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शहीदों को पूरा सम्मान नहीं दे रहा है राजस्थान का शिक्षा विभाग।

by Sp mittal · July 4, 2018

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    अजमेर के निकट ऊंटड़ा में होगा मुस्लिम सामूहिक निकाह सम्मेलन। पंजीयन 15 जुलाई से। सामाजिक संस्था इदरा-ए- दावातुल हक की ओर से 65 हजार रुपए का घरेलू सामान और 21 हजार रुपए का सरकारी अनुदान प्रत्येक जोड़े को मिलेगा। ================ अजमेर के निकट ऊंटड़ा गांव में अगले वर्ष 6 जनवरी 2027 को मुस्लिम सामूहिक निकाह सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इसके लिए 15 जुलाई से 15 अगस्त 2026 तक पंजीयन किया जाएगा। सामाजिक संस्था इदारा-ए-दावातुल हक के मौलाना अयूम कासमी ने बताया कि संस्था की ओर से पिछले सात वर्षों से प्रति वर्ष मुस्लिम सामूहिक निकाह सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इस वर्ष भी 6 जनवरी 2027 को यह सम्मेलन होगा। सम्मेलन में पंजीयन करवाने वाले जोड़ों को संस्था की ओर से करीब 65 हजार रुपए का घरेलू सामान भी दिया जाएगा। इसके साथ ही दोनों पक्षों की ओर से आए मेहमानों के भोजन की भी निशुल्क व्यवस्था संस्था की ओर से की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस सामूहिक निकाह वाले दिन ही निकाह का सर्टिफिकेट भी उपलब्ध करवा दिया जाएगा। इस सर्टिफिकेट के आधार पर ही सरकार से 21 हजार रुपए का अनुदान भी लिया जा सकेगा। सरकारी अनुदान दिलवाने में संस्था का पूरा सहयोग रहेगा। उन्होंने बताया कि समाज में निकाह पर अधिक खर्च होने लगा है, इसलिए संस्था प्रतिपक्ष मुस्लिम समाज के जरूरतमंद परिवारों के लिए सामूहिक निकाह का आयोजन कर रहा है। सामूहिक निकाह वाले दिन देश भर के मुस्लिम विद्वान भी अपने विचारों को रखते हैं। मौलाना कासमी ने जरूरतमंद परिवारों से अपील की है कि वे 15 अगस्त तक पंजीयन करवा ले क्योंकि 15 अगस्त के बाद पंजीयन करना संभव नहीं होगा। इस सामूहिक निकाह के बारे में और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9950578600 पर मौलाना अयूब कासमी तथा 9636434373 पर मोहम्मद अलताफ से ली जा सकती है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 12-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

    12 Jul, 2026

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    आलोचनाओं का स्वयं मौका देते हैं राहुल गांधी। भारत में थोड़ी राजनीतिक गतिविधियां करने के बाद विश्राम के लिए विदेश चले जाते हैं। ================ कांग्रेस के सर्वोच्च नेता और लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी एक बार फिर विदेश दौरे पर है। आमतौर पर विदेश में राहुल गांधी की गतिविधियां सार्वजनिक नहीं होती। राहुल गांधी के बार बार विदेश दौरों को लेकर भाजपा और अन्य दलों के नेता विरोध करते हैं। असल में आलोचनाओं का अवसर राहुल गांधी स्वयं देते हैं। बार बार विदेश चले जाने से ऐसा प्रदर्शित होता है कि राहुल गांधी भारत में पार्ट टाइम राजनीति करते हैं। राहुल गांधी सिर्फ कांग्रेस के नेता ही नहीं है, बल्कि लोकसभा में पूरे विपक्ष के नेता भी है। ऐसे में राहुल गांधी की जिम्मेदारी है कि वे सरकार की नीतियों को लेकर विपक्ष के साथ आंदोलन करे। यह बताए कि मोदी सरकार की नीतियों कैसे जन विरोधी है, लेकिन राहुल गांधी बार बार जिस तरह विदेश यात्रा पर चले जाते हैं, उस विपक्षी दल भी एकजुट नहीं हो पाते। राहुल गांधी के प्रतिपक्ष का नेता होते हुए ही पश्चिम बंगाल की टीएमसी के 28 में से 20 लोकसभा के सांसदों ने अलग दल बना लिया। इसी प्रकार महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने भी दूसरी बार बड़ी बगावत हो गई। सवाल उठता है कि क्या प्रतिपक्ष के नेता के नाते विपक्ष को एकजुट रखने की जिम्मेदारी राहुल गांधी की नहीं है? पंजाब में भी जिस तरह आम आदमी पार्टी में बगावत हुई उससे राहुल गांधी के प्रतिपक्ष के नेता होने पर सवाल उठते हैं। आमतौर पर देखा गया है कि राहुल गांधी भारत में थोड़ी राजनीतिक गतिविधियां करने के बाद विश्राम के लिए विदेश चले जाते हैं। भारत में 20 जुलाई से संसद का मानसून सत्र शुरू हो रहा है। अच्छा होता कि राहुल गांधी प्रतिपक्ष के नेता के नाते विपक्षी दलों के साथ बैठकर सरकार के विरुद्ध कोई रणनीति बनाते, लेकिन मानसून सत्र शुरू होने से पहले राहुल गांधी विदेश चले गए। देश के युवा वर्ग को मोदी सरकार के विरुद्ध जगाने के लिए राहुल गांधी ने छात्रों की गूंज अभियान शुरू किया था। कोटा के बाद राहुल को बिहार के पटना में दूसरा कार्यक्रम करना था, लेकिन राहुल गांधी का अब पटना वाला कार्यक्रम रद्द हो गया है। कहा जा रहा है कि पटना की जगह देहरादून में कार्यक्रम होगा। असल में राहुल गांधी के बार बार विदेश चले जाने के कारण कांग्रेस संगठन में भी असमंजस की स्थिति रहती है। लोकतंत्र में विपक्ष का मजबूत होना जरूरी है, लेकिन इसके लिए विपक्षी नेताओं को जन आंदोलन करने पड़ेंगे। जन आंदोलन तभी सफल हो सकते हैं, जब विरोधी दल के नेता वर्षभर सक्रिय रहे। बार बार विदेश जाने से भारत में मोदी सरकार के विरुद्ध मजबूत विपक्षी दल खड़े नहीं हो सकते। राहुल गांधी को इस मामले में उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव से सीख लेनी चाहिए। यादव वर्ष भर अपने ही उत्तर प्रदेश में रहकर विपक्षी नेता की भूमिका निभाते हैं। S.P.MITTAL BLOGGER ( 12-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

