्केप चैनल के जरिए पानी की निकासी होती है तो शहर भर के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। सुभाष बाग, ब्रह्मपुरी, जयपुर रोड आदि के क्षेत्रों में तो यातायात ही बंद करना पड़ता है। बरसात से पहले आनासागर से पानी की निकासी पिछले कई वर्षों से की जा रही है ताकि बरसात के दिनों में शहरवासियों को परेशानी न हो। 20 हजार जायरीन ठहरते थे: आनासागर के भराव क्षेत्र में ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का निर्माण वर्ष 2015 में हुआ। एसटीपी के बनने से पहले आनासागर का बड़ा भूभाग खाली रहता था। इसलिए पुष्कर रोड की विश्राम स्थली में प्रतिवर्ष ख्वाजा साहब के उर्स के दौरान 20 हजार जायरीन करीब 10 दिनों तक ठहरते थे। पुष्कर रोड के निवासियों को पता है कि जायरीन के चलते जाने के बाद हालात कितने विकराल होते थे, लेकिन वर्ष 2014-15 में एसटीपी यानी ट्रीटमेंट प्लांट के शुरू हो जाने से आनासागर में पानी वर्ष भरा भरा रहने लगा। चूंकि आनासागर खासकर कोटड़ा क्षेत्र में तेजी से आबादी बढ़ी इसलिए घरों से निकालने वाले पानी की मात्रा भी बढ़ गई। सीवरेज योजना के तहत घरों से निकलने वाली पानी की पाइप लाइन के जरिए एसटीपी तक लाया गया और फिर पानी को शुद्ध कर आनासागर में डाला गया। चूंकि वर्ष भर पानी की आवक रहती है, इसलिए आनासागर में हमेशा पानी भरा रहता है। डेढ़ फीट पानी की निकासी के बाद भी मौजूदा समय में जलस्तर 10.8 फीट है। वर्षा न होने के बाद भी आनासागर में पानी की आवक जारी है, इसलिए आनासागर का जलस्तर और बढ़ जाएगा। बाहेती और जयपाल बने थे डायरेक्टर: कांग्रेस आज भले ही स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के कार्यों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रही हो, लेकिन स्मार्ट सिटी के अधिकांश कार्य गत कांग्रेस के पांच वर्ष के शासन में ही हुए। अशोक गहलोत के मुख्यमंत्री और रघु शर्मा के चिकित्सा मंत्री रहते हुए ही स्मार्ट सिटी के कार्यों का निर्धारण हुआ। आनासागर के चारों तरफ पाथवे का अधिकांश निर्माण कार्य कांग्रेस के शासन में ही हुआ। तब किसी भी कांग्रेस नेता ने आनासागर की भराव क्षमता कम होने का विरोध नहीं किया। इतना ही नहीं अजमेर की राजनीति से जुड़े पूर्व विधायक डॉ. श्रीगोपाल बाहेती और डॉ. राजकुमार जयपाल (शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष) को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में राज्य सरकार की ओर से डायरेक्टर भी बनाया गया। डायरेक्टर बनाए जाने के संबंध में डॉ. बाहेती और डॉ. जयपाल का कहना है कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट केंद्र सरकार का था, इसलिए नियुक्ति के कुछ दिनों बाद ही उन्हें हटा दिया गया। डॉ. बाहेती ने तो प्रोजेक्ट से जुड़ी एक भी बैठक में भाग नहीं लिया। विशेष सतर्कता: नगर निगम के अधीक्षण अभियंता मनोज सोनगरा ने बताया कि आनासागर में मछलियों के मरने की स्थिति को देखते हुए विशेष सतर्कता बरती जा रही है। मृत मछलियों को हाथों हाथ उठाया जा रहा है तथा आनासागर में चूना डालने का काम लगातार जारी है। निगम प्रशासन का प्रयास है कि मछलियां कम से कम मरे तथा आसपास की कॉलोनियों के निवासियों को कोई परेशान न हो। आनासागर पर चौबीस घंटे निगरानी का काम किया जा रहा है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 18-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

