खरगे के जन्मदिन पर बधाई देने के बहाने धोखे से राहुल और प्रियंका गांधी पीएम हाउस के बाहर धरने पर बैठ गए। प्रतिपक्ष के नेता के संवैधानिक पद पर बैठे राहुल गांधी के यह आचरण उचित है? कॉकरोच पार्टी के आंदोलन में अराजक तत्व शामिल। ================= 21 जुलाई को दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास के बाहर लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी और उनकी बहन सांसद प्रियंका गांधी ने जिस तरीके से धरना दिया उसे धोखा ही कहा जाएगा। प्रधानमंत्री का सरकारी आवास अति सुरक्षा घेरे में रहता है, इसलिए कोई सामान्य नागरिक पीएम हाउस के आसपास भी नहीं पहुंच सकता। पीएम हाउस से पांच सौ मीटर की दूरी पर ही राज्यसभा में प्रतिपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खडग़े का सरकारी आवास भी है। 21 जुलाई को खरगे का 84वां जन्मदिन रहा। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी जन्मदिन की बधाई देने के लिए खरगे के सरकारी आवास पर पहुंचे। यह एक सामान्य शिष्टाचार था, इसलिए किसी ने भी यह उम्मीद नहीं जताई कि राहुल गांधी अपनी बहन के साथ पीएम हाउस के बाहर धरने पर बैठे जाएंगे। लेकिन राहुल गांधी ने धोखा देकर पीएम हाउस के बाहर धरना दिया। यदि राहुल गांधी घोषणा कर पीएम हाउस की ओर जाते तो उन्हें सुरक्षा बल कभी भी धरने पर नहीं बैठने देते, लेकिन राहुल गांधी ने खरगे के जन्मदिन की आड़ में जिस तरह धोखाधड़ी की वह राजनीति में उचित नहीं है। प्रतिपक्ष के नेता के नाते राहुल गांधी संवैधानिक पद पर है। क्या किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को सुरक्षा बलों के साथ धोखाधड़ी करनी चाहिए? राहुल गांधी यह सोचते हैं कि उन्हें पीएम हाउस के बाहर कुछ समय के लिए धरना देकर बहादुरी का काम किया है? लेकिन यदि राहुल गांधी सामान्य नागरिक होते और फिर पीएम हाउस के बाहर पहुंच जाते तो उन्हें पता चलता कि संविधान का कानून कितना संख्त है। राहुल गांधी और उनकी बहन प्रियंका ने जिस तरह धरना दिया उसे संविधान के साथ धोखा ही कहा जाएगा। जहां तक राहुल गांधी को पीएम हाउस के बाहर जबरन उठाने और फिर थाने ले जाने का सवाल है तो कानून ने अपना काम किया है। अच्छा होता कि राहुल गांधी कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन में पहले जंतर मंतर पहुंचे और फिर पीएम हाउस की ओर जाने की घोषणा करते। जब उन्हें पता चल जाता कि देश का कानून कितना सख्त है। संसद में चर्चा क्यों नहीं: केंद्र सरकार बार बार कह रही है कि संसद के मानसून सत्र में नीट पेपर लीक पर चर्चा की जाए, लेकिन कांग्रेस और विपक्षी दल संसद में चर्चा को तैयार नहीं है। मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हो चुका है, लेकिन विपक्ष के सांसद हंगामा कर संसद को चलने नहीं दे रहे। सवाल उठता है कि आखिर कांग्रेस और विपक्षी दल नीट पेपर लीक पर संसद में चर्चा क्यों नहीं करते? जहां तक कॉकरोच पाटी्र के आंदोलन का सवाल है तो इस आंदोलन में अराजक तत्व शामिल हो गए है जो हिंसा में विश्वास रखते हैं। 20 जुलाई के जो वीडियो सामने आए हैं, उन से पता चलता है कि अराजकतत्वों ने सुनियोजित तरीके से हिंसा की। अब छात्रों को आंदोलन तो पीछे छूट गया है और अराजक तत्वों ने आंदोलन पर अपना कब्जा कर लिया है । S.P.MITTAL BLOGGER ( 22-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

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