    12 Jul, 2026

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    चढ़ावा चोरी प्रकरण को लेकर अयोध्या के राम मंदिर की छवि खराब करने वाले नेता और मीडिया अब खाड़ी के मुस्लिम देशों और कट्टरपंथी इस्लामिक देश ईरान के भीषण युद्ध को देख लें। ================ अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जो युद्ध चल रहा है, उसमें 11 जुलाई को एक नया मोड़ तब आ गया, जब खाड़ी के मुस्लिम देश कुवैत, बहरीन आदि से भी कट्टरपंथी इस्लामिक देश ईरान पर भीषण हमले शुरू हो गए है। यह सही है कि खाड़ी देशों में अमेरिका के सैन्य ठिकाने हैं, लेकिन अब तक खाड़ी देशों से ईरान पर बड़े हमले नहीं किए जा रहे थे। रणनीति के तहत अरब सागर में खड़े अमेरिकी जहाजों और इजरायल से मिसाइलों के जरिए ही ईरान पर हमले किए जा रहे थे। लेकिन अब अमेरिका ने अपने समर्थक खाड़ी के मुस्लिम देशों को भी युद्ध करने के लिए मैदान में खड़ा कर दिया है। 11 जुलाई से अधिकांश खाड़ी देशों से ईरान पर ताबड़तोड़ हमले किए जा रहे है। ईरान पर खाड़ी देशों से हमले होने के बाद अमेरिका को युद्ध में मजबूती मिली है। खाड़ी देशों से हमला करना अमेरिका के लिए आसान काम है। हालांकि ईरान ने भी खाड़ी के मुस्लिम देशों पर जवाबी कार्यवाही की है। जो नेता और मीडिया भारत में चढ़ावा चोरी के प्रकरण में अयोध्या के राम मंदिर की छवि खराब कर रहे हैं, उन्हें अब खाड़ी के मुस्लिम देशों और कट्टरपंथी इस्लामिक देश ईरान के बीच भीषण युद्ध को देख लेना चाहिए। चढ़ावा चोरी की आड़ में सुनियोजित तरीके से भारत की सनातन संस्कृति को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। जबकि अयोध्या में मंदिर का निर्माण पांच सौ वर्ष के संघर्ष के बाद हो पाया है। अयोध्या का राम मंदिर सीमेंट कंक्रीट की इमारत नहीं बल्कि भारत के सौ करोड़ से ज्यादा हिंदुओं की आस्था का केंद्र है। भगवान राम के जन्मस्थान पर मंदिर बनने से हर सनातनी गौरवान्ति है। जो नेता और मीडिया चढ़ावा चोरी की आड़ में राम मंदिर की छवि खराब कर रहे हैं, उन्हें अपनी हरकतों से बाज आना चाहिए। दुनिया में सनातन धर्म ही एक ऐसा धर्म है जो सभी धर्मों और विचारों को साथ लेकर चलता है। जबकि वहीं अन्य धर्मों में एक ही धर्म के लोगों में जबरदस्त विरोधाभास है और इसका उदाहरण खाड़ी के देशों और ईरान के बीच हो रहा युद्ध है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 12-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

    12 Jul, 2026

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    कांग्रेस की तरह भाजपा के शासन में भी शिक्षकों के तबादले हो रहे हैं। यदि नेताओं की सिफारिशों से ही तबादले होने हैं तो फिर शिक्षकों को भी राजनीति में आने की छूट दी जाए-विजय सोनी शिक्षक नेता। ================ राजस्थान में स्कूली शिक्षा के शिक्षकों के तबादले बड़ी संख्या में हुए है। ये तबादले किसी नीति के बगैर हुए है। तबादलों में भाजपा के नेताओं की सिफारिशों को प्राथमिकता दी गई है। यहां तक कि भाजपा के जयपुर स्थित मुख्यालय में शिक्षकों ने अपने तबादले का प्रार्थना पत्र जमा करवाया है। सरकार में बैठे मंत्रियों ने भी माना है कि हजारों शिक्षक डिजायर के लिए उनके पास आ रहे हैं। यानी शिक्षकों के तबादले जिस प्रकार कांग्रेस के शासन में होते थे, उसी प्रकार भाजपा के शासन में भी हो रहे हैं। कांग्रेस के शासन में भाजपा के नेता तबादले में राजनीतिक द्वेषता के आरोप लगाते थे। वही अब कांग्रेस के नेता राजनीतिक द्वेषता से तबादला करने के आरोप लगा रहे हैं। कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा का तो कहना है कि संघ और भाजपा की विचारधारा वाले शिक्षकों को उनकी इच्छानुसार पोस्टिंग दी गई है। जबकि कांग्रेस विचारधारा वाले शिक्षकों का तबादला दूर कर दिया गया है। डोटासरा ने अपने निर्वाचन क्षेत्र लक्ष्मणगढ़ (सीकर) के तबादलों के आंकड़े भी प्रस्तुत किए हैं। राजनीति में आने की छूट मिले: राजस्थान शिक्षक संघ (राधाकृष्ण) के प्रदेश अध्यक्ष विजय सोनी ने कहा कि यदि नेताओं की सिफारिश से ही तबादले हो रहे हैं तो फिर शिक्षकों को भी राजनीति करने की छूट दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि एक ओर सेवा नियमों में उल्लेख है कि कोई भी सरकारी कर्मचारी राजनीतिक गतिविधियों में भाग नहीं लेगा, लेकिन अब जब नेताओं की सिफारिशों से ही तबादले हो रहे हैं तो फिर शिक्षकों को भी राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेने की छूट मिलनी चाहिए। वैसे भी शिक्षक सभी प्रकार के कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार यूनिवर्सिटी के शिक्षकों को राजनीति में भाग लेने की छूट है, उसी प्रकार स्कूली शिक्षकों को भी छूट मिलनी चाहिए। विजय ने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार ने भी बगैर कोई नीति बनाए शिक्षकों के तबादले किए और अब भाजपा के शासन में भी बगैर नीति के ही तबादले हो रहे है। एक ओर कहा जा रहा है कि तृतीय श्रेणी के शिक्षकों के तबादले पर रोक है, लेकिन वही इस श्रेणी के कंप्यूटर अनुदेशकों के तबादले धड़ल्ले से किए जा रहे है। तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादला न करने के पीछे तर्क दिया जाता है कि इन शिक्षकों की वरिष्ठता जिला स्तर पर निर्धारित होती है। यदि एक जिले से दूर जिले में तबादला किया गया तो वरिष्ठता प्रभावित होगी, लेकिन इसके उलट वरिष्ठ अध्यापकों के तबादले किए गए है। जबकि वरिष्ठ अध्यापकों की वरिष्ठता संभाग स्तर पर निर्धारित होती है। वरिष्ठ अध्यापकों के तबादले एक संभाग से दूसरे संभाग में किए गए है। सोनी ने कहा कि चूंकि तबादला नीति नहीं है, इसलिए तबादलों में अनेक विसंगतियां हो रही है। विजय सोनी ने प्रदेश भर में शिक्षकों को राजनीति करने को लेकर अभियान चला रखा है। इस संबंध में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को भी पत्र दिया गया है। मोबाइल नंबर 9829087912 पर इस अभियान की जानकारी विजय सोनी से ली जा सकती है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 10-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

