S.P. MITTAL Blog

राजस्थान में 9 सितंबर से पेयजल सप्लाई ठप करने की फिर धमकी। ठेकेदारों की बार बार धमकी से भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार की छवि खराब हो रही है। आखिर बकाया साढ़े तीन हजार करोड़ का भुगतान क्यों नहीं किया जाता? सप्लाई बंद होगी तो अजमेर, जयपुर, टोंक के एक करोड़ से भी ज्यादा लोग परेशान होंगे। ================ राजस्थान पीएचडी कांट्रेक्टर एसोसिएशन की संघर्ष समिति के अध्यक्ष ओम प्रकाश विश्नोई ने 8 सितंबर को प्रदेश के प्रमुख दैनिक पत्रों में पूरे पृष्ठ का विज्ञापन प्रकाशित करवाया है। इस विज्ञापन में कहा गया है कि 9 सितंबर से राजस्थान भर में पेयजल की सप्लाई बंद कर दी जाएगी। विश्नोई की ओर से कहा गया है कि सरकार ने ठेकेदारों का बकाया साढ़े तीन हजार करोड़ रुपए का भुगतान नहीं किया है। ऐसी स्थिति में ठेकेदार अब जलदाय विभाग की पाइप लाइनों के संरक्षण और पेयजल की सप्लाई का काम नहीं कर सकते हैं। यह बकाया राशि पिछले 35 माह से चली आ रही है। सरकार ने बकाया राशि के भुगतान के लिए कई बार लिखित समझौता किया, लेकिन इसके बाद भी ठेकेदारों को भुगतान नहीं हो रहा। अब कोई भी ठेकेदार बकाया राशि के भुगतान के बगैर पेयजल सप्लाई का काम नहीं कर सकता है। ठेकेदारों द्वारा ऐसी धमकी पूर्व में भी दी गई थी, लेकिन तब सरकार ने हाथों हाथ समझौता कर लिया। लेकिन इस बार मामला गंभीर हो गया है। ठेकेदारों ने 9 सितंबर को पेयजल सप्लाई तब ठप करने की धमकी दी है, जब 9 सितंबर को शहरी निकाय के प्रथम चरण के चुनाव का मतदान का होना है। यदि मतदान वाले दिन प्रदेश भर में पेयजल की सप्लाई नहीं होती है, तो इससे उत्पन्न हालातों का अंदाजा लगाया जा सकता है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी माने या नहीं लेकिन ठेकेदारों की बार बार धमकी से भाजपा सरकार की छवि खराब हो रही है। यदि बकाया भुगतान के लिए ठेकेदार पेयजल सप्लाई बंद करने की धमकी देते हैं, तो फिर सरकार के हालातों का अंदाजा लगा लेना चाहिए। सवाल यह भी है कि सरकार ठेकेदारों को बकाया राशि का भुगतान क्यों नहीं कर रही? जब सरकार ने बकाया राशि के भुगतान के लिए लिखित में समझौता कर रखा है तब ठेकेदारों को भुगतान किया जाना चाहिए। यह भी सोचनीय मुद्दा है कि पेयजल सप्लाई के लिए सरकार पूरी तरह निजी क्षेत्र पर निर्भर है। सारे संसाधन सरकार के है, लेकिन नियंत्रण निजी क्षेत्र का हो गया है। कहा जा सकता है कि सरकार निजी क्षेत्र पर निर्भर है। 9 सितंबर से पेयजल की सप्लाई ठप होती है तो अजमेर, जयपुर, टोंक जिले के एक करोड़ से भी ज्यादा लोगों को परेशानी होगी। इन तीनों जिलों के लोग बीसलपुर बांध के पानी पर निर्भर है। बांध से प्रतिदिन 1200 टीएमसी पानी की सप्लाई तीनों जिलों में होती है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 08-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

मेरे रिटायरमेंट का इंतजार हो रहा है? क्या सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की यह टिप्पणी जस्टिस संदीप मेहता और राजस्थान के एक्टिंग सीजे संजीव प्रकाश शर्मा के विवाद से जुड़ी है? अरावली पर्वतमाला का संरक्षण भी जरूरी। ================ सब जानते हैं कि 7 सितंबर तक राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रहे संजीव प्रकाश शर्मा की कार्यशैली को लेकर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश संदीप मेहता ने लगातार पत्र लिखे हैं। इन पत्रों में संजीव प्रकाश शर्मा के न्यायिक कार्यों को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जस्टिस संदीप मेहता के पत्रों के आरोपों की जांच के आदेश प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने दिए हैं। न्यायिक क्षेत्रों में चर्चा है कि सीजेआई सूर्यकांत न्यायाधीश शर्मा को बचाने का काम कर रहे हैं। देश के न्यायिक इतिहास में यह पहला अवसर है जब सुप्रीम कोर्ट के किसी जज ने किसी प्रदेश के एक्टिंग सीजे पर ऐसे आरोप लगाए हैं। अभी यह मामला गर्माया हुआ ही है कि 7 सितंबर को प्रधान न्यायाधीश ने अरावली पर्वतमाला की परिभाषा के प्रकरण में सुनवाई करते हुए कहा, क्या मेरे रिटायरमेंट का इंतजार किया जा रहा है। मालूम हो कि सूर्यकांत 9 फरवरी 2027 को प्रधान न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत्त होंगे। 