S.P. MITTAL Blog

राजनीति में बड़े बड़े नेताओं को पानी पिलाने के बाद राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा अब फलदायिनी यमुना नदी का पानी शेखावाटी में लाएंगे। सीकर, झुंझुनूं व चुरू से पहले हरियाणा के यमुनानगर, करनाल, कुरुक्षेत्र, कैथल व हिसार की प्यास बुझाई जाएगी। जो काम पीएम मोदी को करना था वो अमित शाह ने किया। 1994 के समझौते के अनुरूप ही हरियाणा को पानी मिलेगा-भजनलाल शर्मा, सीएम राजस्थान। ================================ 29 जून को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री की उपस्थिति में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने यमुना नदी के पानी को लेकर मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर कर दिए। अमित शाह की उपस्थिति में ही दोनों नेताओं ने इस एग्रीमेंट का एक्सचेंज भी कर लिया। पहले एग्रीमेंट एक्सचेंज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में होना था, लेकिन बदले हुए निर्णय में एग्रीमेंट का एक्सचेंज गृहमंत्री अमित शाह की उपस्थिति में हुआ। राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र के सीकर, झुंझुनूं और चुरू जिले की प्यास बुझाने के लिए यह एग्रीमेंट बहुत महत्वपूर्ण हे। इस एग्रीमेंट को करने में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के विशेष प्रयास रहे हैं। भारत की सनातन संस्कृति में यमुना नदी को फलदायिनी और गंगा नदी को मोक्षदायिनी माना जाता है। यानी सीएम शर्मा राजस्थान में अब युमना का पानी ला रहे है जो फलदायिनी मानी जाती है। इसमें कोई दो राय नहीं कि भजनलाल शर्मा पर ईश्वर की असीम का है। दिसंबर 2023 में पहली बार विधायक बने शर्मा को राजस्थान का मुख्यमंत्री बनाया गया, तब उनकी सफलता को लेकर अनेक शंकाए थी, लेकिन मुख्यमंत्री बनने के बाद शर्मा ने वसुंधरा राजे जैसे दिग्गज भाजपाइयों को ठंडा पानी पिलाया और गत ढाई वर्षों से अपनी स्थिति को मजबूत कर लिया। आज भजनलाल शर्मा के नेतृत्व को चुनौती देने वाला कोई नहीं है। पिछले ढाई वर्षों से कहा जा रहा है कि प्रदेश के मंत्रिमंडल के 6 रिक्त पदों पर नियुक्तियां होंगी, लेकिन सरकार के ढाई वर्ष गुजर जाने के बाद भी मंत्री पद खाली पड़े हैं। अब जब यमुना के पानी पर हरियाणा के साथ एग्रीमेंट हो गया है, तब राजनीति में भजनलाल शर्मा का कद और बढ़ेगा। यमुना का पानी लाने के लिए गत 32 वर्षों से कांग्रेस और भाजपा के नेता प्रयास कर रहे हैं, लेकिन सफलता भजनलाल शर्मा को मिली है। इससे पहले ईआरसीपी (राम सेतु लिंक परियोजना) को भी क्रियांवित करने में शर्मा की भूमिका रही। अब जब फलदायिनी यमुना स्वयं राजस्थान आ रही है तो भजनलाल शर्मा को राजनीति में अनेक कामों के फल मिलने शुरू हो गए है। राजस्थान के किसी भी नेता को मुगालते में नहीं रहना चाहिए। कोई माने या नहीं लेकिन 2028 का विधानसभा का चुनाव भी भाजपा भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में ही लड़ेगी। पहले हरियाणा को: हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से शेखावाटी के चूरू जिले तक पाइप लाइन बिछाई जाएगी। इन पाइप लाइनों के जरिए ही यमुना नदी का पानी शेखावाटी में लाया जाएगा। हथिनी कुंड बैराज से चुरू तक पानी लाने से पहले हरियाणा के यमुनानगर, करनाल, कुरुक्षेत्र, कैथल व हिसार जिलों की प्यास को बुझाया जाएगा। यानी इस एग्रीमेंट में राजस्थान के साथ साथ हरियाणा को भी प्राथमिकता दी गई है। चूंकि बरसात के दिनों में यमुना नदी उफान पर रहती है, इसलिए हरियाणा के जिलों को पानी देने से राजस्थान के हितों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। 32 वर्ष पहले 1994 में चार राज्यों के बीच जो समझौता हुआ उस में राजस्थान को 577 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम)पानी का प्रावधान किया गया था। कहा जा सकता है कि 29 जून को हुए एग्रीमेंट में इतना पानी राजस्थान को मिल ही जाएगा। यमुना का पानी राजस्थान को देने से हरियाणा में कोई विरोध न हो इसके लिए ही पहले हरियाणा के तीन चार जिलों में पेयजल की सप्लाई की जाएगी, इसलिए तीन पाइप लाइन डालने का प्रावधान किया गया है। वैसे ही 300 किलोमीटर के मार्ग का 95 प्रतिशत भाग हरियाणा में ही आता है। समझौते के अनुरूप हरियाणा को पानी: यमुना जल समझौते को लेकर 30 जून को दिल्ली में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस कॉन्फ्रेंस में जब यह पूछा गया, राजस्थान से पहले हरियाणा को पानी मिलेगा, तब सीएम शर्मा ने कहा 1994 में चार राज्यों के बीच जो समझौता हुआ था, उसमें हरियाणा को भी पानी दिए जाने का प्रावधान है। 