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ढाई वर्ष में ही जमीन से आसमान में पहुंच गए सतीश पूनिया। वसुंधरा राजे का मान सम्मान बरकरार रखा। मन्नालाल रावत अब आदिवासियों के बीच भाजपा की पैठ जमाएंगे। साफ सुथरी छवि का लाभ मिला सीए राजेश मंगल को। भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में राजस्थान पर फोकस। ============== भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने 17 अगस्त को जो कार्यकारिणी घोषित की है इसमें राजस्थान पर विशेष फोकस किया गया है। चूंकि राजस्थान में गत पांच बार से भाजपा और कांग्रेस के बीच सत्ता की अदला बदली हो रही है, इसलिए इस बार भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व का प्रयास है कि वर्ष 2028 में होने वाले विधानसभा चुनाव में सत्ता भाजपा के पास ही रहे। यही वजह है कि राजस्थान से केंद्र सरकार में चार मंत्रियों की मौजूदगी के बाद संगठन में भी प्रदेश के नेताओं को भी महत्व दिया गया है। इसका असर इसी वर्ष होने वाले शहरी निकाय और पंचायती राज चुनाव पर भी पड़ेगा। जमीन से आसमान पर: राष्ट्रीय कार्यकारिणी में राज्यसभा सांसद सतीश पूनिया को महामंत्री बनाया गया है। सब जानते हैं कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे पूनिया ढाई वर्ष पहले विधानसभा का चुनाव हार गए थे। तब पूनिया जमीन पर आ गए थे। पूनिया का दर्द और बढ़ गया, जब भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार में भी कोई पद नहीं मिला, लेकिन पूनिया ने धैर्य नहीं खाया और एक वर्ष बाद ही पूनिया को राजनीति में जमीन से थोड़ा उठने का मौका मिल गया। पूनिया को हरियाणा का प्रभारी बनाया और हरियाणा में भाजपा की फिर से सरकार बन गई। भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व की नजर में आने के बाद पूनिया को राजस्थान से राज्यसभा का सांसद बनाया गया। सांसद बनने के बाद अटकले लगाई गई कि पूनिया को केंद्र में मंत्री बनाया जाएगा। ऐसे अटकलों पर पूनिया ने स्वयं सख्ती से विराम लगाया। पूनिया को पता था कि राष्ट्रीय नेतृत्व उनका संगठन में ही उपयोग करेगा। जो पूनिया ढाई वर्ष पहले विधानसभा का चुनाव हार कर जमीन पर आ गए थे, वो ही पूनिया 17 अगस्त को भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री बनकर राजनीति के आसमान पर पहुंच गए है। इसमें कोई दो राय नहीं कि पूनिया का भाजपा की राजनीति में दबदबा बढ़ा है। पूनिया की इस नियुक्ति से भाजपा को शहरी निकाय और पंचायती राज चुनाव में खासा फायदा होगा। मान सम्मान बरकरार: भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने पूर्व सीएम वसुंधरा राजे का मान सम्मान बरकरार रखा है। नई कार्यकारिणी में राजे को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए रखा है। अमित शाह जब भाजपा के अध्यक्ष थे, तब से ही राजे उपाध्यक्ष है। भले ही राजे ने उपाध्यक्ष पद पर रहते हुए राष्ट्रीय राजनीति में कभी भी सक्रियता न दिखाई हो, लेकिन राजे के मान सम्मान को बरकरार रखा गया है। उपाध्यक्ष पद बरकरार रखने पर राजे ने अध्यक्ष नितिन नवीन का आभार जताया है। राजे के समर्थकों को अब इसी बात में खुश रहना होगा कि राजे राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनी हुई है। आदिवासियों में पैठ: नई कार्यकारिणी में उदयपुर के भाजपा सांसद मन्नालाल रावत को एसटी मोर्चे का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है। सांसद बनने से पहले रावत राजस्थान के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में सक्रिय थे। एसटी मोर्चे का अध्यक्ष बनने के बाद अब रावत पर आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में भाजपा की पैठ जमाने की जिम्मेदारी आ गई है। प्रदेश में आदिवासी बाहुल्य बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ आदि क्षेत्रों में भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) का खासा प्रभाव है। इस पार्टी का एक सांसद और चार विधायक है। देखना होगा कि रावत के नेतृत्व में अब प्रदेश में भाजपा का प्रभाव कैसे बढ़ता है। साफ सुथरी छवि: नई कार्यकारिणी में जयपुर के सीए राजेश मंगल को सह कोषाध्यक्ष बनाया गया है। कोषाध्यक्ष की जिम्मेदार केंद्रीय उद्योग और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के पास है। मंग लकी नियुक्ति के पीछे उनकी साफ सुथरी छवि है। मंगल की नियुक्ति कर भाजपा ने वैश्य समाज को प्रतिनिधित्व देने का काम किया है। पूर्व में रामदास अग्रवाल भाजपा के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष रह चुके हैं। S.P.MITTAL BLOGGER ( 18-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

