केन्द्रीय मंत्री सीआर च ौधरी को उम्मीदवार बनाना अजमेर के भाजपा के कार्यकर्ताओं का अपमान होगा। उम्मीदवार का चयन अंतिम चरण में।
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भाजपा के उम्मीदवारों का चयन जब अंतिम चरण में हंै तब एक बार फिर अजमेर संसदीय क्षेत्र से केन्द्रीय मंत्री सीआर च ौधरी का नाम तेजी से उभरा है। वर्तमान में च ौधरी अजमेर संभाग के नागौर से ही सांसद हैं, लेकिन गत विधानसभा के चुनाव में नागौर में दस में से आठ सीटों पर भाजपा की हार हो जाने से च ौधरी अब नागौर से चुनाव नहीं लड़ना चाहते हैं। च ौधरी की नजर अजमेर पर है क्योंकि अजमेर संसदीय क्षेत्र की आठ विधानसभा सीटों पर चार पर भाजपा का कब्जा, जबकि दो सीटें निर्दलीय विधायकों के पास है। कांग्रेस के पास मात्र दो सीटें हैं। ऐसी स्थिति में लोकसभा चुनाव में अजमेर को सुरक्षित माना जा रहा है। च ौधरी को लगता है कि नागौर में जोखिम है, जबकि अजमेर में आसान जीत होगी। ब्यूरोक्रेट से नेता और मंत्री बने च ौधरी को आसान जीत चाहिए। यदि च ौधरी को उम्मीदवार बनाया जाता है तो यह अजमेर के भाजपा कार्यकर्ताओं का अपमान होगा। पहला सवाल तो यही है कि जो व्यक्ति अपने निर्वाचन क्षेत्र में नहीं जीत सकता उसे दूसरे क्षेत्र में क्यों उतारा जा रहा है? नागौर भी जाट बाहुल्य संसदीय क्षेत्र हैं और च ौधरी का जाट समुदाय में दबदबा माना जाता है। यदि जाट होने के नाते ही च ौधरी को अजमेर में उतारा जा रहा है तो फिर अजमेर में उम्मीदवारी की दौड़ में अनेक जाट नेता शामिल हैं। पूर्व जिला प्रमुख श्रीमती सरिता गैना, पूर्व प्रधान रामेश्वर प्रसाद कड़वा, पूर्व विधायक भागीरथ च ौधरी, डाॅ. दीपक भाकर, विकास च ौधरी जाट ही है जो पूरी ताकत लगाकर टिकिट मांग रहे हैं। विकास च ौधरी ने तो किशनगढ़ से भाजपा उदम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ कर 65 हजार से भी ज्यादा मत प्राप्त किए। विकास के सामने कांग्रेस के जाट उम्मीदवार की जमानत जब्त हो गई। हालांकि किशनगढ़ से निर्दलीय उम्मीदवार सुरेश टांक की जीत हुई, लेकिन युवा विकास ने जाट समुदाय पर अपना दबदबा जाहिर किया। देहात भाजपा के अध्यक्ष प्रो बीपी सारस्वत का कहना है कि जातिगत समीकरणों से ऊपर उठ कर उम्मीदवार का चयन होना चाहिए। समाज का हर वर्ग नरेन्द्र मोदी को दोबारा से प्रधानमंत्री बनवाना चाहता है। सारस्वत ने भी अपनी दावेदारी जताई है। पूर्व जिला प्रमुख एवं विधायक रहीं श्रीमती सुशील कंवर पलाड़ा के पति वरिष्ठ भाजपा नेता भंवर सिंह पलाड़ा भी चाहते हैं कि स्थानीय कार्यकर्ता को ही उम्मीदवार बनाया जाए। पलाड़ा ने भी अपनी दावेदारी जताई है। इसी प्रकार पुखराज पहाड़िया, शहर भाजपा अध्यक्ष शिवशंकर हेड़ा, ओबीसी मोर्चे के प्रदेशाध्यक्ष ओम प्रकाश भडाना, मेयर धर्मेेन्द्र गहलोत, सुभाष काबरा आशीष चतुर्वेदी आदि भी उम्मीदवार बनने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। इतने दावेदारों के बीच यदि सीआर च ौधरी को स्काइलैब की तरह अजमेर में टपकाया जाता है तो यह अजमेर के भाजपा नेताओं का अपमान होगा।