1994 के समझौते के तहत ही हरियाणा को उसके हिस्से का पानी दिया जाएगा। सीएम ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यमुना का पानी शेखावाटी के जिलों को मिलेगा। इस से एक बड़ी आबादी की प्यास बुझेगी। समझौते के लिए सीएम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार भी जताया। 29 जून के समझौते पर पूर्व सीएम अशोक गहलोत की आशंकाओं के सवाल पर सीएम शर्मा ने कहा, जब एग्रीमेंट हुआ है, तो कोई भी तथ्य छिपाया नहीं जा रहा है। एग्रीमेंट भी सार्वजनिक किया जा रहा है। हमारे पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है। गहलोत के मुख्यमंत्री रहते हुए राजस्थान की पहचान पेपर लीक, बिगड़ी कानून व्यवस्था, विधायकों के बंधक रहने जैसे समाचारों से होती थी। लेकिन आज राजस्थान की पहचान विकास को लेकर हो रही है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 30-06-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

धौलपुर में महिलाओं को निवस्त्र घुमाने के आरोपी कुख्यात अपराधी जगन गुर्जर की अजमेर में हाई सिक्योरिटी जेल में हत्या। बुरे काम का बुरा नतीजा। ================ करीब 20 वर्षों तक राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में चंबल नदी के सीमावर्ती जंगलों में आतंक मचाने वाले डकैत जगन गुर्जर की 29 जून को अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में हत्या कर दी गई। जगन गुर्जर को मारने का काम कुलदीप जघीना हत्याकांड के आरोपी विष्णु ने किया। विष्णु ने स्वीकार किया कि उसने गमछे से जगन गुर्जर का गला दबा दिया। विष्णु को अपने कृत्य पर कोई अफसोस नहीं है। जगन गुर्जर पर तीन राज्यों में 125 से भी ज्यादा मुकदमे दर्ज है। हत्या, अपहरण रंगदारी के साथ साथ जगन गुर्जर पर एक गंभीर आरोप वर्ष 2019 का भी है। आरोप है कि धौलपुर के करणपुर में जगन गुर्जर ने दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाया। तब पूरे देश में जगन गुर्जर की चर्चा हुई। चूंकि जगन गुर्जर का आतंक चंबल नदी के जंगलों में था, इसलिए उसने वर्ष 2008 में भाजपा की नेता वसुंधरा राजे के धौलपुर के महल को भी बम से उड़ाने की धमकी दी। जगन गुर्जर का इतना आतंक था कि पुलिस भी मुकाबला करने से डरती थी। पुलिस ने अपने प्रयासों से कभी भी जगन गुर्जर को गिरफ्तार नहीं किया। जगन गुर्जर ने तीन बार अपनी मर्जी से पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया। अंतिम बार फरवरी 2022 में जगन ने आत्मसमर्पण किया था, तभी से वह विभिन्न जेलों में बंद रहा। इन दिनों जगन गुर्जर अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में बंद था। तभी उसकी मुलाकात कुलदीप जघीना हत्याकांड के आरोपी विष्णु से हुई। विष्णु ने पहले जगन से दोस्ती की और फिर विश्वास में लेकर जगन को मौत के घाट उतार दिया। बुरे काम का बुरा नतीजा: पुलिस अब जगन हत्याकांड की विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है। पुलिस को यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर विष्णु ने जगन की हत्या क्यों की? क्या विष्णु के के पीछे किसी अपराधी गैंग का हाथ है? पुलिस की जांच अपनी जगह है, लेकिन जगह गुर्जर की हत्या ने एक बार फिर यह प्रदर्शित किया है कि बुरे काम का नतीजा भी बुरा ही होता है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 30-06-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

खड़गे राज्यसभा में फिर प्रतिपक्ष के नेता बने। कांग्रसे के राष्ट्रीय अध्यक्ष तो रहेंगे ही। अशोक गहलोत को सीखनी चाहिए वफादारी। ================ 29 जून को मल्लिाकर्जुन खडग़े ने राज्यसभा में कांग्रेस सांसद के तौर पर शपथ ली। शपथ लेने के साथ ही राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णान ने खडग़े को प्रतिपक्ष का नेता भी घोषित कर दिया। यानी सभापति को कांग्रेस की ओर से पहले ही सूचित कर दिया गया था कि खडग़े ही कांग्रेस सांसदों के नेता है और राज्यसभा में विपक्ष में कांग्रेस सांसदों की संख्या सबसे ज्यादा है, इसलिए खडग़े ही प्रतिपक्ष के नेता होंगे। आमतौर पर कांग्रेस में एक व्यक्ति एक पद के सिद्धांत पर अमल किया जाता है, लेकिन खडग़े कांग्रेस के उरन चुनिंदा नेताओं में से एक है जिन पर कोई नियम लाू नहीं होता। खडग़े मौजूदा समय में भी कांग्रसे के राष्ट्रीय अध्यक्ष है। यानी खरगे के पास दो महत्वपूर्ण पद है। राज्यसभा में प्रतिपक्ष के नेता का पद होने के कारण खडग़े को केबिनेट मंत्री का दर्जा मिला हुआ है। कांग्रेस का राष्ट्रीय नेतृत्व खासकर गांधी परिवार खडग़े पर कितना भरोसा करता है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2019 से पहले खडग़े लोकसभा में प्रतिपख के नेता थे। 