S.P. MITTAL Blog

ममता बनर्जी की टीएमसी वाले सांसद, यूसुफ पठान, खलीलुर्रहमान और अबु ताहिर ने पीएम मोदी का आतिथ्य स्वीकारा। सवाल-फिर पीएम मोदी मुस्लिम विरोधी कैसे। ================ 7 अगस्त को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना के उन 26 सांसदों को सुबह के नाश्ते पर आमंत्रित किया, जो हाल ही में केंद्र में सत्तारूढ़ एनडीए में शामिल हुए हैं। इन सांसदों में टीएमसी के चुनाव चिह्न पर लोकसभा का सांसद बनने वाले यूसुफ पठान, खलीलुर्रहमान और अबु ताहिर भी शामिल रहे। इन तीनों मुस्लिम सांसदों ने पीएम मोदी के पास खड़े होकर गर्व से फोटो भी खिंचवाया। तीनों ने पीएम मोदी की कार्यशैली की प्रशंसा करते हुए कहा कि मोदी की नीतियों से देश का विकास हो रहा है। मोदी के 12 वर्ष के कार्यकाल में मुसलमान स्वयं को ज्यादा सुरक्षित महसूस करता है। यहां यह खासतौर से उल्लेखनीय है कि तीनों मुस्लिम सांसदों के संसदीय क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या ज्यादा है। भारतीय क्रिकेट टीम के सदस्य रहे यूसुफ पठान ने तो अपने गृह प्रदेश गुजरात को छोड़कर पश्चिम बंगाल की बहरामपुर सीट से चुनाव लड़ा था। पठान ने वर्ष 2024 में इस सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार अधीर रंजन चौधरी को इसलिए हराया कि यहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या ज्यादा थी। आमतौर पर यह आरोप लगता है कि पीएम मोदी मुस्लिम विरोधी है। ऐसा आरोप ममता बनर्जी के साथ साथ कांग्रेस के राहुल गांधी, सपा के अखिलेश यादव आदि भी लगाते हैं, लेकिन सवाल उठता है कि जब मुस्लिम वोटों के दम पर चुनाव जीते मुस्लिम सांसद ही पीएम मोदी की प्रशंसा कर रहे हैं, तब मोदी मुस्लिम विरोधी कैसे हो सकते हैं? तीनों मुस्लिम सांसदों ने पीएम मोदी के नेतृत्व में आस्था प्रकट की जो यह दर्शाता है कि पीएम मोदी सबका साथ सबका विकास और सबका विश्वास के तहत मुसलमानों का भी पूरा ख्याल रखते हैं। यदि पीएम मोदी मुस्लिम विरोधी होते तो यूसुफ पठान, खलीलुर्रहमान और अबु ताहिर भी भी मोदी के नेतृत्व को स्वीकार नहीं करते। ममता बनर्जी, राहुल गांधी, अखिलेश यादव जैसे नेता मोदी के बारे में कुछ भी कहे, लेकिन मुस्लिम सांसदों ने यह प्रदर्शित किया है कि पीएम मोदी मुस्लिम विरोधी नहीं है। 7 अगस्त की मुलाकात में पीएम मोदी ने टीएमसी और शिवसेना से आए सांसदों को भरोसा दिलाया कि उनके राजनीतिक हितों की रक्षा की जाएगी। यानी वर्ष 2029 में होने वाले लोकसभा के चुनाव में यह सभी सांसद भाजपा के उम्मीदवार होंगे। S.P.MITTAL BLOGGER ( 08-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

तो क्या जेलर सद्दाम हुसैन की वजह से अजमेर सेंट्रल जेल में बंद मुस्लिम कैदियों की मौज हो रही है? जेल में बंद मुस्लिम कैदियों का रिश्तेदारों से संवाद वाला वीडियो उजागर। यह जेल की सुरक्षा के लिए खतरनाक स्थिति है। ================ भास्कर अखबार ने यह दावा किया कि उसके पास अजमेर सेंट्रल जेल का एक ऐसा एक्सक्लूसिव वीडियो है जो यह दर्शाता है कि जेल में बंद मुस्लिम कैदी अपने रिश्तेदारों से वीडियो कॉलिंग पर संवाद कर रहे हैं। गंभीर और चिंता का विषय यह है कि इस मामले में जेलर सद्दाम हुसैन की भूमिका है। जेलर सद्दाम हुसैन मुस्लिम कैदियों को अपने कक्ष में बुलाता है और फिर अपने मोबाइल से उनके रिश्तेदारों से संवाद करवाता है। अब एक ऐसा वीडियो उजागर हुआ है, जिसमें जेल में बंद ताहिर चिश्ती, उसका बेटा तौफीक चिश्ती और भांजा फखर चिश्ती जेलर सद्दाम हुसैन के कक्ष में बैठकर जेल से बाहर अपने रिश्तेदार फारुख चिश्ती से संवाद कर रहे हैं। फारुख चिश्ती ने इस वीडियो कॉलिंग के लिए जेलर सद्दाम का शुक्रिया अदा भी किया। आरोप है कि सद्दाम हुसैन जेलर के पद का फायदा उठाकर मुस्लिम कैदियों की बात मोबाइल पर उनके रिश्तेदारों से करवाता रहता है। ताजा मामला इसलिए भी गंभीर है कि तौफीक चिश्ती के संबंध बब्बर खालसा जैसे आतंकी संगठनों से भी रहे हैं। तौफिक चिश्ती पर