तो अब तक ब्रह्मा मंदिर के चढ़ावे में हो रहा था घोटाला: कलेक्टर ने गिनती करवाई तो एक माह में निकले 20 लाख। पहले कभी नहीं बताए पांच लाख से ज्यादा।

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एक फरवरी को पुष्कर स्थित विश्व विख्यात ब्रह्मा मंदिर के दानपात्रों से प्राप्त हुई राशि की गणना का काम पूरा हो गया। मंदिर परिसर में रखी दस दान पेटियों से कोई 12 लाख रुपए निकले हैं। दिवंगत महंत सोमपुरी के कक्ष में रखे लोहे के बक्से में से 7 लाख 13 हजार रुपए की राशि मिली है। यानि कुल मिलाकर कोई 20 लाख रुपए चढ़ावे के तौर पर प्राप्त हुए है। यह पहला अवसर है जब एक माह की अवधि में दान पेटियों से इतनी बड़ी रकम निकली है। गत 28 दिसम्बर को जब चढ़ावे की गणना की गई थी, तब पांच लाख रुपए ही बताए गए थे। इससे ज्यादा की राशि कभी भी नहीं बताई गई।
मालूम हो कि अब ब्रह्मा मंदिर के प्रबंधन का काम अजमेर के जिला कलेक्टर गौरव गोयल की अध्यक्षता में बनी कमेटी कर रही है। महंत सोमपुरी की सड़क दुर्घटना में मृत्यु के बाद सरकार ने कलेक्टर की अध्यक्षता में पांच सदस्यी कमेटी बनाई थी। एक फरवरी को जिस पर चढ़ावे की गणना हुर्ठ, उससे देवस्थान के अधिकारी भी संदेह के घेरे में आ गए हैं, क्योंकि सोमपुरी के निधन से पहले तक मंदिर ट्रस्ट और देवस्थान विभाग की देखरेख में ही चढ़ावे का संकलन और गणना होती रही, इसलिए अब मंदिर के ट्रस्टियों और विभाग के अधिकारियों को बताना होगा कि पूर्व के माहों में चढ़ावे के तौर पर इतनी कम राशि क्यों प्राप्त हुई? मंदिर के चढ़ावे में घोटाला हो रहा था? पुष्कर में वर्षभर धार्मिक आयोजन तथा अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त मेले का भी आयोजन होता है। मेले और विशेष अवसरों के दिनों में भी ट्रस्टियों व विभाग के अधिकारियों ने 5 लाखरुपए से ज्यादा नहीं बताए, जबकि जनवरी माह में तो पुष्कर में कोई बड़ा आयोजन नहीं हुआ। जिला कलेक्टर गौरव गोयल ने फिलहाल इस मुद्दे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। लेकिन कलेक्टर का कहना है कि आने वाले दिनों में इस बात का प्रयास किया जाएगा कि मंदिर में चढ़ावे के तौर पर आने वाले एक रुपए का संकलन भी पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ हो। उन्होंने कहा कि जो राशि प्राप्त होगी, उसे मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर ही खर्च किया जाएगा। हालांकि केन्द्र सरकार की प्रसाद योजना में ब्रह्मा मंदिर में भी करोड़ों रुपए के विकास कार्य होने हैं। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि ब्रह्मा मंदिर का महंत बनने के लिए अनेक साधु संतों और ट्रस्टियों की लार टपक रही है। अब तक कोई एक दर्जन दावेदार आ चुके हैं। दिवंगत महंत सोमपुरी द्वारा बनाए गए ट्रस्टियों ने तो ट्रस्टी को ही महंत घोषित कर दिया है।
हो सकती है कार्यवाही:
चूंकि इस समय मंदिर के प्रबंधन का काम कलेक्टर के हाथों में है। इसलिए पुराने ट्रस्टियों और देवस्थान विभाग के खिलाफ चढ़ावे को लेकर कार्यवाही हो सकती है। दिवंगत महंत सोमपुरी के कक्ष में सात लाख रुपए मिलने को भी गंभीर माना जा रहा है। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि दान पेटियों के अलावा भी ट्रस्टी और महंत चढ़ावे का संकलन कर रहे थे। यह काम देवस्थान विभाग की मिली भगत के बिना नहीं हो सकता। विभाग के सहायक आयुक्त बच्चानी लम्बे समय से अजमेर में जमे हुए हैं। माना जा रहा है कि बच्चानी को सत्तारुढ़ भाजपा नेताओं का संरक्षण प्राप्त है।
एस.पी.मित्तल) (01-02-17)
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