- Next story एक ईरान है, जहां अपने दिवंगत नेता खामनेई के साथ सभी ईरानी खड़े हैं। यही ताकत सुपुर्द-ए-खाक की रस्म के दौरान भी ईरान को अमेरिका से जंग लड़ने की ताकत देती है। एक भारत है, जहां अपने ही लोग आराध्य देव राम के मंदिर को भी नहीं बख्श रहे। जबकि 25 करोड़ की मुस्लिम आबादी वाले इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुबियांटो तो स्वयं में भारत का डीएनए बताते हैं। ================ मुस्लिम देश ईरान में अपने दिवंगत नेता अयातुल्ला खामेनेई के सुपुर्द-ए-खाक की रस्म 9 जुलाई को संपन्न हो रही है। गत चार जुलाई से शुरू हुई जनाजे की रस्म में करोड़ों ईरान भाग ले रहे हैं। इसी बीच ईरान अपने दुश्मन अमेरिका के साथ जंग भी लड़ रहा है। यानी एक ओर ईरान अमेरिका की मिसाइलों का सामना कर रहा है। तो दूसरी ओर अपने दिवंगत नेता के साथ पूरी ताकत के साथ खड़ा है। ईरानियों की यह ताकत ही उन्हें अमेरिका के साथ लड़ने की शक्ति प्रदर्शन करता है। ये खामनेई वो ही नेता है, जिनकी कट्टरपंथी नीतियों के विरोध में गत वर्ष लाखों ईरानियों ने खासकर महिलाओं ने सड़कों पर प्रदर्शन किया था। लेकिन जब अमेरिका ने हमला किया तो सारे ईरानी एकजुट हो गए। आज इसी एकता के कारण ईरान की सेना खाड़ी देशों में अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर हमला कर रही है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भले ही ईरान को तबाह करने की धमकी दे, लेकिन ईरान ने जता दिया है कि जो नीति दिवंगत नेता खामनेई ने निर्धारित की है, उस पर ही ईरान चलेगा। यानी ईरान अमेरिका के सामने झुकेगा नहीं। एक और दुनिया के सामने ईरानियों की एकता है, तो वहीं भारत में अपने ही लोग आराध्य देव राम के मंदिर की छवि खराब करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे है। जबकि अयोध्या में जन्म स्थल वाली भूमि पर राम का मंदिर बनवाने में पांच सौ वर्ष लगे और लाखों राम भक्तों ने अपना बलिदान दिया। लंबे संघर्ष के बाद अयोध्या में राम मंदिर बन पाया। लेकिन अब मंदिर के चढ़ावा चोरी की आड़ में संपूर्ण सनातन संस्कृति और भगवान राम पर सवाल उठाए जा रहे हैं। उन लोगों को भी कटघरे में खड़ा किया जा रहा है जिन्होंने मंदिर निर्माण में अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया। यह सही है कि जिन लोगों ने चढ़ावा चोरी किया उन्हें सजा मिलनी चाहिए। लेकिन चढ़ावा चोरी की आड़ में सनातन संस्कृति को बदनाम नहीं किया जा सकता। गंभीर बात तो यह है कि जिन लोगों ने मंदिर निर्माण में बाधाएं खड़ी की आज वे ही स्वयं को राम भक्त बताकर चढ़ावा चोरी के मामले में बयानबाजी कर रहे हैं। उन लोगों के बलिदान पर पानी फेरने की कोशिश की जा रही है जिन्होंने अयोध्या में मंदिर का निर्माण करवाया। अयोध्या का मंदिर कोई साधारण भवन नहीं है बल्कि यह सौ करोड़ से ज्यादा हिंदुओं की आस्था का केंद्र है। जो चढ़ावा चोरी का मामला उजागर हुआ है, उसमें सभी सनातनियों को एकजुटता दिखानी चाहिए। लेकिन अपने ही लोग राजनीतिक स्वार्थों की खातिर सनातन संस्कृति को बदनाम कर रहे हैं। ऐसे लोगों को ईरानियों की एकता से सबक लेना चाहिए। भारत का डीएनए: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 6 और 7 जुलाई को इंडोनेशिया का दौरा किया। इंडोनेशिया में मुस्लिम आबादी 25 करोड़ है। इंडोनेशिया को मुस्लिम देश ही माना जाता है। