- Next story चढ़ावा चोरी प्रकरण को लेकर अयोध्या के राम मंदिर की छवि खराब करने वाले नेता और मीडिया अब खाड़ी के मुस्लिम देशों और कट्टरपंथी इस्लामिक देश ईरान के भीषण युद्ध को देख लें। ================ अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जो युद्ध चल रहा है, उसमें 11 जुलाई को एक नया मोड़ तब आ गया, जब खाड़ी के मुस्लिम देश कुवैत, बहरीन आदि से भी कट्टरपंथी इस्लामिक देश ईरान पर भीषण हमले शुरू हो गए है। यह सही है कि खाड़ी देशों में अमेरिका के सैन्य ठिकाने हैं, लेकिन अब तक खाड़ी देशों से ईरान पर बड़े हमले नहीं किए जा रहे थे। रणनीति के तहत अरब सागर में खड़े अमेरिकी जहाजों और इजरायल से मिसाइलों के जरिए ही ईरान पर हमले किए जा रहे थे। लेकिन अब अमेरिका ने अपने समर्थक खाड़ी के मुस्लिम देशों को भी युद्ध करने के लिए मैदान में खड़ा कर दिया है। 11 जुलाई से अधिकांश खाड़ी देशों से ईरान पर ताबड़तोड़ हमले किए जा रहे है। ईरान पर खाड़ी देशों से हमले होने के बाद अमेरिका को युद्ध में मजबूती मिली है। खाड़ी देशों से हमला करना अमेरिका के लिए आसान काम है। हालांकि ईरान ने भी खाड़ी के मुस्लिम देशों पर जवाबी कार्यवाही की है। जो नेता और मीडिया भारत में चढ़ावा चोरी के प्रकरण में अयोध्या के राम मंदिर की छवि खराब कर रहे हैं, उन्हें अब खाड़ी के मुस्लिम देशों और कट्टरपंथी इस्लामिक देश ईरान के बीच भीषण युद्ध को देख लेना चाहिए। चढ़ावा चोरी की आड़ में सुनियोजित तरीके से भारत की सनातन संस्कृति को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। जबकि अयोध्या में मंदिर का निर्माण पांच सौ वर्ष के संघर्ष के बाद हो पाया है। अयोध्या का राम मंदिर सीमेंट कंक्रीट की इमारत नहीं बल्कि भारत के सौ करोड़ से ज्यादा हिंदुओं की आस्था का केंद्र है। भगवान राम के जन्मस्थान पर मंदिर बनने से हर सनातनी गौरवान्ति है। जो नेता और मीडिया चढ़ावा चोरी की आड़ में राम मंदिर की छवि खराब कर रहे हैं, उन्हें अपनी हरकतों से बाज आना चाहिए। दुनिया में सनातन धर्म ही एक ऐसा धर्म है जो सभी धर्मों और विचारों को साथ लेकर चलता है। जबकि वहीं अन्य धर्मों में एक ही धर्म के लोगों में जबरदस्त विरोधाभास है और इसका उदाहरण खाड़ी के देशों और ईरान के बीच हो रहा युद्ध है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 12-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
- Previous story मोदी के नेतृत्व वाला एनडीए अब राज्यसभा में दो तिहाई बहुमत से मात्र 13 सीट दूर, लेकिन साधारण बहुमत से 28 सीटें ज्यादा। राज्यसभा से इस्तीफा देने वाले टीएमसी के तीनों सांसद अब पश्चिम बंगाल से भाजपा के उम्मीदवार। ममता बनर्जी का सफाया। ================ पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद टीएमसी के राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक ने इस्तीफा दे दिया था। लेकिन अब इन तीनों को भाजपा ने पश्चिम बंगाल से ही अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। बंगाल में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए 24 जुलाई को उप-चुनाव होना है। चूंकि विधानसभा में भाजपा के 208 विधायक है, इसलिए इन तीनों उम्मीदवारों की जीत तय है। यानी टीएमसी के इन नेताओं ने भाजपा के प्रति जो वफादारी दिखाई थी, उसका पुरस्कार अब इन तीनों को मिल गया है। राज्यसभा में मौजूदा समय में भाजपा के 113 सांसद हैं। इन तीनों की जीत के बाद संख्या 16 हो जाएगी। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए के राज्यसभा में सांसदों की संख्या 148 से बढ़कर 151 हो जाएगी। साधारण बहुमत के लिए 123 सदस्यों की जरूरत होती है यानी अब एनडीए के पास साधारण बहुमत से 28 सीटें ज्यादा है। राज्यसभा में दो तिहाई बहुमत के लिए 1645 सांसद चाहिए, जबकि एनडीए के पास 24 जुलाई के बाद 151 सांसद हो जाएंगे। यानी अब राज्यसभा में एनडीए दो तिहाई बहुमत से मात्र 13 सीट दूर है। कहा जा रहा है कि कई क्षेत्रीय दलों के सांसद एनडीए को समर्थन देने को तैयार है। जिस तरह एनडीए राज्यसभा में दो तिहाई बहुमत की ओर बढ़ रहा है,उससे भाजपा बेहद उत्साहित है। लोकसभा में भी एनडीए दो तिहाई बहुमत की ओर बढ़ रहे है। हाल ही में टीएमसी और आम आदमी पार्टी के सांसदों ने जिस तरह दल बदल किया है, उससे एनडीए की स्थिति और मजबूत हुई है। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी के लोकसभा के 27 सांसदों में से 20 ने अलग दल बना लिया है। अब ये सांसद लोकसभा में एनडीए को ही समर्थन दे रहे है। ममता बनर्जी को लोकसभा और राज्यसभा में ही झटका नहीं लगा है बल्कि विधानसभा में भी झटका लगा है। हाल ही में चुनाव में ममता बनर्जी के 80 विधायक बने, लेकिन इसमें से 60 विधायकों ने अलग दल बना लिया। यानी अब ममता बनर्जी के पास 20 विधायक रह गए है। देखा जाए तो पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी का पूरा सफाया हो गया है। जो ममता बनर्जी मुख्यमंत्री रहते हुए देश की संवैधानिक संस्थाओं का मजाक उड़ा रही थी, वही ममता बनर्जी अब बेहद कमजोर हो गई है। एक तरह से ममता बनर्जी को टीएमसी का पश्चिम बंगाल में कोई वजूद ही नहीं रहा है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 10-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
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