आतंकी संगठनों को हथियार और ड्रग्स सप्लाई करने के आरोप है। ऐसे आरोपों में ही तौफिक चिश्ती पंजाब के जेलों में बंद रहा। तौफीक चिश्ती अपने पिता ताहिर चिश्ती के साथ अजमेर जेल में इसलिए बंद है कि उस पर अजमेर स्थित ख्वाजा साहब की दरगाह के खादिम हाजी बिलाल हुसैन चिश्ती पर जानलेवा हमला करने का आरोप है। तीनों आरोपी सात वर्ष की सजा अजमेर जेल में काट रहे हैं। सेंट्रल जेल से अपने रिश्तेदारों से वीडियो कॉल पर बात करने की इस घटना से जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठते हैं। सरकार को इस पूरे मामले की गंभीरता के साथ जांच पड़ताल करवानी चाहिए । अजमेर में सेंट्रल जेल के साथ साथ हाई सिक्योरिटी जेल भी है। इन दोनों जेलों में कैदियों के पास मोबाइल मिलना आम बात है। लेकिन ताजा मामले में तो कैदी जेलर का मोबाइल ही इस्तेमाल कर रहे हैं। S.P.MITTAL BLOGGER ( 08-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

अजमेर में गहलोत और पायलट गुट फिर आमने-सामने। नगर निगम चुनाव से पहले कांग्रेस की फूट चौराहे पर। पायलट समर्थकों ने धर्मेन्द्र राठौड़ के दखल पर ऐतराज जताया। ================ अगले महीने जब अजमेर नगर निगम के चुनाव होने हैं, तब कांग्रेस की फूट चौराहे पर है। चुनाव से पूर्व, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट के समर्थक आमने सामने हो गए है। पायलट समर्थक माने जाने वाले पूर्व शहर अध्यक्ष विजय जैन और गत दो बार दक्षिण क्षेत्र से कांग्रेस के प्रत्याशी रहे हेमंत भाटी के नेतृत्व में पायलट समर्थकों ने 7 अगस्त को एक बैठक की। इस बैठक में बड़ी संख्या में कांग्रेस के कार्यकर्ता शामिल हुए। विजय जैन और हेमंत भाटी ने आरोप लगाया कि आरटीडीसी के पूर्व अध्यक्ष धर्मेन्द्र राठौड़ के दखल से अजमेर शहर में कांग्रेस को नुकसान हो रहा है। मौजूदा शहर अध्यक्ष डॉ. राजकुमार जयपाल भी राठौड़ के दबाव में काम कर रहे हैं। इससे पुराने और निष्ठावान कांग्रेसियों की की उपेक्षा हो रही है। मौजूदा समय में अजमेर शहर में भाजपा के खिलाफ जबरदस्त माहोल है। इस बार नगर निगम का मेयर कांग्रेस का बन सकता है, लेकिन धर्मेन्द्र राठौड़ की विभाजनकारी नीतियों के कारण कांग्रेस का कार्यकर्ता निराश है। जैन और भाटी ने कहा कि आखिर धर्मेन्द्र राठौड़ अजमेर की राजनीति में क्यों सक्रिय हैै? राठौड़ ने तो पूर्व में बानसूर (जयपुर ग्रामीण) से चुनाव लड़ा। उनकी राजनीतिक गतिविधियां बानसूर में ही रही है। लेकिन राठौड़ अब अजमेर में रुचि दिखा रहे हैं, जिससे कांग्रेस का कार्यकर्ता स्वीकार नहीं करेगा। जैन और भाट ने कहा कि हमारा प्रयास कांग्रेस को मजबूत करने का है। जबकि धर्मेन्द्र राठौड़ अजमेर में कांग्रेस को कमजोर कर रहे हैं। जैन और भाटी के आरोपों के जवाब में राठौड़ का कहना रहा है कि वे गत 8 वर्षों से अजमेर की राजनीति में लगातार सक्रिय हैं। उनका पैतृक गांव अजमेर के निकट नांद है। उन्होंने गत 8 वर्षों से अजमेर में कांग्रेस संगठन को मजबूती दी है। आज जो लोग कांग्रेस को मजबूत करने का दावा कर रहे हैं, उन्हीं के कारण अजमेर शहर की दोनों विधानसभा सीटों पर गत पांच बार से लगातार कांग्रेस उम्मीदवारों की हार हो रही है। कांग्रेस को नगर निगम में भी अपना बोर्ड बनाने का अवसर नहीं मिल रहा है। राठौड़ ने कहा कि शहर अध्यक्ष जयपाल के नेतृत्व में कांग्रेस एकजुट है। मैंने तो प्रत्येक कार्यकर्ता का सम्मान किया है। यहां यह उल्लेखनीय है कि धर्मेन्द्र राठौड़ को पूर्व सीएम गहलोत का कट्टर समर्थक माना जाता है। सितंबर 2022 में अब अशोक गहलोत के समर्थन में कांग्रेस के विधायकों की समानांतर बैठक हुई, तब जिन 3 कांग्रेसी नेताओं को हाईकमान ने अनुशासनहीनता का नोटिस दिया, उसमें धर्मेन्द्र राठौड़ भी शामिल थे। आज भी राठौड़, गहलोत के साथ खड़े हैं। राठौड़ का कहना है कि मैं अशोक गहलोत का पक्का समर्थक हंू। S.P.MITTAL BLOGGER ( 08-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

