- Next story राजस्थान में 9 सितंबर से पेयजल सप्लाई ठप करने की फिर धमकी। ठेकेदारों की बार बार धमकी से भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार की छवि खराब हो रही है। आखिर बकाया साढ़े तीन हजार करोड़ का भुगतान क्यों नहीं किया जाता? सप्लाई बंद होगी तो अजमेर, जयपुर, टोंक के एक करोड़ से भी ज्यादा लोग परेशान होंगे। ================ राजस्थान पीएचडी कांट्रेक्टर एसोसिएशन की संघर्ष समिति के अध्यक्ष ओम प्रकाश विश्नोई ने 8 सितंबर को प्रदेश के प्रमुख दैनिक पत्रों में पूरे पृष्ठ का विज्ञापन प्रकाशित करवाया है। इस विज्ञापन में कहा गया है कि 9 सितंबर से राजस्थान भर में पेयजल की सप्लाई बंद कर दी जाएगी। विश्नोई की ओर से कहा गया है कि सरकार ने ठेकेदारों का बकाया साढ़े तीन हजार करोड़ रुपए का भुगतान नहीं किया है। ऐसी स्थिति में ठेकेदार अब जलदाय विभाग की पाइप लाइनों के संरक्षण और पेयजल की सप्लाई का काम नहीं कर सकते हैं। यह बकाया राशि पिछले 35 माह से चली आ रही है। सरकार ने बकाया राशि के भुगतान के लिए कई बार लिखित समझौता किया, लेकिन इसके बाद भी ठेकेदारों को भुगतान नहीं हो रहा। अब कोई भी ठेकेदार बकाया राशि के भुगतान के बगैर पेयजल सप्लाई का काम नहीं कर सकता है। ठेकेदारों द्वारा ऐसी धमकी पूर्व में भी दी गई थी, लेकिन तब सरकार ने हाथों हाथ समझौता कर लिया। लेकिन इस बार मामला गंभीर हो गया है। ठेकेदारों ने 9 सितंबर को पेयजल सप्लाई तब ठप करने की धमकी दी है, जब 9 सितंबर को शहरी निकाय के प्रथम चरण के चुनाव का मतदान का होना है। यदि मतदान वाले दिन प्रदेश भर में पेयजल की सप्लाई नहीं होती है, तो इससे उत्पन्न हालातों का अंदाजा लगाया जा सकता है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी माने या नहीं लेकिन ठेकेदारों की बार बार धमकी से भाजपा सरकार की छवि खराब हो रही है। यदि बकाया भुगतान के लिए ठेकेदार पेयजल सप्लाई बंद करने की धमकी देते हैं, तो फिर सरकार के हालातों का अंदाजा लगा लेना चाहिए। सवाल यह भी है कि सरकार ठेकेदारों को बकाया राशि का भुगतान क्यों नहीं कर रही? जब सरकार ने बकाया राशि के भुगतान के लिए लिखित में समझौता कर रखा है तब ठेकेदारों को भुगतान किया जाना चाहिए। यह भी सोचनीय मुद्दा है कि पेयजल सप्लाई के लिए सरकार पूरी तरह निजी क्षेत्र पर निर्भर है। सारे संसाधन सरकार के है, लेकिन नियंत्रण निजी क्षेत्र का हो गया है। कहा जा सकता है कि सरकार निजी क्षेत्र पर निर्भर है। 9 सितंबर से पेयजल की सप्लाई ठप होती है तो अजमेर, जयपुर, टोंक जिले के एक करोड़ से भी ज्यादा लोगों को परेशानी होगी। इन तीनों जिलों के लोग बीसलपुर बांध के पानी पर निर्भर है। बांध से प्रतिदिन 1200 टीएमसी पानी की सप्लाई तीनों जिलों में होती है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 08-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