2019 में खडग़े जब लोकसभा का चुनाव हार गए, तब गांधी परिवार ने खडग़े को कर्नाटक से राज्यसभा में भेज दिया। इतना ही नहीं तब गुलाम नबी आजाद जैसे नेता को राज्यसभा से विदा कर खडग़े को प्रतिपक्ष का नेता बना दिया। खडग़े को हाल ही में दुबारा से राज्यसभा का सांसद बनाया गया और उनहें एक बार फिर प्रतिपक्ष का नेता घोषित किया गया।यानी अब खडग़े के पास पूर्व की तरह दो पद रहेंगे। गांधी परिवा रने स्पष्ट कर दिया है कि खडग़े पर एक व्यक्ति एक पद का सिद्धांत लागू नहीं होगा। गहलोत वफादारी की सीख लें: सितंबर 2022 से पहले तक अशोक गहलोत भी कांग्रेस के वफादार नेताओं में शामिल थे, लेकिन गहलोत ने जिस तरह 25 सितंबर 2022 को राजस्थान के मुख्यमंत्री के पद के लालच में कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व से बगावत की उसी का परिणाम है कि आज गहलोत पर हाईकमान का भरोसा नहीं रहा। जहां खडग़े के पास दो-दो महत्वपूर्ण पद है, वहां गहलोत के पास कोई पद नहीं है। एक समय था, जब गहलोत गांधी परिवार के सबसे भरोसेमंद नेता थे, इसलिए वर्ष 2022 में श्रीमती सोनिया गांधी के स्थान पर अशोक गहलोत को कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का फैसला किया गया। तब गहलोत को अधिकृत तौर पर उम्मीदवार भी घोषित कर दिया गया था। लेकिन गहलोत ने राजस्थान के मुख्यमंत्री पद के लालच में कांग्रेस हाईकमान के समक्ष बगावत कर दी। गहलोत नहीं चाहते थे कि सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाया जाए। जबकि गांधी परिवार पायलट को मुख्यमंत्री बनाने का प्रयास कर रहा था, इसलिए तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मल्लिकार्जुन खडग़े और अजय माकन को पर्यवेक्षक बनाकर राजस्थान भेजा। लेकिन अशोक गहलोत ने तब खडग़े और माकन के साथ कांग्रेस विधायकों की बैठक ही नहीं होने दी। तब इन दोनों पर्यवेक्षकों को अपमानित होरक जयपुर से लौटना पड़ा। इधर गहलोत को मुख्यमंत्री बनाए रखने की मांग पर कांग्रेस के 80 विधायकों ने अपना सामूहिक इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष को दे दिया, तब गहलोत मुख्यमंत्र का पद बचाने में तो सफल रहे, लेकिन गांधी परिवार का भरोसा खो दिया। वफदारी कैसेी होती है यह अशोक गहलोत को खडग़े से सीखनी चाहिए। S.P.MITTAL BLOGGER ( 30-06-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

जो शिक्षक अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में नहीं पढ़ाते, वे निकम्मापन कर रहे हैं। राजस्थान के स्कूली शिक्षा मंत्री मदन दिलावर का यह बयान सरकारी कार्मिकों और सांसद, विधायक, पार्षद आदि जनप्रतिनिधियों पर भी लागू होता है। ================= 28 जून को टोंक में खटीक समाज के अधिकारियों और कर्मचारियों के सम्मान समारोह में राजस्थान के स्कूली शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को लेकर बड़ी बातें कही। दिलावर ने कहा कि शिक्षकों को अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में ही पढ़ाना चाहिए। जो शिक्षक ऐसा नहीं करते हैं, वे निकम्मे हैं। ऐसा लगता है कि शिक्षकों को अपने ही शिक्षण कार्य पर भरोसा नहीं है। प्राइवेट स्कूलों के मुकाबले सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को वेतन और सुविधाएं भी ज्यादा मिलती है। ऐसे में सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर ऊंचा होना चाहिए। यदि शिक्षक अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाएंगे तो इसका असर समाज पर पड़ेगा। अब यदि शिक्षक ही अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में पढ़ा रहे हैं तो आम अभिभावक अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में क्यों पढ़ाएंगे? दिलावर ने शिक्षकों के समक्ष एक महत्वपूर्ण सवाल रखा है। यह सही है कि सरकार से मोटा वेतन लेने वाले शिक्षकों को अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाना चाहिए, लेकिन दिलावर ने शिक्षकों