अब दूरबीन से देखा जा सकेगा अजमेर शहर। सिटीजन्स कॉउंसिल की सकारात्मक पहल।

अजमेर शहर कब स्मार्ट बनेगा यह तो राजनेता ही बता सकते हैं, लेकिन सिटीजंस कॉउंसिल के महासचिव और दैनिक नवज्योति के प्रधान सम्पादक दीनबंधु चौधरी के प्रयासों से 15 अप्रैल को ऐतिहासिक आनासागर झील के किनारे बनी चौपाटी पर एक दूरबीन का शुभारंभ हुआ है। इस दूरबीन से अब अजमेर शहर को आसानी के साथ देखा जा सकेगा। 15 अप्रैल को प्रात: 9 बजे हुए समारोह में जिला कलेक्टर डॉ. आरुषि मलिक ने इस दूरबीन का उद्घाटन किया। कलेक्टर ने दूरबीन के माध्यम से जब अपने शहर को देखा तो उन्हें बेहद खूबसूरत नजर आया। कलेक्टर ने आनासागर के दूसरे छोर पर बने रामप्रसाद घाट पर उर्स में आने वाले जायरीन को नहाते हुए देखा तो वहीं पुष्कर की घाटी से गुजरते हुए वाहनों का नजारा भी निकट से देख लिया। इतना ही नहीं तारागढ़ पर बनी मीरा दातार की दरगाह के दृश्यों को भी देखा। कलेक्टर ने इसके लिए सिटीजन कॉउंसिल के महासचिव चौधरी का शुक्रिया अदा किया। चौधरी ने बताया कि दूरबीन अजमेर में हुंडई कार के डीलर राजेन्द्र गोयल ने उपहार स्वरूप दी है। इस दूरबीन का रख रखाव अब सिटीजंस कॉउंसिल के माध्यम से ही किया जाएगा। इस अवसर पर अजमेर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष शिवशंकर हेड़ा, मेयर धर्मेन्द्र गहलोत, एडवोकेट एस.के. सक्सेना, समाजसेवी एस.एस. छापरवाल, दीपक हासानी, जे.पी. दाधीच, भगवान चंदीराम, डी.एल. त्रिपाठी, दिनेश गर्ग, कोसिनोक जैन आदि के साथ-साथ विभागों के अधिकारी भी उपस्थित थे।

अजमेर के फस्र्ट स्टेप स्कूल के बच्चों ने दिखाई दक्षता।

प्रदर्शनी में रखे बेहरतीन मॉडल।
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अजमेर के माकड़वाली रोड स्थित पंचशील सी ब्लॉक में चल रहे फस्र्ट स्टेप स्कूल में 11 अप्रैल को बच्चों द्वारा बनाए गए मॉडलों की प्रदर्शनी लगाई गई। इस प्रदर्शनी के शुभारंभ के अवसर पर मेरे सहित अजमेर के सुप्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. एस.के.अरोड़ा, नगर निगम के पूर्व माहपौर सोमरत्न आर्य व राजस्थान लोक सेवा आयोग के उपसचिव दिनेश गुप्ता अतिथि के तौर पर उपस्थित रहे। प्रदर्शनी में छोटे बच्चों ने अपनी कल्पना से जो मॉडल रखें वे वाकई बेहतरीन थे। सफाई से लेकर बिजली संरक्षण तक के मॉडलों को देखने से प्रतीत हो रहा था कि आने वाली पीढ़ी बहुत विवेकशील है। यह माना कि बच्चों के मॉडल बनाने में शिक्षकों और अभिभावकों की भी भूमिका होती है, लेकिन बच्चों की रुचि के अनुरूप ही मॉडल बनाए जाते हैं।
मोटे कागज का लेपटॉप, कम्प्यूटर, पुरानी सीडी के आकर्षक खिलौने, पिनहोल कैमरा, साइंस मैजिक आदि के मॉडल तो बच्चों की दक्षता अपने आप बता रहे थे। स्कूल के निदेशक एम.पी.मित्तल ने बताया कि इस स्कूल में पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों के मानसिक विकास पर भी जोर दिया जाता है। बच्चा जब बड़ी कक्षाओं में पहुंचता है तो उसकी बुद्धि का विकास अपने आप होता है, लेकिन छोटी कक्षा में पढऩे वाले बच्चों की बुद्धि का विकास करना पड़ता है। हमारे स्कूल में डेढ़ और दो वर्ष की उम्र वाले मासूम बच्चों को ही प्रवेश दे दिया जाता है। हम बच्चों के पारिवारिक माहौल और बच्चों की कल्पनाशीलता को ध्यान रखते हुए विकास करवाते हैं, इस मौके पर डॉ. एस.के.अरोड़ा ने माना कि यदि छोटे बच्चों को बचपन से ही स्वास्थ्य के प्रति जागरुकता दिखाई जाए तो वह बड़ा होकर निरोगी रह सकता है। छोटे बच्चे जल्द रोगग्रस्त होते हैं, इसलिए छोटी उम्र से ही बच्चों को स्वास्थ्य रहने की शिक्षा दी जानी चाहिए। समाजसेवी सोमरत्न आर्य का कहना रहा कि इस स्कूल में बच्चों को भारतीय संस्कृति के अनुरूप शिक्षा दी जाती है। बच्चों को जिस प्रकार वेद मंत्र सिखाए जाते हैं उससे बुद्धि का विकास अपने आप होता चला जाता है। समारोह में पुरस्कार जितने वाले बच्चों को पारितोषिक भी दिए गए। इस अवसर पर शिक्षिका सिम्पल पाटनी, छवि सेठी, शीनू जैन, प्रीति गोयल आदि का सम्मान भी किया गया।

