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शहीदों को पूरा सम्मान नहीं दे रहा है राजस्थान का शिक्षा विभाग।

by Sp mittal · July 4, 2018

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    मनुस्मृति की आड़ में जातियों के भेदभाव का जो जहर अंग्रेजों ने घोला, वो ही काम अब राहुल गांधी कर रहे हैं। दलितों के साथ भेदभाव करने का झूठ पुष्कर में पकड़ा गया। सनातन संस्कृति में तो वसुधैव कुटुम्बकम यानी संपूर्ण पृथ्वी ही परिवार है कि अवधारणा है। ============= कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे और मौजूदा समय में लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी इन दिनों देश भर में जातिवाद का जहर घोल रहे हैं। 29 अगस्त को दिल्ली में एक वीडियो ब्रीफिंग में राहुल गांधी ने दलितों के साथ भेदभाव के जो उदाहरण दिए उन में गत 8 अगस्त को उत्तराखंड की घटना का भी उल्लेख किया। राहुल गांधी का आरोप रहा कि जिस मंच से कांग्रेस के राट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े ने भाषण दिया, उस मंच को कुछ हिंदूवादियों ने शुद्धिकरण के नाम पर हवन यज्ञ किया। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि खडग़े दलित हैं। राहुल के इस भेदभाव के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराया। इसी ब्रीफिंग में उत्तर प्रदेश के कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने आरोप लगाया कि रामनाथ कोविंद जब राष्ट्रपति थे, तब उन्होंने 14 मई 2018 को अजमेर के पुष्कर तीर्थ की यात्रा की थी। तब दलित होने के कारण कोविंद और उनके परिवार के सदस्यों को ब्रह्मा मंदिर में प्रवेश नहीं दिया गया। गौतम द्वारा बताई गई, इस घटना पर राहुल गांधी ने भी सहमति जताई, लेकिन पुष्कर के तीर्थ पुरोहितों और ब्रह्मा मंदिर के मुख्यपुजारी गोपाल कृष्ण वशिष्ठ ने गौतम के कथन को सफेद झूठ बताया है। पुरोहित संघ के अध्यक्ष पुष्कर नारायण आदाली और वशिष्ठ ने बताया कि 14 मई 2018 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद पत्नी सविता कोविंद और पुत्री स्वाति कोविंद को सनातन धर्म की वैदिक परपंरा के अनुरूप पवित्र सरोवर के घाट पर पूजा अर्चना करवाई गई। सरोवर की पूजा अर्चना के बाद तीनों सदस्य ब्रह्मा मंदिर के दर्शन के लिए मंदिर परिसर में आए, लेकिन सविता कोविंद के घुटने की तकलीफ के कारण मंदिर की सीढिय़ा चढऩे में परेशानी हुई। कुछ सीढिय़ा चढऩे के बाद सविता कोविंद किनारे बैठ गई। इसी स्थान पर राष्ट्रपति रामनाक कोविंद भी बैठे। चंूकि सविता कोविंद के लिए सीढिय़ा चढऩा मुश्किल हो रहा था, इसलिए मंदिर के पुजारियों ने सीढियों पर ही पूजा करवाई। राष्ट्रपति दम्पत्ति ने सीढियों पर खड़े हो कर ही ब्रह्मा जी के दर्शन किए, जबकि पुत्री स्वाति कोविंद ने मंदिर के अंदर जाकर दर्शन किए। स्वाति कोविंद ने ब्रह्मा जी की प्रतिमा की परिक्रमा भी लगाई। पुजारी वशिष्ठ और तीर्थ पुरोहित संघ के अध्यक्ष आदाली ने कहा कि पुष्कर आने वाले किसी भी यात्री के साथ जाति के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता। यहां सभी जातियों के श्रद्धालुओं को सनातन संस्कृति के अनुरूप पूजा अर्चना करवाई जाती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राजेंद्र पाल गौतम ने राहुल गांधी की उपस्थिति में पुष्कर तीर्थ को बदनाम करने वाला काम किया है। इन दोनों को अपने कृत्य के लिए माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की पत्नी की परेशानी के बाद ही मंदिर परिसर में लिफ्ट लगाई गई है। अब बुजुर्ग श्रद्धालु भी लिफ्ट से ब्रह्माजी के दर्शन कर रहे हैं। वसुधैव कुटुम्बकम्: असल में राहुल गांधी वो काम कर रहे है जो अंग्रेजों ने भारत में शासन करने के लिए किया था। अंग्रेजों ने हिंदू धर्म को विभाजित करने के लिए ही जातियों के भेदभाव का जहर घोला। इतिहास बताता है कि मनुस्मृति का अंग्रेजी अनुवाद 1783-84 में कोलकाता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस विलियम जॉनसन ने किया, लेकिन तब मनुस्मृति की मूल प्रति उपलब्ध नहीं हुई। विलियम जॉनसन ने अपने नजरिए से मनुस्मृति की व्याख्या की। असल में यह हिंदू समाज को बांटने का षडय़ंत्र था। जो काम अंग्रेजों ने किया वही काम अब राहुल गांधी कर रहे है। राहुल गांधी को यह भी समझना चाहिए जो आज जिस मनुस्मृति की आलोचना राहुल गांधी कर रहे है, उसी मनुस्मृति का संस्करण 1972 में भारती विद्या भवन द्वारा तब प्रकाशित किया गया, जब श्रीमती इंदिरा गांधी देश की प्रधानमंत्री थी। इसी प्रकार राजीव गांधी के प्रधानमंत्री रहते हुए 1985 में भारत सरकार के सहयोग से मनुस्मृति का नया संस्करण प्रकाशित हुआ। यदि मनुस्मृति ग्रंथ इतना खराब था तो फिर श्रीमती इंदिरा गांधी और राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री रहते हुए क्यों प्रकाशित करवाया? राहुल गांधी अपने राजनीतिक स्वार्थों के खातिर भले ही हिंदू समाज को बांटने का काम करे, लेकिन भारत की सनातन संस्कृति की धारणा तो वसुधैव कुटुम्बकम् यानी संपूर्ण पृथ्वी ही परिवार की शिक्षा देती है। हमारे ग्रंथ शांति विज्ञान, चिकित्सा, दर्शन और मानवता के असली स्त्रोत है। जब हम पूरी पृथ्वी को अपना परिवार मानते हें, तब हिंदू समाज जाति के आधार पर किसी से भी भेदभाव नहीं कर सकता। आज राष्ट्रपति के पद पर आदिवासी समाज की महिला विराजमान है। वहीं प्रधानमंत्री के तौर पर पिछड़ी जाति के ही नरेंद्र मोदी है। भारत में कभी भी जाति के आधार पर भेदभाव नहीं हुआ। S.P.MITTAL BLOGGER ( 31-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

    2 Sep, 2026

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    शहरी निकायों के वार्ड चुनाव में उम्मीदवारों की घोषणा करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही भाजपा-कांग्रेस। अब 3 सितंबर को निर्वाचन अधिकारी के समक्ष ही जमा होंगे सिंबल। नामांकन की अंतिम तिथि 31 अगस्त है। अजमेर में ज्ञान सारस्वत ने बताया कि वायदा भी मायने रखता है। भाजपाई ही निभा रहे हैं कांग्रेस की भूमिका। दारा का कार्टून। ================ राजस्थान के 309 शहरी निकायों के 10 हजार 245 वार्डों के पार्षद पद के चुनाव के लिए 9 और 11 सितंबर को मतदान होना है। नामांकन की अंतिम तिथि 31 अगस्त है। 30 अगस्त को रविवार का अवकाश होने के कारण नामांकन नहीं हो सके। सत्तारूढ़ भाजपा और प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस में टिकट बंटवारे को लेकर जो जूतम पैजार हो रही है उसके कारण दोनों ही दल उम्मीदवारों की घोषणा करने की हिम्मत नहीं कर पा रहे है। आमतौर पर नामांकन के साथ ही पार्टी का सिंबल (चुनाव चिह्न) जमा करवाया जाता है। लेकिन अभी तक भी किसी भी दल ने अपने उम्मीदवारों को सिंबल नहीं दिया है। दोनों ही दलों की यह स्थिति बताती है कि संगठन का कोई वजूद नहीं है। यदि संगठन का वजूद होता तो नामांकन वाले दिन ही अधिकृत उम्मीदवार की घोषणा कर दी जाती। जानकारों की माने तो अब 3 सितंबर को सीधे निर्वाचन अधिकारी के समक्ष ही सामूहिक तौर पर अधिकृत प्रत्याशी का सिंबल जमा करवाया जाएगा। 3 सितंबर को ही नाम वापसी हो सकेगी। निर्वाचन विभाग के चुनाव की जो प्रक्रिया घोषित की है उसके अनुसार 27 से 31 अगस्त तक नामांकन होंगे और एक सितंबर को सभी नामांकन पत्रों की जांच होगी। जो नामांकन पत्र अधूरे होंगे उन्हें निर्वाचन अधिकारी निरस्त कर देंगे। 3 सितंबर को दोपहर 3 बजे तक नामांकन वापस लेने के बाद निर्वाचन अधिकारी चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की घोषणा करेंगे। निज राजनीतिक दलों के सिंबल प्राप्त हो जाएंगे, वहां पार्टी के उम्मीदवारों को चुनाव चिन्ह आवंटित कर दिया जाएगा। जबकि शेष निर्दलीय उम्मीदवारों को 4 सितंबर को चुनाव चिन्ह आवंटित होंगे। 9 व 11 सितंबर को मतदान के बाद 14 सितंबर को परिणाम घोषित किया जाएगा। चुनावी वादे के मायने: अजमेर नगर निगम के तीन बार पार्षद रहे ज्ञान सारस्वत ने प्रदर्शित किया है कि राजनीति में वादा भी मायने रखता है। सारस्वत ने घोषणा की है कि वादे के मुताबिक वे इस बार वार्ड पार्षद का चुनाव नहीं लड़ेंगे। सारस्वत ने बताया कि गत बार उन्होंने अजमेर उत्तर विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था। तब उन्होंने मतदाताओं से वादा किया था कि नगर निगम का चुनाव नहीं लड़ेंगे भले ही वे विधानसभा चुनाव हार गए, लेकिन अपने वादे पर कायम है। चूंकि उन्होंने वादा किया इसलिए वे अथवा उनके परिवार का कोई भी सदस्य चुनाव नहीं लड़ेगा। मालूम हो कि सारस्वत ने विधानसभा के मौजूदा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी के खिलाफ चुनाव लड़ा था और 26 हजार वोट प्राप्त किए थे। अब सारस्वत ने चुनाव न लड़ने की घोषणा की है। तब यह देखना होगा कि सारस्वत निगम चुनाव में राजनीतिक भूमिका किस प्रकार निभाते हैं। विधानसभा का चुनाव बागी उम्मीदवार के रूप में लड़ने के कारण सारस्वत को भाजपा से निष्कासित कर दिया था। सारस्वत अभी तक भाजपा से निष्कासित है। हो सकता है कि सारस्वत के प्रभाव को देखते हुए पुन: भाजपा में शामिल कर लिया जाए। भाजपाई कांग्रेस की भूमिका में: अजमेर नगर निगम के पूर्व मेयर धर्मेन्द्र गहलोत इन दिनों विपक्ष के नेता की भूमिका में है। गहलोत के निशाने पर क्षेत्रीय विधायक वासुदेव देवनानी है। गहलोत ने अपनी पत्नी हेमा गहलोत का वार्ड 4 से नामांकन भी करवा दिया है। दारा का कार्टून: स्थानीय निकाय के चुनावों को लेकर राजनीतिक दलों में टिकटों को लेकर जो जूतम पैजार हो रही है उस पर कार्टूनिस्ट जसवंत दारा ने सटीक कार्टून बनाया। इस कार्टून को मेरे फेसबुक पेज www.facebook.com/SPMittalblog पर देखा जा सकता है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 29-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