    10 Jul, 2026

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    मोदी के नेतृत्व वाला एनडीए अब राज्यसभा में दो तिहाई बहुमत से मात्र 13 सीट दूर, लेकिन साधारण बहुमत से 28 सीटें ज्यादा। राज्यसभा से इस्तीफा देने वाले टीएमसी के तीनों सांसद अब पश्चिम बंगाल से भाजपा के उम्मीदवार। ममता बनर्जी का सफाया। ================ पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद टीएमसी के राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक ने इस्तीफा दे दिया था। लेकिन अब इन तीनों को भाजपा ने पश्चिम बंगाल से ही अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। बंगाल में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए 24 जुलाई को उप-चुनाव होना है। चूंकि विधानसभा में भाजपा के 208 विधायक है, इसलिए इन तीनों उम्मीदवारों की जीत तय है। यानी टीएमसी के इन नेताओं ने भाजपा के प्रति जो वफादारी दिखाई थी, उसका पुरस्कार अब इन तीनों को मिल गया है। राज्यसभा में मौजूदा समय में भाजपा के 113 सांसद हैं। इन तीनों की जीत के बाद संख्या 16 हो जाएगी। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए के राज्यसभा में सांसदों की संख्या 148 से बढ़कर 151 हो जाएगी। साधारण बहुमत के लिए 123 सदस्यों की जरूरत होती है यानी अब एनडीए के पास साधारण बहुमत से 28 सीटें ज्यादा है। राज्यसभा में दो तिहाई बहुमत के लिए 1645 सांसद चाहिए, जबकि एनडीए के पास 24 जुलाई के बाद 151 सांसद हो जाएंगे। यानी अब राज्यसभा में एनडीए दो तिहाई बहुमत से मात्र 13 सीट दूर है। कहा जा रहा है कि कई क्षेत्रीय दलों के सांसद एनडीए को समर्थन देने को तैयार है। जिस तरह एनडीए राज्यसभा में दो तिहाई बहुमत की ओर बढ़ रहा है,उससे भाजपा बेहद उत्साहित है। लोकसभा में भी एनडीए दो तिहाई बहुमत की ओर बढ़ रहे है। हाल ही में टीएमसी और आम आदमी पार्टी के सांसदों ने जिस तरह दल बदल किया है, उससे एनडीए की स्थिति और मजबूत हुई है। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी के लोकसभा के 27 सांसदों में से 20 ने अलग दल बना लिया है। अब ये सांसद लोकसभा में एनडीए को ही समर्थन दे रहे है। ममता बनर्जी को लोकसभा और राज्यसभा में ही झटका नहीं लगा है बल्कि विधानसभा में भी झटका लगा है। हाल ही में चुनाव में ममता बनर्जी के 80 विधायक बने, लेकिन इसमें से 60 विधायकों ने अलग दल बना लिया। यानी अब ममता बनर्जी के पास 20 विधायक रह गए है। देखा जाए तो पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी का पूरा सफाया हो गया है। जो ममता बनर्जी मुख्यमंत्री रहते हुए देश की संवैधानिक संस्थाओं का मजाक उड़ा रही थी, वही ममता बनर्जी अब बेहद कमजोर हो गई है। एक तरह से ममता बनर्जी को टीएमसी का पश्चिम बंगाल में कोई वजूद ही नहीं रहा है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 10-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

    10 Jul, 2026

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    Hacked By 0x1999 – Indonesian Code Party – Jatim4u