राजस्थान में शहरी निकाय और पंचायती राज का चुनाव कांग्रेस ठेके पर लड़ेगी? चार उम्मीदवारों को जिताने की गारंटी देने वाले नेता को टिकट दिया जाए-रंधावा, प्रदेश प्रभारी। ============== राजनीति में अब तक तो यह सुना जाता था कि जिताऊ व्यक्ति को उम्मीदवार बनाया जाए। इस कथन में कोई बुराई भी नहीं है लेकिन 17 अगस्त को राजस्थान में कांग्रेस के प्रभारी महासचिव सुखजिंदर सिंह रंधावा ने शहरी निकाय और पंचायती राज चुनाव के मद्देनजर जीत का नया फॉर्मूला प्रस्तुत किया है। रंधावा ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा से कहा कि चुनाव में ऐसे व्यक्ति को टिकट दिया जाए तो चार अन्य उम्मीदवार को जिताने की गारंटी दे। यदि एक नेता अपने साथ चार अन्य उम्मीदवारों को जीत दिलवाएगा तो कांग्रेस को कोई हरा नहीं सकता। यदि प्रदेश में रंधावा का यह फार्मूला लागू होता है तो फिर शहरी निकायों में ऐसे नेता को पार्षद का टिकट दिया जाएगा जो अपने आस पास के चार अन्य उम्मीदवारों को भी जितवाने की गारंटी देगा। हो सकता है कि ऐसा नेता चार वार्डों में अपने पसंद के व्यक्ति को उम्मीदवार बनाए। यही फार्मूला जिला परिषद और पंचायत समितियों के वार्डों में भी लागू हो सकता है। हालांकि डोटासरा ने रंधावा के फार्मूले पर कोई टिप्पणी नहीं की है, क्योंकि राजस्थान की राजनीति में दोनों प्रमुख दलों में ऐसी कोई परंपरा नहीं है कि जीत का ठेका एक व्यक्ति को दे दिया जाए। मालूम हो कि रंधावा पंजाब में कांग्रेस के नेता है और अगले वर्ष पंजाब में विधानसभा के चुनाव होने हैं। पंजाब में कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व ने जो रणनीति बनाई है उससे रंधावा खुश नहीं है। पंजाब में खुद रंधावा असंतुष्ट नेता की भूमिका में है। सवाल उठता है कि जो नेता अपने गृह प्रदेश में असंतुष्ट हो, वह राजस्थान में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में एकजुटता की बात कैसे कर सकता है? S.P.MITTAL BLOGGER ( 18-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

अजमेर के जिला कलेक्टर लोकबंधु को राज्य स्तरीय सम्मान उनके मधुर और शालीन व्यवहार के कारण भी मिला है। रात्रि चौपाल के लिए प्रदेश भर में चर्चित है। ============= अजमेर के जिला कलेक्टर लोक बंधु को 15 अगस्त को बीकानेर में आयोजित स्वतंत्रता दिवस के राज्य स्तरीय समारोह में प्रशंसीय राज्य सेवा एवं कुशल कार्य निष्पादन के लिए योग्यता प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। कलेक्टर को यह सम्मान राज्य के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने दिया। इसमें कोई दो राय नहीं की सरकारी योजनाओं की क्रियान्विति और जनकल्याणकारी का लाभ जरूरतमंद लोगों को दिलवाने में कलेक्टर लोक बंधु की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। जो आम रास्ते कब्जों के कारण बंद थे, उन्हें भी खुलवा कर लोगों को राहत पहुंचाई गई। सरकारी और वन भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए भी अभियान चलाए गए। लेकिन प्रदेश के प्रशासनिक क्षेत्रों में लोक बंधु की सबसे ज्यादा चर्चा रात्रि चौपाल को लेकर है। कलेक्टर पद की अनेक व्यवस्थाओं के बावजूद लोकबंधु ने ग्रामीण क्षेत्रों में रात्रि चौपाल लगाने में कोई कसरनहीं छोड़ी। कई बार तो जिला मुख्यालय पर रात 8 बजे तक काम करने के बाद लोकबंधु रात 9 बजे संबंधित गांव में रात्रि चौपाल के कार्यक्रम में शामिल हुए। लेाक बंधु ने सिर्फ दिखाने के लिए रात्रि चौपाल नहीं की, बल्कि ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान मौके पर ही किया। लोक बंधु का राज्य स्तर पर यह सम्मान उनके मधुर और शालीन व्यवहार के कारण भी हुआ है। सत्तारूढ़ नेताओं के साथ ही नहीं बल्कि विपक्ष के नेताओं के साथ भी कलेक्टर ने हमेशा शालीन व्यवहार किया। कई बार ऐसे मौके आए जब कलेक्टर ने प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों से अपने कक्ष से बाहर आकर भी संवाद किया। कलेक्टर के व्यवहार को लेकर विपक्षी दलों के नेताओं को भी कोई शिकायत नहीं है। राजनीतिक दृष्टि से अजमेर का महत्व इसलिए भी है कि विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, कैबिनेट मंत्री सुरेश रावत अजमेर जिले से ही विधायक है। देवनानी का निर्वाचन क्षेत्र उत्तर और सुरेश रावत का निर्वाचन क्षेत्र पुष्कर की सीमाएं आपस में मिली हुई है। इसके बाद भी लोकबंधु इन दोनों ताकतवर नेताओं के बीच तालमेल बनाए रखते हैं। हाल ही में पुष्कर घाटी में हाईट गेट को लेकर विवाद की स्थिति हुई, लेकिन लोकबंधु ने अपने शालीन व्यवहार और प्रशासनिक कूटनीति के तहत पुष्कर और अजमेर उत्तर के लोगों को नियंत्रण में रखा। लोकबंधु देवनानी और सुरेश रावत के साथ साथ अजमेर के सांसद और केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी के सम्मान में कोई कसर नहीं छोड़ते। चूंकि किशनगढ़ में कांग्रेस के विधायक डॉ. विकास चौधरी है, लेकिन फिर भी लोकबंधु भाजपा और कांग्रेस के बीच तालमेल बनाए हैं। विकास चौधरी जिले में कांग्रेस के एक मात्र विधायक है। चौधरी देहात कांग्रेस के जिलाध्यक्ष भी हैं। विधायक चौधरी को भी कलेक्टर के व्यवहार से कोई शिकायत नहीं है। कई जिलों के कलेक्टरों का तबादला एक वर्ष बाद ही हो जाता है। लेकिन लोकबंधु को अजमेर में दो वर्ष हो रहे हैं। लोकबंधु का अपने अधीनस्थ अधिकारियों से भ अच्छा तालमेल है। यही वजह है कि अधीनस्थ अधिकारी कलेक्टर से जब चाहे तब बिना झिझक संवाद कर सकते हैं। कलेक्टर ने जो व्हाट्सएप ग्रुप बना रखा है उसमें अधीनस्थ अधिकारियों को सवालों के जवाब तत्काल देते हैं। किसी भी अधीनस्थ अधिकारी की समस्या को लोकबंधु कभी नहीं टालते। जनसमस्याओं के निदान को लोकबंधु पहली प्राथमिकता देते हैं। S.P.MITTAL BLOGGER ( 17-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

