कांग्रेसियों को आश्चर्य हो रहा है जस्टिस महेश दौसा वाला के गाय प्रेम पर! क्या अब भाजपा के शासन में शिवभक्त बनकर गवर्नर बनना चाहते हैं?

#2638
कांग्रेसियों को आश्चर्य हो रहा है जस्टिस महेश दौसा वाला के गाय प्रेम पर! क्या अब भाजपा के शासन में शिवभक्त बनकर गवर्नर बनना चाहते हैं?
=====================
1 जून को राजस्थान के प्रमुख अखबारों में हाईकोर्ट के जस्टिस महेश चन्द शर्मा का वो फैसला और प्रवचन छपा है, जो उन्होंने 31 मई को अपने रिटायरमेंट से कुछ घंटे पहले दिया। कोई 7 वर्ष पहले के हिंगोनिया गौ शाला के एक मुकदमे में जस्टिस शर्मा ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने के सुझाव के साथ-साथ स्वयं को शिव भक्त भी घोषित किया। हालांकि महेश चंद शर्मा ने यह फैसला हाईकोर्ट के जज की कुर्सी पर बैठकर दिया। लेकिन यह किसी धार्मिक प्रवचन से कम नहीं था। जस्टिस शर्मा ने रिटायरमेंट के ऐन मौके पर जिस तरह स्वयं को एक संत और गौ भक्त की भूमिका में दिखाया, उससे राजस्थान के कांग्रेसियों को आश्चर्य हो रहा है। अशोक गहलोत जब पहली बार मुख्यमंत्री बने तो कुछ समय के लिए सुश्री गिरिजा व्यास प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष थी। तभी से महेश चंद शर्मा कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय हुए। गिरिजा व्यास के संरक्षण की वजह से ही महेश चंद शर्मा प्रदेश की राजनीति में सक्रिय रहे। तब महेश अपने नाम के साथ दौसा वाला शब्द लगाते थे क्योंकि वे दौसा के रहने वाले हैं। अशोक गहलोत जब 2009 में दुबारा से मुख्यमंत्री बने तो महेश दौसा वाला ने कांग्रेस के बैनर तले अनेक सेमीनार आयोजित करवाए। आज भले ही जस्टिस शर्मा स्वयं को गौ भक्त बता रहे हो, लेकिन कांग्रेस के सेमीनार का स्वरूप क्या होगा इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। सब जानते हैं कि महेश दौसा वाला ने एक योग्य वकील की हैसियत से हाईकोर्ट में जयपुर राजघराने के मुकदमें की पैरवी भी की। गहलोत के दूसरे कार्यकाल में ही महेश जी वकील कोटे से हाईकोर्ट के जज बन गए। जज बनते ही महेश जी ने अपने नाम के साथ दौसा वाला शब्द हटा दिया। आम तौर पर यह देखा गया है कि हाईकोर्ट से रिटायरमेंट के बाद अनेक जजों को किसी प्रांत का गवर्नर या किसी आयोग का अध्यक्ष बनाकर उपकृत किया जाता है। ऐसे पद तभी मिलते हैं जब जज की कुर्सी पर बैठकर गौ भक्त, शिव भक्त जैसे जतन किए जाए। अब देखना है कि महेश दौसा वाला से जस्टिस महेश चंद शर्मा बने महेश जी को आने वाले दिनों में क्या हासिल होता है। वैसे महेश जी का ज्ञान धर्म के चक्र में कुछ ज्यादा ही है। कथावाचक के क्षेत्र में भी उन्हें सफलता मिल सकती है। इसके साथ ही मोर के आंसुओं से मोरनी के गर्भवती होने का नया सिद्वांत प्रतिपादित कर महेश जी ने जीव विज्ञान के क्षेत्र में बड़े-बड़े वैज्ञानिकों को मात दे दी है। अलबत्ता महेश जी ने जस्टिस का काम पूरी निष्पक्षता और ईमानदारी के साथ किया है।
एस.पी.मित्तल) (01-06-17)
नोट: फोटो मेरी वेबसाइट www.spmittal.in
https://play.google.com/store/apps/details? id=com.spmittal
www.facebook.com/SPMittalblog
Blog:- spmittalblogspot.in
M-09829071511 (सिर्फ संवाद के लिए)
================================
M: 07976-58-5247, 09462-20-0121 (सिर्फ वाट्सअप के लिए)

Print Friendly, PDF & Email

You may also like...