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- Next story गायों के चारे के लिए गौशालाओं में ही दान करें, ताकि औरंगजेब की विचारधारा के लोग लाभ न उठा सके। ममता शासन खत्म होने के बाद ही पश्चिम बंगाल में बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री की कथा हो सकी। धर्म बदलने वालों की घर वापसी होगी। ================= इतिहास गवाह है कि आक्रमणकारी मुगल औरंगजेब ने भारत में सनातन धर्म को नष्ट करने के लिए अधिकांश मंदिरों को तोड़ा। न केवल मंदिर तोड़े गए बल्कि मंदिर परिसर में ही अपने धर्म की इमारत खड़ी की गई। इन इमारतों के निर्माण में मंदिर के भवनों के मलबे को ही काम में लिया गया। देशवासियों ने 4 सितंबर को ही भगवान कृष्ण का जन्मदिन मनाया, लेकिन मथुरा वृंदावन में भगवान कृष्ण की जन्मस्थली का विवाद आज भी बना हुआ है। जिस औरंगजेब ने कृष्ण के मंदिर को तोड़ा, उसी औरंगजेब के अनुयायी आज भी सक्रिय है। सब जानते हैं कि भगवान कृष्ण को गायों से असीम प्रेम रहा। बचपन में कृष्ण गायों को चराने का ही काम करते थे, इसलिए उन्हें ग्वाला यानी गोपालक भी कहा गया। भगवान कृष्ण ने गायों के संरक्षण की जो प्रेरणा दी उसका पालन सनातन धर्म के अनुयायी आज भी कर रहे है। करोड़ों सनातनी प्रतिदिन गायों को हरा चारा खिलाते हैं। यही वजह है कि हरे चारे के कारोबार में अब औरंगजेब के अनुयायी भी शामिल हो गए है। सवाल उठता है कि जिस औरंगजेब ने मथुरा में भगवान कृष्ण के मंदिर को तोड़ा क्या उसके अनुयायियों के मन में गौमाता के प्रति कोई आस्था होगी? अच्छा हो कि सभी सनातनी गायों के लिए चारे का दान निकटवर्ती गौशाला में ही करे। गौशालाओं में बीमार गाय भी रहती है। चारे के दान से बीमार गायों का इलाज भी करवाया जा सकता है। यानी दानदाता को डबल पुण्य प्राप्त होगा। गायों के लिए गौशालाओं में ही दान किया जाए इस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। कोलकाता में धीरेंद्र शास्त्री की कथा: 4 सितंबर को बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री की तीन दिवसीय हनुमंत कथा पश्चिम बंगाल के कोलकाता में शुरू हुई। कथा के शुभारंभ पर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी मौजूद रहे। कथा के शुभारंभ में धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, वे पिछले कुछ वर्षों से बंगाल में कथा करने को उत्सुक थे, लेकिन ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री रहते हुए बंगाल में उनकी हनुमंत कथा के आयोजन को स्वीकृति नहीं दी। लेकिन अब जब बंगाल से ममता का शासन खत्म हो गया है, तब मेरी कथा हो सकी है। धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि ममता बनर्जी के शासन में सनातन धर्म की स्थिति कैसी थी? और अब जब शुभेंदु अधिकारी भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री बन गए है, तब सनातन धर्म की स्थिति कैसी है। मेरी हनुमंत कथा होने से पता चलता है कि अब पश्चिम बंगाल में सनातन धर्म की लहर चल रही है। इस कथा में सीएम शुभेंदु ने कहा आज सबसे ज्यादा खुशी मुझे हो रही है। ममता बनर्जी के शासन में जब धीरेंद्र शास्त्री की कथा की अनुमति नहीं दी गई, तब मैंने संकल्प लिया था कि एक दिन कोलकाता में धीरेंद्र शास्त्री जी की कथा करवाऊंगा। आज मेरा संकल्प पूरा हो चुका है। धीरेंद्र शास्त्री अब पश्चिम बंगाल में किसी भी स्थान पर हनुमंत कथा कर सकते हैं। घर वापसी: हनुमंत कथा में धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, ममता बनर्जी के शासन में पश्चिम बंगाल में बड़ी संख्या में धर्म परिवर्तन हुआ। मैं अब उम्मीद करता हंू कि शुभेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री रहते हुए घर वापसी भी होगी। बंगाल में अब बाबर का नहीं रघुवीर का नारा चलेगा। बंगाल अब भगवामय होकर सनातन धर्म का परचम लहराएगा। S.P.MITTAL BLOGGER ( 05-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