    14 Apr, 2016

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    अजमेर के निकट ऊंटड़ा में होगा मुस्लिम सामूहिक निकाह सम्मेलन। पंजीयन 15 जुलाई से। सामाजिक संस्था इदरा-ए- दावातुल हक की ओर से 65 हजार रुपए का घरेलू सामान और 21 हजार रुपए का सरकारी अनुदान प्रत्येक जोड़े को मिलेगा। ================ अजमेर के निकट ऊंटड़ा गांव में अगले वर्ष 6 जनवरी 2027 को मुस्लिम सामूहिक निकाह सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इसके लिए 15 जुलाई से 15 अगस्त 2026 तक पंजीयन किया जाएगा। सामाजिक संस्था इदारा-ए-दावातुल हक के मौलाना अयूम कासमी ने बताया कि संस्था की ओर से पिछले सात वर्षों से प्रति वर्ष मुस्लिम सामूहिक निकाह सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इस वर्ष भी 6 जनवरी 2027 को यह सम्मेलन होगा। सम्मेलन में पंजीयन करवाने वाले जोड़ों को संस्था की ओर से करीब 65 हजार रुपए का घरेलू सामान भी दिया जाएगा। इसके साथ ही दोनों पक्षों की ओर से आए मेहमानों के भोजन की भी निशुल्क व्यवस्था संस्था की ओर से की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस सामूहिक निकाह वाले दिन ही निकाह का सर्टिफिकेट भी उपलब्ध करवा दिया जाएगा। इस सर्टिफिकेट के आधार पर ही सरकार से 21 हजार रुपए का अनुदान भी लिया जा सकेगा। सरकारी अनुदान दिलवाने में संस्था का पूरा सहयोग रहेगा। उन्होंने बताया कि समाज में निकाह पर अधिक खर्च होने लगा है, इसलिए संस्था प्रतिपक्ष मुस्लिम समाज के जरूरतमंद परिवारों के लिए सामूहिक निकाह का आयोजन कर रहा है। सामूहिक निकाह वाले दिन देश भर के मुस्लिम विद्वान भी अपने विचारों को रखते हैं। मौलाना कासमी ने जरूरतमंद परिवारों से अपील की है कि वे 15 अगस्त तक पंजीयन करवा ले क्योंकि 15 अगस्त के बाद पंजीयन करना संभव नहीं होगा। इस सामूहिक निकाह के बारे में और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9950578600 पर मौलाना अयूब कासमी तथा 9636434373 पर मोहम्मद अलताफ से ली जा सकती है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 12-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

    12 Jul, 2026

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    सूफीवाद को आगे बढ़ाकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इतिहास को दोहरा रहे हैं। ख्वाजा साहब के उर्स के मौके पर दीवाना आबेदीन ने मुस्लिम धर्मगुरुओं और विद्वानों के समारोह में कहा।

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    एडीए कराएगा राजगढ़ भैरवधाम का विकास। सांसद और विधायक कोष से मिले 30 लाख। नवरात्रा में छठ के मेले में उमड़े श्रद्धालु।

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    आलोचनाओं का स्वयं मौका देते हैं राहुल गांधी। भारत में थोड़ी राजनीतिक गतिविधियां करने के बाद विश्राम के लिए विदेश चले जाते हैं। ================ कांग्रेस के सर्वोच्च नेता और लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी एक बार फिर विदेश दौरे पर है। आमतौर पर विदेश में राहुल गांधी की गतिविधियां सार्वजनिक नहीं होती। राहुल गांधी के बार बार विदेश दौरों को लेकर भाजपा और अन्य दलों के नेता विरोध करते हैं। असल में आलोचनाओं का अवसर राहुल गांधी स्वयं देते हैं। बार बार विदेश चले जाने से ऐसा प्रदर्शित होता है कि राहुल गांधी भारत में पार्ट टाइम राजनीति करते हैं। राहुल गांधी सिर्फ कांग्रेस के नेता ही नहीं है, बल्कि लोकसभा में पूरे विपक्ष के नेता भी है। ऐसे में राहुल गांधी की जिम्मेदारी है कि वे सरकार की नीतियों को लेकर विपक्ष के साथ आंदोलन करे। यह बताए कि मोदी सरकार की नीतियों कैसे जन विरोधी है, लेकिन राहुल गांधी बार बार जिस तरह विदेश यात्रा पर चले जाते हैं, उस विपक्षी दल भी एकजुट नहीं हो पाते। राहुल गांधी के प्रतिपक्ष का नेता होते हुए ही पश्चिम बंगाल की टीएमसी के 28 में से 20 लोकसभा के सांसदों ने अलग दल बना लिया। इसी प्रकार महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने भी दूसरी बार बड़ी बगावत हो गई। सवाल उठता है कि क्या प्रतिपक्ष के नेता के नाते विपक्ष को एकजुट रखने की जिम्मेदारी राहुल गांधी की नहीं है? पंजाब में भी जिस तरह आम आदमी पार्टी में बगावत हुई उससे राहुल गांधी के प्रतिपक्ष के नेता होने पर सवाल उठते हैं। आमतौर पर देखा गया है कि राहुल गांधी भारत में थोड़ी राजनीतिक गतिविधियां करने के बाद विश्राम के लिए विदेश चले जाते हैं। भारत में 20 जुलाई से संसद का मानसून सत्र शुरू हो रहा है। अच्छा होता कि राहुल गांधी प्रतिपक्ष के नेता के नाते विपक्षी दलों के साथ बैठकर सरकार के विरुद्ध कोई रणनीति बनाते, लेकिन मानसून सत्र शुरू होने से पहले राहुल गांधी विदेश चले गए। देश के युवा वर्ग को मोदी सरकार के विरुद्ध जगाने के लिए राहुल गांधी ने छात्रों की गूंज अभियान शुरू किया था। कोटा के बाद राहुल को बिहार के पटना में दूसरा कार्यक्रम करना था, लेकिन राहुल गांधी का अब पटना वाला कार्यक्रम रद्द हो गया है। कहा जा रहा है कि पटना की जगह देहरादून में कार्यक्रम होगा। असल में राहुल गांधी के बार बार विदेश चले जाने के कारण कांग्रेस संगठन में भी असमंजस की स्थिति रहती है। लोकतंत्र में विपक्ष का मजबूत होना जरूरी है, लेकिन इसके लिए विपक्षी नेताओं को जन आंदोलन करने पड़ेंगे। जन आंदोलन तभी सफल हो सकते हैं, जब विरोधी दल के नेता वर्षभर सक्रिय रहे। बार बार विदेश जाने से भारत में मोदी सरकार के विरुद्ध मजबूत विपक्षी दल खड़े नहीं हो सकते। राहुल गांधी को इस मामले में उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव से सीख लेनी चाहिए। यादव वर्ष भर अपने ही उत्तर प्रदेश में रहकर विपक्षी नेता की भूमिका निभाते हैं। S.P.MITTAL BLOGGER ( 12-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