7 सितंबर को अरावली पर्वतमाला की परिभाषा की सुनवाई के दौरान हाई पावर्ड कमेटी की ओर से आग्रह किया गया कि परिभाषा तय करने के लिए 6 माह का समय और दिया जाए। कमेटी की इस मांग पर ही सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, क्या कमेटी अपनी रिपोर्ट मेरे रिटायरमेंट के बाद देना चाहती है। सूर्यकांत ने स्पष्ट कहा कि कमेटी का कार्यकाल नहीं बढ़ाया जाएगा और कमेटी को तय समय के अनुसार 30 नवंबर तक अपनी रिपोर्ट देनी होगी। इसके साथ ही मामले की सुनवाई 2 दिसंबर निर्धारित की गई। असल में अरावली पर्वतमाला की परिभाषा का मामला दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात से जुड़ा हुआ है। इन राज्यों में बड़े पैमाने पर अवैध रूप से खनन हो रहा है। केंद्र सरकार ने भी खनन माफियाओं को मदद करने के लिए अरावली पहाडिय़ों की ऊंचाई को सौ मीटर माना ताकि सौ मीटर से कम वाली पहाडिय़ों खनन का कार्य विधिवत हो सके। सीजेआई सूर्यकांत ने अरावली पर्वतमाला की परिभाषा तय करने के लिए ही हाईपावर्ड कमेटी का गठन किया था। लेकिन अब यह कमेटी ही निर्धारित समय में रिपोर्ट देने में असमर्थता जता रही है। इसलिए 7 सितंबर को सूर्यकांत की रिटायरमेंट वाली टिप्पणी बहुत मायने रखती है। इस टिप्पणी को जस्टिस संदीप मेहता और राजस्थान के हाईकोर्ट के जज संजीव प्रकाश शर्मा के विवाद से भी जोड़ कर देखा जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट में इन दिनों जो कुछ भी चल रहा है, उसकी वजह से न्यायपालिका की गरिमा को नुकसान हो रहा है। सवाल उठता है कि जब सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के पत्रों पर ही कोई कार्यवाही नहीं हो रहा है, तो फिर आम व्यक्ति की शिकायत पर क्या कार्यवाही होगी। सूत्रों के अनुसार जस्टिस संदीप मेहता इस बात से बेहद खफा है कि उनके पत्रों के बाद भी सीजेआई सूर्यकांत ने राजस्थान में संजीव प्रकाश शर्मा के न्यायिक कार्यों पर रोक नहीं लगाई। पिछले 10 माह से जस्टिस शर्मा को ही कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश बनाए रखा गया है। जस्टिस मेहता ने अपने पत्रों में ऐसे कई उदाहरण दिए हैं, जिनसे संजीव प्रकाश शर्मा के न्यायिक फैसलों पर सवाल उठते हैं। यहां यह उल्लेखनीय है कि 7 सितंबर को जस्टिस संजय अग्रवाल ने राजस्थान हाईकोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश का पद संभाल लिया है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 08-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

तीन बार मुख्यमंत्री रहे अशोक गहलोत अपना मुकाबला मौजूदा सीएम भजनलाल शर्मा से क्यों कर रहे हैं? शहरी निकाय के चुनाव में रोड शो करने का मामला। ================ राजस्थान में 9 और 11 सितंबर को 309 शहरी निकायों के 10245 वार्डों के चुनाव होने हैं। इन चुनावों में भाजपा उम्मीदवारों को जितवाने के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा बड़े शहरों में रोड शो कर रहे है। 5 सितंबर को सीएम शर्मा ने भीलवाड़ा और उदयपुर, 6 सितंबर को अजमेर, बीकानेर और जोधपुर में रोड शो किया। 7 सितंबर को अलवर, भरतपुर में रोड शो कर रहे है। 8 सितंबर को जयपुर में करेंगे। सीएम शर्मा के लगातार रोड शो करने पर पूर्व सीएम और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने एतराज जताया है। गहलोत का कहना है कि शहरी निकाय का चुनाव वार्ड स्तर का होता है, इसलिए मुख्यमंत्री पद पर आसीन नेता को प्रचार नहीं करना चाहिए। गहलोत ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री रहते हुए शहरी निकाय चुनावों में कभी भी कांग्रेस का प्रचार नहीं किया। समझ में नहीं आता कि गहलोत अपनी तुलना भजनलाल शर्मा से क्यों कर रहे हैं? गहलोत को यह समझना चाहिए कि शर्मा भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री हैं और भाजपा के लिए वार्ड को लेकर लोकसभा तक का चुनाव एक समान होता है। जो मतदाता वार्ड चुनाव में मतदान करता है, वही मतदाता विधायक और सांसद भी चुनता है। वैसे भी राजनीति में गहलोत और शर्मा का मुकाबला नहीं हो सकता। गहलोत तीन बार मुख्यमंत्री तीन बार केंद्रीय मंत्री और तीन बार ही प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष रहे हैं। जबकि भजनलाल शर्मा पहली बार विधायक बनकर मुख्यमंत्री बने हैं, शर्मा विधायक बनने से पहले सिर्फ एक बार सरपंच बने। यानी राजनीति में भजनलाल शमा्र के मुकाबले अशोक गहलोत की वरिष्ठता बहुत ज्यादा है, उसमें वार्ड का चुनाव छोटा ही नजर आएगा। भजनलाल शर्मा को गहलोत की बराबरी करने के लिए कम से कम 2 बार तो मुख्यमंत्री