    2 Sep, 2026

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    भारत में कोई मुसलमान न रहे, ऐसा सोचने वाला हिन्दू नहीं हो सकता। मोहन भागवत के इस कथन के बाद मुसलमानों में संघ के प्रति धारणा बदलनी चाहिए। हिंदुओं के साथ रहने से ही मुसलमान सुरक्षित हैं। ================ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत इन दिनों अमेरिका की यात्रा पर है। इस यात्रा के दौरान ही 29 अगस्त को भागवत ने न्यूयॉर्क में आयोजित एक समारोह में वन वर्ल्ड वन ह्यूमैनिटी विषय पर बोलते हुए कहा कि अगर कोई हिन्दू यह सोचता है कि भारत में कोई मुसलमान नहीं होना चाहिए तो वह हिंदू नहीं हो सकता। अगर आप खुद को हिन्दू कहना चाहते हैं तो आपको यह मानना होगा कि सभी रास्ते एक ही लक्ष्य की ओर ले जाते हैं। हर इंसान की गरिमा है। इंसानों के बीच कोई भेदभाव संभव नहीं है। भागवत का यह कथन दर्शाता है कि संघ भारत में रहने वाले भारतीय मुसलमानों का विरोधी नहीं करता है। भारत में आमतौर पर मुसलमान संघ को विरोधी मानते हैं, लेकिन अब जब भागवत ने स्पष्ट कह दिया है कि मुसलमानों की उपस्थिति को न मानने वाला हिन्दू नहीं हो सकता है तो फिर मुसलमानों को संघ के प्रति अपनी धारणा बदलनी चाहिए। भागवत का यह कथन बहुत मायने रखते हैं कि इंसान में भेदभाव नहीं किया जा सकता। असल में मोहन भागवत सनातन धर्म के प्रबल समर्थक हैं और दुनिया में सनातन धर्म ही एकमात्र धर्म है, जिसमें दूसरे धर्म का भी सम्मान किया जाता है। इसलिए भागवत ने इंसान में भेदभाव करने की बात को नकारा है। भागवत ने न्यूयॉर्क में जो बयान दिया उसे भारत के आम मुसलमानों को समझना चाहिए। भागवत पहले भी ऐसे बयान दे चुके हैं, लेकिन अमेरिका में दिया बयान बहुत मायने रखता है। कांग्रेस और वामपंथी विचारधारा के जो लोग विदेशों में यह बताते है कि भारत में मुसलमानों के साथ भेदभाव होता है, उस प्रोपेगेंडा को भी भागवत ने समाप्त करने का काम किया है। भारत में संघ को ही हिंदू समुदाय का प्रतिनिधि माना जाता है। ऐसे में यदि संघ प्रमुख ने हिंदू और मुसलमान के बीच भाईचारे वाला संदेश दिया है तो यह भारत की एकता को भी प्रदर्शित करता है। भारत में जो राजनेता मुसलमानों की राजनीति करते हैं, उन्हें भी अब भागवत के बयान का स्वागत करना चाहिए। मुसलमान की सुरक्षा: मुसलमान भले ही किसी मुस्लिम देश में सुरक्षित न हो, लेकिन भारत में आम मुसलमान सुरक्षित है। इसका मुख्य कारण यही है कि 25 करोड़ मुसलमान 115 करोड़ हिंदुओं के साथ रह रहे है। यानी हिंदुओं के साथ रहने के कारण ही मुसलमान सुरक्षित है। जिस दिन मुसलमान को मुसलमान के साथ रहना पड़ेगा। उस दिन भारत के हालात भी ईरान, बांग्लादेश, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, इराक जैसे हो जाएंगे। मुसलमानों के वोटों पर राजनीति करने वाले राहुल गांधी, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, लालू प्रसाद यादव जैसे नेता माने या नहीं, लेकिन भारत में मुसलमान पूरे सम्मान और समृद्धि के साथ रह रहा है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 30-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

    2 Sep, 2026

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    88 वर्ष की उम्र में 81 कविताओं वाली 45वीं पुस्तक का प्रकाशन। विनोद सोमानी से देश के बुजुर्ग प्रेरणा ले-लोकबंधु कलेक्टर। 39 वर्ष की सेवा के बाद राजीव चतुर्वेदी शिक्षा बोर्ड से सेवानिवृत्त। ठाकुर किशन सिंह जी की पुण्य स्मृति में 30 अगस्त को सुंदरकांड पाठ। एक सितंबर को पुष्कर के ब्रह्मा सावित्री वेद विद्यालय में शिव जलधारा। ================ 29 अगस्त को अजमेर के जिला कलेक्टर लोकबंधु ने वयोवृद्ध साहित्यकार, कवि व लेखक डॉ. विनोद सोमानी ‘हंस के नवीन काव्य संग्रह मेरे एहसास का लोकार्पण किया। इस अवसर पर कलेक्टर ने कहा कि देश के बुजुर्गों को साहित्यकार सोमानी के हौंसले और जज्बे से प्रेरणा लेनी चाहिए। 88 वर्ष की उम्र में भी विनोद सोमानी लेखन का कार्य कर रहे हैं। यह दर्शाता है कि यदि व्यक्ति में हौसला और जज्बा हो तो उम्र कोई मायने नहीं रखती है। कलेक्टर ने सोमानी के पुत्र और मित्तल अस्पताल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. श्याम सोमानी की भी प्रशंसा की। कलेक्टर ने कहा कि अपने पिता के हौसले को बनाए रखने के लिए श्याम सोनी पुस्तक प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। कलेक्टर लोक बंधु ने संग्रह में शामिल 81 कविताओं पर रुझान व्यक्त करते हुए कहा कि मेरे अहसास काव्य संग्रह की प्रत्येक कविता पाठक को पढ़ते हुए स्वयं के अनुभव और अहसास से बरबस जोड़ देती है। कविता का रसास्वादन करते हुए लगता है कि जैसे स्वयं के जीवन के उतार-चढ़ाव, खट्टे-मीठे अनुभव, संघर्ष और हर्ष के क्षण, साहस व क्षोभ के विषय फिल्म की तरह दृश्य बन कर आंखों के सामने घूम रहे हों। साहित्यिक उपलब्धियां: डॉ विनोद सोमानी हंस राजस्थान के उन चुनिंदा साहित्यकारों में शामिल हैं जिन्हें वर्ष 2023-24 में राजस्थान साहित्य अकादमी का अमृत सम्मान प्राप्त हुआ है। अजयमेरु प्रेस क्लब अजमेर ने विशिष्ट साहित्यकार सम्मान वर्ष 2026 में प्रदान किया है। अब तक उनकी 43 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें कहानी, कविता संग्रह, उपन्यास, जीवनी, व्यंग्य संग्रह, राजस्थानी कृतिया, अनुवाद एवं चिंतनात्मक निबंध शामिल हैं। उनका लघु कविता संग्रह मेहर के मोती के बाद यह मेरे अहसास नया काव्य संग्रह प्रकाशित हुआ है। मेरे अहसास काव्य संग्रह को डॉ विनोद सोमानी हंस ने अपने मार्गदर्शक, स्नेह और प्रेरणा के पुंज श्रद्धेय मुन्नालाल मित्तल, स्वर्गीय डॉ शकुंतला मित्तल किरण, मित्तल परिवार के अनिल मित्तल, सुनील मित्तल, डॉ दिलीप मित्तल, मनोज मित्तल को समर्पित किया है। डॉ हंस के शब्दों में मित्तल परिवार ना सिर्फ उनके बल्कि उनके पुत्र डाॅ.श्याम सोमानी के भौतिक व जैविक जीवन वृतांत के अटूट आधार हैं। संपादकीय लेख : इस संग्रह का संपादकीय डॉ.हंस के पुत्र डॉ सीए श्याम सोमानी ने लिखा है। उन्होंने पिता की बढ़ती आयु के साथ स्वास्थ्य की चिंता को रेखांकित करते हुए उनकी सृजनात्मक कर्मठता को युवा साहित्यकारों के लिए प्रेरणास्पद बताया है। सोमानी ने लिखा कि पिताजी ने अपनी कविताओं में आम आदमी की पीड़ाओं और विषमताओं पर खुलकर कलम चलाई है। उनकी गजलें आस्था और आशा से भरी होती हैं। वे अपने लेखन में जीवन के हर विषय हर रंग को ईमानदारी से प्रकट करते हैं। इस नए काव्य संग्रह को भी पाठक पूर्व की तरह सराहेंगे। उन्होंने प्रकाशक साहित्यागार एवं उनकी टीम को सहयोग के लिए आभार जताया और शुभचिंतकों का धन्यवाद किया। मोबाइल नंबर 9314390005 पर श्याम सोमानी को शुभकामनाएं दी जा सकती है। राजीव चतुर्वेदी की सेवानिवृत्ति: 31 अगस्त को राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के सहायक निदेशक के पद से राजीव चतुर्वेदी की सेवानिवृत्ति हो रही है। चतुर्वेदी ने 39 वर्ष तक राजकीय सेवा में कार्य किया है। वे माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में सहायक निदेशक लेखा, सहायक निदेशक संस्थापक, जनसंपर्क अधिकारी के पदों पर कार्यरत रहे। साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने के कारण चतुर्वेदी को कई सम्मान भी मिले। सेवानिवृत्ति पर चतुर्वेदी ने बोर्ड के सभी कार्मिकों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि मौजूदा अध्यक्ष हनुमान सिंह राठौड़ के साथ भले ही अल्प समय तक ही काम करने का अवसर मिला हो लेकिन उन्हें राठौड़ से बहुत कुछ सीखने को मिला है। मोबाइल नंबर 9460091086 पर राजीव चतुर्वेदी को शुभकामनाएं दी जा सकती है। सुंदरकांड पाठ: किशन सिंह राठौड़ की पुण्य स्मृति में 30 अगस्त को रात 8 बजे से पुष्कर रोड स्थित बाबा रामदेव मंदिर के पीछे गणपति नगर नौसर घाटी में पीएस राठौड़ के निवास स्थान पर सुंदर कांड पाठ होगा। यह पाठ पुष्कर के पंडित रवि शर्मा करेंगे। पीएस राठौड़ ने बताया कि सुंदर कांड पाठ के साथ भजनों की प्रस्तुति भी होगी। पाठ के बारे में और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9413095156 पर पीएस राठौड़ से ली जा सकती है। शिव जलधारा: ट्रेवल्स और खाद्य तेलों के प्रमुख कारोबारी नवल किशोर खंडेलवाल की ओर से एक सितंबर को पुष्कर स्थित ब्रह्मा सावित्री वेद विद्यापीठ में विशेष शिव जलधारा का आयोजन किया गया है। खंडेलवाल ने बताया कि दोपहर एक बजे जलधारा एवं पूजन का कार्यक्रम होगा। शाम पांच बजे महाआरती के बाद प्रसादी का आयोजन किया गया है। इस धार्मिक आयोजन के बारे में और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9829163825 पर नवल किशोर खंडेलवाल से ली जा सकती है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 30-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

