संगठन से बड़ा कोई नहीं। देवीशंकर भूतड़ा के भाजपा में शामिल होने पर ब्यावर के भाजपा विधायक शंकर सिंह रावत ने दी प्रतिक्रिया। सीएम राजे के दबाव से हुई नवीन शर्मा की वापसी।

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संगठन से बड़ा कोई नहीं। देवीशंकर भूतड़ा के भाजपा में शामिल होने पर ब्यावर के भाजपा विधायक शंकर सिंह रावत ने दी प्रतिक्रिया। सीएम राजे के दबाव से हुई नवीन शर्मा की वापसी।
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अजमेर देहात भाजपा के अध्यक्ष और ब्यावर के विधायक रह चुके देवीशंकर भूतड़ा के भाजपा में पुनः शामिल होने पर ब्यावर के वर्तमान भाजपा विधायक शंकर सिंह रावत ने मिलीजुली प्रतिक्रिया दी है। रावत ने कहा है कि कोई व्यक्ति नहीं संगठन बड़ा होता है। व्यक्ति कभी भी संगठन से बड़ा नहीं हो सकता। भाजपा एक विशाल राजनीतिक संगठन है, जिसमें लाखों कार्यकर्ता हैं। भूतड़ा के पुनः शामिल होने से ब्यावर में भाजपा मजबूत होगी या नहीं के सवाल पर रावत ने कहा कि मैं ब्यावर का विधायक होने के नाते भूतड़ा का भाजपा में स्वागत करता हंू। मुझे उम्मीद है कि अब भूतड़ा भाजपा के सिद्धांतों पर चल कर काम करेंगे। भाजपा के जिला और प्रदेश नेतृत्व ने जो फैसला किया है, उसका मैं स्वागत करता हंू। मालूम हो कि भूतड़ा और नवीन शर्मा को 14 नवम्बर को ही प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी ने पुनः भाजपा में शामिल किया है। शर्मा भी देहात के जिलाध्यक्ष रह चुके हैं।
बगावत करने पर निकाला था बाहरः
वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में ब्यावर से भाजपा के अधिकृत उम्मीदवार रावत के खिलाफ चुनाव लड़ने की वजह से ही भूतड़ा को 6 वर्ष के लिए निष्कासित कर दिया था। हालांकि इस चुनाव में शंकर सिंह रावत करीब 45 हजार मतों से विजयी हुए और भूतड़ा को मात्र 7 हजार वोट ही मिले, लेकिन भूतड़ा की लोकप्रियता भाजपा कार्यकर्ताओं में बनी रही। पंडित दीनदयाल उपाध्याय के नाम के सहारे भूतड़ा ने निर्वासन के चार साल गुजार दिए। इन चार सालों में भूतड़ा की भाजपा विधायक रावत से कभी नहीं बनी। यदि रावत का बस चलता तो वे भूतड़ा को भाजपा में शामिल नहीं होने देते। सूत्रों की माने तो रावत ने भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष परनामी के समक्ष भूतड़ा का विरोध भी किया था, लेकिन देहात जिलाध्यक्ष बीपी सारस्वत के प्रयासों से रावत का विरोध धरा रह गया। असल में पिछले दिनों जब मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने मसूदा में जनसंवाद किया था, तब नवीन शर्मा की वापसी का मामला सामने आया था। शर्मा ने भी गत बार बागी होकर विधानसभा का चुनाव लड़ा था। लेकिन शर्मा ने चुनाव में अपनी जबर्दस्त उपस्थिति दर्ज करवाई थी। इसलिए शर्मा को 20 हजार मत प्राप्त हुए। मोदी लहर के बाद भी भाजपा की उम्मीदवार श्रीमती सुशील कंवर पलाड़ा मात्र 4 हजार मतों से ही जीत पाईं। यदि श्रीमती पलाड़ा के पति भंवरसिंह पलाड़ा जोड़-तोड़ नहीं करते तो भाजपा का जीतना मुश्किल था। सीएम राजे ने जनसंवाद लोकसभा के उपचुनाव के मद्देनजर किया था। जनसंवाद में नवीन शर्मा की वापसी का मुद्दा भी सामने आया। हालांकि मसूदा में पलाड़ा दम्पत्ति का प्रभाव है, लेकिन नवीन शर्मा की साफ-सुथरी और ईमानदार छवि भी उपचुनाव में भाजपा के लिए जरूरी है। सीएम राजे की वजह से ही जब नवीन शर्मा को भाजपा में शामिल करने की प्रक्रिया चल रही थी कि तभी देहात अध्यक्ष सारस्वत ने भूतड़ा की वापसी का मामला भी घुसेड़ दिया। तब सारस्वत का कहना रहा कि भले ही अजमेर संसदीय क्षेत्र में ब्यावर विधानसभा क्षेत्र न आता हो, लेकिन ब्यावर, मसूदा से जुड़ा हुआ है। भूतड़ा न केवल ब्यावर के अध्यक्ष रह चुक हैं, बल्कि दो बार देहात भाजपा के अध्यक्ष भी रहे हैं। ऐसे में भूतड़ा की वापसी का लाभ उपचुनाव में भाजपा को मिलेगा। यही वजह रही कि नवीन शर्मा के साथ भूतड़ा की वापसी भी हो गई।
जश्न में शामिल नहीं हुए विधायक समर्थकः
15 नवम्बर को ब्यावर में भूतड़ा के समर्थकों ने जोरदार जश्न मनाया। इस अवसर पर भूतड़ा ने कहा कि भाजपा के कार्यकर्ताओं के बल पर ही वे पुनः अपने संगठन में शामिल हुए हैं। इस जश्न में क्षेत्रीय भाजपा विधायक शंकर सिंह रावत, नगर परिषद के सभापति श्रीमती बबीता चैहान और भाजपा मंडल अध्यक्ष जयकिशन बल्दुआ और उनके समर्थक शामिल नहीं हुए। इन तीनों में से किसी ने भी भूतड़ा को बधाई तक नहीं दी। यह बात अलग है कि भूतड़ा के भाजपा में शामिल होने से आम कार्यकर्ताओं में उत्साह का संचार हुआ है।
एस.पी.मित्तल) (15-11-17)
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