राहुल गांधी के मिलने और संसद मार्च से पहले ही सोनम वांगचुक को दिल्ली के जंतर-मंतर से हटाया। पुलिस ने यह कार्यवाही दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश से की। हरियाणा के जींद-सोनीपत के बीच चली हाइड्रोजन ट्रेन। ============== 18 जुलाई को सुबह सुबह सोनम वांगचुक को दिल्ली के जंतर मंतर से उठाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करवा दिया गया। वांगचुक गत 20 दिनों से आमरण अनशन पर थे। वांगचुक नीट पेपर में गड़बड़ी के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर आमरण अनशन पर थे। 17 जुलाई को ही वांगचुक ने घोषणा की थी कि 20 जुलाई को जब संसद का मानसून सत्र होगा, तब वे जंतर मंतर से संसद तक मार्च करेंगे। जानकार सूत्रों के अनुसार 18 जुलाई को ही लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी भी वांगचुक से मिलने के लिए जंतर मंतर पर आ रहे थे। लेकिन राहुल गांधी के आने और 20 जुलाई को संसद मार्च से पहले ही वांगचुक को जंतर-मंतर से हटा दिया गया। दिल्ली पुलिस का कहना है कि कार्यवाही हाईकोर्ट के आदेश से की गई है। हाईकोर्ट ने कहा था कि वांगचुक का स्वास्थ्य लगातार बिगड़ रहा था, इसलिए पुलिस को वांगचुक को अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा। अब वांगचुक चिकित्सकों की निगरानी में है। वहीं पुलिस ने लोगों से कहा कि जंतर-मंतर पर भीड़ न लगाई जाए। असल में 20 दिन के आमरण अनशन के बाद भी वांगचुक को जनसमर्थन नहीं मिल रहा था। हालांकि कॉकरोच पार्टी के कुछ समर्थक जंतर मंतर पर आए, लेकिन उनकी संख्या इतनी नहीं थी कि सरकार पर कोई दबाव डाल सकै। जनसमर्थन नहीं मिलने का परिणाम ही रहा कि आमरण अनशन के दौरान सरकार के किसी भी प्रतिनिधि ने वांगचुक से संवाद नहीं किया। सरकार द्वारा संवाद नहीं किए जाने का एक कारण वांगचुक की राजनीतिक पृष्ठभूमि भी रही। असल में वांगचुक लद्दाख में रहकर चीन का समर्थन करते रहे। इसलिए वांगचुक को भारत में चीन का प्रतिनिधि माना गया। सरकार नहींचाहती कि लद्दाख में वांगचुक जैसे चीन समर्थकों को मजबूती मिले। वांगचुक को जंतर मंतर से हटाए जाने के बाद 20 जुलाई को संसद मार्च धरा रहा गया है। असल में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पार्टियां देश में युवा पीढ़ी (जेनजी) को मोदी सरकार के खिलाफ उकसाने का प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में सोनम वांगचुक के अनशन को भ देखा जा रहा था। लेकिन विपख की लाख कोशिश के बाद भी युवा वर्ग मोदी सरकार के खिलाफ सड़क पर नहीं आ रहा। हाइड्रोजन ट्रेन: कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल जेनजी को कितना भी उकसाए, लेकिन देश के युवा वर्ग को पता है कि गत 12 वर्षों में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में न केवल देश का तेजी से विकास हुआ, बल्कि युवाओं को रोजगार के पर्याप्त अवसर मिले हैं। इसका ताजा