बनना ही पड़ेगा। चूंकि शर्मा को वर्ष 2028 के विधानसभा चुनाव में अपनी सरकार को रिपीट करवाना है, इसलिए वार्ड चुनाव महत्व रखता है। आज गहलोत को भले ही लोकप्रिय होने की जरुरत न हो, लेकिन भजनलाल शर्मा को है। शहरी निकाय के चुनाव में रोड शो के दौरान शर्मा वार्ड स्तर के भाजपा कार्यकर्ता से भी संवाद कर रहे है। जब वार्ड स्तर का कार्यकर्ता सीधे मुख्यमंत्री से संवाद करता है तो फिर उसका उत्साह चार गुना बढ़ जाता है। अशोक गहलोत भले ही वार्ड के चुनाव को निम्न स्तर का मानते हो, लेकिन भजनलाल शमा्र के लिए वार्ड स्तर का चुनाव भी मायने रखता है। सीएम शर्मा के शहरी क्षेत्रों में रोड शो की वजह से भाजपा को फायदा हो रहा है। भाजपा के बागी उम्मीदवार अधिकृत उम्मीदवार का समर्थन भी करने लगे हैं। S.P.MITTAL BLOGGER ( 07-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

12500वां ब्लॉग पिता स्वर्गीय कृष्णगोपाल जी गुप्ता को समर्पित। दो बार पार्षद रहने के बाद भी एक इंच जमीन नहीं खरीदी। ================ पाठकों के समक्ष जब मैं आज दिनांक 7 सितंबर 2026 को अपना 12500वां ब्लॉग प्रस्तुत कर रहा हंू, तब राजस्थान भर में शहरी निकाय के चुनावों का शोर है। 10245 वार्डों में 38 हजार से ज्यादा उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। इन चुनावों में सभी उम्मीदवार पानी की तरह पैसा बहा रहे है। यह ब्लॉग मेरे स्वर्गीय पिता कृष्णगोपाल जी गुप्ता को इसलिए समर्पित कर रहा हंू कि वे दो बार अजमेर नगर परिषद के वार्ड संख्या 33 से पार्षद चुने गए। पहली बार वर्ष 1964 और दूसरी बार 1977 में पार्षद बने। उस समय वार्ड पार्षद का चुनाव पार्टी के सिंबल पर नहीं होता था। उम्मीदवार को निर्दलीय नामांकन दाखिल करना होता था। बाद में राजनीतिक दल अपने समर्थन की घोषणा करते थे, लेकिन पिता ने दो बार किसी राजनीतिक दल का समर्थन लिए बगैर चुनाव जीता। तब राजनीतिक दल से ज्यादा उम्मीदवार की छवि मायने रखती थी। आज भले ही वार्ड चुनाव का उम्मीदवार लाखों रुपया खर्च कर रहा हो, लेकिन तब पिताजी ने कुछ रुपयों में ही चुनाव जीता। अजमेर में गोपाल भैया के नाम से लोकप्रिय पिताजी ने दो बार पार्षद रहने के बाद भी एक इंच जमीन भी नहीं खरीदी और न ही अपने घर के मकान का जुगाड़ किया। पूरा जीवन किराये के मकान में गुजार दिया। तब भले ही ज्वाला प्रसाद शर्मा, माणकचंद सोगानी जैसे कांग्रेस के नेता नगर परिषद के अध्यक्ष रहे हों, लेकिन निर्दलीय पार्षद के तौर पर भी पिता का पूरा सम्मान होता था। नगर परिषद के कार्यालय में जाने के लिए वाहन के तौर पर साइकिल का ही उपयोग होता था। चूंकि रेल दुर्घटना में पिता का एक पैर क्षत्रिस्त हो गया था, इसलिए गोपाल भैया साइकिल के कैरियर पर बैठकर ही नगर परिषद के कार्यालय पहुंचते थे। ऐसे पिता को 12500वां ब्लॉग समर्पित कर मैं स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। यह पिता का आशीर्वाद ही है कि आज मेरे ब्लॉग राजस्थान ही नहीं बल्कि देश के हिन्दी भाषी राज्यों में प्रमुखता के साथ पढ़े जाते हैं। राजस्थान में तो वाट्सएप ग्रुप के माध्यम से गांव ढाणी तक में ब्लॉक की पहुंच है। 25 लाख से ज्यादा पाठकों से सीधा संवाद है। जब कोई ब्लॉग वायरल होता है तो फिर करोड़ों लोगों तक पहुंचता है, इसके साथ ही मैं राजस्थान के प्रमुख न्यूज़ चैनल फर्स्ट इंडिया, सच बेधड़क, न्यूज 18, जीटीवी, एनडीटीवी आदि पर प्रतिदिन सायं पांच बजे और रात 8 बजे की लाइव डिबेट में भाग लेता हूं। यह सब पिता के आशीर्वाद से ही संभव है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 07-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

अजमेर के पूर्व मेयर धर्मेन्द्र गहलोत ने भले ही भाजपा छोड़ दी, लेकिन उनमें भाजपाई संस्कार तो है ही-मदन राठौड़, प्रदेशाध्यक्ष। कांग्रेस में महिला कार्यकर्ताओं का सम्मान नहीं, इसलिए स्नेहलता अग्रवाल बागी उम्मीदवार। भाजपा उम्मीदवार गिरीश बाशानी ने मसाणिया भैरव धाम का आशीर्वाद लिया। ================ राजस्थान भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि अजमेर के पूर्व मेयर धर्मेन्द्र गहलोत ने भले ही भाजपा छोड़ दी हो, लेकिन उनमें भाजपा के संस्कार बने हुए है। मालूम हो कि गहलोत की पत्नी हेमा गहलोत अजमेर नगर निगम के वार्ड संख्या 4 से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर खड़ी हे। अपनी पत्नी को चुनाव जितवाने के लिए गहलोत ने पूरी ताकत लगा रखी है। प्रदेश अध्यक्ष