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आखिर अशोक गहलोत को किसने बताया कि सुखजिंदर सिंह रंधावा कांग्रेस से बगावत कर रहे हैं? क्या ऐसा बयान राजस्थान की राजनीति कमेटी को लेकर दबाव बनाने के लिए दिया गया? पूर्व उपराष्ट्रपति धनखड़ से भले ही भाजपा के नेता न मिले, लेकिन पूर्व सीएम गहलोत मिलते हैं। ================= 3 जुलाई को राजस्थान के कांग्रेस प्रभारी और पंजाब से लोकसभा के सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद रंधावा ने कहा कि पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार के दौरान बिगड़ती कानून व्यवस्था को लेकर उन्होंने अमित शाह से मुलाकात की। इस मुलाकात में पंजाब के बिगड़ते हालातों की जानकारी दी। लेकिन इस मुलाकात को तब तूल मिला, जब राजस्थान के पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया पर बयान जारी किया। गहलोत ने लिखा कि अमित शाह और रंधावा की मुलाकात के कोई सियासी मायने नहीं निकाले जाने चाहिए। रंधावा कांग्रेस के वफादार नेता है। वे कोई गलत कदम नहीं उठाएंगे। गहलोत का आशय रहा कि रंधावा कांग्रेस से बगावत नहीं कर रहे हैं। सवाल उठता है कि आखिर गहलोत को किसने कहा कि रंधावा कांग्रेस से बगावत नहीं कर रहे हैं? किसी भी बड़े नेता अथवा मीडिया घराने ने अमित शाह और रंधावा की मुलाकात के सियासी मायने नहीं निकाले, लेकिन फिर भ गहलोत ने रंधावा को कटघरे में खड़ा करने के लिए अपना बयान जारी कर दिया। जबकि सच्चाई यह है कि रंधावा दिल्ली में राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के साथ मिलकर प्रदेश की राजनैतिक कमेटी बनाने में व्यस्त हैं। डोटासरा दो दिन से दिल्ली में रंधावा के साथ ही कमेटी के सदस्यों के नाम पर विचार कर रहे हैं। राहुल गांधी के निर्देश पर बनने वाली इस राजनैतिक कमेटी की देखरेख में ही ढाई वर्ष बाद होने वाले विधानसभा के चुनाव कराए जाएंगे। उम्मीदवारों के चयन में भी इस कमेटी की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। जो रंधावा प्रदेश प्रभारी की हैसियत से राजनैतिक कमेटी बनाने में व्यस्त है वो रंधावा कांग्रेस के साथ कैसे बगावत कर सकते हैं? लेकिन गहलोत बिना किसी आधार के बयान जारी कर रंधावा की विश्वसनीयता और वफादारी पर सवाल खड़े कर दिए। जानकार सूत्रों की माने तो राजनैतिक कमेटी में स्वयं और अपने समर्थकों को शामिल करने को लेकर ही गहलोत ने बयान जारी किया। देखना होगा कि गहलोत के इस दबाव वाले बयान का रंधावा पर कितना असर पड़ता है। कांग्रेस की राजनीति में रंधावा को सख्त मिजाज का नेता माना जाता है। धनखड़ से गहलोत ही मिले: पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ इन दिनों जयपुर में एक निजी अस्पताल में भर्ती है। 2 जुलाई को धनखड़ की एंजियोप्लास्टी हुई। धनखड़ के स्वास्थ्य को देखते हुए किसी भी व्यक्ति को मिलने नहीं दिया जा रहा। यहां तक की भाजपा के बड़े नेता भी धनखड़ से नहीं मिल पा रहे हैं? लेकिन 3 जुलाई को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने धनखड़ से मुलाकात कर उनकी कुशलक्षेम पूछी। गहलोत को प्रदेश प्रभारी रंधावा के केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मिलने पर तो सियासत नजर आती है, लेकिन जब स्वयं पूर्व उपराष्ट्रपति धनखड़ से मिलते हैं तो सियासत नहीं होती। मालूम हो कि धनखड़ को उपराष्ट्रपति के पद से अचानक इस्तीफा देना पड़ा था, जबकि उनका दो वर्ष का कार्यकाल शेष था। राजस्थान की राजनीति में सक्रिय रहे धनखड़ जब भी दिल्ली से जयपुर आते हैं, तब अशोक गहलोत मुलाकात करते हैं। गत बार तो धनखड़ ने मुलाकात के लिए गहलोत को राजभवन में आमंत्रित किया। स्वाभाविक है कि एंजियोप्लास्टी के बाद अनेक भाजपा नेताओं ने भी धनखड़ से मुलाकात की अनुमति मांगी, लेकिन धनखड़ ने 3 जुलाई को अशोक गहलोत को ही मिलने की अनुमति दी। धनखड़ के अचानक इस्तीफे के बाद गहलोत ने कहा था कि धनखड़ के पास अनेक राज हैं। S.P.MITTAL BLOGGER ( 04-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
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admin
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July 4, 2026
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