के समक्ष जो सवाल खड़ा किया है, वह सरकार के अधिकारियों और सभी कर्मियों के साथ साथ सांसद, विधायक, पार्षद, जिला प्रमुख, प्रधान सरपंच आदि सभी जनप्रतिनिधियों पर उठता है। अधिकारी और जनप्रतिनिधि भी सरकार से वेतन और अनेक सुविधाएं प्राप्त करते हैं। ऐसे में कार्मिकों और जनप्रतिनिधियों को भी चाहिए कि वे अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ाए। यदि सांसद, विधायकों, आईएएस आईपीएस अधिकारियों के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ेंगे तो स्कूलों की गुणवत्ता भी सुधर जाएगी। अच्छा हो कि मदन दिलावर एक अभियान चलाकर सभी सरकारी कर्मियों और जनप्रतिनिधियों के बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ने के लिए प्रेरित करें। अकेले शिक्षकों के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ाने से व्यवस्था में सुधार नहीं होगा। S.P.MITTAL BLOGGER ( 29-06-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सेशेल्स में मिला सर्वोच्च नागरिक सम्मान। अब तक 35 से भी ज्यादा देश दे चुके हैं ऐसा सम्मान। सम्मान देने वाले देशों में इजरायल और फिलीस्तीन भी शामिल। वही पड़ोसी देश पाकिस्तान में गृहयुद्ध के हालात। अफगानिस्तान के साथ जंग भी। भारत में रहने वाले पाकिस्तान परस्त नेता इन हालातों को समझे। ================= भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 29 जून तक सेशेल्स के दौरे पर हैं। इस तीन दिवसीय दौरे में 28 जून को सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हार्मिनी ने पीएम मोदी को अपने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान गार्जियन ऑफ द ब्लू होराइजन सम्मानित किया। पीएम मोदी को दुनिया के 35 से भी ज्यादा देश अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित कर चुके है। इसमें इजरायल और फिलीस्तीन भी शामिल हैं। अनेक मुस्लिम देशों ने भी मोदी को अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया है। इन सम्मानों के संबंध में पीएम मोदी स्पष्ट कह चुके हैं कि यह समान मेरा नहीं बल्कि भारत का है। इसमें कोई दो राय नहीं की नरेंद्र मोदी के गत 12 वर्षों के कार्यकाल में अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का दबदबा बढ़ा है। इसकी प्रमुख वजह यह है कि भारत आंतरिक दृष्टि से मजबूत बना है। यही वजह है कि आर्थिक दृष्टि से चौथी महाशक्ति बनने के बाद भारत अब तीसरी महाशक्ति बनने की ओर अग्रसर है। एक और मजबूत और खुशहाल भारत है तो दूसरी ओर पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में गृहयुद्ध के हालात है। 27 जून को ही कराची में आतंकी हमला हुआ है। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आग लगी हुई है। बलूचिस्तान में तो आए दिन पाकिस्तान की सेना के जवान ही मारे जा रहे है। असल में पाकिस्तान में जो इस्लामिक कट्टरपंथी संगठन बने हुए हैं वे ही आपस में अपने वर्चस्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। इतनी अराजकता के बाद पाकिस्तान को अपने पड़ोसी मुल्क अफगानिस्तान से जंग भी करनी पड़ रही है। पाकिस्तान आए दिन अफगानिस्तान पर हवाई हमले कर रहा है तो अफगानिस्तान पर काबिज तालिबानी लड़ाके पाकिस्तान में घुसकर कोहराम मचा रहे है। कहा जा सकता है कि आज पाकिस्तान में आम मुसलमान का जीना मुश्किल हो गया है। महंगाई की वजह से दो वक्त की रोटी भी नसीब नहीं हो रही। फर्क को समझें: भारत में ऐसे कई नेता और मुस्लिम संगठन है, जिनकी हमदर्दी पाकिस्तान के साथ रहती है। ऐसे नेताओं और संगठनों को पाकिस्तान और भारत के अंतर को समझना चाहिए। भारत में 25 करोड़ से ज्यादा मुसलमान रहते हैं जो दुनिया के किसी भी मुस्लिम देश से ज्यादा है। पाकिस्तान में जहां गृहयुद्ध के हालात है, वहीं भारत में हिंदुओं के साथ साथ मुसलमान भी सम्मान और समृद्धि के साथ रह रहे हँ। भारत के जिन 85 करोड़ जरूरतमंद व्यक्तियों को प्रतिमाह पांच किलो अनाज मुफ्त में मिल रहा है उनमें मुस्लिम परिवार भी शामिल हैं। यदि किसी परिवार में माता पिता के साथ 10 बच्चे रह रहे हैं तो उन्हें माह 60 किलो अनाज निशुल्क मिल रहा है। सरकार ने हाल ही में निर्णय लिया है कि ऐसे व्यक्तियों को तीन माह का अनाज अग्रिम दे दिया जाए। यानी 12 सदस्यों वाले परिवार को 180 किलो अनाज मुफ्त में मिल रहा है। भारत में रहकर पाकिस्तान के गीत गाने वाले नेताओं को एक बार पाकिस्तान जाकर हालातों को देखना चाहिए। S.P.MITTAL BLOGGER ( 29-06-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

