स्वामी दयानंद के असल उत्तराधिकारी थे प्रो. धर्मवीर। 7 अक्टूबर को दयानंद की समाधि के पास ही होगा अंतिम संस्कार।

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6 अक्टूबर को प्रात: 5 बजे सुप्रसिद्ध आर्य विद्वान और अजमेर स्थित परोपकारिणी सभा के प्रधान प्रो.धर्मवीर का निधन हो गया। 70 वर्षीय धर्मवीर अपने पीछे पत्नी ज्योत्सना आर्य और तीन विवाहित बेटियों का भरा परिवार छोड़ गए है। उनका अंतिम संस्कार 7 अक्टूबर को अजमेर के पहाडग़ंज स्थित श्मशान स्थल पर उस जगह होगा जहां स्वामी दयानंद की समाधि बनी हुई है। मैं प्रो.धर्मवीर को स्वामी दयानंद का असल उत्तराधिकारी इसलिए मान रहा हूं कि वे स्वामी दयानंद द्वारा बनाई गई अपनी उत्तराधिकारिणी परोपकारी सभा के सफल प्रधान रहे। यूं तो इस सभा के अनेक आर्य विद्वान प्रधान रहे, लेकिन प्रो.धर्मवीर ने पिछले 20 बरसों में अजमेर में आर्य समाज के सिद्धांतों को आगे बढ़ाने के लिए बहुत काम किए। आज आनासागर के किनारे ऋषि उद्यान का जो विशाल स्वरूप देखा जा रहा है उसके पीछे धर्मवीर की कड़ी मेहनत रही है। परोपकारिणी सभा की अरबों रुपए की संपत्ति को खुर्दबुर्द होने से भी बचाया गया है। स्वामी दयानंद की शिक्षाओं की पताका हिन्दुस्तान में ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में फैलाई। मुझे याद है कि इस सफलता के लिए डॉ धर्मवीर को लम्बा संघर्ष करना पड़ा। धर्मवीर जी जब डीएवी कॉलेज में प्राध्यापक थे तब उन्होंने आर्य समाज को बचाने के लिए तत्कालीन आर्य दिग्गज कृष्णराव बाब्ले और दतात्रेय बाब्ले के खिलाफ आवाज उठाई। धर्मवीर जी के इस संघर्ष में मैंने भी आहुति दी। मुझे यह भी याद है कि संघर्ष के दिनों में उनकी पत्नी ज्योत्सना आर्य ने कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। धर्मवीर जी सीधे-सादे सरल स्वभाव के इंसान थे। उनकी सादगी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्हें स्कूटर चलाना भी नहीं आता था। हालांकि अब तो धर्मवीर जी के पीछे वाहनों की कतार रहती थी, लेकिन एक समय था जब उनकी पत्नी ही स्कूटर पर बैठाकर केसरगंज के मकान से ऋषि उद्यान तक लाती और ले जाती थी। यदि स्कूटर की सुविधा नहीं मिलती तो वे तीन-चार किलोमीटर का सफर पैदल ही तय करते थे। इसमें कोई दो राय नहीं कि धर्मवीर जी ने अपने जीवनकाल में आनासागर के किनारे ऋषि उद्यान को देशभर में आर्य समाज का एक महत्वपूर्ण केन्द्र बना दिया। सब जानते हंै स्वामी दयानंद का निर्वाण अजमेर में ही भिनाय कोठी में हुआ था। प्रो.धर्मवीर ने ऋषि उद्यान में स्वामी दयानंद की जीवन चरित्र से संबंधित प्रदर्शनी भी लगा रखी है। यहीं पर ही गुरुकुल चलाकर वैदिक शिक्षा दी जाती है। अभी हाल ही में यूजीसी ने विश्वविद्यालय में दयानंद पीठ को जो मंजूरी दी, उसमें भी धर्मवीर जी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। यही वजह है कि उनके निधन से संपूर्ण आर्य समाज जगत में शोक की लहर है। प्रो.धर्मवीर का शव अंतिम दर्शनों के लिए ऋषि उद्यान में रखा गया है। अंतिम संस्कार में देश-विदेश से आर्य समाजी अजमेर पहुंच रहे हैं।
(एस.पी. मित्तल) (6-10-2016)
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