- Previous story तो क्या ब्यावर में भाजपा ने अपराधियों और सटोरियों को उम्मीदवार बनाया? पूर्व जिलाध्यक्ष भूतड़ा का तगड़ा कटाक्ष। अजमेर में वार्ड 72 से तारा पारीक की निर्दलीय उम्मीदवारी से भाजपा संगठन की पोल खुली। ================= अजमेर संभाग के ब्यावर जिले की नगर परिषद के चुनाव में क्या अपराधियों और सटोरियों को भाजपा का उम्मीदवार बनाया गया है? राजनीति में यह सवाल भाजपा के पूर्व विधायक और दो बार लंबे समय तक देहात जिलाध्यक्ष रहे देवीशंकर भूतड़ा के कटाक्ष के बाद उठा है। भूतड़ा ने टिकट बंटवारे के बाद 3 सितंबर को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डाली। इस पोस्ट में कहा गया कि जिन कार्यकर्ताओं ने बूथ से लेकर मंडल स्तर तक संगठन को मजबूत किया, उनकी उपेक्षा कर आपराधिक पृष्ठभूमि और सटोरियों को उम्मीदवार बनाया गया। इस पोस्ट पर जब भूतड़ा से सवाल किया गया तो उनका कहना रहा कि मैंने यह पोस्ट भाजपा के कार्यकर्ताओं की भावनाओं के अनुरूप डाली है। आज ब्यावर का कार्यकर्ता स्वयं को ठगा सा महसूस कर रहा है। जिन कार्यकर्ताओं ने बूथ और मंडल स्तर पर संगठन को मजबूत किया उनकी नगर परिषद के चुनाव में पूरी उपेक्षा की गई है। भूतड़ा ने कहा कि उनका भाजपा से कोई विरोध नहीं है। वह हमेशा भाजपा के साथ रहेंगे, लेकिन वे कार्यकर्ताओं के सम्मान के लिए आवाज उठाते रहेंगे। अच्छा होता कि जिन कार्यकर्ताओं ने बूथ और मंडल स्तर पर संगठन का काम किया उन्हें नगर परिषद के चुनाव में उम्मीदवार बनाया जाता। भूतड़ा ने कहा कि पार्टी ने बूथ और मंडल स्तर पर उम्मीदवारों के लिए जो सर्वे करवाया उसकी भी अनदेखी की गई है। उन्होंने प्रदेश नेतृत्व को अपनी भावनाओं से अवगत करवाया है। भूतड़ा ने कहा कि जो उम्मीदवार बनाए गए है उनकी पृष्ठभूमि की जांच कराई जानी चाहिए। यहां उल्लेखनीय है कि ब्यावर जिले की प्रभारी उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी है। बताया जा रहा है कि उम्मीदवारों के चयन में ब्यावर के भाजपा विधायक शंकर सिंह रावत और नवनियुक्त जिलाध्यक्ष आशीष सांड की राय को प्राथमिकता दी गई है। ब्यावर के उम्मीदवारों के बारे में और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9414010555 पर देवी शंकर भूतड़ा से ली जा सकती है। अजमेर में भी पोल खुली: अजमेर नगर निगम के वार्ड संख्या 72 से श्रीमती तारा पारीक निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रही है। तारा पारीक मौजूदा समय में अजमेर भाजपा के दाहरसेन मंडल की मंत्री है। पारा पारीक की उम्मीदवारी से अजमेर में भाजपा संगठन की पोल खुल गई है। इस वार्ड से भाजपा नेता गोपाल शर्मा की पुत्रवधू अनुश्री को भाजपा का अधिकृत उम्मीदवार बनाया गया है। अनुश्री को उम्मीदवार बनाए जाने पर तारा पारीक का कहना है कि वे पिछले कई वर्षों से भाजपा संगठन में सक्रिय भूमिका निभा रही है। जबकि अनुश्री को संगठन के किसी भी कार्यक्रम में नहीं देखा गया है। वे मंडल मंत्री ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय सेविका समिति में भी सक्रिय रही। सेवा भारती अजयमेरु की योग प्रमुख भी है। दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण अभियान में योग शिक्षक की भूमिका भी निभाई। उन्होंने योग साइंस में ही एमए की डिग्री ली है। सामाजिक सेवा के कारण ही इसी वर्ष 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के अवसर पर सम्मानित भी किया गया। यदि इतनी राजनीतिक और सामाजिक सक्रियता के बाद भी वार्ड पार्षद का टिकट न मिले तो फिर राजनीति में महिलाओं को निराशा ही मिलेगी। क महिला कार्यकर्ता सिर्फ धरना प्रदर्शन के लिए ही होती है? वहीं तारा पारीक के पति अनिल पारीक ने भी पत्नी को उम्मीदवार नहीं बनाए जाने पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि वे स्वयं सेवक संघ के तृतीय वर्ष प्रशिक्षित कार्यकर्ता है। पत्नी को टिकट दिलवाने के लिए उन्होंने भाजपा के सभी बड़े नेताओं से आग्रह किया था, लेकिन नेताओं ने उनके आग्रह को ठुकरा दिया। अब यह पत्नी का निर्णय है कि वे निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रही है। भाजपा के नेताओं को बताना चाहिए कि उनकी पत्नी को उम्मीदवार क्यों नहीं बनाया गया? उल्लेखनीय है कि इस वार्ड से कांग्रेस ने पूर्व मनोनीत पार्षद कपिल सारस्वत की पत्नी रिचा जोशी को उम्मीदवार बनाया है। चूंकि निर्दलीय उम्मीदवार तारा पारीक इस वार्ड में लंबे समय से सक्रिय हैं और निशुल्क योग शिविर का संचालन कर रही है इसलिए वार्ड के आम मतदाता से सीधा संवाद है। इस संबंध में मोबाइल नंबर 9257873135 पर और अधिक जानकारी तारा पारीक से ली जा सकती है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 04-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
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