बंगाल का चुनाव ममता पर केंद्रित। मतदान केंद्रों पर लंबी कतार, इनमें महिलाएं अधिक।

23 अप्रैल को पश्चिम बंगाल की 294 में से 152 सीटों पर मतदान हुआ। आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2021 के विधानसभा चुनावों में इन 152 सीटों में से 92 टीएमसी, 59 भाजपा और एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार की जीत हुई थी। जिन 152 सीटों पर 23 अप्रैल को मतदान हुआ, वे पश्चिम बंगाल के 16 जिलों में आती है। राजनीति के जानकार मानते हैं कि इन 16 जिलों में भाजपा का प्रभाव ज्यादा है। वर्ष 2021 के चुनावों में भाजपा को कुल 77 सीटों पर जीत मिली थी। यानी 77 में से 59 विधायक भाजपा  इन्हीं 16 जिलों में इस बार विधायकों की संख्या ज्यादा बढ़ाई जाए। 23 अप्रैल को जब मतदान शुरू हुआ तब इन 152 क्षेत्रों के मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की लंबी कतार देखी गई। इनमें महिला मतदाता की संख्या ज्यादा थी। भाजपा के रणनीतिकारों का मानना है कि लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन बिल के गिरने से बंगाल में ममता बनर्जी के प्रति नाराजगी बढ़ी है। भाजपा प्रचार के दौरान महिलाओं को यह समझाने में सफल रही कि ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के कारण ही महिलाओं को आरक्षण नहीं मिल सका। लंबी कतारों को भाजपा अपने पक्ष में हवा बता रही है। भाजपा के नेताओं का कहना है कि ममता बनर्जी के पिछले 15 वर्षों में जो बुराइयां उत्पन्न हुई, उनसे भी नाराज होकर लोगों ने बड़ी संख्या में मतदान किया है। इन 16 जिलों में भाजपा की ओर से व्यापक प्रचार भी किया गया। 

चुनाव ममता पर केंद्रित:
इस बार पश्चिम बंगाल में विधानसभा का चुनाव मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर केंद्रित है। यदि टीएमसी को बहुमत मिलता है तो इसे सिर्फ ममता  की जीत माना जाएगा, लेकिन यदि बहुमत नहीं मिलता है तो यह हार भी ममता की ही होगी। भाजपा ने अपने प्रचार में मता पर मुस्लिम तुष्टीकरण करने के गंभीर आरोप लगाए। ऐसे में यदि हिंदू समुदाय के लोग टीएमसी को वोट देते हैं तो यह भरोसा सिर्फ ममता बनर्जी पर होगा। भाजपा ने खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनावी सभाओं में बताया कि केंद्र की कल्याणकारी योजनाओं को ममता बनर्जी बंगाल में लागू नहीं होने देती। मोदी ने किसान सम्मान निधि, आयुष्मान स्वास्थ्य बीमा योजना, जैसी योजनाओं का उल्लेख कर बताया कि बंगाल के लोगों को कितना नुकसान हो रहा है। यदि इसके बाद भी बंगाल में टीएमसी को बहुमत मिलता है तो यह ममता की ही जीत मानी जाएगी। भाजपा की ओर से चुनाव प्रचार में अनेक नेता सक्रिय रहे, लेकिन टीएमसी का मोर्चा अकेले ममता ने संभाला। यह बात अलग है कि इस बार ममता बनर्जी को भी हार का डर सता रहा है। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि बंगाल के जो लोग दूसरे राज्यों में काम करते हैं उन्हें भाजपा अपने खर्चे पर वोट डलवाने के लिए लाई है। ममता का यह बयान दर्शाता है कि उन्हें हार का डर है। इससे पहले ममता ने कभी भी भाजपा से जुड़े मतदाताओं की चिंता नहीं की। इसके साथ ही इस बार 90 लाख वोटरों के नाम भी कट गए। चुनाव परिणामों पर नजर रखने वाले बताते हैं कि वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में बंगाल में टीएमसी को भाजपा से 82 लाख वोट अधिक मिले थे। इन 82 लाख वोटों के दम पर ही टीएमसी ने लोकसभा की 28 सीटों पर जीत दर्ज की थी। 

S.P.MITTAL BLOGGER ( 23-04-2026)
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