तो श्रीनगर के एनआईटी कैम्पस से गैर कश्मीरी विद्यार्थी आ ही गए। अब दिल्ली में फहरा रहे हैं तिरंगा।

कश्मीर के श्रीनगर के एनआईटी कैम्पस में गत 1 अप्रैल को गैर कश्मीरी छात्रों ने तिरंगा फहराने की हिमाकत की, उसका खामियाजा इन छात्रों को उठाना पड़ा है। श्रीनगर और एनआईटी कैम्पस के हालातों को देखते हुए गैर कश्मीरी छात्रों को आखिर बाहर आना ही पड़ा। इस ताजा घटना से कश्मीर और श्रीनगर की घटनाओं का अंदाजा लगाया जा सकता है। श्रीनगर में आए दिन आतंकी संगठन आईएस और पाकिस्तान के झंडे फराहए जाते हैं। कश्मीरी पुलिस ने आज तक भी उन व्यक्तियों के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं की जो देश विरोधी गतिविधियों में भाग ले रहे हैं। वहीं जिन छात्रों ने देश भक्ति दिखाते हुए तिरंगा फहराया, उल्टे उन्हें ही श्रीनगर छोडऩा पड़ा है। दिल्ली लौटने के बाद एनआईटी के छात्रों ने मीडिया को बताया कि कश्मीर की पुलिस पूरी तरह कश्मीर के लोगों के ही साथ है। एक अप्रैल को जब तिरंगा फहराया गया, तब पुलिस ने बेरहमी से पिटाई की। पुलिस के सामने ही कश्मीरी लोगों ने छात्राओं को जान से मारने की धमकी दी। ऐसे दहशत भरे माहौल में श्रीनगर में रहा नहीं जा सकता। श्रीनगर में हालात इतने खराब है कि हम लोग कैम्पस से बाहर नहीं निकल सकते। हालांकि कैम्पस पर सीआरपीएफ को भी तैनात किया गया, लेकिन कश्मीर के हालातों पर फिर भी कोई नियंत्रण नहीं है। विद्यार्थियों ने कहा कि एनआईटी कैम्पस को श्रीनगर से जम्मू में शिफ्ट किया जाए। 12 अप्रैल को एनआईटी कैम्पस के छात्रों ने दिल्ली में तिरंगे झंडे लहराए।
पूरा देश जानता है कि पूर्व में चार लाख हिन्दुओं को पीट-पीटकर कश्मीर से भगा दिया। पहले कश्मीर को हिन्दू विहीन बनाया गया और अब केन्द्रीय शिक्षण संस्थाओं में भी गैर कश्मीरी छात्रों को पढऩे नहीं दिया जा रहा है। भाजपा जब विपक्ष में थी तो भगाए गए हिन्दुओं को पुन:बसाने को लेकर हंगामा करती थी, लेकिन अब जब भाजपा अपने दम पर केन्द्र में सरकार चला रही है और कश्मीर में गठबंधन की सरकार भी शामिल है, तो श्रीनगर से गैर कश्मीरी छात्रों को भागना पड़ रहा है। सवाल राजनीतिक का भी नहीं है। सवाल कश्मीर को अखंड भारत में बनाए रखने का है। जब गैर कश्मीरी छात्र श्रीनगर में पढ़ भी नहीं सकते, तो फिर कश्मीर की स्थिति के बारे में क्या कहा जा सकता है? गंभीर बात तो यह है कि कश्मीर की पुलिस उनतत्वों के साथ मिली हुई है जो आईएस और पाकिस्तान के झंडे लहराते हैं। जो लोग देश में असहिष्णुता की बात को लेकर अवार्ड लौटा रहे थे, उन्हें अब ये बताना चाहिए कि गैर कश्मीरी छात्र श्रीनगर में क्यों नहीं पढ़ पा रहे? क्या इस मुद्दे पर कोई अपना अवार्ड लौटाएगा?
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(एस.पी. मित्तल)  (12-04-2016)
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वाजपेयी की चादर के मौके पर नदारद रहने वाले भाजपा नेता मुख्यमंत्री राजे की चादर में नजर आए।