राठौड़ ने कहा कि मैं चाहता हूं कि गहलोत अपनी पत्नी की उम्मीदवार वापस ले और भाजपा की अधिकृत उम्मीदवार मोनिका को समर्थन दे। गहलोत की नाराजगी भाजपा किसी नेता से हो सकती है, लेकिन व्यक्तिगत नाराजगी के कारण पार्टी को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए। भाजपा ने ही गहलोत को दो बार अजमेर का मेयर बनाया है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति के प्रति तो नाराजगी दूर हो सकती है, लेकिन पार्टी के प्रति नाराजगी दिखाने के बाद कोई गुंजाइश नहीं रहती। मालूम हो कि गहलोत ने सार्वजनिक तौर पर अजमेर उत्तर के भाजपा विधायक वासुदेव देवनानी के प्रति अपनी नाराजगी जताई है। गहलोत का यहां तक आरोप है कि उनके आर्किटेक्ट पुत्र ने जिन भवनों का निर्माण करवाया उन्हें भी नियम विरुद्ध मानते हुए देवनानी के दबाव में सीज करवा दिया गया। महिलाओं का सम्मान नहीं: अजमेर नगर निगम के वार्ड 70 से निर्दलीय उम्मीदवार स्नेहलता अग्रवाल ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस में महिला कार्यकर्ताओं का सम्मान नहीं है। वे पिछले 25 साल से कांग्रेस में सक्रिय हैं। मौजूदा समय में ब्लॉक, महासचिव, सेवादल की सह-उपाध्यक्ष आदि पदों पर आसीन हंू। इसके अलावा वर्ष 2007 से राष्ट्रीय पंचायत परिषद की सदस्य भी हैं। कांग्रेस में अपनी सक्रियता को देखते हुए ही उन्होंने वार्ड 70 से टिकट मांगा था। लेकिन शहर जिलाध्यक्ष डॉ. राजकुमार जयपाल और वरिष्ठ नेता महेंद्र सिंह रलावता ने उनकी अनदेखी की। वार्ड 70 सामान्य महिला वर्ग के लिए आरक्षित रहा,लेकिन डॉ. जयपाल और रलावता ने आपसी मिलीभगत कर ओबीसी वर्ग की गीता गुर्जर को कांग्रेस का उम्मीदवार बनवा दिया। चूंकि मेरे साथ अन्याय हुआ,इसलिए मैं अब निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रही हंू। मुझे अपने वार्ड में व्यापक समर्थन भी मिल रहा है। चुनाव अधिकारी ने अलमारी का चुनाव चिन्ह आवंटित किया है। कांग्रेस से हुई उपेक्षा के बारे में और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9214865836 पर स्नेहलता अग्रवाल से ली जा सकती है। मसाणिया भैरव धाम का आशीर्वाद: नगर निगम के वार्ड 38 के भाजपा उम्मीदवार गिरीश बाशानी ने 6 सितंबर को राजगढ़ स्थित मसाणिया भैरव धाम के उपासक चंपालाल महाराज का आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर बाशानी ने धाम पर स्थित मनोकामना स्तंभ की परिक्रमा भी की और धाम में स्थित मसाणिया भैरव मंदिर के दर्शन भी किए। S.P.MITTAL BLOGGER ( 07-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

अजमेर में भाजपा के उम्मीदवार विकास की कार का चौथा पहिया हैं। चौथा पहिया पंचर हो गया तो कार चल नहीं पाएगी। वार्ड संख्या 4 में कांग्रेस का हाथ किसके साथ है, यह सबको पता है-देवनानी भाजपा विधायक। विधानसभा अध्यक्ष देवनानी की चुनावी सक्रियता पर कांग्रेस को ऐतराज। चुनाव आयोग में शिकायत। ================= राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी इन दिनों नगर निगम के चुनाव में अपने निर्वाचन क्षेत्र अजमेर उत्तर में सक्रिय है। देवनानी वार्ड के भाजपा उम्मीदवारों के समर्थन में सभाएं कर रहे हैं। चार सितंबर को देवनाी ने वार्ड संख्या 4 में भाजपा की उम्मीदवार मोनिका के कार्यालय का उद्घाटन किया। इस अवसर पर एक सभा को संबोधित करते हुए देवनानी ने भाजपा के उम्मीदवार की तुलना कार के चौथे पहिए से की। देवनानी ने कहा कि कार का पहला पहिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी है, दूसरा राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा है और तीसरा पहिया विधायक होने के नाते वे स्वयं है। कार तभी चल पाएगी जब चौथे पहिए के रूप में भाजपा उम्मीदवार पार्षद बनेगा। देवनानी ने कहा कि गत 6 बार से अजमेर में स्थानीय निकाय में भाजपा का बोर्ड बन रहा है। यही वजह है कि पिछले ढाई वर्ष में अजमेर उत्तर क्षेत्र में 1500 करोड़ रुपए के विकास कार्य हुए है। विकास की यह कार चलती रहे इसके लिए निगम के चुनाव में भाजपा के उम्मीदवारों की जीत जरूरी है। जन्माष्टमी पर्व का उल्लेख करते हुए देवनानी ने कहा कि वे हमेशा कर्म करने में विश्वास रखते है। उन्होंने फल की इच्छा कभी भी नहीं की। यही वजह है कि वे अजमेर उत्तर क्षेत्र से लगातार पांच बार चुनाव जीत चुके हैं। उन्होंने हमेशा मर्यादाओं का पालन किया। देवनानी ने कहा कि वार्ड संख्या चार में मैं स्वयं भी मतदाता हंू। शायद इसलिए