    2 Sep, 2026

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    आबादी में तेजी से हुए बदलाव का अध्ययन करने वाली नावलेकर कमेटी जल्द राजस्थान आएगी। सीमावर्ती क्षेत्रों के साथ साथ मेवात, जयपुर, अजमेर आदि का भी दौरा करेगी। ================ देश के कई राज्यों में आबादी तेजी से बढ़ी है। तेजी से आबादी बढ़ने की जांच के लिए केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रकाश प्रभाकर नावलेकर की अध्यक्षता में चार सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी ऐसे प्रदेशों में जाकर आबादी में वृद्धि के कारणों की जांच कर रही है। नावलेकर की अध्यक्षता वाली कमेटी जल्द ही राजस्थान का भी दौरा तय करेगी। जानकारी के मुताबिक कमेटी के सदस्य पाकिस्तान की सीमा से लगे बाड़मेर, जैसलमेर जिलों का तो दौरा करेगी ही साथ ही अलवर, भरतपुर के मेवात क्षेत्र और अजमेर, जयपुर का भी दौरा करेगी। असल में केंद्र सरकार को जानकारी मिली कि इन क्षेत्रों में आबादी में अचानक बदलाव हुआ है। यानी जन्म के आधार पर जनसंख्या नहीं बढ़ी। जनसंख्या बढ़ने का कारण घुसपैठ रहा। अचानक आबादी बढ़ जाने से इन क्षेत्रों में अपराध भी बढऩे लगे हैं। नावलेकर कमेटी ने हाल ही में जम्मू कश्मीर का दौरा किया। कमेटी ने जो आंकड़े जुटाए उसके अनुसार कश्मीर घाटी में रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों ने घुसपैठ की। अधिकृत तौर पर 10 हजार रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठिए पाए गए। जबकि अवैध तौर पर रह रहे घुसपैठियों की संख्या बहुत ज्यादा है। ऐसी ही स्थिति राजस्थान में भी बताई जा रही है। हरियाणा की सीमा से लगे अलवर और भरतपुर के मेवा क्षेत्र में बड़ी संख्या में घुसपैठ बताए जा रहे है। अब तो मेवात क्षेत्र साइबर क्राइम का बड़ा केंद्र बन गया है। मेवात में ऐसे इलाके हैं, जहां पुलिस का जाना भी मुश्किल होता है। जयपुर में भी ऐसे कई क्षेत्र विकसित हो गए हैं जहां आबादी तेजी से बढ़ी है। जयपुर के ऐसे इलाकों में भी पुलिस को पर्याप्त सुरक्षा के साथ जाना पड़ता है। अजमेर में भी घुसपैठियों ने अपनी मजबूत जमीन तैयार कर ली है। यही वजह है कि कई अवसरों पर कुख्यात अपराधी अजमेर से गिरफ्तार हुए हैं। नावलेकर कमेटी के सामने सबसे बड़ी चिंता यह है कि घुसपैठियों ने भारत में जरूरी दस्तावेज बनवा लिए है। ऐसे दस्तावेज सबसे ज्यादा पश्चिम बंगाल के है। यानी पश्चिम बंगाल का निवासी होने वाले पहचान पत्र लेकर घुसपैठिए अजमेर तक में बसे हुए है। पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन होने के बाद ऐसे पहचान पत्रों की विस्तृत जांच पड़ताल हो रही है। जानकारी के मुताबिक नावलेकर कमेटी जब आएगी, तब प्रशासन की ओर से व्यापक प्रचार प्रसार किया जाएगा। ताकि जागरूक लोग भी कमेटी के समक्ष उपस्थित होकर जानकारी दे सकते हैं। S.P.MITTAL BLOGGER ( 29-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

    2 Sep, 2026

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    Hacked By 0x1999 – Indonesian Code Party – Jatim4u

    14 Apr, 2016

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    मनुस्मृति की आड़ में जातियों के भेदभाव का जो जहर अंग्रेजों ने घोला, वो ही काम अब राहुल गांधी कर रहे हैं। दलितों के साथ भेदभाव करने का झूठ पुष्कर में पकड़ा गया। सनातन संस्कृति में तो वसुधैव कुटुम्बकम यानी संपूर्ण पृथ्वी ही परिवार है कि अवधारणा है। ============= कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे और मौजूदा समय में लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी इन दिनों देश भर में जातिवाद का जहर घोल रहे हैं। 29 अगस्त को दिल्ली में एक वीडियो ब्रीफिंग में राहुल गांधी ने दलितों के साथ भेदभाव के जो उदाहरण दिए उन में गत 8 अगस्त को उत्तराखंड की घटना का भी उल्लेख किया। राहुल गांधी का आरोप रहा कि जिस मंच से कांग्रेस के राट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े ने भाषण दिया, उस मंच को कुछ हिंदूवादियों ने शुद्धिकरण के नाम पर हवन यज्ञ किया। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि खडग़े दलित हैं। राहुल के इस भेदभाव के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराया। इसी ब्रीफिंग में उत्तर प्रदेश के कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने आरोप लगाया कि रामनाथ कोविंद जब राष्ट्रपति थे, तब उन्होंने 14 मई 2018 को अजमेर के पुष्कर तीर्थ की यात्रा की थी। तब दलित होने के कारण कोविंद और उनके परिवार के सदस्यों को ब्रह्मा मंदिर में प्रवेश नहीं दिया गया। गौतम द्वारा बताई गई, इस घटना पर राहुल गांधी ने भी सहमति जताई, लेकिन पुष्कर के तीर्थ पुरोहितों और ब्रह्मा मंदिर के मुख्यपुजारी गोपाल कृष्ण वशिष्ठ ने गौतम के कथन को सफेद झूठ बताया है। पुरोहित संघ के अध्यक्ष पुष्कर नारायण आदाली और वशिष्ठ ने बताया कि 14 मई 2018 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद पत्नी सविता कोविंद और पुत्री स्वाति कोविंद को सनातन धर्म की वैदिक परपंरा के अनुरूप पवित्र सरोवर के घाट पर पूजा अर्चना करवाई गई। सरोवर की पूजा अर्चना के बाद तीनों सदस्य ब्रह्मा मंदिर के दर्शन के लिए मंदिर परिसर में आए, लेकिन सविता कोविंद के घुटने की तकलीफ के कारण मंदिर की सीढिय़ा चढऩे में परेशानी हुई। कुछ सीढिय़ा चढऩे के बाद सविता कोविंद किनारे बैठ गई। इसी स्थान पर राष्ट्रपति रामनाक कोविंद भी बैठे। चंूकि सविता कोविंद के लिए सीढिय़ा चढऩा मुश्किल हो रहा था, इसलिए मंदिर के पुजारियों ने सीढियों पर ही पूजा करवाई। राष्ट्रपति दम्पत्ति ने सीढियों पर खड़े हो कर ही ब्रह्मा जी के दर्शन किए, जबकि पुत्री स्वाति कोविंद ने मंदिर के अंदर जाकर दर्शन किए। स्वाति कोविंद ने ब्रह्मा जी की प्रतिमा की परिक्रमा भी लगाई। पुजारी वशिष्ठ और तीर्थ पुरोहित संघ के अध्यक्ष आदाली ने कहा कि पुष्कर आने वाले किसी भी यात्री के साथ जाति के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता। यहां सभी जातियों के श्रद्धालुओं को सनातन संस्कृति के अनुरूप पूजा अर्चना करवाई जाती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राजेंद्र पाल गौतम ने राहुल गांधी की उपस्थिति में पुष्कर तीर्थ को बदनाम करने वाला काम किया है। इन दोनों को अपने कृत्य के लिए माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की पत्नी की परेशानी के बाद ही मंदिर परिसर में लिफ्ट लगाई गई है। अब बुजुर्ग श्रद्धालु भी लिफ्ट से ब्रह्माजी के दर्शन कर रहे हैं। वसुधैव कुटुम्बकम्: असल में राहुल गांधी वो काम कर रहे है जो अंग्रेजों ने भारत में शासन करने के लिए किया था। अंग्रेजों ने हिंदू धर्म को विभाजित करने के लिए ही जातियों के भेदभाव का जहर घोला। इतिहास बताता है कि मनुस्मृति का अंग्रेजी अनुवाद 1783-84 में कोलकाता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस विलियम जॉनसन ने किया, लेकिन तब मनुस्मृति की मूल प्रति उपलब्ध नहीं हुई। विलियम जॉनसन ने अपने नजरिए से मनुस्मृति की व्याख्या की। असल में यह हिंदू समाज को बांटने का षडय़ंत्र था। जो काम अंग्रेजों ने किया वही काम अब राहुल गांधी कर रहे है। राहुल गांधी को यह भी समझना चाहिए जो आज जिस मनुस्मृति की आलोचना राहुल गांधी कर रहे है, उसी मनुस्मृति का संस्करण 1972 में भारती विद्या भवन द्वारा तब प्रकाशित किया गया, जब श्रीमती इंदिरा गांधी देश की प्रधानमंत्री थी। इसी प्रकार राजीव गांधी के प्रधानमंत्री रहते हुए 1985 में भारत सरकार के सहयोग से मनुस्मृति का नया संस्करण प्रकाशित हुआ। यदि मनुस्मृति ग्रंथ इतना खराब था तो फिर श्रीमती इंदिरा गांधी और राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री रहते हुए क्यों प्रकाशित करवाया? राहुल गांधी अपने राजनीतिक स्वार्थों के खातिर भले ही हिंदू समाज को बांटने का काम करे, लेकिन भारत की सनातन संस्कृति की धारणा तो वसुधैव कुटुम्बकम् यानी संपूर्ण पृथ्वी ही परिवार की शिक्षा देती है। हमारे ग्रंथ शांति विज्ञान, चिकित्सा, दर्शन और मानवता के असली स्त्रोत है। जब हम पूरी पृथ्वी को अपना परिवार मानते हें, तब हिंदू समाज जाति के आधार पर किसी से भी भेदभाव नहीं कर सकता। आज राष्ट्रपति के पद पर आदिवासी समाज की महिला विराजमान है। वहीं प्रधानमंत्री के तौर पर पिछड़ी जाति के ही नरेंद्र मोदी है। भारत में कभी भी जाति के आधार पर भेदभाव नहीं हुआ। S.P.MITTAL BLOGGER ( 31-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