उदाहरण 17 जुलाई को हरियाणा में जींद और सोनीपत के बीच 89 किलोमीटर में हाइड्रोजन ट्रेन का चलना है। यूं तो 4 कोच वाली हाइड्रोजन ट्रेन जापान, चीप, फ्रांस, अमेरिका आदि देशों में चल रही है, लेकिन 10 कोच वाली ट्रेन भारत में दुनिया की पहली ट्रेन है। हाइड्रोजन ट्रेन के शुभारंभ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के युवा वर्ग के सामने भारत की उजली तस्वीर को भी रखा। मोदी ने कहा कि उनके प्रधानमंत्री बनने से पहले देश में रेलवे में 30 प्रतिशत ही विद्युतीकरण हुआ था। यानी अधिकांश ट्रेने डीजल से संचालित हो रही थी। उनके 12 वर्ष के कार्यकाल में रेलवे में 100 प्रतिशत विद्युतीकरण हो गया है। यानी आज अधिकांश ट्रेन बिजली से चल रही है। यदि वर्ष 2012 से पहले के हालात होत तो डीजल की खपत का अंदाजा लगाया जा सकता है। अब जब अमेरिका और ईरान के युद्ध की वजह से पूरी दुनिया में तेज का संकट हो गया है, तब कल्पना कीजिए कि यदि भारत की ट्रेने डीजल से चलती तो हालात कितने खराब होते। यदि देश में रेलवे में विद्युतीकरण नहीं होता तो आज हमें डीजल के अभाव में ट्रेनों का संचालन को बंद करना पड़ता। देश के इस विकास को युवा पीढ़ी समझती है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 18-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

क्या राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष डोटासरा के खिलाफ हाईकोर्ट की अवमानना का मामला दर्ज होगा? पंचायतीराज और शहरी निकायों के चुनाव भजन सरकार की इच्छा पर निर्भर है। ============== राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने 16 जुलाई को हाईकोर्ट की अवमानना करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। डोटासरा ने सार्वजनिक तौर परक हा कि आखिर पंचायतीराज और शहरी निकायों के चुनाव करावने के मामले में हाईकोर्ट कितनी बार तारीखें देगा। यदि हाईकोर्ट की अवमानना की सुनवाई के दौरान भी तारीख दे दी जाएगी तो फिर हाईकोर्ट की कथनी और करनी में फर्क दिखेगा। डोटासरा ने हाईकोर्ट के एक्टिग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित से आग्रह किया कि वे न्याय करे। डोटासरा ने 16 जुलाई को यह बयान तब दिया, जब सीजेआई शर्मा और जस्टिस पुरोहित ने हाईकोर्ट की अवमानना के मामले में एक बार फिर तारीख दे दी। डोटासरा ने जो बयान दिया वह हाईकोर्ट की अवमानना के दायरे में आता है। कोई भी व्यक्ति मुंसीफ कोर्ट की कार्यशैली को लेकर सार्वजनिक टिप्पणी करता है तो उसे कोर्ट की अवमानना ही माना जाता है। डोटासरा ने तो सीधे सीजेआई शर्मा और जस्टिस पुरोहित की कार्यशैली को ही कटघरे में खड़ा कर दिया। देखना होगा कि क्या हाईकोर्ट डोटासरा पर मानहानि का मामला दर्ज करता है? ऐसे मामलों में कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेकर मानहानि करने वाले को तलब किया है। जहां तक राजस्थान में पंचायतीराज और शहरी निकायों के चुनाव करवाने का सवाल है तो यह भजनलाल शमा्र के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार की इच्छा पर निर्भर है। राजस्थान हाईकोर्ट ने पहले 15 अप्रैल और फिर 31 जुलाई तक चुनाव करवाने के