    12 Jul, 2026

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    चढ़ावा चोरी प्रकरण को लेकर अयोध्या के राम मंदिर की छवि खराब करने वाले नेता और मीडिया अब खाड़ी के मुस्लिम देशों और कट्टरपंथी इस्लामिक देश ईरान के भीषण युद्ध को देख लें। ================ अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जो युद्ध चल रहा है, उसमें 11 जुलाई को एक नया मोड़ तब आ गया, जब खाड़ी के मुस्लिम देश कुवैत, बहरीन आदि से भी कट्टरपंथी इस्लामिक देश ईरान पर भीषण हमले शुरू हो गए है। यह सही है कि खाड़ी देशों में अमेरिका के सैन्य ठिकाने हैं, लेकिन अब तक खाड़ी देशों से ईरान पर बड़े हमले नहीं किए जा रहे थे। रणनीति के तहत अरब सागर में खड़े अमेरिकी जहाजों और इजरायल से मिसाइलों के जरिए ही ईरान पर हमले किए जा रहे थे। लेकिन अब अमेरिका ने अपने समर्थक खाड़ी के मुस्लिम देशों को भी युद्ध करने के लिए मैदान में खड़ा कर दिया है। 11 जुलाई से अधिकांश खाड़ी देशों से ईरान पर ताबड़तोड़ हमले किए जा रहे है। ईरान पर खाड़ी देशों से हमले होने के बाद अमेरिका को युद्ध में मजबूती मिली है। खाड़ी देशों से हमला करना अमेरिका के लिए आसान काम है। हालांकि ईरान ने भी खाड़ी के मुस्लिम देशों पर जवाबी कार्यवाही की है। जो नेता और मीडिया भारत में चढ़ावा चोरी के प्रकरण में अयोध्या के राम मंदिर की छवि खराब कर रहे हैं, उन्हें अब खाड़ी के मुस्लिम देशों और कट्टरपंथी इस्लामिक देश ईरान के बीच भीषण युद्ध को देख लेना चाहिए। चढ़ावा चोरी की आड़ में सुनियोजित तरीके से भारत की सनातन संस्कृति को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। जबकि अयोध्या में मंदिर का निर्माण पांच सौ वर्ष के संघर्ष के बाद हो पाया है। अयोध्या का राम मंदिर सीमेंट कंक्रीट की इमारत नहीं बल्कि भारत के सौ करोड़ से ज्यादा हिंदुओं की आस्था का केंद्र है। भगवान राम के जन्मस्थान पर मंदिर बनने से हर सनातनी गौरवान्ति है। जो नेता और मीडिया चढ़ावा चोरी की आड़ में राम मंदिर की छवि खराब कर रहे हैं, उन्हें अपनी हरकतों से बाज आना चाहिए। दुनिया में सनातन धर्म ही एक ऐसा धर्म है जो सभी धर्मों और विचारों को साथ लेकर चलता है। जबकि वहीं अन्य धर्मों में एक ही धर्म के लोगों में जबरदस्त विरोधाभास है और इसका उदाहरण खाड़ी के देशों और ईरान के बीच हो रहा युद्ध है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 12-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

    12 Jul, 2026

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    कांग्रेस की तरह भाजपा के शासन में भी शिक्षकों के तबादले हो रहे हैं। यदि नेताओं की सिफारिशों से ही तबादले होने हैं तो फिर शिक्षकों को भी राजनीति में आने की छूट दी जाए-विजय सोनी शिक्षक नेता। ================ राजस्थान में स्कूली शिक्षा के शिक्षकों के तबादले बड़ी संख्या में हुए है। ये तबादले किसी नीति के बगैर हुए है। तबादलों में भाजपा के नेताओं की सिफारिशों को प्राथमिकता दी गई है। यहां तक कि भाजपा के जयपुर स्थित मुख्यालय में शिक्षकों ने अपने तबादले का प्रार्थना पत्र जमा करवाया है। सरकार में बैठे मंत्रियों ने भी माना है कि हजारों शिक्षक डिजायर के लिए उनके पास आ रहे हैं। यानी शिक्षकों के तबादले जिस प्रकार कांग्रेस के शासन में होते थे, उसी प्रकार भाजपा के शासन में भी हो रहे हैं। कांग्रेस के शासन में भाजपा के नेता तबादले में राजनीतिक द्वेषता के आरोप लगाते थे। वही अब कांग्रेस के नेता राजनीतिक द्वेषता से तबादला करने के आरोप लगा रहे हैं। कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा का तो कहना है कि संघ और भाजपा की विचारधारा वाले शिक्षकों को उनकी इच्छानुसार पोस्टिंग दी गई है। जबकि कांग्रेस विचारधारा वाले शिक्षकों का तबादला दूर कर दिया गया है। डोटासरा ने अपने निर्वाचन क्षेत्र लक्ष्मणगढ़ (सीकर) के तबादलों के आंकड़े भी प्रस्तुत किए हैं। राजनीति में आने की छूट मिले: राजस्थान शिक्षक संघ (राधाकृष्ण) के प्रदेश अध्यक्ष विजय सोनी ने कहा कि यदि नेताओं की सिफारिश से ही तबादले हो रहे हैं तो फिर शिक्षकों को भी राजनीति करने की छूट दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि एक ओर सेवा नियमों में उल्लेख है कि कोई भी सरकारी कर्मचारी राजनीतिक गतिविधियों में भाग नहीं लेगा, लेकिन अब जब नेताओं की सिफारिशों से ही तबादले हो रहे हैं तो फिर शिक्षकों को भी राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेने की छूट मिलनी चाहिए। वैसे भी शिक्षक सभी प्रकार के कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार यूनिवर्सिटी के शिक्षकों को राजनीति में भाग लेने की छूट है, उसी प्रकार स्कूली शिक्षकों को भी छूट मिलनी चाहिए। विजय ने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार ने भी बगैर कोई नीति बनाए शिक्षकों के तबादले किए और अब भाजपा के शासन में भी बगैर नीति के ही तबादले हो रहे है। एक ओर कहा जा रहा है कि तृतीय श्रेणी के शिक्षकों के तबादले पर रोक है, लेकिन वही इस श्रेणी के कंप्यूटर अनुदेशकों के तबादले धड़ल्ले से किए जा रहे है। तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादला न करने के पीछे तर्क दिया जाता है कि इन शिक्षकों की वरिष्ठता जिला स्तर पर निर्धारित होती है। यदि एक जिले से दूर जिले में तबादला किया गया तो वरिष्ठता प्रभावित होगी, लेकिन इसके उलट वरिष्ठ अध्यापकों के तबादले किए गए है। जबकि वरिष्ठ अध्यापकों की वरिष्ठता संभाग स्तर पर निर्धारित होती है। वरिष्ठ अध्यापकों के तबादले एक संभाग से दूसरे संभाग में किए गए है। सोनी ने कहा कि चूंकि तबादला नीति नहीं है, इसलिए तबादलों में अनेक विसंगतियां हो रही है। विजय सोनी ने प्रदेश भर में शिक्षकों को राजनीति करने को लेकर अभियान चला रखा है। इस संबंध में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को भी पत्र दिया गया है। मोबाइल नंबर 9829087912 पर इस अभियान की जानकारी विजय सोनी से ली जा सकती है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 10-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