ब्यावर की भी सीमेंट फैक्ट्री से ग्रामीणों का जीना मुश्किल। प्रतिबंधित केमिकल कचरे के इस्तेमाल से पर्यावरण, पानी जमीन सब कुछ खराब हो रहा है। ब्यावर का जिला और पुलिस प्रशासन चुप: पर्यावरण विभाग के अधिकारी तो अंधे हैं। ================ राजस्थान के ब्यावर के निकट अंधेरी देवरी में श्री सीमेंट का जो प्लांट (फैक्ट्री) लगा हुआ है उसकी वजह से आसपास के ग्रामीणों का जीना मुश्किल हो गया है। यह प्लांट देश के सुविख्यात बांगड़ औद्योगिक घराने का है। यूं तो बांगड़ घराना समाजसेवा का दावा करता है,लेकिन ब्यावर प्लांट की वजह से ग्रामीणों को सांस लेना भी मुश्किल हो रहा है। ग्रामीणों के अनुसार पिछले कुछ दिनों में फैक्ट्री में प्रतिबंधित केमिकल का उपयोग हो रहा है। यह केमिकल सीमेंट बनाने के काम आने वाले पत्थरों को बरीक किया जाता है, लेकिन कोयले की कीमत बढ़ने के कारण बांगड़ समूह श्री सीमेंट फैक्ट्री में प्रतिबंधित केमिकल का उपयोग कर रहा है। यही कारण है कि फैक्ट्री से जो धुंआ निकलता है, उसकी वजह से आस पास के लोगों को सांस लेने में मुश्किल हो रही है। कई ग्रामीणों को चर्म रोग हो गया है। घरों पर मिट्टी की परत आ रही है। इस जहरीली परत को बार बार हटाना भी कठिन है। फैक्ट्री से जो जरीला पानी निकलता है उसकी वजह से खेती की जमीन बंजर हो रही है ।आसपास के कुओं और तालाबों का पानी भी जहरीला हो गया है। पीड़ित ग्रामीण फैक्ट्री के बाहर लगातार धरना प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन ब्यावर का जिला और पुलिस प्रशासन चुप है। उल्टे ग्रामीणों को ही धमकी दी जा रही है कि उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज किए जाएंगे। जिला और पुलिस प्रशासन नहीं चाहता कि श्री सीमेंट के खिलाफ कोई धरना प्रदर्शन हो। जहां तक पर्यावरण विभाग के अधिकारियों की भूमिका पर सवाल है तो इस विभाग के अधिकारी अंधे है। उन्हें फैक्ट्री से निकलने वाला जहरीला धुआ और पानी नजर नही नहीं आ रहा है। कहा जा सकता है कि ग्रामीणों की सुनने वाला कोई नहीं यहां यह कि ग्रामीणों को सुनने वाला कोई नहीं है। यहां यह उल्लेखनीय है कि ब्यावर की प्रभारी राज्य के उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी है, ग्रामीणों को पीड़ा मंत्री तक पहुंच गई है। लेकिन दीया कुमारी ने भी अभी तक श्री सीमेंट के खिलाफ कार्यवाही करने के निर्देश नहीं दिए है। प्रभारी मंत्री की खामोशी से ब्यावर के पुलिस और जिला प्रशासन की मौज हो गई है। श्री सीमेंट की फैक्ट्री जिस अंधेरी देवरी गांव में स्थित है, वह मसूदा विधानसभा क्षेत्र में आता है। मौजूदा समय में मसूदा से भाजपा विधायक वीरेंद्र सिंह कानावत है, लेकिन कानावत के कानों में भी ग्रामीणों की आवाज सुनाई नहीं दे रही। ब्यावर के भाजपा विधायक शंकर सिंह रावत भी विधायक कानावत के साथ ही खड़े हे। ब्यावर जिला राजसमंद संसदीय क्षेत्र में आता है। मौजूदा समय में श्रीमती महिमा कुमारी भाजपा की सांसद है। शायद महिला कुमारी को भी यह भी पता नहीं होगा कि श्री सीमेंट की फैक्ट्री की वजह से ग्रामीणों को परेशान हो रही है। महिमा कुमारी मेवाड़ राजघराने की सदस्य हे। हो सकता है कि सांसद होने के कारण महिमा कुमारी के बांगड़ समूह से अच्छे संबंध हो। S.P.MITTAL BLOGGER ( 06-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

राजस्थान में ओबीसी की 92 जातियों में से सिर्फ 10 जातियों के लोगों की ही राजनीति में भागीदारी। सवाल- क्या कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा वंचित 82 जातियों के लोगों को पंचायती राज और शहरी निकायों के चुनाव में उम्मीद बनाएंगे? आखिर क्यों 10 जातियों के लोग ही सांसद, विधायक, प्रधान, निकाय प्रमुख आदि बनते हैं? ================ 5 अगस्त को जयपुर में ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) प्रतिनिधित्व आयोग के अध्यक्ष रिटायर्ड जज मदनलाल भाटी ने 900 पन्नों वाली आयोग की रिपोर्ट मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को सौंप दी है। इस रिपोर्ट के आधार पर ही