आदेश दिए थे। हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी सरकार के मंत्रियों ने कह दिया कि चुनाव तो नवंबर दिसंबर में होंगे। इस बीच हाईकोर्ट के आदेशों की अवमानना का मामला प्रस्तुत हो गया। अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए ही 16 जुलाई को सीजेआई शर्मा और जस्टिस पुरोहित ने राज्य सरकार, चुनाव आयोग और ओबीसी आयोग को जवाब देने के लिए 20 जुलाई की तारीख दे दी। याचिकाकर्ताओं को उम्मीद थी कि 16 जुलाई को हाईकोर्ट का सख्त रुख सामने आएगा, लेकिन हाईकोर्ट ने अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान ओबीसी आयोग से जानना चाहा कि आयोग की रिपोर्ट कब तक आ जाएगी। मीडिया में प्रसारित हो रहा है कि चुनाव नहीं करवाने को लेकर कोर्ट ने राज्य सरकार, चुनाव आयोग और ओबीसी आयोग को फटकार लगाई है। यदि हाईकोर्ट स्वयं के आदेशों की अवहेलना को मानता तो 16 जुलाई को ही संबंधित संस्थाओं के अधिकारियों को जेल भेजने के आदेश दे देता। लेकिन स्वयं के आदेश की अवहेलना हो जाने के बाद भी संबंधित संस्थाओं से ही जवाब मांगा जा हा है। चुनाव आयोग पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि चुनाव प्रक्रिया में 90 दिन लगेंगे और चुनाव की प्रक्रिया तभी शुरू होगी, जब राज्य सरकार ओबीसी वर्ग का आरक्षण निर्धारित कर देगी। सरकार आरक्षण का तभी निर्धारण कर पाएगी जब ओबीसी आयोग अपनी रिपोर्ट देगा। पूर्व न्यायाधीश भाटी की अध्यक्षता में गठित ओबीसी आयोग अपनी रिपोर्ट सरकार को कब देगा, यह किसी को भी पता नहीं है। इसलिए माना जा रहा है कि राजस्थान में भजनलाल शर्मा की सरकार जब चाहेगी, तब पंचायतीराज और शहरी निकायों के चुनाव होंगे। हाईकोर्ट यदि कोई आदेश दे भी देता है तो अभी सुप्रीम कोर्ट शेष है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 17-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

चीन समर्थक सोनम वांगचुक के आमरण अनशन को जनसमर्थन नहीं मिल रहा। अब वो जमाना गुजर गया, जब देश को गाली देकर हीरों बन जाते थे। ============== लद्दाख में रहकर चीन के समर्थन में बयान देने वाले सोनम वांगचुक का 17 जुलाई को दिल्ली के जंतर मंतर पर 20वें दिन भी आमरण अनशन जारी रहा। चिकित्सकों का आकलन है कि वांगचुक अभी कुछ दिन और अनशन पर रह सकते हैं। फिलहाल उनके जीवन को कोई खतरा नहीं है, लेकिन वांगचुक के कुछ समर्थकों को आश्चर्य है कि इतने लंबे अनशन के बाद भी वांगचुक को जनसमर्थन नहीं मिल रहा है। वांगचुक के समर्थन में जो कुछ युवा आ रहे हैं उनकी पृष्ठभूमि दिल्ली के जेएनयू की है। इसलिए अनशन स्थल पर देश विरोधी और सनातन संस्कृति के विरुद्ध भाषण और नारेबाजी हो रही है। वांगचुक नीट परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। हालांकि इस मांग पर केद्र सरकार की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है, क्योंकि धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पहले ही खारिज की जा चुकी है। वांगचुक के आमरण अनशन को जनसमर्थन नहीं मिलने से यह प्रदर्शित हो रहा है कि जब भारत में राष्ट्रवाद की भावना प्रबल है। वो जमाना गुजर गया जब अपने ही देश और सनातन