- Next story ममता बनर्जी की टीएमसी वाले सांसद, यूसुफ पठान, खलीलुर्रहमान और अबु ताहिर ने पीएम मोदी का आतिथ्य स्वीकारा। सवाल-फिर पीएम मोदी मुस्लिम विरोधी कैसे। ================ 7 अगस्त को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना के उन 26 सांसदों को सुबह के नाश्ते पर आमंत्रित किया, जो हाल ही में केंद्र में सत्तारूढ़ एनडीए में शामिल हुए हैं। इन सांसदों में टीएमसी के चुनाव चिह्न पर लोकसभा का सांसद बनने वाले यूसुफ पठान, खलीलुर्रहमान और अबु ताहिर भी शामिल रहे। इन तीनों मुस्लिम सांसदों ने पीएम मोदी के पास खड़े होकर गर्व से फोटो भी खिंचवाया। तीनों ने पीएम मोदी की कार्यशैली की प्रशंसा करते हुए कहा कि मोदी की नीतियों से देश का विकास हो रहा है। मोदी के 12 वर्ष के कार्यकाल में मुसलमान स्वयं को ज्यादा सुरक्षित महसूस करता है। यहां यह खासतौर से उल्लेखनीय है कि तीनों मुस्लिम सांसदों के संसदीय क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या ज्यादा है। भारतीय क्रिकेट टीम के सदस्य रहे यूसुफ पठान ने तो अपने गृह प्रदेश गुजरात को छोड़कर पश्चिम बंगाल की बहरामपुर सीट से चुनाव लड़ा था। पठान ने वर्ष 2024 में इस सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार अधीर रंजन चौधरी को इसलिए हराया कि यहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या ज्यादा थी। आमतौर पर यह आरोप लगता है कि पीएम मोदी मुस्लिम विरोधी है। ऐसा आरोप ममता बनर्जी के साथ साथ कांग्रेस के राहुल गांधी, सपा के अखिलेश यादव आदि भी लगाते हैं, लेकिन सवाल उठता है कि जब मुस्लिम वोटों के दम पर चुनाव जीते मुस्लिम सांसद ही पीएम मोदी की प्रशंसा कर रहे हैं, तब मोदी मुस्लिम विरोधी कैसे हो सकते हैं? तीनों मुस्लिम सांसदों ने पीएम मोदी के नेतृत्व में आस्था प्रकट की जो यह दर्शाता है कि पीएम मोदी सबका साथ सबका विकास और सबका विश्वास के तहत मुसलमानों का भी पूरा ख्याल रखते हैं। यदि पीएम मोदी मुस्लिम विरोधी होते तो यूसुफ पठान, खलीलुर्रहमान और अबु ताहिर भी भी मोदी के नेतृत्व को स्वीकार नहीं करते। ममता बनर्जी, राहुल गांधी, अखिलेश यादव जैसे नेता मोदी के बारे में कुछ भी कहे, लेकिन मुस्लिम सांसदों ने यह प्रदर्शित किया है कि पीएम मोदी मुस्लिम विरोधी नहीं है। 7 अगस्त की मुलाकात में पीएम मोदी ने टीएमसी और शिवसेना से आए सांसदों को भरोसा दिलाया कि उनके राजनीतिक हितों की रक्षा की जाएगी। यानी वर्ष 2029 में होने वाले लोकसभा के चुनाव में यह सभी सांसद भाजपा के उम्मीदवार होंगे। S.P.MITTAL BLOGGER ( 08-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
- Previous story अजमेर में गहलोत और पायलट गुट फिर आमने-सामने। नगर निगम चुनाव से पहले कांग्रेस की फूट चौराहे पर। पायलट समर्थकों ने धर्मेन्द्र राठौड़ के दखल पर ऐतराज जताया। ================ अगले महीने जब अजमेर नगर निगम के चुनाव होने हैं, तब कांग्रेस की फूट चौराहे पर है। चुनाव से पूर्व, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट के समर्थक आमने सामने हो गए है। पायलट समर्थक माने जाने वाले पूर्व शहर अध्यक्ष विजय जैन और गत दो बार दक्षिण क्षेत्र से कांग्रेस के प्रत्याशी रहे हेमंत भाटी के नेतृत्व में पायलट समर्थकों ने 7 अगस्त को एक बैठक की। इस बैठक में बड़ी संख्या में कांग्रेस के कार्यकर्ता शामिल हुए। विजय जैन और हेमंत भाटी ने आरोप लगाया कि आरटीडीसी के पूर्व अध्यक्ष धर्मेन्द्र राठौड़ के दखल से अजमेर शहर में कांग्रेस को नुकसान हो रहा है। मौजूदा शहर अध्यक्ष डॉ. राजकुमार जयपाल भी राठौड़ के दबाव में काम कर रहे हैं। इससे पुराने और निष्ठावान कांग्रेसियों की की उपेक्षा हो रही है। मौजूदा समय में अजमेर शहर में भाजपा के खिलाफ जबरदस्त माहोल है। इस बार नगर निगम का मेयर कांग्रेस का बन सकता है, लेकिन धर्मेन्द्र राठौड़ की विभाजनकारी नीतियों के कारण कांग्रेस का कार्यकर्ता निराश है। जैन और भाटी ने कहा कि आखिर धर्मेन्द्र राठौड़ अजमेर की राजनीति में क्यों सक्रिय हैै? राठौड़ ने तो पूर्व में बानसूर (जयपुर ग्रामीण) से चुनाव लड़ा। उनकी राजनीतिक गतिविधियां बानसूर में ही रही है। लेकिन राठौड़ अब अजमेर में रुचि दिखा रहे हैं, जिससे कांग्रेस का कार्यकर्ता स्वीकार नहीं करेगा। जैन और भाट ने कहा कि हमारा प्रयास कांग्रेस को मजबूत करने का है। जबकि धर्मेन्द्र राठौड़ अजमेर में कांग्रेस को कमजोर कर रहे हैं। जैन और भाटी के आरोपों के जवाब में राठौड़ का कहना रहा है कि वे गत 8 वर्षों से अजमेर की राजनीति में लगातार सक्रिय हैं। उनका पैतृक गांव अजमेर के निकट नांद है। उन्होंने गत 8 वर्षों से अजमेर में कांग्रेस संगठन को मजबूती दी है। आज जो लोग कांग्रेस को मजबूत करने का दावा कर रहे हैं, उन्हीं के कारण अजमेर शहर की दोनों विधानसभा सीटों पर गत पांच बार से लगातार कांग्रेस उम्मीदवारों की हार हो रही है। कांग्रेस को नगर निगम में भी अपना बोर्ड बनाने का अवसर नहीं मिल रहा है। राठौड़ ने कहा कि शहर अध्यक्ष जयपाल के नेतृत्व में कांग्रेस एकजुट है। मैंने तो प्रत्येक कार्यकर्ता का सम्मान किया है। यहां यह उल्लेखनीय है कि धर्मेन्द्र राठौड़ को पूर्व सीएम गहलोत का कट्टर समर्थक माना जाता है। सितंबर 2022 में अब अशोक गहलोत के समर्थन में कांग्रेस के विधायकों की समानांतर बैठक हुई, तब जिन 3 कांग्रेसी नेताओं को हाईकमान ने अनुशासनहीनता का नोटिस दिया, उसमें धर्मेन्द्र राठौड़ भी शामिल थे। आज भी राठौड़, गहलोत के साथ खड़े हैं। राठौड़ का कहना है कि मैं अशोक गहलोत का पक्का समर्थक हंू। S.P.MITTAL BLOGGER ( 08-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
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