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुबियांटो ने मोदी से मुलाकात के दौरान कहा, मुझ में भी भारत का डीएनए है। असल में भारत और इंडोनेशिया के बीच सभ्यता और संस्कृति जुड़ी हुई है। एक और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति है जो स्वयं में भारत का डीएनए बताते हैं, दूसरी ओर भारत में अपने ही लोग सनातन संस्कृति पर हमला करने से बाज नहीं आते। S.P.MITTAL BLOGGER ( 09-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
- Previous story 61 वर्षीय अभिनेता आमिर खान भले ही तीसरी शादी करे, लेकिन कम से कम सामाजिक मर्यादाओं का तो पालन करें। तीसरी शादी के रजिस्ट्रेशन के समय पहली और दूसरी पत्नियों तथा उनके बच्चों को उपस्थित रखने का क्या तुक है? जो लोग आमिर को अपना हीरो मानते हैं उन्हें आमिर खान की इस बेहयाई को भी समझना चाहिए। ================ मुंबइया हिन्दी फिल्मों के अभिनेता 61 वर्षीय आमिर खान ने 5 जुलाई को 47 वर्षीय गौरी स्प्रैट से तीसरी शादी कर ली। आमिर खान गौरी के साथ पिछले कुछ वर्षों से लिवइन में रह रहे थे। आमिर और गौरी ने जब भारतीय विवाह कानून के अंतर्गत अपने विवाह का रजिस्ट्रेशन करवाया तब आमिर की पहली पत्नी रीना दत्त और दूसरी पत्नी किरण राव के साथ साथ उनके बच्चे भी उपस्थित रहे। तीसरी पत्नी गौरी के पहले विवाह से उत्पन्न बेटा भी उपस्थित रहा। आमिर खान तीसरी के बाद भले ही चौथी शादी भी करें, लेकिन उन्हें सामाजिक मर्यादाओं का तो ख्याल रखना ही चाहिए। तीसरी शादी के रजिस्ट्रेशन के समय उपस्थित पहली और दूसरी पत्नी और उनके बच्चों के फोटो और वीडियो न्यूज़ चैनलों और अखबारों में प्रसारित हो रहे हैं। सवाल उठता है कि तीसरी शादी के समय पहली और दूसरी पत्नी को उपस्थित रख आमिर खान भारत के सभ्य समाज को क्या संदेश देना चाहते हैं? भारत सनातन संस्कृति वाला देश है, जहां भगवान राम को मर्यादा पुरुष माना जाता है जो लोग आमिर खान को अपना हीरो मानते हैं, उन्हें आमिर खान की इस बेहयाई को भी समझना चाहिए। क्या भारत के सभ्य समाज में यह संभव है कि एक व्यक्ति जब तीसरी शादी करे तो उसकी पहली व दूसरी पत्नी व बच्चे भी उपस्थित रहे? समझ में नहीं आता कि पहली पत्नी रीना दत्त और दूसरी पत्नी किरण राव आमिर की तीसरी शादी के समय क्यों उपस्थित रही? यहां अभिनेता सलमान खान का हाल ही में दिए गए बयान का उल्लेख करना जरूरी है। सलमान खान की उम्र भी 60 वर्ष हो गई है, लेकिन उन्होंने कहा कि वे विवाह इसलिए नहीं कर रहे हैं उन्हें तलाक से डर लगता है, बीवी जब तलाक लेती है तो बड़ी मात्रा में पैसा भी ले जाती है, एक और सलमान खान तलाक के डर से विवाह नहीं कर रहे तो दूसरी ओर आमिर खान तीसरे विवाह के अवसर पर पहली और दूसरी बीवी को उपस्थित रख रहे हैँ। S.P.MITTAL BLOGGER ( 06-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
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