    2 Sep, 2026

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    सूफीवाद को आगे बढ़ाकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इतिहास को दोहरा रहे हैं। ख्वाजा साहब के उर्स के मौके पर दीवाना आबेदीन ने मुस्लिम धर्मगुरुओं और विद्वानों के समारोह में कहा।

    14 Apr, 2016

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    तो श्रीनगर के एनआईटी कैम्पस से गैर कश्मीरी विद्यार्थी आ ही गए। अब दिल्ली में फहरा रहे हैं तिरंगा।

    14 Apr, 2016

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    एडीए कराएगा राजगढ़ भैरवधाम का विकास। सांसद और विधायक कोष से मिले 30 लाख। नवरात्रा में छठ के मेले में उमड़े श्रद्धालु।

    14 Apr, 2016

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    मनुस्मृति की आड़ में जातियों के भेदभाव का जो जहर अंग्रेजों ने घोला, वो ही काम अब राहुल गांधी कर रहे हैं। दलितों के साथ भेदभाव करने का झूठ पुष्कर में पकड़ा गया। सनातन संस्कृति में तो वसुधैव कुटुम्बकम यानी संपूर्ण पृथ्वी ही परिवार है कि अवधारणा है। ============= कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे और मौजूदा समय में लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी इन दिनों देश भर में जातिवाद का जहर घोल रहे हैं। 29 अगस्त को दिल्ली में एक वीडियो ब्रीफिंग में राहुल गांधी ने दलितों के साथ भेदभाव के जो उदाहरण दिए उन में गत 8 अगस्त को उत्तराखंड की घटना का भी उल्लेख किया। राहुल गांधी का आरोप रहा कि जिस मंच से कांग्रेस के राट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े ने भाषण दिया, उस मंच को कुछ हिंदूवादियों ने शुद्धिकरण के नाम पर हवन यज्ञ किया। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि खडग़े दलित हैं। राहुल के इस भेदभाव के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराया। इसी ब्रीफिंग में उत्तर प्रदेश के कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने आरोप लगाया कि रामनाथ कोविंद जब राष्ट्रपति थे, तब उन्होंने 14 मई 2018 को अजमेर के पुष्कर तीर्थ की यात्रा की थी। तब दलित होने के कारण कोविंद और उनके परिवार के सदस्यों को ब्रह्मा मंदिर में प्रवेश नहीं दिया गया। गौतम द्वारा बताई गई, इस घटना पर राहुल गांधी ने भी सहमति जताई, लेकिन पुष्कर के तीर्थ पुरोहितों और ब्रह्मा मंदिर के मुख्यपुजारी गोपाल कृष्ण वशिष्ठ ने गौतम के कथन को सफेद झूठ बताया है। पुरोहित संघ के अध्यक्ष पुष्कर नारायण आदाली और वशिष्ठ ने बताया कि 14 मई 2018 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद पत्नी सविता कोविंद और पुत्री स्वाति कोविंद को सनातन धर्म की वैदिक परपंरा के अनुरूप पवित्र सरोवर के घाट पर पूजा अर्चना करवाई गई। सरोवर की पूजा अर्चना के बाद तीनों सदस्य ब्रह्मा मंदिर के दर्शन के लिए मंदिर परिसर में आए, लेकिन सविता कोविंद के घुटने की तकलीफ के कारण मंदिर की सीढिय़ा चढऩे में परेशानी हुई। कुछ सीढिय़ा चढऩे के बाद सविता कोविंद किनारे बैठ गई। इसी स्थान पर राष्ट्रपति रामनाक कोविंद भी बैठे। चंूकि सविता कोविंद के लिए सीढिय़ा चढऩा मुश्किल हो रहा था, इसलिए मंदिर के पुजारियों ने सीढियों पर ही पूजा करवाई। राष्ट्रपति दम्पत्ति ने सीढियों पर खड़े हो कर ही ब्रह्मा जी के दर्शन किए, जबकि पुत्री स्वाति कोविंद ने मंदिर के अंदर जाकर दर्शन किए। स्वाति कोविंद ने ब्रह्मा जी की प्रतिमा की परिक्रमा भी लगाई। पुजारी वशिष्ठ और तीर्थ पुरोहित संघ के अध्यक्ष आदाली ने कहा कि पुष्कर आने वाले किसी भी यात्री के साथ जाति के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता। यहां सभी जातियों के श्रद्धालुओं को सनातन संस्कृति के अनुरूप पूजा अर्चना करवाई जाती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राजेंद्र पाल गौतम ने राहुल गांधी की उपस्थिति में पुष्कर तीर्थ को बदनाम करने वाला काम किया है। इन दोनों को अपने कृत्य के लिए माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की पत्नी की परेशानी के बाद ही मंदिर परिसर में लिफ्ट लगाई गई है। अब बुजुर्ग श्रद्धालु भी लिफ्ट से ब्रह्माजी के दर्शन कर रहे हैं। वसुधैव कुटुम्बकम्: असल में राहुल गांधी वो काम कर रहे है जो अंग्रेजों ने भारत में शासन करने के लिए किया था। अंग्रेजों ने हिंदू धर्म को विभाजित करने के लिए ही जातियों के भेदभाव का जहर घोला। इतिहास बताता है कि मनुस्मृति का अंग्रेजी अनुवाद 1783-84 में कोलकाता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस विलियम जॉनसन ने किया, लेकिन तब मनुस्मृति की मूल प्रति उपलब्ध नहीं हुई। विलियम जॉनसन ने अपने नजरिए से मनुस्मृति की व्याख्या की। असल में यह हिंदू समाज को बांटने का षडय़ंत्र था। जो काम अंग्रेजों ने किया वही काम अब राहुल गांधी कर रहे है। राहुल गांधी को यह भी समझना चाहिए जो आज जिस मनुस्मृति की आलोचना राहुल गांधी कर रहे है, उसी मनुस्मृति का संस्करण 1972 में भारती विद्या भवन द्वारा तब प्रकाशित किया गया, जब श्रीमती इंदिरा गांधी देश की प्रधानमंत्री थी। इसी प्रकार राजीव गांधी के प्रधानमंत्री रहते हुए 1985 में भारत सरकार के सहयोग से मनुस्मृति का नया संस्करण प्रकाशित हुआ। यदि मनुस्मृति ग्रंथ इतना खराब था तो फिर श्रीमती इंदिरा गांधी और राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री रहते हुए क्यों प्रकाशित करवाया? राहुल गांधी अपने राजनीतिक स्वार्थों के खातिर भले ही हिंदू समाज को बांटने का काम करे, लेकिन भारत की सनातन संस्कृति की धारणा तो वसुधैव कुटुम्बकम् यानी संपूर्ण पृथ्वी ही परिवार की शिक्षा देती है। हमारे ग्रंथ शांति विज्ञान, चिकित्सा, दर्शन और मानवता के असली स्त्रोत है। जब हम पूरी पृथ्वी को अपना परिवार मानते हें, तब हिंदू समाज जाति के आधार पर किसी से भी भेदभाव नहीं कर सकता। आज राष्ट्रपति के पद पर आदिवासी समाज की महिला विराजमान है। वहीं प्रधानमंत्री के तौर पर पिछड़ी जाति के ही नरेंद्र मोदी है। भारत में कभी भी जाति के आधार पर भेदभाव नहीं हुआ। S.P.MITTAL BLOGGER ( 31-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

