हटाया तो निहालचंद मेघवाल को भी था, लेकिन सत्ता का लालीपॉप सांवरलाल जाट को ही दिया।

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कोई तीन माह पहले अपने मंत्री मंडल से राजस्थान के दो सांसदों को हटाया था। एक निहाल चंद मेघवाल और दूसरे सांवरलाल जाट। इसे राजनीति में जातिगत दबाव ही कहा जाएगा कि जाट को तो राजस्थान किसान आयोग का अध्यक्ष बनाकर सत्ता का लालीपॉप दे दिया गया है, लेकिन निहालचंद अभी भी सिर्फ सांसद ही हैं, जिस दिन जाट को मंत्री मंडल से हटाया, उसी दिन से मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे पर दबाव था कि जाट को किसी न किसी तौर पर सत्ता का स्वाद चखाया जाए। कानूनी अड़चने हटने के तुरंत बाद जाट को आयोग का अध्यक्ष बनाकर केबिनेट मंत्री की सुविधाएं दे दी गई। जाट भले ही केन्द्रीय मंत्री मंडल से स्वास्थ्य खराब होने की वजह से हटे हो, लेकिन वसुंधरा राजे का मानना है कि जाट अब गांव-गांव घुमकर राजस्थान के किसानों की समस्याओं का समाधान करेंगे। सब जानते हैं कि सांसद बनने से पहले जाट प्रदेश में जलदाय और सिंचाई जैसे महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री थे, लेकिन अजमेर से कांग्रेस के उम्मीदवार सचिन पायलट की हार सुनिश्चित करने के लिए राजे ने जाट को अजमेर से लोकसभा का चुनाव लड़वाया। राजे का ही दबाव रहा कि जाट को केन्द्रीय मंत्री मंडल में शामिल करना पड़ा। अब जब जाट को हटा दिया गया तो राजे का ही दायित्व था कि जाट को पुन: केबिनेट मंत्री बनाया जाए। एक तरह से राजे ने अपने दायित्व का निर्वहन भी किया है। जाट को जब केन्द्रीय मंत्री के पद से हटाया गया था तब यह कहा गया कि अजमेर जिले के जाट मतदाताओं पर प्रतिकुल असर पड़ेगा, लेकिन अब देखना होगा कि सत्ता के इस लालीपॉप से अजमेर के जाट मतदाता कितने संतुष्ट होते हैं। यह सही है कि अजमेर जिले की राजनीति में जाट का जबरदस्त दखल है।

(एस.पी. मित्तल) (22-10-2016)
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