- Next story केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मुलाकात में क्या सिर्फ पर्यावरण जलवायु परिवर्तन और विकास से जुड़े विषयों पर ही विमर्श हुआघ् एक्स पर दोनों की एक जैसी पोस्ट। क्या इस मुलाकात के पीछे भजन सरकार को रिपीट करवाने की योजना बनाने का उद्देश्य रहाघ् पश्चिम बंगाल में भूपेंद्र यादव की रणनीति से ही भाजपा की सरकार बनी और ममता बनर्जी राजनीतिक दृष्टि से कंगाल हो गई। ===================== 26 जून को अलवर के सांसद और केंद्रीय वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने जयपुर में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से उनके सरकारी आवास पर मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद दोनों ने एक्स पर एक जैसी पोस्ट की। दोनों ने कहा कि इस शिष्टाचार मुलाकात में पर्यावरण जलवायु परिवर्तन और विकास को लेकर विमर्श हुआ। सब जानते हैं कि भाजपा की राष्ट्रीय राजनीति में भूपेंद्र यादव का जबरदस्त दखल है। हाल ही के पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में भूपेंद्र यादव भाजपा की ओर से चुनाव प्रभारी थे और उनकी रणनीति से विपरीत हालात वाले बंगाल में भाजपा को बहुमत मिला। इतना ही नहीं चुनाव परिणाम के बाद पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी के 80 में से 60 विधायक और 9 में से 6 सांसद अलग हो गए। टीएमसी को कंगाल करने में भी भूपेंद्र यादव की रणनीति रही। कई राज्यों में भाजपा की सरकार दूसरी तीसरी और पांचवीं बार बनवाने में भी यादव की रणनीति ही काम आई है। यादव उत्तर प्रदेश बिहार राजस्थान गुजरात पश्चिम बंगाल महाराष्ट्र जैसे राज्यों के चुनाव प्रभारी रह चुके हैं। वर्ष 2013 में राजस्थान में जब भाजपा को बहुमत मिला तब यादव चुनाव प्रभारी थे। यादव ने वसुंधरा राजे का सारथी बनकर पूरे प्रदेश का दौरा किया। राजस्थान की भौगोलिक और राजनीतिक स्थिति से भूपेंद्र यादव पूरी तरह अवगत है। यह बात अलग है कि वसुंधरा राजे के कार्यकाल में ही भूपेंद्र यादव ने राजस्थान की राजनीति से दूरी बना ली। हालांकि यादव दो बार राजस्थान से ही राज्यसभा के सांसद बने लेकिन उनकी राजस्थान की राजनीति में रुचि कम रही। वर्ष 2024 में यादव ने अलवर से लोकसभा का चुनाव लड़ा और शानदार जीत दर्ज की। भूपेंद्र यादव मोदी.2 में भी वन एवं पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के मंत्री थे और मोदी 3 में भी यही मंत्रालय उन्हें मिला। इससे यादव पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भरोसे का अंदाजा लगाया जा सकता है। भूपेंद्र यादव उन नेताओं में से है जो मीडिया से दूर रहते हैं और कभी भी किसी विवाद में नहीं पड़तेए लेकिन भाजपा की राष्ट्रीय राजनीति में भूपेंद्र यादव का जबरदस्त दखल है ऐसे में यादव का राजस्थान के मुख्यमंत्री से मुलाकात करना। राजनीतिक दृष्टि से बहुत मायने रखता है। भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व चाहता है कि राजस्थान में भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली सरकार रिपीट हो। 