    10 Jul, 2026

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  • अजमेर के निकट ऊंटड़ा में होगा मुस्लिम सामूहिक निकाह सम्मेलन। पंजीयन 15 जुलाई से। सामाजिक संस्था इदरा-ए- दावातुल हक की ओर से 65 हजार रुपए का घरेलू सामान और 21 हजार रुपए का सरकारी अनुदान प्रत्येक जोड़े को मिलेगा। ================ अजमेर के निकट ऊंटड़ा गांव में अगले वर्ष 6 जनवरी 2027 को मुस्लिम सामूहिक निकाह सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इसके लिए 15 जुलाई से 15 अगस्त 2026 तक पंजीयन किया जाएगा। सामाजिक संस्था इदारा-ए-दावातुल हक के मौलाना अयूम कासमी ने बताया कि संस्था की ओर से पिछले सात वर्षों से प्रति वर्ष मुस्लिम सामूहिक निकाह सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इस वर्ष भी 6 जनवरी 2027 को यह सम्मेलन होगा। सम्मेलन में पंजीयन करवाने वाले जोड़ों को संस्था की ओर से करीब 65 हजार रुपए का घरेलू सामान भी दिया जाएगा। इसके साथ ही दोनों पक्षों की ओर से आए मेहमानों के भोजन की भी निशुल्क व्यवस्था संस्था की ओर से की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस सामूहिक निकाह वाले दिन ही निकाह का सर्टिफिकेट भी उपलब्ध करवा दिया जाएगा। इस सर्टिफिकेट के आधार पर ही सरकार से 21 हजार रुपए का अनुदान भी लिया जा सकेगा। सरकारी अनुदान दिलवाने में संस्था का पूरा सहयोग रहेगा। उन्होंने बताया कि समाज में निकाह पर अधिक खर्च होने लगा है, इसलिए संस्था प्रतिपक्ष मुस्लिम समाज के जरूरतमंद परिवारों के लिए सामूहिक निकाह का आयोजन कर रहा है। सामूहिक निकाह वाले दिन देश भर के मुस्लिम विद्वान भी अपने विचारों को रखते हैं। मौलाना कासमी ने जरूरतमंद परिवारों से अपील की है कि वे 15 अगस्त तक पंजीयन करवा ले क्योंकि 15 अगस्त के बाद पंजीयन करना संभव नहीं होगा। इस सामूहिक निकाह के बारे में और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9950578600 पर मौलाना अयूब कासमी तथा 9636434373 पर मोहम्मद अलताफ से ली जा सकती है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 12-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
  • आलोचनाओं का स्वयं मौका देते हैं राहुल गांधी। भारत में थोड़ी राजनीतिक गतिविधियां करने के बाद विश्राम के लिए विदेश चले जाते हैं। ================ कांग्रेस के सर्वोच्च नेता और लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी एक बार फिर विदेश दौरे पर है। आमतौर पर विदेश में राहुल गांधी की गतिविधियां सार्वजनिक नहीं होती। राहुल गांधी के बार बार विदेश दौरों को लेकर भाजपा और अन्य दलों के नेता विरोध करते हैं। असल में आलोचनाओं का अवसर राहुल गांधी स्वयं देते हैं। बार बार विदेश चले जाने से ऐसा प्रदर्शित होता है कि राहुल गांधी भारत में पार्ट टाइम राजनीति करते हैं। राहुल गांधी सिर्फ कांग्रेस के नेता ही नहीं है, बल्कि लोकसभा में पूरे विपक्ष के नेता भी है। ऐसे में राहुल गांधी की जिम्मेदारी है कि वे सरकार की नीतियों को लेकर विपक्ष के साथ आंदोलन करे। यह बताए कि मोदी सरकार की नीतियों कैसे जन विरोधी है, लेकिन राहुल गांधी बार बार जिस तरह विदेश यात्रा पर चले जाते हैं, उस विपक्षी दल भी एकजुट नहीं हो पाते। राहुल गांधी के प्रतिपक्ष का नेता होते हुए ही पश्चिम बंगाल की टीएमसी के 28 में से 20 लोकसभा के सांसदों ने अलग दल बना लिया। इसी प्रकार महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने भी दूसरी बार बड़ी बगावत हो गई। सवाल उठता है कि क्या प्रतिपक्ष के नेता के नाते विपक्ष को एकजुट रखने की जिम्मेदारी राहुल गांधी की नहीं है? पंजाब में भी जिस तरह आम आदमी पार्टी में बगावत हुई उससे राहुल गांधी के प्रतिपक्ष के नेता होने पर सवाल उठते हैं। आमतौर पर देखा गया है कि राहुल गांधी भारत में थोड़ी राजनीतिक गतिविधियां करने के बाद विश्राम के लिए विदेश चले जाते हैं। भारत में 20 जुलाई से संसद का मानसून सत्र शुरू हो रहा है। अच्छा होता कि राहुल गांधी प्रतिपक्ष के नेता के नाते विपक्षी दलों के साथ बैठकर सरकार के विरुद्ध कोई रणनीति बनाते, लेकिन मानसून सत्र शुरू होने से पहले राहुल गांधी विदेश चले गए। देश के युवा वर्ग को मोदी सरकार के विरुद्ध जगाने के लिए राहुल गांधी ने छात्रों की गूंज अभियान शुरू किया था। कोटा के बाद राहुल को बिहार के पटना में दूसरा कार्यक्रम करना था, लेकिन राहुल गांधी का अब पटना वाला कार्यक्रम रद्द हो गया है। कहा जा रहा है कि पटना की जगह देहरादून में कार्यक्रम होगा। असल में राहुल गांधी के बार बार विदेश चले जाने के कारण कांग्रेस संगठन में भी असमंजस की स्थिति रहती है। लोकतंत्र में विपक्ष का मजबूत होना जरूरी है, लेकिन इसके लिए विपक्षी नेताओं को जन आंदोलन करने पड़ेंगे। जन आंदोलन तभी सफल हो सकते हैं, जब विरोधी दल के नेता वर्षभर सक्रिय रहे। बार बार विदेश जाने से भारत में मोदी सरकार के विरुद्ध मजबूत विपक्षी दल खड़े नहीं हो सकते। राहुल गांधी को इस मामले में उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव से सीख लेनी चाहिए। यादव वर्ष भर अपने ही उत्तर प्रदेश में रहकर विपक्षी नेता की भूमिका निभाते हैं। S.P.MITTAL BLOGGER ( 12-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
