आखिर वसुंधरा राजे पत्रकारों के सवालों से चिढ़ती क्यों हैं? 

आखिर वसुंधरा राजे पत्रकारों के सवालों से चिढ़ती क्यों हैं? 
घोषणा पत्र के मौके पर सामने आई नाराजगी।
युवाओं को मिलेगा बेरोजगारी भत्ता।
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यंू तो राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे प्रेस काॅन्फ्रेंस नहीं करती है, लेकिन 27 नवम्बर को विधानसभा चुनाव के मद्देनजर जब केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के साथ घोषणा पत्र जारी किया तो वसुंधरा राजे को भी पत्रकारों के सवालों का जवाब देना पड़ा। हालांकि टेढ़े सवालों का जवाब जेटली ने सकारात्मक अंदाज में दिया, लेकिन वसुंधरा राजे के जवाब से साफ प्रतीत हो रहा था कि उन्हें पत्रकारों के सवाल अच्छे नहीं लग रहे हैं। सीएम ने 26 नवम्बर को ही अपनी चुनावी सभाओं में कहा कि विपक्ष मुझ पर महारानी होने का आरोप लगाता है, जबकि लोकतंत्र में कोई राजा-महारानी नहीं होती। मैंने दोनों बार मुख्यमंत्री के तौर पर जनता का सेवक बनकर काम किया। लेकिन 27 नवम्बर को सीएम ने जिस तरह जवाब दिए, उससे विपक्ष के आरोपों में दम लगता है। एक पत्रकार के सवाल किया कि आपने गत चुनावों में उपभोक्ताओं को 24 घंटे बिजली देने का वायदा किया था? इस पर सीएम ने अपने अंदाज में कहा कि मैंने ऐसा कोई वायदा नहीं किया। मैंने सिंगल फेज की बिजली चैबीस घंटे देने का वायदा किया था। किसानों को 24 घंटे बिजली देने की बात नहीं कही। आज घरेलू उपभोक्ताओं को 22 घंटे बिजली मिल ही रही है। एक पत्रकार ने पूछा कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमितशाह ने कहा कि वसुंधरा राजे अपने विकास कार्यों का प्रचार नहीं कर सकी तथा कांग्रेस के एक नेता का कहना रहा कि वसुंधरा राजे कमर तक झुक कर अमितशाह को प्रणाम करती है। इन दोनों सवालों को पर्सनल बताते हुए सीएम ने जवाब देने से इंकार कर दिया। इन दोनों सवालों पर सीएम ने जो रुख प्रकट किया उससे साफ जाहिर है कि वह नाराज हैं। एक पत्रकार ने जानना चाहा कि घोषणा पत्र में कितने नए जिले बनाने का वायदा किया गया है। इस पर सीएम ने कहा कि जिला बनाने का चुनावी वायदा नहीं होता यह तो प्रशासनिक निर्णय होता है। यानि घोषणा पत्र में नए जिले बनाने का कोई वायदा नहीं किया गया है। वहीं एक ओर सीएम ने पत्रकारों के सवालों के जवाब में नाराजगी भरे लहजे में दिए तो वहीं जेटली ने राजनीतिक सूझबूझ दिखाते हुए तरीके से सवालों के जवाब भी हंसते हुए दिए। जेटली ने राहुल गांधी के कर्ज माफी वाले बयान पर कहा कि कांग्रेस को सत्ता में नहीं आना है, इसलिए दस दिन में कर्ज माफी का वायदा लिया जा रहा है। पूर्व सीएम अशोक गहलोत के द्वारा कांग्रेस में सीएम पद के लिए छह उम्मीदवारों के नाम गिनाने पर जेटली ने कहा कि यह जातिवाद को बढ़ावा देना है। जिन नेताओं के नाम गिनाए उन नेताओं की जातियों में भ्रम फैलाया जा रहा है। जेटली ने कहा कि राहुल गांधी ने पंजाब चुनाव के दौरान भी किसानों के कर्ज माफी की घोषणा की थी, लेकिन अब  अरमेन्द्र सिंह को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पेट्रोल डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने के सवाल पर जेटली ने कहा कि कई राज्य सहमत नहीं है। इसलिए केन्द्र अपना निर्णय थोप नहीं सकता। हालांकि केन्द्र सरकार सहमत है, जीएसटी कौंसिल में इस मुद्दे पर आम सहमति बनाने का प्रयास हो रहा है।
बेरोजगार भत्ताः
सीएम ने चुनावी घोषणा पत्र में अनेक वायदे किए जिनमें 21 वर्ष से अधिक उम्र वाले शिक्षित बेरोजगार युवाओं को निर्धारित नियमों के अंतर्गत पांच हजार रुपए भत्ता मिलेगा।
एस.पी.मित्तल) (27-11-18)
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