5 वर्ष में से ढाई वर्ष गुजर चुके हैं और शेष ढाई वर्ष में भाजपा सरकार को रिपीट करने की योजनाएं बनाने लगी है। जानकारों की माने तो भजन सरकार को रिपीट करने की योजना बनाने के उद्देश्य ही 26 जून को भूपेंद्र यादव और भजनलाल शर्मा की मुलाकात हुई है। वैसे भी भजनलाल शर्मा केंद्र में भूपेंद्र यादव को अपना संरक्षक मानते हैं। यदि भूपेंद्र यादव राजस्थान की राजनीति में सक्रिय होते हैं तो इसका सबसे ज्यादा फायदा भजनलाल शर्मा को ही मिलेगा। मुख्यमंत्री शर्मा की भी इच्छा है कि भूपेंद्र यादव राजस्थान की राजनीति में जल्द से जल्द सक्रिय हो। यदि भूपेंद्र यादव सक्रिय होते हैं तो राजस्थान में वर्ष 2028 में भाजपा सरकार को रिपीट करने में बहुत मदद मिलेगी। गत पांच बार से राजस्थान में एक बार कांग्रेस और एक बार भाजपा की सरकार बन रही है। सीएम शर्मा का मानना है कि यदि भूपेंद्र यादव सक्रिय होते हैं तो राजस्थान में पांच पांच वर्ष की परंपरा को तोडा जा सकता है।
- Previous story अमूल ब्रांड से जुड़ी कोऑपरेटिव सोसाइटी को राजस्थान में कारोबार की अनुमति नहीं दे भजन सरकार। अमूल का यह प्रस्ताव 14 हजार ग्राम सहकारी समितियो के लिए डेथ वारंट साबित होगा। अजमेर डेयरी के अध्यक्ष रामचंद्र चौधरी ने विरोध का बीड़ा उठाया। ================= अजमेर दुग्ध डेयरी के अध्यक्ष रामचंद्र चौधरी ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से आग्रह किया है कि अमूल ब्रांड से जुड़ी सरदार पटेल कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन लिमिटेड को राजस्थान में दूध संग्रहण और अन्य कारोबार करने की अनुमति नहीं दी जाए। चौधरी ने बताया कि अमूल ब्रांड से जुड़ी समिति का प्रस्ताव राजस्थान सरकार के समक्ष विचार अधीन है। यदि राज्य सरकार इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लेती है तो प्रदेश की 14 हजार दुग्ध उत्पादक ग्राम सहकारी समितियां मर जाएगी। इससे प्रदेश के दुग्ध उत्पादक किसानों को भारी नुकसान होगा। चौधरी ने कहा कि कड़ी मेहनत के बाद प्रदेश में राजस्थान कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन आरसीडीएफ को खड़ा किया गया है इसके माध्यम से ही जिला दुग्ध उत्पादक संघ सरस डेयरी गांव.गांव से दूध का संग्रहण करत है और फिर उपभोक्ताओं को अच्छी क्वालिटी का दूध और दूध से बने उत्पाद उपलब्ध करवाए जाते हैं। लंबे संघर्ष के बाद भी आरसीडीएफ का कारोबार मात्र 10 हजार करोड़ का है जबकि अमूल ब्रांड का कारोबार 90 हजार करोड़ का है। चौधरी ने कहा कि यदि अमूल ब्रांड से जुड़ी संस्था को राजस्थान के गांव में दूध संग्रहण का अधिकार मिल जाएगा तो सरस डेयरी बुरी तरह प्रभावित होगी। अमूल ब्रांड के दूध संग्रहण को रोकने के लिए राजस्थान भर के दुग्ध डेयरी के अध्यक्षों की एक बैठक बुलाई जा रही है। इस बैठक में विरोध की रणनीति बनाई जाएगी उन्होंने बताया कि अमूल ब्रांड की संस्था राजस्थान में ही नहीं बल्कि देश के 20 बड़े राज्यों में कारोबार करने की इच्छुक है। यदि इस ब्रांड को देश भर में सरकारी तौर पर दूध संग्रहण का अधिकार मिल जाएगा तो दूध के कारोबार का एकाधिकार हो जाएगा। आज भारत दुनिया में दूध उत्पादन में पहले नंबर पर है इसके पीछे देश के दुग्ध उत्पादकों की मेहनत है। भले ही आज अमूल ब्रांड की संस्था किसानों को दूध का मूल्य अधिक दे दे लेकिन एकाधिकार हो जाएगा तो फिर किसानों का शोषण किया जाएगा। अमूल ब्रांड और विरोध की योजना के बारे में और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9414 004 111 पर अजमेर डेयरी के अध्यक्ष रामचंद्र चौधरी से ली जा सकती है।
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27 Jun, 2026
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