नगर निगम के चुनाव के शोर के बीच भाजपा विधायक अनीता भदेल का मातृशक्ति मानसून मेला। महिलाओं के लिए चार श्रेणियों में फैशन शो। विजया राहटकर, दीया कुमारी जैसी दिग्गज नेत्रियां भी भाग लेंगी। गत 6 वर्षों से लग रहा है मेला। ============= अजमेर नगर निगम के चुनाव के शोर के बीच अजमेर दक्षिण क्षेत्र की भाजपा विधायक श्रीमती अनीता भदेल की पहल पर 23 अगस्त को अजमेर के ब्यावर रोड स्थित डीएवी कॉलेज के खेल मैदान पर दोपहर 2 बजे से मातृशक्ति मानसून मेला आयोजित किया जाएगा। इस मेले में शहर भर की महिलाओं को आमंत्रित किया गया है। विधायक भदेल ने कहा कि महिलाओं के इस मेले का नगर निगम के चुनाव से कोई सरोकार नहीं है, क्योंकि वे गत 6 वर्षों से प्रतिवर्ष इस मेले का आयोजन कर रही है। यह मेला प्रतिवर्ष मानसून के दौरान राखी पर्व के आसपास आयोजित किया जाता है। इस मेले का उद्देश्य महिलाओं को प्रोत्साहित करना है। आमतौर पर अधिकांश महिलाएं घरेलू कामकाज में उलझी रहती है। मेरा प्रयास होता है कि ऐसी महिलाओं को घरों से निकाल कर उत्साह व उमंग के वातावरण में लाया जाए। इसलिए चार श्रेणियां में महिलाओं के लिए फैशन शो भी आयोजित किया जा रहा है। भदेल ने बताया कि गत वर्ष डीएवी कॉलेज का खेल मैदान छोटा पड़ गया था। इस बार खेल मैदान का भी विस्तार किया गया है। मुझे इस बात की खुशी है कि मेले को लेकर शहर भर की महिलाओं में जबरदस्त उत्साह है। महिलाओं के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया उत्सव: विधायक भदेल ने कहा कि मातृशक्ति मानसून फेस्ट केवल मनोरंजन का कार्यक्रम नहीं बल्कि महिलाओं के लिए समर्पित एक ऐसा मंच है जहां उन्हें मनोरंजन प्रतिभा प्रदर्शन खरीदारीए खेल संस्कृति और आपसी सहभागिता का एक साथ अवसर मिलेगा। आयोजन को विशेष रूप से मातृशक्ति के लिए तैयार किया गया है तथा पूरे परिसर को चारदीवारी से सुरक्षित रखा जाएगा। व्यवस्थाओं में लगे अधिकृत कार्यकर्ताओं को विशेष बैज दिए जाएंगे। चार श्रेणियों में होगा भव्य फैशन शो फेस्ट का प्रमुख आकर्षण भव्य फैशन शो करेगा जिसे लहरिया, ब्राइडल, ट्रेडिशनल और रिश्ते.चार श्रेणियों में आयोजित किया जाएगा। विधायक भदेल ने बताया कि मिस लहरियाए मिस ब्राइडल और मिस ट्रेडिशनल के लिए आकर्षक पुरस्कार रखे गए हैं। जिसमें 43 इंच एलईडी वाशिंग मशीन मिक्सर ग्राइंडर एवं गिफ्ट हैंपर पुरस्कार रखे गए है। खेलो और प्रतियोगिताओं की रहेगी भरमार फेस्ट में महिलाओं के मनोरंजन के लिए विभिन्न प्रकार के खेल एवं प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। इनमें कुर्सी रेस हाउजी बच्चों की कुर्सी रेस, बॉल अटैक पहिया घुमाओ.इनाम जीतो सहित अनेक मनोरंजक गतिविधियां शामिल हैं। विद्यालय की छात्राओं को भी मिलेगा मंच विधायक भदेल ने बताया कि इस वर्ष मेले में अंतर विद्यालय समूह लोक नृत्य प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जायेगा। प्रतियोगिता में भाग लेने वाली छात्राओं को मोमेंटो एवं प्रमाण.पत्र प्रदान तथा विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार से सम्मानित किया जावेगा। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य बच्चों एवं युवा पीढ़ी को राजस्थान की लोक संस्कृति परम्पराओं और कला से जोड़ना तथा उन्हें बड़े मंच पर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर देना है। राजस्थान के विभिन्न जिलों से आएंगी स्वयं सहायता समूहों की बहनें फेस्ट में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के उत्पादों के लिए विशेष स्टॉल लगाए जाएंगे। विधायक भदेल ने बताया कि धौलपुर जयपुर राजसमंद अलवर और टोंक सहित विभिन्न स्थानों से स्वयं सहायता समूहों की बहनें अपने हाथ से तैयार किए गए उत्पाद की स्टॉल लगाएंगी। इन स्टॉल्स पर हैंडमेड राखियांए हैंडीक्राफ्ट उत्पादए साडिय़ांए सूटए पर्सए वॉल हैंगिंग्सए मांडना एवं अन्य कलात्मक उत्पाद उपलब्ध रहेंगे। विशेष रूप से ऐसे पर्स भी बिक्री के लिए रखे जाएंगेए जिन्हें फूलों एवं फलों के पल्प से तैयार किया जाता है और जिनमें चमड़े का उपयोग नहीं किया जाता। सावन के उत्सव में झूलों का भी विशेष इंतजाम विधायक भदेल ने कहा कि सावन बिना झूलों के अधूरा है इसलिए महिलाओं के लिए फेस्ट में विभिन्न प्रकार के झूलों की विशेष व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि झूलों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है और उनकी जांच भी करवाई गई है। खान.