- Next story गहलोत और पायलट गुट की लड़ाई अब डोटासरा के पास पहुंची। महेंद्र सिंह रलावता ने राजनीति का पाला बदला। अजमेर में कांग्रेस की फूट चौराहे पर। ================ अजमेर शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डॉ. राजकुमार जयपाल ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को एक पत्र लिखकर पूर्व शहर अध्यक्ष विजय जैन और गत विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी रहे हेमंत भाटी पर अनुशासनहीनता का आरोप लगाया है। डॉ. जयपाल ने पत्र में कहा कि जैन और भाटी की गतिविधियों से कांग्रेस को नुकसान हो रहा है। जिसका असर नगर निगम के चुनाव पर पड़ेगा। इस पत्र पर पूर्व सीएम अशोक गहलोत के समर्थक पूर्व विधायक डॉ. श्रीगोपाल बाहेती, अजमेर डेयरी के अध्यक्ष रामचंद्र चौधरी, नगर निगम में प्रतिपक्ष की पूर्व नेता द्रौपदी कोली के भी हस्ताक्षर हैं। कांग्रेस की राजनीति में पूर्व अध्यक्ष विजय जैन और हेमंत भाटी को कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट का समर्थक माना जाता है। अजमेर में लंबे समय से गहलोत और पायलट के समर्थक आमने सामने है। डॉ. जयपाल द्वारा पत्र लिखे जाने से अब गहलोत और पायलट गुट की लड़ाई प्रदेशाध्यक्ष डोटासरा के पास पहुंच गई है। डॉ. जयपाल का कहना है कि जैन ओर भाटी लगातार पार्टी का अनुशासन तोड़ रहे हैं, इसलिए प्रदेश अध्यक्ष को पत्र लिखा गया है। वहीं जैन और भाटी का आरोप है कि डॉ. जयपाल आरटीडीसी के पूर्व अध्यक्ष धर्मेन्द्र राठौड़ के इशोर पर काम कर रहे है। राठौड़ की भूमिका शुरू से ही विभाजनकारी रही है।यही वजह है कि अजमेर में कांग्रेस के निष्ठावान कार्यकर्ताओं की उपेक्षा हो रही है। उन्होंने हाल ही में कार्यकर्ताओं की जो बैठक बुलाई उसमें कांग्रेस के निष्ठावान और जिम्मेदार कार्यकर्ता मौजूद थे। कार्यकर्ताओं की इस बैठक को अनुशासनहीनता नहीं माना जा सकता क्योंकि इस बैठक में नगर निगम के चुनाव में कांग्रेस को मजबूत करने की रणनीति बनी। अनुशानहीनता तो जयपाल और धर्मेन्द्र राठौड़ कर रहे हैं। निष्ठावान कार्यकर्ताओं की लगातार उपेक्षा की जा रही है। जैन ने कहा कि हम भी प्रदेश अध्यक्ष डोटासरा और राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े के समक्ष अपना पक्ष रखेंगे। जैन और भाटी ने अजमेर कांग्रेस में असली विवाद की जड़ धर्मेन्द्र राठौड़ को बताया है। मालूम हो कि धर्मेन्द्र राठौड़ पूर्व सीएम अशोक गहलोत के कट्टर समर्थक हैं। रलावता ने पाला बदला: अजमेर कांग्रेस के ताजा विवाद में वरिष्ठ नेता महेंद्र सिंह रलावता की बदली हुई भूमिका सामने आई है। रलावता अभी तक सचिन पायलट के समर्थक रहे। पायलट की वजह से ही रलावता को दो बार अजमेर उत्तर क्षेत्र से कांग्रेस के उम्मीदवार बने। यह बात अलग है कि रलावता को दोनों बार हार का सामना करना पड़ा। पायलट जब भी अजमेर आए तब स्वागत करने वालों में रलावता सबसे आगे रहे लेकिन अब ऐसा प्रतीत होता है कि रलावता ने पायलट का साथ छोड़ दिया है। शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डॉ. जयपाल के पायलट समर्थक विजय जैन और हेमंत भाटी के खिलाफ जो पत्र लिखा है उस पर रलावता ने भी हस्ताक्षर किए है। इससे जाहिर होता है कि रलावता ने अब गहलोत गुट का दामन थाम लिया है। मालूम हो कि डॉ. जयपाल ने अपनी कार्यकारिणी में रलावता के छोटे भाई पूर्व पार्षद गजेंद्र सिंह रलावता को शामिल किया है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 10-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
- Previous story तो क्या जेलर सद्दाम हुसैन की वजह से अजमेर सेंट्रल जेल में बंद मुस्लिम कैदियों की मौज हो रही है? जेल में बंद मुस्लिम कैदियों का रिश्तेदारों से संवाद वाला वीडियो उजागर। यह जेल की सुरक्षा के लिए खतरनाक स्थिति है। ================ भास्कर अखबार ने यह दावा किया कि उसके पास अजमेर सेंट्रल जेल का एक ऐसा एक्सक्लूसिव वीडियो है जो यह दर्शाता है कि जेल में बंद मुस्लिम कैदी अपने रिश्तेदारों से वीडियो कॉलिंग पर संवाद कर रहे हैं। गंभीर और चिंता का विषय यह है कि इस मामले में जेलर सद्दाम हुसैन की भूमिका है। जेलर सद्दाम हुसैन मुस्लिम कैदियों को अपने कक्ष में बुलाता है और फिर अपने मोबाइल से उनके रिश्तेदारों से संवाद करवाता है। अब एक ऐसा वीडियो उजागर हुआ है, जिसमें जेल में बंद ताहिर चिश्ती, उसका बेटा तौफीक चिश्ती और भांजा फखर चिश्ती जेलर सद्दाम हुसैन के कक्ष में बैठकर जेल से बाहर अपने रिश्तेदार फारुख चिश्ती से संवाद कर रहे हैं। फारुख चिश्ती ने इस वीडियो कॉलिंग के लिए जेलर सद्दाम का शुक्रिया अदा भी किया। आरोप है कि सद्दाम हुसैन जेलर के पद का फायदा उठाकर मुस्लिम कैदियों की बात मोबाइल पर उनके रिश्तेदारों से करवाता रहता है। ताजा मामला इसलिए भी गंभीर है कि तौफीक चिश्ती के संबंध बब्बर खालसा जैसे आतंकी संगठनों से भी रहे हैं। तौफिक चिश्ती पर आतंकी संगठनों को हथियार और ड्रग्स सप्लाई करने के आरोप है। ऐसे आरोपों में ही तौफिक चिश्ती पंजाब के जेलों में बंद रहा। तौफीक चिश्ती अपने पिता ताहिर चिश्ती के साथ अजमेर जेल में इसलिए बंद है कि उस पर अजमेर स्थित ख्वाजा साहब की दरगाह के खादिम हाजी बिलाल हुसैन चिश्ती पर जानलेवा हमला करने का आरोप है। तीनों आरोपी सात वर्ष की सजा अजमेर जेल में काट रहे हैं। सेंट्रल जेल से अपने रिश्तेदारों से वीडियो कॉल पर बात करने की इस घटना से जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठते हैं। सरकार को इस पूरे मामले की गंभीरता के साथ जांच पड़ताल करवानी चाहिए । अजमेर में सेंट्रल जेल के साथ साथ हाई सिक्योरिटी जेल भी है। इन दोनों जेलों में कैदियों के पास मोबाइल मिलना आम बात है। लेकिन ताजा मामले में तो कैदी जेलर का मोबाइल ही इस्तेमाल कर रहे हैं। S.P.MITTAL BLOGGER ( 08-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
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