- Previous story तीन बार मुख्यमंत्री रहे अशोक गहलोत अपना मुकाबला मौजूदा सीएम भजनलाल शर्मा से क्यों कर रहे हैं? शहरी निकाय के चुनाव में रोड शो करने का मामला। ================ राजस्थान में 9 और 11 सितंबर को 309 शहरी निकायों के 10245 वार्डों के चुनाव होने हैं। इन चुनावों में भाजपा उम्मीदवारों को जितवाने के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा बड़े शहरों में रोड शो कर रहे है। 5 सितंबर को सीएम शर्मा ने भीलवाड़ा और उदयपुर, 6 सितंबर को अजमेर, बीकानेर और जोधपुर में रोड शो किया। 7 सितंबर को अलवर, भरतपुर में रोड शो कर रहे है। 8 सितंबर को जयपुर में करेंगे। सीएम शर्मा के लगातार रोड शो करने पर पूर्व सीएम और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने एतराज जताया है। गहलोत का कहना है कि शहरी निकाय का चुनाव वार्ड स्तर का होता है, इसलिए मुख्यमंत्री पद पर आसीन नेता को प्रचार नहीं करना चाहिए। गहलोत ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री रहते हुए शहरी निकाय चुनावों में कभी भी कांग्रेस का प्रचार नहीं किया। समझ में नहीं आता कि गहलोत अपनी तुलना भजनलाल शर्मा से क्यों कर रहे हैं? गहलोत को यह समझना चाहिए कि शर्मा भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री हैं और भाजपा के लिए वार्ड को लेकर लोकसभा तक का चुनाव एक समान होता है। जो मतदाता वार्ड चुनाव में मतदान करता है, वही मतदाता विधायक और सांसद भी चुनता है। वैसे भी राजनीति में गहलोत और शर्मा का मुकाबला नहीं हो सकता। गहलोत तीन बार मुख्यमंत्री तीन बार केंद्रीय मंत्री और तीन बार ही प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष रहे हैं। जबकि भजनलाल शर्मा पहली बार विधायक बनकर मुख्यमंत्री बने हैं, शर्मा विधायक बनने से पहले सिर्फ एक बार सरपंच बने। यानी राजनीति में भजनलाल शमा्र के मुकाबले अशोक गहलोत की वरिष्ठता बहुत ज्यादा है, उसमें वार्ड का चुनाव छोटा ही नजर आएगा। भजनलाल शर्मा को गहलोत की बराबरी करने के लिए कम से कम 2 बार तो मुख्यमंत्री बनना ही पड़ेगा। चूंकि शर्मा को वर्ष 2028 के विधानसभा चुनाव में अपनी सरकार को रिपीट करवाना है, इसलिए वार्ड चुनाव महत्व रखता है। आज गहलोत को भले ही लोकप्रिय होने की जरुरत न हो, लेकिन भजनलाल शर्मा को है। शहरी निकाय के चुनाव में रोड शो के दौरान शर्मा वार्ड स्तर के भाजपा कार्यकर्ता से भी संवाद कर रहे है। जब वार्ड स्तर का कार्यकर्ता सीधे मुख्यमंत्री से संवाद करता है तो फिर उसका उत्साह चार गुना बढ़ जाता है। अशोक गहलोत भले ही वार्ड के चुनाव को निम्न स्तर का मानते हो, लेकिन भजनलाल शमा्र के लिए वार्ड स्तर का चुनाव भी मायने रखता है। सीएम शर्मा के शहरी क्षेत्रों में रोड शो की वजह से भाजपा को फायदा हो रहा है। भाजपा के बागी उम्मीदवार अधिकृत उम्मीदवार का समर्थन भी करने लगे हैं। S.P.MITTAL BLOGGER ( 07-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
-
8 Sep, 2026
-
8 Sep, 2026
-
8 Sep, 2026
-
8 Sep, 2026
-
8 Sep, 2026
-
8 Sep, 2026
-
Extended Opportunity says:After Generating Millions Online, I've Created A Foolproof Money Making System,...
-
Extended Opportunity says:
-
http://bet-promokod.ru says:
More
Archives
-
8 Sep, 2026
-
8 Sep, 2026
-
8 Sep, 2026
-
8 Sep, 2026