कांग्रेस ने इस वार्ड से अपना उम्मीदवार खड़ा नहीं किया, लेकिन सबको पता है कि कांग्रेस का हाथ किसके साथ है। मालूम हो कि इस वार्ड से पूर्व मेयर धर्मेन्द्र गहलोत की पत्नी हेमा गहलोत भाजपा की बागी उम्मीदवार के तौर पर खड़ी है। देवनानी ने गहलोत दम्पत्ति का नाम लिए बगैर कहा कि मेरे इस वार्ड के मतदाता भाजपा उम्मीदवार मोनिका को भारी मतों से जितवाएंगे और सभी उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो जाएगी। देवनानी ने सभा में उपस्थित लोगों से हाथ खड़े करवाकर पूछा कि क्या मोनिका के सामने वालों की जमानत जब्त करवाओगे? सभी लोगों ने सहमति में हाथ उठाए। उन्होंने कहा कि यदि कोई निर्दलीय उम्मीदवार पार्षद बन भी जाए तो उसके मायने नहीं है। विकास तो भाजपा का पार्षद ही करवा सकता है। देवनानी ने अपने संबोधन में भाजपा उम्मीदवार मोनिका के पति समाजसेवी दीपक जैन का भी उल्लेख किया। देवनानी ने कहा कि पूर्व में जनसंघ का चुनाव चिन्ह दीपक ही था। दीपक का मतलब प्रकाश फैलाने वाला होता है। चुनावी सक्रियता पर ऐतराज: देवनानी की नगर निगम के चुनाव में सक्रियता पर कांग्रेस ने ऐतराज जताया है। अजमेर में कांग्रेस की चुनावी कमान संभाल रहे आरटीडीसी के पूर्व अध्यक्ष धर्मेन्द्र राठौड़ ने कहा कि देवनानी विधानसभा के अध्यक्ष होने के नाते संवैधानिक पद पर है। ऐसे में उन्हें किसी एक दल के लिए काम नहीं करना चाहिए। लेकिन देवनानी विधानसभा अध्यक्ष की मर्यादाओं और आचरण का उल्लंघन कर भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता के तौर पर काम कर रहे है। देवनानी की वजह से प्रशासन भी भाजपा के दबाव में काम कर रहा है। राठौड़ ने कहा कि देवनानी की चुनावी सभाओं के भाषण केंद्रीय चुनाव आयोग और राज्य चुनाव आयोग को भेजे गए है। इसके साथ ही अजमेर के कलेक्टर और निर्वाचन अधिकारी लोक बंधु से भी शिकायत की गई है। राठौड़ ने आरोप लगाया कि देवनानी चुनाव को प्रभावित कर रहे है। राठौड़ ने कहा कि नगर निगम के वार्ड संख्या 3 और 4 में रणनीति के तहत कांग्रेस ने उम्मीदवार घोषित नहीं किए है। कांग्रेस का उद्देश्य निगम चुनाव में भाजपा को हराना है। अजमेर में गत 6 बार से भाजपा का बोर्ड बन रहा है, लेकिन आज भी सीवरेज की समस्या से हर शहरवासी परेशान है। अजमेर शहर के दोनों विधायक चुने जा रहे है। लेकिन आज भी शहर की दुर्दशा आम जनता के सामने है। इस बार कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर नगर निगम में कांग्रेस का बोर्ड बनवाने का संकल्प लिया है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 05-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

गायों के चारे के लिए गौशालाओं में ही दान करें, ताकि औरंगजेब की विचारधारा के लोग लाभ न उठा सके। ममता शासन खत्म होने के बाद ही पश्चिम बंगाल में बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री की कथा हो सकी। धर्म बदलने वालों की घर वापसी होगी। ================= इतिहास गवाह है कि आक्रमणकारी मुगल औरंगजेब ने भारत में सनातन धर्म को नष्ट करने के लिए अधिकांश मंदिरों को तोड़ा। न केवल मंदिर तोड़े गए बल्कि मंदिर परिसर में ही अपने धर्म की इमारत खड़ी की गई। इन इमारतों के निर्माण में मंदिर के भवनों के मलबे को ही काम में लिया गया। देशवासियों ने 4 सितंबर को ही भगवान कृष्ण का जन्मदिन मनाया, लेकिन मथुरा वृंदावन में भगवान कृष्ण की जन्मस्थली का विवाद आज भी बना हुआ है। जिस औरंगजेब ने कृष्ण के मंदिर को तोड़ा, उसी औरंगजेब के अनुयायी आज भी सक्रिय है। सब जानते हैं कि भगवान कृष्ण को गायों से असीम प्रेम रहा। बचपन में कृष्ण गायों को चराने का ही काम करते थे, इसलिए उन्हें ग्वाला यानी गोपालक भी कहा गया। भगवान कृष्ण ने गायों के संरक्षण की जो प्रेरणा दी उसका पालन सनातन धर्म के अनुयायी आज भी कर रहे है। करोड़ों सनातनी प्रतिदिन गायों को हरा चारा खिलाते हैं। यही वजह है कि हरे चारे के कारोबार में अब औरंगजेब के अनुयायी भी शामिल हो गए है। सवाल उठता है कि जिस औरंगजेब ने मथुरा में भगवान कृष्ण के मंदिर को तोड़ा क्या उसके अनुयायियों के मन में गौमाता के प्रति कोई आस्था होगी? अच्छा हो कि सभी सनातनी गायों के लिए चारे का दान निकटवर्ती गौशाला में ही करे। गौशालाओं में बीमार गाय भी रहती है। चारे के दान से बीमार गायों का इलाज भी करवाया जा सकता है। यानी दानदाता को डबल पुण्य प्राप्त होगा। गायों के लिए गौशालाओं में ही दान किया जाए