संस्कृति को गाली देकर हीरो बन जाते थे। अनुच्छेद 370 के हटने से पहले जम्मू कश्मीर के अलगाववादी नेता भी अपने देश को गालियां देते थे और जनता की नजर में हीरो बन जाते थे। कांग्रेस के भी कई नेता देश विरोधी बयान देते थे। तब यह मान लिया गया कि देश की आलोचना करने वाले ही नेता बन सकते हैं, लेकिन भारत में वर्ष 2014 के बाद जो बदलाव आया, उसमें राष्ट्रवाद की भावना प्रबल हुई। जो लोग अपने ही देश की आलोचना करते थे, उन सबको जनता ने किनारे कर दिया। जिन लोगों ने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाकर और अयोध्या में राम मंदिर बनवाकर सनातन संस्कृति को मजबूत किया उन्हें जनता ने सत्ता सौंपी। चूंकि सोनम वांगचुक भी समय समय पर अपने देश की आलोचना कर चीन के गुणगान करते रहे, इसलिए आज आमरण अनशन के बाद भी जनसमर्थन नहीं मिल रहा है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के नेताओं को उम्मीद थी कि वांगचुक के आमरण अनशन से देश भर के युवा एकजुट होंगे, लेकिन इस उम्मीद पर पानी फिर गया। अच्छा हो कि वांगचुक अपना अनशन समाप्त कर लद्दाख लौट जाए और लद्दाख में रहकर देश की एकता और अखंडता के लिए काम करें। यदि वांगचुक देशहित में काम करेंगे तो उनके एक दिन के अनशन का भी असर होगा और देश की जनता उन्हें सिर पर बैठाएगी। लेकिन यदि वांगचुक अपने ही देश और संस्कृति को गालियां देंगे तो उनके अनशन का कोई असर नहीं होगा। आज पूरा देश अयोध्या में राम मंदिर के बनने से गौरवान्ति है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 17-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

मानसून के धोखा दे देने से अजमेर के आनासागर में मछलियां मर रही है। यदि तीन फीट पानी की निकासी नहीं की जाती तो आनासागर से अचानक निकलने वाले पानी से शहर भर में मुसीबत होती। कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन अपनी जगह है। ============== अजमेर शहर के बीचों बीच बने आनासागर में इन दिनों हजारों मछलियां प्रतिदिन मर रही है। इसका कारण आनासागर में पानी की कमी होना है। असल में मानसून को देखते हुए प्रशासन ने आनासागर से तीन फीट पानी की निकासी कर दी। प्रशासन को उम्मीद थी कि मानसून की बरसात का पानी आनासागर में आ जाएगा, लेकिन इस बार मानसून ने धोखा दे दिया। बरसात का पानी नहीं आने के कारण आनासागर सूखा रह गया और अब मछलियां मर रही है। लेकिन सवाल उठता है कि यदि बरसात से पूर्व आनासागर को खाली नहीं किया जाता और बरसात का पानी आ जाता, तब उत्पन्न होने वाले हालातों का कौन जिम्मेदार होता? आनासागर का ओवरफ्लो पानी एस्केप चैनल के जरिए शहर से होकर ही निकलता है। प्रतिवर्ष एस्केप चैनल के ओवरफ्लो होने से शहर भर के लोगों को परेशानी होती है। दक्षिण क्षेत्र की निचली बस्तियों में तो एस्केप चैनल का पानी भर ही जाता है, साथ ही शहर के प्रमुख मार्ग भी बंद हो जाते हैं। प्रमुख मार्ग कई दिनों तक बंद रहते हैं। गत वर्ष भी बरसात के दिनों में शहर के लोगों ने आनासागर के पानी से उत्पन्न हुई परेशानियों को झेला था। गत वर्ष की तरह शहरवासियों को परेशानी न हो इसको देखते हुए ही प्रशासन ने मानसून से पहले आनासागर को तीन फीट