    2 Sep, 2026

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    शहरी निकायों के वार्ड चुनाव में उम्मीदवारों की घोषणा करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही भाजपा-कांग्रेस। अब 3 सितंबर को निर्वाचन अधिकारी के समक्ष ही जमा होंगे सिंबल। नामांकन की अंतिम तिथि 31 अगस्त है। अजमेर में ज्ञान सारस्वत ने बताया कि वायदा भी मायने रखता है। भाजपाई ही निभा रहे हैं कांग्रेस की भूमिका। दारा का कार्टून। ================ राजस्थान के 309 शहरी निकायों के 10 हजार 245 वार्डों के पार्षद पद के चुनाव के लिए 9 और 11 सितंबर को मतदान होना है। नामांकन की अंतिम तिथि 31 अगस्त है। 30 अगस्त को रविवार का अवकाश होने के कारण नामांकन नहीं हो सके। सत्तारूढ़ भाजपा और प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस में टिकट बंटवारे को लेकर जो जूतम पैजार हो रही है उसके कारण दोनों ही दल उम्मीदवारों की घोषणा करने की हिम्मत नहीं कर पा रहे है। आमतौर पर नामांकन के साथ ही पार्टी का सिंबल (चुनाव चिह्न) जमा करवाया जाता है। लेकिन अभी तक भी किसी भी दल ने अपने उम्मीदवारों को सिंबल नहीं दिया है। दोनों ही दलों की यह स्थिति बताती है कि संगठन का कोई वजूद नहीं है। यदि संगठन का वजूद होता तो नामांकन वाले दिन ही अधिकृत उम्मीदवार की घोषणा कर दी जाती। जानकारों की माने तो अब 3 सितंबर को सीधे निर्वाचन अधिकारी के समक्ष ही सामूहिक तौर पर अधिकृत प्रत्याशी का सिंबल जमा करवाया जाएगा। 3 सितंबर को ही नाम वापसी हो सकेगी। निर्वाचन विभाग के चुनाव की जो प्रक्रिया घोषित की है उसके अनुसार 27 से 31 अगस्त तक नामांकन होंगे और एक सितंबर को सभी नामांकन पत्रों की जांच होगी। जो नामांकन पत्र अधूरे होंगे उन्हें निर्वाचन अधिकारी निरस्त कर देंगे। 3 सितंबर को दोपहर 3 बजे तक नामांकन वापस लेने के बाद निर्वाचन अधिकारी चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की घोषणा करेंगे। निज राजनीतिक दलों के सिंबल प्राप्त हो जाएंगे, वहां पार्टी के उम्मीदवारों को चुनाव चिन्ह आवंटित कर दिया जाएगा। जबकि शेष निर्दलीय उम्मीदवारों को 4 सितंबर को चुनाव चिन्ह आवंटित होंगे। 9 व 11 सितंबर को मतदान के बाद 14 सितंबर को परिणाम घोषित किया जाएगा। चुनावी वादे के मायने: अजमेर नगर निगम के तीन बार पार्षद रहे ज्ञान सारस्वत ने प्रदर्शित किया है कि राजनीति में वादा भी मायने रखता है। सारस्वत ने घोषणा की है कि वादे के मुताबिक वे इस बार वार्ड पार्षद का चुनाव नहीं लड़ेंगे। सारस्वत ने बताया कि गत बार उन्होंने अजमेर उत्तर विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था। तब उन्होंने मतदाताओं से वादा किया था कि नगर निगम का चुनाव नहीं लड़ेंगे भले ही वे विधानसभा चुनाव हार गए, लेकिन अपने वादे पर कायम है। चूंकि उन्होंने वादा किया इसलिए वे अथवा उनके परिवार का कोई भी सदस्य चुनाव नहीं लड़ेगा। मालूम हो कि सारस्वत ने विधानसभा के मौजूदा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी के खिलाफ चुनाव लड़ा था और 26 हजार वोट प्राप्त किए थे। अब सारस्वत ने चुनाव न लड़ने की घोषणा की है। तब यह देखना होगा कि सारस्वत निगम चुनाव में राजनीतिक भूमिका किस प्रकार निभाते हैं। विधानसभा का चुनाव बागी उम्मीदवार के रूप में लड़ने के कारण सारस्वत को भाजपा से निष्कासित कर दिया था। सारस्वत अभी तक भाजपा से निष्कासित है। हो सकता है कि सारस्वत के प्रभाव को देखते हुए पुन: भाजपा में शामिल कर लिया जाए। भाजपाई कांग्रेस की भूमिका में: अजमेर नगर निगम के पूर्व मेयर धर्मेन्द्र गहलोत इन दिनों विपक्ष के नेता की भूमिका में है। गहलोत के निशाने पर क्षेत्रीय विधायक वासुदेव देवनानी है। गहलोत ने अपनी पत्नी हेमा गहलोत का वार्ड 4 से नामांकन भी करवा दिया है। दारा का कार्टून: स्थानीय निकाय के चुनावों को लेकर राजनीतिक दलों में टिकटों को लेकर जो जूतम पैजार हो रही है उस पर कार्टूनिस्ट जसवंत दारा ने सटीक कार्टून बनाया। इस कार्टून को मेरे फेसबुक पेज www.facebook.com/SPMittalblog पर देखा जा सकता है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 29-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

    2 Sep, 2026

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    भारत में कोई मुसलमान न रहे, ऐसा सोचने वाला हिन्दू नहीं हो सकता। मोहन भागवत के इस कथन के बाद मुसलमानों में संघ के प्रति धारणा बदलनी चाहिए। हिंदुओं के साथ रहने से ही मुसलमान सुरक्षित हैं। ================ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत इन दिनों अमेरिका की यात्रा पर है। इस यात्रा के दौरान ही 29 अगस्त को भागवत ने न्यूयॉर्क में आयोजित एक समारोह में वन वर्ल्ड वन ह्यूमैनिटी विषय पर बोलते हुए कहा कि अगर कोई हिन्दू यह सोचता है कि भारत में कोई मुसलमान नहीं होना चाहिए तो वह हिंदू नहीं हो सकता। अगर आप खुद को हिन्दू कहना चाहते हैं तो आपको यह मानना होगा कि सभी रास्ते एक ही लक्ष्य की ओर ले जाते हैं। हर इंसान की गरिमा है। इंसानों के बीच कोई भेदभाव संभव नहीं है। भागवत का यह कथन दर्शाता है कि संघ भारत में रहने वाले भारतीय मुसलमानों का विरोधी नहीं करता है। भारत में आमतौर पर मुसलमान संघ को विरोधी मानते हैं, लेकिन अब जब भागवत ने स्पष्ट कह दिया है कि मुसलमानों की उपस्थिति को न मानने वाला हिन्दू नहीं हो सकता है तो फिर मुसलमानों को संघ के प्रति अपनी धारणा बदलनी चाहिए। भागवत का यह कथन बहुत मायने रखते हैं कि इंसान में भेदभाव नहीं किया जा सकता। असल में मोहन भागवत सनातन धर्म के प्रबल समर्थक हैं और दुनिया में सनातन धर्म ही एकमात्र धर्म है, जिसमें दूसरे धर्म का भी सम्मान किया जाता है। इसलिए भागवत ने इंसान में भेदभाव करने की बात को नकारा है। भागवत ने न्यूयॉर्क में जो बयान दिया उसे भारत के आम मुसलमानों को समझना चाहिए। भागवत पहले भी ऐसे बयान दे चुके हैं, लेकिन अमेरिका में दिया बयान बहुत मायने रखता है। कांग्रेस और वामपंथी विचारधारा के जो लोग विदेशों में यह बताते है कि भारत में मुसलमानों के साथ भेदभाव होता है, उस प्रोपेगेंडा को भी भागवत ने समाप्त करने का काम किया है। भारत में संघ को ही हिंदू समुदाय का प्रतिनिधि माना जाता है। ऐसे में यदि संघ प्रमुख ने हिंदू और मुसलमान के बीच भाईचारे वाला संदेश दिया है तो यह भारत की एकता को भी प्रदर्शित करता है। भारत में जो राजनेता मुसलमानों की राजनीति करते हैं, उन्हें भी अब भागवत के बयान का स्वागत करना चाहिए। मुसलमान की सुरक्षा: मुसलमान भले ही किसी मुस्लिम देश में सुरक्षित न हो, लेकिन भारत में आम मुसलमान सुरक्षित है। इसका मुख्य कारण यही है कि 25 करोड़ मुसलमान 115 करोड़ हिंदुओं के साथ रह रहे है। यानी हिंदुओं के साथ रहने के कारण ही मुसलमान सुरक्षित है। जिस दिन मुसलमान को मुसलमान के साथ रहना पड़ेगा। उस दिन भारत के हालात भी ईरान, बांग्लादेश, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, इराक जैसे हो जाएंगे। मुसलमानों के वोटों पर राजनीति करने वाले राहुल गांधी, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, लालू प्रसाद यादव जैसे नेता माने या नहीं, लेकिन भारत में मुसलमान पूरे सम्मान और समृद्धि के साथ रह रहा है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 30-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