पंचायती राज और शहरी निकायों के चुनावों में ओबीसी वर्ग के लिए सीटों का आरक्षण होगा, लेकिन इस रिपोर्ट में चौकाने वाली बात यह है कि राजस्थान में अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी की 92 जातियों हैं, लेकिन इनमें से 10 जातियों के लोगों की ही राजनीति में भागीदारी है। यानी इन 10 जातियों के लोग ही सांसद, विधायक, प्रधान, शहरी निकायों के प्रमुख आदि बनते हैं। शेष वंचित 82 जातियों के लोग पार्षद और सरपंच भी नहीं बन पाते। इस बड़े अंतर को देखते हुए ही आयोग के अध्यक्ष न्यायाधीश भाटी ने कहा कि उन्होंने अपनी रिपोर्ट केवल जनसंख्या को आधार मानकर नहीं बनाई है। सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक पिछड़ेपन को भी देखकर रिपोर्ट तैयार की गई है। इसके लिए प्रदेश भर के 74 लाख 85 हजार ओबीसी वर्ग के परिवारों से संवाद किया गया है। यह वाकई अजीत बात है कि राजस्थान में ओबीसी वर्ग की ऐसी 82 जातियां हैं, जिनका कोई भी प्रतिनिधि आज तक सांसद, विधायक आदि नहीं बन सकता है। यानी 92 जातियों का समूह होने के बाद भी सिर्फ 10 जातियों के लोग ही मलाई खा रहे हैं। सवाल उठता है कि क्या ओबीसी वर्ग की वंचित जातियों को राजनीति में प्रतिनिधित्व नहीं मिलना चाहिए? कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने जब देश भर में जाति आधारित जनगणना की मांग की तो उनका तर्क था कि वंचित जातियों को प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। राहुल गांधी कहना रहा कि जाति आधारित जनगणना से पता चल जाएगा कि अभी तक राजनीति में किन जातियों को प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। केंद्र सरकार ने राहुल गांधी की मांग पर जाति आधारित जनगणना करवाने का निर्णय लिया है, लेकिन जब राजस्थान में ओबीसी वर्ग की रिपोर्ट उजागर हो गई है, तब सवाल उठता है कि क्या प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा इसी वर्ष होने वाले पंचायती राज और शहरी निकायों के चुनाव में ओबीसी की वंचित 82 जातियों के लोगों को उम्मीदवार बनाएंगे? राहुल गांधी का सपना तभी पूरा होगा, जब राजस्थान में ओबीसी वर्ग की 82 जातियों के लोगों को आरक्षित सीटों पर उम्मीदवार बनाया जाए। डोटासरा को अच्छी तरह पता है कि ओबीसी की वे 10 जातियां कौनसी है, जो राजनीति की मलाई खा रही है। यदि वंचित जातियों के लोगों को ओबीसी का लाभ दिया जाता है तो इस वर्ग में सामाजिक समानता भी आएगी। मौजूदा समय में सिर्फ 10 जातियों के लोग ही ओबीसी के 21 प्रतिशत कोटे का लाभ प्राप्त कर रहे है। यह स्थिति सिर्फ राजनीतिक क्षेत्र में ही नहीं बल्कि सरकारी नौकरियों के क्षेत्र में भी है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 06-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

जाति भी ओछी, जनम भी ओछा, ओछा कर्म हमारा। हम रैदास राम राई को, कह रैदास बिचारा। मन चंगा तो कठौती में गंगा। गुरु ग्रंथ साहिब में भी 41 वाणियों के शब्द। संत रविदास जी का यह विचार आम लोगों तक पहुंचना जरूरी। भाजपा की तरह कांग्रेस भी पहल कर सकती है। ================ संत कवि रविदास जी 650 वीं जयंती पर भाजपा पूरे देश में श्री गुरु रविदास महाराज समरसता संकल्प अभियान चला रही है। इसी के अंतर्गत 5 अगस्त को जयपुर में आयोजित एक समारोह में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने 245 रज कलश रथ को हरी झंडी दिखाई। ये रथ प्रदेश के सभी 25 लोकसभा क्षेत्रों में संत कवि रविदास के विचारों का प्रचार-प्रसार करेंगे। कांग्रेस का आरोप है कि प्रदेश में होने वाले पंचायती राज और शहरी निकायों के चुनावों के मद्देनजर रज कलश रथ को घुमाया जा रहा है। कांग्रेस का अपना तर्क हो सकता है कि लेकिन मौजूदा समय में समाज में जो जातिवाद हावी है,उसका मुकाबला संत कवि रविदास के विचारों से ही किया जा सकता है। 