यूसीसी लागू करने के लिए पश्चिम बंगाल विधानसभा में 29 जून को विधेयक। संभावित हिंसा से निपटने के लिए एंटी सोशल एक्ट। राजस्थान में तो अभी कमेटी ही बनाई है। मुंबई में जहरीला कैप्सूल बांटने के आरोप में फैयाज निसार गिरफ्तार। ================= पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बने डेढ़ माह ही हुआ है कि यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) लागू करने की कवायद तेज हो गई है। 29 जून को बंगाल की विधानसभा में यूसीसी का विधेयक लाया जाएगा। चूंकि विधानसभा में भाजपा को पूर्ण बहुमत है, इसलिए यह विधेयक आसानी से स्वीकृत हो जाएगा। यूसीसी के प्रावधान लागू होने के बाद संभावित हिंसा को देखते हुए राज्य सरकार ने व्यापक तैयारियां भी की है। इसके लिए एंटी सोशल एक्ट लागू करने की तैयारी है। इस एक्ट में उन आपराधिक तत्वों की गिरफ्तारी होगी जो सुरक्षाकर्मियों पर हमला करेंगे। चूंकि पश्चिम बंगाल में मुस्लिम आबादी 20 प्रतिशत से ज्यादा मानी जा रही है, इसलिए बंगाल में यूसीसी को लागू करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है, लेकिन मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने स्पष्ट कह दिया है कि पश्चिम बंगाल की पहचान श्यामाप्रसाद मुखर्जी जैसे नेताओं से है और मुखर्जी ने ही सबसे पहले कहा था कि एक देश में दो संविधान, दो निशान नहीं हो सकते। कोई भी प्रदेश और देश दो कानूनों के रहते विकास नहीं कर सकता हे। पिछली सरकारों ने मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति को अपनाते हुए पश्चिम बंगाल को विकास की दृष्टि से बहुत पीछे धकेल दिया है, लेकिन अब बगाल पीछे नहीं रहेगा और इसलिए यूसीसी लागू किया जा रहा है। सीएम ने कहा कि वह कोई असंवैधानिक काम नहीं कर रहे है। संविधान के अनुच्छेद 44 में समान नागरिक संहिता लागू करने का प्रावधान हे। उन्होंने देश के संविधान के अनुरूप ही यूसीसी लागू करने का निर्णय लिया है। इसके अंतर्गत बहुविवाह पर रोक, विवाह एवं तलाक का अनिवार्य पंजीकरण और संपत्ति में पुत्र और पुत्री को समान अधिकार जैसे प्रावधान शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे मुस्लिम महिलाओं को ही फायदा होगा। यूसीसी लागू होने के बाद मुस्लिम पर्सनल लॉ और हिंदू कोड जैसी व्यवस्थाएं समाप्त हो जाएगी। यूसीसी लागू होने के बाद पश्चिम बंगाल भी विकास की पटरी पर दौड़ेगा। राजस्थान में अभी कमेटी ही: पश्चिम बंगाल देश में यूसीसी लागू करने वाला चौथा राज्य हो जाएगा। इससे पहले उत्तराखंड, गुजरात और असम में नागरिकों के लिए समान संहिता लागू हो चुकी है। भाजपा शासित राजस्थान भी उसी राह पर चल रहा है, लेकिन राजस्थान में अभी सिर्फ कमेटी का ही गठन किया गया है। यह कमेटी उन राज्यों का दौरा करेगी, जहां यूसीसी लागू हो चुका है। भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज रंजन प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया है। जहरीला कैप्सूल: 27 जून को मुंबई पुलिस ने भायखला क्षेत्र से फैयाज निसार नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। निसार पर मोहर्रम के जुलूस में जहरीला कैप्सूल बांटने का आरोप है। निसार की ओर से दावा किया गया कि यह कैप्सूल इम्यूनिटी बूस्टर है, लेकिन जांच में पता चला कि कैप्सूल में चूहे मारने का जहरीला पदार्थ भरा हुआ है। जिन लोगों ने कैप्सूल खाया उनकी तबीयत बिगड़ी और उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया। कैप्सूल वितरण की जानकारी होते ही पुलिस ने फयाज निसार को गिरफ्तार किया और उसके पास से 15 हजार कैप्सूल बरामद किए। पुलिस की जांच पड़ताल में पता चला है कि फयाज निसार कई बार ईरान का दौरा कर चुका है और उसके संबंध ईरान के कट्टरपंथी संगठनों से है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 28-06-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

