- Next story मोदी के नेतृत्व वाला एनडीए अब राज्यसभा में दो तिहाई बहुमत से मात्र 13 सीट दूर, लेकिन साधारण बहुमत से 28 सीटें ज्यादा। राज्यसभा से इस्तीफा देने वाले टीएमसी के तीनों सांसद अब पश्चिम बंगाल से भाजपा के उम्मीदवार। ममता बनर्जी का सफाया। ================ पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद टीएमसी के राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक ने इस्तीफा दे दिया था। लेकिन अब इन तीनों को भाजपा ने पश्चिम बंगाल से ही अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। बंगाल में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए 24 जुलाई को उप-चुनाव होना है। चूंकि विधानसभा में भाजपा के 208 विधायक है, इसलिए इन तीनों उम्मीदवारों की जीत तय है। यानी टीएमसी के इन नेताओं ने भाजपा के प्रति जो वफादारी दिखाई थी, उसका पुरस्कार अब इन तीनों को मिल गया है। राज्यसभा में मौजूदा समय में भाजपा के 113 सांसद हैं। इन तीनों की जीत के बाद संख्या 16 हो जाएगी। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए के राज्यसभा में सांसदों की संख्या 148 से बढ़कर 151 हो जाएगी। साधारण बहुमत के लिए 123 सदस्यों की जरूरत होती है यानी अब एनडीए के पास साधारण बहुमत से 28 सीटें ज्यादा है। राज्यसभा में दो तिहाई बहुमत के लिए 1645 सांसद चाहिए, जबकि एनडीए के पास 24 जुलाई के बाद 151 सांसद हो जाएंगे। यानी अब राज्यसभा में एनडीए दो तिहाई बहुमत से मात्र 13 सीट दूर है। कहा जा रहा है कि कई क्षेत्रीय दलों के सांसद एनडीए को समर्थन देने को तैयार है। जिस तरह एनडीए राज्यसभा में दो तिहाई बहुमत की ओर बढ़ रहा है,उससे भाजपा बेहद उत्साहित है। लोकसभा में भी एनडीए दो तिहाई बहुमत की ओर बढ़ रहे है। हाल ही में टीएमसी और आम आदमी पार्टी के सांसदों ने जिस तरह दल बदल किया है, उससे एनडीए की स्थिति और मजबूत हुई है। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी के लोकसभा के 27 सांसदों में से 20 ने अलग दल बना लिया है। अब ये सांसद लोकसभा में एनडीए को ही समर्थन दे रहे है। ममता बनर्जी को लोकसभा और राज्यसभा में ही झटका नहीं लगा है बल्कि विधानसभा में भी झटका लगा है। हाल ही में चुनाव में ममता बनर्जी के 80 विधायक बने, लेकिन इसमें से 60 विधायकों ने अलग दल बना लिया। यानी अब ममता बनर्जी के पास 20 विधायक रह गए है। देखा जाए तो पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी का पूरा सफाया हो गया है। जो ममता बनर्जी मुख्यमंत्री रहते हुए देश की संवैधानिक संस्थाओं का मजाक उड़ा रही थी, वही ममता बनर्जी अब बेहद कमजोर हो गई है। एक तरह से ममता बनर्जी को टीएमसी का पश्चिम बंगाल में कोई वजूद ही नहीं रहा है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 10-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
- Previous story क्या बाड़मेर रिफाइनरी से जुड़ा है, केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के निजी स्टाफ को बदलने तथा बर्खास्त करने का मामला? 20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद सत्र में हंगामे के आसार। राजस्थान के मुख्यमंत्री से लगातार मुलाकातें। अलवर में कराई एनटीसीए की कार्यशाला पर 20 लाख का खर्च। ================ केंद्रीय वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव का देश की राजनीति में जबरदस्त दखल है। हाल ही में पश्चिम बंगाल में भाजपा को जो अभूतपूर्व सफलता मिली, उसके पीछे भी भूपेंद्र यादव की रणनीति रही। भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने चुनाव से एक वर्ष पहले ही यादव को बंगाल का प्रभारी नियुक्त कर दिया था। गुजरात सहित कई राज्यों में भाजपा की सरकार रिपीट करवाने में यादव का विशेष योगदान रहा। भूपेंद्र यादव भाजपा के उन नेताओं में शामिल हैं जो मीडिया से दूर रहकर प्रभावी भूमिका निभाते हैं। स्वाभाविक है कि जब ऐसे ताकतवर केंद्रीय मंत्री के निजी स्टाफ के चार सदस्यों को एक ही दिन में हटाया जाएगा तो फिर देशव्यापी चर्चा तो होगी ही। 