650 वर्ष पहले समाज को जो वातावरण था उसी में चर्मकार रविदास जी ने लिखा, जाति भी ओछी, जनम भी ओछा, ओछा करम हारा। हम रैदास राम राई को, कह रैदास बिचारा। यानी हमारी जाति, जनम और कर्म छोटा है, लेकिन हम तो राजाराम के अनुचर है। अर्थात् जो राम काज में रत भक्त है, उसका कर्म, जन्म और जाति कमतर कैसे हो सकता है। उस समय रैदास जैसा संत कवि ही लिख सकता था, मन चंगा तो कठौती में गंगा। यानी मन पवित्र है तो घर पर गंगा स्नान का पुण्य मिलता सकता है। चूंकि रविदास चर्मकार थे, इसलिए उनके पास चमड़ा भिगोने का का छोटा बर्तन होता था। इस बात को ही कठौती कहा गया है। संत रविदास जी ने अपनी रचनाएं 1489 से 1471 ईवी के बीच लिखी। यह वह दौर था, जब भारत पर लोदी वंश के शासक राज कर रहे थे, इस से पहले हिंदू समाज पर कासिम, गजनवी, गौरी, खिलजी, गुलाम वंश, तुगलक, तैमूर के अत्याचार हो चुके थे। यह वही दौर था जब तलवार की नोंक पर हिंदुओं का धर्म परिवर्तन कराया जा रहा था। तब संपूर्ण हिंदू समाज को एकजुट करने के लिए संत रविदास जी ने रचनाएं लिखी। रविदास जी की रचनाएं यह बताती है कि हिंदू समाज को आज 650 वर्ष बाद भी एकजुट करने की जरूरत है। यहां यह खासतौर से उल्लेखनीय है कि रविदास जी द्वारा लिखित 41 वाणियोंं को सिख समुदाय के गुरु ग्रंथ साहिब में शब्द के रूप में शामिल किया गया है। इससे भी रविदास के विचारों की मानता का अंदाजा लगाया जा सकता है। रविदास जी के विचारों को रथ के जरिए भले ही भाजपा ने पहुंचाने का काम किया हो, लेकिन यह काम कांग्रेस भी कर सकती है। भाजपा ने रथ रवाना किए हैं उनमें एक कलश भी रखा हुआ है। इस कलश में वाराणसी के क्षीर, गोवर्धन पुर की रज (मिट्टी) भी भरी हुई है। चूंकि गोवर्धन पुर ही संत रविदास जी की कर्मस्थली रहा, इसलिए अब मिट्टी को पवित्र मानकर उनके विचारों को आगे बढ़ाया जा रहा है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 06-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

शिक्षकों के तबादले में रिश्वतखोरी का 6 वर्ष पुराना मामला उठाकर पूर्व सीएम गहलोत ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डोटासरा को 30 जुलाई वाले बयान का जवाब दिया। यह डोटासरा के जले पर नमक छिड़कना जैसा है। जयपुर रेलवे स्टेशन पर लोकप्रियता का प्रदर्शन। स्वयं गहलोत ने डाला वीडियो। ================= 2 अगस्त को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने अपने गृह क्षेत्र जोधपुर के दौरे पर रहे। गहलोत ने अपनी आदत के मुताबिक जमकर बयानबाजी की। गहलोत ने राजनीतिक चतुराई से गत 30 जुलाई को प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के बयान का भी जवाब दिया। मालूम हो कि 30 जुलाई को पूर्व मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीय और उनके समर्थक प्रदेश कार्यालय आने से पहले जयपुर में गहलोत के सरकारी आवास पर चले गए थे तो डोटासरा ने नाराजगी जताई थी। डोटासरा की यह नाराजगी गहलोत के नागवार लगी। यही वजह रही कि गहलोत ने डोटासरा से जुड़े 6 वर्ष पुराने शिक्षकों के तबादले में रिश्वतखोरी का मामला उठा दिया। गहलाते जब भी मीडिया से संवाद करते हैं तब मीडिया कर्मियों के रूप में अपने समर्थकों को भी सवाल पूछने का मौका देते हैं। चूंकि गहलोत को डोटासरा के 30 जुलाई वाले बयान का जवाब देना था, इसलिए प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिक्षकों के तबादले में रिश्वतखोरी का सवाल उठाया गया। गहलोत चाहते तो अपना जवाब भाजपा के शासन तक सीमित रख सकते थे, लेकिन गहलोत ने 6 वर्ष पुराना जयपुर स्थित बिड़ला ऑडिटोरियम में आयोजित शिक्षक दिवस के समारोह की घटना का भी उल्लेख कर दिया। गहलोत का कहना रहा कि तब मैं मुख्यमंत्री था और मैंने सामान्य शिष्टाचार के नाते समारोह में उपस्थित शिक्षकों से पूछ लिया कि क्या तबादलों में रिश्वत देनी पड़ती है? तो अधिकांश शिक्षकों ने हां में जवाब दिया। उस समय मेरे साथ शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा भी उपस्थित थे, लेकिन बाद में किसी भी शिक्षक ने मुझे रिश्वत का कोई सबूत नहीं दिया। गहलोत ने कहा कि हर शासन में शिक्षकों के तबादले में