- Next story अजमेर की सबसे बड़ी समस्या सीवरेज और आनासागर के पानी की है। अजमेर में 2050 के विजन को लेकर स्वामी न्यूज की सकारात्मक पहल। ================ अजमेर के लोकप्रिय स्वामी न्यूज़ चैनल पर इन दिनों अजमेर 2050 के विजन को लेकर सकारात्मक पहल हो रही है। इसके अंतर्गत स्वामी न्यूज समूह के निदेशक कंवल प्रकाश किशनानी और जाने माने वरिष्ठ पत्रकार गिरधर तेजवानी अजमेर के प्रमुख व्यक्तियों और संस्थाओं के प्रतिनिधियों से सवाल जवाब कर रहे हैं। इसी क्रम में पत्रकारों के भी इंटरव्यू लिए जा रहे हैं। किशनानी और तेजवानी ने 7 जुलाई को मुझसे भी संवाद किया। चूंकि तेजवानी पत्रकारिता के क्षेत्र में मुझसे वरिष्ठ है, इसलिए उन्होंने मेरी पत्रकारिता के संबंध में भी सवाल पूछे। मैंने बताया कि मैंने पत्रकारिता तब शुरू की जब शब्द के लिए शीशे का उपयोग किया जाता था। तब शीशे के शब्दों को जमा कर अखबार का पेज तैयार होता था और फिर मशीन पर अखबार छपता था। फोटो के लिए ब्लॉक बनवाना पड़ता था, लेकिन अब जिस तकनीक के साथ अखबार छप रहे है, वह एक चमत्कारही है। प्रिंट मीडिया के साथ जब इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया भी आ गया है। मैंने बताया कि मेरे पिता कृष्ण गोपाल जी गुप्ता (अब स्वर्गीय) ने किन विपरीत परिस्थितियों में भभक पाक्षिक का प्रकाश किया। आज भी मुझे उन संघर्षों का स्मरण है। अजमेर की समस्या पर पूछे गए सवाल के जवाब में मेरा कहना रहा कि आज सबसे बड़ी समस्या सीवरेज और आनासागर के पानी की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महत्वाकांक्षी स्मार्ट सिटी के प्रोजेक्ट में भले ही अजमेर शहर को 2 हजार करोड़ रुपए खर्च किए गए हो, लेकिन सीवरेज की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ है। इंजीनियरों ने मुख्य सड़कों के बीच में सीवरेज की लाइन डाल दी। इसे दुर्भाग्यपूर्ण ही कहा जाएगा कि अजमेर की मुख्य सड़कों के बीच में सीवरेज के मैनहोल है। जब कभी पाइपों में पानी जाम हो जाता है तो सीवरेज का गंदा पानी उफन कर सड़कों में आ जाता है। बरसात के दिनों में तो सीवरेज का पानी सड़कों पर आना आम बात हे। जिस शहर की सड़कों पर सीवरेज का गंदा पानी बहता हो उस शहर की स्मार्टनेस का अंदाजा लगाया जा सकता है। सड़कों पर सीवरेज के मैनहोल होने से आए दिन दुर्घटनाएं भी होती है। सीवरेज के साथ साथ अजमेर की प्रमुख समस्या आनासागर की भी है। एक समय था, जब यह झील प्राकृतिक सौंदर्य में चार चांद लगाती थी, लेकिन आज यह झील मल मूत्र के कुंड में तब्दील हो गई है। आनासागर झील के चारों तरफ बसी कॉलोनियों से जुड़े 13 नालों का गंदा पानी इसी झील में गिरता है। नालों के गंदे पानी को रोकने के लिए स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में कोई ठोस उपाय नहीं किए गए। हालांकि आनासागर में ट्रीटमेंट प्लांट बनाया गया, लेकिन आमतौर पर यह प्लांट बंद रहता है। जिसकी वजह से पानी को शुरू किए बिना ही आनासागर में डाला जाता ाहै। चूंकि वर्ष भर गंदा पानी आनासागर में आता है, इसलिए थोड़ी सी ही बरसात में आनासागर ओवरफ्लो हो जाता है। ओवरफ्लो पानी से निलची बस्तियों के लोगों को कोई परेशानी न हो इसके लिए बरसात से पहले ही पानी की निकासी कर दी जाती है। अभी भी जलस्तर 10 फीट रखा हुआ है, जबकि भराव क्षमता 13 फीट की है। सकारात्मक प्रयास: विजन 2050 की शुरुआत कर स्वामी न्यूज चैनल ने सकारात्मक पहल की है। उम्मीद है कि इस पहल में जो सुझाव सामने आएंगे, उन्हें सरकार और प्रशासन गंभीरता से लेगा। समूह के निदेशक किशनानी ने बताया कि प्राप्त सुझावों को सरकार में उच्च स्तर तक भेजा जाएगा ताकि अजमेर का सही तरह से विकास हो सके। स्वामी न्यूज के इस प्रयास के बारे में और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9829070059 पर कंवल प्रकाश किशनानी से ली जा सकती है। मेरे इस इंटरव्यू को Facebook https://www.facebook.com/share/v/1DL4rKFnFR/ or YouTube :- https://youtube.com/live/o-9aTY1Aggs?feature=share पर देखा जा सकता है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 10-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