खाली कर दिया, लेकिन मानसून ने धोखा दे देने से आनासागर खाली रह गया। अब उन स्थानों पर मछलियां मर रही है, जहां पानी की कमी है या जमीन पूरी तरह सूख गई है। मछलियों के मरने से दुर्गंध का माहौल है। जिला कलेक्टर लोकबंधु के निर्देश पर नगर निगम के सफाई कर्मियों आनासागर से मरी मछलियों को उठाने का काम कर रहे हैं। निगम के अधीक्षण अभियंता मनोहर सोनगरा ने बताया कि प्रतिदिन बड़ी संख्या में मृत मछलियों का निस्तारण किया जा रहा है। इसके साथ ही आनासागर में चूना डाला जा रहा है ताकि पानी में ऑक्सीजन की मात्रा बनी रहे, सोनगरा ने कहा कि बरसात का थोड़ा पानी आते ही मछलियों के मरने का सिलसिला बंद हो जाएगा। उन्होंने बताया कि आनासागर में वर्षभर पानी का स्तर बना रहता है, क्योंकि आसपास की कॉलोनियों के पानी को शुद्ध कर आनासागर में डाला जाता है। इसके लिए आनासागर के भराव क्षेत्र में 13 एमएलडी पानी की क्षमता वाला ट्रीटमेंट प्लांट लगा रखा है। विरोध अपनी जगह: आनासागर में मछलियों के मरने को लेकर 16 जुलाई को शहर कांग्रेस के अध्यक्ष डॉ. राजकुमार जयपाल के नेतृत्व में धरना प्रदर्शन किया गया। चूंकि कांग्रेस विपक्ष में है, इसलिए उसे विपक्ष का धर्म निभाना चाहिए। लोकतंत्र में विपक्ष को शासन प्रशासन की खामियों की आलोचना करने का अधिकार है। विपक्ष के विरोध का भी प्रशासन पर असर होता है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 17-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

आनासागर में आने वाले 13 में से 10 नालों का पानी ट्रीट (शुद्ध) होकर ही गिर रहा है। 7 एमएलडी क्षमता वाला ट्रीटमेंट प्लांट 8 अगस्त से शुरू हो जाएगा। गंदे पानी को ट्रीट करने की प्रक्रिया को अजमेर का कोई भी नागरिक प्लांट पर आकर देख सकता है। मछलियों को बचाने के लिए आनासागर में चूना डाला और फाउंटेन भी चले। कलेक्टर लोकबंधु के निर्देश पर प्रभावी कार्यवाही ================ अजमेर के आनासागर में मर रही मछलियों, पानी में ऑक्सीजन की कमी ओर नालों का गंदा पानी गिरने की लोकर 13 जुलाई को मैंने ब्लॉग संख्या 12353 लिखा था। इस ब्लॉग पर जिला कलेक्टर लोक बंधु के निर्देश पर नगर निगम की कार्यवाहक आयुक्त नित्या के (आईएएस) ने प्रभावी कार्यवाही करवाई। आनासागर में जिन स्थानों पर मरी हुई मछलियां पड़ी थी, उन्हें तत्काल प्रभाव से हटाया गया है ताकि कुत्ते और मांसाहारी पक्षी गंदगी न फैलाए। आनासागर के पानी में ऑक्सीजन की मात्रा को बढ़ाने के लिए नाव से बड़ी मात्रा में चूना डाला गया है। इतना ही नहीं फाउंटेन चलाकर ऑक्सीजन को बढ़ाने के प्रयास भी किए गए है। आनासागर के संरक्षण से जुड़े नगर निगम के अधीक्षण अभियंता मनोहर सोनगरा ने बताया कि जिन स्थानों पर पानी का अभाव रहा, वहां मछलियां मरी है, लेकिन भविष्य में मछलियों के मरने की घटना न हो इसके लिए अब प्रभावी कदम उठाए हैं। आवश्यकता होने पर आनासागर में सूखे चूने को और डलवाया जाएगा। उन्होंने बताया कि चूने में मिक्स पदार्थों से पानी में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है। इस बात का भी ख्याल रखा जा रहा है कि आनासागर कि किनारे सूखी जमीन पर समुचित साफ सफाई हो, ताकि