रिश्वत के आरोप लगते है। गहलोत ने यह बात कहकर डोटासरा के जले पर नमक छिड़कने वाला काम किया है। भाजपा के नेता आज तक इस मुद्दे को लेकर डोटासरा को कटघरे में खड़ा करते हैं और अब गहलोत ने भी यह बता दिया कि 6 वर्ष पहले मेरी सरकार के शिक्षा मंत्री डोटासरा पर भी तबादलों में भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। चूंकि गहलोत चतुर राजनीतिज्ञ है, इसलिए स्वयं की जुबान से डोटासरा को रिश्वतखोर नहीं कहा। लेकिन बड़ी चतुराई से यह दर्शा दिया कि शिक्षकों ने डोटासरा पर भी रिश्वत लेने के आरोप लगाए। मालूम हो कि वर्ष 2018 में जब गहलोत मुख्यमंत्री बने तब डोटासरा को स्कूली शिक्षा मंत्री बनाया गया था, लेकिन 2020 में सचिन पायलट की बगावत के बाद डोटासरा को प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बना दिया। तब उन्हें शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा था। देखना होगा कि गहलोत ने 6 वर्ष पुराना मामला उठाकर डोटासरा पर जो हमला किया है, उसका जवाब आने वाले दिनों में डोटासरा किस प्रकार से देते हैं। लोकप्रियता का प्रदर्शन 2 अगस्त को पूर्व सीएम गहलोत ने जयपुर से जोधपुर का सफर ट्रेन से किया। इस सफर के पीछे गहलोत को स्वयं की लोकप्रियता दिखाना था। गहलोत जब जयपुर के प्लेटफार्म पर पहुंचे तो उनके कैमरा मैन पहले से ही तैयार थे। गहलोत ने प्लेटफार्म पर खड़े यात्रियों से उनके हाल चाल पूछे। कई यात्रियों ने गहलोत को पहचाना उनसे आत्मीय मुलाकात भी की। गहलोत ने एक कुली से भी उसके हाल जाने। प्लेटफार्म के बा जब गहलोत ट्रेन के कोच में पहुंचे तो यहां भी एक एक यात्री से हाथ मिलाया। कोई डेढ़ दो मिनट के इस वीडियो को फिल्मी गाने के साथ गहलोत ने स्वयं सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है। इस वीडियो के माध्यम से यह जताने का प्रयास किया गया है कि वे आज भी प्रदेश भर में लोकप्रिय हैं। S.P.MITTAL BLOGGER ( 03-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

पाकिस्तान की सीमा से सटे खाजूवाला से 50 करोड़ की हेरोइन और 11 विदेशी पिस्टल जब्त। ड्रोन का इस्तेमाल। इसलिए सीमावर्ती क्षेत्रों में 50 किलोमीटर की परिधि में अतिक्रमणों को हटाया जा रहा है। लेकिन कांग्रेस इसमें भी राजनीति कर रही है। ================= राजस्थान के सीमावर्ती बीकानेर रेंज में आईजी ओम प्रकाश और एसपी मृदुल कच्छावा के निर्देशन में नार्को आर्म्स, सिडीकेट के खिलाफ जो अभियान चलाया जा रहा है, उसी का परिणाम रहा कि 2 अगस्त को खाजूवाला क्षेत्र से पचास करोड़ रुपए की कीमत वाली 10 किलो अफगानी हेरोइन और 11 विदेशी पिस्टल जब्त की गई। आईजी ओम प्रकाश का मानना है कि यह नशा और हथियार पाकिस्तान से आए हैं ड्रोन ने गिराया है। चूंकि पुलिस लगातार निगरानी कर रही थी, इसलिए हेरोइन और हथियार के बारे में जानकारी मिल गई। उन्होंने बताया कि इस सामग्री के साथ डिलीवरी मैन पाली के जैतारण निवासी वीरेंद्र सिंह राजपुरोहित को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। राजपुरोहित ने बताया कि यह सामग्री पंजाब जेल में बंद लक्खी नाम के व्यक्ति ने पाकिस्तान से मंगवाई थी। रेंज आईजी ओम प्रकाश का मानना है कि नशा और विदेशी हथियार पूरे देश में सप्लाई किए जाने थे। पिछले दिनों केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने राजस्थान में पाकिस्तान सीमा पर लगे श्रीगंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर,बाड़मेर, हनुमानगढ़ और जोधपुर क्षेत्र की समीक्षा की थी। केंद्रीय एजेंसियों ने बताया कि अब पाकिस्तान राजस्थान वाली सीमा से ड्रोन तकनीक से हथियार और नशीले पदार्थ भिजवा रहा है। केंद्रीय मंत्री शाह के निर्देशों के बाद राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी को और प्रभावी बनाया गया। बीएसएफ और राजस्थान पुलिस के बीच तालमेल को और बेहतर किया जा रहा है। बाड़मेर, जैसलमेर जैसे क्षेत्रों में दोनों समुदायों के धार्मिक स्थलों को भी