  • चढ़ावा चोरी प्रकरण को लेकर अयोध्या के राम मंदिर की छवि खराब करने वाले नेता और मीडिया अब खाड़ी के मुस्लिम देशों और कट्टरपंथी इस्लामिक देश ईरान के भीषण युद्ध को देख लें। ================ अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जो युद्ध चल रहा है, उसमें 11 जुलाई को एक नया मोड़ तब आ गया, जब खाड़ी के मुस्लिम देश कुवैत, बहरीन आदि से भी कट्टरपंथी इस्लामिक देश ईरान पर भीषण हमले शुरू हो गए है। यह सही है कि खाड़ी देशों में अमेरिका के सैन्य ठिकाने हैं, लेकिन अब तक खाड़ी देशों से ईरान पर बड़े हमले नहीं किए जा रहे थे। रणनीति के तहत अरब सागर में खड़े अमेरिकी जहाजों और इजरायल से मिसाइलों के जरिए ही ईरान पर हमले किए जा रहे थे। लेकिन अब अमेरिका ने अपने समर्थक खाड़ी के मुस्लिम देशों को भी युद्ध करने के लिए मैदान में खड़ा कर दिया है। 11 जुलाई से अधिकांश खाड़ी देशों से ईरान पर ताबड़तोड़ हमले किए जा रहे है। ईरान पर खाड़ी देशों से हमले होने के बाद अमेरिका को युद्ध में मजबूती मिली है। खाड़ी देशों से हमला करना अमेरिका के लिए आसान काम है। हालांकि ईरान ने भी खाड़ी के मुस्लिम देशों पर जवाबी कार्यवाही की है। जो नेता और मीडिया भारत में चढ़ावा चोरी के प्रकरण में अयोध्या के राम मंदिर की छवि खराब कर रहे हैं, उन्हें अब खाड़ी के मुस्लिम देशों और कट्टरपंथी इस्लामिक देश ईरान के बीच भीषण युद्ध को देख लेना चाहिए। चढ़ावा चोरी की आड़ में सुनियोजित तरीके से भारत की सनातन संस्कृति को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। जबकि अयोध्या में मंदिर का निर्माण पांच सौ वर्ष के संघर्ष के बाद हो पाया है। अयोध्या का राम मंदिर सीमेंट कंक्रीट की इमारत नहीं बल्कि भारत के सौ करोड़ से ज्यादा हिंदुओं की आस्था का केंद्र है। भगवान राम के जन्मस्थान पर मंदिर बनने से हर सनातनी गौरवान्ति है। जो नेता और मीडिया चढ़ावा चोरी की आड़ में राम मंदिर की छवि खराब कर रहे हैं, उन्हें अपनी हरकतों से बाज आना चाहिए। दुनिया में सनातन धर्म ही एक ऐसा धर्म है जो सभी धर्मों और विचारों को साथ लेकर चलता है। जबकि वहीं अन्य धर्मों में एक ही धर्म के लोगों में जबरदस्त विरोधाभास है और इसका उदाहरण खाड़ी के देशों और ईरान के बीच हो रहा युद्ध है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 12-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
  • कांग्रेस की तरह भाजपा के शासन में भी शिक्षकों के तबादले हो रहे हैं। यदि नेताओं की सिफारिशों से ही तबादले होने हैं तो फिर शिक्षकों को भी राजनीति में आने की छूट दी जाए-विजय सोनी शिक्षक नेता। ================ राजस्थान में स्कूली शिक्षा के शिक्षकों के तबादले बड़ी संख्या में हुए है। ये तबादले किसी नीति के बगैर हुए है। तबादलों में भाजपा के नेताओं की सिफारिशों को प्राथमिकता दी गई है। यहां तक कि भाजपा के जयपुर स्थित मुख्यालय में शिक्षकों ने अपने तबादले का प्रार्थना पत्र जमा करवाया है। सरकार में बैठे मंत्रियों ने भी माना है कि हजारों शिक्षक डिजायर के लिए उनके पास आ रहे हैं। यानी शिक्षकों के तबादले जिस प्रकार कांग्रेस के शासन में होते थे, उसी प्रकार भाजपा के शासन में भी हो रहे हैं। कांग्रेस के शासन में भाजपा के नेता तबादले में राजनीतिक द्वेषता के आरोप लगाते थे। वही अब कांग्रेस के नेता राजनीतिक द्वेषता से तबादला करने के आरोप लगा रहे हैं। कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा का तो कहना है कि संघ और भाजपा की विचारधारा वाले शिक्षकों को उनकी इच्छानुसार पोस्टिंग दी गई है। जबकि कांग्रेस विचारधारा वाले शिक्षकों का तबादला दूर कर दिया गया है। डोटासरा ने अपने निर्वाचन क्षेत्र लक्ष्मणगढ़ (सीकर) के तबादलों के आंकड़े भी प्रस्तुत किए हैं। राजनीति में आने की छूट मिले: राजस्थान शिक्षक संघ (राधाकृष्ण) के प्रदेश अध्यक्ष विजय सोनी ने कहा कि यदि नेताओं की सिफारिश से ही तबादले हो रहे हैं तो फिर शिक्षकों को भी राजनीति करने की छूट दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि एक ओर सेवा नियमों में उल्लेख है कि कोई भी सरकारी कर्मचारी राजनीतिक गतिविधियों में भाग नहीं लेगा, लेकिन