आवरा जानवर गंदगी न फैलाए। अभी जो कचरा पड़ा है, उसे भी युद्ध स्तर पर उठाने का काम किया जा रहा है। नालों का पानी ट्रीट हो रहा है: जिला कलेक्टर लोक बंधु के निर्देश दिए कि यह सुनिश्चित किया जाए कि आनासागर में नालों का पानी ट्रीट शुरू कर ही डाला जाए। सीवरेज और नालों के गंदे पानी को शुद्ध करने के संबंध में नगर निगम के अधिशासी अभियंता (सीवरेज योजना) रविंद्र जैन ने बताया कि जिन 13 नालों का पानी आनासागर में आता है, उनमें से 10 नालों के पानी को आनासागर के किनारे लगे ट्रीटमेंट प्लांट तक लाया जाता है। गंदे पानी को शुद्ध करने के बाद ही आनासागर में छोड़ा जा रहा है। ट्रीटमेंट प्लांट में पानी की शुद्धता के जो पैरामीटर निर्धारित कर रखे हैं, उसमें एक लीटर पानी में 2.5 मिलीग्राम ऑक्सीजन की मात्रा होनी चाहिए। इस पैरामीटर को आनासागर में पूरा किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त और जो तकनीकी मापदंड है, उन्हें भी पूरा किया जा रहा है। मौजूदा प्लांट की क्षमता प्रतिदिन 13 एमएलडी पानी को शुद्ध करने की है। अभी 11 एमएलडी से ज्यादा पानी प्रतिदिन शुद्ध किया जा रहा है। एक्सईएन जैन ने प्लांट पर खड़े होकर कांच के दो बार अपने हाथ में लिए एक जार में गंदा पानी और दूसरे जार में प्लांट में शुद्ध हुआ पानी भरा। और यह बताने का प्रयास किया कि आनासागर में कितना शुद्ध पानी छोड़ा जा रहा है। जैन ने कहा कि आनासागर का ट्रीटमेंट प्लांट पूरी तरह कम्प्यूटराइज्ड है। कम्प्यूटर से ही प्लांट की इकाइयों को संचालित किया जाता है। ऐसे में गंदे पानी को आनासागर में नहीं छोड़ा जा सकता है। ट्रीटमेंट प्लांट की इस पारदर्शी प्रक्रिया को अजमेर का कोई भी नागरिक आकर देख सकता है। उन्होंने कहा कि जब प्लांट पर पानी को मापदंड के अनुरूप शुरू किया जा हा है तो निगम प्रशासन के पास छिपाने को कुछ भी नहीं है। उन्होंने माना कि मौजूदा समय में काजी का नाला, नागफनी का नाला और महावीर कॉलोनी के नाले के पानी को शुद्ध नहीं किया जा रहा है। इन नालों का पानी फिलहाल पाइपों में ही संग्रहित रखा गया है। उन्होंने बताया कि मौजूदा प्लांट के पास ही 7 एमएलडी की क्षमता वाला एक और प्लांट लग रहा है। इन नए प्लांट में भी 8 अगस्त से गंदे पानी को ट्रीट करने का काम शुरू हो जाएगा। नए प्लांट के शुरू होने के बाद आनासागर में आने वाले सभी 13 नालों के पानी को शुद्ध किया जा सकेगा। जैन ने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा कि आनासागर के ट्रीटमेंट प्लांट से जुड़ी सीवरेज लाइनें अब सुचारू काम कर रही है। इसलिए इस क्षेत्र में सीवरेज चैंबर के ओवरफ्लो होने की घटनाएं नहीं हो रही। यानी घरों से निकलने वाला सीवरेज का पानी पाइप लाइन के जरिए ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंच रहा है। जैने ने आनासागर के आसपास बसी कॉलोनियों के लोगों से भी अपील की कि वेएक बार एसटीपी प्लांट पर आकर पानी के शुद्ध होने की प्रक्रिया को देखे। आनासागर में साफ सफाई और ट्रीटमेंट प्लांट की प्रक्रिया से जुड़े फोटोज मेरे फेसबुक पेज पर देखे जा सकते हैं। S.P.MITTAL BLOGGER ( 14-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की