पान के लिए भी होगी विशेष व्यवस्था फेस्ट में खानपान की भी व्यापक व्यवस्था रहेगी। विभिन्न प्रकार के व्यंजनों के स्टॉल लगाए जाएंगे। विधायक भदेल ने बताया कि इंदौर के प्रसिद्ध सैंडविच के लिए विशेष वेंडर भी आयोजन में आएंगे। इसके अलावा विभिन्न प्रकार के व्यंजन और खाद्य सामग्री उपलब्ध रहेगी। उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए फेस्ट में खेलने झूलने खरीदारी करने और खान.पान का आनंद लेने की पूरी व्यवस्था की गई है। बच्चों के मनोरंजन के लिए कैमल सफारी और हॉर्स राइडिंग फेस्ट में बच्चों के लिए भी विशेष आकर्षण रहेंगे। बच्चों के लिए कैमल सफारी हॉर्स राइडिंग सहित विभिन्न मनोरंजक गतिविधियां रखी गई हैं। प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर की महिला हस्तियों की रहेगी मौजूदगी फेस्ट में प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर की महिला हस्तियों को भी आमंत्रित किया गया है। विधायक भदेल ने बताया कि प्रदेश की उपमुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री दिया कुमारी राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया किशोर रहाटकर राष्ट्रीय महिला मोर्चा की अध्यक्ष वनथी श्रीनिवासन तथा राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष महिला मोर्चा भाजपा एवं पूर्व विधायक कालका हरियाणा लतिका शर्मा सहित अनेक विशिष्ट महिला अतिथियों को आमंत्रित किया गया है। उन्होंने बताया कि केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जी को भी आमंत्रित किया गया है और उनकी स्वीकृति की प्रतीक्षा है। मेले के बारे में और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9829270288 पर विधायक भदेल से ली जा सकती है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 17-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- 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शहरी चुनाव का असर देखने के लिए पंचायती चुनाव की लॉटरी प्रक्रिया को टाला। लेकिन अब राजस्थान भर में आचार संहिता को लेकर असमंजस की स्थिति। ============= राजस्थान के इतिहास में संभवत यह पहला अवसर है, जब वन स्टेट वन इलेक्शन के तहत शहरी निकायों और पंचायती राज के चुनाव एक साथ हो रहे है। सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को इसी वर्ष 15 नवंबर तक दोनों संस्थाओं के चुनाव करवाने है। तय कार्यक्रम के अनुसार 17 और 18 अगस्त को पंचायती राज से जुड़ी जिला परिषद के वार्ड, पंचायत समितियों के प्रधान और वार्ड सदस्यों, ग्राम पंचायतों के सरपंच और वार्ड पंच के लिए आरक्षित वार्डों की लॉटरी निकालनी थी, लेकिन 16 अगस्त को रविवार के अवकाश के बावजूद राज्य सरकार ने लॉटरी निकालने की प्रक्रिया को अचानक स्थगित कर दिया। अब अगले माह सितंबर में 71 और 18 तारीख को आरक्षित वर्गों की लॉटरी निकालने की घोषणा की गई है। हालांकि सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि लॉटरी प्रक्रिया को अचानक स्थगित क्यों किया गया, लेकिन माना जा रहा है कि राज्य में भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार पहले शहरी निकायों का चुनाव असर देखना चाहती है, इसलिए सरकार ने पहले चरण में शहरी निकायों के चुनाव करवाने का निर्णय लिया है। हालांकि चुनाव आयोग ने अभी शहरी निकायों के चुनाव की तारीखों का ऐलान नहीं किया है, लेकिन सितंबर माह में शहरी निकायों की चुनाव प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। यानी पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव अक्टूबर और नवंबर में होंगे। ऐसी स्थिति में पंचायती राज चुनाव की लॉटरी को एक माह के लिए टाल दिया गया है। इससे दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के उन नेताओं को भी फायदा होगा जो शहरी निकायों के चुनाव में वार्ड पार्षद, निकायों के अध्यक्ष, सभापति और मेयर नहीं बन सके। हाल ही में जो परिसीमन हुआ है उसमें अनेक ग्राम पंचायत शहरी निकायों में शामिल हो गई है। यानी ऐसे अनेक राजनेता है जिनकी राजनीति शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में है। असमंजस की स्थिति: सरकार ने पंचायती राज चुनाव में लॉटरी प्रक्रिया को टाल कर चुनाव आचार संहिता को लेकर असमंजस की स्थिति खड़ी कर दी है। राज्य निर्वाचन आयोग जिस दिन शहरी निकायों के चुनाव की तारीखों की घोषणा करेगा, उसी दिन से शहरी सीमा में चुनाव आचार संहिता लागू हो जाएगी। लेकिन वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में आचार संहिता लागू नहीं होगी। जबकि प्रदेश भर में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की सीमाएं आपस में मिली हुई है। कहा जा सकता है कि किसी ग्राम पंचायत की सीमाएं शहरी क्षेत्र में किसी शहरी निकाय के वार्ड की सीमा ग्रामीण क्षेत्र में घुसी हुई है। ऐसे में आचार संहिता का पालना करवाना बेहद मुश्किल होगा। S.P.MITTAL BLOGGER ( 17-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