इसे सत्ता का प्रभाव ही कहा जाएगा कि अजमेर के जो भाजपा नेता पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की चादर चढ़ाने की रस्म में दरगाह में नदारद थे। वो भाजपा नेता 13 अप्रैल को प्रदेश की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की चादर की रस्म में नजर आ गए। मुख्यमंत्री की चादर के साथ फोटो खींचवाने में भाजपा नेताओं ने कोई कसर नहीं छोड़ी। अजमेर में इन दिनों सूफी संत ख्वाजा साहब का सालाना उर्स चल रहा है। उर्स के दौरान पवित्र मजार पर चादर चढ़ाने की परंपरा है। इसी परंपरा को निभाते हुए गत 8 अप्रैल को वाजपेयी के निजी सहायक महेश पारीक ने दरगाह में चादर पेश की। लेकिन इस मौके पर सिर्फ अजमेर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष शिव शकंर हेड़ा ही आए, जबकि पारीक ने अजमेर के सभी भाजपा नेताओं को टेलीफोन पर सूचना दी थी। भाजपा नेताओं को यह बात पता है कि वाजपेयी अब सत्ता से बाहर हैं, इस लिए चादर के साथ रहना जरूरी नहीं है। जबकि वसुंधरा राजे इस समय मुख्यमंत्री हैं इसलिए अनिवार्य रूप से चादर के साथ दिखना है। 13 अप्रैल को जायरीन की भीड़ से दरगाह खचाखच भरी हुई थी, लेकिन फिर भी जिले के प्रभारी एवं शिक्षा राज्य मंत्री प्रो. वासुदेव देवनानी, महिला एवं बाल विकास मंत्री अनिता भदेल, मदरसा बोर्ड अध्यक्ष मेहरूनिशां टांक, वक्फ बोर्ड अध्यक्ष अबु बकर नकवी, राजस्थान धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नति प्राधिकरण के अध्यक्ष औंकार सिंह लखावत, संसदीय सचिव सुरेश रावत, जिला प्रमुख वंदना नोगिया, महापौर धर्मेन्द्र गहलोत, अमीन पठान, भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चे के प्रदेश अध्यक्ष मजीद खां, एडीए अध्यक्ष शिव शंकर हेडा, शहर भाजपा अध्यक्ष अरविन्द यादव, देहात भाजपा अध्यक्ष प्रो. बी.पी.सारस्वत, धर्मेश जैन, जयकिशन पारवानी, कंवल प्रकाश किशनानी, फरहाद सागर, विनीत पारीक आदि मौजूद रहे।
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(एस.पी. मित्तल)  (13-04-2016)
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