आखिर इराक भी ईरान के समर्थन में आया। अमेरिकी सेना को इराक छोड़ने के आदेश। इराक के अचानक पलटने से मध्य पूर्व में अमेरिका कमजोर होगा। ================= मध्य पूर्व में अमेरिका को 27 जून को तब तगड़ा झटका लगा, जब प्रतिद्वंदी इराक भी ईरान के समर्थन में आ गया। इराक के प्रधानमंत्री ने अमेरिका से कहा कि वह इराक से अपनी सेना को हटा ले। इतना ही नहीं इराकी सेना ने राजधानी बगदाद के उस ग्रीन जोन को घेर लिया, जहां अमेरिका का दूतावास है और अमेरिकी सेना के कमांडर निवास करते है। एक तरह से इराकी सेना ने अमेरिका के दूतावास और सैन्य कमांडरों को अपने कब्जे में ले लिया है। मुस्लिम देश इराक के इस तरह पलटने से अमेरिका स्तब्ध है। क्योंकि अब तक ईरान के साथ संघर्ष में इराक, अमेरिका की मदद कर रहा था। ईरान और इराक की सीमाएं लगी हुई है। इराक में स्थापित सैन्य अड्डों से भी अमेरिका ईरान पर हमले कर रहा था। लेकिन अब उसी इराक ने अमेरिका से अपना देश छोड़ने के लिए कह दिया है। इससे मध्य पूर्व में अमेरिका की परेशानी और बढ़ गई है। होर्मुज मार्ग को लेकर पहले ही अमेरिका मुसीबत में है। 10 दिन पहले ईरान और अमेरिका के बीच जो शांति समझौता हुआ, वे भी अब टूट चुका है। अमेरिका और ईरान एक दूसरे पर हमला कर रहे है, लेकिन अमेरिका के लिए इराक का पलटना बड़ी मुसीबत है। हो सकता है कि आने वाले दिनों में खाड़ी के मुस्लिम देश भी अमेरिकी सेना को देश छोड़ने के लिए कह दे। असल में अमेरिका के साथ युद्ध में ईरान ने अपना दबदबा दिखाया है। जिस तरह अमेरिका ने ईरान के समक्ष आत्मसमर्पण किया उससे अमेरिका की मदद से चलने वाले खाड़ी के मुस्लिम देशों में घबराहट है। अब तक इराक भी अमेरिका की मदद पर निर्भर था, लेकिन अब युद्ध के दौरान ही इराक, अमेरिका के पाले में चला गया है। यदि अमेरिका और ईरान एकजुट होकर युद्ध करते हैं तो अमेरिका की स्थिति और कमजोर होगी। देखना होगा कि अब अमेरिका और उसके राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इराक के विरुद्ध क्या कदम उठाते हैं। S.P.MITTAL BLOGGER ( 28-06-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मुलाकात में क्या सिर्फ पर्यावरण जलवायु परिवर्तन और विकास से जुड़े विषयों पर ही विमर्श हुआघ् एक्स पर दोनों की एक जैसी पोस्ट। क्या इस मुलाकात के पीछे भजन सरकार को रिपीट करवाने की योजना बनाने का उद्देश्य रहाघ् पश्चिम बंगाल में भूपेंद्र यादव की रणनीति से ही भाजपा की सरकार बनी और ममता बनर्जी राजनीतिक दृष्टि से कंगाल हो गई। ===================== 26 जून को अलवर के सांसद और केंद्रीय वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने जयपुर में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से उनके सरकारी आवास पर मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद दोनों ने एक्स पर एक जैसी पोस्ट की। दोनों ने कहा कि इस शिष्टाचार मुलाकात में पर्यावरण जलवायु परिवर्तन और विकास को लेकर विमर्श हुआ। सब जानते हैं कि भाजपा की राष्ट्रीय राजनीति में भूपेंद्र यादव का जबरदस्त दखल है। हाल ही के पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में भूपेंद्र यादव भाजपा की ओर से चुनाव प्रभारी थे और उनकी रणनीति से विपरीत हालात वाले बंगाल में भाजपा को बहुमत मिला। इतना ही नहीं चुनाव परिणाम के बाद पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी के 80 में से 60 विधायक और 9 में से 6 सांसद अलग हो गए। टीएमसी को कंगाल करने में भी भूपेंद्र यादव की रणनीति रही। कई राज्यों में भाजपा की सरकार दूसरी तीसरी और पांचवीं बार बनवाने में भी यादव की रणनीति ही काम आई है। यादव उत्तर प्रदेश बिहार राजस्थान गुजरात पश्चिम बंगाल महाराष्ट्र जैसे राज्यों के चुनाव प्रभारी रह चुके हैं। वर्ष 2013 में राजस्थान में जब भाजपा को बहुमत मिला तब यादव चुनाव प्रभारी थे। यादव ने वसुंधरा राजे का सारथी बनकर पूरे प्रदेश का दौरा किया। राजस्थान की भौगोलिक और राजनीतिक स्थिति से भूपेंद्र यादव पूरी तरह अवगत है। यह बात अलग है कि वसुंधरा राजे के कार्यकाल में ही भूपेंद्र यादव ने राजस्थान की राजनीति से दूरी बना ली। हालांकि यादव दो बार राजस्थान से ही राज्यसभा के सांसद बने लेकिन उनकी राजस्थान की राजनीति में रुचि कम रही। वर्ष 2024 में यादव ने अलवर से लोकसभा का चुनाव लड़ा और शानदार जीत दर्ज की। भूपेंद्र यादव मोदी.2 में भी वन एवं पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के मंत्री थे और मोदी 3 में भी यही मंत्रालय उन्हें मिला। इससे यादव पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भरोसे का अंदाजा लगाया जा सकता है। भूपेंद्र यादव उन नेताओं में से है जो मीडिया से दूर रहते हैं और कभी भी किसी विवाद में नहीं पड़तेए लेकिन भाजपा की राष्ट्रीय राजनीति में भूपेंद्र यादव का जबरदस्त दखल है ऐसे में यादव का राजस्थान के मुख्यमंत्री से मुलाकात करना। राजनीतिक दृष्टि से बहुत मायने रखता है। भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व चाहता है कि राजस्थान में भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली सरकार रिपीट हो। 