विकसित भारत के मुद्दे पर पीएम मोदी ने लाल किले से विपक्ष खासकर राहुल गांधी को मुंहतोड़ जवाब दिया। पहली बार स्वतंत्रता दिवस के समारोह में वन्देमारतम को राष्ट्र गीत के तौर पर गाया। राहुल गांधी सहित कांग्रेस के प्रमुख नेता नहीं आए। ================ 15 अगस्त को देश के 80 वें स्वतंत्रता दिवस के राष्ट्रीय समारोह में नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री के तौर पर लगातार 13वीं बार दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले पर तिरंगा फहराया। आजादी के बाद यह पहला अवसर रहा जब राष्ट्रगान जन गण मन से पहले राष्ट्रगीत वंदे मातरम गाया गया। मालूम हो कि वंदे मातरम को अब संवैधानिक दर्जा मिल गया है, इसलिए सरकारी समारोह में वंदे मातरम गीत का गायन अनिवार्य हो गया है। आमतौर पर वंदे मातरम गीत के शुरू के दो पैराग्राफ का ही गायन होता था, लेकिन अब पूरा वंदे मातरम गीत अनिवार्य हो गया है। पूरा वंदे मातरम गीत के गायन में तीन मिनट 10 सेकंड का समय लगता है। कहा जा सकता है कि 80 वां स्वतंत्रता दिवस का राष्ट्रीय समारोह वेद मातरम गीत के कारण ऐतिहासिक बन गया है। पीएम मोदी ने परंपरा के अनुरूप अपनी सरकार की उपलब्धियां तो बताई ही साथ ही विपक्ष खासकर लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी के नकारात्मक प्रचार का मुंह तोड़ जवाब दिया। पीएम मोदी ने कहा कि देश में नक्सलवाद समाप्त हो गया है, लेकिन कुछ लोगों के दिमाग में नक्सलवाद अभी भी भरा हुआ है, इसलिए ऐसे लोग देश को कमजोर करने वाली बातें कहते है। मध्य एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू हुआ तो ऐसे लोगों ने डराया कि अब देश में गैस, पेट्रोल और डीजल की कमी हो जाएगी, लेकिन देश की जनता ने देखा कि इस यु का भारत में तेल सप्लाई का कोई असर नहीं पड़ा। देशवासियों को मांग के अनुरूप गैस और तेज की सप्लाई होती रही। ऐसे में लोगों ने कोरोना काल में वैक्सीन को लेकर डराया लेकिन भारत ने न केवल अपने देश के लोगों को वैक्सीन उपलब्ध करवाई बल्कि दूसरे देशों के लोगो के भी दी। नक्सलवादी मानसिकता के लोगों को हर बार मार खानी पडती है, लेकिन ऐसे लोग अपनी आदतों से बाज नहीं आते। मोदी ने कहा कि हमारी सरकार ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत का जो संक प लिया है, उसे हर हाल में पूरा किया जाएगा। मोदी ने कहा कि 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं। यह अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। अपने 12 वर्ष के कार्यकाल के बारे में बताते हुए मोदी ने कहा कि वर्ष 2014 से पहले देश के 70 शहरों में पाइप लाइन से 20 लाख घरों में रसोई गैस की सप्लाई होती थी। आज 700 शहरों के पौने दो करोड़ घरों में गैस सप्लाई हो रही है। 2014 से पहले मात्र दो गीगा वाट सोलर एनर्जी होती थी, जो आज 160 गीगा वाट हो रही है। 2014 से पहले रेलवे में विद्युतीकरण मात्र 30 प्रतिशत था। आज 100 प्रतिशत हो गया है। रक्षा उत्पादन चार गुना बढ़ा है। डिजिटल लेनदेन 100 प्रतिशत बढ़ा है। 2014 में देश में 350 विश्वविद्यालय थे, आज 620है। मोदी ने कहा कि कुछ लोग भले ही नकारात्मकता रवैया प्रदर्शित करे, लेकिन आजादी के साथ वर्ष पूरे होने पर भारत विकसित बनकर रहेगा। इसके लिए सप्त धारा यानी सात शक्तियां बनाई गई है। मोदी ने राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे चुनाव के दौरान 33 प्रतिशत उम्मीदवार महिलाओं के बनाए मोदी के भाषण की प्रमुख बातें: यहाँ दिए गए विवरण का एक संक्षिप्त और स्पष्ट रूप (Summary) दिया गया है: 1. नक्सलवाद और ‘दिमागी नक्सल’ की चुनौती उपलब्धि: 2014 के संकल्प के बाद देश में हथियारबंद नक्सलवाद अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है और प्रभावित क्षेत्रों में विकास पहुँच चुका है। नई चुनौती: जंगलों में हथियारबंद नक्सल तो खत्म हो गए हैं, लेकिन सरकारी कमेटियों और गलियारों में पैठ बनाए ‘दिमागी नक्सल’ अब भी हिंसा, अराजकता और समाज को गलत राह पर ले जाने की ताक में हैं। इन्हें पहचानकर अलग-थलग करना जरूरी है। 2. 12 वर्षों की प्रमुख उपलब्धियां गरीबी व अर्थव्यवस्था: 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले। भारत ‘फ्रेजाइल फाइव’ से निकलकर एक तेज रफ्तार अर्थव्यवस्था बना। विकास के आंकड़े: डिफेंस (4 गुना), खादी (5 गुना), मोबाइल उत्पादन (33 गुना), डिजिटल ट्रांजैक्शन (100 गुना) और पेटेंट (4 गुना) में भारी बढ़ोतरी हुई। बुनियादी ढांचा: गरीबों के घर, शौचालय और मेट्रो विस्तार में रिकॉर्ड काम हुआ। लक्ष्य: ‘मेक इन इंडिया’ और ‘लोकल फॉर वोकल’ के जरिए 2047 तक ‘आत्मनिर्भर और विकसित भारत’ का निर्माण। 