मेरे रिटायरमेंट का इंतजार हो रहा है? क्या सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की यह टिप्पणी जस्टिस संदीप मेहता और राजस्थान के एक्टिंग सीजे संजीव प्रकाश शर्मा के विवाद से जुड़ी है? अरावली पर्वतमाला का संरक्षण भी जरूरी। ================ सब जानते हैं कि 7 सितंबर तक राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रहे संजीव प्रकाश शर्मा की कार्यशैली को लेकर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश संदीप मेहता ने लगातार पत्र लिखे हैं। इन पत्रों में संजीव प्रकाश शर्मा के न्यायिक कार्यों को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जस्टिस संदीप मेहता के पत्रों के आरोपों की जांच के आदेश प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने दिए हैं। न्यायिक क्षेत्रों में चर्चा है कि सीजेआई सूर्यकांत न्यायाधीश शर्मा को बचाने का काम कर रहे हैं। देश के न्यायिक इतिहास में यह पहला अवसर है जब सुप्रीम कोर्ट के किसी जज ने किसी प्रदेश के एक्टिंग सीजे पर ऐसे आरोप लगाए हैं। अभी यह मामला गर्माया हुआ ही है कि 7 सितंबर को प्रधान न्यायाधीश ने अरावली पर्वतमाला की परिभाषा के प्रकरण में सुनवाई करते हुए कहा, क्या मेरे रिटायरमेंट का इंतजार किया जा रहा है। मालूम हो कि सूर्यकांत 9 फरवरी 2027 को प्रधान न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत्त होंगे। 7 सितंबर को अरावली पर्वतमाला की परिभाषा की सुनवाई के दौरान हाई पावर्ड कमेटी की ओर से आग्रह किया गया कि परिभाषा तय करने के लिए 6 माह का समय और दिया जाए। कमेटी की इस मांग पर ही सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, क्या कमेटी अपनी रिपोर्ट मेरे रिटायरमेंट के बाद देना चाहती है। सूर्यकांत ने स्पष्ट कहा कि कमेटी का कार्यकाल नहीं बढ़ाया जाएगा और कमेटी को तय समय के अनुसार 30 नवंबर तक अपनी रिपोर्ट देनी होगी। इसके साथ ही मामले की सुनवाई 2 दिसंबर निर्धारित की गई। असल में अरावली पर्वतमाला की परिभाषा का मामला दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात से जुड़ा हुआ है। इन राज्यों में बड़े पैमाने पर अवैध रूप से खनन हो रहा है। केंद्र सरकार ने भी खनन माफियाओं को मदद करने के लिए अरावली पहाडिय़ों की ऊंचाई को सौ मीटर माना ताकि सौ मीटर से कम वाली पहाडिय़ों खनन का कार्य विधिवत हो सके। सीजेआई सूर्यकांत ने अरावली पर्वतमाला की परिभाषा तय करने के लिए ही हाईपावर्ड कमेटी का गठन किया था। लेकिन अब यह कमेटी ही निर्धारित समय में रिपोर्ट देने में असमर्थता जता रही है। इसलिए 7 सितंबर को सूर्यकांत की रिटायरमेंट वाली टिप्पणी बहुत मायने रखती है। इस टिप्पणी को जस्टिस संदीप मेहता और राजस्थान के हाईकोर्ट के जज संजीव प्रकाश शर्मा के विवाद से भी जोड़ कर देखा जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट में इन दिनों जो कुछ भी चल रहा है, उसकी वजह से न्यायपालिका की गरिमा को नुकसान हो रहा है। सवाल उठता है कि जब सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के पत्रों पर ही कोई कार्यवाही नहीं हो रहा है, तो फिर आम व्यक्ति की शिकायत पर क्या कार्यवाही होगी। सूत्रों के अनुसार जस्टिस संदीप मेहता इस बात से बेहद खफा है कि उनके पत्रों के बाद भी सीजेआई सूर्यकांत ने राजस्थान में संजीव प्रकाश शर्मा के न्यायिक कार्यों पर रोक नहीं लगाई। पिछले 10 माह से जस्टिस शर्मा को ही कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश बनाए रखा गया है। जस्टिस मेहता ने अपने पत्रों में ऐसे कई उदाहरण दिए हैं, जिनसे संजीव प्रकाश शर्मा के न्यायिक फैसलों पर सवाल उठते हैं। यहां यह उल्लेखनीय है कि 7 सितंबर को जस्टिस संजय अग्रवाल ने राजस्थान हाईकोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश का पद संभाल लिया है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 08-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

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