मुख्यमंत्री के आने से पहले भाजपाईयों को किया संतुष्ट। अजमेर शहर में संगठन का पता नहीं, लेकिन सरकारी कमेटियां बनाई। कलेक्टर का भी रहा सकारात्मक रूख।

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मुख्यमंत्री के आने से पहले भाजपाईयों को किया संतुष्ट। अजमेर शहर में संगठन का पता नहीं, लेकिन सरकारी कमेटियां बनाई। कलेक्टर का भी रहा सकारात्मक रूख।
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मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के अजमेर आने से पहले-पहले की जा रही तैयारियों के अंतर्गत ही अब भाजपा कार्यकर्ताओं को भी संतुष्ट करने की कवायद शुरू हो गई है। जिला कलेक्टर गौरव गोयल ने जिला स्तरीय विभिन्न सरकारी कमेटियों में सौ से भी ज्यादा भाजपा कार्यकर्ताओं को शामिल किया है। हालांकि कमेटियों की घोषणा कलेक्टर ने की हंै, लेकिन सब जानते हैं इसके पीछे सत्तारूढ़ पार्टी के संगठन की भूमिका होती है। जानकार सूत्रों के अनुसार भाजपा के देहात अध्यक्ष प्रो बी.पी.सारस्वत और शहर अध्यक्ष अरविन्द यादव के माध्यम से ही कार्यकर्ताओं की सूची तैयार हुई थी। इन दोनों ने ही भाजपा के विधायकों से विचार विमर्श कर कार्यकर्ताओं के नामों को अंतिम रूप दिया। यह सूची तब बनी थी जब शिक्षा राज्यमंत्री वासुदेव देवनानी अजमेर के प्रभारी मंत्री थे। इस सूची में महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री श्रीमती अनिता भदेल को भी पूरी तरह संतुष्ट किया गया। जानकारों की माने तो यह सूची पिछले दो माह से सीएमओ में पड़ी हुई थी। अब चूंकि स्वतंत्रता दिवस के राज्य स्तरीय समारोह में भाग लेने के लिए 15 अगस्त को मुख्यमंत्री अजमेर आ रही हंै, इसलिए सूची को सीएमओ से जिला कलेक्टर के पास भेज दिया गया। कलेक्टर ने भी हाथो-हाथ सरकारी स्तर पर सूची जारी कर दी। कहा तो यह भी जा रहा है कि सूची को अंतिम रूप देने में कलेक्टर गोयल का भी सकारात्मक रूख रहा। सूची को जारी करने से पहले जिला पुलिस अधीक्षक डॉ नितिनदीप ब्लग्गन के माध्यम से सभी सदस्यों की गोपनीय पुलिस जांच करवाई गई। कुछ भाजपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ अपराधिक मुकदमे होने की बात सामने आई। सूत्रों के अनुसार कलेक्टर गोयल ने अपने स्तर पर यह आग्रह किया कि ऐसे कार्यकर्ताओं के नाम सूची से हटा दिए जाएं। कलेक्टर के इस सकारात्मक रूख की प्रशंसा भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने की। सभी ने इस कदम की भी सराहना की कि सूची जारी होने से पहले पुलिस जांच करवाई गई है।
शहर में संगठन पर सवाल :
अजमेर देहात भाजपा की कार्यकारिणी की घोषणा हो चुकी है, लेकिन शहर में अभी तक भी नई कार्यकारिणी नहीं बन सकी है। शहर में भाजपा के दोनों मंत्रियों की आपसी खींचतान की वजह से पुराने अध्यक्ष अरविन्द यादव से ही काम चलाया जा रहा है। इसमें कोई दोराय नहीं कि यादव ने पुराने पदाधिकारियों के माध्यम से ही तालमेल बैठने का प्रयास किया है। यही वजह रही कि जिला स्तरीय कमेटियों के सदस्यों के नामों को अंतिम रूप देने में भी यादव की सक्रिय भूमिका रही है। कमेटियों के गठन के लिए बड़े नेताओं की जो कोर कमेटी बनी, उसमें यादव के प्रस्तावों को भी माना गया है।
(एस.पी. मित्तल) (18-07-2016)
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