- Next story प्रतिबंधित रक्त संबंधों के बीच विवाह पर रोक के नियम को मुस्लिम विरोधी न माना जाए। ब्लड रिलेशन में शादी होने से जनरेटिक (आनुवांशिक) बीमारियां भी साथ आती है। इसलिए सनातन संस्कृति में भाई-बहन के साथ साथ मौसी, चाची, मामा, बुआ आदि के बच्चों के बीच विवाह पर रोक है। ============== मध्यप्रदेश में विधानसभा का पांच दिवसीय सत्र 20 जुलाई से शुरू हो रहा है। इस सत्र में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक भी प्रस्तुत किया जाएगा। 19 जुलाई को मंत्रिमंडल की बैठक में यूसीसी विधेयक को मंजूरी दे दी गई। इस विधेयक में विवाह, तलाक, दत्तक ग्रहण जैसे मामलों में एक कानून लागू करने का प्रस्ताव है। विवाह के लिए लड़की की उम्र 18 और लड़के के लिए 21 वर्ष अनिवार्य की गई है। इसके साथ ही प्रतिबंधित रक्त संबंधों के बीच विवाह पर रोक लगाने का प्रावधान भी रखा गया है, लेकिन इस प्रावधान को लेकर मध्यप्रदेश में राजनीति भी शुरू हो गई है। प्रतिबंधित रक्त संबंधों के बीच विवाह को रोक लगाने के नियम को मुस्लिम विरोधी माना जा रहा है। कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों के नेता वोट की राजनीति के चलते कुछ भी कहे, लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञ भी मानते हैं कि ब्लड रिलेशन में विवाह होने से जनरेटिक यानी आनुवांशिक बीमारियां भी साथ आ जाती है। यानी विवाहित जोड़े के बच्चों को बीमारियां स्वत: ही मिल जाती है। आमतौर पर देखा गया है कि यदि किसी पिता को दम, शुगर बीपी आदि का रोग होता है तो उसके बच्चों को भी यह रोग हो ही जाता है। अब यदि ब्लड रिलेशन में ही विवाह होते हैं तो विवाहित जोड़े के बच्चों को भी स्वत: ही बीमारियों के गुण मिल जाते हैं। इस समस्या को देखते हुए ही मध्यप्रदेश सरकार ने समान नागरिक संहिता के विधेयक में प्रतिबंधित रक्त संबंधों के बीच विवाह को रोकने का प्रावधान किया है। इसलिए इसे मुस्लिम विरोध नहीं मानना चाहिए। देखा जाए तो यह नियम मुसलमानों के हित में ही है। हर धर्म के माता पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे स्वस्थ और निरोगी हो। कोई भी माता पिता यह नहीं चाहेगा कि उनके ब्लड की वजह से बच्चे संक्रमित हो। सनातन संस्कृति में रोक: भले ही चिकित्सा विज्ञान ने अब बताया हो कि ब्लड रिलेशन में विवाह हानिकारक है, लेकिन सनातन संस्कृति में तो पहले ही भाई बहन के साथ साथ मौसी, चाची, मामा बुआ आदि के बच्चों के बीच विवाह पर रोक है। चूंकि इन रिश्तों वाले लड़के-लड़की को भाई-बहन माना जाता है, इसलिए सनातन संस्कृति में भाई-बहन के बीच विवाह नहीं हो सकता। भले ही आधुनिक दौर में सनातन संस्कृति में भी अनेक परंपराओं को तोड़ा जा रहा है। लेकिन अधिकांश मामलों में ऐसे विवाह नहीं होते हैं। सनातन संस्कृति में तो एक ही गोत्र के बच्चों को भी भाई बहन माना गया है। इसलिए एक गोत्र में विवाह निषेध है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 20-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
- Previous story भारत के लोकतंत्र को खतरा होता तो अवकाश के दिन रविवार को सोनम वांगचुक की पत्नी की याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई नहीं होती। आखिर वांगचुक को सरकारी से प्राइवेट अस्पताल में क्यों शिफ्ट करवाना चाहती है पत्नी गीतांजलि? ============== विपक्ष खासकर कांग्रेस बार बार कहती है कि देश में लोकतंत्र खतरे में है। यदि विपक्ष का यह आरोप सही होता तो 19 जुलाई को रविवार के अवकाश के दिन भी सोनम वांगचुक की पत्नी डॉ. गीतांजलि की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट सुनवाई नहीं करता। डॉ. गीतांजलि चाहती थी कि उनके पति सोनम वांगचुक को दिल्ली के सरकारी सफदरजंग अस्पताल से प्राइवेट वेदांता में शिफ्ट कर दिया जाए। इसके लिए गीतांजलि ने रविवार को ही दिल्ली हाईकोर्ट को सूचित किया। डॉ. गीतांजलि के आग्रह को स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने अवकाश के दिन सुनवाई की। यह प्रदर्शित करता है कि देश में संवैधानिक संस्थाएं बिना किसी दबाव में काम कर रही है। देश के आम नागरिक को भी विशेष अधिकार मिले हुए हैं, जिसके अंतर्गत अवकाश वाले दिन भी हाईकोर्ट खुलता है। सवाल यह भी है कि आखिर डॉ. गीतांजलि अपने पति सोनम वांगचुक को सरकारी से प्राइवेट अस्पताल में क्यों शिफ्ट करना चाहती है? सब जानते हैं कि किसी भी प्राइवेट अस्पताल से ज्यादा सुविधाएं सरकारी अस्पताल में होती है। दिल्ली का सफदरजंग अस्पताल तो सरकार की शान है। यही वजह है कि कांग्रेस की शीर्ष नेता श्रीमती सोनिया गांधी भी जरुरत पडऩे पर इलाज के लिए सफदरजंग अस्पताल ही आती है। मालूम हो कि सोनम वांगचुक को 18 जुलाई को ही अनशन स्थल जंतर मंतर से उठाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चूंकि वांगचुक गत 20 दिनों से अनशन पर थे, इसलिए उनके स्वास्थ्य को देखते हुए पुलिस को कार्यवाही करनी पड़ी। सोनम वांगचुक स्वस्थ रहे, इसकी जिम्मेदारी अब सफदरजंग अस्पताल और सरकार की है। लेकिन यदि वांगचुक किसी प्राइवेट अस्पताल में भर्ती रहते हैं तो फिर उनके जीवन की जिम्मेदारी पत्नी गीतांजलि की होगी। वांगचुक के जीवन को अमूल्य मानते हुए ही हाईकोर्ट ने भी प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट करने की अनुमति नहीं दी है। यह बात अलग है कि कि डॉ. गीतांजलि हाईकोर्ट के फैसले से संतुष्ट नहीं है और अब सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर रही है। डॉ. गीतांजलि की न्यायिक सक्रियता भी दिखाती है कि उन्हें लोकंत्र के हर स्तर पर अपनी बात रखने का अधिकार है। एक और डॉ. गीतांजलि अपने पति को प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट करने की जिद पर अड़ी हुई है तो वहीं सरकार के विरुद्ध मोर्चा भी खोल रखा है। डॉ. गीतांजलि ने कहा कि 20 जुलाई को जंतर मंतर से संसद तक होने वाले मार्च का नेतृत्व वे स्वयं करेंगी। उल्लेखनीय है कि नीट परीक्षा में गड़बड़ी होने के विरोध में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर ही वांगचुक ने आमरण अनशन शुरू किया था। S.P.MITTAL BLOGGER ( 20-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
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