अशोक गहलोत ने तो रिफाइनरी का शिलान्यास प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से नहीं, बल्कि सोनिया गांधी से करवाया था। लेकिन गहलोत को अब युवाओं को नियुक्ति पत्र देने पर ही ऐतराज है। ================= प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 4 जुलाई को बाड़मेर के पचपदरा में स्थापित एचपीसीएल की रिफाइनरी का उद्घाटन किया। तय कार्यक्रम के अनुसार पीएम मोदी करीब 50 हजार युवाओं को सरकारी नौकरी का नियुक्ति पत्र भी देंगे। चूंकि एक साथ इतने युवाओं को एक ही स्थान पर नियुक्ति पत्र नहीं दिए जा सकते हैं, इसलिए सरकार की ओर से जिला मुख्यालयों पर कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। यानी जिला मुख्यालय पर भी नियुक्ति पत्र लेने के लिए युवा उपस्थित रहेंगे। यह एक सामान्य प्रक्रिया हैं, लेकिन इस पर भी कांग्रेस के नेता पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को ऐतराज है। गहलोत का कहना है कि पीएम की सभा और जिला मुख्यालयों पर भीड़ जुटाने के लिए नियुक्ति पत्र के बहाने युवाओं को बुलाया जा रहा है। गहलोत इसे युवाओं के साथ भद्दा मजाक मानते हैं। आज जिन अशोक गहलोत को युवाओं को प्रधानमंत्री के द्वारा नियुक्ति पत्र देने पर ऐतराज है, उन्हीं अशोक गहलोत ने वर्ष 2013 में पचपदरा में एचपीसीएल की रिफाइनरी का शिलान्यास कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी से करवाया था। हालांकि तब देश के प्रधानमंत्री की भूमिका में डॉ. मनमोहन सिंह थे, लेकिन प्रधानमंत्री को दरकिनार कर गहलोत ने रिफाइनरी का शिलान्यास अपने राजनीतिक स्वार्थों के खातिर सोनिया गांधी से करवाया। तब गहलोत राजस्थान के मुख्यमंत्री थे। गहलोत बताएं कि तब रिफाइनरी का शिलान्यास प्रधानमंत्री से क्यों नहीं करवाया गया। आज गहलोत को रिफाइनरी के शुरू होने पर भी अनेक आशंकाएं हैं, लेकिन सब जानते हैं कि वर्ष 2013 में जब कांग्रेस सरकार का कार्यकाल पूरा हो रहा था, तब आनन-फानन में गहलोत ने रिफाइनरी का शिलान्यास करवा दिया। चूंकि इस अनुबंध से कई खामियां थी, इसलिए प्रदेश में वसुंधरा राजे के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनने पर सोनिया गांधी और अशोक गहलोत वाले अनुबंध और शिलान्यास को रद्द कर दिया गया। यह सही है कि जिस रिफाइनरी का शिलान्यास सोनिया गांधी ने किया उस रिफाइनरी का काम वसुंधरा राजे के मुख्यमंत्री रहते हुए कुछ भी नहीं हुआ। राजे ने भी अपनी सरकार के एक वर्ष शेष रहने पर 17 जनवरी 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से रिफाइनरी का शिलान्यास करवाया। यह बात अलग है कि दिसंबर 2018 में ही राजस्थान में अशोक गहलोत के नेतृत्व में फिर से कांग्रेस की सरकार बन गई। अब 4 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही इस रिफाइनरी का उद्घाटन कर रहे हैं। अशोक गहलोत माने या नहीं, लेकिन राजस्थान के विकास में यह रिफाइनरी मील का पत्थर साबित होगी। आज राजस्थान पर 7 लाख 25 हजार करोड़ रुपए का कर्जा है। अर्थशज्ञसत्री मानते हैं कि अकेले इस रिफाइनरी से राजस्थान को प्रति वर्ष 6 हजार करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त होगा। इस रिफाइनरी का महत्व इसी से पता चलता है कि इसमें प्रतिवर्ष 9 मिलियन टन क्रूड ऑयल रिफाइंड होगा। करीब 2 मिलियन टन ऑयल स्वदेशी जबकि 7 मिलियन टन क्रूड ऑयल खाड़ी देशों से आएगा। रिफाइंड ऑयल को यूरोप के देशों में बेचा जाएगा। रिफाइनरी की वजह से ही पेंट, फाइबर, केमिकल, प्लास्टिक, पैकेजिंग, फार्मा जैसे पांच सहायक उद्योग भी लगेंगे। करीब एक लाख लोगों को सीधे तौर पर रोजगार मिलेगा। S.P.MITTAL BLOGGER ( 04-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

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