हटाया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि नशीले पदार्थ और विदेशी हथियारों को छुपाने के लिए धार्मिक स्थलों का इस्तेमाल हो सकता है। कई बार ऐसे अतिक्रमण प्रभावी निगरानी में बाधक होते हैं। राजस्थान में सटी सीमा से पाकिस्तान नशीले पदार्थों और हथियारों को न भेज सके, इसलिए सीमा से पचास किलोमी की परिधि में आने वाले निर्माणों को भी हटाया जा हा है। सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए कानून बना है, उसमें सीमा से पचास किलोमीटर की परिधि में संदिग्ध निर्माण नहीं होने चाहिए। इसी कानून के तहत सुरक्षा एजेंसियों को 50 किलोमीटर के दायरे में आने वाले सभी स्थानों की जांच करने का अधिकार भी है। बीकानेर के खाजूवाला में जब्त हेरोइन और विदेशी हथियार की घटना बताती है कि पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। लेकिन कांग्रेस सीमा के इस संवेदनशील मुद्दे पर भी राजनीति कर रही है। संबंधित जिला प्रशासनों ने सीमावर्ती क्षेत्रों में जो अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया है उसका कांग्रेस की ओर से विरोध किया जा रहा है। कांग्रेस के नेताओं का आरोप है कि मुसलमानों को निशाना बनाकर कार्यवाही की जा री है। अतिक्रमण हटाने के नाम पर पुरानी मस्जिदों को भी गिराया जा रहा है। वही प्रशासन का कहना है कि अतिक्रमण हटाओ अभियान में मंदिर भी शामिल है। इसलिए भेदभाव का आरोप पूरी तरह गलत है। मौजूदा हालातों में सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रभावी निगरानी की सख्त जरूरत है। उल्लेखनीय है कि पहले जम्मू कश्मीर की सीमा से नशीले पदार्थ और हथियार भेजे जाते थे, लेकिन अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद पाकिस्तान के लिए कश्मीर की सीमा से नशा और हथियार भेजना मुश्किल हो गया है, इसलिए पाकिस्तान अब राजस्थान की सीमा का इस्तेमाल करने लगा है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 03-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

बरसात के दिनों में बिजली के ट्रांसफार्मर खंभों, फीडर बॉक्स आदि से दूर रहे आम लोग। जानवरों को भी बचाए। अजमेर में टाटा पावर की जागरूकता वाली अपील। ================= अजमेर शहर में बिजली वितरण की जिम्मेदारी निजी क्षेत्र की कंपनी टाटा पावर लिमिटेड के पास है। टाटा पावर के जनसंपर्क अधिकारी लक्ष्मीकांत शर्मा ने नागरिकों से अपील की है कि लगातार बरसात को देखते हुए बिजली के ट्रांसफार्मर खंभों, फीडर बॉक्स आदि से दूर रहे। उन्होंने लोगों से यह भ अपील की कि बिजली सप्लाई के इन साधनों और उपकरणों के पास किसी भी प्रकार की खाद्य सामग्री न डाले। शर्मा ने कहा कि ट्रांसफार्मर बिजली के खंभों आदि के पास जब खाद्य सामग्री होती है तो जानवर आ जाते हैं। कई बार करंट लगने से अप्रिय घटना हो जाती है। उन्होंने बताया कि कंपनी के तकनीकी कर्मचारी लगातार निगरानी कर रहे हैं और प्रयास है कि बरसात के दिनों में कोई अप्रिय घटना न हो। लेकिन फिर भी लोगों की जागरूकता जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि किसी स्थान पर ट्रांसफार्मर, खंभो, फीडर बॉक्स आदि के तार खुले और टूटे हो तो तत्काल ही कंपनी के टोल फ्री नंबर 1800 889 0001 तथा व्हाट्सएप नंबर 7412012222 पर सूचना दें। शर्मा ने कहा कि सूचना मिलते ही कुछ ही समय में कंपनी की टेक्निकल टीम मौके पर पहुंच जाएगाी। उन्होंने कहा कि बरसात के दिनों में बिजली सप्लाई और नियमित रखने के लिए कंपनी की ओर से विशेष प्रयास किए गए हैं। इसलिए अब बरसात के साथ बिजली बंद नहीं होती। उन्होंने कहा कि कई बार पेड़ गिरने बिजली का खंभा क्षतिग्रस्त होने, ट्रांसफार्मर में पानी घुसने आदि की घटना से बिजली बंद होती है। कंपनी का प्रयास होता है कि संबंधित ट्रांसफार्मर से जुड़े क्षेत्रों में ही बिजली की सप्लाई बंद हो। सूचना मिलते ही टेक्निकल फॉल्ट को तुरंत दूर किया जाता है। उन्होंने कहा कि अब बिजली वितरण टाटा पावर न्यूज टैक्नोलॉजी और एआई का भी उपयोग कर रहा है, इससे शिकायतों का निवारण तत्काल हो रहा है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 03-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

