शहरी निकायों के वार्ड चुनाव में उम्मीदवारों की घोषणा करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही भाजपा-कांग्रेस। अब 3 सितंबर को निर्वाचन अधिकारी के समक्ष ही जमा होंगे सिंबल। नामांकन की अंतिम तिथि 31 अगस्त है। अजमेर में ज्ञान सारस्वत ने बताया कि वायदा भी मायने रखता है। भाजपाई ही निभा रहे हैं कांग्रेस की भूमिका। दारा का कार्टून। ================ राजस्थान के 309 शहरी निकायों के 10 हजार 245 वार्डों के पार्षद पद के चुनाव के लिए 9 और 11 सितंबर को मतदान होना है। नामांकन की अंतिम तिथि 31 अगस्त है। 30 अगस्त को रविवार का अवकाश होने के कारण नामांकन नहीं हो सके। सत्तारूढ़ भाजपा और प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस में टिकट बंटवारे को लेकर जो जूतम पैजार हो रही है उसके कारण दोनों ही दल उम्मीदवारों की घोषणा करने की हिम्मत नहीं कर पा रहे है। आमतौर पर नामांकन के साथ ही पार्टी का सिंबल (चुनाव चिह्न) जमा करवाया जाता है। लेकिन अभी तक भी किसी भी दल ने अपने उम्मीदवारों को सिंबल नहीं दिया है। दोनों ही दलों की यह स्थिति बताती है कि संगठन का कोई वजूद नहीं है। यदि संगठन का वजूद होता तो नामांकन वाले दिन ही अधिकृत उम्मीदवार की घोषणा कर दी जाती। जानकारों की माने तो अब 3 सितंबर को सीधे निर्वाचन अधिकारी के समक्ष ही सामूहिक तौर पर अधिकृत प्रत्याशी का सिंबल जमा करवाया जाएगा। 3 सितंबर को ही नाम वापसी हो सकेगी। निर्वाचन विभाग के चुनाव की जो प्रक्रिया घोषित की है उसके अनुसार 27 से 31 अगस्त तक नामांकन होंगे और एक सितंबर को सभी नामांकन पत्रों की जांच होगी। जो नामांकन पत्र अधूरे होंगे उन्हें निर्वाचन अधिकारी निरस्त कर देंगे। 3 सितंबर को दोपहर 3 बजे तक नामांकन वापस लेने के बाद निर्वाचन अधिकारी चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की घोषणा करेंगे। निज राजनीतिक दलों के सिंबल प्राप्त हो जाएंगे, वहां पार्टी के उम्मीदवारों को चुनाव चिन्ह आवंटित कर दिया जाएगा। जबकि शेष निर्दलीय उम्मीदवारों को 4 सितंबर को चुनाव चिन्ह आवंटित होंगे। 9 व 11 सितंबर को मतदान के बाद 14 सितंबर को परिणाम घोषित किया जाएगा। चुनावी वादे के मायने: अजमेर नगर निगम के तीन बार पार्षद रहे ज्ञान सारस्वत ने प्रदर्शित किया है कि राजनीति में वादा भी मायने रखता है। सारस्वत ने घोषणा की है कि वादे के मुताबिक वे इस बार वार्ड पार्षद का चुनाव नहीं लड़ेंगे। सारस्वत ने बताया कि गत बार उन्होंने अजमेर उत्तर विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था। तब उन्होंने मतदाताओं से वादा किया था कि नगर निगम का चुनाव नहीं लड़ेंगे भले ही वे विधानसभा चुनाव हार गए, लेकिन अपने वादे पर कायम है। चूंकि उन्होंने वादा किया इसलिए वे अथवा उनके परिवार का कोई भी सदस्य चुनाव नहीं लड़ेगा। मालूम हो कि सारस्वत ने विधानसभा के मौजूदा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी के खिलाफ चुनाव लड़ा था और 26 हजार वोट प्राप्त किए थे। अब सारस्वत ने चुनाव न लड़ने की घोषणा की है। तब यह देखना होगा कि सारस्वत निगम चुनाव में राजनीतिक भूमिका किस प्रकार निभाते हैं। विधानसभा का चुनाव बागी उम्मीदवार के रूप में लड़ने के कारण सारस्वत को भाजपा से निष्कासित कर दिया था। सारस्वत अभी तक भाजपा से निष्कासित है। हो सकता है कि सारस्वत के प्रभाव को देखते हुए पुन: भाजपा में शामिल कर लिया जाए। भाजपाई कांग्रेस की भूमिका में: अजमेर नगर निगम के पूर्व मेयर धर्मेन्द्र गहलोत इन दिनों विपक्ष के नेता की भूमिका में है। गहलोत के निशाने पर क्षेत्रीय विधायक वासुदेव देवनानी है। गहलोत ने अपनी पत्नी हेमा गहलोत का वार्ड 4 से नामांकन भी करवा दिया है। दारा का कार्टून: स्थानीय निकाय के चुनावों को लेकर राजनीतिक दलों में टिकटों को लेकर जो जूतम पैजार हो रही है उस पर कार्टूनिस्ट जसवंत दारा ने सटीक कार्टून बनाया। इस कार्टून को मेरे फेसबुक पेज www.facebook.com/SPMittalblog पर देखा जा सकता है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 29-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

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