    2 Sep, 2026

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    88 वर्ष की उम्र में 81 कविताओं वाली 45वीं पुस्तक का प्रकाशन। विनोद सोमानी से देश के बुजुर्ग प्रेरणा ले-लोकबंधु कलेक्टर। 39 वर्ष की सेवा के बाद राजीव चतुर्वेदी शिक्षा बोर्ड से सेवानिवृत्त। ठाकुर किशन सिंह जी की पुण्य स्मृति में 30 अगस्त को सुंदरकांड पाठ। एक सितंबर को पुष्कर के ब्रह्मा सावित्री वेद विद्यालय में शिव जलधारा। ================ 29 अगस्त को अजमेर के जिला कलेक्टर लोकबंधु ने वयोवृद्ध साहित्यकार, कवि व लेखक डॉ. विनोद सोमानी ‘हंस के नवीन काव्य संग्रह मेरे एहसास का लोकार्पण किया। इस अवसर पर कलेक्टर ने कहा कि देश के बुजुर्गों को साहित्यकार सोमानी के हौंसले और जज्बे से प्रेरणा लेनी चाहिए। 88 वर्ष की उम्र में भी विनोद सोमानी लेखन का कार्य कर रहे हैं। यह दर्शाता है कि यदि व्यक्ति में हौसला और जज्बा हो तो उम्र कोई मायने नहीं रखती है। कलेक्टर ने सोमानी के पुत्र और मित्तल अस्पताल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. श्याम सोमानी की भी प्रशंसा की। कलेक्टर ने कहा कि अपने पिता के हौसले को बनाए रखने के लिए श्याम सोनी पुस्तक प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। कलेक्टर लोक बंधु ने संग्रह में शामिल 81 कविताओं पर रुझान व्यक्त करते हुए कहा कि मेरे अहसास काव्य संग्रह की प्रत्येक कविता पाठक को पढ़ते हुए स्वयं के अनुभव और अहसास से बरबस जोड़ देती है। कविता का रसास्वादन करते हुए लगता है कि जैसे स्वयं के जीवन के उतार-चढ़ाव, खट्टे-मीठे अनुभव, संघर्ष और हर्ष के क्षण, साहस व क्षोभ के विषय फिल्म की तरह दृश्य बन कर आंखों के सामने घूम रहे हों। साहित्यिक उपलब्धियां: डॉ विनोद सोमानी हंस राजस्थान के उन चुनिंदा साहित्यकारों में शामिल हैं जिन्हें वर्ष 2023-24 में राजस्थान साहित्य अकादमी का अमृत सम्मान प्राप्त हुआ है। अजयमेरु प्रेस क्लब अजमेर ने विशिष्ट साहित्यकार सम्मान वर्ष 2026 में प्रदान किया है। अब तक उनकी 43 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें कहानी, कविता संग्रह, उपन्यास, जीवनी, व्यंग्य संग्रह, राजस्थानी कृतिया, अनुवाद एवं चिंतनात्मक निबंध शामिल हैं। उनका लघु कविता संग्रह मेहर के मोती के बाद यह मेरे अहसास नया काव्य संग्रह प्रकाशित हुआ है। मेरे अहसास काव्य संग्रह को डॉ विनोद सोमानी हंस ने अपने मार्गदर्शक, स्नेह और प्रेरणा के पुंज श्रद्धेय मुन्नालाल मित्तल, स्वर्गीय डॉ शकुंतला मित्तल किरण, मित्तल परिवार के अनिल मित्तल, सुनील मित्तल, डॉ दिलीप मित्तल, मनोज मित्तल को समर्पित किया है। डॉ हंस के शब्दों में मित्तल परिवार ना सिर्फ उनके बल्कि उनके पुत्र डाॅ.श्याम सोमानी के भौतिक व जैविक जीवन वृतांत के अटूट आधार हैं। संपादकीय लेख : इस संग्रह का संपादकीय डॉ.हंस के पुत्र डॉ सीए श्याम सोमानी ने लिखा है। उन्होंने पिता की बढ़ती आयु के साथ स्वास्थ्य की चिंता को रेखांकित करते हुए उनकी सृजनात्मक कर्मठता को युवा साहित्यकारों के लिए प्रेरणास्पद बताया है। सोमानी ने लिखा कि पिताजी ने अपनी कविताओं में आम आदमी की पीड़ाओं और विषमताओं पर खुलकर कलम चलाई है। उनकी गजलें आस्था और आशा से भरी होती हैं। वे अपने लेखन में जीवन के हर विषय हर रंग को ईमानदारी से प्रकट करते हैं। इस नए काव्य संग्रह को भी पाठक पूर्व की तरह सराहेंगे। उन्होंने प्रकाशक साहित्यागार एवं उनकी टीम को सहयोग के लिए आभार जताया और शुभचिंतकों का धन्यवाद किया। मोबाइल नंबर 9314390005 पर श्याम सोमानी को शुभकामनाएं दी जा सकती है। राजीव चतुर्वेदी की सेवानिवृत्ति: 31 अगस्त को राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के सहायक निदेशक के पद से राजीव चतुर्वेदी की सेवानिवृत्ति हो रही है। चतुर्वेदी ने 39 वर्ष तक राजकीय सेवा में कार्य किया है। वे माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में सहायक निदेशक लेखा, सहायक निदेशक संस्थापक, जनसंपर्क अधिकारी के पदों पर कार्यरत रहे। साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने के कारण चतुर्वेदी को कई सम्मान भी मिले। सेवानिवृत्ति पर चतुर्वेदी ने बोर्ड के सभी कार्मिकों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि मौजूदा अध्यक्ष हनुमान सिंह राठौड़ के साथ भले ही अल्प समय तक ही काम करने का अवसर मिला हो लेकिन उन्हें राठौड़ से बहुत कुछ सीखने को मिला है। मोबाइल नंबर 9460091086 पर राजीव चतुर्वेदी को शुभकामनाएं दी जा सकती है। सुंदरकांड पाठ: किशन सिंह राठौड़ की पुण्य स्मृति में 30 अगस्त को रात 8 बजे से पुष्कर रोड स्थित बाबा रामदेव मंदिर के पीछे गणपति नगर नौसर घाटी में पीएस राठौड़ के निवास स्थान पर सुंदर कांड पाठ होगा। यह पाठ पुष्कर के पंडित रवि शर्मा करेंगे। पीएस राठौड़ ने बताया कि सुंदर कांड पाठ के साथ भजनों की प्रस्तुति भी होगी। पाठ के बारे में और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9413095156 पर पीएस राठौड़ से ली जा सकती है। शिव जलधारा: ट्रेवल्स और खाद्य तेलों के प्रमुख कारोबारी नवल किशोर खंडेलवाल की ओर से एक सितंबर को पुष्कर स्थित ब्रह्मा सावित्री वेद विद्यापीठ में विशेष शिव जलधारा का आयोजन किया गया है। खंडेलवाल ने बताया कि दोपहर एक बजे जलधारा एवं पूजन का कार्यक्रम होगा। शाम पांच बजे महाआरती के बाद प्रसादी का आयोजन किया गया है। इस धार्मिक आयोजन के बारे में और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9829163825 पर नवल किशोर खंडेलवाल से ली जा सकती है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 30-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