5 वर्ष में से ढाई वर्ष गुजर चुके हैं और शेष ढाई वर्ष में भाजपा सरकार को रिपीट करने की योजनाएं बनाने लगी है। जानकारों की माने तो भजन सरकार को रिपीट करने की योजना बनाने के उद्देश्य ही 26 जून को भूपेंद्र यादव और भजनलाल शर्मा की मुलाकात हुई है। वैसे भी भजनलाल शर्मा केंद्र में भूपेंद्र यादव को अपना संरक्षक मानते हैं। यदि भूपेंद्र यादव राजस्थान की राजनीति में सक्रिय होते हैं तो इसका सबसे ज्यादा फायदा भजनलाल शर्मा को ही मिलेगा। मुख्यमंत्री शर्मा की भी इच्छा है कि भूपेंद्र यादव राजस्थान की राजनीति में जल्द से जल्द सक्रिय हो। यदि भूपेंद्र यादव सक्रिय होते हैं तो राजस्थान में वर्ष 2028 में भाजपा सरकार को रिपीट करने में बहुत मदद मिलेगी। गत पांच बार से राजस्थान में एक बार कांग्रेस और एक बार भाजपा की सरकार बन रही है। सीएम शर्मा का मानना है कि यदि भूपेंद्र यादव सक्रिय होते हैं तो राजस्थान में पांच पांच वर्ष की परंपरा को तोडा जा सकता है।

उत्तरप्रदेश में यदि सपा-कांग्रेस की सरकार बन जाए तो अयोध्या के राम मंदिर के हश्र का अंदाजा लगाया जा सकता है। कुछ बेईमानों की वजह से विधर्मियों को सनातन धर्म पर हमला करने का अवसर मिल गया है। राम मंदिर के चढावे की चोरी करने वालों के शरीर में कीड़े पड़ेगे। गोविन्द गिरी महाराज भी कोषाध्यक्ष का पद छोडऩे को इच्छुक । ===================== अयोध्या के राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी करने के मामलें में मंदिर प्रबन्धन और चढ़ावे की गणना करने से जुड़े 8 व्यक्तियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। इसके साथ ही श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य डाक्टर अनिल मिश्र ने ट्रस्ट से इस्तीफा भी दे दिया है। उत्तरप्रदेश के मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि चढ़ावा चोरी के कोई। सबूत हो तो जांच एजेंसियों के समक्ष रखे जाए। योगी ने कहा कि झूठे आरोप लगाकर लोगों को गुमराह न किया जाए। लेकिन वही कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेता लगातार हमलावर है। यह सही है कि कुछ बेईमानों की वजह से विधर्मियों को सनातन धर्म पर हमला करने का अवसर मिल गया है। बेईमानों ने जो अवसर दिया है उसमें विधर्मी भगवान राम और सनातन धर्म की छवि खराब में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। ऐसे-ऐसे शब्दों का उपयोग किया जा रहा है जो बर्दाश्त नहीं किए जा सकते। सवाल उठता है कि जिन शब्दों का इस्तेमाल सनातन धर्म के लिए किया जा रहा हैए उन शब्दों का उपयोग क्या किसी दूसरे धर्म के बारें में हो सकता हैघ् सनातन धर्म की विशालता ही है कि विधर्मियों को बर्दाश्त किया जा रहा है। यदि ऐसे शब्द किसी धर्म के लिए बोले जाते तो अब तक सिर तन से जुदा हो जाता। सब जानते हैं कि मौजूदा समय में उत्तरप्रदेश में योगी आदित्यनाथ और केन्द्र में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार चल रही है। योगी और मोदी दोनों ही सनातन धर्म के प्रबल अनुयायी और मजबूत संरक्षक है। इन दोनों ने ही उन बाधाओं को हराया जो अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण में सामने आ रही थी। सनातनियों ने इस मंदिर के निर्माण के लिए 500 वर्षों तक संघर्ष किया और लाखों सनातनियों ने अपना बलिदान दिया। अब जब पूरी मजबूती के साथ अयोध्या में राम के जन्मस्थल पर भव्य मंदिर बना हुआ हैए तब विधर्मियों की नाराजगी जगजाहिर है। जो श्विधर्मी अभी तक भी मंदिर में रामलला के दर्शन करने के लिए नहीं गए हैए वो भी सनातन धर्म की छवि खराब करने का काम कर रहे है। यदि मौजूदा समय में उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस सरकार होती तो अयोध्या के राम मंदिर के हश्र का अंदाजा लगाया जा सकता है। सपा और कांग्रेस के नेता तो मंदिर पर ताला लगवा देते । असल में कांग्रेस और सपा के नेता तो मंदिर निर्माण के पक्ष में थे ही नहीं। सपा प्रमुख अखिलेश यादव के पिता मुलायम सिंह यादव ने मुख्यमंत्री रहते हुए रामभक्तों पर गोलियां चलवायी थी। कांग्रेस की विचारधारा वाले वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट में भगवान राम के अस्तित्व को ही नकार दिया। आज ऐसे लोग ही रामभक्त बनकर .