- Previous story एक ईरान है, जहां अपने दिवंगत नेता खामनेई के साथ सभी ईरानी खड़े हैं। यही ताकत सुपुर्द-ए-खाक की रस्म के दौरान भी ईरान को अमेरिका से जंग लड़ने की ताकत देती है। एक भारत है, जहां अपने ही लोग आराध्य देव राम के मंदिर को भी नहीं बख्श रहे। जबकि 25 करोड़ की मुस्लिम आबादी वाले इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुबियांटो तो स्वयं में भारत का डीएनए बताते हैं। ================ मुस्लिम देश ईरान में अपने दिवंगत नेता अयातुल्ला खामेनेई के सुपुर्द-ए-खाक की रस्म 9 जुलाई को संपन्न हो रही है। गत चार जुलाई से शुरू हुई जनाजे की रस्म में करोड़ों ईरान भाग ले रहे हैं। इसी बीच ईरान अपने दुश्मन अमेरिका के साथ जंग भी लड़ रहा है। यानी एक ओर ईरान अमेरिका की मिसाइलों का सामना कर रहा है। तो दूसरी ओर अपने दिवंगत नेता के साथ पूरी ताकत के साथ खड़ा है। ईरानियों की यह ताकत ही उन्हें अमेरिका के साथ लड़ने की शक्ति प्रदर्शन करता है। ये खामनेई वो ही नेता है, जिनकी कट्टरपंथी नीतियों के विरोध में गत वर्ष लाखों ईरानियों ने खासकर महिलाओं ने सड़कों पर प्रदर्शन किया था। लेकिन जब अमेरिका ने हमला किया तो सारे ईरानी एकजुट हो गए। आज इसी एकता के कारण ईरान की सेना खाड़ी देशों में अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर हमला कर रही है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भले ही ईरान को तबाह करने की धमकी दे, लेकिन ईरान ने जता दिया है कि जो नीति दिवंगत नेता खामनेई ने निर्धारित की है, उस पर ही ईरान चलेगा। यानी ईरान अमेरिका के सामने झुकेगा नहीं। एक और दुनिया के सामने ईरानियों की एकता है, तो वहीं भारत में अपने ही लोग आराध्य देव राम के मंदिर की छवि खराब करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे है। जबकि अयोध्या में जन्म स्थल वाली भूमि पर राम का मंदिर बनवाने में पांच सौ वर्ष लगे और लाखों राम भक्तों ने अपना बलिदान दिया। लंबे संघर्ष के बाद अयोध्या में राम मंदिर बन पाया। लेकिन अब मंदिर के चढ़ावा चोरी की आड़ में संपूर्ण सनातन संस्कृति और भगवान राम पर सवाल उठाए जा रहे हैं। उन लोगों को भी कटघरे में खड़ा किया जा रहा है जिन्होंने मंदिर निर्माण में अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया। यह सही है कि जिन लोगों ने चढ़ावा चोरी किया उन्हें सजा मिलनी चाहिए। लेकिन चढ़ावा चोरी की आड़ में सनातन संस्कृति को बदनाम नहीं किया जा सकता। गंभीर बात तो यह है कि जिन लोगों ने मंदिर निर्माण में बाधाएं खड़ी की आज वे ही स्वयं को राम भक्त बताकर चढ़ावा चोरी के मामले में बयानबाजी कर रहे हैं। उन लोगों के बलिदान पर पानी फेरने की कोशिश की जा रही है जिन्होंने अयोध्या में मंदिर का निर्माण करवाया। अयोध्या का मंदिर कोई साधारण भवन नहीं है बल्कि यह सौ करोड़ से ज्यादा हिंदुओं की आस्था का केंद्र है। जो चढ़ावा चोरी का मामला उजागर हुआ है, उसमें सभी सनातनियों को एकजुटता दिखानी चाहिए। लेकिन अपने ही लोग राजनीतिक स्वार्थों की खातिर सनातन संस्कृति को बदनाम कर रहे हैं। ऐसे लोगों को ईरानियों की एकता से सबक लेना चाहिए। भारत का डीएनए: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 6 और 7 जुलाई को इंडोनेशिया का दौरा किया। इंडोनेशिया में मुस्लिम आबादी 25 करोड़ है। इंडोनेशिया को मुस्लिम देश ही माना जाता है। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुबियांटो ने मोदी से मुलाकात के दौरान कहा, मुझ में भी भारत का डीएनए है। असल में भारत और इंडोनेशिया के बीच सभ्यता और संस्कृति जुड़ी हुई है। एक और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति है जो स्वयं में भारत का डीएनए बताते हैं, दूसरी ओर भारत में अपने ही लोग सनातन संस्कृति पर हमला करने से बाज नहीं आते। S.P.MITTAL BLOGGER ( 09-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
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