3. टेक्नोलॉजी, ऊर्जा और बुनियादी सुधार सेमीकंडक्टर व ऊर्जा: 3 सेमीकंडक्टर प्लांट शुरू हो चुके हैं और 5-8 नए आने वाले हैं। परमाणु ऊर्जा और क्रिटिकल मिनरल्स में भारत आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। संसाधन विस्तार: समुद्र में ‘नो गो एरिया’ को ‘गो अहेड एरिया’ बनाकर 85,000 करोड़ की समुद्र मंथन योजना शुरू की गई। गैस व सोलर: पाइप गैस 70 शहरों से बढ़कर 700 शहरों तक पहुँची। सोलर एनर्जी 2 GW से बढ़कर 160 GW हुई। रेलवे: 90 वर्षों में सिर्फ 30% रेलवे इलेक्ट्रिफिकेशन हुआ था, जिसे बीते एक दशक में 70% पूरा किया गया। देश की पहली और सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेन शुरू हुई। 4. वैश्विक संकट और किसान कल्याण संकट प्रबंधन: कोरोना और रूस-यूक्रेन व वेस्ट एशिया युद्ध के बावजूद देश में पेट्रोल, डीजल, गैस और उर्वरक (फर्टिलाइजर) की आपूर्ति बाधित नहीं होने दी गई। किसानों को राहत: वैश्विक बाजार में 3,000 रुपये मिलने वाली यूरिया बोरी किसानों को 300 रुपये में और महंगी DAP सब्सिडी दरों पर उपलब्ध कराई जा रही है। 5. ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ और 2047 का विजन कार्यशैली में बदलाव: जो काम पांच दशकों में नहीं हुए, उन्हें अगले 5 वर्षों में पूरा करने के लिए ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ की गति से काम करना होगा। मैन्युफैक्चरिंग व क्वालिटी: ग्लोबल वैल्यू चेन में भरोसा बनाने के लिए ‘जीरो डिफेक्ट’ और उच्च गुणवत्ता (No compromise on quality) का मंत्र अपनाना होगा। युवा व स्टार्टअप: ढाई लाख से अधिक रजिस्टर्ड स्टार्टअप्स के लिए 1 लाख करोड़ रुपये का कोष रखा गया है। नारी शक्ति: ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के तहत संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33% प्रतिनिधित्व देने के लिए सभी दलों से सहयोग का आह्वान। कांग्रेस के नेता नहीं आए : दिल्ली में लाल किले पर आयोजित स्वतंत्रता दिवस के राष्ट्रीय कार्यक्रम में लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी सहित प्रदेश कांग्रेस कमेटी प्रमुख का न आना स्पष्ट दर्शाता है कि उन्हें देश की आजादी से जुड़े कार्यक्रमों में रुचि नहीं है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 15-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

तो क्या सोनिया गांधी, राहुल गांधी और खडग़े ने वंदेमारतम गीत को पूरा गाने पर नाराजगी जताई? कांग्रेस मुख्यालय पर हुए ध्वजारोहण समारोह में कांग्रेस के नेता असहज हुए। ================ 13 अगस्त को दिल्ली में कांग्रेस के मुख्यालय में भी 80 वां स्वतंत्रता दिवस समारोह मनाया गया। राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े ने ध्वजारोहण किया। ध्वजा रोहण के बाद जब राष्ट्रीय गीत वंदे मारतम गाया जा रहा था, तो बीच में ही कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया कांधी , मौजूद अध्यक्ष खरगे और लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी की नाराजगी देखने को मिली। असल में वंदेमारतम गीत को संवैधानिक दर्जा मिलने के बाद पूरा वंदेमातरम का गायन अनिवार्य हो गया है। किसी भी समारोह में उपस्थित लोग वंदे मातरम को बीच में नहीं रुकना चाहिए , जब कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम गीत गाया जा रहा था, तब दो पैराग्राफ के बाद सोनिया गांधी ने जानना चाहा कि पूरा वन्देमारतम गीत क्यों गाया जा रहा है? सोनिया की तरह खरगे ने भी नाराजगी दिखााई। इसी बीच राहुल गांधी ने जानना चाहा कि उनकी माताजी श्रीमती सोनिया गांधी किस पर नाराज है तो वीडियो में तीनों नेताओं की भूमिका बता रही कि वंदेमातरम को पूरा गाने पर असहज है। जबकि राहुल गांधी के पास खड़े कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अजय माकन बिना हिले डुले वंदे मातरम का गायन कर रहे है। तीन मिनट के वीडियो में सोनिया गांधी की नाराजगी पर कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि पूरा वंदे मातरम गायन अनिवार्य हो गया है, इसलिए बीच में गायन को बंद नहीं किया जा सकता। वायरल वीडियो में साफ पता चलता है कि भले ही सोनिया गांधी राहुल गांधी और खरगे गायन में खड़े रहे, लेकिन उन्होंने पूरे वंदे मातरम का उच्चारण नहीं किया। यहां यह उल्लेखनीय है कि पूरे वंदेमातरम पर मुस्लिम संगठनों ने ऐतराज जताया है। संगठनों के प्रतिनिधियों का कहना है कि दो पैराग्राफ के बाद वंदे मातरम गीत में हिंदू देवी देवताओं की स्तुति की गई है, इसलिए मुसलमान वंदे मातरम का गायन दर्जा देने का प्रस्ताव रखा गया, तब कांग्रेस समाजवादी पार्टी, डीएमके आदि विपक्षी दलों के सांसदों ने बहिष्कार किया था। यानी प्रस्ताव पर विपक्षी सांसदों ने अपनी सहमति नहीं दी। वंदेनमातरम गीत को संवैधानिक दर्जा मिलने के बाद कांग्रेस मुख्यालय में 15 अगस्त को पहला अवसर रहा, जब वरिष्ठ नेताओं के समक्ष पूरे वंदेमातरम का गायन हुआ। सोनिया गांधी और खडग़े की नाराजगी के सवाल पर कांग्रेस केवरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा कि सोनया गांधी पूरे वंदमारतम के गायन से नाराज नहीं थी। असल में राष्ट्ररीय अध्यक्ष खरगे के लिए कुर्सी लाने को कह गया था। जयराम रमेश की यह सफाई किसी के भी गले नहीं उतर रही है क्योंकि समारोह में खरगे के लिए कुर्सी लाई ही नहीं गई। वैसे भी तीन मिनट के वन्देमारतम को गाने के लिए कुर्सी पर बैठने की कोई आवश्यकता नहीं है। खरगे तो 82 वर्ष की उम्र में भी राज्यसभा में लगातार खड़े रहते हैं। S.P.MITTAL BLOGGER ( 15-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