इस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। कोलकाता में धीरेंद्र शास्त्री की कथा: 4 सितंबर को बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री की तीन दिवसीय हनुमंत कथा पश्चिम बंगाल के कोलकाता में शुरू हुई। कथा के शुभारंभ पर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी मौजूद रहे। कथा के शुभारंभ में धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, वे पिछले कुछ वर्षों से बंगाल में कथा करने को उत्सुक थे, लेकिन ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री रहते हुए बंगाल में उनकी हनुमंत कथा के आयोजन को स्वीकृति नहीं दी। लेकिन अब जब बंगाल से ममता का शासन खत्म हो गया है, तब मेरी कथा हो सकी है। धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि ममता बनर्जी के शासन में सनातन धर्म की स्थिति कैसी थी? और अब जब शुभेंदु अधिकारी भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री बन गए है, तब सनातन धर्म की स्थिति कैसी है। मेरी हनुमंत कथा होने से पता चलता है कि अब पश्चिम बंगाल में सनातन धर्म की लहर चल रही है। इस कथा में सीएम शुभेंदु ने कहा आज सबसे ज्यादा खुशी मुझे हो रही है। ममता बनर्जी के शासन में जब धीरेंद्र शास्त्री की कथा की अनुमति नहीं दी गई, तब मैंने संकल्प लिया था कि एक दिन कोलकाता में धीरेंद्र शास्त्री जी की कथा करवाऊंगा। आज मेरा संकल्प पूरा हो चुका है। धीरेंद्र शास्त्री अब पश्चिम बंगाल में किसी भी स्थान पर हनुमंत कथा कर सकते हैं। घर वापसी: हनुमंत कथा में धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, ममता बनर्जी के शासन में पश्चिम बंगाल में बड़ी संख्या में धर्म परिवर्तन हुआ। मैं अब उम्मीद करता हंू कि शुभेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री रहते हुए घर वापसी भी होगी। बंगाल में अब बाबर का नहीं रघुवीर का नारा चलेगा। बंगाल अब भगवामय होकर सनातन धर्म का परचम लहराएगा। S.P.MITTAL BLOGGER ( 05-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

निकाय चुनाव में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की प्रतिष्ठा दांव पर। अगले माह ही होने है पंचायतीराज के चुनाव। ================= राजस्थान के 309 शहरी निकायों के 10 हजार 245 वार्डों में अब उम्मीदवारों की स्थिति साफ हो गई है। 3 सितंबर को नाम वापसी के बाद 38891 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। 9 और 11 सितंबर को मतदान होना है। 14 सितंबर को परिणाम आएंगे। सत्तारूढ़ भाजपा ने इन चुनावों को लेकर जो रणनीति बनाई है उसके अनुसार शहरी निकाय चुनाव मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के चेहरे पर लड़े जाएंगे। यही वजह है कि संभाग मुख्यालय पर सीएम शर्मा की सभाएं करवाई जाएगी। स्टार नेता के तौर पर भाजपा के किसी भी बड़े नेता की सभाएं नहीं होंगी। जब सीएम शर्मा के चेहरे पर चुनाव लड़ा जाएगा तब सीएम शर्मा की प्रतिष्ठा भी दांव पर होंगी। 309 शहरी निकायों के परिणाम इसलिए भी महत्व रखते हैं कि अगले माह ही पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव होने हैं। राजस्थान में वन स्टेट वन इलेक्शन के तहत दोनों संस्थाओं के चुनाव कराए जा रहे हैं। देखा जाए तो सीएम शर्मा की यह भी एक बड़ी उपलब्धि है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने पूर्व में कहा था कि मुख्यमंत्री के काकाजी भी एक साथ चुनाव नहीं करवा सकतै। डोटासरा के इस कटाक्ष पर सीएम शर्मा का कहना है कि अब काकाजी ही चुनाव करवा रहे हैं। शहरी निकाय के चुनाव में प्रचार के क्षेत्र में भाजपा ने बाजी मार ली है। 2 सितंबर को ही मुख्यमंत्री शर्मा ने शहरी विकास का संकल्प पत्र जारी कर दिया है। जबकि अभी कांग्रेस के संकल्प पत्र की कोई खबर नहीं है। रामसेतु लिंक परियोजना, यमुना जल एग्रीमेंट, बाड़मेर में एचपीसीएल की रिफाइनरी आदि कार्यों को सीएम शर्मा अपनी सरकार की बड़ी उपलब्धि मानते हैं। सीएम शर्मा का कहना है कि जो कार्य वर्षों से लंबित थे। उन्हें ढाई वर्ष के कार्यकाल में पूरा किया गया है। वादे के मुताबिक अब तक डेढ़ लाख से ज्यादा सरकारी नौकरियां युवाओं को दी गई है। इतना ही नहीं बिजली के क्षेत्र में राजस्थान आत्मनिर्भर हो गया है। प्रदेश को अब किसी दूसरे राज्य से बिजली नहीं मांगनी पड़ती। उल्टे दूसरे राज्यों को बिजली दी जा रही है। बिजली की पर्याप्त उपलब्धता के कारण किसानों को भी दिन में बिजली दी जा रही है। सीएम शर्मा