3 जुलाई को जिन चार सदस्यों को हटाया गया उनमें भूपेंद्र यादव के निजी सचिव और आईआरएस कैडर के अमर सिंह तथा अतिरिक्त निजी सचिव शैलेश सिंह को अपने मूल कैडर में भेजा गया, जबकि अतिरिक्त निजी सचिव आयुष शरण तथा सहायक निजी सचिव सिद्धार्थ यादव को तो बर्खास्त ही कर दिया गया। हालांकि निजी स्टाफ को बदलने और बर्खास्त करने की कार्यवाही भूपेंद्र यादव के निर्देश पर ही हुई, लेकिन इस तरह एक ही दिन में निजी स्टाफ के अधिकांश सदस्यों को हटाने से इन दिनों राजनीति का माहौल गर्म है। मीडिया में प्रसारित हो रही खबरों के अनुसार सिद्धार्थ यादव भले ही सहायक निजी सचिव हो, लेकिन सिद्धार्थ यादव ही भूपेंद्र यादव की ओर से प्रदेश के मुख्यमंत्रियों, केंद्रीय मंत्रियों और भाजपा के प्रभावशाली नेताओं से संवाद करते थे। यानी किसी नेता को मिलना है तो सिद्धार्थ यादव ही तारीख और समय तय करते थे। मंत्रालय में तैनात सीनियर आईएएस भी सिद्धार्थ यादव के निर्देशों का पालन करते थे। किसी भी आईएएस में इतनी हिम्मत नहीं थी कि वे सिद्धार्थ यादव द्वारा दिए गए निर्देशों की पुष्टि केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से कर सके। चूंकि भूपेंद्र यादव का देश की राजनीति में दखल है, इसलिए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, राज्यसभा सांसद और सुप्रीम कोर्ट के प्रसिद्ध वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने भी ट्वीट किया है। सिंघवी ने कहा है कि केंद्रीय मंत्री के निजी स्टाफ में इतना बड़ा बदलाव अनेक आशंकाएं प्रकट करता है ।माना जा रहा है कि भूपेंद्र यादव से जुड़े इस प्रकरण को 20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद सत्र में भी उठाया जाएगा। विपक्ष यह मांग करेगा कि आखिर किन कारणों से भूपेंद्र यादव के पूरे निजी स्टाफ को हटाया गया है? बाड़मेर रिफाइनरी से जुड़े होने के कयास: बताया जा रहा है कि राजस्थान के बाड़मेर स्थित रिफाइनरी के निर्माण में पर्यावरण से जुड़ी स्वीकृतियों को लेकर जो विलंब और गड़बडिय़ां हुई। उन्हें देखते हुए भूपेंद्र यादव के निजी स्टाफ को हटाया और बर्खास्त किया गया। सूत्रों की माने तो रिफाइनरी का मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मादेी के संज्ञान में भी लाया गया और तब भूपेंद्र यादव से उच्च स्तर पर जवाब तलब किया गया। जो गड़बडिय़ां उजागर हुई उनकी जिम्मेदारी भूपेंद्र यादव ने अपने निजी स्टाफ पर डाल दी। यही वजह रही कि बाद में केंद्रीय मंत्री यादव को अपने निजी स्टाफ से एक साथ चार सदस्यों का हटाना पड़ा। हालांकि अभी निजी स्टाफ को हटाने को लेकर भूपेंद्र यादव की कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन इस प्रकरण से वन एवं पर्यावरण मंत्रालय में खलबली मची हुई है। राजस्थान के सीएम से लगातार मुलाकात: निजी स्टाफ को बदलने का मामला रिफाइनरी से जुड़े होने की खबरों को इसलिए भी बल मिल रहा है कि भूपेंद्र यादव राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से लगातार मिल रहे हैं। हालांकि केंद्रीय मंत्री का किसी मुख्यमंत्री से मिलना सामान्य बात है, लेकिन जब एक पखवाड़े में चार-पांच मुलाकात हो तो फिर चर्चा तो होती ही है। भूपेंद्र यादव ने गत माह 26 जून को सीएम शर्मा से जयपुर में अनेक सरकारी निवास पर मुलाकात की। 7 जुलाई को भी भूपेंद्र यादव सीएम शर्मा से मिलने के लिए दिल्ली स्थित राजस्थान के बीकानेर हाउस में जाकर मिले। आमतौर पर मुख्यमंत्री ही भूपेंद्र यादव से मिलने जाते हैं, लेकिन राजस्थान के सीएम से मिलने के लिए भूपेंद्र यादव स्वयं जा रहे हैं। अलवर से है लोकसभा के सांसद: भूपेंद्र यादव राजस्थान के अलवर से लोकसभा के सांसद हैं। कुछ मीडिया खबरों में यादव के निजी स्टाफ को हटाने के मामले को पश्चिम बंगाल की राजनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है। भले ही निजी स्टाफ को हटाने और बर्खास्त करने का मामला प्रशासनिक बताया जा रहा हो, लेकिन किसी मंत्री के एक साथ चार निजी स्टाफ को हटाना बेहद गंभीर है। चूंकि यह मामला भूपेंद्र यादव से जुड़ा है, इसलिए आने वाले समय में देश की राजनीति में और उछलेगा। अभी राष्ट्रीय मीडिया में सुर्खियां बना हुआ है। इंडियन एक्सप्रेस न्यूज़ समूह इस मामले में जहां खोजबीन कर रहा है। अलवर की सेमिनार पर 20 लाख खर्च: केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव की कार्यशैली त माह तब भी चर्चा में आई थी, जब यादव ने अपने संसदीय क्षेत्र अलवर में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण एनटीसीए की एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला करवाई। पांच सितारा होटल में हुई इस एक दिवसीय कार्यशाला पर 20 लाख रुपए खर्च किए गए। इस कार्यशाला में भूपेंद्र यादव भी उपस्थित रहे। यह कार्यशाला 28 जून 2026 को आयोजित की गई। इसमें देशभर से आए वन विभाग के 40 अधिकारियों ने भाग लिया। राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित खबर में कहा गया कि इतनी महंगी कार्यशाला तब की गई है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका ईरान के युद्ध को देखते हुए ईंधन बचत और मितव्ययिता की अपील की है। यानी केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने प्रधानमंत्री के निर्देशों की भी धज्जियां उड़ाई। S.P.MITTAL BLOGGER ( 09-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
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