जिन शहरी निकायों में 11 सितंबर को मतदान होगा, उनके उम्मीदवारों को प्रचार के लिए दो दिन अधिक मिलेंगे। निर्वाचन आयोग हाईकोई की अवमानना के दायरे में नहीं। पंचायतीराज में आरक्षण की लॉटरी नहीं निकालने वाला सवाल राजस्थान सरकार से पूछा जाए-राजेश्वर सिंह आयुक्त। ================ राजस्थान में शहरी निकायों की 309 संस्थाओं के चुनाव 9 व 11 सितंबर को होंगे। राज्य के निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने 19 अगस्त को चुनाव की जो घोषणा की उसके अनुसार दो चरणों में होने वाले मतदान के नामांकन की प्रक्रिया 27 अगस्त से शुरू हो जाएगी। यानी वार्ड पार्षद का चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवार 27 अगस्त से नामांकन शुरू कर देंगे। प्रदेश में भले ही दो चरणों में चुनाव हो रहे हो, लेकिन नामांकन की प्रक्रिया को एक समान रखा गया है। ऐसे में जिन निकायों में 11 सितंबर को मतदान होगा उनके उम्मीदवारों को प्रचार के लिए दो दिन अधिक मिलेंगे। जबकि जिन निकायों में 9 सितंबर को मतदान होगा उनके उम्मीदवारों को प्रचार के लिए दो दिन कम मिलेंगे। आमतौर पर मतदान से दो दिन पहले चुनावी सभाओं जैसा प्रचार बंद हो जाता है। निर्वाचन आयोग के अनुसार पहले चरण के मतदान में पांच हजार 550 और दूसरे चरण के मतदान में 4 हजार 695 पार्षद चुने जाएंगे। कुल 10 हजार 245 पार्षदों का निर्वाचन होना है। 14 सितंबर को परिणाम आने के बाद निकाय प्रमुखों के पद के लिए नामांकन 15 और 16 सितंबर को होगा तथा 21 सिंतबर को मतदान और उसी दिन परिणाम घोषित होगा। आयोग अवमानना के दायरे में नहीं: राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने माना कि हाईकोर्ट ने 15 अगस्त तक शहरी निकाय और पंचायती राज संस्थाओं में आरक्षण की लॉटरी निकालने के आदेश दिए थे। लेकिन राज्य सरकार ने सिर्फ शहरी निकायों की लॉटरी ही निकाली है, इसलिए आयोग ने शहरी निकायों के चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। आयुक्त ने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं में आरक्षण की लॉटरी क्यों नहीं निकाली यह सवाल राज्य सरकार से पूछा जाना चाहिए, क्योंकि लॉटरी निकालने का काम राज्य सरकार का है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि लॉटरी नहीं निकलने पर हाई कोर्ट की अवमानना के दायरे में निर्वाचन आयोग नहीं आता है। आयोग तो चुनावों की घोषणा तभी कर सकता है, जब आरक्षण की रिपोर्ट आयोग को दी जाए। बगैर आरक्षण के आयोग चुनावों की घोषणा नहीं कर सकता। मालूम हो कि राज्य सरकार ने पंचायती राज चुनाव में आरक्षण की लॉटरी निकालने के लिए 17 अगस्त की तारीख निर्धारित की थी, लेकिन एक दिन पहले इस से एक माह के लिए टाल दिया गया। सरकार का कहना है कि अब 17 सितंबर को लॉटरी निकाल कर आरक्षण का निर्धारण किया जाएगा। सवाल उठता है कि हाईकोर्ट ने शहरी निकायों और पंचायती राज चुनाव के लिए 15 अगस्त तक आरक्षण का निर्धारण करने का आदेश दिया था, तब सरकार ने कोर्ट के आदेशों की पालना क्यों नहीं की। कहा जा रहा है कि अब हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की जाएगी। संभावित याचिका को ध्यान में रखते हुए निर्वाचन आयुक्त ने पहले ही सरकार पर जिम्मेदारी डाल दी है। आचार संहिता पर असमंजस: निर्वाचन आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि आचार संहिता उन्हीं क्षेत्रों में प्रभावी होगी, जहां शहरी निकायों के चुनाव होने हैं। यानी ग्राम पंचायतों वाले क्षेत्रों में आचार संहिता लागू नहीं है। यही वजह है कि आचार संहिता के क्षेत्र को लेकर असमंजस रहेगा। हाल ही में जो परिसीमन हुआ उसमें ग्राम पंचायतों की कुछ सीमा शहरी निकायों में शामिल हुई है, ऐसे में आचार संहिता को प्रभावी बनाना निर्वाचन विभाग के लिए भी परेशानी का सबब बनेगा। S.P.MITTAL BLOGGER ( 20-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

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