को लगता है कि ढाई वर्ष में जो कार्य हुए है, उनकी बदौलत शहरी निकायों में भाजपा की जीत होगी। इन चुनावों का असर पंचायती राज के चुनावों पर भी पड़ेगा। पंचायती राज चुनाव के परिणाम के दो वर्ष बाद विधानसभा के चुनाव होंगे। राजस्थान में गत पांच बार से सत्ता में बदलाव की परंपरा है। लेकिन इस बार मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में भाजपा की सरकार को रिपीट करवाने की योजना बनाई जा रही है, जबकि कांग्रेस को उम्मीद है कि परंपरा के अनुरूप इस बार विधानसभा के चुनाव में उसे सरकार बनाने का अवसर मिलेगा। S.P.MITTAL BLOGGER ( 03-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

तो क्या ब्यावर में भाजपा ने अपराधियों और सटोरियों को उम्मीदवार बनाया? पूर्व जिलाध्यक्ष भूतड़ा का तगड़ा कटाक्ष। अजमेर में वार्ड 72 से तारा पारीक की निर्दलीय उम्मीदवारी से भाजपा संगठन की पोल खुली। ================= अजमेर संभाग के ब्यावर जिले की नगर परिषद के चुनाव में क्या अपराधियों और सटोरियों को भाजपा का उम्मीदवार बनाया गया है? राजनीति में यह सवाल भाजपा के पूर्व विधायक और दो बार लंबे समय तक देहात जिलाध्यक्ष रहे देवीशंकर भूतड़ा के कटाक्ष के बाद उठा है। भूतड़ा ने टिकट बंटवारे के बाद 3 सितंबर को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डाली। इस पोस्ट में कहा गया कि जिन कार्यकर्ताओं ने बूथ से लेकर मंडल स्तर तक संगठन को मजबूत किया, उनकी उपेक्षा कर आपराधिक पृष्ठभूमि और सटोरियों को उम्मीदवार बनाया गया। इस पोस्ट पर जब भूतड़ा से सवाल किया गया तो उनका कहना रहा कि मैंने यह पोस्ट भाजपा के कार्यकर्ताओं की भावनाओं के अनुरूप डाली है। आज ब्यावर का कार्यकर्ता स्वयं को ठगा सा महसूस कर रहा है। जिन कार्यकर्ताओं ने बूथ और मंडल स्तर पर संगठन को मजबूत किया उनकी नगर परिषद के चुनाव में पूरी उपेक्षा की गई है। भूतड़ा ने कहा कि उनका भाजपा से कोई विरोध नहीं है। वह हमेशा भाजपा के साथ रहेंगे, लेकिन वे कार्यकर्ताओं के सम्मान के लिए आवाज उठाते रहेंगे। अच्छा होता कि जिन कार्यकर्ताओं ने बूथ और मंडल स्तर पर संगठन का काम किया उन्हें नगर परिषद के चुनाव में उम्मीदवार बनाया जाता। भूतड़ा ने कहा कि पार्टी ने बूथ और मंडल स्तर पर उम्मीदवारों के लिए जो सर्वे करवाया उसकी भी अनदेखी की गई है। उन्होंने प्रदेश नेतृत्व को अपनी भावनाओं से अवगत करवाया है। भूतड़ा ने कहा कि जो उम्मीदवार बनाए गए है उनकी पृष्ठभूमि की जांच कराई जानी चाहिए। यहां उल्लेखनीय है कि ब्यावर जिले की प्रभारी उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी है। बताया जा रहा है कि उम्मीदवारों के चयन में ब्यावर के भाजपा विधायक शंकर सिंह रावत और नवनियुक्त जिलाध्यक्ष आशीष सांड की राय को प्राथमिकता दी गई है। ब्यावर के उम्मीदवारों के बारे में और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9414010555 पर देवी शंकर भूतड़ा से ली जा सकती है। अजमेर में भी पोल खुली: अजमेर नगर निगम के वार्ड संख्या 72 से श्रीमती तारा पारीक निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रही है। तारा पारीक मौजूदा समय में अजमेर भाजपा के दाहरसेन मंडल की मंत्री है। पारा पारीक की उम्मीदवारी से अजमेर में भाजपा संगठन की पोल खुल गई है। इस वार्ड से भाजपा नेता गोपाल शर्मा की पुत्रवधू अनुश्री को भाजपा का अधिकृत उम्मीदवार बनाया गया है। अनुश्री को उम्मीदवार बनाए जाने पर तारा पारीक का कहना है कि वे पिछले कई वर्षों से भाजपा संगठन में सक्रिय भूमिका निभा रही है। जबकि अनुश्री को संगठन के किसी भी कार्यक्रम में नहीं देखा गया है। वे मंडल मंत्री ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय सेविका समिति में भी सक्रिय रही। सेवा भारती अजयमेरु की योग प्रमुख भी है। दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण अभियान में योग शिक्षक की भूमिका भी निभाई। उन्होंने योग साइंस में ही एमए की डिग्री ली है। सामाजिक सेवा के कारण ही इसी वर्ष 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के अवसर पर सम्मानित भी किया गया। यदि इतनी राजनीतिक और सामाजिक सक्रियता के बाद भी वार्ड पार्षद का टिकट न मिले तो फिर राजनीति में महिलाओं को निराशा ही मिलेगी। क महिला कार्यकर्ता सिर्फ धरना प्रदर्शन के लिए ही होती है? वहीं तारा पारीक के पति अनिल पारीक ने भी पत्नी को उम्मीदवार नहीं बनाए जाने पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि