उत्तरप्रदेश में यदि सपा-कांग्रेस की सरकार बन जाए तो अयोध्या के राम मंदिर के हश्र का अंदाजा लगाया जा सकता है। कुछ बेईमानों की वजह से विधर्मियों को सनातन धर्म पर हमला करने का अवसर मिल गया है। राम मंदिर के चढावे की चोरी करने वालों के शरीर में कीड़े पड़ेगे। गोविन्द गिरी महाराज भी कोषाध्यक्ष का पद छोडऩे को इच्छुक । ===================== अयोध्या के राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी करने के मामलें में मंदिर प्रबन्धन और चढ़ावे की गणना करने से जुड़े 8 व्यक्तियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। इसके साथ ही श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य डाक्टर अनिल मिश्र ने ट्रस्ट से इस्तीफा भी दे दिया है। उत्तरप्रदेश के मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि चढ़ावा चोरी के कोई। सबूत हो तो जांच एजेंसियों के समक्ष रखे जाए। योगी ने कहा कि झूठे आरोप लगाकर लोगों को गुमराह न किया जाए। लेकिन वही कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेता लगातार हमलावर है। यह सही है कि कुछ बेईमानों की वजह से विधर्मियों को सनातन धर्म पर हमला करने का अवसर मिल गया है। बेईमानों ने जो अवसर दिया है उसमें विधर्मी भगवान राम और सनातन धर्म की छवि खराब में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। ऐसे-ऐसे शब्दों का उपयोग किया जा रहा है जो बर्दाश्त नहीं किए जा सकते। सवाल उठता है कि जिन शब्दों का इस्तेमाल सनातन धर्म के लिए किया जा रहा हैए उन शब्दों का उपयोग क्या किसी दूसरे धर्म के बारें में हो सकता हैघ् सनातन धर्म की विशालता ही है कि विधर्मियों को बर्दाश्त किया जा रहा है। यदि ऐसे शब्द किसी धर्म के लिए बोले जाते तो अब तक सिर तन से जुदा हो जाता। सब जानते हैं कि मौजूदा समय में उत्तरप्रदेश में योगी आदित्यनाथ और केन्द्र में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार चल रही है। योगी और मोदी दोनों ही सनातन धर्म के प्रबल अनुयायी और मजबूत संरक्षक है। इन दोनों ने ही उन बाधाओं को हराया जो अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण में सामने आ रही थी। सनातनियों ने इस मंदिर के निर्माण के लिए 500 वर्षों तक संघर्ष किया और लाखों सनातनियों ने अपना बलिदान दिया। अब जब पूरी मजबूती के साथ अयोध्या में राम के जन्मस्थल पर भव्य मंदिर बना हुआ हैए तब विधर्मियों की नाराजगी जगजाहिर है। जो श्विधर्मी अभी तक भी मंदिर में रामलला के दर्शन करने के लिए नहीं गए हैए वो भी सनातन धर्म की छवि खराब करने का काम कर रहे है। यदि मौजूदा समय में उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस सरकार होती तो अयोध्या के राम मंदिर के हश्र का अंदाजा लगाया जा सकता है। सपा और कांग्रेस के नेता तो मंदिर पर ताला लगवा देते । असल में कांग्रेस और सपा के नेता तो मंदिर निर्माण के पक्ष में थे ही नहीं। सपा प्रमुख अखिलेश यादव के पिता मुलायम सिंह यादव ने मुख्यमंत्री रहते हुए रामभक्तों पर गोलियां चलवायी थी। कांग्रेस की विचारधारा वाले वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट में भगवान राम के अस्तित्व को ही नकार दिया। आज ऐसे लोग ही रामभक्त बनकर .चढ़ावा चोरी की आड़ में सनातन धर्म पर हमला कर रहे है। यह सही है कि जिन लोगों ने राम के चढ़ावे की चोरी की हैए उनके शरीर में कीड़े पड़ेगें । सनातन धर्म में तो मंदिरों में दान की परम्परा है। कोई भी सच्चा सनातनी मंदिर के चढ़ावे की चोरी नहीं कर सकता। इस्तीफे के इच्छुक: जबसे राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी की खबरें आयी हैए तबसे राष्ट्रीय संत और श्रीराम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविन्द गिरि महाराज बहुत व्यथित और दुखी है। मंदिर निर्माण में गोविन्द गिरि महाराज की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होनें देश दुनिया से मंदिर के लिए धन संग्रह किया। जो लोग गोविन्द गिरि महाराज को जानते है उन्हें पता है कि वे बेहद ही संवेदनशील इंसान है। वे सनातन धर्म के ज्ञाता तो है हीए साथ ही ईमानदार छवि वाले धर्मगुरु है। चूंकि वे कोषाध्यक्ष के पद पर हैं इसलिए नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए कोषाध्यक्ष के पद से इस्तीफा देने के इच्छुक है। लेकिन जांच एजेंसियां भी मानती है कि मंदिर के चढ़ाने की गणना और प्रबंधन में गोविन्द गिरि महाराज की भूमिका नहीं रही। उनकी भूमिका तो मंदिर निर्माण के समय धन संग्रह की थी। वैसे भी गोविन्द गिरि महाराज का ज्यादातर समय देश भर में कथावाचन में व्यतीत होता है। उन्हीं की देखरेख में पुष्कर सहित देश के कई स्थानों पर संस्कृत विद्यालय जल रहे है। इन विद्यालयों में बच्चों को वेद की भी जानकारी दी जाती है। यानि सनातन धर्म के प्रर्वतकों को तैयार करने में गोविन्द गिरि महाराज की महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी को भी गोविन्द गिरि महाराज समय.समय धार्मिक परंपराओं की जानकारी देते हैं।

You may also like...