चढ़ावा चोरी की आड़ में सनातन धर्म पर हमला कर रहे है। यह सही है कि जिन लोगों ने राम के चढ़ावे की चोरी की हैए उनके शरीर में कीड़े पड़ेगें । सनातन धर्म में तो मंदिरों में दान की परम्परा है। कोई भी सच्चा सनातनी मंदिर के चढ़ावे की चोरी नहीं कर सकता। इस्तीफे के इच्छुक: जबसे राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी की खबरें आयी हैए तबसे राष्ट्रीय संत और श्रीराम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविन्द गिरि महाराज बहुत व्यथित और दुखी है। मंदिर निर्माण में गोविन्द गिरि महाराज की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होनें देश दुनिया से मंदिर के लिए धन संग्रह किया। जो लोग गोविन्द गिरि महाराज को जानते है उन्हें पता है कि वे बेहद ही संवेदनशील इंसान है। वे सनातन धर्म के ज्ञाता तो है हीए साथ ही ईमानदार छवि वाले धर्मगुरु है। चूंकि वे कोषाध्यक्ष के पद पर हैं इसलिए नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए कोषाध्यक्ष के पद से इस्तीफा देने के इच्छुक है। लेकिन जांच एजेंसियां भी मानती है कि मंदिर के चढ़ाने की गणना और प्रबंधन में गोविन्द गिरि महाराज की भूमिका नहीं रही। उनकी भूमिका तो मंदिर निर्माण के समय धन संग्रह की थी। वैसे भी गोविन्द गिरि महाराज का ज्यादातर समय देश भर में कथावाचन में व्यतीत होता है। उन्हीं की देखरेख में पुष्कर सहित देश के कई स्थानों पर संस्कृत विद्यालय जल रहे है। इन विद्यालयों में बच्चों को वेद की भी जानकारी दी जाती है। यानि सनातन धर्म के प्रर्वतकों को तैयार करने में गोविन्द गिरि महाराज की महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी को भी गोविन्द गिरि महाराज समय.समय धार्मिक परंपराओं की जानकारी देते हैं।

अमूल ब्रांड से जुड़ी कोऑपरेटिव सोसाइटी को राजस्थान में कारोबार की अनुमति नहीं दे भजन सरकार। अमूल का यह प्रस्ताव 14 हजार ग्राम सहकारी समितियो के लिए डेथ वारंट साबित होगा। अजमेर डेयरी के अध्यक्ष रामचंद्र चौधरी ने विरोध का बीड़ा उठाया। ================= अजमेर दुग्ध डेयरी के अध्यक्ष रामचंद्र चौधरी ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से आग्रह किया है कि अमूल ब्रांड से जुड़ी सरदार पटेल कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन लिमिटेड को राजस्थान में दूध संग्रहण और अन्य कारोबार करने की अनुमति नहीं दी जाए। चौधरी ने बताया कि अमूल ब्रांड से जुड़ी समिति का प्रस्ताव राजस्थान सरकार के समक्ष विचार अधीन है। यदि राज्य सरकार इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लेती है तो प्रदेश की 14 हजार दुग्ध उत्पादक ग्राम सहकारी समितियां मर जाएगी। इससे प्रदेश के दुग्ध उत्पादक किसानों को भारी नुकसान होगा। चौधरी ने कहा कि कड़ी मेहनत के बाद प्रदेश में राजस्थान कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन आरसीडीएफ को खड़ा किया गया है इसके माध्यम से ही जिला दुग्ध उत्पादक संघ सरस डेयरी गांव.गांव से दूध का संग्रहण करत है और फिर उपभोक्ताओं को अच्छी क्वालिटी का दूध और दूध से बने उत्पाद उपलब्ध करवाए जाते हैं। लंबे संघर्ष के बाद भी आरसीडीएफ का कारोबार मात्र 10 हजार करोड़ का है जबकि अमूल ब्रांड का कारोबार 90 हजार करोड़ का है। चौधरी ने कहा कि यदि अमूल ब्रांड से जुड़ी संस्था को राजस्थान के गांव में दूध संग्रहण का अधिकार मिल जाएगा तो सरस डेयरी बुरी तरह प्रभावित होगी। अमूल ब्रांड के दूध संग्रहण को रोकने के लिए राजस्थान भर के दुग्ध डेयरी के अध्यक्षों की एक बैठक बुलाई जा रही है। इस बैठक में विरोध की रणनीति बनाई जाएगी उन्होंने बताया कि अमूल ब्रांड की संस्था राजस्थान में ही नहीं बल्कि देश के 20 बड़े राज्यों में कारोबार करने की इच्छुक है। यदि इस ब्रांड को देश भर में सरकारी तौर पर दूध संग्रहण का अधिकार मिल जाएगा तो दूध के कारोबार का एकाधिकार हो जाएगा। आज भारत दुनिया में दूध उत्पादन में पहले नंबर पर है इसके पीछे देश के दुग्ध उत्पादकों की मेहनत है। भले ही आज अमूल ब्रांड की संस्था किसानों को दूध का मूल्य अधिक दे दे लेकिन एकाधिकार हो जाएगा तो फिर किसानों का शोषण किया जाएगा। अमूल ब्रांड और विरोध की योजना के बारे में और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9414 004 111 पर अजमेर डेयरी के अध्यक्ष रामचंद्र चौधरी से ली जा सकती है।