वे स्वयं सेवक संघ के तृतीय वर्ष प्रशिक्षित कार्यकर्ता है। पत्नी को टिकट दिलवाने के लिए उन्होंने भाजपा के सभी बड़े नेताओं से आग्रह किया था, लेकिन नेताओं ने उनके आग्रह को ठुकरा दिया। अब यह पत्नी का निर्णय है कि वे निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रही है। भाजपा के नेताओं को बताना चाहिए कि उनकी पत्नी को उम्मीदवार क्यों नहीं बनाया गया? उल्लेखनीय है कि इस वार्ड से कांग्रेस ने पूर्व मनोनीत पार्षद कपिल सारस्वत की पत्नी रिचा जोशी को उम्मीदवार बनाया है। चूंकि निर्दलीय उम्मीदवार तारा पारीक इस वार्ड में लंबे समय से सक्रिय हैं और निशुल्क योग शिविर का संचालन कर रही है इसलिए वार्ड के आम मतदाता से सीधा संवाद है। इस संबंध में मोबाइल नंबर 9257873135 पर और अधिक जानकारी तारा पारीक से ली जा सकती है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 04-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

फिल्म हनुमान अंश पर हो गई नीम करौली बाबा की कृपा। नेत्रहीन सुनील का भजन-मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डाल दी, भी सुपरहिट हुआ। दो करोड़ के बजट वाली फिल्म ने अब तक 50 करोड़ कमाएं। ============== पिछले दिनों जब फिल्म हनुमान अंश रिलीज हुई तो अधिकांश सिनेमाघर खाली पड़े रहे। फिल्म के निर्देशक विशाल चतुर्वेदी को उम्मीद थी कि हिन्दुओं के आराध्य देव हनुमानजी पर बनी फिल्म लोकप्रिय होगी, लेकिन जब अपेक्षा के अनुरूप फिल्म नहीं चली तो निर्देशक चतुर्वेदी ने उत्तराखंड में नैनीताल के निकट बने कैंची धाम में नीम करौली बाबा से प्रार्थना की। असल में यह फिल्म नीम करौली बाबा के जीवन पर ही आधारित है। निर्देश की प्रार्थना के बाद फिल्म पर ऐसी कृपा हुई कि पिछले दस दिनों में यह फिल्म सुपरहिट हो गई। अब सभी सिनेमाघर में उम्मीद से ज्यादा दर्शक हे। भारतीय सनातन संस्कृति में आस्था रखने वाला हर व्यक्ति फिल्म हनुमान अंश को देखने के लिए उत्सुक हे। 2 करोड़ के बजट वाली इस फिल्म ने अब तक 50 करोड़ से भी ज्यादा की कमाई कर ली है। हनुमान अंश के मुकाबले में बड़े बजट वाली कई फिल्में बॉक्स ऑफिस पर धाराशायी हो गई। फिल्म उद्योग में जब इसे नीम करौली बाबा का चमत्कार ही माना जा रहा है कि 2 करोड़ के बजट वाली फिल्म सुपरहिट हो रही है। उल्लेखनीय है कि नीम करौली बाबा भी हनुमान जी के ही भक्त थे। 17 वर्ष की उम्र में ही उन्होंने घर परिवार त्याग कर अध्यात्म की राह पकड़ ली थी। उन्होंने जिस स्थान पर अधिक समय गुजारा वही पर आज कैंची धाम (नैनीताल के निकट) बना हुआ है। चूंकि इस धाम को दो पहाड़ों के बीच बनाया गया है,इसलिए इसका नाम कैंची धाम रखा गया है। यही पर नीम करौली बाबा की प्रतिमा भी है। प्रतिमा के दर्शन के लिए प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु कैंची धाम आते हैं। यह बात अलग है कि 11 सितंबर 1973 को अपना शरीर वृंदावन में त्यागा था। वृंदावन में बाबा का समाधि स्थल है। देश ही नहीं दुनिया के बड़े लोग बाबा के अनुयायी है। नेत्रहीन सुनील भी हिट हुआ: हनुमान अंश फिल्म में एक भजन नेत्रहीन गायक सुनील का भी है। सुनील बुंदेलखंड का रहने वाला है और उसने कुछ माह पहले अपना एक भजन मोबाइल पर रिकॉर्ड किया। यह भजन जब सोशल मीडिया पर चला तब निर्देशक विशाल चतुर्वेदी फिल्म हनुमान अंश का निर्माण कर रहे थे। सुनील के भजन से प्रभावित होकर चतुर्वेदी ने सुनील को बुलाया और उसके भजन की रिकॉर्डिंग स्टूडियो में करवाई। सुनील का यह भजन मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान सागर में नैया डाल दी, जब फिल्म के माध्यम से लाखों लोगों तक पहुंचा तो नेत्रहीन सुनील भी रातों रात सुपरहिट हो गया। अपनी लोकप्रियता से उत्साहित सुनील का कहना है कि उसने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन इतनी प्रसिद्धि मिलेगी। सुनील भी इसे नीम करौली बाबा की कृपा मानते हैं। हिन्दी फिल्म उद्योग के विशेषज्ञ स्वीकार कर रहे है कि हनुमान अंश पर नीम करोली बाबा की कृपा हो गई है। यह भारत की आध्यात्मिक शक्ति का सबूत भी है। यहां यह उल्लेखनीय है कि 1975 में जय संतोषी मां फिल्म भी इसी तरह लोकप्रिय हुई थी। तब सिनेमा घरों में पूजा पाठ तक होने लगी थी। अब 50 वर्ष बाद एक बार फिर सिनेमा घरों में भारत के आध्यात्म की गूंज हो रही है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 03-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511