एमडीएस यूनिवर्सिटी का सफर 38 वर्ष पहले दयानंद कॉलेज के हॉस्टल से शुरू हुआ था। प्रो. रामवली उपाध्याय प्रथम कुलपति थे। वर्तमान कुलगुरु सुरेश अग्रवाल के नवाचारों की प्रदेशभर में गूंज। एक अगस्त को 39वें स्थापना दिवस समारोह में राज्यपाल बागड़े शामिल होंगे। ============== अजमेर स्थित महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय (एमडीएसयू) एक अगस्त को अपना 39वां स्थापना दिवस धूमधाम से मना रहा है। इस विश्वविद्यालय के पास आज भले ही विशालतम संसाधन और संपत्तियां हो, लेकिन इसकी शुरुआत अजमेर के निजी क्षेत्र के दयानंद कॉलेज के हॉस्टल से हुई थी। तब सरकार के पास अजमेर में ऐसा कोई भवन नहीं था, जिसमें विश्वविद्यालय को संचालित किया जा सके। ऐसी स्थिति में सरकार को दयानंद कॉलेज के हॉस्टल को किराये पर लेना पड़ा। हास्टल के जिन कमरों में कभी विद्यार्थी रहते थे, उन्हीं कमरों में विश्वविद्यालय का संचालन किया गया। यह विश्वविद्यालय करीब कुछ वर्षों तक किराये के परिसर में ही चला। वर्ष 1990 में निकटवर्ती कायड़ ग्राम में विश्वविद्यालय को आवंटित भूमि पर दो तीन भवन निर्मित हुए और फिर इस विश्वविद्यालय को स्थानांतरित किया गया। आवंटित भूमि पर सबसे ज्यादा भवनों का निर्माण पीएल चतुर्वेदी के कुलपति रहते हुए हुआ। प्रो. चतुर्वेदी 12 जनवरी 1995 से 2 दिसंबर 1999 तक कुलपति रहे। यहां उल्लेखनीय है कि प्रो. पीएल चतुर्वेदी वर्तमान राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी के पिता थे। पहले इस विश्वविद्यालय का नाम अजमेर विश्वविद्यालय रखा गया, चूंकि अजमेर में स्वामी दयानंद का निर्वाण हुआ, इसलिए विश्वविद्यालय का नाम आगे चलकर महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय रखा गया। आज गर्व के साथ कहा जा सकता है कि प्रदेश के उच्च शिक्षा के क्षेत्र में यह विश्वविद्यालय महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। जब विश्वविद्यालय की शुरुआत हुई, तब प्रो. रामवली उपाध्याय प्रथम कुलपति बने। मौजूदा समय में प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल कुलगुरु के तौर पर कार्य कर रहे हैं। यह संयोग ही है कि प्रो. अग्रवाल का एक वर्ष का कार्यकाल हाल ही में पूरा हुआ है। प्रो. अग्रवाल ने अल्प अवधि में ही विश्वविद्यालय में जो नवाचार किए हैं, उसकी गूंज पूरे प्रदेश में है। कुलाधिपति और राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े भी प्रो. अग्रवाल की कार्यशैली की प्रशंसा कर चुके है। यदि सरकार ने प्रो. अग्रवाल के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया तो आने वाले दिनों प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों की प्रवेश प्रक्रिया एक समान ही होगी। प्रो. अग्रवाल ने बताया कि 39वें स्थापना दिवस का मुख्य समारोह एक अगस्त को विश्वविद्यालय परिसर स्थित बृहस्पति भवन में प्रात: साढ़े 11 बजे होगा। इस समारोह के मुख्य अतिथि कुलाधिपति और राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े होंगे। जबकि विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी और कैबिनेट मंत्री सुरेश सिंह रावत विशिष्ट अतिथि के तौर पर मौजूद रहेंगे। इस समारोह में विश्वविद्यालय के अब तक के सफर की विस्तृत जानकारी दी जाएगी। प्रो. अग्रवाल ने बताया कि स्थापना दिवस के समारोह की शुरुआत 31 जुलाई से ही हो रही है। इस दिन 108 दीपों से दीप यज्ञ और स्काई नॉर्टन के आयोजन होंगे। 3 अगस्त को आत्ममंथन दिवस, 4 अगस्त को विभागीय उपलब्धियों की प्रदर्शनी, पांच अगस्त को सांस्कृतिक एवं गुरु वंदन का कार्यक्रम, 6 अगस्त को विश्वविद्यालय की भावी कार्य योजना और विकास पर मंथन होगा। 7 अगस्त को समापन समारोह आयोजित होगा। S.P.MITTAL BLOGGER ( 31-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511