अब जब नेताओं की सिफारिशों से ही तबादले हो रहे हैं तो फिर शिक्षकों को भी राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेने की छूट मिलनी चाहिए। वैसे भी शिक्षक सभी प्रकार के कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार यूनिवर्सिटी के शिक्षकों को राजनीति में भाग लेने की छूट है, उसी प्रकार स्कूली शिक्षकों को भी छूट मिलनी चाहिए। विजय ने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार ने भी बगैर कोई नीति बनाए शिक्षकों के तबादले किए और अब भाजपा के शासन में भी बगैर नीति के ही तबादले हो रहे है। एक ओर कहा जा रहा है कि तृतीय श्रेणी के शिक्षकों के तबादले पर रोक है, लेकिन वही इस श्रेणी के कंप्यूटर अनुदेशकों के तबादले धड़ल्ले से किए जा रहे है। तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादला न करने के पीछे तर्क दिया जाता है कि इन शिक्षकों की वरिष्ठता जिला स्तर पर निर्धारित होती है। यदि एक जिले से दूर जिले में तबादला किया गया तो वरिष्ठता प्रभावित होगी, लेकिन इसके उलट वरिष्ठ अध्यापकों के तबादले किए गए है। जबकि वरिष्ठ अध्यापकों की वरिष्ठता संभाग स्तर पर निर्धारित होती है। वरिष्ठ अध्यापकों के तबादले एक संभाग से दूसरे संभाग में किए गए है। सोनी ने कहा कि चूंकि तबादला नीति नहीं है, इसलिए तबादलों में अनेक विसंगतियां हो रही है। विजय सोनी ने प्रदेश भर में शिक्षकों को राजनीति करने को लेकर अभियान चला रखा है। इस संबंध में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को भी पत्र दिया गया है। मोबाइल नंबर 9829087912 पर इस अभियान की जानकारी विजय सोनी से ली जा सकती है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 10-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
  • मोदी के नेतृत्व वाला एनडीए अब राज्यसभा में दो तिहाई बहुमत से मात्र 13 सीट दूर, लेकिन साधारण बहुमत से 28 सीटें ज्यादा। राज्यसभा से इस्तीफा देने वाले टीएमसी के तीनों सांसद अब पश्चिम बंगाल से भाजपा के उम्मीदवार। ममता बनर्जी का सफाया। ================ पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद टीएमसी के राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक ने इस्तीफा दे दिया था। लेकिन अब इन तीनों को भाजपा ने पश्चिम बंगाल से ही अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। बंगाल में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए 24 जुलाई को उप-चुनाव होना है। चूंकि विधानसभा में भाजपा के 208 विधायक है, इसलिए इन तीनों उम्मीदवारों की जीत तय है। यानी टीएमसी के इन नेताओं ने भाजपा के प्रति जो वफादारी दिखाई थी, उसका पुरस्कार अब इन तीनों को मिल गया है। राज्यसभा में मौजूदा समय में भाजपा के 113 सांसद हैं। इन तीनों की जीत के बाद संख्या 16 हो जाएगी। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए के राज्यसभा में सांसदों की संख्या 148 से बढ़कर 151 हो जाएगी। साधारण बहुमत के लिए 123 सदस्यों की जरूरत होती है यानी अब एनडीए के पास साधारण बहुमत से 28 सीटें ज्यादा है। राज्यसभा में दो तिहाई बहुमत के लिए 1645 सांसद चाहिए, जबकि एनडीए के पास 24 जुलाई के बाद 151 सांसद हो जाएंगे। यानी अब राज्यसभा में एनडीए दो तिहाई बहुमत से मात्र 13 सीट दूर है। कहा जा रहा है कि कई क्षेत्रीय दलों के सांसद एनडीए को समर्थन देने को तैयार है। जिस तरह एनडीए राज्यसभा में दो तिहाई बहुमत की ओर बढ़ रहा है,उससे भाजपा बेहद उत्साहित है। लोकसभा में भी एनडीए दो तिहाई बहुमत की ओर बढ़ रहे है। हाल ही में टीएमसी और आम आदमी पार्टी के सांसदों ने जिस तरह दल बदल किया है, उससे एनडीए की स्थिति और मजबूत हुई है। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी के लोकसभा के 27 सांसदों में से 20 ने अलग दल बना लिया है। अब ये सांसद लोकसभा में एनडीए को ही समर्थन दे रहे है। ममता बनर्जी को लोकसभा और राज्यसभा में ही झटका नहीं लगा है बल्कि विधानसभा में भी झटका लगा है। हाल ही में चुनाव में ममता बनर्जी के 80 विधायक बने, लेकिन इसमें से 60 विधायकों ने अलग दल बना लिया। यानी अब ममता बनर्जी के पास 20 विधायक रह गए है। देखा जाए तो पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी का पूरा सफाया हो गया है। जो ममता बनर्जी मुख्यमंत्री रहते हुए देश की संवैधानिक संस्थाओं का मजाक उड़ा रही थी, वही ममता बनर्जी अब बेहद कमजोर हो गई है। एक तरह से ममता बनर्जी को टीएमसी का पश्चिम बंगाल में कोई वजूद ही नहीं रहा है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 10-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

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