मौत पर चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर कम से कम मर्यादित आचरण तो करें। मीडिया के कैमरों के सामने हसंगे और ब्रेक के बाद जैसे शब्द कहेंगे तो सरकार की बदनामी तो होगी ही। ================ कोटा, बीकानेर, बांसवाड़ा, भीलवाड़ा आदि जिलों के सरकारी अस्पतालों में हो रही प्रसूताओं की मौत को लेकर 13 जुलाई को जयपुर में राजस्थान के चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस कॉन्फ्रेंस में मंत्री के साथ चिकित्सा विशेषज्ञ भी बैठे और यह जताने की कोशिश की कि प्रसूताओं की मौत चिकित्सकों की लापरवाही, गलत इंजेक्शन, गलत दवा देने आदि के कारणों से नहीं हुई, बल्कि एनीमिया, हाई बीपी, पीपीएच, लीवर किडनी फेल, न्यूटीशियन की कमी जैसे कारणों से हुई है। चिकित्सा मंत्री के संरक्षण में बैठे चिकित्सा विशेषज्ञों का यह भी कहना रहा कि प्रसूताओं की मौत के मामले में दूसरे अस्पतालों से स्थानांतरित होकर आए। यानी प्राथमिक स्तर पर समुचित इलाज नहीं हुआ। खुद मंत्री खींवसर ने बताया कि वर्ष 2023-24 में मातृ मृत्यु दर प्रदेश में 1094 थी जो वर्ष 2025-26 में घटकर 824 रह गई है। इसी प्रकार प्रसूताओं की मृत्यु दर में भी कमी आई है। हो सकता है कि मंत्री और चिकित्सा विशेषज्ञों के दावे सही हो,लेकिन मीडिया के कैमरों के सामने चिकित्सा मंत्री खींवसर को कम से कम मर्यादित आचरण तो करना ही चाहिए। 13 जुलाई को प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों के सवालों के बीच ही मंत्री खड़े हो गए और हंसते हुए कहा कि बाकी सवालों के जवाब ब्रेक के बाद। मंत्री ने कहा कि वे भीलवाड़ा जा रहे है, जहां प्रसूताओं की मौत के कारणों का पता लगाएंगे। मंत्री ने हंसते हुए ब्रेक के बाद जैसे शब्द कहे उससे साफ जाहिर था कि प्रसूताओं की मौत के मामलों में भी मंत्री खींवसर संवेदनशील नहीं है। मंत्री के हंसने और ब्रेक के बाद के शब्दों से प्रेस कॉन्फ्रेंस के उन आंकड़ों पर पानी फिर गया जो चिकित्सा विशेषज्ञों ने रखे थे। मंत्री खींवसर के इस गैर जिम्मेदाराना आचरण की आलोचना अब राष्ट्रीय मीडिया में भी हो रही है। असल में गजेंद्र सिंह खींवसर चिकित्सा विभाग को लेकर कभी गंभीर नहीं रहे। उनके व्यवहार को लेकर विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक भी खुश नहीं है। जबकि चिकित्सा मंत्री तो बेहद ही गंभीर और संवेदनशील होना चाहिए, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि राजस्थान के चिकित्सा मंत्री न केवल संवेदनहीन है बल्कि अपने विभाग के प्रति वफादार भी नहीं है। जानकार सूत्रों की माने तो मंत्री खींवसर को लेकर जो शिकायतें प्राप्त हुई है उसी के आधार पर गत दिनों केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने खींवसर को तलब किया था। ऐसा लगता है कि अमित शाह की हिदायतों का भी खींवसर पर कोई असर नहीं हुआ है। चूंकि चिकित्सा विभाग सीधे आम जनता से जुड़ा हुआ है, इसलिए सरकारी अस्पतालों में होने वाली घटनाओं का असर प्रदेश की भाजपा सरकार पर पड़ता है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 14-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511