ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामनेई के जनाजे और सुपुर्दे-ए-खाक की रस्म को अभूतपूर्व बनाने की योजना। शिया समुदाय में जनाजा अंतिम सफर नहीं, बल्कि इबादत माना जाता है। पहले सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खुमैनी के जनाजे में भगदड़ मचने से 10 ईरानियों की मौत हो गई थी। जनाजे में शामिल होने ईरान पहुंची जम्मू कश्मीर की पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती ने तेहरान में रील बनाई। ================ सब जानते हैं कि गत 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर जो हमला किया उसमें ईरान के सर्वोच्च धार्मिक लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई और उनके परिवार के 10 सदस्यों की मौत हो गई। तभी से खामेनेई के शव को सुरक्षित रखा गया और अब खामनेई के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया ईरान में बड़े पैमाने पर शुरू हो गई है। हालांकि खामनेई को 9 जुलाई को उनके पैतृक शहर मशहद में सुपुर्दे-ए-खाक किया जाएगा, लेकिन इससे पहले 4 जुलाई से ही खामेनेई को श्रद्धांजलि देने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके अंतर्गत 6 जुलाई को ख़ामेनई का जनाजा तेहरान से निकलेगा और 7 जुलाई को शिया समुदाय के धार्मिक स्थल कौम पहुंचेगा। इसके बाद नजफ शहर और कर्बला होते हुए जनाजे का जुलूस मशहद पहुंचेगा। जिस भी शहर से खामेनेई का जनाजा निकल रहा है, वहां लाखों शिया मुसलमानों की भीड़ है। हर ईरान एक बार अपने नेता के दर्शन करना चाहता है, इसके लिए होड़ मची हुई है। असल में शिया समुदाय में जनाजा अंतिम सफर नहीं बल्कि इबादत है। चूंकि जनाजा भी धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा हुआ है, इसलिए बड़ी संख्या में ईरानी नागरिक भाग ले रहे हैं। मौजूदा समय में दिवंगत खामनेई के पुत्र मुस्तबा खामनेई ईरान के सुप्रीम लीडर है, इसलिए दुनिया के 100 से भी ज्यादा प्रतिनिधि जनाजे की रस्म में भाग लेने पहुंचे हैं। भले ही अभी भी अमेरिका और इजरायल की नजरे ईरान पर टेड़ी हो, लेकिन जनाजे और सुपुर्दे-ए-खाक को ईरान में अभूतपूर्व मनाने की योजना है। माना जा रहा है कि जनाजे के जुलूस और सुपुर्दे-ए-खाक की रस्म तक दो करोड़ लोग शामिल होंगे। यही वजह है कि ईरान के सुरक्षा बल भी सतर्कता बरत रहे हैं। कड़ी सुरक्षा के बाद भी ईरान के अधिकारियों को आशंका है कि जनाजे और सुपुर्दे-ए-खा के अवसरों पर अप्रिय घटना हो सकती है। इसमें अनेक लोग मारे भी जा सकते हैं। असल में 1998 में जब ईरान के पहले सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खुमैनी के जनाजे के समय भी भगदड़ मच गई थी। लोग खुमैनी के दर्शन के लिए इतने उतावले थे कि कफन बॉक्स ही क्षतिग्रस्त हो गया। पुलिस को हालातों को नियंत्रण में करने के लिए गोली चलानी पड़ी, जिसमें 10 ईरानी मारे गए। बाद में खुमैनी के शव को हेलीकॉप्टर से ले जाना पड़ा। खुमैनी के समय के हालातों को देखते हुए ही खामनेई के अंतिम संस्कार को लेकर विशेष सुरक्षा बरती जा रही है। ईरान जब युद्ध की वजह से लहूलुहान है, तब अपने नेता को श्रद्धांजलि देने के लिए शिया समुदाय के दो करोड़ लोगों का जुटना यह बताता है कि दिवंगत खामनेई कितने लोकप्रिय थे। असल में खामनेई के जनाजे को अभूतपूर्व बनाने के पीछे अमेरिका और इजरायल को यह दिखाना है कि भले ही खामनेई को मार डाला हो, लेकिन ईरान में उनका विचार जिंदा है। ईरान के नेताओं ने कहा कि भी है कि खामनेई की मौत का बदला तो अमेरिका और इजरायल से लिया ही जाएगा। महबूबा ने रील बनाई: खामनेई के अंतिम संस्कार की रस्म में भाग लेने के लिए भारत की ओर से जो प्रतिनिधिमंडल ईरान पहुंचा है, उसमें जम्मू कश्मीर की पूर्व सीएम और पीडीपी की नेता महबूबा मुफ्ती भी शामिल हैं। तेहरान पहुंचने के बाद महबूबा उस स्थान पर गई जहां 28 फरवरी को खामनेई और उनके परिवार के सदस्यों की मौत हुई थी। महबूबा ने इस परिसर में घूमते हुए अपना एक वीडियो (रील) भी बनाया। महबूबा का यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

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