आखिर राहुल गांधी झारखंड के आंदोलन को समर्थन क्यों नहीं देते? अरविंद केजरीवाल के इशारे पर नाचने वाली कॉकरोच जनता पार्टी भी चुप। सीबीआई जांच की मांग पर ऐतराज क्यों? ================ झारखंड में भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक होने के विरोध में प्रदेश भर के छात्र गत एक पखवाड़े से राजधानी में धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। कई छात्र आमरण अनशन पर भी है। छात्रों ने पेपर लीक के मामलों की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है। लेकिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों की इस मांग को मानने से इंकार कर दिया है। झारखंड में झारखंड मुक्ति मोर्चा वाली सरकार कांग्रेस के समर्थन से चल रही है। इसलिए यह सवाल उठ रहा है कि आखिर प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी झारखंड के छात्रों के आंदोलन को समर्थन क्यों नहीं दे रहे है? राहुल गांधी के इशारे पर ही नीट पेपर लीक को लेकर संसद की कार्यवाही ठप है। पेपर लीक के मुद्दे को लेकर ही राहुल गांधी ने 8 अगस्त को देहरादून में छात्रों से संवाद किया और कहा कि केंद्र सरकार की नीतियों की वजह से देश के युवाओं का भविष्य बर्बाद हो रहा है। सवाल उठता है कि जब राहुल गांधी देहरादून जाकर केंद्र सरकार की आलोचना कर सकते हैं, तो रांची आकर छात्र आंदोलन का समर्थन क्यों नहीं करते? झारखंड के छात्र आंदोलन का समर्थन न करने से राहुल गांधी और कांग्रेस का दोहरा चरित्र उजागर होता है। इससे यह भ प्रदर्शित होता है कि राहुल गांधी की नजर में झारखंड के छात्रों का आंदोलन कोई मायने नहीं रखता। कॉकरोच पार्टी भी चुप: नीट पेपर लीक को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी ने गत जुलाई माह में दिल्ली में बड़ा धरना प्रदर्शन किया। कॉकरोचों के दबाव के चलते ही धर्मेन्द्र प्रधान को केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा, लेकिन अब झारखंड के मुद्दे पर वही कॉकरोच पार्टी चुप है। कॉकरोच पार्टी पर आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल का दबाव है। असल में केजरीवाल की रणनीति से ही कॉकरोच पार्टी का जन्म हुआ। दिल्ली के जंतर मंतर के छात्र आंदोलन में भी परदे के पीछे से केजरीवाल की भूमिका थी। चूंकि झारखंड में कांग्रेस के समर्थन से जेएमएम की सरकार चल रही है, इसलिए केजरीवाल नहीं चाहते कि कॉकरोच पार्टी झारखंड के आंदोलन का समर्थन करें। सीबीआई जांच पर ऐतराज क्यों? झारखंड में शिक्षा विभाग मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पास है, इसलिए प्रदर्शनकारी छात्रों को भी पता है कि हेमंत सोरेन इस्तीफा नहीं देेंगे। यही वजह है कि प्रदर्शनकारी छात्र पेपर लीक के मामलों की जांच सीबीआई से करवाने की मांग कर रहे हैं। हालांकि छात्रों के दबाव के चलते सरकार ने झारखंड प्रशासनिक सेवा की परीक्षा को रद्द कर दिया है। इसके साथ ही झारखंड लोकसेवा आयोग के तीन सदस्यों का इस्तीफा भी ले लिया है, लेकिन सीएम सोरेन सीबीआई जांच की मांग स्वीकार नहीं कर रहे। S.P.MITTAL BLOGGER ( 10-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

गहलोत और पायलट गुट की लड़ाई अब डोटासरा के पास पहुंची। महेंद्र सिंह रलावता ने राजनीति का पाला बदला। अजमेर में कांग्रेस की फूट चौराहे पर। ================ अजमेर शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डॉ. राजकुमार जयपाल ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को एक पत्र लिखकर पूर्व शहर अध्यक्ष विजय जैन और गत विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी रहे हेमंत भाटी पर अनुशासनहीनता का आरोप लगाया है। डॉ. जयपाल ने पत्र में कहा कि जैन और भाटी की गतिविधियों से कांग्रेस को नुकसान हो रहा है। जिसका असर नगर निगम के चुनाव पर पड़ेगा। इस पत्र पर पूर्व सीएम अशोक गहलोत के समर्थक पूर्व विधायक डॉ. श्रीगोपाल बाहेती, अजमेर डेयरी के अध्यक्ष रामचंद्र चौधरी, नगर निगम में प्रतिपक्ष की पूर्व नेता द्रौपदी कोली के भी हस्ताक्षर हैं। कांग्रेस की राजनीति में पूर्व अध्यक्ष विजय जैन और हेमंत भाटी को कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट का समर्थक माना जाता है। अजमेर में लंबे समय से गहलोत और पायलट के समर्थक आमने सामने है। डॉ. जयपाल द्वारा पत्र लिखे जाने से अब गहलोत और पायलट गुट की लड़ाई प्रदेशाध्यक्ष डोटासरा के पास पहुंच गई है। डॉ. जयपाल का कहना है कि जैन ओर भाटी लगातार पार्टी का अनुशासन तोड़ रहे हैं, इसलिए प्रदेश अध्यक्ष को पत्र लिखा गया है। वहीं जैन और भाटी का आरोप है कि डॉ. जयपाल आरटीडीसी के पूर्व अध्यक्ष धर्मेन्द्र राठौड़ के इशोर पर काम कर रहे है। राठौड़ की भूमिका शुरू से ही विभाजनकारी रही है।