    2 Sep, 2026

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  • मनुस्मृति की आड़ में जातियों के भेदभाव का जो जहर अंग्रेजों ने घोला, वो ही काम अब राहुल गांधी कर रहे हैं। दलितों के साथ भेदभाव करने का झूठ पुष्कर में पकड़ा गया। सनातन संस्कृति में तो वसुधैव कुटुम्बकम यानी संपूर्ण पृथ्वी ही परिवार है कि अवधारणा है। ============= कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे और मौजूदा समय में लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी इन दिनों देश भर में जातिवाद का जहर घोल रहे हैं। 29 अगस्त को दिल्ली में एक वीडियो ब्रीफिंग में राहुल गांधी ने दलितों के साथ भेदभाव के जो उदाहरण दिए उन में गत 8 अगस्त को उत्तराखंड की घटना का भी उल्लेख किया। राहुल गांधी का आरोप रहा कि जिस मंच से कांग्रेस के राट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े ने भाषण दिया, उस मंच को कुछ हिंदूवादियों ने शुद्धिकरण के नाम पर हवन यज्ञ किया। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि खडग़े दलित हैं। राहुल के इस भेदभाव के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराया। इसी ब्रीफिंग में उत्तर प्रदेश के कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने आरोप लगाया कि रामनाथ कोविंद जब राष्ट्रपति थे, तब उन्होंने 14 मई 2018 को अजमेर के पुष्कर तीर्थ की यात्रा की थी। तब दलित होने के कारण कोविंद और उनके परिवार के सदस्यों को ब्रह्मा मंदिर में प्रवेश नहीं दिया गया। गौतम द्वारा बताई गई, इस घटना पर राहुल गांधी ने भी सहमति जताई, लेकिन पुष्कर के तीर्थ पुरोहितों और ब्रह्मा मंदिर के मुख्यपुजारी गोपाल कृष्ण वशिष्ठ ने गौतम के कथन को सफेद झूठ बताया है। पुरोहित संघ के अध्यक्ष पुष्कर नारायण आदाली और वशिष्ठ ने बताया कि 14 मई 2018 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद पत्नी सविता कोविंद और पुत्री स्वाति कोविंद को सनातन धर्म की वैदिक परपंरा के अनुरूप पवित्र सरोवर के घाट पर पूजा अर्चना करवाई गई। सरोवर की पूजा अर्चना के बाद तीनों सदस्य ब्रह्मा मंदिर के दर्शन के लिए मंदिर परिसर में आए, लेकिन सविता कोविंद के घुटने की तकलीफ के कारण मंदिर की सीढिय़ा चढऩे में परेशानी हुई। कुछ सीढिय़ा चढऩे के बाद सविता कोविंद किनारे बैठ गई। इसी स्थान पर राष्ट्रपति रामनाक कोविंद भी बैठे। चंूकि सविता कोविंद के लिए सीढिय़ा चढऩा मुश्किल हो रहा था, इसलिए मंदिर के पुजारियों ने सीढियों पर ही पूजा करवाई। राष्ट्रपति दम्पत्ति ने सीढियों पर खड़े हो कर ही ब्रह्मा जी के दर्शन किए, जबकि पुत्री स्वाति कोविंद ने मंदिर के अंदर जाकर दर्शन किए। स्वाति कोविंद ने ब्रह्मा जी की प्रतिमा की परिक्रमा भी लगाई। पुजारी वशिष्ठ और तीर्थ पुरोहित संघ के अध्यक्ष आदाली ने कहा कि पुष्कर आने वाले किसी भी यात्री के साथ जाति के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता। यहां सभी जातियों के श्रद्धालुओं को सनातन संस्कृति के अनुरूप पूजा अर्चना करवाई जाती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राजेंद्र पाल गौतम ने राहुल गांधी की उपस्थिति में पुष्कर तीर्थ को बदनाम करने वाला काम किया है। इन दोनों को अपने कृत्य के लिए माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की पत्नी की परेशानी के बाद ही मंदिर परिसर में लिफ्ट लगाई गई है। अब बुजुर्ग श्रद्धालु भी लिफ्ट से ब्रह्माजी के दर्शन कर रहे हैं। वसुधैव कुटुम्बकम्: असल में राहुल गांधी वो काम कर रहे है जो अंग्रेजों ने भारत में शासन करने के लिए किया था। अंग्रेजों ने हिंदू धर्म को विभाजित करने के लिए ही जातियों के भेदभाव का जहर घोला। इतिहास बताता है कि मनुस्मृति का अंग्रेजी अनुवाद 1783-84 में कोलकाता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस विलियम जॉनसन ने किया, लेकिन तब मनुस्मृति की मूल प्रति उपलब्ध नहीं हुई। विलियम जॉनसन ने अपने नजरिए से मनुस्मृति की व्याख्या की। असल में यह हिंदू समाज को बांटने का षडय़ंत्र था। जो काम अंग्रेजों ने किया वही काम अब राहुल गांधी कर रहे है। राहुल गांधी को यह भी समझना चाहिए जो आज जिस मनुस्मृति की आलोचना राहुल गांधी कर रहे है, उसी मनुस्मृति का संस्करण 1972 में भारती विद्या भवन द्वारा तब प्रकाशित किया गया, जब श्रीमती इंदिरा गांधी देश की प्रधानमंत्री थी। इसी प्रकार राजीव गांधी के प्रधानमंत्री रहते हुए 1985 में भारत सरकार के सहयोग से मनुस्मृति का नया संस्करण प्रकाशित हुआ। यदि मनुस्मृति ग्रंथ इतना खराब था तो फिर श्रीमती इंदिरा गांधी और राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री रहते हुए क्यों प्रकाशित करवाया? राहुल गांधी अपने राजनीतिक स्वार्थों के खातिर भले ही हिंदू समाज को बांटने का काम करे, लेकिन भारत की सनातन संस्कृति की धारणा तो वसुधैव कुटुम्बकम् यानी संपूर्ण पृथ्वी ही परिवार की शिक्षा देती है। हमारे ग्रंथ शांति विज्ञान, चिकित्सा, दर्शन और मानवता के असली स्त्रोत है। जब हम पूरी पृथ्वी को अपना परिवार मानते हें, तब हिंदू समाज जाति के आधार पर किसी से भी भेदभाव नहीं कर सकता। आज राष्ट्रपति के पद पर आदिवासी समाज की महिला विराजमान है। वहीं प्रधानमंत्री के तौर पर पिछड़ी जाति के ही नरेंद्र मोदी है। भारत में कभी भी जाति के आधार पर भेदभाव नहीं हुआ। S.P.MITTAL BLOGGER ( 31-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
  • शहरी निकायों के वार्ड चुनाव में उम्मीदवारों की घोषणा करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही भाजपा-कांग्रेस। अब 3 सितंबर को निर्वाचन अधिकारी के समक्ष ही जमा होंगे सिंबल। नामांकन की अंतिम तिथि 31 अगस्त है। अजमेर में ज्ञान सारस्वत ने बताया कि वायदा भी मायने रखता है। भाजपाई ही निभा रहे हैं कांग्रेस की भूमिका। दारा का कार्टून। ================ राजस्थान के 309 शहरी निकायों के 10 हजार 245 वार्डों के पार्षद पद के चुनाव के लिए 9 और 11 सितंबर को मतदान होना है। नामांकन की अंतिम तिथि 31 अगस्त है। 30 अगस्त को रविवार का अवकाश होने के कारण नामांकन नहीं हो सके। सत्तारूढ़ भाजपा और प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस में टिकट बंटवारे को लेकर जो जूतम पैजार हो रही है उसके कारण दोनों ही दल उम्मीदवारों की घोषणा करने की हिम्मत नहीं कर पा रहे है। आमतौर पर नामांकन के साथ ही पार्टी का सिंबल (चुनाव चिह्न) जमा करवाया जाता है। लेकिन अभी तक भी किसी भी दल ने अपने उम्मीदवारों को सिंबल नहीं दिया है। दोनों ही दलों की यह स्थिति बताती है कि संगठन का कोई वजूद नहीं है। यदि संगठन का वजूद होता तो नामांकन वाले दिन ही अधिकृत उम्मीदवार की घोषणा कर दी जाती। जानकारों की माने तो अब 3 सितंबर को सीधे निर्वाचन अधिकारी के समक्ष ही सामूहिक तौर पर अधिकृत प्रत्याशी का सिंबल जमा करवाया जाएगा। 3 सितंबर को ही नाम वापसी हो सकेगी। निर्वाचन विभाग के चुनाव की जो प्रक्रिया घोषित की है उसके अनुसार 27 से 31 अगस्त तक नामांकन होंगे और एक सितंबर को सभी नामांकन पत्रों की जांच होगी। जो नामांकन पत्र अधूरे होंगे उन्हें निर्वाचन अधिकारी निरस्त कर देंगे। 3 सितंबर को दोपहर 3 बजे तक नामांकन वापस लेने के बाद निर्वाचन अधिकारी चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की घोषणा करेंगे। निज राजनीतिक दलों के सिंबल प्राप्त हो जाएंगे, वहां पार्टी के उम्मीदवारों को चुनाव चिन्ह आवंटित कर दिया जाएगा। जबकि शेष निर्दलीय उम्मीदवारों को 4 सितंबर को चुनाव चिन्ह आवंटित होंगे। 9 व 11 सितंबर को मतदान के बाद 14 सितंबर को परिणाम घोषित किया जाएगा। चुनावी वादे के मायने: अजमेर नगर निगम के तीन बार पार्षद रहे ज्ञान सारस्वत ने प्रदर्शित किया है कि राजनीति में वादा भी मायने रखता है। सारस्वत ने घोषणा की है कि वादे के मुताबिक वे इस बार वार्ड पार्षद का चुनाव नहीं लड़ेंगे। सारस्वत ने बताया कि गत बार उन्होंने अजमेर उत्तर विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था। तब उन्होंने मतदाताओं से वादा किया था कि नगर निगम का चुनाव नहीं लड़ेंगे भले ही वे विधानसभा चुनाव हार गए, लेकिन अपने वादे पर कायम है। चूंकि उन्होंने वादा किया इसलिए वे अथवा उनके परिवार का कोई भी सदस्य चुनाव नहीं लड़ेगा। मालूम हो कि सारस्वत ने विधानसभा के मौजूदा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी के खिलाफ चुनाव लड़ा था और 26 हजार वोट प्राप्त किए थे। अब सारस्वत ने चुनाव न लड़ने की घोषणा की है। तब यह देखना होगा कि सारस्वत निगम चुनाव में राजनीतिक भूमिका किस प्रकार निभाते हैं। विधानसभा का चुनाव बागी उम्मीदवार के रूप में लड़ने के कारण सारस्वत को भाजपा से निष्कासित कर दिया था। सारस्वत अभी तक भाजपा से निष्कासित है। हो सकता है कि सारस्वत के प्रभाव को देखते हुए पुन: भाजपा में शामिल कर लिया जाए। भाजपाई कांग्रेस की भूमिका में: अजमेर नगर निगम के पूर्व मेयर धर्मेन्द्र गहलोत इन दिनों विपक्ष के नेता की भूमिका में है। गहलोत के निशाने पर क्षेत्रीय विधायक वासुदेव देवनानी है। गहलोत ने अपनी पत्नी हेमा गहलोत का वार्ड 4 से नामांकन भी करवा दिया है। दारा का कार्टून: स्थानीय निकाय के चुनावों को लेकर राजनीतिक दलों में टिकटों को लेकर जो जूतम पैजार हो रही है उस पर कार्टूनिस्ट जसवंत दारा ने सटीक कार्टून बनाया। इस कार्टून को मेरे फेसबुक पेज www.facebook.com/SPMittalblog पर देखा जा सकता है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 29-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