यही वजह है कि अजमेर में कांग्रेस के निष्ठावान कार्यकर्ताओं की उपेक्षा हो रही है। उन्होंने हाल ही में कार्यकर्ताओं की जो बैठक बुलाई उसमें कांग्रेस के निष्ठावान और जिम्मेदार कार्यकर्ता मौजूद थे। कार्यकर्ताओं की इस बैठक को अनुशासनहीनता नहीं माना जा सकता क्योंकि इस बैठक में नगर निगम के चुनाव में कांग्रेस को मजबूत करने की रणनीति बनी। अनुशानहीनता तो जयपाल और धर्मेन्द्र राठौड़ कर रहे हैं। निष्ठावान कार्यकर्ताओं की लगातार उपेक्षा की जा रही है। जैन ने कहा कि हम भी प्रदेश अध्यक्ष डोटासरा और राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े के समक्ष अपना पक्ष रखेंगे। जैन और भाटी ने अजमेर कांग्रेस में असली विवाद की जड़ धर्मेन्द्र राठौड़ को बताया है। मालूम हो कि धर्मेन्द्र राठौड़ पूर्व सीएम अशोक गहलोत के कट्टर समर्थक हैं। रलावता ने पाला बदला: अजमेर कांग्रेस के ताजा विवाद में वरिष्ठ नेता महेंद्र सिंह रलावता की बदली हुई भूमिका सामने आई है। रलावता अभी तक सचिन पायलट के समर्थक रहे। पायलट की वजह से ही रलावता को दो बार अजमेर उत्तर क्षेत्र से कांग्रेस के उम्मीदवार बने। यह बात अलग है कि रलावता को दोनों बार हार का सामना करना पड़ा। पायलट जब भी अजमेर आए तब स्वागत करने वालों में रलावता सबसे आगे रहे लेकिन अब ऐसा प्रतीत होता है कि रलावता ने पायलट का साथ छोड़ दिया है। शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डॉ. जयपाल के पायलट समर्थक विजय जैन और हेमंत भाटी के खिलाफ जो पत्र लिखा है उस पर रलावता ने भी हस्ताक्षर किए है। इससे जाहिर होता है कि रलावता ने अब गहलोत गुट का दामन थाम लिया है। मालूम हो कि डॉ. जयपाल ने अपनी कार्यकारिणी में रलावता के छोटे भाई पूर्व पार्षद गजेंद्र सिंह रलावता को शामिल किया है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 10-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

ममता बनर्जी की टीएमसी वाले सांसद, यूसुफ पठान, खलीलुर्रहमान और अबु ताहिर ने पीएम मोदी का आतिथ्य स्वीकारा। सवाल-फिर पीएम मोदी मुस्लिम विरोधी कैसे। ================ 7 अगस्त को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना के उन 26 सांसदों को सुबह के नाश्ते पर आमंत्रित किया, जो हाल ही में केंद्र में सत्तारूढ़ एनडीए में शामिल हुए हैं। इन सांसदों में टीएमसी के चुनाव चिह्न पर लोकसभा का सांसद बनने वाले यूसुफ पठान, खलीलुर्रहमान और अबु ताहिर भी शामिल रहे। इन तीनों मुस्लिम सांसदों ने पीएम मोदी के पास खड़े होकर गर्व से फोटो भी खिंचवाया। तीनों ने पीएम मोदी की कार्यशैली की प्रशंसा करते हुए कहा कि मोदी की नीतियों से देश का विकास हो रहा है। मोदी के 12 वर्ष के कार्यकाल में मुसलमान स्वयं को ज्यादा सुरक्षित महसूस करता है। यहां यह खासतौर से उल्लेखनीय है कि तीनों मुस्लिम सांसदों के संसदीय क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या ज्यादा है। भारतीय क्रिकेट टीम के सदस्य रहे यूसुफ पठान ने तो अपने गृह प्रदेश गुजरात को छोड़कर पश्चिम बंगाल की बहरामपुर सीट से चुनाव लड़ा था। पठान ने वर्ष 2024 में इस सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार अधीर रंजन चौधरी को इसलिए हराया कि यहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या ज्यादा थी। आमतौर पर यह आरोप लगता है कि पीएम मोदी मुस्लिम विरोधी है। ऐसा आरोप ममता बनर्जी के साथ साथ कांग्रेस के राहुल गांधी, सपा के अखिलेश यादव आदि भी लगाते हैं, लेकिन सवाल उठता है कि जब मुस्लिम वोटों के दम पर चुनाव जीते मुस्लिम सांसद ही पीएम मोदी की प्रशंसा कर रहे हैं, तब मोदी मुस्लिम विरोधी कैसे हो सकते हैं? तीनों मुस्लिम सांसदों ने पीएम मोदी के नेतृत्व में आस्था प्रकट की जो यह दर्शाता है कि पीएम मोदी सबका साथ सबका विकास और सबका विश्वास के तहत मुसलमानों का भी पूरा ख्याल रखते हैं। यदि पीएम मोदी मुस्लिम विरोधी होते तो यूसुफ पठान, खलीलुर्रहमान और अबु ताहिर भी भी मोदी के नेतृत्व को स्वीकार नहीं करते। ममता बनर्जी, राहुल गांधी, अखिलेश यादव जैसे नेता मोदी के बारे में कुछ भी कहे, लेकिन मुस्लिम सांसदों ने यह प्रदर्शित किया है कि पीएम मोदी मुस्लिम विरोधी नहीं है। 7 अगस्त की मुलाकात में पीएम मोदी ने टीएमसी और शिवसेना से आए सांसदों को भरोसा दिलाया कि उनके राजनीतिक हितों की रक्षा की जाएगी। यानी वर्ष 2029 में होने वाले लोकसभा के चुनाव में यह सभी सांसद भाजपा के उम्मीदवार होंगे। S.P.MITTAL BLOGGER ( 08-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511