  • भारत में कोई मुसलमान न रहे, ऐसा सोचने वाला हिन्दू नहीं हो सकता। मोहन भागवत के इस कथन के बाद मुसलमानों में संघ के प्रति धारणा बदलनी चाहिए। हिंदुओं के साथ रहने से ही मुसलमान सुरक्षित हैं। ================ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत इन दिनों अमेरिका की यात्रा पर है। इस यात्रा के दौरान ही 29 अगस्त को भागवत ने न्यूयॉर्क में आयोजित एक समारोह में वन वर्ल्ड वन ह्यूमैनिटी विषय पर बोलते हुए कहा कि अगर कोई हिन्दू यह सोचता है कि भारत में कोई मुसलमान नहीं होना चाहिए तो वह हिंदू नहीं हो सकता। अगर आप खुद को हिन्दू कहना चाहते हैं तो आपको यह मानना होगा कि सभी रास्ते एक ही लक्ष्य की ओर ले जाते हैं। हर इंसान की गरिमा है। इंसानों के बीच कोई भेदभाव संभव नहीं है। भागवत का यह कथन दर्शाता है कि संघ भारत में रहने वाले भारतीय मुसलमानों का विरोधी नहीं करता है। भारत में आमतौर पर मुसलमान संघ को विरोधी मानते हैं, लेकिन अब जब भागवत ने स्पष्ट कह दिया है कि मुसलमानों की उपस्थिति को न मानने वाला हिन्दू नहीं हो सकता है तो फिर मुसलमानों को संघ के प्रति अपनी धारणा बदलनी चाहिए। भागवत का यह कथन बहुत मायने रखते हैं कि इंसान में भेदभाव नहीं किया जा सकता। असल में मोहन भागवत सनातन धर्म के प्रबल समर्थक हैं और दुनिया में सनातन धर्म ही एकमात्र धर्म है, जिसमें दूसरे धर्म का भी सम्मान किया जाता है। इसलिए भागवत ने इंसान में भेदभाव करने की बात को नकारा है। भागवत ने न्यूयॉर्क में जो बयान दिया उसे भारत के आम मुसलमानों को समझना चाहिए। भागवत पहले भी ऐसे बयान दे चुके हैं, लेकिन अमेरिका में दिया बयान बहुत मायने रखता है। कांग्रेस और वामपंथी विचारधारा के जो लोग विदेशों में यह बताते है कि भारत में मुसलमानों के साथ भेदभाव होता है, उस प्रोपेगेंडा को भी भागवत ने समाप्त करने का काम किया है। भारत में संघ को ही हिंदू समुदाय का प्रतिनिधि माना जाता है। ऐसे में यदि संघ प्रमुख ने हिंदू और मुसलमान के बीच भाईचारे वाला संदेश दिया है तो यह भारत की एकता को भी प्रदर्शित करता है। भारत में जो राजनेता मुसलमानों की राजनीति करते हैं, उन्हें भी अब भागवत के बयान का स्वागत करना चाहिए। मुसलमान की सुरक्षा: मुसलमान भले ही किसी मुस्लिम देश में सुरक्षित न हो, लेकिन भारत में आम मुसलमान सुरक्षित है। इसका मुख्य कारण यही है कि 25 करोड़ मुसलमान 115 करोड़ हिंदुओं के साथ रह रहे है। यानी हिंदुओं के साथ रहने के कारण ही मुसलमान सुरक्षित है। जिस दिन मुसलमान को मुसलमान के साथ रहना पड़ेगा। उस दिन भारत के हालात भी ईरान, बांग्लादेश, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, इराक जैसे हो जाएंगे। मुसलमानों के वोटों पर राजनीति करने वाले राहुल गांधी, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, लालू प्रसाद यादव जैसे नेता माने या नहीं, लेकिन भारत में मुसलमान पूरे सम्मान और समृद्धि के साथ रह रहा है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 30-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
  • 88 वर्ष की उम्र में 81 कविताओं वाली 45वीं पुस्तक का प्रकाशन। विनोद सोमानी से देश के बुजुर्ग प्रेरणा ले-लोकबंधु कलेक्टर। 39 वर्ष की सेवा के बाद राजीव चतुर्वेदी शिक्षा बोर्ड से सेवानिवृत्त। ठाकुर किशन सिंह जी की पुण्य स्मृति में 30 अगस्त को सुंदरकांड पाठ। एक सितंबर को पुष्कर के ब्रह्मा सावित्री वेद विद्यालय में शिव जलधारा। ================ 29 अगस्त को अजमेर के जिला कलेक्टर लोकबंधु ने वयोवृद्ध साहित्यकार, कवि व लेखक डॉ. विनोद सोमानी ‘हंस के नवीन काव्य संग्रह मेरे एहसास का लोकार्पण किया। इस अवसर पर कलेक्टर ने कहा कि देश के बुजुर्गों को साहित्यकार सोमानी के हौंसले और जज्बे से प्रेरणा लेनी चाहिए। 88 वर्ष की उम्र में भी विनोद सोमानी लेखन का कार्य कर रहे हैं। यह दर्शाता है कि यदि व्यक्ति में हौसला और जज्बा हो तो उम्र कोई मायने नहीं रखती है। कलेक्टर ने सोमानी के पुत्र और मित्तल अस्पताल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. श्याम सोमानी की भी प्रशंसा की। कलेक्टर ने कहा कि अपने पिता के हौसले को बनाए रखने के लिए श्याम सोनी पुस्तक प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। कलेक्टर लोक बंधु ने संग्रह में शामिल 81 कविताओं पर रुझान व्यक्त करते हुए कहा कि मेरे अहसास काव्य संग्रह की प्रत्येक कविता पाठक को पढ़ते हुए स्वयं के अनुभव और अहसास से बरबस जोड़ देती है। कविता का रसास्वादन करते हुए लगता है कि जैसे स्वयं के जीवन के उतार-चढ़ाव, खट्टे-मीठे अनुभव, संघर्ष और हर्ष के क्षण, साहस व क्षोभ के विषय फिल्म की तरह दृश्य बन कर आंखों के सामने घूम रहे हों। साहित्यिक उपलब्धियां: डॉ विनोद सोमानी हंस राजस्थान के उन चुनिंदा साहित्यकारों में शामिल हैं जिन्हें वर्ष 2023-24 में राजस्थान साहित्य अकादमी का अमृत सम्मान प्राप्त हुआ है। अजयमेरु प्रेस क्लब अजमेर ने विशिष्ट साहित्यकार सम्मान वर्ष 2026 में प्रदान किया है। अब तक उनकी 43 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें कहानी, कविता संग्रह, उपन्यास, जीवनी, व्यंग्य संग्रह, राजस्थानी कृतिया, अनुवाद एवं चिंतनात्मक निबंध शामिल हैं। उनका लघु कविता संग्रह मेहर के मोती के बाद यह मेरे अहसास नया काव्य संग्रह प्रकाशित हुआ है। मेरे अहसास काव्य संग्रह को डॉ विनोद सोमानी हंस ने अपने मार्गदर्शक, स्नेह और प्रेरणा के पुंज श्रद्धेय मुन्नालाल मित्तल, स्वर्गीय डॉ शकुंतला मित्तल किरण, मित्तल परिवार के अनिल मित्तल, सुनील मित्तल, डॉ दिलीप मित्तल, मनोज मित्तल को समर्पित किया है। डॉ हंस के शब्दों में मित्तल परिवार ना सिर्फ उनके बल्कि उनके पुत्र डाॅ.श्याम सोमानी के भौतिक व जैविक जीवन वृतांत के अटूट आधार हैं। संपादकीय लेख : इस संग्रह का संपादकीय डॉ.हंस के पुत्र डॉ सीए श्याम सोमानी ने लिखा है। उन्होंने पिता की बढ़ती आयु के साथ स्वास्थ्य की चिंता को रेखांकित करते हुए उनकी सृजनात्मक कर्मठता को युवा साहित्यकारों के लिए प्रेरणास्पद बताया है। सोमानी ने लिखा कि पिताजी ने अपनी कविताओं में आम आदमी की पीड़ाओं और विषमताओं पर खुलकर कलम चलाई है। उनकी गजलें आस्था और आशा से भरी होती हैं। वे अपने लेखन में जीवन के हर विषय हर रंग को ईमानदारी से प्रकट करते हैं। इस नए काव्य संग्रह को भी पाठक पूर्व की तरह सराहेंगे। उन्होंने प्रकाशक साहित्यागार एवं उनकी टीम को सहयोग के लिए आभार जताया और शुभचिंतकों का धन्यवाद किया। मोबाइल नंबर 9314390005 पर श्याम सोमानी को शुभकामनाएं दी जा सकती है। राजीव चतुर्वेदी की सेवानिवृत्ति: 31 अगस्त को राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के सहायक निदेशक के पद से राजीव चतुर्वेदी की सेवानिवृत्ति हो रही है। चतुर्वेदी ने 39 वर्ष तक राजकीय सेवा में कार्य किया है। वे माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में सहायक निदेशक लेखा, सहायक निदेशक संस्थापक, जनसंपर्क अधिकारी के पदों पर कार्यरत रहे। साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने के कारण चतुर्वेदी को कई सम्मान भी मिले। सेवानिवृत्ति पर चतुर्वेदी ने बोर्ड के सभी कार्मिकों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि मौजूदा अध्यक्ष हनुमान सिंह राठौड़ के साथ भले ही अल्प समय तक ही काम करने का अवसर मिला हो लेकिन उन्हें राठौड़ से बहुत कुछ सीखने को मिला है। मोबाइल नंबर 9460091086 पर राजीव चतुर्वेदी को शुभकामनाएं दी जा सकती है। सुंदरकांड पाठ: किशन सिंह राठौड़ की पुण्य स्मृति में 30 अगस्त को रात 8 बजे से पुष्कर रोड स्थित बाबा रामदेव मंदिर के पीछे गणपति नगर नौसर घाटी में पीएस राठौड़ के निवास स्थान पर सुंदर कांड पाठ होगा। यह पाठ पुष्कर के पंडित रवि शर्मा करेंगे। पीएस राठौड़ ने बताया कि सुंदर कांड पाठ के साथ भजनों की प्रस्तुति भी होगी। पाठ के बारे में और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9413095156 पर पीएस राठौड़ से ली जा सकती है। शिव जलधारा: ट्रेवल्स और खाद्य तेलों के प्रमुख कारोबारी नवल किशोर खंडेलवाल की ओर से एक सितंबर को पुष्कर स्थित ब्रह्मा सावित्री वेद विद्यापीठ में विशेष शिव जलधारा का आयोजन किया गया है। खंडेलवाल ने बताया कि दोपहर एक बजे जलधारा एवं पूजन का कार्यक्रम होगा। शाम पांच बजे महाआरती के बाद प्रसादी का आयोजन किया गया है। इस धार्मिक आयोजन के बारे में और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9829163825 पर नवल किशोर खंडेलवाल से ली जा सकती है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 30-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
  • आबादी में तेजी से हुए बदलाव का अध्ययन करने वाली नावलेकर कमेटी जल्द राजस्थान आएगी। सीमावर्ती क्षेत्रों के साथ साथ मेवात, जयपुर, अजमेर आदि का भी दौरा करेगी। ================ देश के कई राज्यों में आबादी तेजी से बढ़ी है। तेजी से आबादी बढ़ने की जांच के लिए केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रकाश प्रभाकर नावलेकर की अध्यक्षता में चार सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी ऐसे प्रदेशों में जाकर आबादी में वृद्धि के कारणों की जांच कर रही है। नावलेकर की अध्यक्षता वाली कमेटी जल्द ही राजस्थान का भी दौरा तय करेगी। जानकारी के मुताबिक कमेटी के सदस्य पाकिस्तान की सीमा से लगे बाड़मेर, जैसलमेर जिलों का तो दौरा करेगी ही साथ ही अलवर, भरतपुर के मेवात क्षेत्र और अजमेर, जयपुर का भी दौरा करेगी। असल में केंद्र सरकार को जानकारी मिली कि इन क्षेत्रों में आबादी में अचानक बदलाव हुआ है। यानी जन्म के आधार पर जनसंख्या नहीं बढ़ी। जनसंख्या बढ़ने का कारण घुसपैठ रहा। अचानक आबादी बढ़ जाने से इन क्षेत्रों में अपराध भी बढऩे लगे हैं। नावलेकर कमेटी ने हाल ही में जम्मू कश्मीर का दौरा किया। कमेटी ने जो आंकड़े जुटाए उसके अनुसार कश्मीर घाटी में रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों ने घुसपैठ की। अधिकृत तौर पर 10 हजार रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठिए पाए गए। जबकि अवैध तौर पर रह रहे घुसपैठियों की संख्या बहुत ज्यादा है। ऐसी ही स्थिति राजस्थान में भी बताई जा रही है। हरियाणा की सीमा से लगे अलवर और भरतपुर के मेवा क्षेत्र में बड़ी संख्या में घुसपैठ बताए जा रहे है। अब तो मेवात क्षेत्र साइबर क्राइम का बड़ा केंद्र बन गया है। मेवात में ऐसे इलाके हैं, जहां पुलिस का जाना भी मुश्किल होता है। जयपुर में भी ऐसे कई क्षेत्र विकसित हो गए हैं जहां आबादी तेजी से बढ़ी है। जयपुर के ऐसे इलाकों में भी पुलिस को पर्याप्त सुरक्षा के साथ जाना पड़ता है। अजमेर में भी घुसपैठियों ने अपनी मजबूत जमीन तैयार कर ली है। यही वजह है कि कई अवसरों पर कुख्यात अपराधी अजमेर से गिरफ्तार हुए हैं। नावलेकर कमेटी के सामने सबसे बड़ी चिंता यह है कि घुसपैठियों ने भारत में जरूरी दस्तावेज बनवा लिए है। ऐसे दस्तावेज सबसे ज्यादा पश्चिम बंगाल के है। यानी पश्चिम बंगाल का निवासी होने वाले पहचान पत्र लेकर घुसपैठिए अजमेर तक में बसे हुए है। पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन होने के बाद ऐसे पहचान पत्रों की विस्तृत जांच पड़ताल हो रही है। जानकारी के मुताबिक नावलेकर कमेटी जब आएगी, तब प्रशासन की ओर से व्यापक प्रचार प्रसार किया जाएगा। ताकि जागरूक लोग भी कमेटी के समक्ष उपस्थित होकर जानकारी दे सकते हैं। S.P.MITTAL BLOGGER ( 29-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

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